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देहरादून स्मार्ट सिटी मिशन: विकास की ओर एक स्मार्ट कदम

देहरादून स्मार्ट सिटी मिशन: विकास की ओर एक स्मार्ट कदम

देहरादून स्मार्ट सिटी मिशन: विकास की ओर एक स्मार्ट कदम

तकनीक, सुविधाएं और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाकर राजधानी को बनाया जा रहा है आधुनिक — लेकिन चुनौतियाँ भी कम नहीं

प्रियांश कुकरेजा 

देहरादून स्मार्ट सिटी मिशन, जो भारत सरकार की स्मार्ट सिटी योजना के तहत 2017 में शुरू हुआ, उत्तराखंड की राजधानी को एक आधुनिक, पर्यावरण-संवेदनशील और तकनीकी रूप से सशक्त शहर बनाने का उद्देश्य रखता है। इस परियोजना के तहत 39 में से 18 परियोजनाएँ ₹503 करोड़ की लागत से पूरी हो चुकी हैं, जबकि 39 अन्य परियोजनाएँ ₹1,537 करोड़ के बजट के साथ कार्यान्वयन के चरण में हैं। इनमें प्रमुख कार्यों में स्मार्ट स्कूल, मल्टी-यूटिलिटी डक्ट (जिससे बिजली, पानी और इंटरनेट जैसी सुविधाएँ एक ही जगह से मिलेंगी), स्मार्ट शौचालय, सौर ऊर्जा समाधान और वर्षा जल संचयन शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 24 जल एटीएम लगाए गए हैं ताकि लोगों को साफ पीने का पानी आसानी से मिल सके। शहर में “सदैव दून” नाम से एक आधुनिक कमांड सेंटर भी शुरू किया गया है, जहाँ से 500 से ज़्यादा सीसीटीवी कैमरों के ज़रिए पूरे शहर की निगरानी की जा रही है। इसके ज़रिए ट्रैफिक, सुरक्षा, सफाई और आपातकालीन सेवाओं पर तुरंत कार्रवाई हो सकती है।

सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाने के लिए इलेक्ट्रिक बसें चलाई जा रही हैं और स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल लगाए गए हैं जिससे ट्रैफिक जाम कम हो सके। स्मार्ट पार्किंग सिस्टम से लोग मोबाइल ऐप के ज़रिए पार्किंग की स्थिति देख सकते हैं। शहर के कुछ पुराने इलाकों जैसे पलटन बाजार और परेड ग्राउंड का सौंदर्यीकरण भी इस योजना का हिस्सा है ताकि वहां आने-जाने वालों को बेहतर सुविधाएँ मिल सकें।

हालांकि, परियोजना की प्रगति में कुछ चुनौतियाँ भी सामने आई हैं। जैसे कि, निर्माण कार्यों के लिए लगभग 19,000 पेड़ काटे गए हैं जिससे पर्यावरण पर असर पड़ा है। इसके अलावा, कुछ काम तय समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं और लोग यह भी कह रहे हैं कि उन्हें परियोजनाओं के बारे में पहले से जानकारी नहीं दी गई और उनकी राय नहीं ली गई।

देहरादून स्मार्ट सिटी मिशन एक बहुत ही अच्छा और ज़रूरी कदम है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि इसे किस तरह से लागू किया जाता है। अगर प्रशासन पारदर्शिता बनाए रखे, नागरिकों को शामिल करे और पर्यावरण का संतुलन बनाए रखे, तो यह शहर को केवल ‘स्मार्ट’ ही नहीं बल्कि अधिक सुरक्षित, स्वच्छ, और रहने लायक भी बना देगा। नई तकनीकों और सुविधाओं का आना निश्चित रूप से शहर के भविष्य को बेहतर बनाएगा, लेकिन यह तभी फायदेमंद होगा जब यह सबका ध्यान रखते हुए किया जाए।


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