Saturday, August 8th, 2026

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BLO और फील्ड स्टॉफ को प्रोत्साहित करें जिलाधिकारी – सीईओ

Daily Archives: 08/08/2026

BLO और फील्ड स्टॉफ को प्रोत्साहित करें जिलाधिकारी – सीईओ

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों के साथ बैठक कर SIR पर की समीक्षा

मतदाताओं से निरंतर संवाद करते रहें अधिकारी: सीईओ

देहरादून। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने शनिवार को कुमांऊ-गढ़वाल के मंडल आयुक्तों सहित सभी जनपदों के जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कांन्फ्रेंस कर विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की समीक्षा की। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी जनपदों के डीईओ को निर्देश देते हुए कहा कि बूथ लेवल अधिकारी और फील्ड स्टॉफ मेहनत से कार्य कर रहे हैं, लिहाजा उन्हें प्रोत्साहित किया जाए। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने निर्देश दिए कि जिन स्थानों पर बारिश के कारण आवाजाही प्रभावित है उन स्थानों पर विसंगति वाले मामलों में बीएलओ डाक्यूमेंट प्राप्त कर अपने स्तर पर रिपोर्ट लगाकर कार्रवाई करें। अनमैप्ड मतदाताओं की सुनवाई के लिए ईआरओ/एईआरओ सुविधाजनक रणनिति बनाते हुए कार्रवाई सुनिश्चित करें।

समीक्षा बैठक में मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी जनपदों के डीईओ को फार्म 6, फार्म 7 एवं फार्म 8 की वर्तमान स्थिति के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी ली। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने निर्देश दिए कि अधिकारी फील्ड पर जाकर मतदाताओं से संवाद स्थापित करें, ताकि मतदाताओं के मन में किसी भी प्रकार की भ्रांति न रहे। बैठक के दौरान मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर के जिलाधिकारियों को नोटिसों की सुनवाई के लिए और विस्तृत कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने आयुक्त कुमांऊ दीपक रावत एवं आयुक्त गढ़वाल आनंद स्वरुप के हाल में किए गए जनपद भ्रमण के बारे में फीडबैक लिया। इसके साथ ही दोनों आयुक्तों को निरंतर फील्ड विजिट कर करते रहने के निर्देश दिए।

बैठक में अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डा. विजय कुमार जोगदंडे, उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी किशन सिंह नेगी, सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास के अतरिक्त दोनों मंडलायुक्त एवं सभी जिलाधिकारी उपस्थित रहे।


युवा निशानेबाजों पर जसपाल राणा के सपने को साकार करने की जिम्मेदारी- रेखा आर्या

24वीं उत्तराखंड स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप का समापन, 2000 से अधिक निशानेबाजों ने लिया हिस्सा

देहरादून। पौंधा स्थित राणा इंस्टीट्यूट ऑफ शूटिंग स्पोर्ट्स परिसर में आयोजित 24वीं उत्तराखंड स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप-2026 का शनिवार को समापन हुआ। समापन समारोह में खेल मंत्री रेखा आर्या मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उन्होंने प्रतियोगिता के विजेता खिलाड़ियों को मेडल पहनाकर सम्मानित किया।

2 से 8 अगस्त तक आयोजित प्रतियोगिता में विभिन्न राज्यों से आए 2000 से अधिक निशानेबाजों ने प्रतिभाग किया। खिलाड़ियों ने विभिन्न शूटिंग स्पर्धाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

महान निशानेबाज स्वर्गीय जसपाल राणा की स्मृति में आयोजित प्रतियोगिता के समापन अवसर पर रेखा आर्या ने कहा कि जसपाल राणा ने शूटिंग के क्षेत्र में भारत को वैश्विक महाशक्ति बनाने का जो सपना देखा था, उसे पूरा करने की जिम्मेदारी अब युवा खिलाड़ियों के कंधों पर है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के युवा खिलाड़ियों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है और सरकार उन्हें बेहतर अवसर एवं सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रही है।

रेखा आर्या ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार खेल और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। खिलाड़ियों को अपने खेल पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड और देश का नाम रोशन करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रदेश में खेलों के लिए बेहतर माहौल तैयार करना और खिलाड़ियों को आवश्यक प्रशिक्षण, सुविधाएं एवं संसाधन उपलब्ध कराना है। इस प्रकार की प्रतियोगिताएं युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने और बड़े मंचों के लिए तैयार होने का अवसर देती हैं।

समापन समारोह में उत्तराखंड राइफल एसोसिएशन के अध्यक्ष नारायण सिंह राणा, पैरालंपिक कोच सुभाष राणा और मधु मारवाह सहित अन्य गणमान्य लोग, आयोजक एवं खेलप्रेमी उपस्थित रहे।


शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने विभागीय अधिकारियों के साथ की समीक्षा बैठक

योजनाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश

देहरादून। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आज शासकीय आवास पर विद्यालयी शिक्षा, संस्कृत शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, उच्च शिक्षा और सहकारिता विभाग के अधिकारियों के साथ संयुक्त समीक्षा बैठक की। बैठक में विभागों के अंतर्गत संचालित राज्य और केंद्र पोषित योजनाओं की प्रगति की बारीकी से समीक्षा की गई।

मंत्री ने अधिकारियों से विभागवार योजनाओं की वर्तमान स्थिति की जानकारी ली और स्वीकृत बजट का निर्धारित समयसीमा के भीतर उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं के तहत चल रहे निर्माण एवं विकास कार्यों में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए और इन्हें जल्द पूरा किया जाए।

सहकारिता विभाग की योजनाओं की समीक्षा के दौरान डॉ. रावत ने इनका लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रभावी स्तर पर प्रयास तेज करने को कहा। उन्होंने योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने और आमजन को उनका सीधा लाभ दिलाने पर जोर दिया।

बैठक में शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को लेकर भी विशेष चर्चा हुई। मंत्री ने विद्यालयी, उच्च और तकनीकी शिक्षा में तकनीकी संसाधनों के प्रभावी उपयोग के निर्देश देते हुए विद्यार्थियों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

उन्होंने अधिकारियों से विभागीय योजनाओं की नियमित निगरानी करने और तय लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने को कहा।


महिला आरक्षण कानून पर फिर गरमाई सियासत, राहुल गांधी ने सरकार को घेरा

राहुल गांधी बोले- कानून लागू करने में देरी क्यों?

नई दिल्ली। महिला आरक्षण कानून को लागू करने को लेकर कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच सियासी तकरार एक बार फिर तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस पहले ही महिला आरक्षण कानून का समर्थन कर चुकी है। उन्होंने केंद्र से सवाल किया कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले कानून को लागू करने में देरी क्यों हो रही है और इसे लोकसभा परिसीमन से जोड़ने की जरूरत क्यों पड़ रही है।

राहुल गांधी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कांग्रेस का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ संसद में कांग्रेस के समर्थन से पारित हुआ था। ऐसे में अब इसे लागू करने के लिए किसी नई शर्त की जरूरत नहीं होनी चाहिए। राहुल ने सरकार से कानून को बिना शर्त लागू करने की मांग की।

रिजिजू ने कांग्रेस से मांगा था समर्थन

दरअसल, यह विवाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बयान के बाद सामने आया। राहुल गांधी ने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर एक वीडियो संदेश जारी किया था। इसमें उन्होंने कहा था कि महिलाओं की आवाज और उनकी भागीदारी के बिना देश का विकास अधूरा रहेगा।

राहुल गांधी के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए रिजिजू ने इसे कांग्रेस की ओर से सकारात्मक संदेश बताया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की महिलाओं के प्रति सोच में बदलाव दिखाई दे रहा है। इसी के साथ उन्होंने कांग्रेस से महिला आरक्षण विधेयक को बिना शर्त समर्थन देने की चुनौती भी दी।

कांग्रेस की आपत्ति किस बात पर है?

कांग्रेस और विपक्षी दल महिला आरक्षण के प्रावधान का समर्थन करते रहे हैं, लेकिन परिसीमन के साथ इसे जोड़ने का विरोध करते हैं। विपक्ष की दलील है कि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने को लोकसभा सीटों के परिसीमन की प्रक्रिया पर निर्भर नहीं किया जाना चाहिए।

परिसीमन के जरिए लोकसभा की सीटों की संख्या और उनके क्षेत्र का पुनर्निर्धारण किया जाना प्रस्तावित है। विपक्ष चाहता है कि महिला आरक्षण को परिसीमन की प्रक्रिया से अलग रखते हुए इसे जल्द लागू किया जाए।

2023 में संसद से पारित हुआ था कानून

‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका है। इस कानून में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था। हालांकि, इसके प्रभावी क्रियान्वयन की प्रक्रिया परिसीमन और उससे जुड़ी संवैधानिक प्रक्रिया से संबद्ध है।

दिए गए विवरण के मुताबिक, 17 अप्रैल को लोकसभा में संविधान संशोधन से जुड़ा एक विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका। इसके चलते कानून को लागू करने की आगे की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।

अब राहुल गांधी के बयान के बाद महिला आरक्षण कानून का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस जहां इसे बिना शर्त लागू करने की मांग कर रही है, वहीं केंद्र और विपक्ष के बीच परिसीमन को लेकर मतभेद बने हुए हैं।


स्वच्छ एवं सुंदर शहर के लिए जनसहभागिता जरूरी- डीएम

विशेष स्वच्छता अभियान में डीएम एवं सचिव विधिक सेवा प्राधिकरण ने किया प्रतिभाग, 100 से अधिक लोग बने इस अभियान का हिस्सा

देहरादून। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को नगर निगम क्षेत्रान्तर्गत लक्ष्मण चौक एवं कांवली रोड क्षेत्र में विशेष स्वच्छता एवं स्वच्छता जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। अभियान में जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने प्रतिभाग करते हुए स्वयं स्वच्छता अभियान का जायजा लिया तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

अभियान में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला प्रशासन, नगर निगम, वेस्ट वॉरियर्स संस्था सहित विभिन्न संस्थाओं के अधिकारी-कर्मचारियों, स्वयंसेवकों एवं स्थानीय नागरिकों ने सक्रिय सहभागिता की। अभियान में 100 से अधिक लोगों ने प्रतिभाग करते हुए क्षेत्र में सफाई अभियान चलाया और आमजन को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया।

जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने संबंधित अधिकारियों एवं नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान के दौरान चिन्हित स्थलों पर समुचित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ ही कूड़ा उठान एवं उसके वैज्ञानिक ढंग से निस्तारण की प्रभावी व्यवस्था बनाए रखी जाए। उन्होंने कहा कि केवल अभियान के दौरान सफाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि चिन्हित क्षेत्रों में नियमित निगरानी एवं निरंतर स्वच्छता व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शहर के विभिन्न क्षेत्रों में नियमित रूप से स्वच्छता अभियान संचालित किए जाएं तथा स्थानीय नागरिकों को भी इन अभियानों से जोड़ते हुए स्वच्छता को जनआंदोलन का स्वरूप दिया जाए। उन्होंने कहा कि स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए संबंधित विभागों एवं संस्थाओं के मध्य बेहतर समन्वय के साथ कार्य किया जाना आवश्यक है।

जिलाधिकारी ने कहा कि स्वच्छ एवं सुंदर शहर के निर्माण के लिए केवल प्रशासनिक प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि आमजन की सक्रिय सहभागिता भी जरूरी है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अपने घर, प्रतिष्ठान एवं आसपास के क्षेत्रों को स्वच्छ रखें, कूड़ा निर्धारित स्थान पर ही डालें तथा सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी न फैलाएं। उन्होंने कहा कि नागरिकों के सहयोग से ही शहर की स्वच्छता व्यवस्था को स्थायी एवं प्रभावी बनाया जा सकता है।

जिलाधिकारी ने सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग को रोकने की दिशा में भी प्रभावी कार्रवाई एवं जनजागरूकता अभियान संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सिंगल यूज प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक करने के साथ ही इसके उपयोग को हतोत्साहित करने के लिए संबंधित विभागों एवं संस्थाओं की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। इस दिशा में निरंतर अभियान चलाए जाएंगे।

इस अवसर पर सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सीमा डुंगराकोटी ने स्वच्छता अभियान में प्रतिभाग किया और आमजन को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया। उन्होंने कहा कि स्वच्छता को अपने दैनिक जीवन एवं नैतिक दायित्व का हिस्सा बनाकर ही हम अपने घर, मोहल्ले, शहर एवं राज्य को स्वच्छ रख सकते हैं। उन्होंने लोगों से स्वच्छता के प्रति जागरूक रहते हुए अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ बनाए रखने की अपील की। अभियान के दौरान विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं द्वारा अपने निर्धारित दायित्वों का निर्वहन करते हुए सफाई कार्य किया गया तथा चिन्हित स्थलों पर स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई।

इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी प्रशासन स्मृता परमार, मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी नगर निगम, तहसीलदार सदर सुरेंद्र देव, वेस्ट वॉरियर्स संस्था से नवीन सडाना सहित जिला प्रशासन, नगर निगम, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं विभिन्न संस्थाओं के अधिकारी-कर्मचारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।


55 साल, 5000 मैच और अनगिनत रिकॉर्ड… जानिए कैसे बदलता गया पुरुष वनडे क्रिकेट का रोमांच

भारत के नाम सबसे ज्यादा मुकाबले

नई दिल्ली। पुरुष वनडे क्रिकेट ने अपने इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि दर्ज कर ली है। स्कॉटलैंड और कनाडा के बीच शुक्रवार को खेले गए मुकाबले के साथ ही वनडे क्रिकेट में 5000 मैच पूरे हो गए। जनवरी 1971 में शुरू हुआ यह फॉर्मेट अब 55 साल का सफर तय कर चुका है। इस दौरान वनडे क्रिकेट ने कई बदलाव देखे और कई बार इसके भविष्य को लेकर सवाल भी उठे, लेकिन यह आज भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अहम हिस्सा बना हुआ है।

टेस्ट क्रिकेट की शुरुआत वनडे से करीब 94 साल पहले, 1877 में हुई थी। वहीं टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट का पहला मुकाबला 2005 में खेला गया। जहां टेस्ट अभी 3000 मैचों के आंकड़े तक नहीं पहुंचा है, वहीं टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले 4000 का आंकड़ा पार कर चुके हैं। वनडे ने इस बीच 5000 मैचों का ऐतिहासिक पड़ाव छू लिया है।

24 साल में हुए पहले 1000 मैच

वनडे क्रिकेट के शुरुआती दौर में 1000 मुकाबले पूरे करने में 24 साल लगे। 1995 में इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के बीच नॉटिंघम में खेला गया मुकाबला 1000वां वनडे था। इसके बाद खेल की लोकप्रियता बढ़ती गई और अगले 4000 मैच महज 31 साल में खेले गए।

दूसरे 1000 वनडे पूरे होने में सिर्फ आठ साल लगे। 2007 में एक कैलेंडर वर्ष में 191 वनडे खेले गए थे। यह रिकॉर्ड 2023 में टूट गया, जब वनडे विश्व कप वाले साल में 218 मुकाबले खेले गए। हालांकि, पांचवें 1000 मैचों के दौर में 3065 दिन लगे। कोरोना महामारी, टी20 लीग की बढ़ती लोकप्रियता और द्विपक्षीय सीरीज के छोटे होने जैसे कारणों से वनडे मैचों की संख्या प्रभावित हुई।

बल्लेबाजों का बढ़ा दबदबा, स्कोरिंग रेट में इजाफा

समय के साथ वनडे क्रिकेट में रन बनाने की रफ्तार भी तेज हुई है। पहले 1000 मैचों में पहली पारी का औसत स्कोर 213.90 रन था, जो दूसरे दौर में बढ़कर 232.62 और तीसरे में 240.43 रन हो गया। चौथे 1000 मैचों में यह आंकड़ा 250.68 तक पहुंचा। हालांकि, पांचवें दौर में मामूली गिरावट के साथ औसत 249.97 रन रहा।

बड़े स्कोर भी अब वनडे का नियमित हिस्सा बन चुके हैं। हाल के 1000 मैचों में 300 या उससे ज्यादा रन के 321 स्कोर बने। इनमें 86 बार टीमों ने 350 रन का आंकड़ा पार किया, जबकि 14 बार स्कोर 400 के पार पहुंचा।

छक्कों की संख्या तीन गुने से ज्यादा

वनडे क्रिकेट में बल्लेबाजी के आक्रामक अंदाज का अंदाजा छक्कों के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। शुरुआती 1000 मुकाबलों में 2729 से ज्यादा छक्के लगे थे, जबकि 4001 से 4998वें मैचों के दौर में यह संख्या बढ़कर 9274 हो गई।

हाल के 1000 मैचों में प्रति मुकाबला औसतन 9.29 छक्के लगे। वहीं शुरुआती दौर में यह आंकड़ा काफी कम था। बल्लेबाजी औसत भी पहले 1000 मैचों के 26.39 से बढ़कर हालिया दौर में 29.03 हो गया है। स्ट्राइक रेट 66.15 से बढ़कर 83.4 तक पहुंच चुका है।

हेंस और अकरम से लेकर होप और जैम्पा तक

वनडे के अलग-अलग दौर में अलग-अलग खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। शुरुआती 1000 मैचों में डेसमंड हेंस 8648 रन के साथ शीर्ष बल्लेबाज रहे। इसके बाद सचिन तेंदुलकर ने 9149 रन बनाकर यह स्थान हासिल किया।

गेंदबाजी में शुरुआती दौर में वसीम अकरम 273 विकेट के साथ सबसे आगे थे। बाद में मुथैया मुरलीधरन ने उन्हें पीछे छोड़ा और आज भी वनडे में सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं।

हालिया 1000 वनडे में शाई होप 5391 रन के साथ सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे, जबकि एडम जैम्पा 156 विकेट के साथ शीर्ष गेंदबाज रहे।

सबसे ज्यादा वनडे खेलने वाली टीम भारत

टीमों के रिकॉर्ड की बात करें तो भारत ने सबसे ज्यादा 1081 वनडे मुकाबले खेले हैं। इनमें टीम को 575 मैचों में जीत मिली है। ऑस्ट्रेलिया 1025 मैचों में 619 जीत के साथ सबसे सफल टीम है। पाकिस्तान ने 1002 मैचों में 529 जीत दर्ज की हैं।

विदेशी मैदानों पर भी भारत का रिकॉर्ड मजबूत रहा है। भारत ने 695 वनडे बाहर खेलते हुए 340 मुकाबले जीते हैं। वहीं घरेलू मैदान पर भारत ने 386 मैचों में 235 जीत हासिल की हैं।

विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया का दबदबा

वनडे विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया सबसे सफल टीम है। उसने अब तक छह बार विश्व कप का खिताब जीता है। ऑस्ट्रेलिया ने 1987, 1999, 2003, 2007, 2015 और 2023 में ट्रॉफी अपने नाम की।

भारत और वेस्टइंडीज दो-दो बार विश्व चैंपियन बन चुके हैं। इंग्लैंड, पाकिस्तान और श्रीलंका ने एक-एक बार विश्व कप जीता है।

रोहित शर्मा के नाम सबसे बड़ी पारी

वनडे क्रिकेट में सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी का रिकॉर्ड भारतीय बल्लेबाज रोहित शर्मा के नाम है। उन्होंने 2014 में श्रीलंका के खिलाफ 264 रन की ऐतिहासिक पारी खेली थी। यह रिकॉर्ड आज भी कायम है।

इस सूची में मार्टिन गप्टिल 237 नाबाद रन के साथ दूसरे, वीरेंद्र सहवाग 219 रन के साथ तीसरे और क्रिस गेल 215 रन के साथ चौथे स्थान पर हैं।

चामिंडा वास का गेंदबाजी रिकॉर्ड कायम

एक वनडे पारी में सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी का रिकॉर्ड श्रीलंका के चामिंडा वास के नाम है। उन्होंने 2001 में जिम्बाब्वे के खिलाफ सिर्फ 19 रन देकर आठ विकेट लिए थे। वनडे में यह अब तक का इकलौता आठ विकेट वाला गेंदबाजी प्रदर्शन है।

सबसे ज्यादा वनडे विकेट लेने वालों की सूची में मुथैया मुरलीधरन 534 विकेट के साथ शीर्ष पर हैं। वसीम अकरम 502 विकेट के साथ दूसरे और वकार यूनिस 416 विकेट के साथ तीसरे स्थान पर हैं।

सबसे ज्यादा रन सचिन के नाम, शतकों में कोहली आगे

वनडे में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर के नाम है। उन्होंने 463 मैचों में 18,426 रन बनाए हैं। विराट कोहली 14,941 रन के साथ दूसरे स्थान पर हैं।

हालांकि, सबसे ज्यादा वनडे शतक लगाने के मामले में विराट कोहली अब सचिन तेंदुलकर से आगे निकल चुके हैं। कोहली के नाम 54 शतक हैं, जबकि सचिन ने 49 शतक लगाए हैं। रोहित शर्मा 34 शतकों के साथ तीसरे स्थान पर हैं।

31 गेंदों में शतक का रिकॉर्ड

वनडे में सबसे तेज शतक का रिकॉर्ड दक्षिण अफ्रीका के एबी डिविलियर्स के नाम है। उन्होंने 2015 में वेस्टइंडीज के खिलाफ सिर्फ 31 गेंदों में शतक जड़ा था। इसी मुकाबले में उन्होंने 16 गेंदों में अर्धशतक भी पूरा किया था।

सबसे तेज अर्धशतक के मामले में भी डिविलियर्स 16 गेंदों के साथ शीर्ष पर हैं। मैथ्यू फोर्ड ने 2025 में 16 गेंदों में अर्धशतक लगाकर इस रिकॉर्ड की बराबरी की।

कप्तानी में पोंटिंग सबसे आगे

वनडे में कप्तान के तौर पर सबसे ज्यादा जीत का रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया के रिकी पोंटिंग के नाम है। उन्होंने 230 मैचों में ऑस्ट्रेलिया की कप्तानी करते हुए 165 मुकाबले जीते।

भारत की ओर से एमएस धोनी सबसे सफल कप्तान हैं। धोनी ने 200 वनडे में कप्तानी की और 110 मैचों में टीम को जीत दिलाई।


कपकोट में खीर गंगा नदी से 49 वर्षीय व्यक्ति का शव बरामद

SDRF की टीम ने नदी से बाहर निकाला

कपकोट। कपकोट क्षेत्र में खीर गंगा नदी में एक व्यक्ति का शव मिलने से हड़कंप मच गया। सूचना मिलने के बाद SDRF की टीम ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू अभियान चलाया और शव को नदी से बाहर निकालकर सड़क तक पहुंचाया। इसके बाद शव को आवश्यक कार्रवाई के लिए जिला पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया।

जानकारी के अनुसार, थाना कपकोट को सुबह खीर गंगा नदी में एक व्यक्ति का शव दिखाई देने की सूचना मिली थी। शव को नदी से बाहर निकालने के लिए SDRF की मदद मांगी गई। सूचना मिलते ही पोस्ट कपकोट से उप निरीक्षक राजेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में SDRF टीम तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना हुई।

मौके पर पहुंचने के बाद SDRF जवानों ने त्वरित रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। टीम ने ब्लॉक कपकोट के समीप खीर गंगा नदी के किनारे से तारा सिंह पुत्र मोहन सिंह, निवासी जालेख, उम्र करीब 49 वर्ष का शव बरामद किया।

रेस्क्यू टीम ने शव को नदी से सुरक्षित बाहर निकालकर सड़क तक पहुंचाया। इसके बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई के लिए शव जिला पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। पुलिस की ओर से मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।


बार-बार फूल रही है सांस तो न करें नजरअंदाज, दिल से लेकर फेफड़ों तक इन बीमारियों का हो सकता है संकेत

सीढ़ियां चढ़ते ही सांस फूलना, थोड़ी दूर चलते ही हांफने लगना या सामान्य काम करने के बाद भी सांस लेने में परेशानी होना कई लोग थकान समझकर टाल देते हैं। खासकर कम उम्र में ऐसी समस्या होने पर इसे फिटनेस की कमी या कमजोरी से जोड़ दिया जाता है। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार लगातार या असामान्य तरीके से सांस फूलना शरीर में किसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है। इसकी वजह केवल फेफड़ों से जुड़ी बीमारी ही नहीं, बल्कि हृदय संबंधी परेशानी, खून की कमी या अन्य गंभीर स्थितियां भी हो सकती हैं।

मेडिकल भाषा में सांस फूलने की समस्या को डिस्प्निया कहा जाता है। तेज दौड़ने, व्यायाम करने या अधिक मेहनत के बाद कुछ समय के लिए सांस तेज होना सामान्य है। लेकिन यदि बिना ज्यादा मेहनत के ही सांस फूलने लगे, थोड़ी दूरी चलने पर परेशानी होने लगे या आराम करते समय भी सांस लेने में दिक्कत महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

आखिर क्यों फूलती है सांस?

सांस फूलना अपने आप में कोई बीमारी नहीं, बल्कि शरीर में किसी गड़बड़ी का संकेत हो सकता है। शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए फेफड़े, हृदय, रक्त और मांसपेशियां मिलकर काम करते हैं।

फेफड़े हवा से ऑक्सीजन लेकर उसे रक्त तक पहुंचाते हैं। इसके बाद लाल रक्त कोशिकाएं ऑक्सीजन को शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक ले जाती हैं और हृदय इस रक्त को पूरे शरीर में पंप करता है। इस प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर समस्या आने पर शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी महसूस हो सकती है।

दिल की बीमारी का भी हो सकता है संकेत

सांस फूलने को केवल फेफड़ों की समस्या मानना सही नहीं है। कई हृदय रोगों में भी यह शुरुआती लक्षण के रूप में सामने आ सकता है। यदि हृदय की पंपिंग क्षमता कमजोर हो जाए या हृदय की मांसपेशियों तक पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन न पहुंच पाए, तो शरीर की जरूरत पूरी करने में परेशानी होती है और सांस फूल सकती है।

कोरोनरी आर्टरी डिजीज में हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में वसा और कोलेस्ट्रॉल जमा होने से उनका रास्ता संकरा हो सकता है। इससे हृदय को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती और शारीरिक गतिविधि के दौरान सांस फूलने जैसी समस्या हो सकती है।

इसके अलावा हार्ट वाल्व की बीमारी में भी सांस फूलना देखा जा सकता है। हृदय के वाल्व रक्त को सही दिशा में प्रवाहित करने में मदद करते हैं। वाल्व के संकरे होने या सही तरीके से बंद न होने पर हृदय को रक्त पंप करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है, जिससे सांस लेने में परेशानी हो सकती है।

अस्थमा और सीओपीडी भी हो सकते हैं जिम्मेदार

सांस फूलने के प्रमुख कारणों में अस्थमा भी शामिल है। इसमें वायुमार्ग में सूजन और संकुचन हो सकता है, जिससे फेफड़ों में हवा का आवागमन प्रभावित होता है। इसके चलते सांस फूलने के साथ घरघराहट, खांसी और सीने में जकड़न जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

धूल, धुआं, परागकण, ठंडी हवा, एलर्जी या वायरल संक्रमण जैसी स्थितियां अस्थमा के लक्षणों को बढ़ा सकती हैं।

वहीं क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) में वायुमार्ग और फेफड़ों की कार्यक्षमता धीरे-धीरे प्रभावित होती है। इसमें लंबे समय तक खांसी, बलगम, सांस फूलना और मामूली शारीरिक गतिविधि के बाद भी थकान जैसी शिकायत हो सकती है।

खून की कमी से भी हो सकती है सांस फूलने की परेशानी

हर बार सांस फूलने की वजह हृदय या फेफड़ों की बीमारी नहीं होती। एनीमिया भी इसका एक कारण हो सकता है। शरीर में हीमोग्लोबिन कम होने पर रक्त पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन को शरीर के अंगों तक नहीं पहुंचा पाता।

ऐसे में शरीर ऑक्सीजन की कमी पूरी करने के लिए तेजी से सांस लेने की कोशिश करता है। यही वजह है कि एनीमिया से पीड़ित व्यक्ति को सामान्य काम करने, पैदल चलने या सीढ़ियां चढ़ने के दौरान भी सांस फूलने की शिकायत हो सकती है।

फेफड़ों में खून का थक्का पहुंचना भी गंभीर स्थिति

पल्मोनरी एम्बोलिज्म एक गंभीर स्थिति है, जिसमें शरीर की किसी नस में बना रक्त का थक्का टूटकर फेफड़ों की रक्त वाहिका तक पहुंच सकता है। इससे फेफड़ों में रक्त का प्रवाह प्रभावित हो सकता है।

इस स्थिति में अचानक सांस फूलना, सीने में दर्द और दिल की धड़कन तेज होने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लक्षण अचानक सामने आएं तो इसे सामान्य थकान मानकर इंतजार करना उचित नहीं है और तत्काल चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए।

कब हो जाएं सतर्क?

अगर सांस फूलने की समस्या बार-बार हो रही है, पहले की तुलना में कम मेहनत पर ही सांस चढ़ने लगी है, आराम की स्थिति में भी सांस लेने में परेशानी होती है या इसके साथ सीने में दर्द, चक्कर, अत्यधिक कमजोरी या दिल की धड़कन तेज होने जैसी समस्या है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध मेडिकल जानकारियों और रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार किया गया है। सांस फूलने की समस्या के पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं। लगातार या गंभीर लक्षण होने पर चिकित्सकीय जांच और विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।


सोने की कीमत में फिर उछाल, दिल्ली में 1.54 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंचा भाव

चांदी की कीमत स्थिर

नई दिल्ली। घरेलू सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में तेजी का सिलसिला शुक्रवार को भी जारी रहा। राजधानी दिल्ली में सोने के भाव में 200 रुपये प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके साथ ही 99.9 फीसदी शुद्धता वाले सोने की कीमत बढ़कर 1,54,000 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। सोने के दाम में यह लगातार चौथे कारोबारी सत्र में तेजी है। वहीं, चांदी की कीमत में शुक्रवार को कोई बदलाव नहीं हुआ।

1.54 लाख रुपये पहुंचा सोने का भाव

स्थानीय बाजार में 99.9 फीसदी शुद्धता वाला सोना 200 रुपये महंगा होकर 1,54,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इससे एक दिन पहले यानी गुरुवार को इसका भाव 1,53,800 रुपये प्रति 10 ग्राम था। दूसरी ओर, चांदी 2,34,800 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर स्थिर रही। पिछले कारोबारी सत्र में चांदी के भाव में जोरदार तेजी देखने को मिली थी।

कमजोर डॉलर से सोने को मिला सहारा

विशेषज्ञों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मजबूती का असर घरेलू कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। कमजोर अमेरिकी डॉलर, नरम कच्चे तेल की कीमतें और कीमती धातुओं की लगातार मांग ने सोने को सपोर्ट दिया है। इसके अलावा निवेशकों की नजर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर भी बनी हुई है, जिनसे आगे फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति को लेकर संकेत मिल सकते हैं।

लेमन मार्केट्स डेस्क के शोध प्रमुख गौरव गर्ग के अनुसार, सोना लगातार चौथे कारोबारी सत्र में बढ़त बनाए हुए है और जनवरी के बाद अपने सबसे मजबूत साप्ताहिक प्रदर्शन की ओर बढ़ रहा है। घटती महंगाई की उम्मीद और सर्राफा बाजार में बनी मांग भी कीमतों को सहारा दे रही है।

विदेशी बाजारों में भी चमकी पीली धातु

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी दोनों में तेजी देखने को मिली। हाजिर सोना करीब 2 फीसदी चढ़कर 4,325.43 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वहीं, चांदी की कीमत 4 फीसदी से अधिक बढ़कर करीब 64.17 डॉलर प्रति औंस हो गई।

विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों कीमती धातुएं जनवरी के बाद अपने सबसे मजबूत साप्ताहिक प्रदर्शन की ओर बढ़ रही हैं। अमेरिकी डॉलर में कमजोरी और कच्चे तेल की नरम कीमतों ने इस तेजी को और बल दिया है।

अमेरिकी रोजगार आंकड़ों पर बाजार की नजर

बाजार की नजर अब अमेरिका की गैर-कृषि पेरोल रिपोर्ट पर है। इस रिपोर्ट से अमेरिकी अर्थव्यवस्था की स्थिति और फेडरल रिजर्व के आगामी ब्याज दर संबंधी फैसलों को लेकर अहम संकेत मिल सकते हैं। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर सोने की मांग में भी सुधार के संकेत मिले हैं। जुलाई में वैश्विक गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंडों में 23.5 टन की आवक दर्ज की गई, जो लगातार दो महीनों के बहिर्वाह के बाद हुई है।


ओटीटी पर दस्तक देने जा रही कंगना रनौत की ‘भारत भाग्य विधाता’, इस दिन होगी स्ट्रीम

कंगना रनौत स्टारर फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ अब सिनेमाघरों के बाद ओटीटी प्लेटफॉर्म पर पहुंचने के लिए तैयार है। जून 2026 में रिलीज हुई इस फिल्म को कहानी और कलाकारों के अभिनय के लिए दर्शकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली थी, हालांकि कमाई के मोर्चे पर फिल्म उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी। अब मेकर्स ने इसकी डिजिटल रिलीज की तारीख का ऐलान कर दिया है।

14 अगस्त से जी5 पर देख सकेंगे फिल्म

‘भारत भाग्य विधाता’ को 14 अगस्त 2026 से ZEE5 पर स्ट्रीम किया जाएगा। यानी स्वतंत्रता दिवस से ठीक एक दिन पहले दर्शक इस फिल्म को घर बैठे देख सकेंगे। ओटीटी प्लेटफॉर्म ने सोशल मीडिया के जरिए फिल्म की डिजिटल रिलीज की जानकारी साझा की है।

26/11 हमलों के दौरान नर्सों की बहादुरी की कहानी

फिल्म की कहानी 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के दौरान कामा अस्पताल में तैनात नर्सों की बहादुरी और जज्बे पर आधारित है। उस मुश्किल दौर में अपनी जान की परवाह किए बिना मरीजों की मदद करने वाली नर्सों के संघर्ष और साहस को फिल्म में दिखाया गया है। इसी वजह से फिल्म की कहानी को काफी भावनात्मक और प्रेरणादायक माना गया।

बॉक्स ऑफिस पर नहीं चला खास जादू

सिनेमाघरों में रिलीज के दौरान ‘भारत भाग्य विधाता’ को समीक्षकों और दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिलीं, लेकिन इसका असर बॉक्स ऑफिस कलेक्शन पर नजर नहीं आया। सैकनिल्क के आंकड़ों के मुताबिक फिल्म ने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर करीब 7.04 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया था। अब फिल्म की ओटीटी रिलीज से मेकर्स को दर्शकों के बीच इसकी पहुंच बढ़ने की उम्मीद है।

फिल्म का निर्देशन मनोज तापड़िया ने किया है। कंगना रनौत के साथ गिरिजा ओक, स्मिता तांबे और जाहिद खान भी अहम भूमिकाओं में नजर आए हैं। स्वतंत्रता दिवस के आसपास रिलीज होने के कारण फिल्म को ओटीटी पर एक बार फिर दर्शकों का ध्यान खींचने का मौका मिल सकता है।

(साभार)


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