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रोजाना सुबह खाली पेट पिएं टमाटर का जूस, मिलेंगे कई फायदे

Category Archives: फिटनेस

रोजाना सुबह खाली पेट पिएं टमाटर का जूस, मिलेंगे कई फायदे

टमाटर का जूस सेहत के लिए बहुत ही कारगर होता है। रोजाना सुबह खाली पेट टमाटर का जूस पीना सेहत के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है। टमाटर में कई जरूरी पोषक तत्व होते हैं, जैसे विटामिन सी, विटामिन ए, पोटेशियम, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट, जो शरीर को डिटॉक्स करने और एनर्जी देने में मदद करते हैं। तो आज की इस खबर में हम आपको बताने जा रहे हैं कि अगर आप अपनी रूटीन में रोजाना के लिए टमाटर का जूस एड कर लेंगे तो जानते  इसे पीने से क्या-क्या फायदे हो सकते हैं। आइए जानते हैं।

1. पाचन को दुरुस्त करता है
टमाटर का जूस फाइबर से भरपूर होता है, जिससे पाचन तंत्र सही तरीके से काम करता है। यह कब्ज, अपच और एसिडिटी की समस्या को दूर करने में मदद करता है।

2. वजन घटाने में सहायक
अगर आप वजन कम करना चाहते हैं, तो टमाटर का जूस बहुत फायदेमंद है। यह कम कैलोरी वाला होता है और मेटाबॉलिज्म को तेज करता है, जिससे फैट बर्न करने में मदद मिलती है। इससे तेजी से आपका वजन भी कम होता है।

3. शरीर को डिटॉक्स करता है
टमाटर का जूस शरीर से विषाक्त पदार्थों (टॉक्सिन्स) को बाहर निकालने में मदद करता है और लिवर को हेल्दी रखता है। इससे त्वचा भी साफ और चमकदार बनती है।

4. दिल को रखता है स्वस्थ
इसमें पोटेशियम और लाइकोपीन नामक एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद करते हैं और हृदय रोगों के खतरे को कम करते हैं।

5. इम्यूनिटी को मजबूत करता है
टमाटर में मौजूद विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को बढ़ाते हैं और सर्दी-खांसी जैसी बीमारियों से बचाते हैं।

6. स्किन और बालों के लिए फायदेमंद
टमाटर का जूस त्वचा को हाइड्रेट रखता है और कील-मुंहासों को दूर करता है। साथ ही, इसमें मौजूद बायोटिन और विटामिन K बालों को मजबूत और घना बनाने में मदद करते हैं।


क्या आप भी इन दिनों खांसी, जुकाम से हैं परेशान? तो इन हेल्दी ड्रिंक्स को करें अपनी दिनचर्या में शामिल, इम्युनिटी होगी मजबूत

सर्दी के मौसम में सेहत को लेकर विशेष सावधानी बरतते रहना जरूरी होता है। खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों के लिए ये मौसम कई प्रकार की चुनौतियां पैदा करने वाला हो सकता है। ठंड के दिनों में इम्यूनिटी काफी कमजोर हो जाती है, यही कारण है कि इन मौसम में सर्दी-जुकाम और बुखार जैसी दिक्कतों का खतरा काफी आम हो जाता है। क्या आप भी इन दिनों खांसी और जुकाम से परेशान हैं?

मौसम परिवर्तन के दौरान सर्दी, खांसी, जुकाम और अन्य संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को मजबूत बनाए रखना बहुत जरूरी होता है। इम्युनिटी को बूस्ट करने के लिए कुछ खास हेल्दी ड्रिंक्स को अपनी दिनचर्या में शामिल करना फायदेमंद हो सकता है।

इम्युनिटी बढ़ाने वाले हेल्दी ड्रिंक्स

हल्दी वाला दूध
हल्दी में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-वायरल गुण शरीर को संक्रमण से बचाने में मदद करते हैं। रात में सोने से पहले हल्दी दूध पीने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है।

आंवला जूस
विटामिन C से भरपूर आंवला शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। रोज सुबह एक गिलास आंवला जूस पीने से मौसमी बीमारियों से बचाव किया जा सकता है।

काढ़ा (हर्बल टी)
तुलसी, अदरक, काली मिर्च, दालचीनी और शहद से बना काढ़ा गले की खराश, सर्दी और जुकाम से राहत दिलाने में असरदार होता है।

नींबू-पानी और शहद
नींबू में मौजूद विटामिन सी शरीर को डिटॉक्स करने के साथ-साथ इम्युनिटी को भी बढ़ाता है। गुनगुने पानी में नींबू और शहद मिलाकर पीने से संक्रमण से बचाव होता है।

अदरक-शहद वाली चाय
अदरक और शहद में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो सर्दी-खांसी और वायरल इंफेक्शन से लड़ने में मदद करते हैं।

गाजर और चुकंदर का जूस
यह जूस शरीर को जरूरी एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन्स प्रदान करता है, जिससे इम्यून सिस्टम को मजबूती मिलती है। अगर आप बदलते मौसम में संक्रमण से बचना चाहते हैं, तो इन हेल्दी ड्रिंक्स को अपनी डेली डाइट में शामिल करें और अपने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्राकृतिक रूप से मजबूत बनाएं।

(साभार)


क्या आप भी पेट संबंधी बीमारियों से हैं परेशान, तो इन पांच योगासनों की मदद से पा सकते हैं आराम 

खराब खान-पान का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। इसकी वजह से अक्सर लोगों का पाचन तंत्र खराब हो जाता है, जिस कारण खाना पचाने में उन्हें काफी दिक्कत होती है। यदि खाना सही से न पचे तो गैस और कब्ज जैसी परेशानियां शरीर को घेरने लगती हैं।

इन परेशानियों को दूर करने के लिए वैसे तो तमाम दवाएं बाजार में आती हैं, लेकिन आप बिना दवाइयों के सिर्फ योग करके भी गैस और कब्ज जैसी गंभीर दिक्कतों को दूर कर सकते हैं। हम यहां आपको ऐसे ही योगासनों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो पेट से संबंधी परेशानियों को दूर करने में मददगार हैं।

वज्रासन

पेट से संबंधी परेशानियों को दूर करने के लिए ये सबसे असरदार योगासन माना जाता है। इसको आप खाने के बाद भी कर सकते हैं।
खाने के बाद 5-10 मिनट इस आसन में बैठने से पाचन सुधरता है।
इस आसन में बैठने से गैस और एसिडिटी की परेशानी काफी हद तक कम हो जाती है।

पवनमुक्तासन

यदि आपके पेट में काफी ज्यादा गैस बनती है तो ये योगासन आपके काम आएगा।
इसके लिए जमीन पर सबसे पहले लेट जाएं।
जमीन पर लेटने के बाद घुटनों को छाती की ओर दबाएं और कुछ सेकंड रुकें।
इसे करने से कुछ समय बाद से आपको गैस, ब्लोटिंग और पेट दर्द से राहत मिलती है।

भुजंगासन

एसिडिटी दूृर करने के लिए भुजंगासन काफी अच्छा विकल्प माना जाता है।
इसके लिए जमीन पर लेटकर शरीर को कोबरा पोज में ऊपर उठाएं।
ये पेट की चर्बी घटाने और खाने को जल्दी पचाने में मदद करता है।
इससे पाचन तंत्र भी मजबूत बनता है।

अर्ध मत्स्येन्द्रासन

ये योगासन लिवर और किडनी को डिटॉक्स करने में काफी मदद करता है।
इसके लिए जमीन पर बैठकर शरीर को साइड में मोड़ें और गहरी सांस लें।
ये योगासन पाचन क्रिया में सुधार करता है और टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है।

मलासन

यदि पेट में कब्ज है तो इस योगासन को नियमित रूप से करना शुरू कर दें।
इसके लिए स्क्वाट पोज में बैठकर दोनों हाथों को जोड़ें।
ये योग कब्ज और पेट फूलने की समस्या दूर करता है।
इस योगासन से मेटाबॉलिज़्म भी सही होता है।

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क्या आपको भी रहती है लंबे समय तक हिचकी की समस्या, तो जान लीजिये कहीं ये किसी गंभीर बीमारी का संकेत तो नहीं

आप भी कभी न कभी हिचकियों से जरूर परेशान रहे होंगे। आमतौर पर मान लिया जाता है कि जब कोई आपको याद कर रहा होता है तो हिचकियां आती हैं, पर क्या इस मान्यता को मेडिकल साइंस भी पुष्टि देता है? या फिर हिचकी आना किसी बीमारी का संकेत है?

आम धारणाओं से इतर हिचकी आने की स्थिति को मेडिकल साइंस एक अलग तरीके से देखता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि डायाफ्राम में बार-बार होने वाली ऐंठन या अचानक होने वाली किसी समस्या के कारण आपको हिचकी आती है। डायाफ्राम वो मांसपेशी है जो आपकी छाती को पेट से अलग करती है और सांस लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आपके डायाफ्राम में ऐंठन के कारण कई बार वोकल कॉर्ड अचानक बंद हो जाते हैं, जिससे “हिच” ध्वनि उत्पन्न होती है। ये तो इसका एक कारण है ही साथ ही कई बार अधिक भोजन करने, शराब या कार्बोनेटेड पेय पीने या अचानक किसी उत्तेजना के कारण भी आपको हिचकी आ सकती है। कुछ मामलों में, हिचकी किसी अंतर्निहित चिकित्सा समस्या का संकेत हो सकती है।

क्यों आती है हिचकी?

ज्यादातर लोगों में हिचकी केवल कुछ मिनटों तक ही रहती है और खुद से ही चली जाती है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं अगर आपको लंबे समय तक हिचकी की दिक्कत बनी रहती है और ये ठीक न हो रही हो तो इस बारे में डॉक्टर से संपर्क जरूर कर लेना चाहिए।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कई बार ज्यादा मसालेदार या गर्म भोजन करने से पेट में जलन और डायाफ्राम में ऐंठन हो सकती है जिसके कारण भी आपको हिचकी आती है। इसके अलावा अचानक तापमान में परिवर्तन, तनाव या घबराहट, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं भी हिचकी का कारण बन सकती हैं।

कहीं ये किसी गंभीर बीमारी का संकेत तो नहीं?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वैसे तो हिचकी आने को कोई बीमारी नहीं माना जाता है हालांकि कुछ गंभीर स्थितियों में हिचकी को इसका एक लक्षण जरूर देखा गया है इसलिए लंबे समय तक बनी रहने वाली हिचकी को अनदेखा नहीं करना चाहिए।

लंबे समय तक हिचकी आने का एक कारण वेगस या फ्रेनिक तंत्रिकाओं में होने वाली कोई क्षति या जलन की दिक्कत हो सकती है। ये तंत्रिकाएं डायाफ्राम की मांसपेशियों को ठीक रखने के लिए जरूरी मानी जाती हैं। आपकी गर्दन में थायरॉयड ग्रंथि या किसी सिस्ट के कारण तंत्रिकाएं प्रभावित हो सकती हैं, जिसपर ध्यान देते रहना और इलाज प्राप्त करना जरूरी हो जाता है।

मेटाबॉलिज्म संबंधित समस्याएं

जब आपका मेटाबॉलि्ज्म ठीक से काम नहीं कर रहा होता है, तो इसके कारण भी लंबे समय तक हिचकी आ सकती है। मधुमेह, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन और किडनी जैसी बीमारियों के कारण भी लंबे समय तक हिचकी आने की दिक्कत महसूस होती रह सकती है। अगर आपको मेटाबॉलिज्म की समस्या है तो इसका समय रहते उपचार प्राप्त करना आवश्यक हो जाता है।

हिचकी से बचाव और रोकथाम के आसान उपाय

हिचकी रोकने का कोई निश्चित तरीका नहीं है, लेकिन अगर आपकी हिचकी कुछ मिनटों से ज्यादा समय तक बनी रहती है तो कुछ उपायों का मदद से इसमें आराम पाया जा सकता है।
बर्फ के पानी से गरारे करें, अपनी सांस रोककर रखें और ठंडा पानी पिएं इससे आपको आराम मिल सकती है। हिचकी से बचाव के लिए कुछ उपाय आपके लिए मददगार हो सकते हैं।

धीरे-धीरे और अच्छी तरह चबाकर खाएं।
अत्यधिक मसालेदार और एसिडिक खाद्य पदार्थों से बचें।
गैस बनाने वाले पेय पदार्थों (सोडा, कोल्ड ड्रिंक्स) से परहेज करें।
पानी धीरे-धीरे पिएं, विशेष रूप से हल्का गुनगुना पानी।
गहरी सांस लें और थोड़ी देर तक रोकें, फिर धीरे-धीरे छोड़ें।
अगर हिचकी लंबे समय तक बनी रहती है, तो डॉक्टर से परामर्श करें।

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क्या आप भी करते हैं खाली पेट दूध या दही का सेवन, तो जान लीजिये इसके फायदे और नुकसान 

खाली पेट दूध या दही का सेवन व्यक्ति के पाचन तंत्र और शरीर की प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है। दोनों के लाभ और हानियां अलग-अलग हो सकते हैं। खाली पेट डेयरी प्रोडक्ट्स के सेवन से पेट संबंधित कई समस्याएं आ सकती हैं। जैसे की पेट फूलना, एसिडिटी आदि। वहीं, कुछ लोगों को खाली पेट दूध पीने से गैस और एसिडिटी से राहत मिलती है। नाश्ते में दही खाना काफी अच्छा भी माना जाता है। हालांकि, दही और दूध के सेवन के लाभ और नुकसान दोनों ही है। आज की इस खबर में हम आपको बताने जा रहे हैं कि आइए जानें कि आपके लिए कौन सा बेहतर विकल्प रहेगा।

1. खाली पेट दूध पीने के फायदे और नुकसान

फायदे:
ऊर्जा बढ़ाता है – दूध में कैल्शियम, प्रोटीन और आवश्यक पोषक तत्व होते हैं, जो दिन की शुरुआत के लिए अच्छा विकल्प बन सकते हैं।
हड्डियों को मजबूत बनाता है – इसमें मौजूद कैल्शियम और विटामिन D हड्डियों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं।
गैस्ट्रिक समस्याओं में आराम – अगर आपको एसिडिटी की समस्या नहीं है, तो दूध पेट को ठंडक पहुंचाने में मदद कर सकता है।

नुकसान:
एसिडिटी बढ़ा सकता है – कुछ लोगों के लिए खाली पेट दूध पीना एसिडिटी और गैस की समस्या को बढ़ा सकता है, खासकर यदि वे लैक्टोज इन्टॉलरेंस से ग्रसित हैं।
पाचन धीमा कर सकता है – दूध में मौजूद प्रोटीन और फैट, कुछ लोगों के लिए खाली पेट लेने पर पाचन क्रिया को धीमा कर सकता है।
सर्दी-खांसी की समस्या – जिन लोगों को बलगम बनने की प्रवृत्ति होती है, उनके लिए खाली पेट दूध पीना नुकसानदायक हो सकता है।

कब पीना चाहिए?

अगर आपका पाचन तंत्र सही तरीके से काम कर रहा है, तो आप सुबह दूध पी सकते हैं, लेकिन इसे हल्के नाश्ते के बाद लेना ज्यादा फायदेमंद होगा।

2. खाली पेट दही खाने के फायदे और नुकसान

फायदे:
पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है – दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स (गुड बैक्टीरिया) पाचन को बेहतर बनाते हैं और पेट की समस्याओं को दूर करने में मदद करते हैं।
इम्यूनिटी बढ़ाता है – इसमें लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया होते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में सहायक होते हैं।
त्वचा और बालों के लिए लाभदायक – दही में विटामिन B, कैल्शियम और प्रोटीन होते हैं, जो त्वचा और बालों के लिए फायदेमंद होते हैं।

नुकसान:
एसिडिटी बढ़ा सकता है – कुछ लोगों को खाली पेट दही खाने से एसिडिटी या गैस की समस्या हो सकती है।
ठंड बढ़ा सकता है – सुबह खाली पेट दही का सेवन सर्दी-जुकाम की संभावना को बढ़ा सकता है, विशेष रूप से सर्दियों में।
खट्टी दही नुकसानदायक हो सकती है – अत्यधिक खट्टी दही खाली पेट लेने से पेट में जलन या गैस की समस्या हो सकती है।

कब खाना चाहिए?

दही को खाली पेट खाने से बचें और इसे भोजन के साथ या दोपहर में लेना बेहतर रहेगा।

दूध या दही, कौन सा बेहतर है?
अगर आपको गैस, एसिडिटी या लैक्टोज इन्टॉलरेंस की समस्या है, तो खाली पेट दूध न लें।
ठंड के मौसम में खाली पेट दही खाने से बचें, क्योंकि यह ठंड बढ़ा सकता है।
खाली पेट दूध की बजाय हल्के नाश्ते के साथ लेना बेहतर होता है।
दही को दिन के समय या भोजन के साथ खाने से अधिक लाभ मिलेगा।
अगर आपकी पाचन क्रिया सही है, तो आप दोनों में से कोई भी विकल्प चुन सकते हैं, लेकिन हल्के नाश्ते के साथ दूध या भोजन के साथ दही लेना सबसे अच्छा रहेगा।

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क्या आपके बच्चों को भी है पैक्ड चिप्स खाने का शौक, तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकती है कई गंभीर समस्याएं

बच्चों को पैक्ड चिप्स खाने से रोकना उनकी सेहत के लिए बेहद जरूरी है। इन चिप्स में कई ऐसे तत्व होते हैं, जो बच्चों के विकास और सेहत के लिए हानिकारक हो सकते हैं। बच्चों को पैक्ड चिप्स खिलाने से मोटापा, हृदय रोग, पाचन समस्याएं और पोषण की कमी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। इसलिए बेहतर होगा कि आप हेल्दी स्नैक्स का चुनाव करें और उन्हें घर के बने पोषक आहार दें, जिससे वे स्वस्थ और मजबूत बनें। आज की इस खबर में हम आपको बताने जा रहे हैं कि बच्चों को पैक्ड चिप्स देने से कौन सी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

आइए जानते हैं कि बच्चों को पैक्ड चिप्स खिलाने के कौन से नुकसान हो सकते हैं

1. ट्रांस फैट और अधिक तेल
पैक्ड चिप्स को डीप फ्राई किया जाता है, जिससे इनमें ट्रांस फैट और सैचुरेटेड फैट की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। यह मोटापा, हृदय रोग और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है।

2. ज्यादा नमक (सोडियम) की मात्रा
चिप्स में बहुत ज्यादा नमक (सोडियम) होता है, जो बच्चों के लिए नुकसानदायक है। अधिक नमक खाने से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और किडनी पर असर पड़ सकता है।

3. हानिकारक प्रिजर्वेटिव और केमिकल्स
पैक्ड चिप्स को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए प्रिजर्वेटिव और आर्टिफिशियल फ्लेवर मिलाए जाते हैं, जो बच्चों के पाचन और मानसिक विकास पर बुरा असर डाल सकते हैं।

4. पोषण की कमी
पैक्ड चिप्स में कोई विटामिन, फाइबर या प्रोटीन नहीं होता। यह बच्चों को पेट भरने का अहसास तो कराता है, लेकिन संतुलित पोषण नहीं देता।

5. कैंसरकारी पदार्थों का खतरा
कई चिप्स में एक्रिलामाइड नामक केमिकल पाया जाता है, जो ज्यादा तापमान पर तलने से बनता है और कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है।

6. पाचन संबंधी दिक्कतें
चिप्स में फाइबर नहीं होता, जिससे बच्चों को कब्ज और पेट संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

7. लत लगने का खतरा
पैक्ड चिप्स में मौजूद अधिक नमक, मसाले और आर्टिफिशियल फ्लेवर बच्चों को इसकी आदत डाल सकते हैं, जिससे वे हेल्दी फूड से दूर हो सकते हैं।

क्या खिलाएं चिप्स की जगह?
घर पर बने बेक्ड चिप्स (शकरकंद, केला, मखाना)
भुने हुए चने, मखाने और मूंगफली
फ्रूट सलाद, नट्स और सीड्स
घर में बने कुरकुरे स्नैक्स जैसे पोहा कटलेट, वेज पकोड़े

(साभार)


क्या आप भी अपने पेट की चर्बी से हैं परेशान, तो इन एक्सरसाइज की मदद से कर सकते हैं कम 

पेट की चर्बी वह वसा होती है, जो पेट के आसपास जमा हो जाती है। यह चर्बी न केवल दिखने में खराब लगती है, बल्कि यह कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकती है। पेट की चर्बी न केवल आपके स्वास्थ्य को खराब करती है बल्कि, आपके लुक को भी भद्दा बना देती है। बढ़ती उम्र के साथ-साथ मसल्स कम होने लगती हैं। ऐसे में पेट के आसपास चर्बी इकट्ठा होनी शुरू हो जाती है। महिलाएं इसे कम करने के लिए कई नुस्खे आजमाती हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि आप इसे घर पर भी कम कर सकती हैं। तो आज की इस खबर में हम आपको उन एक्सरसाइज के बारे में बताने जा रहे हैं, जिससे आप अपने पेट की चर्बी कम कर सकती है।

पेट की चर्बी कम करने के लिए असरदार एक्सरसाइज

अगर आप पेट की चर्बी कम करना चाहते हैं, तो आपको कार्डियो, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और कोर एक्सरसाइज का सही मिश्रण अपनाना होगा। नीचे कुछ बेहतरीन एक्सरसाइज दी गई हैं, जिन्हें आप घर या जिम में आसानी से कर सकते हैं।

1. कार्डियो एक्सरसाइज

ये एक्सरसाइज शरीर की कैलोरी बर्न करने और चर्बी घटाने में मदद करती हैं।

(1) रनिंग या जॉगिंग

कैसे करें:

रोज 20-30 मिनट तक तेज चलें, दौड़ें या जॉगिंग करें
फायदा: यह शरीर की कुल चर्बी को कम करने में मदद करता है, जिससे पेट की चर्बी भी घटती है।

(2) स्किपिंग

कैसे करें:

1-2 मिनट तक लगातार रस्सी कूदें, फिर 30 सेकंड का ब्रेक लें। इसे 5-10 बार दोहराएं।
फायदा: यह तेजी से कैलोरी बर्न करता है और पेट की चर्बी कम करता है।

(3) हाई-इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग (HIIT)

कैसे करें:
30 सेकंड तेजी से बर्पीज करें।
30 सेकंड ब्रेक लें।
इसे 5-10 मिनट तक दोहराएं।
फायदा: यह पेट की चर्बी घटाने का सबसे तेज तरीका है।

2. कोर एक्सरसाइज
ये एक्सरसाइज पेट की मांसपेशियों (abs) को मजबूत करने और टोंड करने में मदद करती हैं।

(4) क्रंचेज

कैसे करें:
पीठ के बल लेट जाएं, घुटनों को मोड़ें और हाथों को सिर के पीछे रखें।
सांस छोड़ते हुए अपने कंधों को ऊपर उठाएं और पेट को अंदर दबाएं।
धीरे-धीरे वापस आएं और 15-20 बार दोहराएं।
फायदा: पेट की चर्बी जलाने और एब्स बनाने के लिए बेहतरीन एक्सरसाइज।

(5) प्लैंक

कैसे करें:
पुश-अप पोजिशन में आकर कोहनी पर शरीर का वजन डालें।
शरीर को सीधा रखें और 30-60 सेकंड तक पकड़ें।
फायदा: यह पेट को टाइट करने और फैट बर्न करने में मदद करता है।

(6) बाइसिकल क्रंच

कैसे करें:
पीठ के बल लेटकर पैरों को हवा में उठाएं।
एक पैर को मोड़ें और दूसरी कोहनी से छूने की कोशिश करें।
इसे दोनों तरफ 20-30 बार दोहराएं।
फायदा: यह साइड फैट कम करने में मदद करता है।

3. स्ट्रेंथ ट्रेनिंग

ये एक्सरसाइज मेटाबॉलिज्म बढ़ाकर तेजी से फैट बर्न करने में मदद करती हैं।

(7) स्क्वाट्स

कैसे करें:
पैरों को कंधे की चौड़ाई जितना खोलकर खड़े हों।
घुटनों को मोड़कर नीचे बैठें और फिर उठें।
इसे 15-20 बार करें।
फायदा: पेट की चर्बी के साथ-साथ जांघों और कुल्हों को भी टोन करता है।

पेट की चर्बी कम करने के लिए कुछ जरूरी टिप्स
डाइट पर ध्यान दें – शुगर और जंक फूड से बचें, प्रोटीन और फाइबर वाला खाना खाएं।
पर्याप्त पानी पिएं – दिन में कम से कम 2-3 लीटर पानी पिएं।
भरपूर नींद लें – 7-8 घंटे की अच्छी नींद लें, ताकि शरीर ठीक से फैट बर्न कर सके।
तनाव कम करें – मेडिटेशन और योग करें, क्योंकि तनाव भी पेट की चर्बी बढ़ा सकता है।

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क्या आप रोजाना पर्याप्त पानी पीते हैं, अगर नहीं, तो आपकी सेहत पर पड़ सकता है बुरा असर

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए उचित मात्रा में पानी का सेवन करना जरूरी है। यदि आप रोजाना पर्याप्त पानी नहीं पीते हैं तो आपकी सेहत पर इसका बुरा असर पड़ सकता है। पानी की कमी से शरीर में डिहाइड्रेशन हो सकता है, जिससे कई स्वास्थ्य समस्याएं जन्म ले सकती हैं। आइए जानते हैं कि कम पानी पीने से कौन-कौन सी समस्याएं हो सकती हैं और उन्हें ठीक करने में कौन-से योगासन मददगार हो सकते हैं।

कम पानी पीने से होने वाली स्वास्थ्य समस्याएं

पाचन संबंधी समस्याएं
अगर आप पर्याप्त पानी नहीं पीते हैं, तो आपका पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं करेगा।
इससे कब्ज, गैस, एसिडिटी और सीने में जलन की समस्या हो सकती है।

त्वचा संबंधी समस्याएं

पानी की कमी से त्वचा रूखी और बेजान हो जाती है।
समय से पहले झुर्रियां और पिंपल्स की समस्या भी बढ़ सकती है।

जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द

पानी शरीर के जोड़ों में चिकनाई बनाए रखने में मदद करता है।
पानी की कमी से जोड़ों में दर्द और मांसपेशियों में खिंचाव महसूस हो सकता है।

सिरदर्द और थकान

पानी कम पीने से ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है।
जिससे सिरदर्द, कमजोरी, चक्कर आना और थकान की समस्या हो सकती है।

किडनी से जुड़ी समस्याएं

कम पानी पीने से किडनी की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है।
पथरी (किडनी स्टोन) बनने का खतरा बढ़ जाता है।

पानी की कमी से बचने के लिए असरदार योगासन

योग न केवल शरीर को हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है, बल्कि पाचन तंत्र को मजबूत करने और ब्लड सर्कुलेशन सुधारने में भी फायदेमंद होता है। नीचे दिए गए योगासन शरीर में जल संतुलन बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं।

उत्तानासन
पाचन और ब्लड सर्कुलेशन के लिए उत्तानासन फायदेमंद है।
यह आसन पाचन तंत्र को मजबूत करने और शरीर में रक्त प्रवाह को सुधारने में मदद करता है।

अधोमुख श्वानासन
डिहाइड्रेशन और जोड़ों के दर्द में अधोमुख श्वानासन असरदार है।
यह योगासन शरीर को ऊर्जावान बनाए रखने में मदद करता है और जोड़ों में लचीलेपन को बढ़ाता है।

पवनमुक्तासन
कब्ज और गैस की समस्या के लिए पवनमुक्तासन फायदेमंद है।
यह योगासन पेट की समस्याओं जैसे कब्ज, गैस और एसिडिटी को दूर करने में सहायक है।

भुजंगासन
किडनी और त्वचा के लिए भुजंगासन का अभ्यास करें।
यह योगासन किडनी की कार्यप्रणाली में सुधार करता है और शरीर से विषैले तत्वों को निकालने में मदद करता है।

(साभार)


ज्यादा वजन बढ़ना स्वास्थ्य के लिए होता है खतरनाक, आइए जानते हैं वेट लॉस करने के उपाय 

वजन बढ़ने को संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए खतरनाक माना जाता रहा है। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोगों से लेकर ये कैंसर जैसी बीमारियों का जोखिम भी बढ़ा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी आपका वजन बढ़ाने वाली हो सकती है। इसके अलावा सर्दियों के दौरान भी अक्सर लोग वजन बढ़ने की शिकायत करते हैं। ठंड के महीनों की कुछ स्थितियां वेट गेन का कारण बन सकती हैं जिसको लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की जरूरत होती है।

अब सर्दियां धीरे-धीरे जा रही हैं, क्या पिछले दो-तीन महीनों के दौरान आपका भी वजन बढ़ गया है? इसकी क्या वजह है और दोबारा से अपने वजन को कैसे सामान्य किया जा सकता है? आइए इस बारे में विस्तार से समझते हैं।

सर्दियों में वजन बढ़ने का कारण

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सर्दियों में वजन बढ़ने के कई कारण हो सकते हैं। जैसे-जैसे तापमान गिरता है, हमारी शारीरिक गतिविधि कम होती जाती है। इसे वजन बढ़ने का एक प्रमुख कारक माना जाता है। इसके अलावा सर्दियां खाने के बहुत सारे अच्छे विकल्प, शादियों का सीजन और त्योहार लेकर आती हैं, जिसमें जाने-अनजाने आप लजीज पकवानों के माध्यम से अधिक कैलोरी वाली चीजों का सेवन कर रहे होते हैं, इसके कारण भी आपका वजन बढ़ जाता है।

धूप कम होने के कारण विटामिन-डी की कमी, ठंड के कारण दैनिक व्यायाम को स्किप करना भी आपका वजन बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हो सकता है।

वजन कम करना बहुत जरूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सर्दियों में अगर आपका भी वजन बढ़ गया है तो यह गर्मियों में परेशानी का कारण बन सकता है। आपको सुस्ती, थकान, डिहाइड्रेशन और अधिक पसीना आने की समस्या हो सकती है। शरीर पर अतिरिक्त फैट के कारण हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए गर्मी से पहले फिट होना जरूरी है।

फिर से वजन को सामान्य करने के लिए आहार और जीवनशैली को संतुलित बनाना होगा।

क्या कहती हैं आहार विशेषज्ञ?

आहार रोग विशेषज्ञ रीता अहीर कहती हैं, सर्दियों में शरीर पर बढ़े फैट को कम करने के लिए सबसे पहले अपने आहार में बदलाव करें। पानी का सेवन बढ़ाएं और डाइट में फल-सलाद शामिल करें। इसके अलावा भोजन के बाद टहलने की आदत जरूर बनाएं, इससे कैलोरी बर्न करना और मेटाबॉलिज्म को ठीक रखना आसान हो जाता है।

वजन को फिर से कंट्रोल करने के लिए भोजन में प्रोटीन, हरी सब्जियों-फलों को शामिल करें। हालांकि जब बात भोजन की हो तो जितना जरूरी पौष्टिक चीजों का सेवन करना है उतना ही जरूरी है कि आप ओवरईटिंग से बचें।

वेट लॉस के लिए करिए ये उपाय

आहार विशेषज्ञ कहते हैं, सर्दियों में वजन बढ़ना आम बात है, लेकिन सही दिनचर्या और खानपान अपनाकर इसे कंट्रोल किया जा सकता है। नियमित व्यायाम, हेल्दी डाइट, पानी का सही सेवन और एक्टिव लाइफस्टाइल अपनाकर आप फिर से फिट और हेल्दी हो सकते हैं। वेट लॉस के लिए इन छह बातों पर विशेष ध्यान दें।
प्रोटीन युक्त आहार (दाल, पनीर, अंडे, मेवे) लें। हरी सब्जियां और फाइबर युक्त चीजें खाएं।
दिनभर पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी पिएं ताकि मेटाबॉलिज्म सही बना रहे और शरीर से विषैले तत्व निकलते रहें।
तेज टहलने, दौड़ना, साइकिलिंग आदि से वजन कम होता है। शरीर में लचीलापन लाने के लिए योग और स्ट्रेचिंग करें।
सुबह या दोपहर की हल्की धूप लें ताकि विटामिन-डी की कमी न हो और मेटाबॉलिज्म सक्रिय रहे।
ग्रीन टी, अदरक-शहद वाली चाय या दालचीनी-टी पीने से वजन घटाने में मदद मिल सकती है।
7-8 घंटे की अच्छी नींद लेने से मेटाबॉलिज्म सही रहता है और वजन नियंत्रित रहता है।

(साभार)


क्या आप भी करते हैं इंस्टेंट नूडल्स का अधिक सेवन, तो हो जाए सावधान, सेहत को पहुंचा सकता है नुकसान 

आजकल भारतीयों के खानपान में भारी बदलाव देखा जा रहा है। पहले जहां लोग पारंपरिक भारतीय भोजन को प्राथमिकता देते थे, वहीं अब चाइनीज, इटैलियन, मैक्सिकन और जापानी व्यंजन भी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। इनमें से इंस्टेंट नूडल्स (रेमन) की मांग भारतीय बाजार में सबसे अधिक बढ़ी है। बच्चे, युवा और व्यस्त जीवनशैली वाले लोग इसे आसानी से बना सकने के कारण खूब पसंद करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इंस्टेंट नूडल्स का अधिक सेवन आपकी सेहत को कितना नुकसान पहुंचा सकता है?

अध्ययन बताते हैं कि इंस्टेंट नूडल्स का अत्यधिक सेवन हृदय रोग, डायबिटीज, स्ट्रोक और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। खासतौर पर महिलाओं के लिए इसका खतरा अधिक होता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि यह स्वादिष्ट लेकिन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भोजन किस तरह हमारे शरीर को प्रभावित करता है।

बेलर यूनिवर्सिटी का अध्ययन

इंस्टेंट नूडल्स मूल रूप से जापान और दक्षिण कोरिया से आए हैं, लेकिन अब यह भारतीय बाजार में बड़े पैमाने पर उपलब्ध हैं। बच्चे और युवा इसे बड़ी मात्रा में खाते हैं, क्योंकि यह झटपट बन जाता है और स्वादिष्ट भी होता है। लेकिन इसमें मौजूद सोडियम, अनहेल्दी फैट्स और प्रिजर्वेटिव्स शरीर पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।

बेलर यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि जो लोग अक्सर इंस्टेंट नूडल्स का सेवन करते हैं, उनमें मेटाबॉलिक सिंड्रोम विकसित होने की संभावना अधिक होती है। मेटाबॉलिक सिंड्रोम ऐसी स्वास्थ्य स्थितियों का समूह है, जो आगे चलकर हृदय रोग, डायबिटीज और स्ट्रोक के खतरे को बढ़ा सकता है।

कितनी मात्रा में इंस्टेंट नूडल्स नुकसानदायक?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति सप्ताह में दो से तीन बार इंस्टेंट नूडल्स का सेवन करता है तो हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और टाइप-2 डायबिटीज जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है। बार-बार इंस्टेंट नूडल्स खाने से ये नुकसान हो सकते हैं,

पाचन तंत्र पर असर

इनमें मौजूद रिफाइंड मैदा (मैदा आधारित नूडल्स) पेट में आसानी से नहीं पचता, जिससे गैस, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

हाई ब्लड प्रेशर

इंस्टेंट नूडल्स में बहुत अधिक मात्रा में सोडियम (नमक) होता है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और हृदय रोगों का खतरा हो सकता है।

वजन बढ़ना

इसमें मौजूद अनहेल्दी फैट और ट्रांस फैट शरीर में अनावश्यक चर्बी बढ़ाते हैं, जिससे मोटापे की समस्या हो सकती है।

पोषक तत्वों की कमी

यह भोजन केवल स्वादिष्ट होता है लेकिन इसमें कोई आवश्यक विटामिन, प्रोटीन, फाइबर या मिनरल्स नहीं होते, जिससे शरीर को सही पोषण नहीं मिल पाता।

महिलाओं के लिए ज्यादा खतरनाक क्यों है इंस्टेंट नूडल्स?

अध्ययन से यह भी पता चला कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं के लिए इंस्टेंट नूडल्स ज्यादा हानिकारक हो सकते हैं। इसका कारण है कि महिलाओं में हार्मोनल संतुलन प्रभावित होता है। इंस्टेंट नूडल्स में मौजूद प्रिजर्वेटिव्स और सोडियम महिलाओं के हार्मोन संतुलन पर बुरा असर डाल सकते हैं।
पीरियड्स और पीसीओएस (PCOS) की समस्या बढ़ सकती है।
अधिक सोडियम और अनहेल्दी फैट पीरियड्स में दर्द, अनियमितता और पीसीओएस जैसी समस्याओं को बढ़ा सकता है।
गर्भवती महिलाओं को इंस्टेंट नूडल्स से बचना चाहिए, क्योंकि इसमें मौजूद केमिकल्स और प्रिजर्वेटिव्स भ्रूण के विकास को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

इंस्टेंट नूडल्स का हेल्दी विकल्प

अगर आपको इंस्टेंट नूडल्स बहुत पसंद हैं, लेकिन सेहत का ध्यान भी रखना चाहते हैं तो आप कुछ स्वस्थ विकल्प अपना सकते हैं-
घर पर हेल्दी नूडल्स बनाएं। मैदा की जगह गेहूं या बाजरे के नूडल्स का इस्तेमाल करें।
अधिक सब्जियां डालें ताकि पोषण बढ़े।
प्रोसेस्ड मसालों की बजाय घर के बने मसाले और हर्ब्स का उपयोग करें।
हेल्दी स्नैक्स का चुनाव करें। पोहा, उपमा, इडली, दलिया जैसे विकल्प इंस्टेंट नूडल्स से बेहतर हैं।
इंस्टेंट नूडल्स कम करने के लिए छोटे-छोटे बदलाव करें। हफ्ते में सिर्फ एक बार ही खाएं और बाकी समय हेल्दी फूड अपनाएं।

(साभार)


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