Drop Us An Email Any Enquiry Drop Us An Emailshailesh.lekhwar2000@gmail.com
Call Us For Consultation Call Us For Consultation +91 9818666272

गलत योग करने की वजह से हो सकती है कई परेशानियों, इन बातों का रखे ध्यान 

Category Archives: फिटनेस

गलत योग करने की वजह से हो सकती है कई परेशानियों, इन बातों का रखे ध्यान 

आज के समय में शरीर को स्वस्थ्य रखने के लिए लोगों को योग करना सबसे सही विकल्प माना जाता है। योग शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होता है। इसी वजह से बड़े-बड़े सिलेब्स भी भी जिम जाने की बजाए योगासन करना पसंद करते हैं। वैसे तो ये शरीर के लिए काफी फायदेमंद है लेकिन गलत ढंग से किए गए योगासन फायदे की बजाय नुकसान पहुंचा सकते हैं।

यदि आसन करने की सही तकनीक, मुद्रा और श्वसन प्रक्रिया का पालन न किया जाए, तो यह शरीर के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। यहां हम आपको कुछ ऐसी परेशानियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका सामना आपको गलत योग करने की वजह से करना पड़ सकता है।

मांसपेशियों में खिंचाव का डर

यदि आप एक भी बार गलत तरीके से योगासन करेंगे तो इससे मांसपेशियों में खिंचाव का डर रहता है। कई बार तो चोट भी लग जाती है। खासतौर पर यदि आप बैकबेंड, हेडस्टैंड और फॉरवर्ड बेंड जैसे आसनों को बिना अभ्यास के करते हैं तो रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ के चोट लगने का डर हो जाता है।

शरीर के जोड़ों में दिक्कत का डर

योग करते समय गलत मुद्रा या अतिरिक्त दबाव से शरीर के जोड़ों में दिक्कत हो सकती है। इसकी वजह से घुटनों, कलाई और कंधों पर तनाव बढ़ सकता है। गलत तरीके से अभ्यास करने पर अर्थराइटिस या जोड़ों के दर्द की समस्या हो सकती है। इसीलिए योग करते समय खास ध्यान रखें।

बढ़ सकती हैं सांस से जुड़ी समस्याएं

यदि आप प्राणायाम गलत ढंग से करेंगे तो इसकी वजह से चक्कर आना, घबराहट या ऑक्सीजन की कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं यदि अनुलोम-विलोम, कपालभाति या भस्त्रिका गलत तरीके से किया जाए तो फेफड़ों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए इसे करते समय भी खास ध्यान रखें।

हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग का खतरा बढ़ने का डर

जो लोग हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग के मरीज हैं तो आपको योग करते समय ध्यान रखना पड़ेगा। यदि उच्च रक्तचाप  के मरीज बिना सही गाइडेंस के कठिन योगासन करते हैं, तो हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

इन बातों का ध्यान रख कर करें योग

यदि आप योग करना चाहते हैं तो हमेशा योग प्रशिक्षक या एक्सपर्ट की निगरानी में योग करें। यदि आपको योग करने में कोई परेशानी है तो अपने शरीर की सीमाओं को समझें और जबरदस्ती कठिन आसन न करें। योग करने से पहले वार्मअप करें और बाद में कूलडाउन एक्सरसाइज करें। यदि शरीर मेंयोग के बाद कहीं दिक्कत लग रही है तो तत्काल विशेषज्ञ की सलाह लें।

(साभार)


आजकल क्यों बढ़ रहा किडनी डैमेज का खतरा, आइये जानते हैं इसके कारण और बचाव के उपाय

किडनी हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है। ये रक्त को फिल्टर करके अपशिष्ट और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने, शरीर में द्रव संतुलन बनाए रखने और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद करती है। हालांकि लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के चलते शरीर के इस महत्वपूर्ण अंग की सेहत पर गंभीर असर होता जा रहा है।

किडनी, हार्ट और लिवर की बीमारियां कुछ दशकों पहले तक उम्र बढ़ने के साथ देखी जाती थीं, हालांकि अब कम उम्र के लोग न सिर्फ इसका शिकार हो रहे हैं, बल्कि इसके कारण मौत के मामले भी बढ़े हैं।

किडनी डैमेज होने को जानलेवा स्थिति के रूप में जाना जाता है। जब किडनी ठीक से काम नहीं कर रही होती है तो शरीर में विषाक्त पदार्थ बढ़ने लग जाते हैं, खून में अशुद्धि बढ़ जाती है और ब्लड प्रेशर अनियंत्रित हो सकता है। अगर किडनी की इस समस्या का समय पर पता न चले या इलाज न हो पाए तो इसके कारण जान भी जा सकती है।

अब सवाल उठता है कि आखिर किडनी डैमेज क्यों होती है और इससे कैसे बचा जा सकता है?

क्रोनिक किडनी डिजीज का बढ़ता खतरा

साल 2022 के आंकड़ों के मुताबिक क्रोनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) एक गंभीर समस्या के रूप में उभर रही है, जो दुनियाभर में 10% से अधिक आबादी को प्रभावित करती है। पिछले दो दशकों में इससे संबंधित मौतों में भी उल्लेखनीय वृद्धि भी हुई है।

भारतीय आबादी के लिए भी ये समस्या गंभीर रही है। महाराष्ट्र में 2018 से 2023 के बीच किडनी फेलियर से होने वाली मौतें दोगुनी हो गईं, जबकि 2022 और 2023 के बीच मौतों में 40% की वृद्धि देखी गई।

लाइफस्टाइल में गड़बड़ी के अलावा कुछ अंतर्निहित बीमारियां भी किडनी को गंभीर रूप से प्रभावित करती जा रही हैं।

ब्लड प्रेशर और शुगर के मरीजों में खतरा

किडनी डैमेज होने के जोखिमों को बढ़ाने वाली स्थितियों में हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज प्रमुख है।

हाई ब्लड प्रेशर किडनी को रक्त की आपूर्ति करने वाली रक्त वाहिकाओं को संकीर्ण और कमजोर कर देती है। यह किडनी से अपशिष्ट को छानने और तरल पदार्थों को संतुलित रखने में दिक्कत बढ़ा देती है। समय रहते अगर इसपर ध्यान न दिया जाए तो इससे किडनी डैमैज होने का जोखिम बढ़ जाता है।

हाई ब्लड प्रेशर के अलावा शुगर लेवल बढ़ने से भी किडनी को नुकसान पहुंचता है। हाई शुगर के कारण किडनी में रक्त वाहिकाओं और फिल्टरिंग इकाइयों को क्षति होने लगती है। जिन लोगों का शुगर लेवल अक्सर बढ़ा हुआ रहता है उनमें किडनी डैमेज होने का खतरा भी अधिक होता है।

इन स्थितियों पर भी दें ध्यान

हाई ब्लड प्रेशर और हाई शुगर के अलावा भी कुछ स्थितियां किडनी को गंभीर रोगों का कारण बन सकती हैं।
दर्द निवारक दवाओं और एंटीबायोटिक्स का लम्बे समय तक या अत्यधिक सेवन किडनी को नुकसान पहुंचा सकती है।
किडनी या मूत्र मार्ग में पथरी के कारण भी किडनी में सूजन और संक्रमण का खतरा बढ़ता है।
कुछ अनुवांशिक स्थितियां जैसे पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज, किडनी की संरचना और कार्य को प्रभावित करती है।

किडनी डैमेज से बचाव के उपाय

लाइफस्टाइल और आहार में सुधार के साथ ब्लड प्रेशर और शुगर को कंट्रोल रखकर किडनी को स्वस्थ रखा जा सकता है।
फल, सब्जियां, साबुत अनाज और लो वसा वाले आहार का सेवन करें। नमक और प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करें।
नियमित शारीरिक गतिविधि से वजन, ब्लड प्रेशर और शुगर कंट्रोल रहता है, जिससे किडनी स्वस्थ रहती है।
दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से किडनी को विषाक्त पदार्थों को फिल्टर करने में सहायता मिलती है।
दर्द निवारक दवाओं का सेवन डॉक्टर की सलाह अनुसार ही करें और अनावश्यक दवाओं से बचें।
यूटीआई के लक्षण महसूस होने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें ताकि संक्रमण किडनी तक न पहुंचे।

(साभार)


क्या आप भी करते हैं अपनी त्वचा पर एलोवेरा जेल का इस्तेमाल, तो जान लीजिए इससे होने वाले नुकसान

जब भी बात स्किन केयर की आती है, तो आपने अक्सर लोगों को ये कहते सुना होगा कि एलोवेरा जेल का इस्तेमाल कर लो, सभी परेशानियां सही हो जाएंगी। ऐसा होता भी है। एलोवेरा के इस्तेमाल से न सिर्फ त्वचा के मुंहासे कम होते हैं, बल्कि चेहरे की ड्राईनेस और एक्ने की समस्या भी कम हो जाती है।

चेहरे पर एलोवेरा का उपयोग त्वचा को स्वस्थ, चमकदार और दाग-धब्बों से मुक्त बनाने में मदद करता है। पर, क्या आप जानते हैं कि यदि इस एलोवेरा का अत्यधिक इस्तेमाल किया जाए तो ये आपकी त्वचा को काफी नुकसान भी पहुंचा सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि एलोवेरा का इस्तेमाल हमेशा सही मात्रा में करें, लेकिन किसी भी समस्या के संकेत पर तुरंत उपयोग बंद कर दें। यहां हम आपको कुछ ऐसे नुकसानों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो एलोवेरा के ज्यादा इस्तेमाल से हो सकते हैं।

त्वचा में जलन

जिनके घर में एलोवेरा का पौधा लगा होता है, वो अक्सर दिन में दो से तीन बार एलोवेरा इस्तेमाल कर लेते हैं। जबकि अगर एलोवेरा जेल का अधिक उपयोग किया जाए तो यह कुछ लोगों की त्वचा में जलन, लालिमा, या सूजन पैदा कर सकता है। खासकर, जिनकी त्वचा संवेदनशील है, उन्हें एलोवेरा जेल के अत्यधिक इस्तेमाल से बचना चाहिए।

एलर्जी की संभावना

किसी भी चीज के इस्तेमाल से पहले पैच टेस्च बेहद आवश्यक है। दरअसल, एलोवेरा कुछ लोगों में एलर्जी का कारण बन सकता है, जिससे खुजली, चकत्ते, या त्वचा पर रैशेज हो सकते हैं। ऐसे में एलोवेरा का ज्यादा उपयोग करते समय इसका पैच टेस्ट करना जरूरी है, ताकि एलर्जी की संभावना ही न रहे।

त्वचा हो सकती है ड्राई

लोगों को लगता है कि एलोवेरा त्वचा की नमी को बरकरार रखती है, लेकिन यदि अधिक एलोवेरा जेल का इस्तेमाल किया जाए तो त्वचा में सूखापन आ सकता है। यह त्वचा की प्राकृतिक नमी को प्रभावित कर सकता है, खासकर अगर जेल में एलोवेरा के साथ अन्य रसायन भी हों।

पिगमेंटेशन का खतरा

ज्यादा मात्रा में एलोवेरा का उपयोग लंबे समय तक करने से कुछ मामलों में त्वचा का रंग बदल सकता है या काले धब्बे (हाइपरपिग्मेंटेशन) की समस्या हो सकती है। ऐसे में इसका इस्तेमाल किसी विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही करें।

(साभार)


शरीर में क्यों बढ़ता है कोलेस्ट्रॉल का लेवल? आइये जानते हैं क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ

कोलेस्ट्रॉल शब्द से हम सभी भली-भांति परिचित हैं। कोलेस्ट्रॉल का नाम सुनते ही हृदय रोगों का ख्याल आ जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं सभी लोगों को ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर के साथ कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी कंट्रोल में रखना चाहिए।

वैसे तो कोलेस्ट्रॉल शरीर के लिए आवश्यक वसा (लिपिड) है, जो कोशिकाओं की संरचना, हार्मोन और पाचन के लिए जरूरी होता है, लेकिन जब इसका स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है, तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, दुनियाभर में हर साल लगभग 40% हृदय रोगों के मामले हाई कोलेस्ट्रॉल की वजह से होते हैं। हाई कोलेस्ट्रॉल की स्थिति सिर्फ हृदय रोग ही नहीं शरीर को कई अन्य प्रकार से भी प्रभावित करने वाली मानी जाती है, इसलिए इसे कंट्रोल में रखने के लिए निरंतर प्रयास करते रहना जरूरी है।

क्यों बढ़ता है कोलेस्ट्रॉल का लेवल?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हमारी कई गड़बड़ आदतें कोलेस्ट्रॉल सहित संपूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाली हो सकती है।

असंतुलित आहार (फास्ट फूड, तली-भुनी चीजें), शारीरिक गतिविधियों की कमी, मोटापा, धूम्रपान-शराब का सेवन, तनाव की समस्या के साथ कुछ अनुवांशिक कारण कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने वाले हो सकते हैं। इस बारे में जानना और इससे बचाव करते रहना बहुत जरूरी है।

अब आइए जानते हैं कि हाई कोलेस्ट्रॉल यानी कोलेस्ट्रॉल का अक्सर बढ़ा रहना हमारी सेहत को किस प्रकार से प्रभावित करने वाला हो सकता है?

हृदय रोग का जोखिम

हाई कोलेस्ट्रॉल की स्थिति का सबसे ज्यादा नुकसान हृदय स्वास्थ्य पर देखा जाता रहा है। विशेषतौर पर अगर शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर लगातार बढ़ा हुआ रहता है तो ये रक्त धमनियों में जमकर ब्लॉकेज बनाता है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार 70% हार्ट अटैक के मामलों में कोलेस्ट्रॉल का असंतुलन देखा जाता रहा है। कोलेस्ट्रॉल के साथ-साथ अगर ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखा जाए तो हृदय रोगों के खतरे को काफी कम किया जा सकता है।

ब्रेन स्ट्रोक का खतरा

हाई कोलेस्ट्रॉल के दुष्प्रभाव सिर्फ हृदय रोगों तक ही सीमित नहीं हैं, इसके कारण स्ट्रोक का भी जोखिम हो सकता है। कोलेस्ट्रॉल मस्तिष्क तक जाने वाली कुछ धमनियों को भी संकीर्ण कर देता है। अगर मस्तिष्क तक रक्त ले जाने वाली कोई वाहिका पूरी तरह से अवरुद्ध हो जाती है तो इसके कारण मस्तिष्क तक रक्त का प्रवाह बाधित हो जाता है, जिससे स्ट्रोक हो सकता है।

हाई कोलेस्ट्रॉल के कारण होने वाली इन समस्याओं को भी जानिए

कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के कारण शरीर पर और भी कई तरह के दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
हाई कोलेस्ट्रॉल से रक्त वाहिकाएं कठोर हो जाती हैं, जिससे हाई ब्लड प्रेशर की समस्या बढ़ सकती है।
इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के अनुसार, डायबिटीज के मरीजों में 60% को हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या होती है, जिससे डायबिटीज की जटिलताएं काफी बढ़ जाती हैं।
कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ना फैटी लिवर की वजह बनता है।
हाई कोलेस्ट्रॉल के कारण नपुंसकता बढ़ने का भी जोखिम देखा जाता रहा है।
लंबे समय में, कोलेस्ट्रॉल का स्तर अधिक रहने के कारण जननांग की छोटी रक्त वाहिकाओं के संकुचित होने का भी खतरा हो सकता है इससे इरेक्शन प्राप्त करने में भी कठिनाई होती है।

(साभार)


बच्चों में क्यों बढ़ रहा डायबिटीज का खतरा, आइये जानते हैं क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ

टाइप-2 डायबिटीज को कुछ दशकों पहले तक उम्र बढ़ने के साथ होने वाली बीमारी माना जाता था, फिर ये धीरे-धीरे 40 से कम उम्र के लोगों को भी अपना शिकार बनाने लगी। हाल के कई अध्ययनों से पता चलता है कि अब सिर्फ वयस्क ही नहीं बच्चे भी इसका तेजी से शिकार होते जा रहे हैं। अभी तक बच्चों में होने वाले डायबिटीज के अधिकतर मामले टाइप-1 डायबिटीज के देखे जाते रहे थे, हालांकि अब 15 से कम आयु वाले बच्चों में टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम भी तेजी से बढ़ता देखा जा रहा है। कम उम्र में डायबिटीज होने से पूरे जीवन की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है, जिसको लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ चिंता जता रहे हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं टाइप-2 डायबिटीज एक क्रोनिक बीमारी है। इसका अगर समय पर निदान और उपचार न शुरू हो पाए तो समय के साथ ये शरीर के कई अंगों जैसे आंखें, तंत्रिका, किडनी को भी प्रभावित करने लगती है। यही कारण है सभी माता-पिता को बच्चों की सेहत और डायबिटीज के संभावित लक्षणों पर गंभीरता से ध्यान देते रहने की सलाह दी जाती है।

आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि टाइप-2 डायबिटीज वयस्कों में अधिक आम है। लेकिन कई प्रकार के जोखिम कारकों के चलते 15 से कम उम्र के बच्चे भी इसका शिकार होते जा रहे हैं। कहीं आपका बच्चा भी तो डायबिटीज का शिकार नहीं है?

बच्चों में डायबिटीज का खतरा

बच्चों में डायबिटीज का खतरा क्यों बढ़ रहा है, कहीं आपके बच्चे को भी तो ये बीमारी नहीं है? इस बारे में समझने के लिए हमने मुंबई स्थित एक निजी अस्पताल में डायबेटोलॉजिस्ट डॉ आमिर शेख से बातचीत कर इसे समझने की कोशिश की।

डॉ बताते हैं, बच्चों में मोटापे के बढ़ते मामलों ने कम उम्र में ही डायबिटीज होने के जोखिमों को भी बढ़ा दिया है। अगर आपका बच्चा मोटापे का शिकार है, इसके साथ माता-पिता में से किसी को पहले से डायबिटीज की दिकक्त रही है तो ये खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

अगर ये दोनों स्थितियां हैं तो डॉक्टर से मिलकर एक बार जांच जरूर करा लें। ज्यादातर मामलों में शुरुआती स्थिति में बच्चों में डायबिटीज के लक्षण बहुत स्पष्ट नहीं होते हैं, ऐसे में माता-पिता की सर्तकता की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका हो जाती है।

बच्चों में बढ़ते मोटापे कई प्रकार से खतरनाक

डॉ आमिर कहते हैं, बच्चों में बढ़ते मोटापे के मामले काफी चिंताजनक रहे हैं। पहले के कई अध्ययनों इसके कारण कम उम्र में ब्लड प्रेशर और हृदय रोगों के बढ़ते खतरे को लेकर अलर्ट किया जाता रहा है। बचपन में बढ़ता मोटापा अब सिर्फ वजन से जुड़ी परेशानी नहीं रह गई, बल्कि ये कई गंभीर बीमारियों की वजह बनता जा रहा है।

अधिक वजन के साथ अगर क्रोनिक बीमारियों की फैमिली हिस्ट्री रही है और बच्चों का लाइफस्टाइल और आहार ठीक नहीं है तो 20 की उम्र से पहले ही डायबिटीज और हृदय रोगों का खतरा कई गुना अधिक हो सकता है।

बच्चों में डायबिटीज की क्या पहचान है?

डॉक्टर बताते हैं, बच्चों में टाइप-2 डायबिटीज बहुत धीरे-धीरे विकसित होती है इसके कारण शुरुआती स्थितियों में कोई खास लक्षण नहीं दिखते। कभी-कभी, नियमित जांच के दौरान इसका निदान किया जाता है। बच्चे का ब्लड शुगर लेवल अगर अक्सर बढ़ा रहता है तो इसके कारण होने वाली कुछ समस्याओं पर ध्यान देना जरूरी हो जाता है।

अगर बच्चे को बार-बार प्यास लग रही है, बार-बार पेशाब जा रहा है, बिना ज्यादा शारीरिक मेहनत के अक्सर थकान महसूस करता है या फिर धुंधला दिखने लगा है तो ऐसे संकेतों को बिल्कुल अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।अनपेक्षित रूप से वजन घटना या बार-बार संक्रमण होना भी डायबिटीज का संकेत हो सकता है।

इस तरह की दिक्कतें होती हैं तो एक बार जांच जरूर करा लेनी चाहिए।

बच्चों को डायबिटीज से कैसे बचाएं?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, स्वस्थ जीवनशैली के विकल्प बच्चों में टाइप-2 डायबिटीज को रोकने में मदद कर सकते हैं। अगर माता-पिता में से किसी को डायबिटीज की समस्या रही है तो इस बारे में आपको विशेष सावधान हो जाना चाहिए।
बच्चे को लो फैट और लो कैलोरी वाले खाने-पीने की चीजें दें। फलों, सब्जियों और साबुत अनाज आहार में जरूर हों।
बच्चे को सक्रिय होने के लिए प्रोत्साहित करें। बाहर खेलने के लिए भेजें।
स्क्रीन टाइम कम करें, इसकी जगह शारीरिक व्यायाम और खेलों के लिए प्रोत्साहित करें।
माता-पिता को डायबिटीज की दिक्कत रही है तो बच्चों को इससे बचाए रखने के लिए डॉक्टर की सलाह लें।
वजन को कंट्रोल रखने के लिए आहार और लाइफस्टाइल दोनों पर ध्यान देते रहें।

(साभार)


क्या आप भी करते हैं इन चीजों को फ्रिज में स्टोर, तो हो जाएं सावधान, नहीं तो सेहत को हो सकता है नुकसान 

फ्रिज हर चीज के लिए सुरक्षित ठिकाना नहीं होता, बल्कि कुछ चीजें ठंडे माहौल में अपनी ताजगी और स्वाद खो देती हैं। भारतीय महिलाएं रसोई घर में बेहद लजीज खाना पकाती हैं। ऐसे में जब कोई व्यंजन बच जाता है तो उसे फ्रिज में स्टोर कर देती हैं, जिससे उसे बाद में इस्तेमाल किया जा सके। हालांकि, कई बार कुछ चीजें फ्रिज में रखने की नहीं होती है। अगर आप भी बिना सोचे-समझे हर चीज फ्रिज में रख देती हैं, तो जरा ठहरिए! यहां 5 ऐसी चीजें हैं, जिन्हें गलती से भी फ्रिज में रखना आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होगा। आइए जानते हैं।

1. टमाटर
टमाटर को फ्रिज में रखने से उनकी बनावट खराब हो जाती है और वे ज्यादा जल्दी सड़ने लगते हैं। ठंडक से उनका स्वाद भी बदल जाता है। ऐसे में अगर आप भी टमाटर फ्रिज में रखती हैं तो इसे अभी बंद कर दीजिए।

2. आलू
फ्रिज में रखने से आलू में मौजूद स्टार्च शुगर में बदल जाता है, जिससे उनका स्वाद और बनावट खराब हो जाती है। इन्हें ठंडी और सूखी जगह पर रखना बेहतर होता है।

3. प्याज और लहसुन
फ्रिज में रखने से प्याज जल्दी नरम और गीला हो जाता है। लहसुन भी नमी के कारण जल्दी खराब हो सकता है। इसमें तेजी से फंगस पकड़ता है। ऐसे में फ्रिज में प्याज और लहसुन रखना अभी बंद कर दीजिए। इन्हें सूखी और हवादार जगह पर रखें।

4. ब्रेड
फ्रिज में ब्रेड रखने से वह जल्दी सूखने लगती है और उसका स्वाद बदल जाता है। अगर ज्यादा दिनों तक स्टोर करना हो तो इसे फ्रीजर में रख सकते हैं।

अगर आप इन चीजों को सही तरीके से स्टोर करेंगे, तो वे लंबे समय तक अच्छी रहेंगी और उनके पोषक तत्व भी सुरक्षित रहेंगे।

(साभार)


वजन को कंट्रोल में रखने के लिए अपनाएं ये उपाय, वेट लॉस करने में करेंगे मदद 

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर किसी के पास जिम जाने का समय नहीं होता। लेकिन अच्छी बात यह है कि बिना जिम जाए भी आप कुछ उपाय करके वजन कंट्रोल कर सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, शारीरिक रूप से सक्रिय रहना संपूर्ण फिटनेस के लिए जरूरी है। अगर आप जिम नहीं जा सकते हैं तो रोजाना कुछ समय निकालकर वॉकिंग-रनिंग जैसे हल्के स्तर के अभ्यास कर सकते हैं। इसके अलावा वजन कम करने के लिए कुछ अन्य उपायों का पालन करना आपके लिए लाभप्रद हो सकता है।

कैलोरी इंटेक कम कर दें

डॉक्टर बताते हैं, वजन कम करने का सबसे मुख्य सिद्धांत है कि आप जितनी कैलोरी इंटेक कर रहे हैं उससे ज्यादा बर्न करें। अगर आप प्रतिदिन 500 कैलोरी का इंटेक कम कर देते हैं तो आप हफ्ते में लगभग 0.5 किलो वजन घटा सकते हैं। इसके लिए छोटे प्लेट में खाना खाएं, पोर्शन कंट्रोल का पालन करें। हरी पत्तेदार सब्जियों-फलों का सेवन करके आप वेट लॉस में लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

प्रोटीन का सेवन बढ़ाएं

आहार में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाना भी आपके लिए लाभकारी हो सकता है। प्रोटीन शरीर के मेटाबॉलिज्म दर को 15-30% तक बढ़ाकर भूख को कम करता है। अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि हाई प्रोटीन वाली डाइट लेने वाले लोग बाकी लोगों की तुलना में ज्यादा वजन घटा पाते हैं। प्रोटीन वाली चीजों के लिए अंडे, पनीर और दही खाएं। दाल, सोयाबीन, चिकन ब्रेस्ट या टोफू आदि का सेवन करें।

खूब पानी पिएं 

भरपूर मात्रा में पानी पीते रहना न सिर्फ आपको डिहाइड्रेट होने से बचाता है बल्कि इससे वेट लॉस में भी आप लाभ पा सकते हैं। भोजन करने से पहले 500मिली पानी पीने से भूख कम लगती है और कैलोरी इंटेक कम किया जा सकता है। अध्ययनों से पता चलता है कि 12 हफ्तों तक रोजाना खाने से पहले पानी पीने वाले लोगों ने 2 किलो तक वजन कम किया। दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं, सबसे अच्छा तरीका है सुबह उठकर सबसे पहले गुनगुना पानी पिएं।

इन उपायों को भी बनाएं दिनचर्या का हिस्सा
ज्यादा चीनी का सेवन मोटापा और डायबिटीज जैसी बीमारियों को बढ़ाता है। रोजाना 25 ग्राम से ज्यादा चीनी नहीं खाना चाहिए।
चाय और कॉफी में चीनी की मात्रा कम करें।
इंटरमिटेंट फास्टिंग वजन घटाने के लिए सबसे लोकप्रिय और प्रभावी तरीका है।
अगर आप जिम नहीं जा सकते तो घर के कामों को ही एक्सरसाइज बनाएं। झाड़ू-पोछा जैसे काम से भी कैलोरी बर्न होती है।
वजन को बढ़ने से रोकने के लिए अच्छी नींद लेना भी आवश्यक माना जाता है।


क्या आप भी बढ़ती उम्र के साथ रहना चाहते हैं स्वस्थ और फिट, तो इन एक्सरसाइज को करें अपनी दिनचर्या में शामिल 

उम्र बढ़ने के साथ सेहत का ख्याल रखना और फिट रहना बेहद जरूरी हो जाता है। लेकिन इसके लिए भारी-भरकम वर्कआउट की जरूरत नहीं। कुछ हल्की-फुल्की एक्सरसाइज अपनाकर भी बुजुर्ग अपनी दिनचर्या में स्फूर्ति और स्वास्थ्य बनाए रख सकते हैं। तो आज की इस खबर में हम आपको कुछ ऐसे योगासन के बारे में बताने जा रहे हैं, जिससे आप बढ़ती उम्र में भी काफी एक्टिव नजर आएंगे। इस खबर में कुछ आसान और असरदार एक्सरसाइज बताएंगे, जो घर बैठे की जा सकती है। आइए जानते हैं।

1. वॉकिंग
रोजाना 15-20 मिनट घर के अंदर टहलें।
यदि संभव हो तो बालकनी या छत पर भी वॉक कर सकते हैं।
यह ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है और जोड़ों की जकड़न को कम करता है।

2. सीटेड लेग लिफ्ट्स
कुर्सी पर बैठकर धीरे-धीरे एक पैर को ऊपर उठाएं और फिर नीचे करें।
हर पैर से 10-10 बार दोहराएं।
यह पैरों की मजबूती बढ़ाने और संतुलन बनाए रखने में सहायक है।

3. हाथ और कंधे की हलचल
दोनों हाथों को धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करें।
कंधों को गोल-गोल घुमाएं।
यह हाथों की मजबूती और लचीलेपन को बनाए रखने में मदद करता है।

4. गर्दन की एक्सरसाइज
धीरे-धीरे गर्दन को दाएं-बाएं और ऊपर-नीचे घुमाएं।
इससे गर्दन के दर्द और अकड़न से राहत मिलती है।

5. श्वास व्यायाम
अनुलोम-विलोम और गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज करें।
इससे फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है और मानसिक शांति मिलती है।

6. कुर्सी से उठने-बैठने की एक्सरसाइज
बिना किसी सहारे के धीरे-धीरे कुर्सी से उठें और फिर बैठें।
इसे 5-10 बार करें, यह पैरों को मजबूत बनाने में मदद करता है।

7. एड़ी-पंजों की स्ट्रेचिंग
सीधे खड़े होकर एड़ियों को ऊपर उठाएं और फिर धीरे-धीरे नीचे करें।
यह संतुलन बनाए रखने और रक्त संचार सुधारने में मदद करता है।

सावधानियां:
व्यायाम को धीरे-धीरे और सहज रूप से करें।
जरूरत महसूस हो तो किसी सहारे का उपयोग करें।
यदि किसी प्रकार की असुविधा या दर्द महसूस हो तो तुरंत रुक जाएं।

(साभार)


क्या आपको भी होती है हाथ-पैरों में झुनझुनी, तो जान लीजिये कहीं ये किसी आवश्यक विटामिन की कमी का संकेत तो नहीं 

हमारे शरीर में कई बार ऐसे बदलाव होते हैं, जिनका सही कारण बहुत से लोगों को नहीं पता होता। झुनझुनी भी इन्हीं में से एक आम समस्या है, जिसे लगभग हर किसी ने कभी न कभी अनुभव किया होगा। यह आमतौर पर लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहने या हाथ-पैर दबे रहने की वजह से हो सकती है। हालांकि, इसकी असल वजह के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि शरीर में झुनझुनी होने के पीछे कौन-कौन सी वजहें हो सकती हैं और यह किन समस्याओं का संकेत हो सकता है।

अगर आपको बिना किसी स्पष्ट कारण के हाथों-पैरों में झुनझुनी महसूस होती है, तो यह किसी आवश्यक विटामिन की कमी का संकेत हो सकता है। विशेष रूप से, यह समस्या विटामिन बी12, विटामिन बी6 और विटामिन डी की कमी से जुड़ी हो सकती है।

किन विटामिन की कमी से होती है झुनझुनी?

1. विटामिन बी12 की कमी
यह तंत्रिका तंत्र को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है।
इसकी कमी से नसों में सूजन आ सकती है, जिससे झुनझुनी, कमजोरी और सुन्नपन महसूस हो सकता है।

स्रोत: दूध, दही, अंडे, मछली, चिकन, पनीर, फोर्टिफाइड अनाज।

2. विटामिन बी6 की कमी
यह शरीर में न्यूरोलॉजिकल कार्यों को सुचारू रूप से चलाने में सहायक होता है।
इसकी कमी से हाथ-पैरों में झुनझुनी, चिड़चिड़ापन और कमजोरी हो सकती है।

स्रोत: केले, एवोकाडो, पालक, नट्स, साबुत अनाज, मीट और मछली।

3. विटामिन डी की कमी
यह हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
इसकी कमी से नसों पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे झुनझुनी हो सकती है।

स्रोत: धूप, दूध, अंडे की जर्दी, मशरूम, फोर्टिफाइड फूड्स।

झुनझुनी दूर करने के उपाय
संतुलित आहार लें – अपने भोजन में विटामिन बी12, B6 और डी से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करें।
धूप में समय बिताएं – विटामिन डी की पूर्ति के लिए रोजाना 15-20 मिनट धूप लें।
नियमित व्यायाम करें – ब्लड सर्कुलेशन सुधारने के लिए स्ट्रेचिंग और योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं – हाइड्रेटेड रहने से रक्त प्रवाह सही तरीके से बना रहता है, जिससे झुनझुनी की संभावना कम होती है।
डॉक्टर की सलाह लें – अगर समस्या बनी रहती है, तो मल्टीविटामिन या विटामिन बी12 इंजेक्शन लेने के लिए डॉक्टर से सलाह लें।

(साभार)


क्या आप भी कई घंटो तक बैठकर करते हैं ऑफिस में काम, तो हो जाएं सावधान, नहीं तो आपकी सेहत को पहुंचा सकता है नुकसान

आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में आलस की समस्या सामने आती ही रहती है। कई बार देखा गया है कि लोगों को काम करते-करते ही बहुत नींद आती है और इस समस्या से काफी परेशान भी रहते हैं। इससे काम भी काफी ज्यादा प्रभावित होता है और धीरे-धीरे प्रोडक्टिविटी भी कम हो ही जाती है। यही नहीं, लंबे समय तक ऑफिस में बैठने से शरीर पर दबाव भी पड़ता है, जिससे कई सारी परेशानियां सामने आने लगती हैं।

ऑफिस में लंबे समय तक बैठकर काम करने से रीढ़ की हड्डी, गर्दन और नर्व्स पर लगातार दबाव पड़ता है, जिससे पोश्चर संबंधी दिक्कतें और नर्व डैमेज का खतरा बढ़ सकता है। आइए जानते हैं कि यह आपकी सेहत को कैसे प्रभावित कर सकता है:

1. गलत पोश्चर से रीढ़ की हड्डी पर असर
अगर आप झुककर या गलत मुद्रा में बैठते हैं, तो रीढ़ की हड्डी का नेचुरल कर्व बिगड़ सकता है। इससे स्लिप डिस्क, सर्वाइकल पेन और लोअर बैक पेन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

2. नर्व कंप्रेशन और ब्लड सर्कुलेशन पर असर
लगातार एक ही स्थिति में बैठे रहने से नर्व्स पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे हाथों और पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन और कमजोरी महसूस हो सकती है। इससे साइटिका और कंप्यूटर नर्व सिंड्रोम जैसी समस्याएं होने का खतरा रहता है।

3. मसल्स और जॉइंट्स की जकड़न
एक ही पोजीशन में अधिक देर तक बैठने से गर्दन, कंधों और पीठ के मसल्स टाइट हो सकते हैं, जिससे स्पोंडिलोसिस और गठिया जैसी परेशानियां हो सकती हैं।

4. मोटापा और हार्ट डिजीज का खतरा
लंबे समय तक बैठे रहने से शरीर की कैलोरी बर्निंग क्षमता कम हो जाती है, जिससे वजन बढ़ सकता है। यह डायबिटीज, हाई बीपी और हार्ट डिजीज जैसी बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकता है।

(साभार)


Latest News in hindi

Call Us On  Whatsapp