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अमेरिकी तकनीकी पहल से बाहर रहा भारत, कांग्रेस ने सरकार की विदेश नीति पर उठाए सवाल

अमेरिकी तकनीकी पहल से बाहर रहा भारत, कांग्रेस ने सरकार की विदेश नीति पर उठाए सवाल

अमेरिकी तकनीकी पहल से बाहर रहा भारत, कांग्रेस ने सरकार की विदेश नीति पर उठाए सवाल

नई दिल्ली। अमेरिका के नेतृत्व में वैश्विक तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित और मजबूत बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई नई रणनीतिक पहल ‘पैक्स सिलिका’ में भारत को शामिल नहीं किया गया है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि यह फैसला भारत के हितों के खिलाफ है और सरकार की विदेश नीति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

कांग्रेस का कहना है कि सिलिकॉन और अत्याधुनिक तकनीकों से जुड़ी इस अंतरराष्ट्रीय पहल में भारत की गैर-मौजूदगी कोई सकारात्मक संकेत नहीं देती। पार्टी के अनुसार, यदि भारत इस समूह का हिस्सा होता तो देश को तकनीक, नवाचार और आपूर्ति श्रृंखला के लिहाज से दीर्घकालिक लाभ मिल सकते थे।

कांग्रेस महासचिव (संचार प्रभारी) जयराम रमेश ने इस मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर परोक्ष तंज कसते हुए कहा कि एक ओर प्रधानमंत्री वैश्विक मंचों पर मजबूत व्यक्तिगत रिश्तों का उल्लेख करते हैं, वहीं दूसरी ओर भारत को इस अहम रणनीतिक समूह में जगह नहीं मिल पाई। उन्होंने इसे मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक स्थिति का संकेत बताया।

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने चीन पर तकनीकी निर्भरता घटाने के उद्देश्य से नौ देशों के साथ मिलकर ‘पैक्स सिलिका’ नामक पहल शुरू की है। इस समूह में अमेरिका के अलावा जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, नीदरलैंड, ब्रिटेन, इज़राइल, संयुक्त अरब अमीरात और ऑस्ट्रेलिया को शामिल किया गया है।

उन्होंने कहा कि हाल के महीनों में भारत और अमेरिका के शीर्ष नेतृत्व के संबंधों में आई ठंडक के बीच भारत का इस पहल से बाहर रहना आश्चर्यजनक नहीं है। हालांकि, कांग्रेस का मानना है कि भारत के लिए यह अवसर रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से बेहद अहम हो सकता था।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार, ‘पैक्स सिलिका’ का उद्देश्य भविष्य की तकनीकों, विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी आवश्यक सामग्रियों और क्षमताओं को सुरक्षित करना, आपूर्ति जोखिमों को कम करना और सदस्य देशों को उभरती तकनीकों के विकास व उपयोग में सक्षम बनाना है।

कुल मिलाकर, इस पहल से भारत के बाहर रहने को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है और विपक्ष इसे सरकार की कूटनीतिक विफलता के रूप में पेश कर रहा है।


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