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श्रद्धा और गरिमा के साथ मनाया गया 10वां सशस्त्र बल पूर्व सैनिक दिवस

श्रद्धा और गरिमा के साथ मनाया गया 10वां सशस्त्र बल पूर्व सैनिक दिवस

श्रद्धा और गरिमा के साथ मनाया गया 10वां सशस्त्र बल पूर्व सैनिक दिवस

राज्यपाल गुरमीत सिंह ने पूर्व सैनिकों को बताया राष्ट्र की मजबूत नींव

वेटरन्स डे समारोह में करीब 1000 पूर्व सैनिकों की रही सहभागिता

देहरादून। मुख्यालय उत्तराखंड सब एरिया (HQ UK Sub Area), देहरादून द्वारा 14 जनवरी 2026 को 10वें सशस्त्र बल पूर्व सैनिक दिवस (वेटरन्स डे) का आयोजन पूर्ण गरिमा और श्रद्धा के साथ किया गया। यह दिवस भारत के प्रथम कमांडर-इन-चीफ फील्ड मार्शल के. एम. करिअप्पा की सेवानिवृत्ति वर्षगांठ के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जिनके दूरदर्शी नेतृत्व और 1947 के युद्ध में दिए गए योगदान ने भारतीय सशस्त्र बलों में अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और निस्वार्थ सेवा की मजबूत परंपरा स्थापित की।

समारोह के दौरान सशस्त्र बलों के वीर सैनिकों एवं वीर नारियों —देश की मिट्टी के सच्चे सपूतों— को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई तथा उत्तराखंड के विशिष्ट पूर्व सैनिकों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में लगभग 1,000 पूर्व सैनिकों की भागीदारी रही। सेना, नौसेना और वायु सेना के सेवारत जवानों के साथ एनसीसी कैडेट्स की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा और प्रेरणादायी स्वरूप प्रदान किया।

समारोह को संबोधित करते हुए उत्तराखंड के माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह, पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, वीएसएम (से.नि.) ने कहा कि पूर्व सैनिक राष्ट्र की सुरक्षा और सशक्तता की मजबूत नींव हैं, जिनका साहस, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा समाज एवं युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। पूर्व सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने राज्य सरकार द्वारा पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के कल्याण हेतु संचालित विभिन्न योजनाओं और पहलों की जानकारी दी। वहीं मेजर जनरल एमपीएस गिल, वीएसएम, जनरल ऑफिसर कमांडिंग, उत्तराखंड सब एरिया ने राष्ट्र सेवा में पूर्व सैनिकों के अतुलनीय योगदान और बलिदान को स्मरण करने की आवश्यकता पर बल दिया।

यह आयोजन पूर्व सैनिकों एवं उनके परिवारों के कल्याण के प्रति मुख्यालय उत्तराखंड सब एरिया की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। पूर्व सैनिकों और सेवारत कार्मिकों की एकजुट उपस्थिति ने फील्ड मार्शल करिअप्पा की गौरवशाली विरासत तथा देश की रक्षा के लिए सदैव तत्पर भारतीय सैनिकों की अडिग भावना को प्रभावी रूप से उजागर किया।


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