Thursday, August 13th, 2026

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धामी सरकार में राज्य संपत्तियों के विकास को रफ्तार

Monthly Archives: August 2026

धामी सरकार में राज्य संपत्तियों के विकास को रफ्तार

टिहरी हाउस में 28 आवास, नवी मुंबई के वाशी और हल्द्वानी की योजनाओं की समीक्षा

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार के निर्देश, गुणवत्ता से समझौता नहीं, लागत नियंत्रण पर जोर

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में प्रदेश की सरकारी संपत्तियों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने, निर्माण कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने और सरकारी धन के विवेकपूर्ण उपयोग पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में सचिव आवास एवं राज्य संपत्ति विभाग डॉ. आर. राजेश कुमार के दिशा-निर्देशों में राज्य संपत्ति विभाग से जुड़ी तीन महत्वपूर्ण योजनाओं की समीक्षा की गई। देहरादून के राजपुर रोड स्थित टिहरी हाउस परिसर में प्रस्तावित 28 बहुमंजिला आवासों के निर्माण से लेकर नवी मुंबई के वाशी स्थित राज्य अतिथि गृह और हल्द्वानी सर्किट हाउस के विस्तारीकरण की योजनाओं पर अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा की गई। बैठकों में योजनाओं को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने के साथ गुणवत्ता और लागत नियंत्रण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए।

टिहरी हाउस में 28 बहुमंजिला आवासों का होगा निर्माण

राज्य संपत्ति विभाग के नियंत्रणाधीन देहरादून के राजपुर रोड स्थित टिहरी हाउस परिसर में श्रेणी-5 के 28 आवासों के बहुमंजिला निर्माण की योजना को लेकर विभागीय व्यय वित्त समिति की बैठक आयोजित की गई। सचिव, राज्य संपत्ति विभाग की अध्यक्षता में हुई बैठक में योजना के विस्तृत आगणन और प्रस्तावित निर्माण कार्यों की समीक्षा की गई। योजना की अनुशंसित लागत 4391.14 लाख रुपये निर्धारित की गई है। बैठक में कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग, देहरादून की ओर से कार्ययोजना का प्रस्तुतीकरण किया गया। प्रस्तुतीकरण के बाद सचिव ने निर्माण लागत को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रति वर्ग मीटर निर्माण लागत को न्यूनतम संभव स्तर पर रखा जाए, ताकि सरकारी धन का बेहतर उपयोग हो सके। इसके साथ ही लागत नियंत्रण के साथ निर्माण की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करने को कहा गया।

उत्कृष्ट सामग्री के इस्तेमाल पर जोर

सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रस्तावित आवासों के निर्माण में केवल उत्कृष्ट श्रेणी की निर्माण सामग्री का प्रयोग किया जाए। निर्माण कार्य शुरू होने से पहले इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री के स्पेसिफिकेशन स्पष्ट रूप से निर्धारित किए जाएं। ठेकेदार के चयन के बाद सामग्री की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों का विशेष ध्यान रखने को कहा गया। उन्होंने कार्ययोजना में आवश्यक डिजाइन संशोधन के भी निर्देश दिए। इसके तहत कैंप कार्यालय के क्षेत्रफल को कम करने और कैंप अटेंडेंट एरिया का क्षेत्रफल बढ़ाने को कहा गया। सचिव ने कहा कि सभी सुझावों और संशोधनों को शामिल करते हुए संशोधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर जल्द शासन के समक्ष प्रस्तुत की जाए, ताकि योजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।

वाशी स्थित राज्य अतिथि गृह की भी हुई समीक्षा

राज्य संपत्ति विभाग के नियंत्रणाधीन नवी मुंबई के वाशी स्थित राज्य अतिथि गृह की अद्यतन स्थिति को लेकर भी बुधवार को समीक्षा बैठक आयोजित की गई। सचिव राज्य संपत्ति विभाग की अध्यक्षता में हुई बैठक में अतिथि गृह से संबंधित वर्तमान स्थिति और व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई। बैठक में अपर सचिव एवं राज्य संपत्ति अधिकारी अभिषेक रूहेला, संयुक्त सचिव सुरेंद्र सिंह रावत तथा लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता नीरज कुमार त्रिपाठी मौजूद रहे। अधिकारियों से राज्य अतिथि गृह की वर्तमान स्थिति से संबंधित जानकारी ली गई और आवश्यक कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। राज्य के बाहर स्थित सरकारी संपत्तियों के बेहतर रखरखाव और उनके प्रभावी उपयोग को लेकर विभाग की ओर से लगातार समीक्षा की जा रही है।

हल्द्वानी सर्किट हाउस में बढ़ेंगी सुविधाएं

जनपद नैनीताल के हल्द्वानी स्थित सर्किट हाउस के गेस्ट हाउस एवं गोदाम के विस्तारीकरण के तहत प्रथम तल पर अतिरिक्त कक्षों के निर्माण की योजना पर भी बैठक में चर्चा की गई। सचिव राज्य संपत्ति विभाग की अध्यक्षता में हुई बैठक में संबंधित कार्ययोजना का प्रस्तुतीकरण किया गया। प्रस्तुतीकरण के बाद सचिव ने अपर सचिव एवं राज्य संपत्ति अधिकारी को संबंधित व्यवस्थाधिकारी के साथ संयुक्त निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मौके की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करने के बाद आवश्यकताओं के अनुरूप आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही पूरे प्रकरण पर समयबद्ध तरीके से अग्रेतर कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए, जिससे हल्द्वानी सर्किट हाउस में आवश्यक सुविधाओं के विस्तार का कार्य जल्द आगे बढ़ सके।

गुणवत्ता और लागत नियंत्रण पर सरकार का फोकस

तीनों योजनाओं की समीक्षा में सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट नजर आई। एक ओर जहां सरकारी आवासों और अतिथि गृहों में आवश्यक सुविधाओं के विस्तार पर जोर है, वहीं दूसरी ओर निर्माण कार्यों में लागत नियंत्रण और गुणवत्ता को लेकर भी अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं। विभागीय अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि योजनाओं का क्रियान्वयन निर्धारित मानकों के अनुरूप हो और सरकारी धन का अधिकतम उपयोग जनहित में किया जाए। बैठक में अपर सचिव एवं राज्य संपत्ति अधिकारी अभिषेक रूहेला, संयुक्त सचिव सुरेंद्र सिंह रावत तथा लोक निर्माण विभाग हल्द्वानी के अधिशासी अभियंता प्रत्यूष कुमार उपस्थित रहे।

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान

सचिव आवास एवं राज्य संपत्ति विभाग डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि राज्य संपत्ति विभाग के अंतर्गत आने वाली सभी परिसंपत्तियों और निर्माण योजनाओं में गुणवत्ता, लागत नियंत्रण और समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। टिहरी हाउस परिसर में प्रस्तावित आवासों के निर्माण में उच्च गुणवत्ता की सामग्री के प्रयोग और प्रति वर्ग मीटर लागत को न्यूनतम रखने के निर्देश दिए गए हैं। डिजाइन में आवश्यक संशोधन कर संशोधित डीपीआर जल्द प्रस्तुत करने को कहा गया है। वाशी स्थित राज्य अतिथि गृह और हल्द्वानी सर्किट हाउस की योजनाओं को भी आवश्यक निरीक्षण एवं कार्रवाई के साथ समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।


नकली पनीर और गैर-दुग्ध उत्पादों पर धामी सरकार का शिकंजा, ऋषिकेश से टिहरी तक होटलों में छापेमारी

ऋषिकेश में 03, टिहरी में 10 खाद्य पदार्थों के नमूने जांच के लिए भेजे गए प्रयोगशाला, खाद्य सामग्री के भंडारण में FIFO और FEFO व्यवस्था का पालन करने के निर्देश

खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा- विनय शंकर पांडेय

ऋषिकेश- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में प्रदेश में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले खाद्य कारोबारियों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया गया है। सचिव स्वास्थ्य एवं आयुक्त खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग विनय शंकर पांडेय के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमों ने देहरादून और टिहरी जनपद में होटल, रेस्टोरेंट और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों का सघन निरीक्षण किया। अभियान के दौरान दुग्ध पदार्थों के वास्तविक स्रोत, पनीर की गुणवत्ता, कच्चे माल की खरीद और बिल, लेबलिंग-पैकेजिंग, बैच नंबर, निर्माण तिथि तथा किचन की साफ-सफाई की जांच की गई। ऋषिकेश में तीन खाद्य पदार्थों के नमूने लिए गए, जबकि टिहरी में 10 नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए। दो प्रतिष्ठानों को सुधार सूचना भी जारी की गई।

ऋषिकेश में होटलों की रसोई और स्टोर खंगाले
अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी के अनुसार खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग देहरादून की टीम ने ऋषिकेश के वीरभद्र रोड क्षेत्र में स्थित विभिन्न होटलों में संचालित किचन और स्टोर का निरीक्षण किया। टीम ने मोदी रिट्रीट, गंगा किनारे, होली वाटर और सेवन सीज में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया की जांच की। अधिकारियों ने होटल प्रबंधन को किचन में साफ-सफाई बनाए रखने तथा खाद्य सामग्री के भंडारण में FIFO और FEFO व्यवस्था का पालन करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान किचन में काम करने वाले कर्मचारियों के चिकित्सीय परीक्षण और भोजन बनाने में इस्तेमाल होने वाले पानी की परीक्षण रिपोर्ट भी जांची गई। विभागीय टीम ने होटलों के किचन में इस्तेमाल किए जा रहे दूध, अरहर दाल और साबुत जीरा के नमूने लिए। इन नमूनों को गुणवत्ता की जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। वहीं जांच में कमियां पाए जाने पर दो होटल संचालकों को सुधार सूचना जारी की गई।

खाद्य सामग्री के स्रोत और बिलों की भी जांच
अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी के अनुसार अभियान के दौरान अधिकारियों ने केवल तैयार खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि उनके लिए इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल के स्रोत की भी पड़ताल की। खाद्य कारोबारियों से दुग्ध पदार्थों की खरीद, उनके वास्तविक स्रोत, खरीद के बिल और खाद्य उत्पादों की लेबलिंग-पैकेजिंग से संबंधित दस्तावेजों की जांच की गई। विभाग ने स्पष्ट किया कि खाद्य प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाले उत्पादों की गुणवत्ता और उनकी वैधता सुनिश्चित करना जरूरी है। अभियान के दौरान टीम ने होटल संचालकों को खाद्य सुरक्षा मानकों का अनिवार्य रूप से पालन करने के निर्देश दिए।

टिहरी में निरीक्षण से मचा हड़कंप, कुछ दुकानदारों ने बंद किए प्रतिष्ठान
अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी के अनुसार खाद्य संरक्षा विभाग की टीम ने टिहरी जिले में भी खाद्य प्रतिष्ठानों का आकस्मिक निरीक्षण किया। टीम के पहुंचते ही कुछ खाद्य कारोबारियों में अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला। विभाग के अनुसार कुछ छोटे दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठान तक बंद कर दिए। इसके बाद टीम ने मुनि की रेती और तपोवन क्षेत्र के विभिन्न होटलों में संचालित किचन और स्टोर की गहन जांच की। इस दौरान लेमन ट्री, डिवाइन रिजॉर्ट और स्टर्लिंग पाम ब्लिस के किचन एवं स्टोर का निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने किचन की साफ-सफाई, खाद्य सामग्री के रखरखाव और FIFO व्यवस्था का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। होटल किचन में कार्यरत कर्मचारियों के चिकित्सीय परीक्षण तथा भोजन बनाने में इस्तेमाल होने वाले पानी की परीक्षण रिपोर्ट भी जांची गई।

10 खाद्य पदार्थों के नमूने प्रयोगशाला भेजे
अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी के अनुसार टिहरी में निरीक्षण के दौरान विभागीय टीम ने विभिन्न खाद्य पदार्थों के कुल 10 नमूने संग्रहित किए। इनमें बेकरी उत्पाद, दाल, पकी सब्जी, ग्रेवी, चावल, स्प्रिंग रोल, भुना चना, जीरा और चिप्स समेत अन्य खाद्य सामग्री के नमूने शामिल हैं। सभी नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। विभाग का यह अभियान विशेष रूप से एनालॉग पनीर और गैर-दुग्ध उत्पादों के इस्तेमाल पर रोक लगाने और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। अधिकारियों ने खाद्य कारोबारियों को चेतावनी दी कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

लगातार जारी रहेगा विशेष अभियान
अभियान का नेतृत्व उपायुक्त गढ़वाल मंडल राजेंद्र सिंह रावत ने किया। देहरादून की टीम में सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा मनीष सयाना और वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी ऋषिकेश संतोष कुमार सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। टिहरी की टीम में सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा प्रमोद रावत और वरिष्ठ खाद्य अधिकारी शारदा शर्मा सहित विभागीय अधिकारी शामिल रहे। विभाग ने संकेत दिया है कि खाद्य प्रतिष्ठानों में गुणवत्ता और स्वच्छता मानकों की जांच का यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।

सचिव स्वास्थ्य एवं आयुक्त खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विनय शंकर पांडेय का बयान
सचिव स्वास्थ्य एवं आयुक्त खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विनय शंकर पांडेय ने कहा कि प्रदेश में उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। एनालॉग पनीर और गैर-दुग्ध उत्पादों के अनधिकृत इस्तेमाल को रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। होटल और रेस्टोरेंट में इस्तेमाल होने वाले दुग्ध पदार्थों के स्रोत, खरीद बिल, लेबलिंग, पैकेजिंग और किचन की स्वच्छता की जांच की जा रही है। नमूने प्रयोगशाला भेजे गए हैं और रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई होगी। खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।


अरुणाचल प्रदेश के अभिनेता ताई तुगुंग को प्रदान किया गया ‘नरेंद्र सिंह नेगी संस्कृति सम्मान-2026’

उत्तराखंड की लोक संस्कृति हमारी आत्मा और पहचान है, इसके संरक्षण के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है : मुख्यमंत्री

लोक कलाकारों, साहित्यकारों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए अनेक योजनाएं संचालित : मुख्यमंत्री

प्रदेश में दो ‘साहित्य ग्राम’ विकसित करने की दिशा में तेजी से हो रहा कार्य

लोकभाषाओं, लोककलाओं और नई पीढ़ी को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता

देहरादून- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल बलूनी स्कूल, हरिद्वार बाईपास, देहरादून में लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी के जन्मदिवस के अवसर पर आयोजित ‘नरेंद्र सिंह नेगी संस्कृति सम्मान समारोह’ में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नरेंद्र सिंह नेगी के गीतों के अंग्रेजी अनुवाद पर आधारित पुस्तक “Mountain Melodies of Narendra Singh Negi” का विमोचन किया तथा अरुणाचल प्रदेश के प्रख्यात अभिनेता, रंगकर्मी और नाटककार श्री ताई तुगुंग को ‘नरेंद्र सिंह नेगी संस्कृति सम्मान-2026’ प्रदान किया।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में नरेंद्र सिंह नेगी को जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की कामना की। उन्होंने कहा कि नेगी उत्तराखंड की लोक संस्कृति के ऐसे पुरोधा हैं, जिन्होंने अपने गीतों और संगीत के माध्यम से राज्य की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट प्रतिष्ठा दिलाई है। उन्होंने कहा कि नेगी जी के गीतों में उत्तराखंड के जनजीवन, प्रकृति, संघर्ष, संवेदनाओं और सामाजिक सरोकारों की सशक्त अभिव्यक्ति देखने को मिलती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नरेंद्र सिंह नेगी के नाम पर दिया जाने वाला यह प्रतिष्ठित सम्मान हिमालयी राज्यों में संस्कृति, साहित्य, कला और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को समर्पित है। उन्होंने श्री ताई तुगुंग को सम्मान प्राप्त होने पर बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने न्यीशी भाषा, अरुणाचली हिंदी, रंगकर्म, नाटकों और सिनेमा के माध्यम से अरुणाचल प्रदेश की लोक संस्कृति और परंपराओं को व्यापक पहचान दिलाई है। उनका चर्चित नाटक ‘लप्या’ और फिल्म ‘संगी माई’, जिसका प्रदर्शन कांस फिल्म फेस्टिवल में भी हुआ, उनकी रचनात्मक यात्रा के महत्वपूर्ण उदाहरण हैं।

मुख्यमंत्री ने पुस्तक “Mountain Melodies of Narendra Singh Negi” के विमोचन को उत्तराखंड की लोकभाषा और लोकसंस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पुस्तक आने वाली पीढ़ियों को नरेंद्र सिंह नेगी के जीवन, व्यक्तित्व और दशकों लंबी संगीत यात्रा से परिचित कराएगी तथा राज्य की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति अत्यंत समृद्ध और विविधतापूर्ण है। जागर, बेड़ा, मांगल, खुदेड़, छोपाटी जैसे पारंपरिक गीत तथा ढोल, दमाऊ, हुड़का, मशक, तुर्री और भंकोरा जैसे लोक वाद्य हमारी सांस्कृतिक पहचान के आधार हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि प्रदेश के अनेक युवा आधुनिक संगीत के साथ लोकगीतों को नए कलेवर में प्रस्तुत कर उन्हें नई पहचान देने का कार्य कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार लोकभाषाओं, लोककलाओं, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि लोक कलाकारों को सम्मान और अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सूचीबद्धकरण की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है तथा अब तक 275 सांस्कृतिक दलों और 226 एकल कलाकारों को सूचीबद्ध किया जा चुका है, जिससे उन्हें अपनी प्रतिभा के प्रदर्शन के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी प्राप्त हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ढोल-दमाऊ जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों और उनसे जुड़े कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए पात्र कलाकारों को प्रतिवर्ष निःशुल्क वाद्ययंत्र एवं वेशभूषा उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही लोककला और साहित्य को जीवन समर्पित करने वाले वृद्ध एवं आर्थिक रूप से कमजोर कलाकारों, साहित्यकारों और लेखकों की मासिक पेंशन 3 हजार रुपये से बढ़ाकर 6 हजार रुपये प्रतिमाह की गई है, जिसका लाभ वर्तमान में 180 कलाकार प्राप्त कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा को जीवंत बनाए रखने के लिए लोक कलाकारों के माध्यम से छह माह की प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है, ताकि नई पीढ़ी अपनी लोककलाओं और परंपराओं को सीखकर आगे बढ़ा सके। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में ‘दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान’ की शुरुआत की गई, जिसके अंतर्गत 5 लाख रुपये की सम्मान राशि प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त ‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान’ के माध्यम से अब तक हिंदी सहित विभिन्न भाषाओं के 57 साहित्यकारों को सम्मानित किया जा चुका है तथा ‘साहित्य भूषण पुरस्कार’ की भी शुरुआत की गई है, जिसकी सम्मान राशि 5 लाख 51 हजार रुपये निर्धारित की गई है। वर्ष 2022 से अब तक 102 लेखकों की पुस्तकों के प्रकाशन के लिए आर्थिक अनुदान भी प्रदान किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार लोकभाषाओं और बोलियों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड को केवल पर्यटन की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि साहित्य और संस्कृति के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में स्थापित करना है। इसी उद्देश्य से प्रदेश में दो ‘साहित्य ग्राम’ विकसित करने की योजना पर कार्य किया जा रहा है, जहाँ साहित्यकारों के लिए आवास, पुस्तकालय, अध्ययन केंद्र और संगोष्ठी जैसी सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। देहरादून में हिमालय सांस्कृतिक केंद्र, आर्ट गैलरी और संग्रहालय जैसी पहलें भी इसी सांस्कृतिक दृष्टि का हिस्सा हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं के संरक्षण के लिए ‘विकल्प रहित संकल्प’ के मूलमंत्र के साथ निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समाज, कलाकारों और साहित्यकारों के सहयोग से उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर और अधिक सशक्त, समृद्ध और प्रेरणादायी बनेगी।

इस अवसर पर लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी, साहित्यकार, कलाकार, संस्कृति प्रेमी, विभिन्न सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।


स्वतंत्रता दिवस पर देहरादून का ट्रैफिक प्लान जारी

जानें पार्किंग और डायवर्ट रूट की पूरी डिटेल

देहरादून। स्वतंत्रता दिवस-2026 के मुख्य समारोह को देखते हुए देहरादून पुलिस ने शहर में यातायात व्यवस्था को लेकर विस्तृत ट्रैफिक प्लान जारी किया है। परेड ग्राउंड के चारों ओर का क्षेत्र जीरो जोन रहेगा। यहां सभी सामान्य वाहनों, ठेलियों और रेहड़ियों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक रहेगी। कार्यक्रम में आने वाले लोगों से निर्धारित पार्किंग और डायवर्ट रूट का पालन करने की अपील की गई है।

वीआईपी के लिए अलग प्रवेश व्यवस्था

पुलिस के मुताबिक वीआईपी और अधिकारियों के वाहन ईसी रोड, सर्वे चौक से रोजगार तिराहा होते हुए कन्वेंट तिराहे की ओर जाएंगे और दाहिनी ओर स्थित वीवीआईपी गेट यानी मुख्य गेट नंबर-1 से प्रवेश करेंगे।

वहीं, परेड के प्रतिभागी, पुलिस, होमगार्ड, प्रेस और कार्यक्रम देखने आने वाले आम नागरिक अपने वाहन निर्धारित पार्किंग स्थलों पर खड़े कर गेट नंबर-4 और 5 से पैदल कार्यक्रम स्थल में प्रवेश करेंगे।

इन स्थानों पर होगी पार्किंग
वीआईपी और अधिकारियों के वाहन मंच के पीछे तथा खेल मैदान में पार्क किए जाएंगे।
प्रतिभागियों, पुलिस, होमगार्ड, प्रेस, बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के साथ आने वाले वाहनों के लिए रेंजर्स ग्राउंड, मंगला देवी इंटर कॉलेज और दून क्लब, सर्वे चौक में पार्किंग की व्यवस्था रहेगी।
धर्मपुर, दर्शनलाल चौक और दून चौक की ओर से आने वाले वाहन रेंजर्स ग्राउंड में पार्क होंगे।
सर्वे चौक की ओर से आने वाले वाहन मंगला देवी इंटर कॉलेज ग्राउंड में पार्क किए जाएंगे।
राजपुर रोड से आने वाले प्रतिभागियों और दर्शकों के वाहन सेंट जोसेफ स्कूल, सुभाष रोड के पास वन-साइड पार्किंग और लॉर्ड वेंकटेश वेडिंग प्वाइंट में पार्क किए जा सकेंगे।

इन जगहों पर लगाए जाएंगे बैरियर

परेड ग्राउंड के आसपास यातायात को नियंत्रित करने के लिए आउटर और इनर बैरियर प्वाइंट बनाए गए हैं।

आउटर बैरियर:
ईसी रोड सर्वे चौक, मनोज क्लिनिक, बुद्धा चौक, दर्शनलाल चौक, ओरिएंट चौक और पैसिफिक तिराहा।

इन प्वाइंटों से केवल वीआईपी और पासधारक वाहनों को सीमित संख्या में प्रवेश की अनुमति होगी।

इनर बैरियर:
रोजगार तिराहा, कनक चौक, डूंगा हाउस, लैंसडाउन चौक और कन्वेंट तिराहा।

इनर प्वाइंट से पासधारकों और वीवीआईपी वाहनों को छोड़कर किसी भी वाहन को परेड ग्राउंड की ओर जाने की अनुमति नहीं होगी।

विक्रमों के रूट में भी बदलाव

स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान विक्रम वाहनों के लिए भी डायवर्जन लागू रहेगा।

रायपुर रूट के नंबर-2 विक्रम सहस्त्रधारा क्रॉसिंग से वापस भेजे जाएंगे।
धर्मपुर रूट के नंबर-3 विक्रम तहसील चौक से दून चौक और एमकेपी चौक की ओर डायवर्ट होंगे।
आईएसबीटी रूट नंबर-5 और कांवली रूट नंबर-8 के विक्रम रेलवे गेट से वापस भेजे जाएंगे।
प्रेमनगर रूट के विक्रम प्रभात कट से वापस लौटेंगे।
राजपुर रूट के विक्रम ग्लोब चौक से पैसिफिक तिराहा, बैनी बाजार होते हुए राजपुर रोड की ओर वापस भेजे जाएंगे।

सिटी बसों के लिए भी डायवर्जन

आईएसबीटी से राजपुर रोड जाने वाली सिटी बसें दर्शनलाल चौक से घंटाघर होते हुए राजपुर रोड जाएंगी।

रिस्पना की ओर से आने वाली बसों को तहसील चौक से दून चौक, एमकेपी चौक और आराघर की ओर डायवर्ट किया जाएगा।

वहीं रायपुर रोड से आने वाली सिटी बसें सहस्त्रधारा क्रॉसिंग से सहस्त्रधारा रोड, आईटी पार्क, राजपुर रोड और घंटाघर होते हुए आगे जाएंगी।

दून पुलिस ने की सहयोग की अपील

पुलिस ने स्वतंत्रता दिवस समारोह में आने वाले लोगों से अपील की है कि वे अपने वाहन सिर्फ निर्धारित पार्किंग स्थलों पर ही खड़े करें और सड़क किनारे पार्किंग से बचें। वाहन चालकों से निर्धारित डायवर्ट रूट का इस्तेमाल करने को कहा गया है।

पुलिस ने लोगों से संभव हो तो दुपहिया वाहनों का इस्तेमाल करने और वैकल्पिक मार्गों का प्रयोग करने की अपील की है, ताकि समारोह के दौरान शहर की यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहे।


केयर इकॉनॉमी को सुदृढ़ बनाने पर देहरादून में पहली विशेष कार्यशाला

बढ़ती वरिष्ठ नागरिक आबादी के बीच देखभाल सेवाओं को रोजगार और अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर हुआ मंथन

देहरादून। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार एवं समाज कल्याण विभाग, उत्तराखण्ड के संयुक्त प्रयास से बुधवार को देहरादून में वरिष्ठ नागरिकों एवं दिव्यांगजनों के लिए पहली बार केयर इकॉनॉमी विषय पर विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में प्रदेश में देखभाल सेवाओं को व्यवस्थित रूप से विकसित कर उन्हें अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा से जोड़ने तथा इसके माध्यम से रोजगार के नए अवसर सृजित करने पर व्यापक मंथन किया गया।

केयर इकॉनॉमी के अंतर्गत लोगों की देखभाल, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा दैनिक जीवन से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करने वाली आर्थिक गतिविधियां एवं सेवाएं शामिल हैं। इनमें बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों, बीमार एवं दिव्यांगजनों की देखभाल, स्वास्थ्य सेवाएं, घरेलू कार्य, बाल देखभाल सहित विभिन्न देखभाल संबंधी सेवाएं प्रमुख हैं।

कार्यशाला में समाज कल्याण मंत्री खजान दास मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में परंपरागत रूप से वरिष्ठ नागरिकों एवं दिव्यांगजनों की देखभाल परिवार के सदस्य ही करते हैं, लेकिन बदलती सामाजिक परिस्थितियों में केयर इकॉनॉमी की आवश्यकता तेजी से बढ़ रही है। एकल परिवारों की बढ़ती संख्या तथा महिला एवं पुरुष दोनों के नौकरीपेशा होने से पेशेवर देखभाल सेवाओं की मांग बढ़ रही है। ऐसे में केयर इकॉनॉमी युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में युवाओं के पलायन के कारण पर्वतीय क्षेत्रों के अनेक गांवों में वरिष्ठ नागरिक अपेक्षाकृत अकेले रह जाते हैं। ऐसे में उनकी सामाजिक, भावनात्मक एवं दैनिक आवश्यकताओं की देखभाल के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करना आवश्यक है। सरकार इस दिशा में आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि केयर इकॉनॉमी को मजबूत बनाने के लिए सरकार, गैर-सरकारी संगठनों, विशेषज्ञों और सिविल सोसाइटी को मिलकर कार्य करना होगा।

कार्यशाला में बताया गया कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार देश में 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की संख्या 10.38 करोड़ थी, जो कुल आबादी का लगभग 8.6 प्रतिशत थी। अनुमान है कि वर्ष 2050 तक प्रत्येक पांच में से एक व्यक्ति 60 वर्ष से अधिक आयु का होगा तथा वरिष्ठ नागरिकों की संख्या लगभग 35 करोड़ तक पहुंच सकती है। ऐसे में गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ देखभाल सेवाओं की आवश्यकता भविष्य में और अधिक बढ़ने की संभावना है।

कार्यशाला में स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, ग्राम्य विकास एवं वित्त विभाग के अधिकारियों के साथ विषय विशेषज्ञों, वरिष्ठ नागरिकों तथा दिव्यांगजन कल्याण के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। लतिका रॉय फाउंडेशन एवं हैप्पी फैमिली हेल्थ केयर एंड रिसर्च एसोसिएशन सहित विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों की ओर से केयर इकॉनॉमी से संबंधित विषयों पर प्रस्तुतियां दी गईं।

कार्यक्रम में सचिव डॉ. श्रीधर बाबू अद्दांकी, निदेशक समाज कल्याण संजय कुमार, अपर सचिव सुंदलाल सेमवाल, निदेशक जनजाति कल्याण संजय टोलिया, अपर सचिव मनमोहन मैनाली, संयुक्त निदेशक गीताराम नौटियाल, मुख्य वित्त नियंत्रक पूजा नेगी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।


₹55 लाख की साइबर ठगी में अंतर्राज्यीय साइबर गिरोह का सदस्य अमृतसर, पंजाब से गिरफ्तार

अभियुक्त के खाते में पहुंची थी ठगी की ₹8.94 लाख की धनराशि

देहरादून। शेयर बाजार और IPO में निवेश कर मोटा मुनाफा दिलाने का लालच देकर साइबर ठगी करने वाले गिरोह के खिलाफ उत्तराखंड एसटीएफ की साइबर टीम ने कार्रवाई की है। साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून में दर्ज मामले की जांच के दौरान सामने आए एक आरोपी को पुलिस ने पंजाब के अमृतसर से गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान 20 वर्षीय प्रभजीत सिंह के रूप में हुई है।

IIFL Wealth Management का नाम लेकर बनाया भरोसा

एसटीएफ के मुताबिक, आरोपियों ने खुद को IIFL Wealth Management से जुड़ा बताकर शिकायतकर्ता को शेयर और IPO में निवेश के जरिए अच्छा मुनाफा कमाने का भरोसा दिलाया। इसके बाद 16 दिसंबर 2025 से 28 जनवरी 2026 के बीच अलग-अलग बैंक खातों में शिकायतकर्ता से कुल 55,48,412 रुपये RTGS के माध्यम से जमा कराए गए।

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने बैंकिंग लेनदेन और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया। इसी दौरान PNB के एक खाते का पता चला, जो आरोपी प्रभजीत सिंह के नाम पर दर्ज था।

आरोपी के खाते में पहुंचे 8.94 लाख रुपये

जांच में सामने आया कि शिकायतकर्ता से पहली लेयर के संदिग्ध खाते M/S Hari Om Traders में ट्रांसफर की गई 25,48,412 रुपये की राशि में से 3,18,000 रुपये और 5,76,300 रुपये, यानी कुल 8,94,300 रुपये, प्रभजीत सिंह के बैंक खाते में पहुंचे थे।

पुलिस के अनुसार, आरोपी ने इस रकम को चेक और एटीएम के जरिए निकाल लिया। बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर साइबर ठगी में उसकी भूमिका सामने आने के बाद एसटीएफ की टीम ने उसकी तलाश शुरू की।

अमृतसर में दबिश देकर पकड़ा

पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए 11 अगस्त 2026 को अमृतसर के तारा वाला पुल, जालंधर रोड क्षेत्र में दबिश दी और प्रभजीत सिंह को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर अन्य बैंक खातों के जरिए साइबर ठगी की रकम निकालने से जुड़ी जानकारी भी दी है।

एसटीएफ के मुताबिक, आरोपी से पूछताछ के दौरान गिरोह में शामिल अन्य लोगों के संबंध में भी महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। पुलिस अब मामले में शामिल अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी और ठगी की रकम की बरामदगी के लिए आगे की जांच कर रही है।

एक मोबाइल फोन और SMS अलर्ट नंबर बरामद

गिरफ्तार आरोपी प्रभजीत सिंह पुत्र स्वर्गीय जोगेंद्र सिंह, निवासी भल्ला कॉलोनी, छेहरटा, अमृतसर, पंजाब का रहने वाला है। उसकी उम्र 20 वर्ष बताई गई है। पुलिस ने उसके कब्जे से एक मोबाइल फोन और एक SMS अलर्ट नंबर बरामद किया है।

एसटीएफ टीम में ये अधिकारी शामिल रहे

कार्रवाई करने वाली टीम में निरीक्षक विजय भारती (विवेचक), उपनिरीक्षक रमन बिष्ट, अपर उपनिरीक्षक पवन कुमार यादव और कांस्टेबल सोहन बडोनी शामिल रहे। पुलिस मामले में जुड़े अन्य बैंक खातों और आरोपियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।


आधुनिक तकनीक से आपदा प्रबंधन को मिलेगी नई मजबूती- डीएम

संवेदनशील क्षेत्रों में 24×7 निगरानी, हाईटेक कैमरों से आपदा प्रबंधन को मिला तकनीकी सहारा

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन एवं जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के निर्देशन में जनपद देहरादून में आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। अतिवृष्टि एवं अन्य आपातकालीन परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए जनपद के संवेदनशील आपदा क्षेत्रों तथा प्रमुख पर्यटन स्थलों पर हाई डेफिनेशन पीटीजेड (Pan & Tilt & Zoom) कैमरे स्थापित किए जा रहे हैं।

जिला प्रशासन द्वारा सहस्त्रधारा, कार्लीगाड़ एवं गुच्चूपानी सहित प्रमुख संवेदनशील एवं पर्यटन स्थलों पर इन कैमरों के माध्यम से 24×7 रियल टाइम निगरानी की व्यवस्था की गई है। कैमरों का एक्सेस जिला आपदा परिचालन केंद्र (आपदा कंट्रोल रूम) में उपलब्ध है, जहां से संबंधित क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है। मालदेवता में पीटीजेड कैमरे स्थापित करने का कार्य भी गतिमान है।

इन अत्याधुनिक कैमरों के माध्यम से जलस्तर में अचानक वृद्धि, असामान्य गतिविधियों अथवा किसी भी आपदा की स्थिति की तत्काल जानकारी प्राप्त की जा सकेगी। इससे संभावित खतरे का समय रहते आकलन कर राहत एवं बचाव कार्य तेजी से शुरू करने में मदद मिलेगी। साथ ही, प्रमुख पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की गतिविधियों एवं सुरक्षा पर भी लगातार नजर रखी जा सकेगी।

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि प्रारंभिक चरण में सहस्त्रधारा क्षेत्र के आपदा की दृष्टि से संवेदनशील कार्लीगाड़ में कैमरे स्थापित कर दिए गए हैं। सहस्त्रधारा, मालदेवता एवं गुच्चूपानी में पर्यटकों की अधिक आवाजाही को देखते हुए इन क्षेत्रों में भी निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए संवेदनशील क्षेत्रों की रियल टाइम मॉनिटरिंग जिला प्रशासन की प्राथमिकता है।

जिला प्रशासन की इस पहल से आपदा के दौरान अर्ली अलर्ट, त्वरित सूचना एवं त्वरित राहत-बचाव कार्रवाई को मजबूती मिलेगी। साथ ही, पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी यह तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


गर्व, उत्साह और उमंग के साथ मनेगा आजादी का महापर्व

80वें स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों में जुटा देहरादून प्रशासन

परेड ग्राउंड में तैयारियां अंतिम चरण में, डीएम और एसएसपी ने लिया जायजा

देहरादून। राजधानी देहरादून स्थित परेड ग्राउंड में राज्य स्तरीय 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। 15 अगस्त को सुबह 10 बजे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मुख्य मंच पर ध्वजारोहण करेंगे। समारोह को भव्य, अनुशासित और सुरक्षित बनाने के लिए प्रशासन और पुलिस विभाग मुस्तैद हैं। बुधवार को जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र डोभाल ने कार्यक्रम स्थल का स्थलीय निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की।

जिलाधिकारी ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों, महानुभावों एवं गणमान्य व्यक्तियों के लिए बैठक व्यवस्था, वाहन पार्किंग, सुरक्षा, यातायात संचालन, विद्युत आपूर्ति, स्वागत-सत्कार, स्वच्छता एवं पेयजल समेत सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को पुख्ता करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी नोडल अधिकारी माइक्रो प्लानिंग के तहत आपसी समन्वय से कार्य करें और यह सुनिश्चित करें कि समारोह से जुड़ी कोई भी व्यवस्था अधूरी न रहे। इस दौरान उन्होंने मुख्य मंच, सेफ हाउस, फोटो गैलरी, साउंड सिस्टम तथा समारोह के लाइव प्रसारण के लिए एलईडी स्क्रीन की व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण किया।

परेड, सलामी और सम्मान समारोह का भव्य आयोजन
स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में पुलिस, अर्धसैनिक बल, होमगार्ड, एनसीसी और प्रांतीय रक्षक दल की टुकड़ियाँ पुलिस बैंड की धुन पर राष्ट्रीय ध्वज को सलामी देंगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, राज्य आंदोलनकारियों, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों और सराहनीय सेवाओं के लिए पुलिस व विभागीय अधिकारियों को सम्मानित करेंगे।

जिलाधिकारी ने पुलिस परेड एवं सलामी कार्यक्रम की तैयारियों की जानकारी लेते हुए निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार कार्यक्रम को व्यवस्थित एवं गरिमापूर्ण ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियों में किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए।

14 अगस्त को मनाया जाएगा ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’
15 अगस्त से पूर्व, 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ का आयोजन किया जाएगा। इसमें वर्ष 1947 के विभाजन पीड़ितों को आमंत्रित कर सम्मानित किया जाएगा। दून लाइब्रेरी में सामाजिक सौहार्द और एकता का संदेश देने के लिए एक विशेष भव्य प्रदर्शनी का आयोजन होगा। नगर निगम परिसर में शाम को एक विशेष कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। जिलाधिकारी ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस की तैयारियों को भी अंतिम रूप देने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, अपर जिलाधिकारी (एफआर) केके मिश्रा, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) स्मृता परमार, संयुक्त मजिस्ट्रेट राहुल आनंद, सिटी मजिस्ट्रेट राकेश चंद्र तिवारी, एसडीएम सदर अपूर्वा सिंह, एसडीएम कुमकुम जोशी, एसडीएम विनोद कुमार, पीडी विक्रम सिंह सहित लोक निर्माण विभाग, एमडीडीए, पर्यटन, उद्यान, पूर्ति एवं अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।


मुख्यमंत्री धामी ने जल जीवन मिशन की प्रगति की समीक्षा की

शेष कार्यों को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने तथा पेयजल योजनाओं के नियमित संचालन एवं रख-रखाव पर विशेष जोर

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को सचिवालय में जल जीवन मिशन की प्रगति, वित्तीय स्थिति, योजनाओं के संचालन एवं रख-रखाव तथा आगामी कार्ययोजना की समीक्षा की। बैठक में जलापूर्ति योजनाओं की प्रगति, ग्रामीण परिवारों तक नल से जल की पहुंच एवं सत्यापन, जल गुणवत्ता, वित्तीय प्रबंधन तथा योजनाओं के नियमित संचालन से संबंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री ने हर घर जल का लक्ष्य शत-प्रतिशत पूरा करने तथा शेष पात्र ग्रामीण परिवारों को निर्धारित समयसीमा में नल कनेक्शन से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन की सफलता केवल नल कनेक्शन की संख्या से नहीं, बल्कि प्रत्येक घर तक नियमित, पर्याप्त, सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल पहुंचने से तय होगी। पूर्ण हो चुकी योजनाओं का स्थलीय सत्यापन भी कराया जाए।

मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन एवं लंबित पेयजल योजनाओं को मिशन मोड में निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने तथा जिलाधिकारियों को संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि प्रत्येक योजना की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए।

मुख्यमंत्री ने पर्वतीय क्षेत्रों में पेयजल स्रोतों के संरक्षण एवं पुनर्जीवीकरण, वर्षा जल संचयन तथा जल स्रोतों के पुनर्भरण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। प्रत्येक जनपद में जलापूर्ति संबंधी तकनीकी समस्याओं के त्वरित समाधान की व्यवस्था विकसित करने तथा योजनाओं के संचालन एवं रख-रखाव की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने जनपदवार लक्ष्य, समयसीमा और जवाबदेही तय करने तथा अनावश्यक विलंब पाए जाने पर संबंधित कार्यदायी संस्था एवं जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के भी निर्देश दिये।

बैठक में बताया गया कि राज्य में जल जीवन मिशन के अंतर्गत 16,555 योजनाओं में से 15,540 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं। राज्य की औसत प्रगति 92.46 प्रतिशत है तथा 1,015 योजनाएं प्रगति पर हैं। ग्रामीण परिवारों तक नल से जल की पहुंच की समीक्षा के दौरान बताया गया कि 14.48 लाख में से 14.20 लाख परिवारों को कनेक्शन दिये जा चुके हंैं। बैठक में जानकारी दी गई कि 14,979 गांवों में से 9,796 गांव में हर नल से जल का सत्यापन हो चुका है।

बैठक में अवस्थापना अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष विश्वास डाबर, प्रमुख सचिव आर.के.सुधांशु, सचिव पेयजल रणवीर सिंह चैहान, अपर सचिव रोहित मीणा,  झरना कमठान एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।


भूकंप से कांपा कोलंबिया, कई इमारतें ढही, 200 से ज्यादा लोगों की मौत

हजारों लोग लापता 

बोगोटा। दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया में आए शक्तिशाली भूकंप ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। 7.4 तीव्रता के झटकों से कई इलाकों में इमारतें क्षतिग्रस्त और कुछ भवन ढह गए। शुरुआती रिपोर्टों में 250 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि करीब 3 हजार लोगों के लापता होने की खबर है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान जारी है।

बोगोटा समेत कई इलाकों में महसूस हुए झटके

भूकंप के तेज झटकों के बाद लोग दहशत में अपने घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए। राजधानी बोगोटा के अलावा देश के कई हिस्सों में इसका असर महसूस किया गया। पड़ोसी देशों इक्वाडोर और वेनेजुएला तक भी भूकंप के झटके महसूस किए जाने की जानकारी सामने आई है।

7.4 रही भूकंप की तीव्रता

कोलंबिया की नेशनल यूनिट फॉर डिजास्टर रिस्क मैनेजमेंट (UNGRD) के अनुसार, भूकंप का केंद्र सैन होजे डेल पाल्मर के पास बताया गया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक भूकंप जमीन के काफी नीचे आया, जिसके कारण दूर-दराज के क्षेत्रों में भी तेज झटके महसूस किए गए।

क्विबडो में भारी नुकसान

चोको प्रांत की राजधानी क्विबडो में कई इमारतों को नुकसान पहुंचने की सूचना है। अधिकारियों के मुताबिक, हादसे में कई लोग घायल हुए हैं और प्रभावित इलाकों में नुकसान का आकलन किया जा रहा है। चोको की गवर्नर नूबिया कोर्डोबा ने लोगों से सतर्क रहने की अपील करते हुए भूकंप के बाद आने वाले आफ्टरशॉक्स की आशंका जताई है।

मलबे में लोगों के फंसे होने की आशंका

भूकंप के कारण कई जगह सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने से राहत टीमों को प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। मलबे में बड़ी संख्या में लोगों के दबे होने की आशंका के चलते बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं। जरूरत के मुताबिक हेलीकॉप्टर और अन्य संसाधनों की मदद भी ली जा रही है।

काली और पेरेइरा में भी नुकसान

करीब 20 लाख की आबादी वाले काली शहर में कई इमारतों के ढहने की जानकारी सामने आई है। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, मलबे में लोगों के फंसे होने की आशंका है। वहीं, पेरेइरा शहर में भी बड़ी संख्या में लोगों के हताहत होने की खबर है।

प्रशासन और आपदा राहत एजेंसियां प्रभावित इलाकों में राहत कार्य तेज कर रही हैं। अधिकारियों ने लोगों से क्षतिग्रस्त इमारतों से दूर रहने और आफ्टरशॉक्स को लेकर सतर्क रहने की अपील की है।


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