Tuesday, August 11th, 2026

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मुख्यमंत्री ने नंदा की चौकी पुल के एप्रोच रोड के पुनर्निर्माण कार्य का किया निरीक्षण

Monthly Archives: August 2026

मुख्यमंत्री ने नंदा की चौकी पुल के एप्रोच रोड के पुनर्निर्माण कार्य का किया निरीक्षण

भाऊवाला से लौटते समय नंदा की चौकी पहुंचकर व्यवस्थाओं का लिया जायजा

एप्रोच रोड क्षतिग्रस्त होने पर राज्य सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 12 घंटे के भीतर कराया था पुनर्निर्माण

देहरादून।  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज सहसपुर के भाऊवाला में आयोजित महिला संवाद एवं सम्मान कार्यक्रम से वापस लौटते समय प्रेमनगर स्थित नंदा की चौकी पुल के एप्रोच रोड के पुनर्निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने कार्यस्थल पर पहुंचकर पुनर्निर्माण की गुणवत्ता, सुरक्षा व्यवस्थाओं तथा यातायात संचालन की स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की।


उल्लेखनीय है कि नंदा की चौकी पुल का एप्रोच रोड क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिलते ही राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित विभागों को तत्काल राहत एवं पुनर्निर्माण कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री के निर्देशन में युद्धस्तर पर कार्य करते हुए एप्रोच रोड का पुनर्निर्माण मात्र 12 घंटे के भीतर पूर्ण कर लिया गया, जिससे क्षेत्र में यातायात व्यवस्था शीघ्र सामान्य हो सकी और आमजन को होने वाली असुविधा से राहत मिली।

मुख्यमंत्री ने पुनर्निर्माण कार्य में सलंग्न अधिकारियों, अभियंताओं एवं कार्मिकों के त्वरित एवं समर्पित प्रयासों की सराहना भी की।


देहरादून-मसूरी रोड के बड़े होटलों में खाद्य सुरक्षा विभाग की छापेमारी

देहरादून। आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तराखंड विनय शंकर पांडे के निर्देशानुसार जनपद देहरादून में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने, उपभोक्ताओं को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने तथा एनालॉग पनीर एवं अन्य गैर-दुग्ध उत्पादों के नाम पर होने वाली अनियमितताओं एवं मिलावट पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से विशेष जांच अभियान चलाया गया।

अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम द्वारा देहरादून एवं मसूरी रोड स्थित प्रमुख होटल एवं फाइव स्टार प्रतिष्ठानों, जिनमें Taj Hotel, Fairfield, JW Marriott, Hyatt Centric तथा Hyatt Regency सहित अन्य प्रतिष्ठान शामिल हैं, में खाद्य सुरक्षा मानकों की सघन जांच की गई
निरीक्षण के दौरान होटल के किचन, स्टोर, खाद्य पदार्थों के भंडारण, कच्चे माल की गुणवत्ता, पैकेज्ड खाद्य सामग्री, खाद्य पदार्थों के रख-रखाव एवं स्वच्छता व्यवस्थाओं का बारीकी से परीक्षण किया गया।

खाद्य पदार्थों के नमूने जांच हेतु लिए गए जांच अभियान के दौरान Hyatt Regency से मसालों तथा JW Marriott से तैयार दाल का नमूना खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप परीक्षण हेतु लिया गया। सभी नमूनों को नियमानुसार प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा जा रहा है। प्रयोगशाला रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नियमानुसार अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।


इसके अतिरिक्त Hyatt Regency के स्टोर में उपलब्ध गुलकंद, इंपोर्टेड ऑर्गेनो एवं सौंफ के पैक्ड उत्पादों के संबंध में संबंधित निर्माताओं को आवश्यक दस्तावेज एवं गुणवत्ता संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने हेतु नोटिस जारी किए गए हैं। मामले में विभागीय कार्रवाई जारी है। खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा होटल प्रबंधन को खाद्य सुरक्षा एवं स्वच्छता से संबंधित सभी निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन करने तथा खाद्य सामग्री की खरीद एवं उपयोग में आवश्यक सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए।

आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तराखंड विनय शंकर पांडे ने कहा कि—“प्रदेश की जनता को सुरक्षित, शुद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। खाद्य प्रतिष्ठान चाहे छोटा हो या बड़ा, सामान्य दुकान हो अथवा फाइव स्टार होटल—खाद्य सुरक्षा के नियम सभी के लिए समान हैं।”

उन्होंने कहा कि एनालॉग पनीर, गैर-दुग्ध उत्पादों अथवा किसी भी प्रकार की मिलावटी एवं गैर-मानक खाद्य सामग्री के उपयोग या बिक्री की शिकायतों को विभाग गंभीरता से लेगा। ऐसे मामलों में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के अंतर्गत नियमानुसार प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।

आयुक्त खाद्य ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि होटल, रेस्टोरेंट, डेयरी, मिठाई प्रतिष्ठानों एवं अन्य खाद्य कारोबारियों की नियमित एवं औचक जांच जारी रखी जाए तथा नमूना संग्रहण एवं प्रयोगशाला परीक्षण की प्रक्रिया को प्रभावी बनाया जाए।

सरकार की प्राथमिकता—स्वस्थ नागरिक, सुरक्षित खाद्य
राज्य सरकार की स्पष्ट नीति है कि उत्तराखंड के प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित, स्वच्छ एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध हो। सरकार द्वारा खाद्य पदार्थों में मिलावट एवं खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत प्रभावी प्रवर्तन कार्रवाई की जा रही है।

सरकार का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि खाद्य कारोबारियों में गुणवत्ता, स्वच्छता एवं जिम्मेदार खाद्य प्रबंधन की संस्कृति विकसित करना भी है, ताकि प्रदेश में आने वाले पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों दोनों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध हो सकें।
जांच अभियान आगे भी रहेगा जारी
खाद्य सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान किसी एक दिन अथवा कुछ प्रतिष्ठानों तक सीमित नहीं रहेगा। देहरादून सहित पूरे जनपद में खाद्य प्रतिष्ठानों की औचक जांच, नमूना संग्रहण एवं गुणवत्ता परीक्षण की कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।

सैंपल की प्रयोगशाला रिपोर्ट एवं निरीक्षण के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

जांच टीम में रहे अधिकारी
अभियान के दौरान उपायुक्त गढ़वाल मंडल श्री राजेंद्र रावत, सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा जनपद देहरादून मनीष सयाना, वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी नगर निगम क्षेत्र रमेश सिंह, वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी ऋषिकेश संतोष कुमार सिंह सहित खाद्य सुरक्षा विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तराखंड जनपद देहरादून


तमकनाला में बेली ब्रिज बहने की घटना का मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान, निचले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता के निर्देश

मुख्यमंत्री धामी ने सचिव आपदा प्रबंधन से ली घटना की जानकारी

देहरादून।चमोली जिले के ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर तमकनाला में अत्यधिक जलप्रवाह के कारण बेली ब्रिज बहने की घटना का मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तत्काल संज्ञान लेते हुए सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन से घटना की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निचले क्षेत्रों में आवश्यक एहतियाती कदम उठाने, संवेदनशील क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा स्थिति सामान्य होने तक प्रभावित मार्ग पर आवाजाही प्रतिबंधित रखने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा बेली ब्रिज बहने के कारण आसपास के गांवों में राशन, खाद्य सामग्री, दवाइयों एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित न हो, इसके लिए प्रशासन को विशेष व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा की आवश्यकता पड़ने पर वैकल्पिक मार्गो से ग्रामीणों तक आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से निर्देश दिए कि नदी-नालों एवं जलप्रवाह वाले क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रखा जाए और आवश्यकता के अनुसार उन्हें सुरक्षित स्थानों पर रोका जाए। उन्होंने राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की कमी न रहने तथा सभी संबंधित एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय बनाए रखने के भी निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में लगातार बदल रहे मौसम को देखते हुए प्रशासन पूरी सतर्कता के साथ कार्य करे और किसी भी संभावित स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए।

SEOC से लगातार स्थिति पर नजर

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) से चमोली सहित प्रदेश के सभी संवेदनशील क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार 24×7 निगरानी रखी जा रही है। जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों से लगातार समन्वय किया जा रहा है तथा आवश्यकता के अनुसार राहत एवं बचाव दलों को तत्काल सक्रिय किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर तमकनाला में 123 बीआरटीएफ, सुराईथोटा द्वारा निर्मित बेली ब्रिज अत्यधिक जलप्रवाह के कारण पूरी तरह बह गया है। घटना के संबंध में प्राप्त सूचना के अनुसार नाले में अचानक बढ़े पानी के तेज बहाव की चपेट में आने से एक व्यक्ति एवं एक वाहन (कैंपर) के बहने की सूचना प्राप्त हुई है।

सूचना मिलते ही एसडीआरएफ एवं एनडीआरएफ की टीमें घटनास्थल के लिए रवाना कर दी गई हैं। स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं संबंधित विभागों द्वारा भी आवश्यक राहत एवं बचाव कार्रवाई की जा रही है। घटना स्थल पर स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है।

मलारी की ओर आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित

सुरक्षा के दृष्टिगत ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर मलारी की ओर वाहनों का आवागमन पूरी तरह रोक दिया गया है। प्रशासन द्वारा लोगों को प्रभावित एवं संवेदनशील क्षेत्र से दूर रहने तथा मार्ग की स्थिति सामान्य होने तक इस मार्ग पर यात्रा न करने की सलाह दी गई है।

सचिव आपदा प्रबंधन ने कहा कि नदी-नालों में जलस्तर बढ़ने तथा अचानक तेज जलप्रवाह की संभावना को देखते हुए निचले एवं नदी किनारे के क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। संबंधित जिला प्रशासन को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक एहतियाती कदम उठाने तथा लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।


समाधान दिवस में 145 से अधिक फरियादियों की सुनी समस्याएं, लंबित शिकायतों पर आयुक्त सख्त

180 दिन से लंबित मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की शिकायतें एक माह में निस्तारित करने के निर्देश, बुजुर्गों के लिए कलेक्ट्रेट में होगी निःशुल्क स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था

देहरादून- गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप की अध्यक्षता में सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समाधान दिवस में 145 से अधिक फरियादियों ने अपनी समस्याएं एवं शिकायतें आयुक्त के समक्ष रखीं। आयुक्त ने फरियादियों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए अधिकांश शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण किया। शेष शिकायतों के संबंध में संबंधित विभागीय अधिकारियों को त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

समाधान दिवस के दौरान आयुक्त ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर लंबित शिकायतों तथा विभागीय स्तर पर लंबित मुख्यमंत्री घोषणाओं की समीक्षा भी की। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर कतिपय शिकायतें 180 दिनों से अधिक समय से लंबित पाए जाने पर उन्होंने गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने संबंधित विभागों को एक माह के भीतर ऐसी सभी शिकायतों का अनिवार्य रूप से निस्तारण करने के निर्देश दिए। साथ ही 36 दिनों से अधिक समय से लंबित शिकायतों को भी प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने को कहा।

बुजुर्ग फरियादियों के लिए कलेक्ट्रेट में होगी स्वास्थ्य जांच
समाधान दिवस में बड़ी संख्या में बुजुर्ग फरियादियों के पहुंचने का संज्ञान लेते हुए आयुक्त ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों को अपनी शिकायत के निस्तारण के लिए लंबे समय तक प्रतीक्षा न करनी पड़े। उन्होंने कलेक्ट्रेट परिसर में ही निःशुल्क स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि फरियादी अपनी बारी की प्रतीक्षा के दौरान स्वास्थ्य जांच का लाभ भी प्राप्त कर सकें।

सड़क, सुरक्षा दीवार और आपदा से जुड़े मामलों पर त्वरित कार्रवाई
खत कोरू विकास समिति के अध्यक्ष ने कालसी विकासखंड में लंबे समय से स्वीकृत सड़कों का निर्माण कार्य शुरू न होने की शिकायत की। इस पर संबंधित अधिकारियों को शीघ्र निर्माण कार्य शुरू कराने के निर्देश दिए गए।

ग्राम प्रधान बड़ासी ग्रांट ने सौंग नदी का जलस्तर बढ़ने से सुरक्षा दीवार क्षतिग्रस्त होने तथा नदी के पानी का बहाव आबादी क्षेत्र की ओर होने से संभावित नुकसान की आशंका जताई। आयुक्त ने प्रभागीय वनाधिकारी को मौके की जांच कर सौंग नदी तट पर सुरक्षा दीवार निर्माण के लिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। वहीं ग्राम पंचायत बड़ासी ग्रांट में ग्राम समाज की भूमि पर अतिक्रमण की शिकायत पर तहसीलदार को जांच कर अवैध अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए।

अजबपुर कलां स्थित बैंक कॉलोनी में बरसात का पानी घरों में घुसने की शिकायत पर लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई करते हुए समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करने को कहा गया।

कालसी के पूर्व ब्लॉक प्रमुख मठोर सिंह चौहान ने ग्राम पंचायत सलगा के अंतर्गत डेगडा खंड में भारी वर्षा से पैदल पुलिया क्षतिग्रस्त होने की शिकायत रखी। आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों को आपदा मद में तत्काल आकलन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। आराघर निवासी मंचल बाला द्वारा पिछले वर्ष वर्षा से क्षतिग्रस्त मकान की मरम्मत के लिए अहेतुक सहायता नहीं मिलने की शिकायत पर तहसीलदार को मौका मुआयना कर एसडीआरएफ मानकों के अनुसार प्रस्ताव प्रस्तुत करने को कहा गया।

मार्ग अवरुद्ध करने और अतिक्रमण पर सख्त कार्रवाई के निर्देश
डांडा लखौंड वार्ड संख्या-60 के निवासियों ने सहस्रधारा रोड से डिफेंस कॉलोनी एन्क्लेव संपर्क मार्ग पर स्थानीय व्यक्तियों द्वारा सात फीट ऊंचे दो पिलर खड़े कर लोहे के गाटर डालकर मार्ग अवरुद्ध किए जाने की शिकायत की। इससे स्कूल बस, वैन, एंबुलेंस तथा ट्रैक्टर-ट्रॉली के आवागमन में परेशानी हो रही है। आयुक्त ने लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता को जांच कर तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

हरिपुर कलां क्षेत्र के वार्ड संख्या-41 में भवनों से निकलने वाले वर्षा जल को सीवर लाइन से जोड़ने के कारण सीवर का पानी घरों में भरने की शिकायत पर नगर निगम को पूरे नगर क्षेत्र में जांच अभियान चलाकर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

धोखाधड़ी और मुआवजे से जुड़े मामलों में भी कार्रवाई के निर्देश
आईटी पार्क निवासी मनमोहन सकलानी ने मकान खरीदने के नाम पर 20 लाख रुपये की धोखाधड़ी की शिकायत की। उन्होंने बताया कि लिखित एग्रीमेंट के आधार पर मकान खरीदने के लिए मकान मालिक को 20 लाख रुपये का भुगतान किया गया, लेकिन अब मकान मालिक रजिस्ट्री करने से इनकार कर रहा है और धनराशि भी वापस नहीं कर रहा है। आयुक्त ने एसडीएम को मामले की जांच कर नियमानुसार निस्तारण के निर्देश दिए।

68 वर्षीय प्रेम सिंह बिष्ट ने शिकायत की कि उनका दामाद मकान पर कब्जा करने की नीयत से उनके साथ मारपीट एवं धमकी दे रहा है तथा उन्हें उनके ही घर से बेघर करने का प्रयास कर रहा है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आयुक्त ने एसपी सिटी को तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

ऋषिकेश में आईएसबीटी से चंद्रभागा पुल तक सड़क निर्माण के लिए अधिग्रहित भूमि एवं दुकानों का वर्ष 2007 से मुआवजा लंबित होने की शिकायत पर ओसी डीएलआरसी को मामले की आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।

ग्राम पंचायत कावाखेड़ा से कांदोई भरम तक छह किलोमीटर मोटर मार्ग का निर्माण न होने से क्षेत्रवासियों को हो रही आवागमन की समस्या पर लोक निर्माण विभाग को शीघ्र आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। कौलागढ़ में भारी वर्षा से नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्कूल के आवासीय परिसर की दीवार क्षतिग्रस्त होने की शिकायत पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों को तत्काल प्रस्ताव उपलब्ध कराने को कहा गया।

वहीं, शुभव व्यास द्वारा पीएम सूर्य घर योजना के तहत सोलर लगाने के नाम पर धोखाधड़ी की शिकायत पर विद्युत विभाग के अधीक्षण अभियंता को दोषियों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

समाधान दिवस के अंत में गढ़वाल आयुक्त ने सभी अधिकारियों को स्पष्ट हिदायत दी कि स्थानीय स्तर की समस्याओं को जिला मुख्यालय तक न आने दें और उनका निस्तारण निचले स्तर पर ही सुनिश्चित करें। उन्होंने अवैध अतिक्रमण, भूमि पर अवैध कब्जे और भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

जनता दरबार में जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान, मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, डीएफओ वैभव सिंह, अपर जिलाधिकारी (वि.रा) केके मिश्रा, अपर जिलाधिकारी (प्रशा) स्मृता परमार, पुलिस अधीक्षक जगदीश पंत, संयुक्त मजिस्ट्रेट राहुल आनंद, सिटी मजिस्ट्रेट राकेश तिवारी, एसडीएम सदर अपूर्वा सिंह, एसडीएम अपर्णा ढौडियाल सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद थे।


मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना : हरित ऊर्जा के साथ मिल रहा स्वरोजगार

योजना के तहत 1132 सौर ऊर्जा संयंत्रों के जरिए 210 मेगावाट क्षमता सौर उर्जा का उत्पादन

देहरादून। उत्तराखंड के मूल निवासियों को स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना (एमएसएसवाई) राज्य में रोजगार के नए अवसर सृजित करने के साथ ही हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बन रही है। योजना के तहत जून माह तक 210 मेगावाट क्षमता के प्लांट स्थापित हो चुके हैं, जिससे 3500 से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभाग को मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के तहत 250 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य प्रदान किया है। योजना के अंतर्गत स्थानीय निवासियों द्वारा 20, 25, 50, 100 और 200 किलोवाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। इसके लिए आवेदकों को एमएसएमई नीति-2023 के तहत सभी लाभ दिए जा रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जून 2026 तक राज्य में कुल 1132 सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जिनकी सम्मिलित क्षमता 2,10,420 किलोवाट यानी करीब 210 मेगावाट है। शेष परियोजनाओं पर स्थापना का कार्य चल रहा है।

टिहरी जिले ने बनाई बढ़त
जिलेवार आंकड़ों में टिहरी सबसे आगे है। यहां 369 सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जिनकी सम्मिलित क्षमता 69,050 किलोवाट है। उत्तरकाशी में 227 संयंत्रों से 43,660 किलोवाट और चंपावत में 144 संयंत्रों से 28,200 किलोवाट क्षमता स्थापित हुई है। इसी तरह हरिद्वार में 86 संयंत्रों की क्षमता 16,900 किलोवाट, पौड़ी में 88 संयंत्रों की 15,440 किलोवाट, चमोली में 72 संयंत्रों की 11,725 किलोवाट और अल्मोड़ा में 32 संयंत्रों की 5,600 किलोवाट क्षमता दर्ज की गई है। देहरादून, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, नैनीताल, पिथौरागढ़ और ऊधमसिंह नगर में भी योजना के तहत सौर परियोजनाएं स्थापित की गई हैं।

3500 लोगों को रोजगार
मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना केवल सौर ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़ाने के माध्यम के रूप में भी देखा जा रहा है। योजना के तहत स्थापित परियोजनाओं से करीब 3500 लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। इससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों भी तेज हो रही हैं। जिससे पलायन में भी कमी आने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना उत्तराखंड के युवाओं और राज्य के निवासियों को स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। हमारा प्रयास है कि सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर उद्यमिता और रोजगार के अवसर बढ़ें। इससे हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्वतीय क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को मजबूती और पलायन को रोकने में भी मदद मिल रही है।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड


हर-हर महादेव के जयघोष के बीच निकली रेखा आर्या की कांवड़ यात्रा

भारी बारिश भी नहीं डिगा सकी ओलंपिक-2036 के संकल्प से रेखा आर्या के कदम

हर की पौड़ी से गंगाजल उठाकर वीरभद्र मंदिर के लिए रवाना हुई खेल मंत्री

हजारों खिलाड़ियों, युवाओं, महिलाओं और आमजन ने लिया हिस्सा

चार पड़ावों पर हुआ भव्य स्वागत, बारिश में भी गूंजते रहे हर-हर महादेव और भारत माता की जय के नारे

राष्ट्रीय खेल दिवस पर उत्तराखंड की पहली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के शुभारंभ की घोषणा

हरिद्वार/ऋषिकेश। भारत को वर्ष 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी दिलाने और देश को खेल महाशक्ति बनाने के संकल्प के साथ उत्तराखंड की खेल मंत्री रेखा आर्या ने सोमवार को हरिद्वार की पावन धरती से 22 किलोमीटर लंबी विशेष कांवड़ यात्रा शुरू की। हर की पौड़ी से सुबह सात बजे विधिवत संकल्प लेकर गंगाजल उठाने के साथ शुरू हुई यह यात्रा भारी बारिश के बीच भी लगातार जारी रही। मौसम ने कई बार परीक्षा ली, लेकिन खेल मंत्री रेखा आर्या और उनके साथ चल रहे हजारों खिलाड़ियों, एथलीटों, युवाओं, महिलाओं, खेल प्रेमियों और आम नागरिकों के कदम संकल्प से पीछे नहीं हटे।

हर-हर महादेव, भारत माता की जय और जय देवभूमि के नारों के बीच गंगाजल लेकर निकली कांवड़ यात्रा ने हरिद्वार से ऋषिकेश तक के मार्ग को भक्ति, राष्ट्रभक्ति और खेल चेतना से सराबोर कर दिया। यात्रा के दौरान जगह-जगह लोगों ने पुष्पमालाओं और पुष्पवर्षा से खेल मंत्री का स्वागत किया। कई स्थानों पर लोग ढोल-नगाड़ों और बैंड की धुन पर नृत्य करते हुए यात्रा में शामिल हुए। पूरे मार्ग में श्रद्धा और उत्साह का ऐसा माहौल रहा कि तेज बारिश भी कांवड़ियों और खेल प्रेमियों के जोश को कम नहीं कर सकी।

एक दिन पहले ही हरिद्वार पहुंच गई थीं खेल मंत्री

2036 ओलंपिक की मेजबानी भारत को मिले, इस संकल्प के साथ आयोजित की जा रही विशेष कांवड़ यात्रा को लेकर खेल मंत्री रेखा आर्या एक दिन पहले ही हरिद्वार पहुंच गई थीं। यात्रा की तैयारियों और संत-समाज के सानिध्य के बीच उन्होंने यात्रा के सफल आयोजन को लेकर आवश्यक व्यवस्थाओं का जायजा लिया। सोमवार सुबह निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार वह हर की पौड़ी पहुंचीं, जहां विधिवत पूजा-अर्चना के बाद सुबह सात बजे गंगाजल उठाया और भारत को वर्ष 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी मिलने तथा देश को खेलों के क्षेत्र में विश्व की अग्रणी खेल शक्ति बनाने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर हरिद्वार के साधु-संतों का भी विशेष सहयोग और सानिध्य रहा। संतों ने यात्रा के उद्देश्य के प्रति अपना आशीर्वाद देते हुए इसे देवभूमि से देश के लिए उठाया गया सकारात्मक और प्रेरणादायी संकल्प बताया।

कांवड़ यात्रा में श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के संरक्षक एवं अंतरराष्ट्रीय महामंत्री महंत हरि गिरि महाराज तथा अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी महाराज का भी विशेष सानिध्य और सहभागिता रही। संत-समाज की मौजूदगी ने यात्रा को धार्मिक और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान की।

बारिश शुरू होते ही सामने आई पहली चुनौती, लेकिन नहीं रुके कदम

हर की पौड़ी से कांवड़ यात्रा शुरू होते ही मौसम ने अचानक करवट ली और तेज बारिश शुरू हो गई। देखते ही देखते बारिश ने पूरे मार्ग को भिगो दिया। इसके बावजूद रेखा आर्या ने यात्रा को रोकने के बजाय अपने संकल्प के साथ आगे बढ़ना जारी रखा। उनके साथ चल रहे खिलाड़ी, एथलीट, युवा और आम नागरिक भी बारिश की परवाह किए बिना यात्रा में आगे बढ़ते रहे।

तेज बारिश के बीच गंगाजल लेकर आगे बढ़ती कांवड़ यात्रा ने एक अलग ही दृश्य प्रस्तुत किया। एक ओर आसमान से लगातार बारिश हो रही थी, वहीं दूसरी ओर सड़क पर हर-हर महादेव के जयघोष गूंज रहे थे। कई स्थानों पर लोग बारिश में भी यात्रा का स्वागत करने के लिए सड़क के दोनों ओर खड़े रहे।

रेखा आर्या ने इस दौरान कहा कि जब लक्ष्य देश से जुड़ा हो और संकल्प भारत के भविष्य से जुड़ा हो तो परिस्थितियां कदम रोक नहीं सकतीं। उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि देश के युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित करने और भारत को खेलों की दुनिया में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के संकल्प की यात्रा है।

हर पांच किलोमीटर पर बनाए गए चार पड़ाव

22 किलोमीटर लंबी इस विशेष कांवड़ यात्रा को व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाने के लिए लगभग हर पांच किलोमीटर के अंतराल पर चार प्रमुख पड़ाव बनाए गए थे। इन पड़ावों पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों, खिलाड़ियों, युवाओं और खेल प्रेमियों ने खेल मंत्री और यात्रा में शामिल लोगों का स्वागत किया।

चारों पड़ावों पर अलग-अलग स्थानों से हजारों की संख्या में लोग पहुंचे। कहीं फूल-मालाओं से स्वागत हुआ तो कहीं ढोल-नगाड़ों और बैंड की धुनों के साथ यात्रा का अभिनंदन किया गया। कई स्थानों पर युवा और महिलाएं नृत्य करते हुए यात्रा में शामिल हुए। हर पड़ाव पर हर-हर महादेव और भारत माता की जय के नारों से वातावरण गूंजता रहा।

बारिश के बावजूद इन पड़ावों पर लोगों का उत्साह देखते ही बनता था। यात्रा जैसे-जैसे आगे बढ़ती गई, इसमें शामिल लोगों की संख्या भी बढ़ती गई। रास्ते में स्थानीय लोग भी यात्रा का हिस्सा बनते गए।

हजारों खिलाड़ियों और एथलीटों ने लिया हिस्सा

इस विशेष कांवड़ यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें केवल धार्मिक आस्था से जुड़े लोग ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में खिलाड़ी, एथलीट, युवा, महिलाएं, खेल प्रेमी और आम नागरिक भी शामिल हुए।

उत्तराखंड सहित देश के विभिन्न हिस्सों से जुड़े खिलाड़ियों ने यात्रा में भाग लेकर भारत को खेल महाशक्ति बनाने के संकल्प के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई। खिलाड़ियों की मौजूदगी ने इस यात्रा को विशिष्ट पहचान दी।

खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि उत्तराखंड की धरती ने हमेशा देश को ऐसे खिलाड़ी दिए हैं जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है। उन्होंने कहा कि देवभूमि की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के साथ-साथ प्रदेश में खेलों के लिए बेहतर आधारभूत ढांचा तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा कि भारत के खिलाड़ी जिस आत्मविश्वास और मेहनत के साथ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी पहचान बना रहे हैं, वह इस बात का संकेत है कि भारत आने वाले वर्षों में खेलों की बड़ी शक्ति बन सकता है।

बारिश में भी गूंजता रहा हर-हर महादेव

यात्रा के दौरान कई बार बारिश इतनी तेज हुई कि कुछ समय के लिए सामने का रास्ता भी स्पष्ट दिखाई देना मुश्किल हो गया। इसके बावजूद यात्रा में शामिल लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ।

कांवड़ उठाए रेखा आर्या लगातार आगे बढ़ती रहीं। उनके साथ चल रहे लोग भी जयघोष करते हुए आगे बढ़ते रहे। जगह-जगह ढोल और बैंड की धुनों ने माहौल को और उत्साहपूर्ण बना दिया। युवा और महिलाएं नृत्य करते हुए यात्रा में शामिल होते रहे।

यात्रा में धार्मिक आस्था और खेल भावना का अनूठा संगम देखने को मिला। कांवड़ियों के साथ खिलाड़ियों ने भी पूरे उत्साह के साथ यात्रा पूरी की। कहीं शिवभक्ति के जयकारे लगे तो कहीं भारत माता की जय और ओलंपिक-2036 की मेजबानी भारत को मिले, इस संकल्प के नारे सुनाई दिए।

तीसरे पड़ाव के बाद रफ्तार नियंत्रित करने के लिए 20 मिनट रुकीं रेखा आर्या

यात्रा के दौरान एक रोचक स्थिति भी देखने को मिली। रेखा आर्या और उनके साथ चल रहे लोगों में उत्साह इतना अधिक था कि वह निर्धारित गति से काफी तेज चल रही थीं। यात्रा के तीसरे पड़ाव के बाद उन्हें करीब 20 मिनट के लिए रुकना पड़ा।

दरअसल, यात्रा के समय निर्धारण के अनुसार शाम करीब चार बजे तक वीरभद्र मंदिर पहुंचने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन रेखा आर्या और उनके साथ चल रहे लोगों का उत्साह इतना अधिक था कि वे तय समय से पहले ही पड़ावों तक पहुंच रहे थे। ऐसे में यात्रा की निर्धारित समय-सारिणी को बनाए रखने के लिए तीसरे पड़ाव के बाद करीब 20 मिनट का विराम लिया गया।

इस दौरान भी यात्रा में शामिल खिलाड़ियों और युवाओं का उत्साह बना रहा। पड़ाव पर मौजूद लोगों ने भी जयघोष और स्वागत के साथ वातावरण को ऊर्जावान बनाए रखा।

यात्रा में दिखा देवभूमि का जनसैलाब

हर की पौड़ी से शुरू हुई यात्रा जैसे-जैसे ऋषिकेश की ओर बढ़ी, लोगों की भागीदारी लगातार बढ़ती गई। मार्ग में स्थानीय लोगों ने भी यात्रा का स्वागत किया। कई स्थानों पर लोग अपने घरों और प्रतिष्ठानों से बाहर निकलकर यात्रा में शामिल हुए।

महिलाओं की बड़ी संख्या में मौजूदगी ने भी यात्रा को विशेष रूप दिया। युवा वर्ग ने पूरे जोश के साथ कांवड़ यात्रा में भाग लिया। खिलाड़ियों और एथलीटों ने इसे अपने खेल जीवन और देश के लिए एक अलग तरह के संकल्प से जोड़ा।

यात्रा में शामिल लोगों का कहना था कि खेल और आध्यात्मिकता का यह संगम युवाओं को सकारात्मक दिशा देने वाला है। भगवान शिव के प्रति आस्था के साथ देश के लिए खेलों में बड़ी उपलब्धियां हासिल करने का संकल्प यात्रा का मुख्य संदेश बना रहा।

वीरभद्र मंदिर में जलाभिषेक के साथ संकल्प को समर्पित की यात्रा

हर की पौड़ी से उठाया गया गंगाजल ऋषिकेश के पावन वीरभद्र मंदिर में भगवान भोलेनाथ के चरणों में अर्पित किया गया। यहां जलाभिषेक के साथ भारत को वर्ष 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी मिलने और देश को खेलों के क्षेत्र में विश्व की अग्रणी शक्ति बनाने का संकल्प दोहराया गया।

इस अवसर पर रेखा आर्या ने कहा कि हरिद्वार से उठाई गई गंगाजल की यह कांवड़ केवल जल लेकर चलने की यात्रा नहीं थी। इसमें देश के करोड़ों लोगों की आकांक्षाएं, खिलाड़ियों की मेहनत और युवाओं के सपने जुड़े हैं।

उन्होंने कहा कि भगवान शिव के चरणों में जल अर्पित करते हुए उन्होंने प्रार्थना की कि भारत को 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी मिले और देश के खिलाड़ी विश्व के सबसे बड़े खेल मंच पर भारत का तिरंगा और ऊंचा करें।

राष्ट्रीय खेल दिवस पर उत्तराखंड की पहली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी का शुभारंभ

यात्रा के दौरान खेल मंत्री रेखा आर्या ने उत्तराखंड के खेल क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि आगामी राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर उत्तराखंड की पहली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी का शुभारंभ किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। जरूरत केवल उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं, वैज्ञानिक प्रशिक्षण व्यवस्था और उच्च स्तरीय अवसर उपलब्ध कराने की है। स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगी।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को केवल राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय खेलों के क्षेत्र में भी मजबूत पहचान दिलाने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। खेल विश्वविद्यालय के माध्यम से खिलाड़ियों को शिक्षा, प्रशिक्षण और खेल विज्ञान से जुड़ी सुविधाओं का बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा।

रेखा आर्या ने कहा कि 2036 ओलंपिक की मेजबानी का संकल्प केवल दिल्ली या किसी एक शहर का संकल्प नहीं है, बल्कि यह पूरे देश का सपना है। उत्तराखंड भी इस राष्ट्रीय संकल्प में अपनी भूमिका निभाएगा और देवभूमि से देश के युवाओं को खेलों के क्षेत्र में आगे बढ़ने का संदेश दिया जाएगा।

धर्म, राष्ट्र और खेल चेतना का संगम बनी यात्रा

रेखा आर्या ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड सदैव देश के बड़े संकल्पों को ऊर्जा देने वाली भूमि रही है। हरिद्वार से ऋषिकेश तक निकाली गई यह कांवड़ यात्रा इसी परंपरा का हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि एक ओर कांवड़ यात्रा भगवान भोलेनाथ के प्रति आस्था का प्रतीक है, वहीं दूसरी ओर इसमें भारत को खेल महाशक्ति बनाने का संकल्प जोड़ा गया। इस तरह यह यात्रा धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्र निर्माण और खेल चेतना का संगम बन गई।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने खेलों के क्षेत्र में पिछले वर्षों में नई पहचान बनाई है। भारतीय खिलाड़ी लगातार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। अब लक्ष्य भारत को खेलों की दुनिया में और अधिक मजबूत बनाना तथा वर्ष 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी के लिए देश की दावेदारी को मजबूत करना है।

युवाओं को खेलों से जोड़ने का संदेश

खेल मंत्री ने कहा कि आज की कांवड़ यात्रा का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य युवाओं को खेलों से जोड़ने का संदेश देना भी है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में खेल, अनुशासन, मेहनत और सकारात्मक सोच को स्थान दें।

उन्होंने कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं है, बल्कि खेल व्यक्ति में अनुशासन, नेतृत्व, आत्मविश्वास और टीम भावना पैदा करते हैं। यही गुण एक मजबूत राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के युवाओं में प्रतिभा और ऊर्जा की कोई कमी नहीं है। सरकार का प्रयास है कि इन प्रतिभाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि देवभूमि के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश और देश का नाम रोशन कर सकें।

संतों के आशीर्वाद और जनता के संकल्प के साथ आगे बढ़ेगा अभियान

यात्रा में संत-समाज के सानिध्य को महत्वपूर्ण बताते हुए रेखा आर्या ने कहा कि संतों का आशीर्वाद देवभूमि के लिए हमेशा ऊर्जा का स्रोत रहा है। महंत हरि गिरि महाराज और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी महाराज सहित संत-समाज की सहभागिता ने इस संकल्प को आध्यात्मिक शक्ति प्रदान की है।

उन्होंने कहा कि यह यात्रा किसी एक व्यक्ति की यात्रा नहीं है। यह खिलाड़ियों, युवाओं, महिलाओं, संतों और आम नागरिकों की सामूहिक यात्रा है। भारत को खेल महाशक्ति बनाने और 2036 ओलंपिक की मेजबानी हासिल करने का संकल्प भी सामूहिक है।

“गंगाजल की हर बूंद में खिलाड़ियों का पसीना और भारत का सपना”

वीरभद्र मंदिर में जलाभिषेक के अवसर पर रेखा आर्या ने कहा कि हर की पौड़ी से उठाए गए गंगाजल की हर बूंद में भारत के युवाओं की उम्मीद, खिलाड़ियों का परिश्रम और देश को खेल महाशक्ति बनाने का सपना समाहित है।

उन्होंने कहा कि आज की यात्रा ने यह संदेश दिया है कि जब आस्था, युवा शक्ति, खेल भावना और राष्ट्रभक्ति एक साथ आती है तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं रहता।

उन्होंने कहा कि देवभूमि से उठी यह आवाज देश के कोने-कोने तक पहुंचे और हर युवा खेलों के प्रति जागरूक हो, यही इस यात्रा का उद्देश्य है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2036 के ओलंपिक की मेजबानी भारत को मिले, इसके लिए देश की जनता का आशीर्वाद और खिलाड़ियों का परिश्रम दोनों जरूरी हैं। उत्तराखंड इस राष्ट्रीय संकल्प में पूरी ऊर्जा के साथ अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेगा।

बारिश के बीच भी नहीं टूटा उत्साह

पूरी यात्रा के दौरान सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद यात्रा में शामिल लोगों का उत्साह लगातार बना रहा। तेज बारिश के बीच भी हजारों लोगों का कदम से कदम मिलाकर चलना इस बात का प्रमाण रहा कि संकल्प मजबूत हो तो परिस्थितियां बाधा नहीं बन सकतीं।

चारों पड़ावों पर उमड़ा जनसमूह, फूल-मालाओं से हुआ स्वागत, ढोल-नगाड़ों और बैंड की धुन, नृत्य करते युवा, उत्साह से शामिल महिलाएं, खिलाड़ियों की मौजूदगी और हर-हर महादेव के जयघोष ने इस यात्रा को यादगार बना दिया।

हरिद्वार से ऋषिकेश तक चली इस 22 किलोमीटर की यात्रा ने धार्मिक आस्था के साथ खेलों के प्रति नई चेतना और राष्ट्रीय संकल्प का संदेश दिया। यात्रा का उद्देश्य केवल गंगाजल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना नहीं था, बल्कि गंगाजल के साथ एक बड़े राष्ट्रीय सपने को भी आगे बढ़ाना था।

रेखा आर्या ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड से उठी यह संकल्प यात्रा देश के युवाओं को प्रेरित करती रहेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि खिलाड़ियों की मेहनत, युवाओं की ऊर्जा, संतों के आशीर्वाद और देशवासियों की सामूहिक इच्छा शक्ति के बल पर भारत खेलों की दुनिया में नई ऊंचाइयां हासिल करेगा।


सरकारी नीतियों में शामिल किए जाएंगे छात्र – छात्राओं के सुझाव – सीएम पुष्कर सिंह धामी

मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन कार्यक्रम में शामिल हुए सीएम पुष्कर सिंह धामी

सीएम धामी बोले – आज के विद्यार्थी ही भविष्य में उत्तराखंड और देश का नेतृत्व करेंगे

देहरादून- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन, में आयोजित मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने “मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन” पोर्टल का भी शुभारंभ किया। इसी के साथ विद्यालयी छात्र छात्राओं के बीच होने वाली “मेरे सपनों का उत्तराखण्ड: एक विकसित राज्य हेतु मेरा दृष्टिकोण” विषय की निबंध प्रतियोगिता का शुभारंभ हो गया है।

आयोजन के दौरान विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस निबंध प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले प्रदेश के 140 बच्चों को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही इन चयनित छात्र- छात्राओं का NEET, JEE, CLAT, SAT जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग सहित एवं अन्य आवश्यक शुल्कों का वहन भी राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा।

इस कार्यक्रम में प्रदेश भर के 2828 सरकारी / गैर सरकारी स्कूलों के 11 एवं 12 वीं के 3 लाख से अधिक छात्र- छात्राओं ने वर्चुअल तरीके से प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री से संवाद के दौरान छात्र-छात्राओं ने खेलों को बढ़ावा देने, सप्ताह में चार दिन खेल पीरियड आयोजित करने, विद्यालयों में मिल रहे विभिन्न अवसरों को और बढ़ाने, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखंड को अग्रणी बनाने, राज्य में पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने तथा विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने सहित विभिन्न सुझाव दिए। मुख्यमंत्री ने छात्रों के सुझावों को गंभीरता से लेते हुए स्वयं नोट किया और अधिकारियों को इनके अनुरूप कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्र-छात्राओं द्वारा दिए गए सुझावों को सरकार की नीतियों में भी शामिल किया जाएगा।

संवाद के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि छात्र-छात्राएं देश का वर्तमान और भविष्य हैं। उन्होंने कहा विद्यार्थियों को अपने सपनों को साकार करने की ओर आगे बढ़ना चाहिए। परीक्षा में नंबरों से ज्यादा विषयों की समझ होना जरूरी है। जीवन में संस्कार और अनुशासन अपनाने से सफलता अवश्य मिलती है। मुख्यमंत्री ने कहा छात्र छात्राओं को पढ़ने के तरीके को बदलने की आवश्यकता है। पढ़ाई को बोझ नहीं बल्कि भविष्य संवारने के रास्ते के तौर पर देखना होगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि छात्र – छात्राओं को अपने जीवन में लीडर बनकर आगे बढ़ना है। लीडर वो होता है जो अपने क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ काम करता है। उन्होंने कहा अपने काम, समाज के प्रति संवेदना, और कार्य के प्रति लगन किसी के नाम को भी अमर बना सकती है। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता स्वयं आगे बढ़ने में नहीं, बल्कि दूसरों को आगे बढ़ाने में है। उन्होंने कहा कि हम सभी को अपनी प्रतिभा और ऊर्जा का सकारात्मक दिशा में उपयोग करते हुए समाज और प्रदेश के विकास में योगदान देना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने युवाओं से अपने लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयास करने और चुनौतियों से सीख लेकर आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा हमें अपने जीवन में संकल्प लेना चाहिए और उस संकल्प में कोई विकल्प नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा जब हम बिना विकल्प के संकल्प लेते हैं तो हमें और तेजी से सफलता मिलती है। मुख्यमंत्री ने कहा आज के विद्यार्थी ही भविष्य के उत्तराखंड और देश का नेतृत्व करेंगे।

मुख्यमंत्री ने छात्रों से कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग तभी करें, जब उसकी वास्तव में आवश्यकता हो। उन्होंने कहा कि AI हमारे लिए उपयोगी और ज्ञानवर्धक है, लेकिन इसके अत्यधिक उपयोग के कुछ दुष्परिणाम भी हो सकते हैं। उन्होंने छात्रों से कहा कि किसी भी विषय पर सबसे पहले अपने विवेक, बुद्धि और सोचने की क्षमता का उपयोग करें तथा गुरुजनों के मार्गदर्शन और अनुभव से सीखें, इसके बाद आवश्यकता पड़ने पर AI की सहायता लें। उन्होंने कहा कि तकनीक हमारी सहयोगी होनी चाहिए, हमारी सोचने और सीखने की क्षमता का विकल्प नहीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ खेलों को भी बढ़ावा देना जरूरी है। उत्तराखंड में राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन के साथ ही खेलों के प्रति युवाओं और समाज में नई जागरूकता पैदा हुई है। अब हमारे छात्र खेलों में भी अपना भविष्य देख रहे हैं और विभिन्न खेल विधाओं में आगे बढ़ने के लिए निरंतर मेहनत कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना भी लागू की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वे विद्यार्थियों की सोच, उनकी आकांक्षाओं और भविष्य को लेकर उनके मन में चल रहे विचारों से भली-भांति परिचित हैं। उन्होंने कहा कि उनके घर में स्वयं जैन अल्फा और जैन जी हैं, इसलिए वे नई पीढ़ी की सोच, उनकी रुचियों और भविष्य को लेकर उनकी आकांक्षाओं को करीब से समझते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों के लिए संवाद का रास्ता हमेशा खुला है। विद्यार्थी अपनी समस्याओं, सुझावों और विचारों को खुलकर साझा कर सकते हैं। सरकार युवाओं की बात सुनने और उनके सुझावों पर विचार करने के लिए हमेशा तत्पर है। उन्होंने कहा कि निरंतर संवाद से ही बेहतर समझ और बेहतर भविष्य का निर्माण संभव है।

इस अवसर पर मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो.गोविंद सिंह, सचिव शिक्षा ज्योति यादव, अपर सचिव नमामि बंसल, महानिदेशक शिक्षा आकांक्षा कोंडे, गोविंद राम जायसवाल, राहुल अग्रवाल, रिया अग्रवाल एवं अन्य लोग मौजूद रहे।


टैक्स चोरी रोकने को AI का सहारा, मुख्य सचिव ने 4-5 महीने में एआई बेस्ड मैकेनिज्म तैयार करने के दिए निर्देश

देहरादून- मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सोमवार को सचिवालय में राजस्व वृद्धि के सम्बन्ध में अधिकारियों के साथ बैठक ली। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने लक्ष्य के सापेक्ष अर्जित राजस्व की जानकारी ली एवं राजस्व वृद्धि के नवीन प्रयास एवं नवाचारों पर अधिकारियों से चर्चा की।

मुख्य सचिव ने कहा कि एसजीएसटी में अभी काफी पोटेंशियल है। उन्होंने एसजीएसटी विभाग को टैक्स चोरी को रोकने के लिए एआई आधारित जाँच बढ़ाए जाने पर काम किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने अगले 4-5 महीनों में एआई बेस्ड मैकेनिज्म तैयार किए जाने के निर्देश दिए। साथ ही, कर सम्बन्धी सभी विभागों का डाटा इंटीग्रेशन किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने परिवहन विभाग के एएनपीआर कैमरों के प्रभावी उपयोग के साथ ही सब रजिस्ट्रार कार्यालयों में निबंधन और रजिस्ट्रेशन सम्बन्धी रखरखाव कार्यों का डिजिटाईजेशन किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वन या गैर क्षेत्रों में नये खनन लाटस चिन्हित किये जाएं तथा इस हेतु जिला प्रशासन का सहयोग भी प्राप्त किया जाए। उन्होंने परिवहन विभाग द्वारा स्थापित किये गये ए0एन0पी0आर0 कैमरा को खनन विभाग, वन विभाग तथा राज्य कर विभाग के साथ इंटिग्रेट किए जाने की बात कही।

मुख्य सचिव ने कहा कि वन निगम जिन खनन व प्रकाष्ठ लॉट्स पर कार्य नहीं कर पा रहा है, उन पर वन विभाग अपने स्तर से कार्यवाही करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जड़ी बूटी के क्षेत्र में भी अच्छा पोटेंशियल है। उन्होंने जड़ी बूटियों से सम्भावित आय का अध्ययन किए जाने की बात कही। कहा कि आय के नए स्रोत के रूप में कार्बन क्रेडिट, नये इको टूरिज्म स्थलों का विकास को सम्मिलित किया जाए। उन्होंने जनसामान्य को प्रकाष्ठ की सुगम उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु ऑनलाईन व्यवस्था की सुनिश्चित किए जाने पर जोर दिया। साथ ही इसके लिए आईटीडीए से तकनीकी सहायता हेतु समन्वय किए जाने की बात कही।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव दिलीप जावलकर, बृजेश कुमार संत, रणवीर सिंह चौहान, अपर सचिव हिमांशु खुराना, अनुराधा पाल एवं  मनमोहन मैनाली सहित सम्बन्धित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।


हेमकुंड साहिब के कपाट 10 अक्टूबर को होंगे बंद, अब तक 2.38 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

देहरादून: सिखों के पवित्र तीर्थ स्थल श्री हेमकुंड साहिब के कपाट बंद होने की तारीख का ऐलान कर दिया गया है। हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्र जीत सिंह बिंद्रा ने जानकारी दी है कि इस वर्ष हेमकुंड साहिब की यात्रा 10 अक्टूबर को औपचारिक रूप से संपन्न हो जाएगी। ट्रस्ट की ओर से देश-विदेश के तमाम श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे निर्धारित तिथि से पहले अपनी यात्रा पूरी कर लें।

इस साल हेमकुंड साहिब के कपाट 23 मई को विधि-विधान के साथ खोले गए थे। तब से लेकर अब तक लगभग 2 लाख 38 हजार से अधिक श्रद्धालु इस उच्च हिमालयी धाम के दर्शन कर चुके हैं और यात्रा को लेकर देश भर के भक्तों में भारी उत्साह देखने को मिला है। वर्तमान में हेमकुंड घाटी फूलों से पूरी तरह गुलजार है। वैली ऑफ फ्लावर्स की तरह यहां भी तमाम रंग-बिरंगे फूल और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाए जाने वाले दुर्लभ ब्रह्मकमल अपनी पूरी छटा के साथ खिले हुए हैं, जो इस आध्यात्मिक यात्रा को और भी अधिक मनमोहक बना रहे हैं।

समुद्र तल से 15,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित यह पवित्र धाम सात बर्फ से ढके शिखरों और एक स्वच्छ हिमानी झील के बीच स्थित है। यात्रा के सफल संचालन पर ट्रस्ट के अध्यक्ष ने उत्तराखंड सरकार, स्थानीय जिला प्रशासन, पुलिस, सुरक्षा बलों, सेना, सेवादारों और पूरी संगत का दिल से आभार व्यक्त किया है।


देहरादून में बारिश से बड़ा हादसा, करगी ग्रांट में दो दुकानें और एक मकान ढहा, लोगों में दहशत

देहरादून: राजधानी देहरादून समेत पूरे उत्तराखंड में मानसून की रफ्तार एक बार फिर तेज हो गई है। देर रात देहरादून में हुई भीषण बारिश के कारण बंजारावाला चांचक चौक के पास करगी ग्रांट स्थित बिस्मिल्लाह चौक में एक आवासीय मकान और दो दुकानें ढह गईं। अचानक हुए इस हादसे से इलाके में अफरा-तफरी मच गई, जिसके बाद स्थानीय निवासियों ने भागकर अपनी जान बचाई और आनन-फानन में अपना सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।

मौसम विज्ञान केंद्र के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, राज्य भर में तेज बारिश, गर्जन और आकाशीय बिजली चमकने की प्रबल संभावना है। स्थिति को देखते हुए मौसम विभाग ने देहरादून, नैनीताल, बागेश्वर और चंपावत जिलों के लिए अति भारी वर्षा का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी, पौड़ी, पिथौरागढ़ और उधम सिंह नगर जैसे अन्य जिलों के लिए भी येलो अलर्ट जारी करते हुए सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

लगातार हो रही बारिश के बढ़ते खतरे को देखते हुए मौसम वैज्ञानिकों ने बचने की अपील की है। विशेष रूप से पहाड़ी व संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और प्रशासनिक दिशानिर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।


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