Drop Us An Email Any Enquiry Drop Us An Emailshailesh.lekhwar2000@gmail.com
Call Us For Consultation Call Us For Consultation +91 9818666272

“भारत में महिला नेतृत्व लोकतंत्र की ताकत” — CSPOC में बोले प्रधानमंत्री मोदी

“भारत में महिला नेतृत्व लोकतंत्र की ताकत” — CSPOC में बोले प्रधानमंत्री मोदी

“भारत में महिला नेतृत्व लोकतंत्र की ताकत” — CSPOC में बोले प्रधानमंत्री मोदी

पीएम मोदी ने संविधान सदन में 28वीं कॉमनवेल्थ स्पीकर्स कॉन्फ्रेंस का किया उद्घाटन

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में 28वीं कॉमनवेल्थ स्पीकर्स एंड प्रेसिडिंग ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस (CSPOC) 2026 का औपचारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर लोकतंत्र, संसदीय व्यवस्था और वैश्विक सहयोग को लेकर भारत की भूमिका को रेखांकित किया गया। कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह उपस्थित रहे।

अपने उद्घाटन संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय लोकतंत्र की समावेशिता और महिला नेतृत्व की मजबूती पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की राष्ट्रपति देश की प्रथम नागरिक हैं और दिल्ली की मुख्यमंत्री भी एक महिला हैं, जो यह दर्शाता है कि भारत में महिलाएं न केवल लोकतंत्र का हिस्सा हैं, बल्कि नेतृत्व की अग्रिम पंक्ति में भी खड़ी हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि 2024 के आम चुनाव मानव इतिहास का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक अभ्यास रहे, जिसमें करीब 98 करोड़ मतदाता पंजीकृत थे और महिलाओं की भागीदारी ऐतिहासिक रही।

प्रधानमंत्री ने सेंट्रल हॉल के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यही वह स्थान है जहां स्वतंत्रता से पहले संविधान सभा की बैठकें हुईं और आजादी के बाद दशकों तक यहीं से देश के भविष्य से जुड़े अहम फैसले लिए गए। अब इस ऐतिहासिक धरोहर को संविधान सदन के रूप में लोकतंत्र को समर्पित किया गया है।

कॉमनवेल्थ देशों के साथ भारत के सहयोग पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कॉमनवेल्थ की कुल आबादी का लगभग आधा हिस्सा भारत में निवास करता है और भारत का प्रयास रहा है कि वह स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, आर्थिक विकास और नवाचार जैसे क्षेत्रों में साझा लक्ष्यों की प्राप्ति में सक्रिय योगदान दे। उन्होंने कहा कि भारत अपने अनुभवों से सीखने के साथ-साथ उन्हें अन्य साझेदार देशों के साथ साझा करने में भी विश्वास रखता है, विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण के लिए नए अवसरों के निर्माण में।

प्रधानमंत्री मोदी ने संसदीय लोकतंत्र में स्पीकर की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि स्पीकर का दायित्व केवल सदन का संचालन करना नहीं, बल्कि निष्पक्षता, धैर्य और संतुलन के साथ हर सदस्य को अपनी बात रखने का अवसर देना भी है। उन्होंने कहा कि यह चौथा अवसर है जब भारत इस प्रतिष्ठित सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है और इस बार सम्मेलन का मुख्य विषय “संसदीय लोकतंत्र की प्रभावी डिलीवरी” रखा गया है।

प्रधानमंत्री ने भारत को लोकतंत्र की जननी बताते हुए कहा कि सहमति, संवाद और विचार-विमर्श की परंपरा भारत की प्राचीन सभ्यता का हिस्सा रही है। उन्होंने कहा कि तमाम शंकाओं के बावजूद भारत ने यह सिद्ध किया है कि विविधता लोकतंत्र की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी ताकत है। लोकतांत्रिक संस्थाओं ने देश को स्थिरता, गति और विकास का मजबूत आधार दिया है।

आर्थिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। डिजिटल भुगतान प्रणाली यूपीआई, वैक्सीन उत्पादन और इस्पात निर्माण जैसे क्षेत्रों में भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है।

इस सम्मेलन की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला कर रहे हैं। इसमें 42 कॉमनवेल्थ देशों के 61 स्पीकर्स और प्रेसिडिंग ऑफिसर्स सहित अर्ध-स्वायत्त संसदों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका और मलेशिया सहित कई देशों के प्रतिनिधि सम्मेलन में शामिल हुए हैं।

सम्मेलन के दौरान संसद की बदलती भूमिका, तकनीकी नवाचार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग, सोशल मीडिया का प्रभाव, नागरिक भागीदारी बढ़ाने की रणनीतियों और सांसदों की सुरक्षा व कल्याण जैसे विषयों पर गहन चर्चा की जाएगी। 14 से 16 जनवरी तक चलने वाला यह सम्मेलन अब तक का सबसे बड़ा CSPOC माना जा रहा है, जिसकी पिछली बैठक जनवरी 2024 में युगांडा में आयोजित हुई थी।


Latest News in hindi

Call Us On  Whatsapp