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पीएम मोदी समेत NDA सांसदों ने लहराया तिरंगा, झारखंड छात्र प्रदर्शन पर संसद में प्रदर्शन

Category Archives: राजनीति

पीएम मोदी समेत NDA सांसदों ने लहराया तिरंगा, झारखंड छात्र प्रदर्शन पर संसद में प्रदर्शन

‘वंदे मातरम’ के साथ शुरू हुआ कार्यक्रम

नई दिल्ली। संसद सत्र के बीच राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सांसदों की मंगलवार को अहम बैठक हुई। संसद पुस्तकालय में आयोजित ‘मंगल मिलन’ बैठक की शुरुआत ‘वंदे मातरम’ के उद्घोष के साथ हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन समेत NDA के कई नेता हाथों में तिरंगा लिए नजर आए।

बैठक के बाद NDA सांसदों ने संसद परिसर में झारखंड में छात्रों के प्रदर्शन से जुड़े मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया। सांसदों ने आरोप लगाया कि झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ उचित व्यवहार नहीं किया जा रहा है। इस मुद्दे को संसद में भी प्रमुखता से उठाने की तैयारी है।

छात्रों के मुद्दे पर विपक्ष को घेरने की तैयारी

NDA सांसद संसद में पोस्टर के साथ पहुंचने की तैयारी में हैं। इन पोस्टरों के जरिए सरकार की ओर से छात्रों के प्रदर्शन पर चर्चा की मांग और विपक्ष के रुख को लेकर सवाल उठाए जाएंगे। साथ ही झारखंड सरकार पर प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कथित कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया जाएगा।

NDA सांसदों का कहना है कि सरकार महत्वपूर्ण विषयों पर सदन में चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष की ओर से लगातार हंगामे के कारण संसद की कार्यवाही प्रभावित हो रही है। ऐसे में सत्ता पक्ष की रणनीति संसद में विपक्ष को इन मुद्दों पर घेरने की है।

पिछली बैठक में सरकार की उपलब्धियों पर हुई थी चर्चा

इससे पहले पिछले सप्ताह हुई ‘मंगल मिलन’ बैठक के बाद भाजपा सांसदों ने सरकार के कामकाज और विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति का जिक्र किया था। बैठक में रोजगार, आर्थिक विकास, खेल, गरीबी उन्मूलन और संसद की कार्यवाही जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी।

भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने दावा किया था कि भारत तेजी से आर्थिक और सामाजिक विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने रोजगार की स्थिति में सुधार और बेरोजगारी में कमी का जिक्र करते हुए कहा था कि बड़ी संख्या में लोग गरीबी से बाहर आए हैं।

वहीं, भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के बजाय विपक्ष हंगामा कर रहा है। बैठक में सांसदों से सदन की कार्यवाही के दौरान नियमित रूप से उपस्थित रहने और जरूरी विधेयकों को पारित कराने में सक्रिय भूमिका निभाने पर जोर दिया गया था।

क्या है ‘मंगल मिलन’ बैठक?

‘मंगल मिलन’ NDA संसदीय दल की साप्ताहिक रणनीतिक बैठक का नया स्वरूप है। इसका मुख्य उद्देश्य गठबंधन के घटक दलों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और संसद की कार्यवाही को लेकर साझा रणनीति तैयार करना है।

संसद सत्र के दौरान इस बैठक में आगामी कार्यवाही, महत्वपूर्ण मुद्दों और सरकार की प्राथमिकताओं पर चर्चा की जाती है। साथ ही सहयोगी दलों के सांसदों के बीच तालमेल और सदन में उनकी भूमिका को लेकर भी रणनीति बनाई जाती है।

बैठक में भाजपा के अलावा शिवसेना, लोक जनशक्ति पार्टी (LJP), तेलुगु देशम पार्टी (TDP), जनता दल यूनाइटेड (JDU) समेत NDA के विभिन्न सहयोगी दलों के नेता हिस्सा लेते हैं। इसका उद्देश्य गठबंधन के सांसदों को एक साझा रणनीति के तहत संसद में प्रभावी तरीके से अपनी बात रखने के लिए तैयार करना है।


महिला आरक्षण कानून पर फिर गरमाई सियासत, राहुल गांधी ने सरकार को घेरा

राहुल गांधी बोले- कानून लागू करने में देरी क्यों?

नई दिल्ली। महिला आरक्षण कानून को लागू करने को लेकर कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच सियासी तकरार एक बार फिर तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस पहले ही महिला आरक्षण कानून का समर्थन कर चुकी है। उन्होंने केंद्र से सवाल किया कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले कानून को लागू करने में देरी क्यों हो रही है और इसे लोकसभा परिसीमन से जोड़ने की जरूरत क्यों पड़ रही है।

राहुल गांधी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कांग्रेस का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ संसद में कांग्रेस के समर्थन से पारित हुआ था। ऐसे में अब इसे लागू करने के लिए किसी नई शर्त की जरूरत नहीं होनी चाहिए। राहुल ने सरकार से कानून को बिना शर्त लागू करने की मांग की।

रिजिजू ने कांग्रेस से मांगा था समर्थन

दरअसल, यह विवाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बयान के बाद सामने आया। राहुल गांधी ने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर एक वीडियो संदेश जारी किया था। इसमें उन्होंने कहा था कि महिलाओं की आवाज और उनकी भागीदारी के बिना देश का विकास अधूरा रहेगा।

राहुल गांधी के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए रिजिजू ने इसे कांग्रेस की ओर से सकारात्मक संदेश बताया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की महिलाओं के प्रति सोच में बदलाव दिखाई दे रहा है। इसी के साथ उन्होंने कांग्रेस से महिला आरक्षण विधेयक को बिना शर्त समर्थन देने की चुनौती भी दी।

कांग्रेस की आपत्ति किस बात पर है?

कांग्रेस और विपक्षी दल महिला आरक्षण के प्रावधान का समर्थन करते रहे हैं, लेकिन परिसीमन के साथ इसे जोड़ने का विरोध करते हैं। विपक्ष की दलील है कि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने को लोकसभा सीटों के परिसीमन की प्रक्रिया पर निर्भर नहीं किया जाना चाहिए।

परिसीमन के जरिए लोकसभा की सीटों की संख्या और उनके क्षेत्र का पुनर्निर्धारण किया जाना प्रस्तावित है। विपक्ष चाहता है कि महिला आरक्षण को परिसीमन की प्रक्रिया से अलग रखते हुए इसे जल्द लागू किया जाए।

2023 में संसद से पारित हुआ था कानून

‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका है। इस कानून में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था। हालांकि, इसके प्रभावी क्रियान्वयन की प्रक्रिया परिसीमन और उससे जुड़ी संवैधानिक प्रक्रिया से संबद्ध है।

दिए गए विवरण के मुताबिक, 17 अप्रैल को लोकसभा में संविधान संशोधन से जुड़ा एक विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका। इसके चलते कानून को लागू करने की आगे की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।

अब राहुल गांधी के बयान के बाद महिला आरक्षण कानून का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस जहां इसे बिना शर्त लागू करने की मांग कर रही है, वहीं केंद्र और विपक्ष के बीच परिसीमन को लेकर मतभेद बने हुए हैं।


राहुल-प्रियंका समेत विपक्षी नेताओं का संसद परिसर में प्रदर्शन, सरकार पर बोला हमला

प्रियंका गांधी बोलीं- लोकतंत्र में जवाबदेही जरूरी

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के बीच बुधवार को विपक्षी दलों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन तेज कर दिया। कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में मार्च निकालते हुए छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई और अन्य मामलों को लेकर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की।

मानसून सत्र के दौरान विपक्षी दलों ने संसद परिसर में केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध मार्च निकाला। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई विपक्षी नेता प्रेरणा स्थल स्थित गांधी प्रतिमा से मकर द्वार तक पैदल पहुंचे। इस दौरान सांसदों ने हाथों में तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और विभिन्न मुद्दों पर विरोध दर्ज कराया।

छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर उठाए सवाल

विपक्षी नेताओं ने 20 जुलाई को छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उनका आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ सख्ती बरती गई, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इसके साथ ही विपक्ष ने अयोध्या राम मंदिर निर्माण के लिए मिले चंदे में कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाते हुए पूरे मामले की पारदर्शी जांच की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने वालों के अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए और ऐसे मामलों में जवाबदेही तय की जानी चाहिए। वहीं, विरोध मार्च को देखते हुए संसद परिसर में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई।

प्रियंका गांधी ने सरकार से मांगा जवाब

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार और प्रशासन जनता के प्रति जवाबदेह होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग, पैलेट गन, आंसू गैस या लाठीचार्ज जैसी कार्रवाई हुई है, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

मोहम्मद जावेद ने भी उठाई कार्रवाई की मांग

कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कहा कि छात्रों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का प्रयास किया, लेकिन उनके साथ कथित तौर पर हिंसक व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को चोटें आईं और जिन पर बल प्रयोग किया गया, उस पूरी घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

विपक्षी दलों ने संकेत दिए कि वे इन मुद्दों को संसद के भीतर और बाहर लगातार उठाते रहेंगे तथा सरकार से जवाब मांगते रहेंगे।


तकनीकी विश्वविद्यालय पेपर लीक मामले पर कांग्रेस का प्रदर्शन, विश्वविद्यालय का घेराव कर सरकार को घेरा

तकनीकी शिक्षा मंत्री का फूंका पुतला

देहरादून। उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय के कथित पेपर लीक मामले को लेकर शनिवार को कांग्रेस ने प्रदेशभर में विरोध का स्वर तेज कर दिया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने नंदा की चौकी से विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार तक मार्च निकालकर प्रदर्शन किया और विश्वविद्यालय का घेराव करते हुए राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान तकनीकी शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत का पुतला भी फूंका गया।

प्रदर्शन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह और चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत समेत बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए। नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों ने युवाओं का भविष्य संकट में डाल दिया है और भर्ती व प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

गणेश गोदियाल ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे परीक्षा प्रणाली पर लोगों का भरोसा कमजोर हुआ है। उन्होंने सरकार से मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो कांग्रेस प्रदेशभर में आंदोलन को और तेज करेगी।

प्रीतम सिंह ने कहा कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और अनियमितताओं के मामलों ने लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों का विश्वास तोड़ा है। उन्होंने इसे शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ बताते हुए कहा कि मेहनती विद्यार्थियों के अधिकारों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है।

डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि वर्षों की मेहनत के बाद परीक्षा देने वाले युवाओं का मनोबल तब टूटता है, जब परीक्षा की गोपनीयता ही सुरक्षित नहीं रहती। उन्होंने सरकार से ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मजबूत और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने “पेपर लीक बंद करो”, “दोषियों को गिरफ्तार करो” और “युवा विरोधी सरकार मुर्दाबाद” जैसे नारे लगाए। बाद में पुलिस ने गणेश गोदियाल, प्रीतम सिंह, डॉ. हरक सिंह रावत सहित कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर सुद्धोवाला जेल भेजा, जहां से उन्हें कुछ समय बाद रिहा कर दिया गया।

इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस के कई वरिष्ठ पदाधिकारी, पूर्व विधायक, महिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस तथा अन्य प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।


दुगड्डा में कांग्रेस का जोरदार विरोध प्रदर्शन, भाजपा एवं शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का फूका पुतला

छात्रों के समर्थन में केंद्र सरकार के खिलाफ की नारेबाजी

दुगड्डा। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कथित लाठीचार्ज और कांग्रेस नेताओं के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार के विरोध में गुरुवार को नगर कांग्रेस कमेटी दुगड्डा ने गांधी चौक पर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री और भारतीय जनता पार्टी का पुतला फूंककर अपना विरोध दर्ज कराया।

नगर कांग्रेस अध्यक्ष नितेश ठाकुर की अध्यक्षता में आयोजित प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगें उठा रहे छात्र-छात्राओं पर बल प्रयोग किया गया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि छात्रों की आवाज को दबाने और विपक्ष के नेताओं के साथ कथित अभद्र व्यवहार लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है।

प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि कांग्रेस पार्टी छात्रों और युवाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष करती रहेगी। उन्होंने केंद्र सरकार से छात्रों की मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार करने और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने के अधिकार का सम्मान करने की अपील की।

इस अवसर पर पूर्व नगर अध्यक्ष हरेन्द्र रावत, जिला महासचिव विमल बिष्ट, जिला मीडिया प्रभारी वरुण नेगी, जिला महासचिव राकेश कुमार, पूर्व प्रधान ओम चंद, धर्मेंद्र गोयल, दिनेश चौधरी, शिव सिंह रावत, बलवंत भंडारी, गम्भीर सिंह नेगी सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।


संसद परिसर में सपा का प्रदर्शन, NEET पेपर लीक मुद्दे पर सरकार को घेरा

“NEET है या CHEAT है” के लगाए नारे 

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के पहले दिन समाजवादी पार्टी (सपा) ने NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों को लेकर संसद परिसर में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। सपा सांसदों ने इस मुद्दे पर संसद में चर्चा की मांग करते हुए केंद्र सरकार पर छात्रों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया।

संसद परिसर में सपा सांसदों ने हाथों में “प्रश्नपत्र लीक” लिखे पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया और “NEET है या CHEAT है” जैसे नारे लगाए। प्रदर्शन में सांसद डिंपल यादव, इकरा चौधरी, कृष्णा देवी, शिवशंकर पटेल, ज़िया उर रहमान सहित कई नेता शामिल रहे।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि देशभर के छात्र परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और न्याय की मांग कर रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार उनकी आवाज़ सुनने को तैयार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में बार-बार पेपर लीक की घटनाएं सामने आई हैं, फिर भी दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि जब छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते हैं तो उनके साथ सख्ती बरती जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं के भविष्य और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर गंभीर नहीं है तथा भर्ती परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं से लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

वहीं सांसद डिंपल यादव ने कहा कि छात्र लगातार सरकार से संवाद की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी जा रही। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और छात्रों की चिंताओं का समाधान करने की मांग की। सपा सांसदों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय करने और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की भी मांग की।

सपा नेताओं ने कहा कि मानसून सत्र के दौरान वे छात्रों से जुड़े मुद्दों को संसद के भीतर और बाहर लगातार उठाते रहेंगे।


बीकेटीसी अध्यक्ष का बहस की चुनौती देकर भागना बताता है कि भाजपा के पास जवाब नहीं — गणेश गोदियाल

देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने सार्वजनिक रूप से उन्हें बहस की चुनौती दी थी। कांग्रेस ने इस चुनौती को पूरी गंभीरता से स्वीकार किया और आज निर्धारित समय पर दोपहर 12:30 बजे प्रेस क्लब पहुँचकर तथ्यों के साथ अपनी बात रखने के लिए उपस्थित रही। लेकिन चुनौती देने वाले स्वयं नहीं पहुँचे। यह स्पष्ट करता है कि उनके पास अपने आरोपों के समर्थन में कोई तथ्य नहीं थे।

गणेश गोदियाल ने कहा कि जो व्यक्ति सार्वजनिक रूप से बहस की चुनौती देता है और फिर निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं होता, वह स्वयं अपनी विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा देता है। इससे यही संदेश जाता है कि सच्चाई का सामना करने का साहस उनके पास नहीं है।

उन्होंने कहा कि भाजपा और बीकेटीसी के पदाधिकारी जानबूझकर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रमोद नौटियाल वर्ष 2003 में बीकेटीसी में नियुक्त हुआ था। वर्ष 2010 में भाजपा सरकार में उसके नियमितीकरण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया और वर्ष 2014 में शासन द्वारा उसकी स्वीकृति दी गई। उस समय वह प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी और नियमितीकरण का निर्णय शासन स्तर पर लिया गया था।

गणेश गोदियाल ने कहा कि वास्तविक प्रश्न यह नहीं है कि प्रमोद नौटियाल की नियुक्ति कब हुई या उसका नियमितीकरण कब हुआ। असली सवाल यह है कि बदरीनाथ धाम में दानराशि की कथित चोरी आखिर किसके कार्यकाल में हुई? यदि आज मंदिर की दानराशि की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं, सीसीटीवी फुटेज में नोटों की गड्डियों के गायब होने की बातें सामने आ रही हैं और मंदिर समिति की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं, तो इसकी जवाबदेही वर्तमान प्रबंधन और वर्तमान सरकार की बनती है।

उन्होंने कहा कि भाजपा की पुरानी कार्यशैली रही है कि जब भी उसके शासनकाल में कोई गंभीर मामला सामने आता है, वह अपने दायित्व से बचने के लिए कांग्रेस के नेताओं को अनावश्यक रूप से विवाद में घसीटने का प्रयास करती है। लेकिन इस बार भी जनता तथ्यों को देख रही है और समझ रही है कि वास्तविक जवाबदेही किसकी है।

गणेश गोदियाल ने कहा कि कांग्रेस न तो किसी तथ्य से भागती है और न ही किसी बहस से। यदि बीकेटीसी अध्यक्ष में साहस है तो वे किसी भी सार्वजनिक मंच पर आकर तथ्यों के आधार पर चर्चा करें। कांग्रेस हर प्रश्न का उत्तर देने के लिए तैयार है, लेकिन भाजपा को भी अपने कार्यकाल में हुई घटनाओं का जवाब जनता को देना होगा।गोदियाल ने कहा कि 9 वर्ष भाजपा की पूर्ण बहुमत और प्रचंड बहुमत की सरकार है यदि उनके(गोदियाल के) कार्यकाल में कुछ गलत हुआ तो आज तक एक्शन क्यों नहीं लिया गया?

उन्होंने दोहराया कि देवभूमि की आस्था सर्वोपरि है। मंदिरों की दानराशि, व्यवस्था और श्रद्धालुओं के विश्वास की रक्षा करना सरकार और मंदिर समिति की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। इस मामले में दोषियों के विरुद्ध निष्पक्ष एवं कठोर कार्रवाई होनी चाहिए और पूरे प्रकरण की पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए।


NMC से मान्यता न मिलने पर सरकार पर बरसे यशपाल आर्य, बोले- भाजपा की बड़ी प्रशासनिक विफलता

देहरादून। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने रुद्रपुर एवं पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेजों को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए मान्यता देने से इनकार किए जाने को राज्य की भाजपा सरकार की गंभीर प्रशासनिक विफलता बताया है।

आर्य ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के दावे करने वाली सरकार मेडिकल कॉलेजों में न्यूनतम मानकों के अनुरूप फैकल्टी, प्रयोगशालाएं और आवश्यक संसाधन तक उपलब्ध नहीं करा सकी। इसका सीधा नुकसान उत्तराखंड के हजारों युवाओं और प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को उठाना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज में आवश्यक फैकल्टी के मुकाबले केवल 13 फैकल्टी उपलब्ध हैं, जबकि पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज में लगभग 85 फैकल्टी की आवश्यकता के सापेक्ष मात्र 6 फैकल्टी कार्यरत हैं। निर्माण कार्य और आधारभूत सुविधाएं भी अधूरी हैं। यह स्थिति भाजपा सरकार के खोखले दावों की पोल खोलती है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भाजपा सरकार हर मंच से उत्तराखंड को स्वास्थ्य के क्षेत्र में मॉडल राज्य बनाने का दावा करती है, लेकिन वास्तविकता यह है कि मेडिकल कॉलेज ही मानकों पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं। यदि समय रहते नियुक्तियां और संसाधनों की व्यवस्था की जाती, तो आज यह शर्मनाक स्थिति पैदा नहीं होती।

आर्य ने सरकार से पूछा कि-
मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की भर्ती वर्षों से लंबित क्यों रखी गई?
निर्माण कार्य समय पर पूरा क्यों नहीं कराया गया?
NMC के निरीक्षण से पहले कमियों को दूर करने की कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
इस गंभीर लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है और उसके खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?

उन्होंने कहा कि यह केवल दो मेडिकल कॉलेजों का मामला नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के स्वास्थ्य ढांचे और युवाओं के भविष्य से जुड़ा प्रश्न है। सरकार की अकर्मण्यता के कारण प्रदेश के विद्यार्थियों को मेडिकल शिक्षा के अवसरों से वंचित होना पड़ रहा है और राज्य में डॉक्टरों की कमी और अधिक बढ़ेगी।

नेता प्रतिपक्ष ने मांग की कि दोनों मेडिकल कॉलेजों में तत्काल युद्धस्तर पर फैकल्टी की नियुक्ति की जाए। सभी अधूरे निर्माण कार्य और आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए।इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों का स्वतंत्र ऑडिट कर उनकी वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए।


चढ़ावा चोरी मामले में कांग्रेस पर बरसे हेमंत द्विवेदी, बोले- राजनीति कर रहे गणेश गोदियाल

‘आरोपी मेरा निजी सचिव नहीं, समिति का स्थायी कर्मचारी’, हेमंत द्विवेदी का कांग्रेस को जवाब

देहरादून। बद्री केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने चढ़ावा चोरी मामले में कांग्रेस पर राजनीति करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल पर निशाना साधते हुए कहा कि गणेश गोदियाल का बद्री केदार समिति में सबसे लंबा कार्यकाल रहा। इस दौरान उन्होंने कई कारगुजारियों को अंजाम दिया।

उन्होंने कहा कि चंदा चोरी की घटना में आरोपित प्रमोद नौटियाल को कांग्रेस अध्यक्ष मेरा निजी सचिव बता रहे हैं जबकि हकीकत तो ये है कि गोदियाल के कार्यकाल में ही नौटियाल को व्यक्तिगत सहायक के पद पर नियुक्ति दी गई। वो कोई निजी सचिव नहीं है बल्कि समिति का स्थाई कर्मचारी है।

उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत सहायक एक विभागीय पद है और आरोपित पहले यहां इंटरनेट कॉर्डिनेटर था जिसकी गलत तरीके से व्यक्तिगत सहायक के पद पर नियुक्ति भी गणेश गोदियाल द्वारा की गई।

उन्होंने कहा कि चोरी की घटना का खुलासा होने पर आरोपित को समिति की ओर से नोटिस जारी करने के साथ ही जांच समिति गठित कर दी गई थी। आरोपी को निलंबित करने के साथ ही उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया गया। उन्होंने की सरकार इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है और मामले में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।


‘टीएमसी को खत्म करना है तो पहले मुझे मारना होगा’- ममता बनर्जी

‘टीएमसी के नेताओं को डराया जा रहा है’—ममता बनर्जी ने भाजपा पर साधा निशाना

कोलकाता।  तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी राजनीतिक हलचल के बीच पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को एक वीडियो संदेश जारी कर भाजपा पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा उनकी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को लगातार निशाना बना रही है। ममता ने कहा कि अगर कोई उन्हें चुप कराना चाहता है या टीएमसी को खत्म करने की कोशिश करेगा, तो पहले उसे उन्हें खत्म करना होगा।

भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप

अपने वीडियो संदेश में ममता बनर्जी ने टीएमसी नेताओं के खिलाफ कथित कार्रवाई और पार्टी पर बढ़ते दबाव का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सुनियोजित तरीके से टीएमसी नेताओं और कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने का प्रयास कर रही है, ताकि पार्टी को कमजोर किया जा सके।

ममता ने कहा कि उनकी पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को लगातार निशाना बनाया गया है। उन्होंने महुआ मोइत्रा, अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि इन नेताओं पर राजनीतिक हमले किए गए। उन्होंने कहा, “आपने किसे नहीं निशाना बनाया? महुआ, अभिषेक बनर्जी, कल्याण बनर्जी पर हमला किया और यहां तक कि मेरे घर तक को नहीं छोड़ा।”

हिरासत में सहयोगियों के साथ दुर्व्यवहार का दावा

टीएमसी प्रमुख ने आरोप लगाया कि उनके कई सहयोगियों के साथ पुलिस हिरासत में अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कई नेताओं को जेल में फर्श पर सोने के लिए मजबूर किया गया, कुछ को कमर में रस्सी और पैरों में हथकड़ी लगाकर घुमाया गया, जबकि कुछ का सिर मुंडवा दिया गया। ममता ने यह भी दावा किया कि कुछ लोगों के साथ ऐसा व्यवहार किया गया, जिसका जिक्र करना भी शर्मनाक है।

पार्टी में बढ़ी अंदरूनी चुनौती

ममता बनर्जी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब तृणमूल कांग्रेस अंदरूनी असंतोष और बगावत जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं और संगठन में टूट की अटकलें तेज हैं। बताया जा रहा है कि बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी को करीब 60 विधायकों का समर्थन हासिल है।

टीएमसी छोड़ भाजपा में शामिल हुए तीन पूर्व सांसद

इसी बीच गुरुवार को टीएमसी के तीन पूर्व सांसद—सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश चिक बराइक—भाजपा में शामिल हो गए। कोलकाता के साल्ट लेक स्थित भाजपा कार्यालय में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इससे पहले ममता बनर्जी ने बागी नेताओं पर निशाना साधते हुए उन्हें पार्टी के साथ विश्वासघात करने वाला बताया था। उन्होंने कहा था कि जनता को ऐसे नेताओं को माफ नहीं करना चाहिए, जो टीएमसी छोड़कर भाजपा का दामन थाम चुके हैं। साथ ही उन्होंने नेताओं से दोहरी राजनीति से बचने और अपने फैसलों पर गंभीरता से विचार करने की अपील भी की।


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