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गाय केवल आस्था नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, समाज और विज्ञान का संगम है- कुसुम कंडवाल

गाय केवल आस्था नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, समाज और विज्ञान का संगम है- कुसुम कंडवाल

गाय केवल आस्था नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, समाज और विज्ञान का संगम है- कुसुम कंडवाल

ऋषिकेश में मातृशक्ति ने गौ संवर्द्धन के लिए लिया संकल्प, कुसुम कंडवाल की अपील पर फिल्म ‘गोदान’ देखने उमड़ीं महिलाएं

ऋषिकेश। उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल के एक आह्वान पर ऋषिकेश के ‘रामा पिक्चर पैलेस’ में नारी शक्ति का अभूतपूर्व सैलाब उमड़ पड़ा। अवसर था गौ-संवर्धन और सांस्कृतिक चेतना पर आधारित फिल्म ‘गोदान’ के विशेष प्रदर्शन का, जहाँ क्षेत्र की लगभग 1100 से अधिक महिलाओं ने शिरकत कर आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।

​कार्यक्रम की लोकप्रियता का आलम यह रहा कि सिनेमाघर की क्षमता कम पड़ गई और हॉल ‘हाउसफुल’ हो गया। 1100 से अधिक महिलाओं की भारी भीड़ के कारण जिन महिलाओं को भीतर स्थान नहीं मिल सका, उन्हें इस फिल्म की अगली प्रस्तुति पर फिल्म देखने के लिए कहा गया।

इस दौरान एक प्रेरक दृश्य तब देखने को मिला जब सीट फुल हो जाने पर सिनेमा हॉल में प्रवेश न होने के कारण बाहर रुकी महिलाओं ने सामूहिक रूप से अपने-अपने मोबाइल फोन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 131वें संस्करण को सुना। यह दृश्य महिलाओं की अटूट एकजुटता और राष्ट्रीय विषयों के प्रति उनकी सजगता का जीवंत प्रमाण बना।

​इस अवसर पर मातृशक्ति को संबोधित करते हुए कुसुम कंडवाल ने कहा कि ‘रामा पिक्चर पैलेस’ में गौ-संवर्धन आधारित फिल्म ‘गोदान’ के माध्यम से समाज में एक सकारात्मक और प्रेरणादायी संदेश प्रसारित करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा, “गौ-संरक्षण व गौ-संवर्धन की यह कहानी समाज की सोच बदल सकती है। गाय केवल आस्था नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, समाज और विज्ञान का संगम है। यह फिल्म वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक दृष्टिकोण के साथ-साथ आधुनिकता एवं परंपराओं का एक अद्वितीय समन्वय प्रस्तुत करती है।

वहीं कंडवाल ने आगे कहा कि गौ माता के प्रति श्रद्धा और सेवा भाव हमारे संस्कारों का अभिन्न हिस्सा रहा है। यह आयोजन केवल एक फिल्म प्रदर्शन नहीं, बल्कि गौ-सेवा के प्रति जागरूकता बढ़ाने, सामाजिक एकता को सुदृढ़ करने और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का एक सार्थक प्रयास है।

​इस भव्य कार्यक्रम में सरोज डिमरी, माधवी गुप्ता, सुंदरी कंडवाल, कमला नेगी, लक्ष्मी सेमवाल, सोनी रावत, पुष्पा ध्यानी, अनिता तिवाड़ी, रीना शर्मा, नीलम चमोली, हिमानी कौशिक, निवेदिता सरकार, निर्मला उनियाल, माधुरी नरेंद्र शर्मा, सीमा पंवार, आरती कौशिक सहित क्षेत्र की अनेकों प्रबुद्ध महिलाएं और भारी संख्या में मातृशक्ति उपस्थित रही। उपस्थित महिलाओं ने महिला आयोग की इस पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा की और इसे समाज को जोड़ने वाला एक अत्यंत प्रेरणादायक कदम बताया।


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