Drop Us An Email Any Enquiry Drop Us An Emailshailesh.lekhwar2000@gmail.com
Call Us For Consultation Call Us For Consultation +91 9818666272

डिग्री से ज्यादा जरूरी बनती जा रही स्किल, शिक्षा व्यवस्था और रोजगार पर छिड़ी नई बहस

Category Archives: शिक्षा

डिग्री से ज्यादा जरूरी बनती जा रही स्किल, शिक्षा व्यवस्था और रोजगार पर छिड़ी नई बहस

भारत में उच्च शिक्षा और रोजगार के बीच बढ़ती दूरी को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। देश के प्रमुख वित्तीय विश्लेषकों और आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कॉलेज की डिग्री अब सफल करियर की गारंटी नहीं रही। बदलते तकनीकी दौर में कंपनियां प्रमाणपत्र से ज्यादा व्यावहारिक कौशल, नवाचार और समस्या समाधान की क्षमता को प्राथमिकता दे रही हैं।

मार्सेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के संस्थापक एवं मुख्य निवेश अधिकारी (CIO) सौरभ मुखर्जी ने एक पॉडकास्ट में कहा कि भारत में 12वीं के बाद पढ़ाई छोड़कर कौशल आधारित कार्य करने वाले कई युवा आर्थिक रूप से उन छात्रों से बेहतर स्थिति में हैं, जो वर्षों तक कॉलेज की पढ़ाई करने के बाद भी रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनका दावा है कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था युवाओं को उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप तैयार नहीं कर पा रही है।

उन्होंने रोजगार से जुड़े आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि कॉलेज से निकलने वाले अधिकांश युवाओं को तुरंत रोजगार नहीं मिल पाता, जबकि कुशल तकनीकी कार्यों से जुड़े लोगों की मांग लगातार बढ़ रही है। निर्माण, मशीन संचालन, इलेक्ट्रिकल, प्लंबिंग और अन्य ट्रेड आधारित क्षेत्रों में प्रशिक्षित लोग कई बार सामान्य स्नातकों की तुलना में अधिक आय अर्जित कर रहे हैं।

सौरभ मुखर्जी के अनुसार भारतीय शिक्षा प्रणाली आज भी रटने और परीक्षा आधारित मूल्यांकन पर अधिक निर्भर है। इसके विपरीत दुनिया तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), बायोटेक्नोलॉजी, क्लीन टेक और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों की ओर बढ़ रही है, जहां व्यावहारिक कौशल और नवाचार की क्षमता सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इसी मुद्दे पर भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने भी युवाओं से पारंपरिक करियर सोच से बाहर निकलने की अपील की है। उनका कहना है कि जर्मनी, स्विट्जरलैंड, जापान, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देशों में वेल्डिंग, प्लंबिंग, कारपेंट्री और इलेक्ट्रिकल रिपेयर जैसे ट्रेड स्किल्स को सम्मानजनक और अच्छी आय वाले पेशे के रूप में देखा जाता है, जबकि भारत में अभी भी इन्हें अपेक्षित सम्मान नहीं मिल पाया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य का रोजगार बाजार केवल डिग्रीधारकों का नहीं, बल्कि उन लोगों का होगा जिनके पास तकनीकी दक्षता के साथ-साथ संवाद, सेवा, समस्या समाधान और रचनात्मक सोच जैसी मानवीय क्षमताएं भी हों। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव के बीच ऐसे कौशल अधिक महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं जिन्हें मशीनें आसानी से प्रतिस्थापित नहीं कर सकतीं।

इस बहस को वैश्विक स्तर पर भी समर्थन मिलता रहा है। एलन मस्क कई बार कह चुके हैं कि उनकी कंपनियों में भर्ती के लिए कॉलेज डिग्री अनिवार्य नहीं है, बल्कि उम्मीदवार की वास्तविक क्षमता और कौशल अधिक मायने रखते हैं। वहीं प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल भी युवाओं को वर्षों तक केवल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में समय लगाने के बजाय उद्यमिता और व्यावहारिक कौशल विकसित करने की सलाह दे चुके हैं।

हालांकि शिक्षा विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यह बहस “डिग्री बनाम स्किल” की नहीं, बल्कि “डिग्री के साथ स्किल” की है। उनका कहना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण, इंटर्नशिप और तकनीकी दक्षता ही भविष्य के रोजगार बाजार में सफलता की सबसे मजबूत कुंजी होगी।


BEML Recruitment 2026: ग्रुप एग्जीक्यूटिव पदों पर सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका, 10 जुलाई तक करें आवेदन

नई दिल्ली। सरकारी क्षेत्र की प्रतिष्ठित कंपनी भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) ने अनुभवी उम्मीदवारों के लिए ग्रुप एग्जीक्यूटिव पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। यह भर्ती उन अभ्यर्थियों के लिए बेहतरीन अवसर है जो सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख कंपनी में करियर बनाना चाहते हैं। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 10 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से पूरी की जाएगी।

किन पदों पर होगी भर्ती

इस भर्ती अभियान के तहत कंपनी विभिन्न विभागों में ग्रुप एग्जीक्यूटिव पदों को भरेगी। चयनित उम्मीदवारों को उनकी योग्यता, अनुभव और विभागीय आवश्यकता के अनुसार नियुक्ति दी जाएगी। इन पदों पर नियुक्त अभ्यर्थी कंपनी की उत्पादन, इंजीनियरिंग, परियोजना प्रबंधन, गुणवत्ता नियंत्रण, मार्केटिंग और अन्य तकनीकी इकाइयों में अपनी सेवाएं देंगे।

कौन कर सकता है आवेदन

आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास संबंधित विषय में BE/B.Tech, MBA, CA, ICWA या अन्य निर्धारित शैक्षणिक योग्यता होनी चाहिए। इसके साथ ही संबंधित क्षेत्र में कार्य अनुभव भी आवश्यक है। अलग-अलग पदों के लिए योग्यता और अनुभव की शर्तें भिन्न हो सकती हैं, इसलिए उम्मीदवारों को आवेदन करने से पहले आधिकारिक भर्ती विज्ञापन ध्यान से पढ़ने की सलाह दी गई है।

आयु सीमा

भर्ती के लिए अधिकतम आयु सीमा पद के अनुसार निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट का लाभ मिलेगा।

चयन प्रक्रिया

उम्मीदवारों का चयन शॉर्टलिस्टिंग के बाद इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा। यदि आवश्यक हुआ तो कंपनी लिखित परीक्षा, ग्रुप डिस्कशन या अन्य चयन प्रक्रिया भी आयोजित कर सकती है। अंतिम चयन मेरिट और दस्तावेज सत्यापन के बाद किया जाएगा।

वेतन और सुविधाएं

चयनित उम्मीदवारों को आकर्षक वेतनमान के साथ कई अन्य सुविधाएं भी मिलेंगी। इसमें महंगाई भत्ता (DA), चिकित्सा सुविधा, भविष्य निधि (PF), ग्रेच्युटी, अवकाश, बीमा और अन्य कॉर्पोरेट लाभ शामिल हो सकते हैं। वेतन पद और अनुभव के अनुसार निर्धारित किया जाएगा।

आवेदन कैसे करें

आवेदन करने के लिए उम्मीदवार सबसे पहले BEML की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। इसके बाद Careers सेक्शन में जाकर Group Executive Recruitment 2026 लिंक खोलें। आवश्यक जानकारी भरें, मांगे गए दस्तावेज अपलोड करें और आवेदन पत्र सबमिट कर दें। आवेदन जमा करने के बाद उसका प्रिंटआउट भविष्य के लिए सुरक्षित रखें।

आवेदन से पहले रखें इन बातों का ध्यान

उम्मीदवार आवेदन पत्र भरते समय सभी जानकारी सही दर्ज करें। गलत जानकारी मिलने पर आवेदन निरस्त किया जा सकता है। साथ ही अंतिम तिथि का इंतजार करने के बजाय समय रहते आवेदन पूरा करना बेहतर रहेगा ताकि तकनीकी समस्याओं से बचा जा सके।

BEML देश की अग्रणी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में शामिल है और रक्षा, रेलवे, मेट्रो, खनन तथा भारी इंजीनियरिंग उपकरणों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में यहां नौकरी पाने वाले उम्मीदवारों को न केवल बेहतर वेतन और सुविधाएं मिलती हैं, बल्कि लंबी अवधि के करियर विकास के अवसर भी प्राप्त होते हैं। सरकारी क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले योग्य अभ्यर्थियों के लिए यह भर्ती एक सुनहरा अवसर साबित हो सकती है।


ILS Scientist Recruitment 2026: साइंटिस्ट-B, C और D पदों पर भर्ती, ₹1.77 लाख तक मिलेगी सैलरी

सरकारी शोध संस्थान में करियर बनाने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए अच्छी खबर है। BRIC–इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज (ILS), भुवनेश्वर ने साइंटिस्ट-बी, साइंटिस्ट-सी और साइंटिस्ट-डी के पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस भर्ती अभियान के तहत कुल 5 पदों को भरा जाएगा।

अधिसूचना के अनुसार, इन पदों के लिए संबंधित विषय में आवश्यक शैक्षणिक योग्यता और शोध अनुभव रखने वाले उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। चयन प्रक्रिया में आवेदन की स्क्रीनिंग के बाद योग्य अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा।

वेतन की बात करें तो साइंटिस्ट-बी पद के लिए सातवें वेतन आयोग के अनुसार ₹56,100 से ₹1,77,500 तक का वेतन निर्धारित है। वहीं साइंटिस्ट-सी और साइंटिस्ट-डी पदों के लिए इससे अधिक वेतनमान उपलब्ध होगा। इच्छुक उम्मीदवार निर्धारित अंतिम तिथि तक संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।


RRB Group D Exam 2025: रेलवे ग्रुप-डी CBT 3 अगस्त से, जानें एडमिट कार्ड और एग्जाम सिटी की पूरी डिटेल

रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने सीईएन 09/2025 के तहत ग्रुप-डी (लेवल-1) भर्ती परीक्षा की संभावित तिथियों का ऐलान कर दिया है। बोर्ड के अनुसार, कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) 3 अगस्त 2026 से 21 अगस्त 2026 तक देशभर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की जाएगी। इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए रेलवे के लेवल-1 (7th CPC Pay Matrix) के विभिन्न पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी।

आरआरबी ने परीक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी भी साझा की है। परीक्षा शहर (Exam City Intimation Slip) और एससी/एसटी अभ्यर्थियों के लिए ट्रैवल अथॉरिटी डाउनलोड लिंक परीक्षा शुरू होने से करीब 10 दिन पहले सभी आधिकारिक RRB वेबसाइटों पर उपलब्ध करा दिया जाएगा। वहीं, उम्मीदवार अपना ई-कॉल लेटर (Admit Card) परीक्षा की निर्धारित तिथि से 4 दिन पहले डाउनलोड कर सकेंगे।

बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि परीक्षा केंद्र पर सभी अभ्यर्थियों का आधार लिंक्ड बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा। उम्मीदवारों को मूल आधार कार्ड या ई-वेरिफाइड आधार की प्रिंट कॉपी साथ लानी होगी। साथ ही, परीक्षा से पहले अपने आधार को UIDAI पोर्टल पर ‘Unlocked’ स्थिति में रखने की सलाह दी गई है, ताकि सत्यापन के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो।

आरआरबी ने उम्मीदवारों से केवल आधिकारिक वेबसाइटों पर जारी सूचनाओं पर भरोसा करने और परीक्षा संबंधी सभी अपडेट नियमित रूप से चेक करते रहने की अपील की है।


JPSC PCS प्रीलिम्स रिजल्ट जारी, मेंस रजिस्ट्रेशन शुरू; 9 जुलाई तक करें आवेदन

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने संयुक्त सिविल सेवा (PCS) प्रारंभिक परीक्षा 2026 का परिणाम घोषित कर दिया है। प्रीलिम्स परीक्षा में सफल अभ्यर्थी अब मुख्य परीक्षा (Mains) के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। मेंस परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया 3 जुलाई से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार 9 जुलाई 2026 तक आवेदन कर सकते हैं।

आयोग के अनुसार, मुख्य लिखित परीक्षा 18, 19 और 20 जुलाई 2026 को आयोजित की जाएगी। परीक्षा दो पालियों में होगी। अभ्यर्थियों को आवेदन करते समय सभी आवश्यक दस्तावेज निर्धारित प्रारूप में अपलोड करने होंगे। निर्धारित समय सीमा के बाद किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा।

JPSC ने सफल उम्मीदवारों से सलाह दी है कि वे आधिकारिक वेबसाइट  jpsc.gov.in पर उपलब्ध दिशा-निर्देशों को ध्यानपूर्वक पढ़कर ही आवेदन प्रक्रिया पूरी करें। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल प्रीलिम्स में सफल अभ्यर्थी ही मुख्य परीक्षा में शामिल होने के पात्र होंगे।

उम्मीदवार अपना रिजल्ट और मेरिट लिस्ट JPSC की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर देख सकते हैं। आयोग ने सभी अभ्यर्थियों से समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी करने की अपील की है ताकि अंतिम समय में किसी तकनीकी समस्या का सामना न करना पड़े।


12वीं के बाद कौन से डिप्लोमा कोर्स बनाएंगे आपके करियर की राह सुगम

अगर आपने 12वीं की पढाई पूरी कर ली है और अब समझ नहीं आ रहे कि आगे क्या करना है, तो परेशान होने की ज़रूरत नहीं है। इस मोड़ पर आपके पास कई विकल्प मौजूद हैं। सबसे पहले ज़रूरी है कि आप खुद को समझें,आपकी रुचि किस क्षेत्र में है और आपकी ताक़तें कहाँ हैं। अगर आप किसी नए क्षेत्र में कदम रखना चाहते हैं या जल्दी स्किल हासिल करना चाहते हैं, तो डिप्लोमा कोर्सेज आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकते हैं।

डिप्लोमा क्यों है फायदेमंद

डिप्लोमा कोर्स आमतौर पर 6 महीने से 1 साल तक के होते हैं। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह आपको किसी भी फील्ड की बेसिक नॉलेज और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग देता है। अगर आप आगे ग्रेजुएशन या पोस्ट-ग्रेजुएशन करना चाहें, तो यह आपके लिए मजबूत नींव का काम करेगा। या फिर आप तुरंत नौकरी या प्रोफेशनल करियर शुरू करना चाहें, तो यह आपके लिए तैयार स्किल-पैकेज साबित होगा।

कौन कौन से डिप्लोमा कोर्स 12वीं के बाद आपकी स्किल्स बढ़ा सकते हैं 

  1. डिप्लोमा इन होटल मैनेजमेंट
  2. डिप्लोमा इन इंटीरियर डिजाइनिंग
  3. डिप्लोमा इन आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस
  4. डिप्लोमा इन ग्राफ़िक डिजाईन
  5. डिप्लोमा इन वेब डिजाईन एंड डेवलपमेंट
  6. डिप्लोमा इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन
  7. डिप्लोमा इन फैशन डिजाईन
  8. डिप्लोमा इन डिजिटल मार्केटिंग

डिप्लोमा कोर्स करने के कई फायदे होते हैं , वो आप पर निर्भर करता कि आपका चुनाव आपको कहा ले जाता हैंइसके साथ ही,  आपके पास कई और डिप्लोमा कोर्सेज के विकल्प मौजूद हैं जिनमे योगा और नेचुरोपैथी, साइबर सिक्यूरिटी, इवेंट मैनेजमेंट, डेटा साइंस, फार्मेसी, हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट जैसे कई विकल्प हैं। 


भारत डार्क कॉमेडी को समझने के लिए तैयार है?

समीक्षा सिंह

हाल ही में “India’s Got Latent” के एक एपिसोड ने एक छोटी सी टिप्पणी की वजह से देश में विवाद की चिंगारी फैला दी। यूट्यूबर रणवीर अलाहबादिया और अपूर्वा ने एक प्रतियोगी से माज़ाकिया अंदाज़ में सवाल किया। इस सहज मज़ाक ने जैसे ही वायरल होना शुरू किया, सोशल मीडिया और मीडिया में बवाल खड़ा हो गया, FIR दर्ज हुई, महाराष्ट्र सरकार ने जांच बुलाई, और हर जगह से आपत्ति की आवाज़ें उठने लगीं
जिस पर असर हुआ ये कि मंच के दूसरे होस्ट समय रैना ने शो के सारे एपिसोड यूट्यूब से हटा दिए । रणवीर को इतना दबाव महसूस हुआ कि उन्होंने सोशल मीडिया पर सार्वजनिक माफी माँगी, कहना पड़ा कि वाकई में ये मज़ाक सही नहीं था । इसके साथ ही उन्हें FIRs, पुलिस पूछताछ, यहाँ तक कि घटना की संवेदनशीलता को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक का ध्यान आकर्षित हो गया
कभी एक जोक , कभी एक मीम या कभी किसी फिल्म की एक लाइन ही इतना बड़ा मुद्दा बन जाती कि लोग गुस्से में आ जाते है । फर्क नहीं पड़ता की आपका मकसद हँसाना था या किसी बात की तरफ ध्यान दिलाना । बस किसी को बुरा लग जाता है और वही बात खत्म.
डार्क कॉमेडी का काम ही होता है उन बातों पर हँसना, जिनसे हम डरते हैं — मौत, सेक्स, अपंगता, राजनीति, मानसिक बीमारी, धर्म, समाज की सच्चाई। लेकिन भारत में इन बातों पर ना बात होती है, ना मज़ाक। यही सबसे बड़ी दिक्कत है।
क्योंकि ज़्यादातर भारतीयों के लिए ह्यूमर बस हँसी नहीं है, वो एक भावना है। यहाँ जोक को मनोरंजन की तरह नहीं, बल्कि अपने ऊपर लिया जाता है। अगर आप किसी चीज़ का मज़ाक उड़ाते हैं, तो लोग मान लेते हैं कि आप उसका अपमान कर रहे हैं। अगर आप किसी दुखद चीज़ पर हँसते हैं, तो लोग समझते हैं कि आप पत्थरदिल हैं। इस माहौल में डार्क कॉमेडी को आर्ट नहीं, हमला समझा जाता है।
हमारी संस्कृति और परवरिश हमें सिखाती है कि शराफत से रहो, बड़ों की इज़्ज़त करो, सिस्टम से सवाल मत करो। हम पहले तमीज़ सीखते हैं, सोच बाद में। इसी वजह से हम उन बातों से दूर भागते हैं जो हमें असहज लगती हैं। और जहाँ सच बोलना ही गलत लगने लगे, वहाँ मज़ाक करना तो और भी मुश्किल हो जाता है।
भारत में सेक्स, मानसिक स्वास्थ्य, विकलांगता, जाति और राजनीति जैसे मुद्दों पर लोग खुलकर बात नहीं करते। बच्चे सवाल न करें, बस सुनें और मानें — यही सिखाया जाता है। ऐसे में जब कोई कॉमेडियन या कलाकार इन बातों को छूता है, और वो भी मज़ाक में, तो लोग उसे समझने की बजाय गुस्सा करने लगते हैं।


देहरादून,को भारत की शिक्षा राजधानी क्यों माना जाता है?

प्रियांश कुकरेजा 

जब भी भारत में पढ़ाई के लिए सबसे अच्छी जगह की बात होती है, तो देहरादून का नाम सबसे पहले लिया जाता है। देहरादून को भारत की शिक्षा राजधानी कहा जाता है क्योंकि यहां बहुत पुराने, भरोसेमंद और शानदार स्कूल और कॉलेज हैं, जहां से पढ़कर कई बड़े और मशहूर लोग निकले हैं। देहरादून शहर पहाड़ियों के बीच बसा है, यहां का मौसम बोहत सुंदर होता है और देहरादून का हालात  पढ़ाई के लिए बहुत अच्छा है। दून स्कूल, वेल्हम गर्ल्स और बॉयज़ स्कूल, मसूरी इंटरनेशनल स्कूल और ओक ग्रोव स्कूल जैसे नामी स्कूलों में राहुल गांधी, राजीव गांधी, करण थापर और विक्रम सेठ जैसे जाने माने लोग पढ़ चुके हैं। यहां फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (FRI), इंडियन मिलिट्री अकैडमी (IMA), यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज़ (UPES), ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी, (DIT) डीआईटी यूनिवर्सिटी और (IMS) यूनिसन जैसे संस्था भी हैं, जहां देश और विदेश से छात्र पढ़ने आते हैं। देहरादून एक साफ-सुथरा, शांत और सुरक्षित शहर है, जहां लाइब्रेरी, कोचिंग सेंटर, हॉस्टल और पढ़ाई के लिए हर ज़रूरी सुविधा मिलती है। मेरी नजर में देहरादून सिर्फ एक शहर नहीं है, बल्कि ऐसी जगह है जहां पढ़ाई को बहुत अहमियत दी जाती है। यहां का हालात छात्रों को मेहनत करने, नियम का पालन करने और खुद पर भरोसा रखने की सीख देता है। अगर कोई शांति और अच्छे हालात में पढ़ाई करके अपना भविष्य बनाना चाहता है, तो देहरादून उसके लिए एक बहुत अच्छा जगह है।


बच्चा तो हमारी बात सुनता ही नहीं है”

जानिए बच्चे कैसे सोचते हैं, क्या सीखते हैं, और पैरेंट्स के लिए कौन-सी बातें ज़रूरी हैं समझना

समीक्षा सिंह 

अक्सर मम्मी-पापा को लगता है कि “बच्चा तो हमारी बात सुनता ही नहीं है”, या “हम जो कहते हैं, उसका उस पर कोई असर नहीं होता”। लेकिन ये बात समझना ज़रूरी है कि बच्चों की नींव शुरू के सालों में ही बनती है। अगर शुरुआती सालों में सही परवरिश की जाए — मतलब प्यार, समझ, सही दिशा और एक अच्छा माहौल मिले — तो बच्चा धीरे-धीरे अपने आप समझदार बनता है और पेरेंट्स की बातों को अहमियत देता है। लेकिन अगर शुरू से ही सिर्फ डांट-फटकार, या इग्नोर करना हो, तो बच्चा या तो विद्रोही हो जाता है या बिलकुल ही चुप और डरपोक। खासतौर पर पापा का बच्चे के साथ रिश्ता बहुत मायने रखता है — अगर पिता प्यार से पेश आएं, तो बच्चा खुद को सुरक्षित और समझा हुआ महसूस करता है।
बेटा और बेटी को अलग नज़र से देखना या उनके साथ अलग व्यवहार करना भी उनके दिमाग और सोच पर असर डालता है। दोनों को बराबरी का मौका और प्यार मिलना चाहिए।
इसलिए ये ज़रूरी है कि पैरेंट्स बच्चे को शुरुआत से ही सुने, उसकी बातें समझें, और उसको यह महसूस कराएं कि वो मायने रखता है। ऐसा करने से बच्चा पेरेंट्स की बात भी सुनता है और अपने मन की भी खुलकर कहता है।
आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में पैरेंटिंग का तरीका बहुत बदल गया है। माता-पिता इतने बिज़ी हो गए हैं कि उनके पास बच्चों के लिए समय ही नहीं होता। कई बार पेरेंट्स बच्चों पर ज़्यादा कंट्रोल करने की कोशिश करते हैं (जिसे हम सख्त पैरेंटिंग कहते हैं), जबकि ज़रूरत इस बात की है कि बच्चों को प्यार, समझ और थोड़ी आज़ादी भी मिले — ताकि वो खुलकर सोच सकें और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें।
बच्चों की रोज़ की रूटीन भी उनके मानसिक विकास के लिए ज़रूरी है। सही समय पर सोना, खेलना, पढ़ाई करना, और थोड़ी क्रिएटिव एक्टिविटीज़ करना बहुत फायदेमंद होता है। आजकल बच्चे मोबाइल, रील्स और वीडियो गेम्स में ज़्यादा उलझे हुए हैं, जिससे उनका ध्यान बंटता है और वो चिड़चिड़े हो जाते हैं। इसलिए स्क्रीन टाइम कम होना चाहिए।
खाने-पीने की आदतें भी बच्चों के मन और मूड को बहुत प्रभावित करती हैं। हर दिन चिप्स, कोल्ड ड्रिंक या जंक फूड खाने से बच्चे थके-थके और चिड़चिड़े महसूस करते हैं। अगर शुरुआत से ही घर में हेल्दी खाने की आदत डाल दी जाए — जैसे फल, हरी सब्ज़ियाँ, दूध वगैरह — तो बच्चे भी उसे अपनाते हैं।
और सबसे जरूरी बात — बच्चों से ऐसी बातें नहीं कहनी चाहिए जिससे उन्हें लगे कि वो अच्छे नहीं हैं। जैसे “तुम कुछ नहीं कर सकते”, “देखो फलाने का बच्चा कितना अच्छा है” वगैरह। इससे उनके मन में हीन भावना आ सकती है। हर बच्चे की सोच और समझ अलग होती है, बस हमें उन्हें समझने और उनका साथ देने की ज़रूरत है।


  प्रतिष्ठा, परंपरा, और प्रथा — क्या ये सब डिजिटल दुनिया में खो गए हैं?

प्रतिष्ठा, परंपरा और प्रथा… ये शब्द अब सिर्फ़ पुरानी फिल्मों के डायलॉग बनकर रह गए हैं।

समीक्षा सिंह

आज का युवा तेज़ी से बदलती दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहा है, लेकिन इसी दौड़ में कहीं न कहीं हमारी भारतीय संस्कृति और सभ्यता पीछे छूटती जा रही है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि हमारी यह सांस्कृतिक गिरावट किस वजह से हो रही है — क्या यह पश्चिमी प्रभाव है या फिर डिजिटल दुनिया की गिरफ्त?

डिजिटलीकरण ने हमारे जीवन को आसान ज़रूर बना दिया है, लेकिन इसके साथ ही यह हमारे पारिवारिक और सांस्कृतिक मूल्यों को चुपचाप निगलता जा रहा है। पहले बच्चों को बाहर खेलने मे मज़ा आता था , अब वे मोबाइल और टैबलेट में व्यस्त हैं।

त्यौहार अब घर की रौनक का कारण नहीं, इंस्टाग्राम स्टोरी का हिस्सा बनकर रह गए हैं। तकनीक ने संवाद को सहज बनाया है, लेकिन संबंधों को कमज़ोर।

साथ ही, पश्चिमी सभ्यता का बढ़ता प्रभाव भी हमारे युवाओं की सोच और जीवनशैली को बदल रहा है। अब अंग्रेज़ी भाषा में बात करना आज के दुनिया की पहचान बन चुका है और भारतीय परिधान, रीति-रिवाज या पारंपरिक सोच को बैकवर्ड’ समझा जाने लगा है।

असल में, न तो तकनीक गलत है, न ही विदेशी संस्कृति। दोष उस सोच का है जो हमें अपनी पहचान से कटने पर मजबूर कर रही है। युवाओं को यह सिखाना ज़रूरी है कि नयी सोच का मतलब अपनी जड़ों को भूलना नहीं होता। तकनीक का इस्तेमाल ज़रूर करें, लेकिन उस तकनीक से अपने संस्कारों को मिटने न दें।

आज ज़रूरत है कि हम अपने परिवार में बच्चों को भारतीय भाषाओं, लोक कथाओं और रीति-रिवाज़ों से परिचित कराएं। दुनिया से सीखना अच्छी बात है, लेकिन अपनी पहचान खोकर नहीं। हमारी संस्कृति की ताकत इसकी विविधता, गहराई और सहनशीलता में है। उसे मिटने न दें… उसे अपनाएं, उसे जिएं और अगली पीढ़ी को सिखाएं।


Latest News in hindi

Call Us On  Whatsapp