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सीआरपीएफ जवान की गोली मारकर हत्या, आपसी रंजिश बनी वजह

Category Archives: क्राइम

सीआरपीएफ जवान की गोली मारकर हत्या, आपसी रंजिश बनी वजह

सोनीपत (हरियाणा): सोनीपत के खेड़ी दमकन गांव में रविवार रात एक दर्दनाक घटना में सीआरपीएफ जवान कृष्ण की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस के अनुसार, वारदात रात करीब 12:50 बजे हुई जब कृष्ण अपने दोस्तों के साथ गांव के पास टहलने निकले थे।

कृष्ण हाल ही में ड्यूटी से छुट्टी लेकर छत्तीसगढ़ से घर लौटे थे। वे हरिद्वार से डाक कांवड़ लाने के बाद गांव लौटे थे। इसी दौरान एक अन्य युवक समूह से उनकी कहासुनी हो गई थी, जिसे हत्या की वजह माना जा रहा है।

हत्या के समय कृष्ण अपने दोस्तों के साथ थे, तभी दो युवक एक गाड़ी में वहां पहुंचे और उनमें से एक ने कृष्ण पर गोली चला दी। गोली लगने से कृष्ण की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की पत्नी ने हाल ही में बेटे को जन्म दिया है और फिलहाल अस्पताल में हैं।

पुलिस ने दो आरोपियों अजय और निशांत के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। गांव में घटना को लेकर आक्रोश है। पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा।


पैसों के लेन-देन में युवक की हत्या, रोहतक पुलिस ने शुरू की दबिश

हरियाणा – रोहतक के पुराना आईटीआई मैदान के पास होटल चलाने वाले 27 वर्षीय सुमित की रविवार तड़के हत्या कर दी गई। सुमित कैलाश कॉलोनी का रहने वाला था और दो महीने पहले ‘फूडी फ्यूजन’ नाम से होटल शुरू किया था। हत्या के पीछे पैसे के लेन-देन का विवाद बताया जा रहा है।

परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने रौनक राणा और विशाल ग्रेवाल के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया है। आरोप है कि दोनों ने सुमित को मारकर उसका शव थार गाड़ी में डालकर मान अस्पताल में छोड़ दिया और फरार हो गए।

सुबह अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस को सूचना दी। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच की जा रही है। रोहतक व झज्जर में पुलिस ने दबिश दी है। शव का पोस्टमार्टम आज कराया जाएगा।


20 लाख की रिश्वत लेते पकड़ी गई महिला सब-इंस्पेक्टर, विजिलेंस टीम ने दबोचा

दिल्ली- पश्चिम विहार क्षेत्र में विजिलेंस विभाग को बड़ी सफलता हाथ लगी है। विभाग की टीम ने महिला उप निरीक्षक नीतू बिष्ट को एक मामले में कथित तौर पर 20 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।

आरोप है कि नीतू बिष्ट एक केस में पीड़ित पक्ष के समर्थन में कार्रवाई करने के बदले यह रकम मांग रही थी। पीड़ित की ओर से की गई शिकायत के बाद विजिलेंस ने रविवार को योजना बनाकर थाने के पास कार्रवाई की और उसे रिश्वत की रकम सहित धर दबोचा।

इस मामले में आरोपी महिला अधिकारी के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। साथ ही, विजिलेंस विभाग यह भी जांच कर रहा है कि कहीं इस भ्रष्टाचार के नेटवर्क में अन्य पुलिसकर्मी या अधिकारी भी शामिल तो नहीं हैं।


दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को आतंकी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी सफलता, BKI से जुड़ा एक और आरोपी गिरफ्तार

दिल्ली- दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) से कथित रूप से जुड़े एक संदिग्ध को पंजाब के गुरदासपुर से गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपी की पहचान करणबीर उर्फ करण के रूप में हुई है, जो अमृतसर के चननके गांव का रहने वाला है।

करणबीर पर आरोप है कि वह 7 अप्रैल 2024 को बटाला के किला लाल सिंह पुलिस स्टेशन पर हुए ग्रेनेड हमले में शामिल था। इस मामले की जांच वर्तमान में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कर रही है।

स्पेशल सेल ने करणबीर को दिल्ली में अवैध हथियारों की तस्करी से जुड़े एक मामले में पकड़ा है। इससे पहले, इसी कड़ी में 22 जुलाई को इंदौर (मध्य प्रदेश) से एक और आरोपी आकाशदीप उर्फ बाज को गिरफ्तार किया गया था। उसकी गिरफ्तारी के बाद पूछताछ के दौरान मिले सुरागों के आधार पर करणबीर तक पहुंचा गया।

डीसीपी अमित कौशिक के अनुसार, करणबीर ने पूछताछ में बताया कि वह केवल 12वीं तक पढ़ा है और BKI से काफी प्रभावित था। सोशल मीडिया के ज़रिए उसकी मुलाकात विदेश में बसे एक संपर्क सूत्र से हुई, जिसने उसे BKI के एक सक्रिय सदस्य से जोड़ दिया। इसी के निर्देशों पर करणबीर ने देश के भीतर विघटनकारी गतिविधियों में भाग लिया।

जानकारी के अनुसार, करणबीर ने इस साल पश्चिम एशिया की यात्रा भी की थी और वहीं से उसे ग्रेनेड हमले की योजना के लिए आर्थिक मदद मिली। वह अपने घर पर हमले में शामिल दो संदिग्धों को ठहराने की व्यवस्था भी कर चुका था।

इससे पहले करणबीर का भाई गुरसेवक भी इस मामले में गिरफ्तार हो चुका है। हमले की ज़िम्मेदारी कथित तौर पर हैप्पी पासिया, मन्नू अगवान और गोपी नवांशहरिया नामक BKI सदस्यों ने ली थी। साथ ही दिल्ली पर संभावित हमले की धमकी भी दी गई थी।


नशेड़ी बेटे से तंग मां ने की आत्महत्या

नशे की लत में डूबे बेटे की हरकतों से परेशान मां ने खुदकुशी कर ली

 पंजाब- पठानकोट के न्यू बैंक कॉलोनी, वार्ड नंबर 29 में एक अत्यंत दुखद घटना सामने आई है, जहाँ मनजीत कौर नामक एक महिला ने आत्महत्या कर ली। परिजनों का कहना है कि वह लंबे समय से अपने बेटे की नशे की लत और घर में आए दिन के तनाव से मानसिक रूप से परेशान थीं।

पति सुरिंदर पाल सिंह ने बताया कि उनका बेटा नशे का आदी था और अक्सर अपनी माँ से पैसे की मांग करता था। ऐसे ही एक विवाद के दौरान बेटे ने आत्महत्या की धमकी दी, जिससे मनजीत मानसिक रूप से और अधिक टूट गईं। उन्होंने कथित तौर पर कोई जहरीली चीज़ निगल ली।

परिवार ने उन्हें तुरंत सिविल अस्पताल पठानकोट पहुँचाया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बेटे अवतार सिंह के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है और उसे गिरफ्तार भी कर लिया गया है।


चकबंदी लेखपाल रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार

पीड़ित से भूमि सीमा संशोधन के नाम पर मांगी थी 20 हजार की घूस, विजिलेंस ने दबोचा

हरिद्वार। लक्सर में चकबंदी विभाग में भ्रष्टाचार का एक और मामला उजागर हुआ है। विजिलेंस टीम ने एक चकबंदी लेखपाल को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया। आरोपी, पीड़ित से भूमि सीमा संशोधन के एवज में रिश्वत मांग रहा था।

विजिलेंस टीम ने बताया कि पकड़े गए लेखपाल सुभाष कुमार, फिलहाल कानूनगो का कार्यभार भी संभाल रहे थे। लक्सर निवासी एक व्यक्ति अपनी भूमि की सीमा में संशोधन के लिए लंबे समय से कार्यालय के चक्कर लगा रहा था।

दो दिन पहले जब पीड़ित की सुभाष कुमार से मुलाकात हुई, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से काम के बदले 40 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की। बाद में यह राशि घटाकर 20 हजार रुपये तय की गई।

रिश्वत देने के बजाय पीड़ित ने विजिलेंस विभाग से संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई। योजना के तहत जब पीड़ित पैसे लेकर कार्यालय पहुंचा, तब पहले से तैनात ट्रैप टीम ने सुभाष कुमार को रंगेहाथ रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया।

विजिलेंस निदेशक डॉ. वी. मुरुगेशन ने जानकारी दी कि आरोपी के घर और कार्यालय पर छापेमारी की जा रही है, जहां से कुछ अहम दस्तावेज और सामग्री बरामद हुई है। आरोपी को विशेष विजिलेंस अदालत में पेश किया जाएगा।


अमृतसर में हेरोइन तस्करी का बड़ा खुलासा, 6 किलो से अधिक नशीला पदार्थ बरामद

पंजाब | अमृतसर में नशे के खिलाफ चल रहे अभियान को एक बड़ी सफलता मिली है। जिला शहरी पुलिस ने एक नाबालिग समेत चार व्यक्तियों को हेरोइन तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया है। इन सभी आरोपियों के पास से कुल मिलाकर 6 किलो से अधिक हेरोइन बरामद की गई है।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान सरबजीत उर्फ जोबन (खंड वाला), धर्म सिंह और कुलबीर सिंह (अजनाला निवासी) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, सरबजीत के साथ एक नाबालिग तस्कर भी पकड़ा गया है।

ड्रोन के जरिए आई थी नशे की खेप

पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि पाकिस्तान स्थित तस्कर गिरोह ने ड्रोन के माध्यम से हाल ही में सीमा पार से हेरोइन की खेप भेजी थी। इस खेप को सरबजीत और उसके नाबालिग साथी ने रिसीव किया था। गुप्त सूचना पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने इन दोनों को दबोच लिया और इनके कब्जे से 1 किलो हेरोइन बरामद की गई।

पूछताछ में खुला नेटवर्क का राज

आगे की पूछताछ में इन दोनों ने धर्म सिंह और कुलबीर सिंह के नाम उजागर किए। कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने इन दोनों आरोपियों को भी गिरफ्तार कर उनके पास से 5 किलो से अधिक हेरोइन जब्त की। यह बरामदगी नशा तस्करों के नेटवर्क के दायरे को उजागर करती है।

सीमापार तस्कर से सीधा संपर्क

जांच में यह भी सामने आया है कि मुख्य आरोपी सरबजीत उर्फ जोबन का सीधा संपर्क सीमा पार बैठे कुख्यात ड्रग तस्कर राणा से था, जो पहले से सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में है।

एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज

चारों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत एयरपोर्ट थाना और छेहरटा थाना में केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि फिलहाल सभी से विस्तृत पूछताछ की जा रही है ताकि नेटवर्क में जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके और आगे की बरामदगी भी सुनिश्चित हो सके।


दिल्ली से ऑपरेट हो रहा था बहुस्तरीय धर्मांतरण गिरोह, सात राज्यों की युवतियाँ फँसी जाल में

बरेली : देशभर में अवैध धर्मांतरण के एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जिसने दिल्ली से लेकर झारखंड, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश तक अपना जाल फैला रखा था। दिल्ली निवासी अब्दुल रहमान उर्फ महेंद्र पाल इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड निकला है, जिसने सात राज्यों की दर्जनों युवतियों का ब्रेनवॉश कर उनका धर्मांतरण कराया।

पुलिस की पड़ताल में सामने आया कि धर्मांतरण के बाद कुछ युवतियों को गिरोह का हिस्सा बना दिया गया, जो देश के अलग-अलग कॉलेजों में पढ़ने वाली छात्राओं को इस्लाम अपनाने के लिए प्रेरित करती थीं। गिरोह के तरीकों और संपर्क स्रोतों को लेकर जांच जारी है।

10 गिरफ्तार, दिल्ली में था मुख्य अड्डा

इस गिरोह की गिरफ्त में आईं सदर क्षेत्र की दो बहनों के अपहरण मामले की जांच से इस पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ। पुलिस ने अब तक कोलकाता और अन्य राज्यों से 10 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें गोवा निवासी एसबी कृष्णा उर्फ आयशा की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली के ओल्ड मुस्तफाबाद निवासी अब्दुल रहमान का नाम सामने आया।

इसके बाद पुलिस ने रहमान को गिरफ्तार किया और फिर उसके बेटे अब्दुल्ला, अब्दुल रहीम और चेले जुनैद कुरैशी को भी दबोच लिया। तीनों को बुधवार को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

धर्मांतरण के बाद निकाह, फिर नेटवर्क में शामिल

पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने बताया कि अब्दुल रहमान ने कई युवतियों को पहले मानसिक रूप से प्रभावित कर दिल्ली बुलाया, फिर हॉस्टल में ठहराया जाता था। इसके बाद अपने घर बुलाकर इस्लाम की शिक्षा दी जाती थी, कलमा पढ़वाया जाता था, और अंततः निकाह करा दिया जाता था।

उत्तराखंड की दो युवतियों ने तो अब गिरोह के लिए ही काम करना शुरू कर दिया है। ये युवतियाँ कॉलेज में पढ़ने वाली अन्य युवतियों को इस्लाम के बारे में बताती हैं और जो तैयार होती हैं, उन्हें गिरोह के अन्य सदस्य संपर्क कर दिल्ली बुला लेते हैं।

मौलाना कलीम सिद्दीकी का शागिर्द निकला रहमान

अब्दुल रहमान पर जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे मौलाना कलीम सिद्दीकी के लिए काम करने का आरोप है। कलीम के जेल जाने के बाद गिरोह की पूरी कमान रहमान ने संभाल ली थी। पुलिस का कहना है कि उसके मोबाइल फोन से कई युवतियों की जानकारियाँ और संपर्क नंबर मिले हैं।

पूछताछ में यह भी सामने आया कि धर्मांतरण गतिविधियों के लिए फंडिंग अलग-अलग स्रोतों से की जाती थी। रहमान के बेटे जूतों का व्यापार दिखाकर इस अवैध काम को छुपाते थे। घर में आने वाली हर युवती का धर्मांतरण कराया जाता था।

पुलिस जुटा रही अन्य राज्यों से जानकारी

पुलिस की टीमों ने महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तराखंड, झारखंड, मध्य प्रदेश और दिल्ली सहित यूपी के बरेली, अलीगढ़, रायबरेली और गाजियाबाद की युवतियों और उनके परिवारों से संपर्क करना शुरू कर दिया है। अन्य मामलों में जल्द खुलासे की संभावना है।


राजस्थान से बिहार चुनाव में खपाने के लिए लाई जा रही 18 लाख की शराब जब्त — दो तस्कर लखनऊ में गिरफ्तार

लखनऊ: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले शराब तस्करी को लेकर सुरक्षा एजेंसियाँ सतर्क हैं। इसी कड़ी में लखनऊ की पीजीआई पुलिस ने बुधवार देर रात राजस्थान से लाई जा रही अवैध अंग्रेजी शराब की बड़ी खेप को जब्त कर लिया। 18 लाख रुपये मूल्य की शराब से लदी पिकअप गाड़ी को डलौना रेलवे क्रॉसिंग के पास पकड़ा गया।

सूचना पर कार्रवाई, शराब छिपाने के लिए बना रखा था फर्जी कैबिनेट

डीसीपी दक्षिणी निपुण अग्रवाल के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी सोनू बागरिया और सीताराम बागरिया, दोनों जयपुर (राजस्थान) के निवासी हैं। पुलिस को बुधवार रात करीब एक बजे सूचना मिली थी कि डलौना रेलवे क्रॉसिंग के पास किसान पथ की सर्विस लाइन पर एक संदिग्ध पिकअप वैन खड़ी है।

मौके पर पहुंची पीजीआई पुलिस और सर्विलांस टीम ने जब वाहन की तलाशी ली तो उसमें कैरट से बने कृत्रिम कैबिनेट मिले, जिनके नीचे अंग्रेजी शराब की पेटियां छिपाई गई थीं।

फर्जी नंबर प्लेट, चुनाव में खपाने की थी योजना

पकड़ी गई पिकअप पर कूटरचित (फर्जी) नंबर प्लेट लगी थी, ताकि जांच से बचा जा सके। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि यह शराब बिहार में आगामी चुनाव के दौरान खपाने के लिए ले जाई जा रही थी। गौरतलब है कि बिहार में शराबबंदी लागू है, इसलिए चुनाव के समय शराब तस्करी का ग्राफ तेजी से बढ़ता है।

162 पेटी अंग्रेजी शराब बरामद, जांच जारी

पुलिस ने मौके से 162 पेटी अंग्रेजी शराब बरामद की, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 18 लाख रुपये बताई जा रही है। साथ ही वाहन और मोबाइल फोन को भी जब्त कर लिया गया है।

पुलिस अब शराब तस्करी के नेटवर्क और इसके संभावित राजनीतिक कनेक्शन की जांच कर रही है। आरोपियों से पूछताछ के आधार पर यह भी पता लगाने की कोशिश हो रही है कि किन इलाकों में शराब खपाने की योजना थी।


धर्मांतरण गिरोह का भंडाफोड़: देहरादून का रूपेंद्र बना अबू रहमान, कश्मीर कनेक्शन की भी पुष्टि

देहरादून: उत्तर भारत में धर्मांतरण गिरोह की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका खुलासा आगरा पुलिस की कार्रवाई के बाद सामने आया है। गिरोह के 10 सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद कई हैरान कर देने वाली जानकारियां उजागर हुई हैं। इनमें छह ऐसे लोग हैं जो मूलतः हिंदू धर्म से थे, लेकिन धर्म बदलकर अब मुस्लिम पहचान में जी रहे हैं।

धर्म बदलकर बने ‘अबू रहमान’, ‘मुस्तफा’ और ‘इब्राहिम’

गिरफ्तार किए गए लोगों में शामिल उत्तराखंड के देहरादून निवासी रूपेंद्र सिंह बघेल अब अबू रहमान बन चुका है। इसी तरह दिल्ली का मनोज अब मुस्तफा, कोलकाता का ऋतिक मोहम्मद इब्राहिम, जयपुर का पियूष अली, और आगरा की दो बहनें सोया व अमीना बन चुकी हैं।

पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह गिरोह केवल युवतियों को नहीं, पुरुषों को भी निशाना बना रहा है। खासकर वे लोग जो बेरोजगारी, पारिवारिक कलह या सामाजिक तिरस्कार से जूझ रहे हैं — इन्हें निशाना बना कर ब्रेनवाश किया जाता है।

“तुम्हारा भगवान कहाँ है?” — ब्रेनवॉश का तरीका

गिरोह के सदस्य हिंदू युवाओं को यह कहते हैं कि “अगर तुम्हारा भगवान होता तो तुम्हारी मदद जरूर करता।” इसके विपरीत, इस्लाम धर्म में मदद के लिए खुदा अपने बंदे भेजता है। इस तर्क के जरिए उन्हें मानसिक रूप से प्रभावित किया जाता है।

इनमें से कई युवाओं को कश्मीर भेजकर मुजाहिद बनने की ट्रेनिंग देने की योजना थी। गिरफ्तार दो बहनों ने पुलिस को बताया कि धर्मांतरण गिरोह का एक मजबूत कश्मीरी नेटवर्क भी सक्रिय है।

कश्मीरी छात्र-छात्राएं बनते हैं ‘ब्रेनवॉशिंग’ का औजार

धर्मांतरण गिरोह के सरगना अब्दुल रहमान का मुख्य हथियार है कश्मीर से आए युवा छात्र-छात्राएं। पुलिस सूत्रों के अनुसार ये लोग कॉलेजों में पढ़ाई के दौरान जानबूझकर नमाज अदा करते हैं, बहस छेड़ते हैं, जातिवाद, वर्णव्यवस्था और हिंदू धर्म की सामाजिक कुरीतियों पर सवाल उठाते हैं। धीरे-धीरे युवाओं को फुसलाकर धर्म परिवर्तन की दिशा में धकेला जाता है।

“रिवर्ट” कोड: पहचान बदलने का नया तरीका

एक अन्य अहम खुलासा यह हुआ कि धर्मांतरण करने वालों को सोशल मीडिया पर “रिवर्ट” टैग दिया जाता है, जिसका अर्थ होता है — “वापस लौटना” (Return to Islam)। इसका इस्तेमाल यह जताने के लिए किया जाता है कि उन्होंने ‘असली धर्म’ को फिर से स्वीकार किया है।

उत्तराखंड में भी गहराई तक फैला नेटवर्क

गिरफ्तार लोगों की पूछताछ में यह बात सामने आई है कि उत्तराखंड, विशेष रूप से देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर में गिरोह की सक्रियता है। पिछले कुछ वर्षों में हजारों लोग, विशेषकर युवतियां, गायब बताई जा रही हैं, जिनमें से कई मामलों का धर्मांतरण से संबंध हो सकता है।

पुलिस की सख्त कार्रवाई जारी, बड़े खुलासे अभी बाकी

पुलिस का कहना है कि इस मामले में और भी बड़ी साजिश सामने आ सकती है। एसआईटी की जांच जारी है और गिरोह के आर्थिक स्रोत, प्रशिक्षण कैंप्स और वैचारिक नेटवर्क पर गहराई से जांच की जा रही है।


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