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विदेश से सीधे मेडिकल उपकरण आयात पर विवाद, AiMeD ने उठाए सुरक्षा से जुड़े सवाल

विदेश से सीधे मेडिकल उपकरण आयात पर विवाद, AiMeD ने उठाए सुरक्षा से जुड़े सवाल

विदेश से सीधे मेडिकल उपकरण आयात पर विवाद, AiMeD ने उठाए सुरक्षा से जुड़े सवाल

पूजा भट्ट

भारत की दवा नियामक संस्था केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की ओर से अस्पतालों को अत्याधुनिक और उच्च-स्तरीय चिकित्सा उपकरण सीधे विदेश से आयात करने की संभावित अनुमति देने के प्रस्ताव पर उद्योग जगत की प्रतिक्रिया सामने आई है। एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री (AiMeD) ने इस प्रस्ताव को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज की हैं और इसे मरीजों की सुरक्षा तथा नियामकीय व्यवस्था के लिए चुनौती बताया है।

AiMeD के को-ऑर्डिनेटर राजीव नाथ ने कहा कि पहली नजर में यह व्यवस्था अस्पतालों के लिए खरीद प्रक्रिया को आसान बना सकती है, लेकिन लंबे समय में इसके कई नकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं। उनके अनुसार, यदि अस्पताल सीधे विदेशी कंपनियों से उपकरण मंगाने लगते हैं, तो उपकरणों की गुणवत्ता, रखरखाव और जवाबदेही सुनिश्चित करना मुश्किल हो सकता है।

उन्होंने बताया कि मौजूदा व्यवस्था में मेडिकल उपकरण निर्माता कंपनियां और उनके अधिकृत प्रतिनिधि कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते हैं। इनमें उपकरण की बिक्री के बाद निगरानी, तकनीकी सहायता, खराबी दूर करना, नियमित सर्विसिंग, सुरक्षा मानकों की रिपोर्टिंग और डॉक्टरों को प्रशिक्षण देना शामिल होता है। उनका कहना है कि सीधे आयात की स्थिति में इन जिम्मेदारियों को निभाने वाला स्पष्ट तंत्र कमजोर पड़ सकता है।

AiMeD ने यह भी कहा कि यह प्रस्ताव भारत सरकार की उन नीतियों के विपरीत दिखाई देता है, जिनका उद्देश्य देश में मेडिकल उपकरण निर्माण को बढ़ावा देना है। राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति 2023, मेक इन इंडिया अभियान और पीएलआई योजना के तहत घरेलू उत्पादन और निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है। ऐसे में आयात प्रक्रिया को आसान बनाना स्थानीय उद्योग और निवेशकों के विश्वास को प्रभावित कर सकता है।

राजीव नाथ ने सुझाव दिया कि आयात नियमों में किसी भी तरह का बदलाव करने से पहले यह आकलन किया जाना चाहिए कि संबंधित तकनीक या उपकरण भारत में विकसित या निर्मित किए जा सकते हैं या नहीं। साथ ही उन्होंने कहा कि इस तरह के निर्णयों से पहले उद्योग, अस्पतालों और अन्य हितधारकों से व्यापक स्तर पर चर्चा और पारदर्शी समीक्षा जरूरी है।

उनका कहना है कि मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराना, नियामकीय व्यवस्था बनाए रखना और देश में उत्पादन को बढ़ावा देना—इन तीनों लक्ष्यों के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है।


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