Wednesday, August 26th, 2026

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दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स और हथियार तस्करी नेटवर्क का खुलासा, चार आरोपी गिरफ्तार

Monthly Archives: August 2026

दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स और हथियार तस्करी नेटवर्क का खुलासा, चार आरोपी गिरफ्तार

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने ड्रग्स तस्करी और हथियारों की सप्लाई से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि भारत से कूरियर के जरिए अफीम कनाडा भेजी जाती थी और इसके बदले पाकिस्तान सीमा के रास्ते ड्रोन के माध्यम से पंजाब में हथियार पहुंचाए जाते थे। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस नेटवर्क का संबंध खालिस्तानी आतंकी संगठन खालिस्तान टाइगर फोर्स (KTF) की गतिविधियों के लिए फंडिंग और हथियार जुटाने से था।

पुलिस के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क को नामित खालिस्तानी आतंकी अर्शदीप सिंह गिल उर्फ अर्श डाला के इशारे पर संचालित किया जा रहा था। क्राइम ब्रांच के विशेष पुलिस आयुक्त एचजीएस धालीवाल ने बताया कि गिरोह का मुख्य उद्देश्य आतंकी गतिविधियों के लिए आर्थिक मदद और हथियार उपलब्ध कराना था।

करीब एक महीने तक चली कार्रवाई के दौरान पुलिस ने सिमरनजीत सिंह, हरदीप सिंह, यादविंदर सिंह उर्फ जशन संधू और जीवन सिंह को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे और उनसे जुड़े ठिकानों से 5.8 किलोग्राम से अधिक अफीम बरामद की गई है।

जांच में पता चला कि आरोपी पश्चिमी दिल्ली के मोती नगर स्थित एक कूरियर कंपनी के माध्यम से कनाडा पार्सल भेजते थे। अफीम को कपड़ों और खाद्य सामग्री के डिब्बों में छिपाया जाता था। तस्कर सिल्वर फॉयल की मदद से पैकेट के अंदर अलग से जगह बनाकर उसमें नशीला पदार्थ रखते थे, ताकि सामान्य सामान की आड़ में उसे विदेश भेजा जा सके।

पार्सल की बुकिंग के दौरान फर्जी केवाईसी और गलत पते का इस्तेमाल किया जाता था। पुलिस ने कूरियर से जुड़ी पूरी चेन की जांच करते हुए पंजाब, हरियाणा और राजस्थान तक कार्रवाई का दायरा बढ़ाया और नेटवर्क से जुड़े लोगों को गिरफ्तार किया।

पुलिस जांच के मुताबिक, भारत से कनाडा भेजी जाने वाली अफीम से होने वाली कमाई का इस्तेमाल हथियारों की खरीद और आतंकी गतिविधियों के लिए किया जाता था। पाकिस्तान सीमा से ड्रोन के जरिए हथियार पंजाब में गिराए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।

अफीम की कीमत में भारत और कनाडा के बीच बड़ा अंतर होने के कारण तस्करों को भारी मुनाफा मिलता था। पुलिस के मुताबिक, भारत में करीब 1.5 लाख रुपये प्रति किलोग्राम की कीमत पर खरीदी गई अफीम कनाडा में कई गुना अधिक कीमत पर बेची जाती थी।

क्राइम ब्रांच ने एनक्रिप्टेड मैसेजिंग एप सिग्नल और कनाडाई व्हाट्सऐप नंबरों की गतिविधियों का विश्लेषण कर नेटवर्क की कड़ियों का पता लगाया। फिलहाल पुलिस पूरे सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों और हथियारों की सप्लाई के नेटवर्क की जांच कर रही है।


रुद्रपुर और पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेजों में नए सत्र की तैयारियों को लेकर सख्ती

देहरादून। उत्तराखंड के रुद्रपुर और पिथौरागढ़ राजकीय मेडिकल कॉलेजों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से पढ़ाई शुरू कराने की तैयारियों को लेकर सरकार ने काम में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में दोनों संस्थानों की तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की गई।

बैठक में अधिकारियों को मेडिकल कॉलेजों में निर्धारित मानकों के अनुसार फैकल्टी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ प्रयोगशालाओं के उपकरण और आवश्यक फर्नीचर की आपूर्ति तय समय के भीतर पूरी कराने को कहा गया। सरकार ने स्पष्ट किया कि शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले सभी जरूरी व्यवस्थाएं दुरुस्त होनी चाहिए।

निर्माण कार्यों की समीक्षा के दौरान प्रशासनिक भवन, प्रयोगशाला भवन और एकेडमिक भवन में बचे कार्यों को जल्द पूरा करने के निर्देश निर्माण एजेंसी उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम को दिए गए। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) के प्रस्तावित निरीक्षण को देखते हुए भवनों और अन्य आवश्यक सुविधाओं को निर्धारित मानकों के अनुरूप तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया।

मंत्री ने कहा कि निर्माण और उपकरणों की आपूर्ति से जुड़े कार्यों में किसी भी तरह की देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। संबंधित अधिकारियों को लंबित कार्यों की लगातार निगरानी करने और तय समयसीमा के भीतर उन्हें पूरा कराने के निर्देश दिए गए, ताकि दोनों मेडिकल कॉलेजों में शिक्षण कार्य शुरू करने में कोई अड़चन न आए।

विभागीय निदेशक (चिकित्सा शिक्षा) को निर्माण इकाइयों और दोनों मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों के साथ नियमित समन्वय बनाए रखने को कहा गया। साथ ही, निर्माण, उपकरणों की उपलब्धता और अन्य व्यवस्थाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने के निर्देश दिए गए।

गौरतलब है कि रुद्रपुर और पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेजों में सत्र 2026-27 से शिक्षण कार्य शुरू करने की तैयारी चल रही है। दोनों मेडिकल कॉलेजों में 100-100 विद्यार्थियों के प्रवेश की व्यवस्था प्रस्तावित है। सरकार का उद्देश्य नए संस्थानों में शैक्षणिक, प्रशासनिक और चिकित्सकीय सुविधाएं समय पर विकसित कर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा के लिए बेहतर माहौल उपलब्ध कराना है।


विशेष गहन पुनरीक्षण की आयोग की टीम ने की समीक्षा

देहरादून। विशेष गहन पुनरीक्षण-2026 के तहत मतदाता सूची को दुरुस्त करने के लिए चल रहे कार्यों की समीक्षा भारत निर्वाचन आयोग की टीम ने देहरादून में की। टीम ने जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. आशीष चौहान, उप जिला निर्वाचन अधिकारी अभिनव शाह और पुनरीक्षण कार्य से जुड़े सभी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ) के साथ बैठक कर प्रगति की जानकारी ली।

आयोग की टीम ने पुनरीक्षण कार्य में पारदर्शिता और गंभीरता बनाए रखने पर जोर देते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। विशेष रूप से प्रारूप-7 के तहत प्राप्त आपत्तियों के निस्तारण में पूरी सावधानी और निष्पक्षता बरतने को कहा गया। मृत्यु या स्थानांतरण के आधार पर किसी मतदाता का नाम हटाने से पहले बीएलओ और संबंधित राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों (बीएलए) से जानकारी का क्रॉस-वेरिफिकेशन कराने के निर्देश भी दिए गए।

टीम ने अधिकारियों से कहा कि निर्धारित 11 प्रमाण-पत्रों में से अब तक कोई प्रमाण-पत्र प्रस्तुत नहीं करने वाले मतदाताओं से दोबारा संपर्क किया जाए। ऐसे मतदाताओं को प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराने के लिए प्रेरित किया जाए, ताकि किसी भी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से छूटने न पाए।

बैठक में जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने जनपद में चल रहे पुनरीक्षण कार्यों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि अब तक 11,90,805 मतदाताओं की मैपिंग पूरी हो चुकी है। वहीं वर्ष 2003 की मतदाता सूची के विवरण में विसंगति मिलने या आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं होने पर 21 अगस्त तक बीएलओ के माध्यम से 5,47,617 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें करीब 90 प्रतिशत मामलों में सुनवाई की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

उन्होंने बताया कि जांच के दौरान 96,187 ऐसे मतदाता भी चिन्हित किए गए हैं, जिनके नाम उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड दोनों राज्यों की मतदाता सूचियों में दर्ज हैं। ऐसे मतदाताओं को अपनी इच्छा के अनुसार किसी एक राज्य की मतदाता सूची में नाम रखने का विकल्प दिया जा रहा है। बीएलओ घर-घर जाकर संबंधित मतदाताओं को इसकी जानकारी देंगे और उनकी स्वेच्छा के आधार पर आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

बैठक में उप जिला निर्वाचन अधिकारी अभिनव शाह, संयुक्त मजिस्ट्रेट राहुल आनंद, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी राकेश तिवारी, अपर्णा ढौंडियाल, रविन्द्र ज्वांठा, अपूर्वा सिंह, कुमकुम जोशी तथा सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी नरेंद्र प्रसाद देवली सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।


बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्माण पर एमडीडीए की कार्रवाई, दो प्लेटफार्म सील

देहरादून। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की ओर से क्षेत्र में अवैध निर्माण और अवैध प्लाटिंग के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है। प्राधिकरण द्वारा बिना स्वीकृत मानचित्र एवं आवश्यक अनुमति के किए जा रहे निर्माण कार्यों पर नियमानुसार सख्ती बरती जा रही है। इसी क्रम में मंगलवार को मसूरी क्षेत्र में अवैध निर्माण के मामले में सीलिंग की कार्रवाई की गई।

प्राधिकरण के अनुसार, मसूरी देहरादून मोटर मार्ग पर हनुमान मंदिर से आगे मसूरी क्षेत्र में भूस्वामी हेमंत कुमार द्वारा बिना स्वीकृत मानचित्र एवं आवश्यक अनुमति के निर्माण कार्य कराया जा रहा था। मौके पर निरीक्षण के दौरान लोहे के चैनलों की सहायता से दो प्लेटफार्म बनाए जाने का कार्य पाया गया। मामले में प्राधिकरण की ओर से संबंधित भूस्वामी को नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित किया गया। हालांकि, संबंधित पक्ष की ओर से प्रस्तुत किया गया प्रतिउत्तर संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद प्राधिकरण द्वारा नियमानुसार कार्रवाई करते हुए मौके पर निर्मित दोनों प्लेटफार्म को सील कर दिया गया।

एमडीडीए अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि प्राधिकरण क्षेत्र में बिना स्वीकृति के किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य स्वीकार नहीं किया जाएगा। अवैध निर्माण अथवा स्वीकृत मानचित्र के विपरीत किए जा रहे निर्माण की जानकारी मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी। प्राधिकरण की ओर से आमजन से भी अपील की गई है कि भवन निर्माण अथवा अन्य निर्माण कार्य शुरू करने से पूर्व संबंधित विभाग से आवश्यक अनुमति एवं स्वीकृत मानचित्र प्राप्त कर लें, ताकि बाद में किसी प्रकार की कार्रवाई का सामना न करना पड़े।

एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में नियमानुसार निर्माण सुनिश्चित करना एमडीडीए की प्राथमिकता है। बिना स्वीकृत मानचित्र अथवा आवश्यक अनुमति के निर्माण करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि विकास के साथ-साथ शहर की सुनियोजित व्यवस्था और भवन निर्माण के निर्धारित मानकों का पालन भी जरूरी है। किसी भी व्यक्ति को नियमों का उल्लंघन करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अवैध निर्माण के मामलों में प्राधिकरण की कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।

एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि प्राधिकरण की टीमें क्षेत्र में निर्माण गतिविधियों की लगातार निगरानी कर रही हैं। बिना स्वीकृत मानचित्र या अनुमति के किए जा रहे निर्माण को चिन्हित कर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि भवन निर्माण से पहले स्वीकृति लेना अनिवार्य है और नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


राखी लेकर एसएसपी दून से मिलने पहुंचीं नन्हीं बालिकाएं, बांधी राखी और लिया सुरक्षा का भरोसा

देहरादून:  रक्षाबंधन के अवसर पर आज पुलिस लाइन देहरादून स्थित पुलिस मॉर्डन स्कूल एवं PUNNYA THE EXPERIENTIAL SCHOOL की नन्हीं बालिकाओं ने एसएसपी देहरादून से मुलाकात कर उनकी कलाई पर राखी बांधी। वहीं ब्रह्मकुमारी संस्था से पहुंचीं बहनों ने भी एसएसपी को राखी बांधकर उनकी दीर्घायु एवं सुख-समृद्धि की कामना की।

इस दौरान एसएसपी देहरादून ने बच्चों से बातचीत कर उनकी पढ़ाई, रुचियों और भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने बालिकाओं को उपहार भेंट करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और उन्हें अपना आशीर्वाद दिया।

एसएसपी ने ब्रह्मकुमारी संस्था से आई बहनों को आश्वस्त किया कि किसी भी प्रकार की आवश्यकता या सहायता होने पर वे पुलिस से संपर्क कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि जनपद पुलिस महिला सुरक्षा, सम्मान और सहयोग के लिए हर समय उनके साथ खड़ी है।

रक्षाबंधन के इस भावपूर्ण अवसर पर ब्रह्मकुमारी संस्था की बहनों ने महिला सुरक्षा के क्षेत्र में दून पुलिस द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की और पुलिस विभाग का आभार व्यक्त किया। बच्चों और पुलिस अधिकारियों के बीच इस आत्मीय मुलाकात ने रक्षाबंधन के पर्व को विश्वास, सुरक्षा और भाईचारे के भाव से और भी खास बना दिया।


राज्य सहकारी नीति-2026 को कैबिनेट से मिली मंजूरी

ग्रामीण अर्थव्यवस्था व स्थानीय उद्यमिता को मिलेगा बढ़ावा

सात रणनीतिक स्तम्भों पर आधारित होगी नई सहकारी व्यवस्था

देहरादून- सूबे में सहकारिता क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए राज्य कैबिनेट ने आज ‘उत्तराखंड राज्य सहकारी नीति-2026’ को मंजूरी दे ही है। इस नीति का उद्देश प्रदेश में सहकारिता आधारित ग्रामीण विकास, स्थानीय उद्यमिता, रोजगार सृजन और आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करना है। सात रणनीतिक स्तम्भों पर आधारित यह नीति गांव-गांव में सहकारिता को बढ़ावा देने को व्यापक रोडमैप प्रस्तुत करती है।

सहकारिता विभाग के अधिकारियों को मुताबिक राष्ट्रीय सहकारी नीति-2025 की मूल भावना “सहकार से समृद्धि” को दृष्टिगत रखते हुये प्रदेश की सहकारिता नीति को तैयार किया गया है। जिसमें पर्वतीय क्षेत्रों की छोटी एवं सीमांत जोतें, बिखरी ग्रामीण आबादी, पलायन, सीमित औद्योगिकीकरण, जलवायु परिवर्तन तथा दुर्गम क्षेत्रों में सेवाओं की सीमित पहुंच जैसी चुनौतियों को ध्यान में रखा गया। नई नीति में सहकारिता को केवल ऋण वितरण की व्यवस्था तक सीमित न रखकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय उद्यमिता की मजबूती के लिये विशेष प्रबंध किये गये हैं।

सात रणनीतिक स्तंभों पर आधारित होगी नई सहकारी व्यवस्था
उत्तराखण्ड राज्य सहकारी नीति-2026 को सात प्रमुख रणनीतिक स्तंभों पर केंद्रित किया गया है। इनमें सहकारिता की बुनियाद को मजबूत करना, सहकारी संस्थाओं की जीवंतता, भविष्य के लिए तैयारी, समावेशिता एवं पहुंच का विस्तार, नए एवं उभरते क्षेत्रों में प्रवेश, सहकारिता से युवा पीढ़ी को जोड़ना तथा आर्थिक व्यवहार्यता एवं विविधीकरण प्रमुख हैं।

पैक्स बनेंगे बहुउद्देशीय ग्रामीण आर्थिक केंद्र
नई नीति के तहत प्राथमिक कृषि ऋण समितियों यानी पैक्स को केवल ऋण उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं तक सीमित न रखकर बहुउद्देशीय, आत्मनिर्भर और व्यावसायिक ग्रामीण आर्थिक केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा। इनके माध्यम से कृषि उद्यान, डेयरी, बागवानी, मत्स्य, भंडारण, कोल्ड-चेन, प्राथमिक प्रसंस्करण, कृषि यंत्र किराया, बीमा, पेंशन, डिजिटल बैंकिंग और अन्य ग्रामीण सेवाओं को सहकारी नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जाएगा। इसके अलावा हिमालयी उत्पादों के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन के लिए छोटे सहकारी उद्यमों को क्लस्टर मॉडल से जोड़ने पर भी विशेष जोर रहेगा।

सहकारिता में मिलेगा महिलाओं व युवाओं को नेतृत्व का अवसर
नीति में महिला और युवा भागीदारी को विशेष प्राथमिकता दी गई है। प्रत्येक जनपद में महिला सहकारी समितियों को प्रोत्साहित करने, स्वयं सहायता समूहों को संस्थागत ऋण एवं बाजार से जोड़ने तथा युवाओं के लिए सहकारी स्टार्टअप, इंटर्नशिप, कौशल विकास, उद्यमिता और रोजगार के अवसर विकसित करने की दिशा तय की गई है। सहकारिता को युवाओं के लिए सम्मानजनक एवं आकर्षक करियर विकल्प बनाने के लिए प्रशिक्षण, शोध, प्रबंधन एवं आधुनिक कौशल विकास तंत्र को मजबूत किया जाएगा।

कृषि, पर्यटन, ऊर्जा, स्वास्थ्य में सहकारिता का होगा विस्तार
नई नीति सहकारिता को पारंपरिक कृषि और ऋण व्यवस्था से आगे ले जाने का मार्ग प्रशस्त करती है। इसके अंतर्गत सहकारी पर्यटन, होम-स्टे नेटवर्क, इको-टूरिज्म, एग्रो-टूरिज्म, आयुष, सौर ऊर्जा, प्राकृतिक एवं जैविक खेती, कार्बन क्रेडिट, वन आधारित उत्पाद, औषधीय एवं सुगंधित पौधे, स्वास्थ्य सेवाएं, ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्मार्ट लॉजिस्टिक्स, हस्तशिल्प और परिवहन जैसे क्षेत्रों में सहकारी मॉडल विकसित किए जाएंगे। राज्य-विशिष्ट पहल के रूप में “सहकार टैक्सी” के माध्यम से सदस्य-स्वामित्व वाली परिवहन सहकारी समितियों को बढ़ावा देने की दिशा भी नीति में शामिल की गई है।

रोजगार व पलायन रोकने पर विशेष जोर
बाइब्रेंट विपेज प्रोग्राम को सहकारिता से जोड़ते हुए सीमांत एवं पर्वतीय गांवों में स्थानीय संसाधनों पर आधारित रोजगार और उद्यम विकसित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य गांव में उत्पादित वस्तुओं का स्थानीय स्तर पर ही प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन कर उत्पादकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है। हब एंड स्पोक माॅडल के माध्यम से पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों में सहकारी सेवाओं की पहुंच को भी मजबूत किया जाएगा।

डिजिटल, पारदर्शी और आधुनिक होगी सहकारी व्यवस्था
नीति के तहत सहकारी संस्थाओं में कागजरहित कार्यप्रणाली, रियल-टाइम लेखांकन, डिजिटल बैंकिंग, नियमित वित्तीय एवं सामाजिक ऑडिट, पेशेवर प्रबंधन और डिजिटल निगरानी को बढ़ावा दिया जाएगा। जिला सहकारी बैंकों में क्लाउड सीबीएस, पैक्स व बैंक एकीकरण तथा मोबाइल-फर्स्ट डिजिटल बैंकिंग जैसी आधुनिक व्यवस्थाओं की दिशा में भी कार्य किया जाएगा।

2026 से 2036 तक तीन चरणों में लागू होगा रोडमैप
उत्तराखण्ड राज्य सहकारी नीति-2026 का क्रियान्वयन वर्ष 2026 से 2036 तक तीन चरणों में प्रस्तावित है। पहला चरण के तहत वर्ष 2026-27 तक विधिक सुधार, एमआईएस प्रशिक्षण, संस्थागत ढांचे और डिजिटलीकरण पर फोकस रहेगा। द्वितीय चरण में वर्ष 2028-31 तक ग्राम पंचायत स्तर तक सहकारी सेवाओं का विस्तार, मूल्य-श्रृंखला आधारित क्लस्टर तथा बहुउद्देशीय सहकारी सेवा नेटवर्क का विकास किया जायेगा। तीसरे चरण में वर्ष 2032-36 तक उत्तराखण्ड को पर्वतीय सहकारी उद्यमों के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाना तथा औषधीय उत्पाद, हस्तशिल्प, दुग्ध, मत्स्य एवं अन्य हिमालयी उत्पादों की राष्ट्रीय और वैश्विक ब्रांडिंग को बढ़ावा देना है।

नीति के माध्यम से राज्य में सशक्त एमपैक्स नेटवर्क, डिजिटल सहकारी इकोसिस्टम, महिला एवं युवा नेतृत्व में वृद्धि, सीमांत क्षेत्रों में रोजगार सृजन, पलायन में कमी और सहकारिता आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विस्तार का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य, जिला एवं विभागीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था के साथ डिजिटल डैशबोर्ड आधारित मूल्यांकन प्रणाली विकसित की जाएगी।

बयान
राज्य कैबिनेट ने उत्तराखण्ड राज्य सहकारी नीति 2026 को मंजूरी दे दी है। हमारा लक्ष्य केवल सहकारी समितियों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम, आत्मनिर्भर और सदस्य-केंद्रित संस्थाओं के रूप में विकसित करना है। सहकार से समृद्धि के मंत्र के साथ उत्तराखण्ड अपने विशिष्ट ‘हिमालयी सहकारिता मॉडल’ की दिशा में आगे बढ़ रहा है।- डाॅ. धन सिंह रावत, सहकारिता मंत्री, उत्तराखंड।


मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में रक्षाबंधन व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग का विशेष अभियान

जिलाधिकारी के निर्देशन में पौड़ी व यमकेश्वर में खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण, 20 विधिक एवं सर्विलांस नमूने जांच के लिए भेजे गए

एक्सपायर्ड व बिना लेबल वाले खाद्य उत्पाद मौके पर नष्ट कराए, साफ-सफाई एवं भंडारण मानकों के पालन के दिए निर्देश

पौड़ी- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के क्रम में आगामी रक्षाबंधन एवं श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व को देखते हुए जनपद में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन तथा खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा विशेष जांच एवं प्रवर्तन अभियान चलाया जा रहा है। जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया के निर्देशन में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण, नमूना संग्रहण तथा खाद्य प्रतिष्ठानों में स्वच्छता एवं भंडारण संबंधी मानकों की जांच के निर्देश दिए गए हैं।

अभियान के तहत मंगलवार को पौड़ी मुख्य बाजार तथा यमकेश्वर के लक्ष्मणझूला-गीताभवन क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमों ने प्रशासन के साथ संयुक्त रूप से विभिन्न खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। इस दौरान मिठाई, नमकीन, दूध एवं दुग्ध उत्पाद, बिस्किट, सेवई सहित अन्य खाद्य पदार्थों के कुल 20 विधिक एवं सर्विलांस नमूने जांच के लिए संग्रहित किए गए। सभी नमूनों को परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अभियान के दौरान मिठाई एवं नमकीन के 10, दूध एवं दुग्ध उत्पादों के 2 तथा बिस्किट, सेवई सहित अन्य खाद्य पदार्थों के 8 नमूने लिए गए। टीमों ने मिठाई निर्माताओं, बेकरी सहित अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में साफ-सफाई, खाद्य पदार्थों के रख-रखाव एवं भंडारण संबंधी मानकों का भी निरीक्षण किया। प्रतिष्ठान संचालकों को स्वच्छता को प्राथमिकता देने तथा खाद्य पदार्थों को निर्धारित मानकों के अनुरूप सुरक्षित परिस्थितियों में रखने के निर्देश दिए गए।

निरीक्षण के दौरान कुछ प्रतिष्ठानों में बिना लेबल वाले बेकरी उत्पाद पाए गए, जिन्हें टीम द्वारा मौके पर ही नियमानुसार नष्ट कराया गया। इसके साथ ही एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री को भी अलग कर नियमानुसार नष्ट कराया गया। खाद्य कारोबारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि बिना लेबल, एक्सपायर्ड अथवा मानकों के विपरीत खाद्य सामग्री का विक्रय न किया जाए।

पौड़ी क्षेत्र में अभियान सहायक आयुक्त खाद्य पीसी जोशी, वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी पौड़ी रचना लाल एवं प्रभारी नायब तहसीलदार जयकृष्ण भट्ट के नेतृत्व में चलाया गया। वहीं यमकेश्वर क्षेत्र में तहसीलदार वैभव जोशी एवं वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी संदीप मिश्रा के नेतृत्व में टीम ने खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया।

सहायक आयुक्त खाद्य ने बताया कि इससे पूर्व चलाए गए अभियान में विभिन्न खाद्य पदार्थों के कुल 10 नमूने जांच के लिए संग्रहित किए गए थे। इनमें विधिक जांच के लिए हल्दी पाउडर, धनिया मसाला, सोन पापड़ी, चाय पत्ती, ग्रीन चिली सॉस एवं स्प्राइट के एक-एक नमूने तथा सर्विलांस जांच के लिए सरसों तेल, नमकीन, बिस्किट एवं दूध के नमूने शामिल थे। इन नमूनों को भी प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजा गया है।

विभाग द्वारा खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत प्रवर्तन कार्रवाई भी की जा रही है। इस माह एडीएम कोर्ट में एक प्रकरण का निर्णय हुआ, जिसमें मावा विक्रेता पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। वर्तमान में एडीएम कोर्ट में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत 46 प्रकरण दर्ज हैं।

जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने कहा कि त्योहारी सीजन को देखते हुए जनपद में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता एवं सुरक्षा को लेकर जांच एवं प्रवर्तन अभियान लगातार जारी रहेगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को दूध एवं दुग्ध उत्पाद, मावा, मिठाई सहित अन्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच के साथ ही खाद्य प्रतिष्ठानों में साफ-सफाई, लेबलिंग एवं भंडारण संबंधी मानकों के अनुपालन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने खाद्य कारोबारियों से निर्धारित मानकों का पालन करने तथा उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण एवं सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने की अपील की।


गुरुग्राम में 33 वर्षीय युवक की नुकीली चीज से हत्या, दोस्तों पर आरोप; जांच तेज

गुरुग्राम। उद्योग विहार थाना क्षेत्र में 33 वर्षीय युवक की नुकीली वस्तु से हमला कर हत्या किए जाने का मामला सामने आया है। सोमवार शाम उसका शव ओल्ड दिल्ली रोड स्थित पार्क अस्पताल के पास लहूलुहान हालत में मिला। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया और मंगलवार को परिजनों को सौंप दिया। मामले में हत्या का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

मृतक की पहचान डूंडाहेड़ा गांव निवासी हरिजीत कुमार के रूप में हुई है। वह अपने परिवार के साथ रहता था और अविवाहित था। पुलिस के मुताबिक, हरिजीत नशे का आदी था और फिलहाल कोई काम नहीं करता था। परिवार ने उसे नशे की लत से बाहर निकालने के लिए कई बार दिल्ली स्थित नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती कराया था। करीब छह महीने पहले वह इलाज के बाद घर लौटा था, लेकिन दोबारा नशे की संगत में पड़ गया।

परिजनों के अनुसार, सोमवार सुबह हरिजीत ने बताया था कि वह अपने दोस्तों हरकेश, मोनू नेपाली और अन्य लोगों के साथ बाहर जा रहा है। इसके बाद वह घर से निकल गया। शाम को परिवार को उसके शव के पार्क अस्पताल के पास पड़े होने की जानकारी मिली। राहगीरों से सूचना मिलने के बाद उद्योग विहार थाना पुलिस के साथ एफएसएल और सीन ऑफ क्राइम की टीम मौके पर पहुंची और साक्ष्य जुटाए।

पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हरिजीत के शरीर पर नुकीली वस्तु से कई वार किए गए थे। परिजनों ने उसके दोस्तों पर ही हत्या करने और शव को वहां फेंकने का आरोप लगाया है। परिवार का कहना है कि नशे को लेकर हरिजीत का दोस्तों के साथ अक्सर विवाद होता था।

उद्योग विहार थाना पुलिस ने आरोपितों की तलाश के लिए टीमें गठित की हैं। कुछ संदिग्ध लोगों से पूछताछ भी की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर जल्द ही हत्या की पूरी घटना का खुलासा किया जाएगा।


हरदोई में शाम से लापता सात वर्षीय बालक का तालाब में मिला शव, डूबने से मौत

हरदोई। टड़ियावां थाना क्षेत्र के जयराजपुर गांव में सोमवार शाम से लापता सात वर्षीय बालक का शव मंगलवार सुबह गांव के बाहर स्थित तालाब से बरामद हुआ। शव मिलने के बाद परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों ने बालक की हत्या कर शव तालाब में फेंके जाने की आशंका जताते हुए गांव के एक व्यक्ति पर आरोप लगाया। हालांकि पुलिस की प्रारंभिक जांच में पैर फिसलने के बाद तालाब में डूबने से मौत की बात सामने आई है।

जयराजपुर निवासी विनय का सात वर्षीय बेटा शिवा गांव के प्राथमिक विद्यालय में कक्षा एक में पढ़ता था। परिजनों के मुताबिक, सोमवार शाम शिवा पड़ोस के एक बच्चे के साथ खेलने के लिए घर से निकला था। देर शाम तक वापस नहीं लौटने पर परिवार ने उसकी तलाश शुरू की। साथ गए बच्चे से भी शिवा के बारे में जानकारी लेने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी।

मंगलवार सुबह परिजन और ग्रामीण उसकी तलाश कर रहे थे। इसी दौरान गांव के बाहर बाग में स्थित तालाब में शिवा का शव पड़ा मिला। परिजनों ने शव पर कुछ चोट के निशान होने की बात कहते हुए हत्या की आशंका जताई और एक व्यक्ति पर आरोप लगाया। हालांकि परिवार ने किसी पुरानी रंजिश से इनकार किया है।

सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल की जांच की। फोरेंसिक टीम ने भी मौके से आवश्यक नमूने और साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

पुलिस के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बालक की मौत डूबने से होने की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट में किसी चोट का उल्लेख नहीं किया गया है। थाना प्रभारी इख्तियार हुसैन ने बताया कि प्रथम दृष्टया पैर फिसलने के कारण बालक के तालाब में गिरने और डूबने से मौत होने की आशंका है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।


आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और बाजार मूल्यों की नियमित निगरानी करें अधिकारी- मुख्यमंत्री

कालाबाजारी, जमाखोरी और मुनाफाखोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश

देहरादून। प्रदेश में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण बनाए रखने और आम जनता को उचित दरों पर सामान उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को बाजार में वस्तुओं की उपलब्धता और कीमतों पर लगातार नजर रखने को कहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कालाबाजारी, जमाखोरी और मुनाफाखोरी के जरिए कृत्रिम रूप से कीमतें बढ़ाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग समेत संबंधित विभागों को बाजार की स्थिति की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर आवश्यक वस्तुओं की कृत्रिम कमी पैदा कर उपभोक्ताओं से निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली नहीं होनी चाहिए। साथ ही मांग और आपूर्ति की स्थिति पर भी लगातार नजर रखते हुए जरूरत के अनुसार समयबद्ध कदम उठाने को कहा गया।

सभी जिलों में प्रशासन को नियमित बाजार निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। इस दौरान आवश्यक वस्तुओं के निर्धारित और प्रचलित बाजार भाव के साथ-साथ दुकानों एवं प्रतिष्ठानों में उपलब्ध स्टॉक की भी जांच की जाएगी। कालाबाजारी, जमाखोरी या निर्धारित मानकों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में अनावश्यक बढ़ोतरी का सीधा असर आम लोगों के घरेलू बजट पर पड़ता है। ऐसे में मूल्य नियंत्रण की व्यवस्था प्रभावी और पारदर्शी रहनी चाहिए। उन्होंने शासन और जिला प्रशासन के अधिकारियों को आपसी समन्वय से काम करते हुए बाजारों पर सतत निगरानी रखने तथा अनियमितता की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए।


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