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नागरिकता के नाम पर मतुआ समुदाय को अनिश्चितता और भ्रम में धकेल रही केंद्र सरकार- ममता बनर्जी

Category Archives: राजनीति

नागरिकता के नाम पर मतुआ समुदाय को अनिश्चितता और भ्रम में धकेल रही केंद्र सरकार- ममता बनर्जी

नागरिकता मुद्दे पर ममता बनर्जी ने कहा– पीढ़ियों से देश के नागरिक हैं मतुआ लोग

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को केंद्र सरकार पर मतुआ समुदाय को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नागरिकता के मुद्दे पर केंद्र की नीतियों से मतुआ समुदाय के लोगों में असमंजस और असुरक्षा की स्थिति पैदा हो रही है। मतुआ समुदाय की आध्यात्मिक नेता बिनापानी देवी ‘बरोमा’ की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि वर्षों से देश में रह रहे लोगों की नागरिकता पर सवाल खड़ा करना उचित नहीं है।

कई पीढ़ियों से देश के नागरिक हैं मतुआ समुदाय के लोग
ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि मतुआ समुदाय के लोग कई पीढ़ियों से भारत में रह रहे हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेते आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नागरिकता के नाम पर उन्हें अनिश्चितता और भ्रम की स्थिति में डालने की कोशिश की जा रही है। बनर्जी ने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाने जैसी प्रक्रियाओं के जरिए समुदाय को परेशान किया जा रहा है।

अधिकारों से समझौता नहीं करेगी राज्य सरकार
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार मतुआ समुदाय के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार से समुदाय के अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राज्य सरकार ऐसे हर कदम का विरोध करेगी जो बंगाल के लोगों के हितों के खिलाफ होगा।

बरोमा से रहा विशेष जुड़ाव
ममता बनर्जी ने कहा कि बिनापानी देवी के साथ उनका व्यक्तिगत और आध्यात्मिक संबंध रहा है और उन्हें उनका मातृस्नेह प्राप्त हुआ था। उन्होंने बरोमा के सामाजिक योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने जीवनभर समानता और भाईचारे के मूल्यों को आगे बढ़ाने का काम किया।

समुदाय के विकास के लिए कई पहल
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने मतुआ समुदाय के कल्याण के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। इनमें मतुआ विकास बोर्ड की स्थापना और उत्तर 24 परगना के ठाकुरनगर में हरिचंद-गुरुचंद विश्वविद्यालय की स्थापना जैसे कदम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सरकार आगे भी समुदाय के सामाजिक और शैक्षिक विकास के लिए काम करती रहेगी।


“परिवर्तन यात्रा” का उद्देश्य राज्य में राजनीतिक बदलाव लाना और विकास को गति देना है- अमित शाह

गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य सरकार की नीतियों पर उठाये सवाल

पश्चिम बंगाल। गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल को तेज करते हुए दक्षिण 24 परगना में आयोजित एक जनसभा में विपक्ष पर तीखा हमला बोला। अपने संबोधन में उन्होंने राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए विकास और कानून-व्यवस्था के मुद्दों को प्रमुखता से सामने रखा।

गृह मंत्री ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि इससे राज्य की प्रगति प्रभावित हुई है। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल आर्थिक दबाव में है और भारी कर्ज के बोझ से जूझ रहा है। साथ ही उन्होंने मदरसों को दी जा रही आर्थिक सहायता को लेकर भी सवाल उठाए।

सभा के दौरान अमित शाह ने अन्य राज्यों की राजनीति पर भी टिप्पणी करते हुए परिवारवाद के मुद्दे को उठाया। उन्होंने विभिन्न विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे क्षेत्रीय राजनीति को परिवार तक सीमित कर रहे हैं, जिससे लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंच रहा है।

भाजपा की रणनीति पर बोलते हुए शाह ने कहा कि पार्टी की “परिवर्तन यात्रा” का उद्देश्य राज्य में राजनीतिक बदलाव लाना और विकास को गति देना है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर राज्य में भाजपा की सरकार बनती है तो भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जाएगी और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार में पारदर्शिता की कमी है और सत्ता का केंद्रीकरण बढ़ रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की सुरक्षा और सीमाई इलाकों में घुसपैठ एक गंभीर चुनौती बनी हुई है, जिस पर सख्त कदम उठाने की जरूरत है।

अमित शाह ने आश्वासन दिया कि भाजपा सत्ता में आने पर सीमा सुरक्षा को सुदृढ़ करेगी और नागरिकों के हितों की रक्षा को प्राथमिकता देगी। इसके अलावा उन्होंने सरकारी कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग के अनुरूप वेतन व्यवस्था लागू करने का भी वादा किया।


मौलाना अरशद मदनी के बयान पर राजनीतिक घमासान, कांग्रेस–भाजपा आमने-सामने

नई दिल्ली- जमीयत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के हालिया बयान ने राष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। बयान सामने आते ही विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएँ देनी शुरू कर दीं। कांग्रेस की ओर से नेता उदित राज ने मदनी के रुख का समर्थन किया, जबकि भाजपा ने इसे आड़े हाथों लेते हुए तीखी आपत्ति जताई।

कांग्रेस नेता उदित राज ने आरोप लगाया कि देश में सिर्फ मुसलमान ही नहीं, बल्कि दलित और अन्य पिछड़ा वर्ग भी नियुक्तियों में उपेक्षा का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ की बात तो करती है, लेकिन व्यवहार में सिर्फ चुनिंदा समुदायों को प्राथमिकता दी जा रही है। उदित राज के अनुसार, केंद्र सरकार के अंतर्गत आने वाली 48 विश्वविद्यालयों में एक भी मुस्लिम, दलित या ओबीसी समुदाय का वाइस-चांसलर नहीं है और देश के 159 प्रतिष्ठित संस्थानों में भी इन वर्गों का प्रतिनिधित्व नदारद है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विभिन्न संस्थानों में वही लोग नियुक्त किए जा रहे हैं जो संघ और भाजपा की विचारधारा से मेल खाते हैं। अल फलाह यूनिवर्सिटी के संदर्भ में उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति पर आतंकवादी गतिविधियों का संदेह है, तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन पूरे विश्वविद्यालय को कठघरे में खड़ा करना उचित नहीं है। वहीं हाल ही में हुई ‘लैटरल एंट्री’ आईएएस नियुक्तियों को लेकर भी उदित राज ने कहा कि इनमें एक भी उम्मीदवार दलित, आदिवासी या पिछड़े वर्ग से नहीं था, जिससे स्पष्ट है कि सरकार इन समुदायों को मुख्यधारा से दूर रख रही है।


6 दिसंबर को रखेंगे बाबरी मस्जिद की नींव, टीएमसी विधायक के बयान से मचा सियासी बवाल

बाबरी मस्जिद की नींव रखने के दावे पर भाजपा ने लगाया तुष्टिकरण का आरोप

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। टीएमसी के एक विधायक द्वारा मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद की नींव रखने का दावा सामने आने के बाद प्रदेश में सियासी टकराव तेज हो गया है। विधायक की घोषणा के बाद भाजपा ने तीखी आपत्ति जताते हुए इसे तुष्टिकरण की राजनीति करार दिया है।

टीएमसी के भरतपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हुमायूं कबीर ने कहा है कि 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण की आधारशिला रखी जाएगी, जिसमें बड़ी संख्या में लोग और कई प्रमुख शख्सियतें शामिल होंगी। उन्होंने दावा किया कि मस्जिद का निर्माण लगभग तीन वर्षों में पूरा होगा। कबीर के इस बयान ने बंगाल की राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है।

भाजपा ने तत्काल इस ऐलान पर कड़ा विरोध जताया। भाजपा सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो ने कहा कि बाबर एक विदेशी हमलावर था और उसके नाम पर किसी भी प्रकार का निर्माण स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि मस्जिद निर्माण की कोशिश हुई तो भाजपा उस स्थान पर राम मंदिर की स्थापना की मांग करेगी।

भाजपा नेताओं ने टीएमसी पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया। पार्टी प्रवक्ता अग्निमित्रा पॉल का कहना है कि किसी भी धार्मिक स्थल के निर्माण पर उन्हें आपत्ति नहीं, लेकिन टीएमसी इसे राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है। वहीं भाजपा नेता राहुल सिन्हा ने कहा कि मस्जिद या मंदिर का निर्माण उचित स्थान पर होना चाहिए और इसका राजनीतिकरण कर समुदाय विशेष को गुमराह नहीं किया जाना चाहिए।

कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस नेता अजय कुमार लल्लू ने कहा कि उनकी पार्टी हमेशा रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और समानता के मुद्दों पर राजनीति करती है और चुनाव भी इन्हीं मुद्दों पर लड़े जाने चाहिए। कांग्रेस सांसद उदित राज ने कहा कि मंदिर की नींव रखी जा सकती है तो मस्जिद की रखे जाने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए, और इस विषय को बेवजह विवाद का रूप दिया जा रहा है।

इधर, 6 दिसंबर को टीएमसी द्वारा कोलकाता में एक बड़ी रैली आयोजित करने की तैयारी है, जिसे ‘समहति दिवस’ नाम दिया गया है। यह रैली आमतौर पर पार्टी का अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ आयोजित करता है, लेकिन इस बार इसकी जिम्मेदारी छात्र और युवा विंग को सौंपी गई है। संभावना है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी इसमें संबोधित करेंगे।

राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और इस बीच एसआईआर (Special Summary Revision) को लेकर पहले से ही तनाव बढ़ा हुआ है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण को धांधली बताया और चेतावनी दी कि वैध मतदाताओं के नाम हटे तो इसके गंभीर राजनीतिक परिणाम होंगे। ऐसे में बाबरी मस्जिद मुद्दा भी आगामी चुनावी माहौल पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।


नीतीश कुमार ने रचा इतिहास- दसवीं बार ली मुख्यमंत्री पद की शपथ

शपथ समारोह में प्रधानमंत्री मोदी समेत कई दिग्गज नेता रहे मौजूद 

पटना। बिहार की सत्ता में एक बार फिर अनुभवी नेतृत्व की वापसी हुई है। 2025 के विधानसभा चुनाव में NDA की जीत के साथ नीतीश कुमार ने रिकॉर्ड बनाते हुए दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। लंबे राजनीतिक अनुभव, संतुलित नेतृत्व और प्रशासनिक सुधारों के कारण वे देश के सबसे स्थायी और प्रभावशाली मुख्यमंत्रियों की श्रेणी में शामिल हो गए हैं। पटना के गांधी मैदान में हुए भव्य समारोह में 26 नवनियुक्त मंत्रियों ने भी शपथ ली। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत केंद्र व राज्यों के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

एनडीए की हालिया जीत के बाद आयोजित इस कार्यक्रम ने बिहार की नई राजनीतिक तस्वीर को साफ कर दिया है। 243 सीटों वाली विधानसभा में NDA गठबंधन ने 202 सीटें हासिल की हैं, जिनमें भाजपा को 89, जदयू को 85, लोजपा (रामविलास) को 19, हम (सेक्युलर) को 5 और रालोमो को 4 सीटें मिलीं।

शपथ ग्रहण समारोह में केंद्रीय मंत्रियों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को और खास बनाया। माना जा रहा है कि यह शपथ ग्रहण बिहार की भविष्य की शासन-व्यवस्था और राजनीतिक दिशा को नए आयाम देगा।

नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर साधारण पृष्ठभूमि से शुरू होकर राज्य के पुनर्निर्माण के प्रतीक तक पहुँचा है। पटना जिले के बख्तियारपुर में 1951 में जन्मे नीतीश ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद 70 के दशक में जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से जुड़कर सक्रिय राजनीति में कदम रखा। इसी दौर ने उनके भीतर सामाजिक न्याय और प्रशासनिक सुधारों के लिए ठोस दृष्टि विकसित की।

1985 में पहली बार लोकसभा पहुँचे नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय राजनीति में भी महत्वपूर्ण उपस्थिति दर्ज कराई। रेल मंत्री, कृषि मंत्री और सड़क परिवहन मंत्री जैसे अहम मंत्रालय उनके कार्यकाल में पारदर्शिता और आधारभूत सुधारों के लिए जाने जाते हैं। रेल मंत्रालय में उनके प्रयासों ने यात्री सुविधाओं को नई दिशा दी, जिसकी खूब सराहना हुई।

हालाँकि, उनका असल प्रभाव बिहार की सत्ता में दिखाई देता है। 2005 में पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने कानून-व्यवस्था, सड़क नेटवर्क, बिजली आपूर्ति और शिक्षा व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार शुरू किए। इनके परिणामों ने बिहार की छवि को काफी हद तक सकारात्मक दिशा में बदला।

महिला सशक्तिकरण को उनकी नीतियों ने विशेष पहचान दिलाई—चाहे पंचायतों में 50% आरक्षण हो या कन्या उत्थान जैसी योजनाएँ। ग्रामीण विकास के लिए “सात निश्चय” कार्यक्रम ने कई बुनियादी सुविधाओं तक पहुँच आसान की। शराबबंदी जैसे निर्णयों ने उन्हें सामाजिक सुधारक की छवि भी दी, भले ही यह फैसला विवादों में रहा हो।

सबसे विशेष बात यह है कि गठबंधन राजनीति में उनकी समझ और संतुलन बनाने की क्षमता ने उन्हें वर्षों तक सत्ता में बनाए रखा। बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच भी वे हमेशा प्रशासन के केंद्र में रहे, जो उनकी रणनीति और जनस्वीकार्यता को दर्शाता है।

दसवीं बार मुख्यमंत्री बनकर नीतीश कुमार ने स्पष्ट कर दिया है कि वे सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि बिहार की आधुनिक राजनीति के प्रमुख नायक हैं, जिनके फैसले आने वाले समय में भी राज्य की दिशा तय करेंगे।


तेजस्वी यादव का दावा, कहा- जनता का आशीर्वाद हमें मिल चुका है और 14 नवंबर को मैं बनूंगा मुख्यमंत्री

तेजस्वी यादव ने कहा- बिहार की जनता ने इस बार बदलाव के पक्ष में मजबूती से मतदान किया

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों से पहले जारी एग्जिट पोल भले ही अलग-अलग तस्वीर दिखा रहे हों, लेकिन महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने सरकार बनने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता ने इस बार बदलाव के पक्ष में मजबूती से मतदान किया है और महागठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलने जा रहा है।

मीडिया से बातचीत में तेजस्वी यादव ने आत्मविश्वास भरे लहजे में कहा, “बिहार की जनता का आशीर्वाद हमें मिल चुका है। 14 नवंबर को मैं मुख्यमंत्री बनने जा रहा हूं।” उन्होंने कहा कि इस बार जनता का उत्साह और समर्थन पहले के मुकाबले कई गुना ज्यादा है। लोगों ने बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार के खिलाफ वोट देकर मौजूदा सरकार के खिलाफ स्पष्ट जनादेश दिया है।

महागठबंधन नेता ने सभी सहयोगी दलों, कार्यकर्ताओं और मतदाताओं का धन्यवाद करते हुए कहा कि लोकतंत्र के इस महापर्व में जनता ने नई दिशा तय की है। तेजस्वी ने कहा, “2020 की तुलना में इस बार 72 लाख ज्यादा लोगों ने मतदान किया है, जो इस बात का संकेत है कि जनता बदलाव चाहती है और अब सरकार बदलना तय है।”

एग्जिट पोल को लेकर तेजस्वी ने कहा कि वे इन सर्वे नतीजों से न खुशफहमी में हैं, न ही भ्रम में। उनका कहना था कि “एग्जिट पोल का मकसद केवल माहौल को प्रभावित करना है। भाजपा और एनडीए की बेचैनी बताती है कि इस बार उन्हें जनता ने नकार दिया है।”

उन्होंने दोहराया कि 14 नवंबर को नतीजों के बाद 18 नवंबर को शपथ ग्रहण समारोह होगा और बिहार में महागठबंधन की सरकार बनना अब तय है।


बिहार की जनता ने सरकार को बदलने का बना लिया है मूड- तेजस्वी यादव

तेजस्वी यादव ने कहा- वह केवल विकास के मुद्दे पर बात कर रहे हैं, जबकि प्रधानमंत्री कई विवादित चेहरों के लिए कर रहे प्रचार

बिहार। पटना के पोलो रोड स्थित आरजेडी कार्यालय में सोमवार को नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दूसरे चरण के मतदान से पहले कई सवाल उठाए। उनके साथ सांसद मीसा भारती भी मौजूद रहीं। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने सुरक्षा बल मुख्यतः भाजपा शासित राज्यों से बुलाए हैं। उन्होंने दावा किया कि कुल 208 कंपनियां भाजपा शासित राज्यों से तैनात की गई हैं और करीब 68% पुलिस ऑब्जर्वर भी उन्हीं प्रदेशों से आए हैं। तेजस्वी ने पूछा कि “फिर बंगाल, तमिलनाडु, झारखंड से बल क्यों नहीं बुलाए गए?”

पीएम के कैंपेन को लेकर निशाना

तेजस्वी यादव ने कहा कि वह केवल विकास के मुद्दे पर बात कर रहे हैं, जबकि प्रधानमंत्री ने मंच साझा करते हुए कई विवादित चेहरों के लिए प्रचार किया। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि पीएम कुछ मामलों में संदिग्ध छवि वाले लोगों से मंच पर जुड़े दिखे।

“लोग बदलाव के मूड में हैं”

तेजस्वी ने दावा किया कि उन्होंने चुनाव प्रचार में 171 से अधिक सभाएं की हैं और हर ब्लॉक/जिला में जनसमर्थन मिला है। उनके मुताबिक बिहार की 20 साल पुरानी व्यवस्था से जनता बदलाव चाहती है और इस बार नतीजे “ऐतिहासिक” होंगे। उन्होंने कहा कि 14 तारीख को सरकार गठित होने के बाद बिहार को तेज रफ्तार विकास देने की दिशा में काम शुरू किया जाएगा।

तेजस्वी के चुनावी वादे

आरजेडी नेता ने अपने चुनावी घोषणापत्र में कई वादों का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार बनते ही महिलाओं के खातों में 30 हजार रुपये देने, जीविका दीदियों का ब्याज माफ करने, ओल्ड पेंशन स्कीम लागू करने, किसानों को फ्री बिजली देने और नई सामाजिक योजनाएँ शुरू करने का रोडमैप तैयार है। साथ ही उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर “ज़ीरो टॉलरेंस” अपनाया जाएगा।

समस्तीपुर घटना का मुद्दा भी उठाया

तेजस्वी ने कहा कि समस्तीपुर में फेंकी गई पर्चियों से लोगों में भय का वातावरण बना है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ बड़े अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए जा रहे हैं। तेजस्वी ने चुनाव आयोग से यह भी सवाल किया कि पहले चरण में पुरुष/महिला वोटर टर्नआउट का डेटा 4 दिन बाद भी क्यों जारी नहीं हुआ।


15 वर्षों में ‘जंगलराज’ की सरकार ने बिहार को पूरी तरह बर्बाद किया- पीएम मोदी

पीएम मोदी बोले — “कुछ लोग खुद को बिहार का माई-बाप समझते थे, लेकिन मोदी अलग है, मेरे माई-बाप जनता-जनार्दन हैं

अररिया। बिहार में पहले चरण की वोटिंग के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अररिया की रैली में RJD पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बिहार ने 15 साल ‘जंगलराज’ के दौर में सिर्फ पिछड़ना देखा। पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि 1990 से 2005 के बीच बिहार में न तो सड़कें बनीं, न पुल, न बड़े एजुकेशनल संस्थान। विकास के नाम पर सन्नाटा रहा। उन्होंने कहा — “उन दिनों विकास का बैलेंस शीट देखा जाए तो हर जगह एक ही एंट्री थी… शून्य।”

पीएम बोले कि बिहार की जनता सबसे बड़ा मालिक है
मोदी ने कहा — “कुछ लोग खुद को बिहार का माई-बाप समझते थे। लेकिन मोदी अलग है, मेरे माई-बाप जनता-जनार्दन हैं। आप ही मेरे मालिक हैं, आप ही मेरा रिमोट कंट्रोल हैं।”

वोटिंग को बताया लोकतंत्र का पर्व

पहले चरण में भारी संख्या में लोग घरों से निकले। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की लंबी-लंबी लाइनें लगीं। पीएम मोदी ने इसे लोकतंत्र की ताकत बताया और सभी मतदाताओं को बधाई दी। उन्होंने अपील की — “जो अभी वोट देने नहीं गए हैं, वह जरूर जाएं।”

NDA की जीत को लेकर भरोसा

पीएम ने दावा किया कि बिहार की जनता एक बार फिर NDA की सरकार को ही चुनने जा रही है। उन्होंने कहा — “फिर एक बार NDA सरकार… यही आवाज पूरे बिहार में गूंज रही है। माताओं-बहनों की उम्मीदें और युवाओं के सपने इस चुनाव में NDA का सबसे बड़ा आधार हैं।”


राहुल गांधी ने फिर उठाया वोट चोरी का मुद्दा, कहा- हरियाणा में 25 लाख वोट हुए चोरी

500 वोटर एक ही पते पर, फर्जी फोटो वाले हजारों नाम – राहुल का दावा

राहुल बोले- हर आठ में से एक मतदाता नकली, मतदाता सूची में भारी गड़बड़ी

नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बुधवार को एआईसीसी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस की और चुनाव प्रक्रिया में “वोट चोरी” के आरोपों को दोहराते हुए कई उदाहरण सामने रखे। राहुल ने दावा किया कि हरियाणा सहित कुछ राज्यों में बड़ी संख्या में फर्जी मतदाता जोड़े गए और कई वोट काट दिए गए। उन्होंने इसे “सेंट्रलाइज्ड ऑपरेशन” बताते हुए कहा कि यह अलग–अलग बूथ की नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर की गई गड़बड़ी है।

एग्जिट पोल का हवाला, वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप
राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुछ राज्यों के एग्जिट पोल दिखाए और कहा कि हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश में वोटिंग के बाद जो शिकायतें आईं, वो एग्जिट पोल और रिजल्ट में अंतर की ओर संकेत करती हैं। उन्होंने एक महिला की तस्वीर दिखाते हुए कहा कि एक ही व्यक्ति ने अलग–अलग नाम से हरियाणा में कई बार वोट डाला।

“H फाइल्स” का जिक्र
राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस के पास “H फाइल्स” हैं, जिनमें हरियाणा में कथित अनियमितताओं से जुड़े डॉक्यूमेंट्स मौजूद हैं। उन्होंने दावा किया कि हर आठ में से एक वोटर फर्जी है और हरियाणा में करीब 1 लाख से ज्यादा मतदाता ऐसे मिले जिनके फोटो संदिग्ध हैं। राहुल ने यह भी कहा कि 25 लाख वोट चोरी हुए और बड़ी संख्या में मतदाताओं के वोट “काटे” गए।

500 वोटर एक ही पते पर — राहुल का दावा
कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में कई लोगों के मकान नंबर 0 दर्ज हैं और जांच में 500 मतदाताओं का एक ही पता सामने आया है। उन्होंने कहा कि फर्जी नामों की पहचान करना मुश्किल है क्योंकि उनका कोई सत्यापित एड्रेस नहीं है।

पहले भी दे चुके हैं संकेत
राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर 1 सितंबर को भी बयान दिया था और कहा था कि “वोट चोरी” को लेकर वे “हाइड्रोजन बम” फोड़ेंगे। कांग्रेस का दावा है कि राहुल गांधी आने वाले समय में इस मुद्दे पर और दस्तावेज़ व विवरण सार्वजनिक कर सकते हैं।


तेजस्वी का बड़ा ऐलान, कहा- सरकार बनते ही महिलाओं के खाते में ट्रांसफर किए जाएंगे 30 हजार रुपये

तेजस्वी बोले- किसानों को सिंचाई के लिए बिजली होगी बिल्कुल फ्री

पटना। बिहार में चुनावी सरगर्मी बढ़ते ही महागठबंधन के मुख्यमंत्री फेस तेजस्वी यादव ने मंगलवार को एक और बड़ा वादा कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर महागठबंधन सत्ता में लौटता है तो “माई बहिन योजना” के तहत महिलाओं को एक साल की पूरी किस्त एकमुश्त 30 हजार रुपये सीधे खाते में ट्रांसफर किए जाएंगे। तेजस्वी ने दावा किया कि सरकार बनने के बाद 14 जनवरी के दिन पहली ही फाइल पर साइन कर यह राशि ट्रांसफर करा दी जाएगी।

तेजस्वी यादव ने आगे कहा कि जीविका (कम्युनिटी मोबिलाइजर) को स्थायी करने और उन्हें हर महीने 30 हजार रुपये मानदेय देने का फैसला भी सरकार बनते ही लागू कर दिया जाएगा। किसानों को सिंचाई के लिए बिजली मुफ्त देने का वादा दोहराते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में 55 पैसा प्रति यूनिट वसूली जाती है, लेकिन महागठबंधन सरकार इसे शून्य कर देगी। साथ ही राज्य के 8463 पैक्स को जनप्रतिनिधि का दर्जा भी देने की बात कही।

नौकरी के मुद्दे पर तेजस्वी ने कहा कि हर परिवार के एक सदस्य को नौकरी देना उनकी प्राथमिकता है। बजट के सवाल पर उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों से सलाह के बाद ही यह घोषणा हुई है। 17 महीने के अपने कार्यकाल का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने 5 लाख नौकरियां दी थीं और साढ़े तीन लाख नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू की थी। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि भाजपा वाले इस पर कुछ नहीं बोलते, क्योंकि उन्हें मालूम है कि यह सब संभव है।


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