Saturday, September 12th, 2026

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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कांग्रेस के सभी पदों से दिया इस्तीफा

Category Archives: राजनीति

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कांग्रेस के सभी पदों से दिया इस्तीफा

हरीश रावत बोले- मेरे कारण कमजोर न हो पार्टी की लड़ाई

देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में उस समय हलचल बढ़ गई, जब वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने का ऐलान किया। प्रवर्तन निदेशालय की ओर से उनके पूर्व ओएसडी चंदन सिंह जीना से जुड़े परिसरों में छापेमारी और बड़ी मात्रा में नकदी व आभूषण बरामद होने की खबरों के बीच रावत ने यह फैसला लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह नहीं चाहते कि उनके किसी भी निर्णय या गतिविधि का असर कांग्रेस के भ्रष्टाचार विरोधी संघर्ष पर पड़े।

हरीश रावत ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट के माध्यम से अपने निर्णय की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वह उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस समिति के कार्यकारी सदस्य और कांग्रेस कार्य समिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य के तौर पर जिम्मेदारी निभा रहे थे। अब उन्होंने इन दोनों पदों से हटने की इच्छा जताई है।

रावत ने कहा कि वह फिलहाल कोई सरकारी पद नहीं संभाल रहे हैं, इसलिए सरकारी पद से इस्तीफे का सवाल नहीं उठता। उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में वह ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहते, जिससे पार्टी के संघर्ष को नुकसान पहुंचे।

ओएसडी के खिलाफ कार्रवाई पर रावत का बयान

ईडी की कार्रवाई 2016 में उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े धनशोधन मामले की जांच के सिलसिले में बताई जा रही है। रावत ने अपने पूर्व ओएसडी चंदन सिंह जीना के खिलाफ लगे किसी भी गलत काम के आरोप से इनकार किया है।

उन्होंने कहा कि जीना उनके ओएसडी रह चुके हैं और पार्टी तथा सरकार में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। रावत ने उन्हें विनम्र और मेहनती व्यक्ति बताते हुए कहा कि केवल किसी व्यक्ति से जुड़े होने के आधार पर उसके खिलाफ आरोपों को सही नहीं माना जा सकता।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि ग्राम सेवकों की भर्ती में ओएमआर शीट से छेड़छाड़ जैसी कोई अनियमितता सामने आती है, तो उन्हें इस पर शर्मिंदगी होगी। हालांकि, उन्होंने कहा कि फिलहाल वह इस आरोप पर विश्वास नहीं करते।

भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी रखी अपनी बात

हरीश रावत ने उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के गठन और भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि आयोग का गठन राज्य के युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखकर किया गया था। उनके कार्यकाल में शीर्ष पदों पर भर्तियां कराने के साथ ही चिकित्सा और शिक्षा क्षेत्र में भर्ती के लिए अलग-अलग बोर्ड बनाए गए थे।

उन्होंने कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया में उनकी ओर से कोई गलती हुई है और उससे उत्तराखंड के युवाओं के भविष्य पर प्रतिकूल असर पड़ा है, तो वह इसके लिए प्रदेश की जनता से माफी मांगने को तैयार हैं।

रावत ने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के तीन साल के कार्यकाल में 42 हजार से अधिक सरकारी पदों पर नियुक्तियां की गई थीं। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना था।

यूकेएसएसएससी अध्यक्ष की नियुक्ति का किया बचाव

पूर्व मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि नियुक्ति संबंधित व्यक्ति के पूर्व सेवा रिकॉर्ड और समाज के एक वर्ग को प्रतिनिधित्व देने की सोच के आधार पर की गई थी।

रावत ने बताया कि इस नियुक्ति को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी (सेवानिवृत्त) से भी उन्हें सलाह मिली थी। उन्होंने कहा कि खंडूरी हमेशा भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते रहे हैं।

रावत ने कहा कि किसी पद पर नियुक्त व्यक्ति भविष्य में गलत काम करेगा या नहीं, इसका अनुमान पहले से नहीं लगाया जा सकता। उन्होंने कहा कि भर्ती और परीक्षाओं में किसी भी तरह की अनियमितता राज्य की आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से खिलवाड़ के समान है।

सबूत मिलने पर जांच एजेंसियों को देने की अपील

हरीश रावत ने कहा कि यदि किसी के पास इस बात का कोई ठोस प्रमाण है कि भर्ती या नियुक्तियों में उन्होंने किसी तरह का हस्तक्षेप किया था, तो वह प्रमाण केंद्रीय जांच ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय या राज्य पुलिस को सौंपा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि जानबूझकर या अनजाने में उनकी किसी गलती से उत्तराखंड के युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचा है, तो वह इसकी जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हैं। रावत ने दोहराया कि यदि उनसे कोई चूक हुई है तो कानून के अनुसार उन्हें दंडित किया जाना चाहिए।

पूर्व मुख्यमंत्री ने मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को चुनावी माहौल से भी जोड़ते हुए भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि जब चुनाव नजदीक आते हैं तो जांच एजेंसियों की कार्रवाई के जरिए राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश की जाती है। रावत ने कहा कि कांग्रेस और उसके कार्यकर्ता भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे और वह नहीं चाहते कि उनके कारण इस संघर्ष की धार कमजोर हो।


नितिन नवीन के बयान पर गणेश गोदियाल का पलटवार, बोले- भाजपा को कांग्रेस को ज्ञान देने का अधिकार नहीं

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भाजपा पर ध्रुवीकरण की राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि उत्तराखंड की जनता अब विभाजन और नफरत की राजनीति के झांसे में नहीं आएगी

देहरादून। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने हल्द्वानी में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की ओर से राहुल गांधी को लेकर दिए गए बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने भाजपा पर धर्म, जाति और संप्रदाय के नाम पर समाज को बांटने की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस को विभाजन की राजनीति पर ज्ञान देने का भाजपा नेताओं को कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

गोदियाल ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में आकर इस तरह की बयानबाजी करना भाजपा नेताओं की संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी ने नफरत की राजनीति के खिलाफ देशभर में लंबी पदयात्राएं की हैं। कन्याकुमारी से कश्मीर और मणिपुर से मुंबई तक की यात्राओं के जरिए राहुल गांधी ने देश को जोड़ने और आपसी भाईचारा मजबूत करने का संदेश दिया है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि राहुल गांधी देश में ‘मोहब्बत की दुकान’ की बात करते हैं, जबकि भाजपा कथित तौर पर ‘नफरत का बाजार’ चला रही है। उन्होंने कहा कि जब राहुल गांधी पिछड़े, दलित और वंचित वर्गों को उनका अधिकार दिलाने के लिए जातिगत जनगणना की मांग करते हैं, तब भाजपा को उसमें भी देश के बंटवारे की राजनीति दिखाई देती है।

गोदियाल ने आरोप लगाया कि नितिन नवीन हल्द्वानी में भाजपा सरकार की कथित विफलताओं से जनता का ध्यान भटकाने के लिए कांग्रेस और राहुल गांधी पर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का युवा बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहा है, महिलाएं सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और अंकिता भंडारी मामले में न्याय की मांग अब भी उठ रही है।

उन्होंने कहा कि इन गंभीर मुद्दों पर जवाब देने के बजाय भाजपा नेता कांग्रेस पर आरोप लगाकर जनता का ध्यान मूल समस्याओं से हटाने का प्रयास कर रहे हैं। गोदियाल ने कहा कि उत्तराखंड की जनता अब विभाजन और ध्रुवीकरण की राजनीति के झांसे में आने वाली नहीं है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने भाजपा नेताओं से अपील की कि देवभूमि उत्तराखंड के शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल को राजनीतिक बयानबाजी के जरिए दूषित करने से बचें।


नफरत फैलाने वाली भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन देवभूमि का माहौल खराब न करें- गणेश गोदियाल

राहुल गांधी पर नितिन नवीन के बयान से गरमाई सियासत, गणेश गोदियाल ने साधा भाजपा पर निशाना

हल्द्वानी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की ओर से कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लेकर हल्द्वानी में दिए गए बयान पर उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने भाजपा अध्यक्ष के बयान की निंदा करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा खुद धर्म, जाति और संप्रदाय के नाम पर राजनीति करती है और अब कांग्रेस पर देश को बांटने का आरोप लगा रही है।

गणेश गोदियाल ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में आकर इस तरह की विभाजनकारी बयानबाजी करना भाजपा नेतृत्व की संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने नफरत की राजनीति के खिलाफ देशभर में पदयात्राएं कीं और समाज के अलग-अलग वर्गों को जोड़ने का प्रयास किया।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि राहुल गांधी पिछड़े, दलित और वंचित वर्गों को उनका अधिकार दिलाने के लिए जातिगत जनगणना की मांग कर रहे हैं, लेकिन भाजपा इसे भी राजनीतिक रूप से अलग नजरिए से पेश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की कोशिश गरीब और वंचित वर्गों से जुड़े वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने की है।

गोदियाल ने उत्तराखंड की भाजपा सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में बेरोजगारी और महिलाओं की सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दे बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी मामले में न्याय की मांग आज भी उठ रही है, लेकिन इन सवालों का जवाब देने के बजाय भाजपा नेता कांग्रेस और राहुल गांधी को निशाना बनाकर जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनता अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर रोजगार, सुरक्षा और विकास जैसे मुद्दों पर जवाब चाहती है। गोदियाल ने दावा किया कि राहुल गांधी देश के युवाओं, किसानों और वंचित वर्गों की आवाज बन चुके हैं और उनके नेतृत्व में चल रही एकजुटता की मुहिम को राजनीतिक बयानबाजी से रोका नहीं जा सकता।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने भाजपा नेताओं से उत्तराखंड की सामाजिक एकता और सौहार्द को राजनीतिक विवादों से प्रभावित न करने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता विभाजन की राजनीति के बजाय विकास और जनहित के मुद्दों पर जवाब चाहती है।


भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति में विकास का रोडमैप तैयार, विकसित उत्तराखंड पर हुआ मंथन

हल्द्वानी। हल्द्वानी में भाजपा की विस्तृत प्रदेश कार्यसमिति की बैठक का पहला सत्र ‘विकसित उत्तराखंड से विकसित भारत’ के संकल्प प्रस्ताव के अनुमोदन के साथ संपन्न हुआ। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन और उत्तराखंड के विकास को लेकर पार्टी की आगामी दिशा पर विस्तार से चर्चा की गई।

रामपुर रोड स्थित एक निजी प्रतिष्ठान के हरि प्रसाद टम्टा सभागार में आयोजित प्रदेश कार्यसमिति का शुभारंभ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और जनप्रतिनिधि मंच पर मौजूद रहे। इनमें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत, प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम, सह प्रभारी रेखा वर्मा, केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा, पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, अल्मोड़ा सांसद अजय भट्ट, टिहरी सांसद महारानी माला राज्यलक्ष्मी शाह, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल और कल्पना सैनी सहित प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार, दीप्ति रावत, तरुण बंसल और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक शामिल रहे।

पीएम मोदी के 25 वर्षों के कार्यकाल पर चर्चा

कार्यसमिति के पहले राजनीतिक प्रस्ताव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री और गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों की उपलब्धियों का उल्लेख किया गया। साथ ही इस दौरान भारत की विकास यात्रा और देश के लगातार आगे बढ़ने पर विस्तार से चर्चा हुई।

यह प्रस्ताव राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने प्रस्तुत किया। प्रस्ताव का अनुमोदन विधायक रेखा आर्य, सांसद अजय भट्ट, महारानी माला राज्यलक्ष्मी शाह और मदन कौशिक ने किया।

‘विकसित उत्तराखंड से विकसित भारत’ पर जोर

बैठक में दूसरे राजनीतिक प्रस्ताव के माध्यम से उत्तराखंड को विकसित बनाकर देश के विकसित भारत के संकल्प में योगदान देने की दिशा पर मंथन किया गया। केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा ने यह प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसका अनुमोदन राज्यसभा सांसद डॉ. कल्पना सैनी और पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने किया।

बैठक के दौरान प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम और सह प्रभारी रेखा वर्मा ने भी पार्टी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया। कार्यसमिति में प्रदेश के विकास, संगठन की भूमिका और विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर पार्टी की रणनीति पर चर्चा हुई।


पीएम मोदी समेत NDA सांसदों ने लहराया तिरंगा, झारखंड छात्र प्रदर्शन पर संसद में प्रदर्शन

‘वंदे मातरम’ के साथ शुरू हुआ कार्यक्रम

नई दिल्ली। संसद सत्र के बीच राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सांसदों की मंगलवार को अहम बैठक हुई। संसद पुस्तकालय में आयोजित ‘मंगल मिलन’ बैठक की शुरुआत ‘वंदे मातरम’ के उद्घोष के साथ हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन समेत NDA के कई नेता हाथों में तिरंगा लिए नजर आए।

बैठक के बाद NDA सांसदों ने संसद परिसर में झारखंड में छात्रों के प्रदर्शन से जुड़े मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया। सांसदों ने आरोप लगाया कि झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ उचित व्यवहार नहीं किया जा रहा है। इस मुद्दे को संसद में भी प्रमुखता से उठाने की तैयारी है।

छात्रों के मुद्दे पर विपक्ष को घेरने की तैयारी

NDA सांसद संसद में पोस्टर के साथ पहुंचने की तैयारी में हैं। इन पोस्टरों के जरिए सरकार की ओर से छात्रों के प्रदर्शन पर चर्चा की मांग और विपक्ष के रुख को लेकर सवाल उठाए जाएंगे। साथ ही झारखंड सरकार पर प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कथित कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया जाएगा।

NDA सांसदों का कहना है कि सरकार महत्वपूर्ण विषयों पर सदन में चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष की ओर से लगातार हंगामे के कारण संसद की कार्यवाही प्रभावित हो रही है। ऐसे में सत्ता पक्ष की रणनीति संसद में विपक्ष को इन मुद्दों पर घेरने की है।

पिछली बैठक में सरकार की उपलब्धियों पर हुई थी चर्चा

इससे पहले पिछले सप्ताह हुई ‘मंगल मिलन’ बैठक के बाद भाजपा सांसदों ने सरकार के कामकाज और विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति का जिक्र किया था। बैठक में रोजगार, आर्थिक विकास, खेल, गरीबी उन्मूलन और संसद की कार्यवाही जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी।

भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने दावा किया था कि भारत तेजी से आर्थिक और सामाजिक विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने रोजगार की स्थिति में सुधार और बेरोजगारी में कमी का जिक्र करते हुए कहा था कि बड़ी संख्या में लोग गरीबी से बाहर आए हैं।

वहीं, भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के बजाय विपक्ष हंगामा कर रहा है। बैठक में सांसदों से सदन की कार्यवाही के दौरान नियमित रूप से उपस्थित रहने और जरूरी विधेयकों को पारित कराने में सक्रिय भूमिका निभाने पर जोर दिया गया था।

क्या है ‘मंगल मिलन’ बैठक?

‘मंगल मिलन’ NDA संसदीय दल की साप्ताहिक रणनीतिक बैठक का नया स्वरूप है। इसका मुख्य उद्देश्य गठबंधन के घटक दलों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और संसद की कार्यवाही को लेकर साझा रणनीति तैयार करना है।

संसद सत्र के दौरान इस बैठक में आगामी कार्यवाही, महत्वपूर्ण मुद्दों और सरकार की प्राथमिकताओं पर चर्चा की जाती है। साथ ही सहयोगी दलों के सांसदों के बीच तालमेल और सदन में उनकी भूमिका को लेकर भी रणनीति बनाई जाती है।

बैठक में भाजपा के अलावा शिवसेना, लोक जनशक्ति पार्टी (LJP), तेलुगु देशम पार्टी (TDP), जनता दल यूनाइटेड (JDU) समेत NDA के विभिन्न सहयोगी दलों के नेता हिस्सा लेते हैं। इसका उद्देश्य गठबंधन के सांसदों को एक साझा रणनीति के तहत संसद में प्रभावी तरीके से अपनी बात रखने के लिए तैयार करना है।


महिला आरक्षण कानून पर फिर गरमाई सियासत, राहुल गांधी ने सरकार को घेरा

राहुल गांधी बोले- कानून लागू करने में देरी क्यों?

नई दिल्ली। महिला आरक्षण कानून को लागू करने को लेकर कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच सियासी तकरार एक बार फिर तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस पहले ही महिला आरक्षण कानून का समर्थन कर चुकी है। उन्होंने केंद्र से सवाल किया कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले कानून को लागू करने में देरी क्यों हो रही है और इसे लोकसभा परिसीमन से जोड़ने की जरूरत क्यों पड़ रही है।

राहुल गांधी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कांग्रेस का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ संसद में कांग्रेस के समर्थन से पारित हुआ था। ऐसे में अब इसे लागू करने के लिए किसी नई शर्त की जरूरत नहीं होनी चाहिए। राहुल ने सरकार से कानून को बिना शर्त लागू करने की मांग की।

रिजिजू ने कांग्रेस से मांगा था समर्थन

दरअसल, यह विवाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बयान के बाद सामने आया। राहुल गांधी ने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर एक वीडियो संदेश जारी किया था। इसमें उन्होंने कहा था कि महिलाओं की आवाज और उनकी भागीदारी के बिना देश का विकास अधूरा रहेगा।

राहुल गांधी के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए रिजिजू ने इसे कांग्रेस की ओर से सकारात्मक संदेश बताया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की महिलाओं के प्रति सोच में बदलाव दिखाई दे रहा है। इसी के साथ उन्होंने कांग्रेस से महिला आरक्षण विधेयक को बिना शर्त समर्थन देने की चुनौती भी दी।

कांग्रेस की आपत्ति किस बात पर है?

कांग्रेस और विपक्षी दल महिला आरक्षण के प्रावधान का समर्थन करते रहे हैं, लेकिन परिसीमन के साथ इसे जोड़ने का विरोध करते हैं। विपक्ष की दलील है कि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने को लोकसभा सीटों के परिसीमन की प्रक्रिया पर निर्भर नहीं किया जाना चाहिए।

परिसीमन के जरिए लोकसभा की सीटों की संख्या और उनके क्षेत्र का पुनर्निर्धारण किया जाना प्रस्तावित है। विपक्ष चाहता है कि महिला आरक्षण को परिसीमन की प्रक्रिया से अलग रखते हुए इसे जल्द लागू किया जाए।

2023 में संसद से पारित हुआ था कानून

‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका है। इस कानून में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था। हालांकि, इसके प्रभावी क्रियान्वयन की प्रक्रिया परिसीमन और उससे जुड़ी संवैधानिक प्रक्रिया से संबद्ध है।

दिए गए विवरण के मुताबिक, 17 अप्रैल को लोकसभा में संविधान संशोधन से जुड़ा एक विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका। इसके चलते कानून को लागू करने की आगे की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।

अब राहुल गांधी के बयान के बाद महिला आरक्षण कानून का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस जहां इसे बिना शर्त लागू करने की मांग कर रही है, वहीं केंद्र और विपक्ष के बीच परिसीमन को लेकर मतभेद बने हुए हैं।


राहुल-प्रियंका समेत विपक्षी नेताओं का संसद परिसर में प्रदर्शन, सरकार पर बोला हमला

प्रियंका गांधी बोलीं- लोकतंत्र में जवाबदेही जरूरी

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के बीच बुधवार को विपक्षी दलों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन तेज कर दिया। कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में मार्च निकालते हुए छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई और अन्य मामलों को लेकर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की।

मानसून सत्र के दौरान विपक्षी दलों ने संसद परिसर में केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध मार्च निकाला। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई विपक्षी नेता प्रेरणा स्थल स्थित गांधी प्रतिमा से मकर द्वार तक पैदल पहुंचे। इस दौरान सांसदों ने हाथों में तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और विभिन्न मुद्दों पर विरोध दर्ज कराया।

छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर उठाए सवाल

विपक्षी नेताओं ने 20 जुलाई को छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उनका आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ सख्ती बरती गई, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इसके साथ ही विपक्ष ने अयोध्या राम मंदिर निर्माण के लिए मिले चंदे में कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाते हुए पूरे मामले की पारदर्शी जांच की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने वालों के अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए और ऐसे मामलों में जवाबदेही तय की जानी चाहिए। वहीं, विरोध मार्च को देखते हुए संसद परिसर में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई।

प्रियंका गांधी ने सरकार से मांगा जवाब

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार और प्रशासन जनता के प्रति जवाबदेह होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग, पैलेट गन, आंसू गैस या लाठीचार्ज जैसी कार्रवाई हुई है, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

मोहम्मद जावेद ने भी उठाई कार्रवाई की मांग

कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कहा कि छात्रों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का प्रयास किया, लेकिन उनके साथ कथित तौर पर हिंसक व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को चोटें आईं और जिन पर बल प्रयोग किया गया, उस पूरी घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

विपक्षी दलों ने संकेत दिए कि वे इन मुद्दों को संसद के भीतर और बाहर लगातार उठाते रहेंगे तथा सरकार से जवाब मांगते रहेंगे।


तकनीकी विश्वविद्यालय पेपर लीक मामले पर कांग्रेस का प्रदर्शन, विश्वविद्यालय का घेराव कर सरकार को घेरा

तकनीकी शिक्षा मंत्री का फूंका पुतला

देहरादून। उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय के कथित पेपर लीक मामले को लेकर शनिवार को कांग्रेस ने प्रदेशभर में विरोध का स्वर तेज कर दिया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने नंदा की चौकी से विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार तक मार्च निकालकर प्रदर्शन किया और विश्वविद्यालय का घेराव करते हुए राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान तकनीकी शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत का पुतला भी फूंका गया।

प्रदर्शन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह और चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत समेत बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए। नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों ने युवाओं का भविष्य संकट में डाल दिया है और भर्ती व प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

गणेश गोदियाल ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे परीक्षा प्रणाली पर लोगों का भरोसा कमजोर हुआ है। उन्होंने सरकार से मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो कांग्रेस प्रदेशभर में आंदोलन को और तेज करेगी।

प्रीतम सिंह ने कहा कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और अनियमितताओं के मामलों ने लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों का विश्वास तोड़ा है। उन्होंने इसे शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ बताते हुए कहा कि मेहनती विद्यार्थियों के अधिकारों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है।

डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि वर्षों की मेहनत के बाद परीक्षा देने वाले युवाओं का मनोबल तब टूटता है, जब परीक्षा की गोपनीयता ही सुरक्षित नहीं रहती। उन्होंने सरकार से ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मजबूत और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने “पेपर लीक बंद करो”, “दोषियों को गिरफ्तार करो” और “युवा विरोधी सरकार मुर्दाबाद” जैसे नारे लगाए। बाद में पुलिस ने गणेश गोदियाल, प्रीतम सिंह, डॉ. हरक सिंह रावत सहित कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर सुद्धोवाला जेल भेजा, जहां से उन्हें कुछ समय बाद रिहा कर दिया गया।

इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस के कई वरिष्ठ पदाधिकारी, पूर्व विधायक, महिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस तथा अन्य प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।


दुगड्डा में कांग्रेस का जोरदार विरोध प्रदर्शन, भाजपा एवं शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का फूका पुतला

छात्रों के समर्थन में केंद्र सरकार के खिलाफ की नारेबाजी

दुगड्डा। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कथित लाठीचार्ज और कांग्रेस नेताओं के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार के विरोध में गुरुवार को नगर कांग्रेस कमेटी दुगड्डा ने गांधी चौक पर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री और भारतीय जनता पार्टी का पुतला फूंककर अपना विरोध दर्ज कराया।

नगर कांग्रेस अध्यक्ष नितेश ठाकुर की अध्यक्षता में आयोजित प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगें उठा रहे छात्र-छात्राओं पर बल प्रयोग किया गया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि छात्रों की आवाज को दबाने और विपक्ष के नेताओं के साथ कथित अभद्र व्यवहार लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है।

प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि कांग्रेस पार्टी छात्रों और युवाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष करती रहेगी। उन्होंने केंद्र सरकार से छात्रों की मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार करने और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने के अधिकार का सम्मान करने की अपील की।

इस अवसर पर पूर्व नगर अध्यक्ष हरेन्द्र रावत, जिला महासचिव विमल बिष्ट, जिला मीडिया प्रभारी वरुण नेगी, जिला महासचिव राकेश कुमार, पूर्व प्रधान ओम चंद, धर्मेंद्र गोयल, दिनेश चौधरी, शिव सिंह रावत, बलवंत भंडारी, गम्भीर सिंह नेगी सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।


संसद परिसर में सपा का प्रदर्शन, NEET पेपर लीक मुद्दे पर सरकार को घेरा

“NEET है या CHEAT है” के लगाए नारे 

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के पहले दिन समाजवादी पार्टी (सपा) ने NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों को लेकर संसद परिसर में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। सपा सांसदों ने इस मुद्दे पर संसद में चर्चा की मांग करते हुए केंद्र सरकार पर छात्रों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया।

संसद परिसर में सपा सांसदों ने हाथों में “प्रश्नपत्र लीक” लिखे पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया और “NEET है या CHEAT है” जैसे नारे लगाए। प्रदर्शन में सांसद डिंपल यादव, इकरा चौधरी, कृष्णा देवी, शिवशंकर पटेल, ज़िया उर रहमान सहित कई नेता शामिल रहे।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि देशभर के छात्र परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और न्याय की मांग कर रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार उनकी आवाज़ सुनने को तैयार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में बार-बार पेपर लीक की घटनाएं सामने आई हैं, फिर भी दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि जब छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते हैं तो उनके साथ सख्ती बरती जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं के भविष्य और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर गंभीर नहीं है तथा भर्ती परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं से लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

वहीं सांसद डिंपल यादव ने कहा कि छात्र लगातार सरकार से संवाद की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी जा रही। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और छात्रों की चिंताओं का समाधान करने की मांग की। सपा सांसदों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय करने और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की भी मांग की।

सपा नेताओं ने कहा कि मानसून सत्र के दौरान वे छात्रों से जुड़े मुद्दों को संसद के भीतर और बाहर लगातार उठाते रहेंगे।


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