Drop Us An Email Any Enquiry Drop Us An Emailshailesh.lekhwar2000@gmail.com
Call Us For Consultation Call Us For Consultation +91 9818666272

भारत डार्क कॉमेडी को समझने के लिए तैयार है?

भारत डार्क कॉमेडी को समझने के लिए तैयार है?

भारत डार्क कॉमेडी को समझने के लिए तैयार है?

समीक्षा सिंह

हाल ही में “India’s Got Latent” के एक एपिसोड ने एक छोटी सी टिप्पणी की वजह से देश में विवाद की चिंगारी फैला दी। यूट्यूबर रणवीर अलाहबादिया और अपूर्वा ने एक प्रतियोगी से माज़ाकिया अंदाज़ में सवाल किया। इस सहज मज़ाक ने जैसे ही वायरल होना शुरू किया, सोशल मीडिया और मीडिया में बवाल खड़ा हो गया, FIR दर्ज हुई, महाराष्ट्र सरकार ने जांच बुलाई, और हर जगह से आपत्ति की आवाज़ें उठने लगीं
जिस पर असर हुआ ये कि मंच के दूसरे होस्ट समय रैना ने शो के सारे एपिसोड यूट्यूब से हटा दिए । रणवीर को इतना दबाव महसूस हुआ कि उन्होंने सोशल मीडिया पर सार्वजनिक माफी माँगी, कहना पड़ा कि वाकई में ये मज़ाक सही नहीं था । इसके साथ ही उन्हें FIRs, पुलिस पूछताछ, यहाँ तक कि घटना की संवेदनशीलता को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक का ध्यान आकर्षित हो गया
कभी एक जोक , कभी एक मीम या कभी किसी फिल्म की एक लाइन ही इतना बड़ा मुद्दा बन जाती कि लोग गुस्से में आ जाते है । फर्क नहीं पड़ता की आपका मकसद हँसाना था या किसी बात की तरफ ध्यान दिलाना । बस किसी को बुरा लग जाता है और वही बात खत्म.
डार्क कॉमेडी का काम ही होता है उन बातों पर हँसना, जिनसे हम डरते हैं — मौत, सेक्स, अपंगता, राजनीति, मानसिक बीमारी, धर्म, समाज की सच्चाई। लेकिन भारत में इन बातों पर ना बात होती है, ना मज़ाक। यही सबसे बड़ी दिक्कत है।
क्योंकि ज़्यादातर भारतीयों के लिए ह्यूमर बस हँसी नहीं है, वो एक भावना है। यहाँ जोक को मनोरंजन की तरह नहीं, बल्कि अपने ऊपर लिया जाता है। अगर आप किसी चीज़ का मज़ाक उड़ाते हैं, तो लोग मान लेते हैं कि आप उसका अपमान कर रहे हैं। अगर आप किसी दुखद चीज़ पर हँसते हैं, तो लोग समझते हैं कि आप पत्थरदिल हैं। इस माहौल में डार्क कॉमेडी को आर्ट नहीं, हमला समझा जाता है।
हमारी संस्कृति और परवरिश हमें सिखाती है कि शराफत से रहो, बड़ों की इज़्ज़त करो, सिस्टम से सवाल मत करो। हम पहले तमीज़ सीखते हैं, सोच बाद में। इसी वजह से हम उन बातों से दूर भागते हैं जो हमें असहज लगती हैं। और जहाँ सच बोलना ही गलत लगने लगे, वहाँ मज़ाक करना तो और भी मुश्किल हो जाता है।
भारत में सेक्स, मानसिक स्वास्थ्य, विकलांगता, जाति और राजनीति जैसे मुद्दों पर लोग खुलकर बात नहीं करते। बच्चे सवाल न करें, बस सुनें और मानें — यही सिखाया जाता है। ऐसे में जब कोई कॉमेडियन या कलाकार इन बातों को छूता है, और वो भी मज़ाक में, तो लोग उसे समझने की बजाय गुस्सा करने लगते हैं।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest News in hindi

Call Us On  Whatsapp