Thursday, August 20th, 2026

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मियांवाला स्थित जौहड़ की भूमि का 8.63 करोड़ की लागत से सौंदर्यीकरण, पुराने जलस्रोत को मिला नया जीवन

Monthly Archives: August 2026

मियांवाला स्थित जौहड़ की भूमि का 8.63 करोड़ की लागत से सौंदर्यीकरण, पुराने जलस्रोत को मिला नया जीवन

सीएम धामी के विजन को धरातल पर उतार रहा एमडीडीए, सिटी फॉरेस्ट के बाद मियांवाला में एक और पर्यावरणीय तोहफा

जल-सृष्टि पार्क में जल संरक्षण के साथ आमजन के लिए आधुनिक सुविधाएं

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण के विजन को धरातल पर उतारते हुए मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने मियांवाला स्थित जौहड़ की भूमि का व्यापक सौंदर्यीकरण कर इसे आधुनिक एवं आकर्षक जल-सृष्टि पार्क के रूप में विकसित किया है। करीब 8.63 करोड़ रुपये की लागत से किए गए इस सौंदर्यीकरण कार्य के बाद वर्षों से उपेक्षित पड़े पुराने जलस्रोत और उसके आसपास का क्षेत्र अब आमजन के लिए प्रकृति, स्वास्थ्य, मनोरंजन और सुकून का नया ठिकाना बनकर तैयार है।

सिटी फॉरेस्ट के बाद एमडीडीए की यह पहल देहरादून में हरित क्षेत्रों और प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार शहरी विकास को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने पर जोर देते रहे हैं। इसी सोच के अनुरूप मियांवाला के पंचायत घर गन्ना सेंटर के समीप स्थित जौहड़ की भूमि और पुराने तालाब क्षेत्र का कायाकल्प कर इसे आधुनिक पार्क का स्वरूप दिया गया है। परियोजना में जलस्रोत के संरक्षण के साथ आसपास के क्षेत्र का व्यवस्थित सौंदर्यीकरण किया गया है। जल संरक्षण और जलीय जीवों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के साथ नौकायन जैसी गतिविधियों के लिए भी व्यवस्थाएं की गई हैं।

एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने जल-सृष्टि पार्क का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने पार्क परिसर में रुद्राक्ष का पौधा भी रोपा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में एमडीडीए ऐसी परियोजनाओं पर काम कर रहा है, जिनसे विकास के साथ प्रकृति और पर्यावरण का संरक्षण भी सुनिश्चित हो। मियांवाला में जौहड़ की भूमि का सौंदर्यीकरण इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। पार्क में उत्तराखंड की पारंपरिक पहाड़ी शैली में मुख्य प्रवेश द्वार, योग डेक, योग से संबंधित मूर्तिकला, गजीबो, वॉकिंग ट्रैक, गार्डन बेंच, कैंटीन, स्वच्छ शौचालय और सुरक्षा रेलिंग जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। जलीय फूल, मछलियां, पक्षी और हरियाली पार्क की खूबसूरती बढ़ाते हैं।

यह पार्क परिवारों, युवाओं और बुजुर्गों के लिए आकर्षण का केंद्र बनने के साथ शहर में एक बेहतर सार्वजनिक स्थल के रूप में भी विकसित हुआ है। एमडीडीए की यह परियोजना मुख्यमंत्री धामी के उस विजन को मजबूती देती है, जिसमें शहरों का विकास आधुनिक सुविधाओं के साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को ध्यान में रखकर करने पर जोर दिया जा रहा है। मियांवाला का जल-सृष्टि पार्क इसी सोच का उदाहरण है, जहां जौहड़ की भूमि और पुराने जलस्रोत को संरक्षित करते हुए उसे जनसुविधा, हरियाली और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ा गया है।

जीर्ण तालाब से खूबसूरत जल-सृष्टि पार्क तक
पंचायत घर गन्ना सेंटर के समीप लंबे समय से उपेक्षित पड़े जौहड़ और तालाब क्षेत्र का कायाकल्प कर एमडीडीए ने इसे आकर्षक पार्क का स्वरूप दिया है। 8.63 करोड़ रुपये की लागत से जौहड़ की भूमि पर किए गए सौंदर्यीकरण कार्य के तहत तालाब के संरक्षण के साथ आसपास हरित क्षेत्र और जनसुविधाएं विकसित की गई हैं।

नौकायन जैसी गतिविधियों के लिए व्यवस्थाएं की गई हैं, जबकि जलीय जीवों के लिए भी अनुकूल वातावरण तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच प्राकृतिक जलस्रोतों का संरक्षण बेहद महत्वपूर्ण है। मियांवाला की यह परियोजना इस बात का उदाहरण है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चला जा सकता है।

पारंपरिक पहाड़ी शैली में प्रवेश द्वार, योग डेक और वॉकिंग ट्रैक
जल-सृष्टि पार्क को आधुनिक सुविधाओं के साथ उत्तराखंड की स्थानीय संस्कृति से भी जोड़ा गया है। पार्क का मुख्य प्रवेश द्वार पारंपरिक पहाड़ी शैली में तैयार किया गया है। यहां योग डेक, योग से संबंधित मूर्तिकला, आकर्षक गजीबो, वॉकिंग ट्रैक, गार्डन बेंच, कैंटीन और स्वच्छ शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। तालाब के आसपास सुरक्षा रेलिंग लगाई गई है। हरियाली से भरपूर खुले क्षेत्र पार्क की खूबसूरती बढ़ाते हैं। ऐसे में यह पार्क बच्चों, युवाओं, बुजुर्गों और परिवारों के लिए उपयोगी सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित हुआ है।

सिटी फॉरेस्ट के बाद पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और कदम
एमडीडीए की ओर से विकसित जल-सृष्टि पार्क को सिटी फॉरेस्ट के बाद आमजन के लिए एक और पर्यावरणीय तोहफा माना जा रहा है। सिटी फॉरेस्ट की तर्ज पर यह परियोजना भी देहरादून में हरित क्षेत्रों और प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करने की सोच को आगे बढ़ाती है। जौहड़ और पुराने जलस्रोत के पुनर्जीवन से जहां क्षेत्र की सुंदरता बढ़ी है, वहीं जल संरक्षण और स्थानीय पारिस्थितिकी को भी मजबूती मिलेगी। नौकायन जैसी गतिविधियों के जरिए लोगों को जलस्रोतों से जोड़ने और प्रकृति के प्रति जागरूक करने का प्रयास भी किया गया है।

विकास में हरियाली और जल संरक्षण को प्राथमिकता
एमडीडीए का जोर अब ऐसी परियोजनाओं पर है, जिनमें विकास के साथ पर्यावरणीय संतुलन भी कायम रहे। पुराने तालाब, जौहड़, जलस्रोत और हरित क्षेत्रों को संरक्षित कर उन्हें जनोपयोगी स्वरूप देने से शहर को बेहतर सार्वजनिक स्थल मिलने के साथ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी संभव होगा। मियांवाला का जल-सृष्टि पार्क इसी सोच का परिणाम है। यह सिर्फ एक पार्क नहीं, बल्कि 8.63 करोड़ रुपये की लागत से जौहड़ की भूमि के सौंदर्यीकरण, पुराने जलस्रोत को बचाने, प्रकृति को संवारने और आमजन को बेहतर सुविधाएं देने की एकीकृत पहल है।

बंशीधर तिवारी : पुराने जलस्रोतों को बचाना हमारी प्राथमिकता
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि देहरादून के विकास में पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। मियांवाला का पुराना तालाब और जौहड़ क्षेत्र लंबे समय से उपेक्षित था, जिसे 8.63 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक सुविधाओं के साथ जल-सृष्टि पार्क के रूप में विकसित किया गया है। हमारा उद्देश्य केवल सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि जलस्रोत का संरक्षण, जलीय जीवों के लिए अनुकूल वातावरण और आमजन को बेहतर सार्वजनिक स्थान उपलब्ध कराना है। सिटी फॉरेस्ट के बाद यह एमडीडीए की एक और महत्वपूर्ण पर्यावरणीय पहल है। आने वाले समय में भी ऐसे प्राकृतिक जलस्रोतों और हरित क्षेत्रों को संरक्षित करने का प्रयास जारी रहेगा।

मोहन सिंह बर्निया : विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण जरूरी
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि मियांवाला जल-सृष्टि पार्क विकास और पर्यावरण संरक्षण का बेहतर उदाहरण है। जौहड़ की भूमि और पुराने तालाब क्षेत्र को संरक्षित कर उसका 8.63 करोड़ रुपये की लागत से सौंदर्यीकरण किया गया है और इसे जनसुविधाओं से जोड़ा गया है। पार्क में हरियाली, योग, वॉकिंग और नौकायन जैसी सुविधाएं लोगों को प्रकृति से जोड़ेंगी। एमडीडीए भविष्य में भी शहर के प्राकृतिक संसाधनों और हरित क्षेत्रों के संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए जनहित से जुड़ी ऐसी परियोजनाओं को आगे बढ़ाएगा।


चमोली में पीआईबी का ‘वार्तालाप’ एवं क्षेत्रीय मीडिया कार्यशाला कार्यक्रम आयोजित

केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दूरस्थ एवं सीमांत क्षेत्रों तक पहुंचाने पर जोर

स्थानीय मीडिया को सरकार और जनता के बीच महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए तथ्यपरक एवं सकारात्मक पत्रकारिता का आह्वान

स्वास्थ्य, कृषि, मत्स्य पालन, महिला एवं बाल विकास, नशामुक्ति, स्वरोजगार, जीआई टैग एवं स्थानीय उत्पादों से जुड़ी योजनाओं पर हुई चर्चा

अधिकारियों एवं मीडिया प्रतिनिधियों के बीच जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी प्रचार-प्रसार और अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने को लेकर संवाद

देहरादून/चमोली- सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी), देहरादून की ओर से सीमांत जनपद चमोली में ‘वार्तालाप’ एवं क्षेत्रीय मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत बिष्ट, नगर पालिका अध्यक्ष गोपेश्वर संदीप रावत, जिलाधिकारी गौरव कुमार, पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. अभिषेक त्रिपाठी, प्रेस क्लब की संरक्षक क्रांति भट्ट तथा पीआईबी के सहायक निदेशक संजीव सुन्द्रियाल ने किया।

कार्यशाला में केंद्र सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, स्थानीय उत्पादों, स्वास्थ्य, कृषि, मत्स्य पालन, महिला एवं बाल विकास, नशामुक्ति और स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने योजनाओं की जानकारी दी, वहीं लाभार्थियों ने अपने अनुभव भी साझा किए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत बिष्ट ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम पूरे जनपद की बेहतरी के लिए लाभदायक सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि मीडिया ‘वार्तालाप’ कार्यक्रमों को जनपद के ब्लॉक स्तर पर आयोजित किया जाना चाहिए, ताकि केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।

नगर पालिका अध्यक्ष श्री संदीप रावत ने कहा कि पीआईबी द्वारा मीडिया और अधिकारियों के बीच केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं को लेकर संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की कई योजनाएं ऐसी हैं, जिनका पर्याप्त प्रचार-प्रसार न होने के कारण लोग उनका लाभ नहीं ले पाते। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से मीडिया के सहयोग से योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाई जा सकती है।

कार्यक्रम में प्रेस क्लब की संरक्षक क्रांति भट्ट ने जनपद में प्रेस की चुनौतियों एवं भूमिका के बारे में जानकारी दी। मुख्य विकास अधिकारी डॉ. अभिषेक त्रिपाठी ने जनपद में पत्रकारों की सकारात्मक एवं जनहितकारी पत्रकारिता की सराहना की और सरकारी योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने नशामुक्त भारत अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि जनपद में अभियान के तहत 140 नारकोटिक्स किट वितरित किए गए हैं। उन्होंने युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक पत्रकारिता की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
जिलाधिकारी गौरव कुमार ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तथा पीआईबी की ओर से विश्वसनीय एवं तथ्यपरक सूचनाओं के प्रसार के लिए आभार व्यक्त किया। जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत बिष्ट ने तमक नाला, नीति घाटी और टीएचडीसी पीपलकोटी में हुई आपदाओं के दौरान जिला प्रशासन की त्वरित कार्रवाई की सराहना की।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजीव सिंह पाल ने स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने वाले स्थानीय व्यक्ति को राहगीर योजना के तहत 25 हजार रुपये तक की पुरस्कार राशि दी जाती है। इसके अलावा आयुष्मान योजना, जननी सुरक्षा योजना, नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच सहित अन्य योजनाओं की जानकारी दी गई।

खाद्य पूर्ति अधिकारी अंकित पांडेय ने ई-20 पेट्रोल, किसानों को होने वाले लाभ और पर्यावरण संरक्षण में इसकी भूमिका की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ई-20 के निर्माण में चावल, मक्का और गन्ने जैसे कृषि उत्पादों का उपयोग किया जाता है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी हिमांशु बडोला ने बालिकाओं के लिए संचालित नंदा गौरा योजना की जानकारी देते हुए पात्र लाभार्थियों से समय पर पंजीकरण कराने की अपील की। सहायक निदेशक मत्स्य श्री नितेश कुमार चंद्र ने मत्स्य किसान समृद्धि योजना के तहत ट्राउट मछली उत्पादन और युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाओं की जानकारी दी।
जिला समाज कल्याण अधिकारी धनंजय लिंगवाल ने नशामुक्त भारत अभियान के तहत संचालित कार्यक्रमों, स्कूलों के 100 मीटर के दायरे में नशीले पदार्थों की बिक्री पर रोक तथा नशामुक्ति केंद्र और काउंसलिंग की व्यवस्था के बारे में जानकारी दी।

जिला उद्यान अधिकारी नितेन्द्र सिंह ने चमोली के स्थानीय और विशिष्ट उत्पादों को जीआई टैग दिलाने की प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को मशरूम और कीवी की खेती के लिए प्रोत्साहित करते हुए जनपद में संचालित फार्मों और उपलब्ध संभावनाओं की जानकारी साझा की।

मीडिया के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे योजनाओं की जानकारी : संजीव सुन्द्रियाल
कार्यक्रम के आयोजक एवं पीआईबी के सहायक निदेशक श्री संजीव सुन्द्रियाल ने कहा कि सीमांत जनपद चमोली में ‘वार्तालाप’ कार्यक्रम आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य प्रामाणिक और तथ्यपरक जानकारी के माध्यम से केंद्र सरकार की योजनाओं को मीडिया के जरिए जनपद के दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाना है।

उन्होंने कहा कि चमोली में तैयार होने वाले स्थानीय उत्पादों और यहां की संस्कृति को पहचान दिलाने के साथ ही केंद्र सरकार की योजनाओं से लाभान्वित हो रहे लोगों को अधिक से अधिक लाभ दिलाना इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्रों के हर गांव और हर घर तक केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ पहुंचे, इसी मंशा के साथ पीआईबी की ओर से चमोली को इस कार्यक्रम के लिए चुना गया।
उन्होंने कहा कि स्थानीय मीडिया सरकार और जनता के बीच महत्वपूर्ण कड़ी है। मीडिया के माध्यम से योजनाओं की सही और प्रमाणिक जानकारी दूरस्थ गांवों तक पहुंचने से पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ लेने में आसानी होगी।

कार्यशाला के दौरान अधिकारियों और मीडिया प्रतिनिधियों के बीच विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार, स्थानीय मुद्दों तथा सरकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका को लेकर विस्तृत संवाद हुआ।


मोतीचूर फ्लाईओवर पर बस चालक को थार से कुचलने का प्रयास, आरोपी गिरफ्तार

देहरादून। रायवाला थाना क्षेत्र के मोतीचूर फ्लाईओवर पर बस चालक को थार वाहन से कुचलने का प्रयास करने के मामले में दून पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त थार वाहन भी बरामद कर लिया है।

पुलिस के अनुसार, 13 अगस्त 2026 को स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय जौलीग्रांट की बस विद्यार्थियों और महिला स्टाफ को लेकर हरिद्वार जा रही थी। नेपाली फार्म के पास एक काले रंग की थार बस के आगे-पीछे चलने लगी। मोतीचूर फ्लाईओवर पर बस रुकने के बाद बस चालक ने थार चालक से इस तरह वाहन चलाने का कारण पूछा।

आरोप है कि इस दौरान कहासुनी होने पर थार चालक ने तैश में आकर बस चालक को जान से मारने की नीयत से वाहन उसके ऊपर चढ़ाने का प्रयास किया। बस चालक को कुछ दूर तक घसीटने के बाद थार ने आगे चल रही एक मारुति सियाज कार को भी टक्कर मार दी और आरोपी मौके से फरार हो गया। घटना में बस चालक को गंभीर चोटें आईं।

मामले में वादिनी की तहरीर पर थाना रायवाला में मुकदमा अपराध संख्या 135/2026 के तहत धारा 109(1)/324(4) बीएनएस में मुकदमा दर्ज किया गया।

मेरठ और दिल्ली में दबिश, कोर्ट जाने से पहले गिरफ्तारी

घटना की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी देहरादून के निर्देश पर रायवाला पुलिस ने आरोपी की तलाश के लिए टीम गठित की। पुलिस ने आरोपी की तलाश में मेरठ और दिल्ली क्षेत्र में दबिश दी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि आरोपी ऋषिकेश कोर्ट में सरेंडर करने के लिए जा रहा है।

सूचना पर पुलिस टीम ने 19 अगस्त 2026 को गुरु नानक ढाबा, बहादराबाद तिराहा से आरोपी देव चौधरी को गिरफ्तार कर लिया। उसकी निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त थार वाहन संख्या UK-06-BD-0070 भी बरामद किया गया।

पूछताछ में आरोपी ने बताई घटना की वजह

पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि थार वाहन उसके पिता के दोस्त संदीप कुमार के नाम पंजीकृत है और वह वर्ष 2022 से इसे चला रहा है। 13 अगस्त को वह अपने दोस्त के साथ नेपाली फार्म के पास था। बस में उसकी एक परिचित लड़की होने के कारण वह बस के आगे-पीछे थार चलाने लगा।

मोतीचूर फ्लाईओवर पर बस रुकने के बाद बस में सवार लोगों के साथ उसकी कहासुनी हो गई। आरोपी के अनुसार, गुस्से में उसने वाहन आगे बढ़ा दिया, जिससे बस चालक को चोट लगी और आगे चल रही सियाज कार से भी टक्कर हो गई। घटना के बाद वह थार को अपने घर में खड़ा कर पुलिस से बचने के लिए मेरठ स्थित रिश्तेदारी में चला गया था। बाद में ऋषिकेश कोर्ट में सरेंडर करने के लिए आते समय पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार आरोपी

देव चौधरी पुत्र गुड्डू चौधरी उर्फ विकास चौधरी, निवासी गली नंबर 07, टिहरी विस्थापित कॉलोनी, न्यू शिवालिक नगर, थाना रानीपुर, जनपद हरिद्वार, उम्र 20 वर्ष।

बरामदगी

घटना में प्रयुक्त थार वाहन संख्या UK-06-BD-0070

पुलिस टीम

उप निरीक्षक रघुबीर कपरवान, हेड कांस्टेबल राजीव यादव, कांस्टेबल दीपक कुमार और कांस्टेबल विकास कुमार शामिल रहे।


गौहरी माफी में सौंग नदी का बढ़ता कटाव बना चुनौती, स्थायी समाधान पर जोर

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का मंत्री और विधायक ने किया स्थलीय निरीक्षण, अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश

देहरादून। ऋषिकेश क्षेत्र के गौहरी माफी और रायवाला में बाढ़ एवं जलभराव से प्रभावित इलाकों का गुरुवार को आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक और विधायक प्रेमचंद्र अग्रवाल ने स्थलीय निरीक्षण किया। दोनों ने प्रभावित क्षेत्रों में भू-कटाव, जलभराव और क्षतिग्रस्त पुलिया की स्थिति का जायजा लिया। साथ ही अधिकारियों से राहत एवं बचाव कार्यों की प्रगति और आगे की कार्ययोजना की जानकारी ली।

निरीक्षण के दौरान तहसील प्रशासन, जिला आपदा प्रबंधन, सिंचाई और लोक निर्माण विभाग समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। मंत्री और विधायक ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं सुरक्षा कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। आवश्यक कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर तत्काल पूरा करने को कहा गया।

सौंग नदी के कटाव से गौहरी माफी में बढ़ी परेशानी

गौहरी माफी में सौंग नदी से हो रहे भू-कटाव और नदी का पानी रिहायशी इलाकों में पहुंचने की समस्या का निरीक्षण किया गया। अधिकारियों से अब तक किए गए सुरक्षात्मक कार्यों की जानकारी लेते हुए मंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल आवश्यक सुरक्षा उपाय करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया।

क्षतिग्रस्त पुलिया की डीपीआर जल्द तैयार करने के निर्देश

रायवाला खेल मैदान के पास गौहरी माफी और रायवाला को जोड़ने वाली क्षतिग्रस्त पुलिया का भी निरीक्षण किया गया। सुसुवा नदी के कारण क्षतिग्रस्त हुई इस पुलिया के पुनर्निर्माण या मरम्मत के लिए सिंचाई विभाग को तत्काल डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों से कहा गया कि धनराशि की स्वीकृति और आवंटन के लिए प्रस्ताव जिलाधिकारी कार्यालय या जिला आपदा प्रबंधन कार्यालय को उपलब्ध कराया जाए।

अड़वाणी प्लॉट में जलभराव का स्थायी समाधान

रायवाला के अड़वाणी प्लॉट क्षेत्र में मानसून के दौरान होने वाले जलभराव की स्थिति भी देखी गई। अधिकारियों को बारिश के दौरान लगातार पंपिंग के जरिए पानी की निकासी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए जरूरी तकनीकी और सुरक्षात्मक कार्यों के प्रस्ताव जल्द तैयार करने को कहा गया।

निरीक्षण के दौरान मदन कौशिक और प्रेमचंद्र अग्रवाल ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में जनसुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से राहत और सुरक्षा कार्य करने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि आपदा और जलभराव से जुड़ी समस्याओं के समाधान में किसी भी स्तर पर देरी नहीं होनी चाहिए और दीर्घकालिक समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई जल्द पूरी की जाए।


लोनिवि मंत्री महाराज ने परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय की बैठक में रखे कई सुझाव

उत्तराखंड की नदियों में होगी वैज्ञानिक ड्रेजिंग, बाढ़ सुरक्षा पर केंद्र के साथ बनी संयुक्त कार्ययोजना

देहरादून/नई दिल्ली। उत्तराखंड की प्रमुख नदियों में वैज्ञानिक तरीके से ड्रेजिंग और बाढ़ सुरक्षा उपायों को लेकर केंद्र सरकार ने राज्यों के साथ मंथन शुरू कर दिया है। नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में उत्तराखंड की ओर से कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने प्रदेश की भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण सुझाव रखे।

नई दिल्ली के ट्रांसपोर्ट भवन स्थित सागर मंथन हाल में परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में बैठक आयोजित की गई। इसमें व्यास, रावी, भागीरथी, अलकनंदा और तीस्ता समेत प्रमुख नदियों में वैज्ञानिक ड्रेजिंग तथा बाढ़ से बचाव के लिए राज्यों की संयुक्त कार्ययोजना पर चर्चा हुई।

बैठक में सतपाल महाराज ने कहा कि उत्तरकाशी से गंगोत्री के बीच करीब 100 किलोमीटर का क्षेत्र पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील है। इस क्षेत्र में नदी तल में बड़ी मात्रा में बोल्डर और मलबा जमा होने से नदी का स्तर ऊंचा हो सकता है। कई स्थानों पर नदी में झील जैसी स्थिति बनने की आशंका भी रहती है। ऐसे में नदी किनारे गुजर रहे राष्ट्रीय राजमार्ग की ऊंचाई बढ़ाने पर विचार किया जाना चाहिए।

महाराज ने हर्षिल के निकट बनी कृत्रिम झील का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि राजमार्ग-34 की सुरक्षा के लिए वहां करीब 200 मीटर लंबा बांध बनाया गया है। इसके बावजूद लगभग 600 मीटर हिस्से में सड़क को एक से डेढ़ मीटर तक ऊंचा उठाने की आवश्यकता है, ताकि संभावित बाढ़ और जलभराव की स्थिति में राजमार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

रेलवे परियोजनाओं में सड़क यातायात के लिए स्केप टनल का सुझाव

बैठक के दौरान सतपाल महाराज ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को एक पत्र भी सौंपा। इसमें उन्होंने उत्तराखंड में प्रस्तावित टनकपुर-बागेश्वर, बागेश्वर-कर्णप्रयाग और ऋषिकेश-उत्तरकाशी रेल परियोजनाओं में बनने वाली स्केप टनल को दो लेन मोटर वाहन यातायात के लिए उपयोगी बनाने का सुझाव दिया।

उन्होंने कहा कि इन टनलों को रेलवे और सड़क परिवहन मंत्रालय की संयुक्त सहभागिता से इस तरह विकसित किया जाए, जिससे जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल सड़क यातायात के लिए भी किया जा सके। इससे पर्वतीय क्षेत्रों में आपदा या सड़क बाधित होने की स्थिति में वैकल्पिक संपर्क मार्ग उपलब्ध हो सकेगा।

इसके अलावा महाराज ने तिलवाड़ा-मायली-गुप्तकाशी मोटर मार्ग को दो लेन में विकसित कर सुपर मार्ग के रूप में तैयार करने का भी अनुरोध किया।

बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने की। इसमें विभिन्न राज्यों के अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा नदियों में ड्रेजिंग, बाढ़ सुरक्षा और संबंधित बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।


फाजिल्का में नशा तस्करों पर बड़ी कार्रवाई, 8 महीने में 924 केस दर्ज, 1,331 आरोपी गिरफ्तार

फाजिल्का। पंजाब के फाजिल्का जिले में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस ने बीते आठ महीनों में बड़ी कार्रवाई की है। ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के दौरान पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत 924 मामले दर्ज कर 1,331 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस दौरान बड़ी मात्रा में हेरोइन, अफीम, पोस्त की भूसी और अन्य नशीले पदार्थ बरामद किए गए।

पुलिस के अनुसार, कार्रवाई के दौरान 41.124 किलोग्राम हेरोइन, 3.85 ग्राम क्रिस्टल मेथामफेटामाइन, 6.503 किलोग्राम अफीम, 42 ग्राम चरस और 250.537 किलोग्राम पोस्त की भूसी जब्त की गई। इसके अलावा नशीली दवाओं के 15,843 कैप्सूल और गोलियां भी बरामद हुईं। नशा तस्करी में इस्तेमाल किए जा रहे 38 वाहनों को पुलिस ने जब्त किया है।

पंजाब पुलिस के डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि अभियान का उद्देश्य केवल नशा तस्करों पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि नशे की गिरफ्त में आए लोगों को उपचार और पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध कराना भी है। अभियान के तहत 252 लोगों को नशा मुक्ति केंद्रों में भर्ती कराया गया, जबकि 1,809 लोगों को ओपिओइड असिस्टेड ट्रीटमेंट केंद्रों के लिए रेफर किया गया।

इसके अलावा एनडीपीएस एक्ट की धारा 64-ए के तहत 141 लोगों को लाभ दिया गया है। पुलिस का कहना है कि नशे की समस्या से निपटने के लिए कार्रवाई के साथ जागरूकता और उपचार को भी अभियान का हिस्सा बनाया गया है।

फाजिल्का पुलिस ने संगठित अपराध और गैंगस्टरों से जुड़े लोगों के खिलाफ भी अभियान चलाया। एसएसपी गगन अजीत सिंह के मुताबिक, आर्म्स एक्ट के तहत 10 मामले दर्ज कर 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनके कब्जे से 25 पिस्तौल, एक देसी पिस्तौल, 32 मैगजीन, 52 जिंदा कारतूस और तीन ड्रोन बरामद किए गए।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों और गैंग से जुड़े लोगों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि संगठित अपराध पर प्रभावी तरीके से रोक लगाई जा सके।

पुलिस ने जनता के साथ संपर्क बढ़ाने के लिए 99 ‘प्रोजेक्ट संपर्क’ बैठकें आयोजित कीं। इसके अलावा 334 नशा विरोधी जागरूकता शिविर और सेमिनार भी आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों के जरिए लोगों को नशे के दुष्परिणामों और अपराध की रोकथाम के प्रति जागरूक किया गया।

साइबर अपराध की शिकायत के लिए लोगों को 1930 हेल्पलाइन और साइबर क्राइम पोर्टल की जानकारी भी दी गई।

फाजिल्का पुलिस ने सीमा से जुड़े इलाकों में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया है। जिले के प्रमुख प्रवेश और निकास मार्गों पर सात स्थायी रात्रि नाके लगाए गए हैं। इन स्थानों पर 39 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।

112 सेवा से जुड़े 21 इमरजेंसी रिस्पॉन्स व्हीकल में 102 पुलिसकर्मी तैनात हैं। इसके अलावा पांच पीसीआर मोटरसाइकिलों पर भी पुलिसकर्मी दिन-रात ड्यूटी कर रहे हैं।

पुलिस जांच में तकनीक का भी इस्तेमाल बढ़ाया गया है। पहचान सत्यापन के लिए पंजाब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है, जबकि वाहनों की जानकारी जांचने के लिए वाहन डेटाबेस की मदद ली जा रही है। डिजिटल साक्ष्यों की जांच के लिए डिजिटल फोरेंसिक लैब भी स्थापित की गई है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सीसीटीवी कैमरों और तकनीक आधारित खुफिया तंत्र की मदद से अपराधियों की पहचान और उनकी लोकेशन ट्रेस करने में काफी सहायता मिल रही है। NATGRID और अन्य तकनीकी माध्यमों की मदद से भी आरोपियों को पकड़ने के लिए कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस ने सीमा पार से होने वाली नशा तस्करी के मामलों में भी कार्रवाई की है। ऐसे 16 मामले दर्ज कर 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इन मामलों में 26.822 किलोग्राम हेरोइन के साथ एक पिस्तौल, पांच मैगजीन, 13 जिंदा कारतूस और एक ड्रोन बरामद किया गया है।

फाजिल्का पुलिस के मुताबिक, नशा तस्करी और संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।


तीन गुना मुनाफे का झांसा देकर 200 लोगों से करोड़ों की ठगी का आरोप, एसएसपी से शिकायत

मेरठ। क्रिप्टो करेंसी और अलग-अलग निवेश योजनाओं में पैसा लगाने पर तीन गुना तक मुनाफा देने का दावा कर सैकड़ों लोगों से करोड़ों रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। लिसाड़ी गेट निवासी सुहेल ने इस संबंध में एसएसपी को शिकायत देकर फरमान समेत कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच और कार्रवाई की मांग की है।

शिकायतकर्ता के मुताबिक, करीब एक वर्ष पहले फरमान उसके स्कूल पहुंचा था। उसने खुद को बेटफ्लिक्स कंपनी से जुड़ा बताया और लोगों को निवेश की विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी दी। आरोप है कि उसने निवेश की रकम की जिम्मेदारी लेने के साथ करीब तीन गुना मुनाफा दिलाने का भरोसा दिया।

बताया गया कि भरोसे में आकर सुहेल ने शुरुआत में दो लाख रुपये निवेश किए। कुछ समय तक उसे लाभ की रकम दी गई, जिससे उसका विश्वास बढ़ गया। इसके बाद उसने अपने रिश्तेदारों और परिचितों को भी योजना में पैसा लगाने के लिए प्रेरित किया। उसके भाई शारिफ और एक दोस्त ने भी करीब चार लाख रुपये निवेश किए।

शिकायत के अनुसार, कुछ समय तक निवेश की रकम पर भुगतान किया गया, लेकिन बाद में पैसा मिलना बंद हो गया। जब निवेश की रकम वापस मांगी गई तो आरोपितों की ओर से दो महीने में भुगतान करने का आश्वासन दिया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि चार महीने बीतने के बाद भी रकम वापस नहीं मिली।

आरोप है कि इसके बाद पीड़ितों पर दोबारा पैसा लगाने का दबाव बनाया गया। ऐसा करने से मना करने पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।

सुहेल ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि इस नेटवर्क से 200 से अधिक लोग जुड़े थे और उनसे करोड़ों रुपये लिए गए। आरोप है कि पहले योजना का नाम बेटफ्लिक्स था, जिसे बाद में बदलकर बिटब्रेन कर दिया गया।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि हापुड़ रोड स्थित एक होटल में पी-काइन नामक क्रिप्टो करेंसी में निवेश के नाम पर भी लोगों से रकम जुटाई जाती थी।

शिकायतकर्ता ने पुलिस को भुगतान से संबंधित रसीदें और अन्य दस्तावेज भी उपलब्ध कराने की बात कही है। उसने पूरे मामले की जांच कर आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। साथ ही आरोपितों के देश से बाहर जाने की आशंका जताते हुए गिरफ्तारी की मांग भी की गई है। पुलिस जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और कथित निवेश नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।


कुंभ मेला-2027 की सुरक्षा होगी हाईटेक, AI और आधुनिक तकनीक से मजबूत होगा आपदा प्रबंधन

कुंभ मेला-2027 की तैयारियों को लेकर बैठक आपात स्थिति में रिस्पांस टाइम घटाने पर जोर, कुंभ से पहले होंगी नियमित मॉक ड्रिल

देहरादून। कुंभ मेला-2027 के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और संभावित आपात स्थितियों से निपटने की तैयारियों को लेकर सरकार ने अभी से कवायद तेज कर दी है। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने गुरुवार को सचिवालय में संबंधित विभागों और जिलाधिकारियों के साथ बैठक कर आपदा प्रबंधन एवं सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि मेले से पहले सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।

मुख्य सचिव ने पूरे कुंभ क्षेत्र के लिए क्षेत्रवार आपातकालीन और सेक्टरवार निकासी योजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने क्राउड मैनेजमेंट, ट्रैफिक प्लान, इवेक्यूएशन प्लान और फायर कंट्रोल मैकेनिज्म को शामिल करते हुए एक समेकित आपदा प्रबंधन योजना तैयार करने को कहा। इसमें भूकंप, बाढ़ के साथ-साथ केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल एवं न्यूक्लियर (सीबीआरएन) आपात स्थितियों से निपटने के लिए स्पष्ट एसओपी भी तैयार की जाएगी।

उन्होंने बाढ़, भूकंप और सीबीआरएन आपदाओं से निपटने के लिए जरूरी उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि केवल उपकरण खरीदना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका नियमित रखरखाव, संचालन की स्थिति और संबंधित कर्मचारियों का प्रशिक्षण भी जरूरी है। उपकरणों की कमी का आकलन कर एसडीआरएफ के माध्यम से कुंभ मेला-2027 के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी करने के निर्देश दिए गए।

मुख्य सचिव ने एटीएस को और मजबूत करने पर जोर देते हुए पर्वों और मेले के पीक टाइम को ध्यान में रखकर नियमित मॉक ड्रिल कराने को कहा। मॉक ड्रिल के दौरान वास्तविक आपात स्थिति जैसी परिस्थितियां बनाकर वैकल्पिक मार्गों और रिस्पांस मैकेनिज्म की प्रभावशीलता परखी जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी तैयारियों का मुख्य उद्देश्य आपात स्थिति में रिस्पांस टाइम को न्यूनतम करना होना चाहिए।

बैठक में एआई और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने कुंभ मेले के दौरान विभिन्न विभागों से मिलने वाली सूचनाओं और अनुभवों का व्यवस्थित डेटाबेस तैयार करने के निर्देश दिए, ताकि भविष्य में बड़े आयोजनों की तैयारियों में इसका उपयोग किया जा सके। इसके लिए आईटीडीए, आपदा प्रबंधन विभाग और अन्य संबंधित संस्थाओं से तकनीकी सहयोग लेने के साथ आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञों की सेवाएं लेने को भी कहा गया।

उन्होंने मेले के दौरान कम्युनिकेशन मैनेजमेंट को मजबूत करने के निर्देश दिए। अफवाहों पर रोक लगाने के लिए प्रभावी सूचना तंत्र विकसित करने तथा पीक टाइम में बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए मोबाइल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने को कहा गया। आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त मोबाइल टावर और अन्य संचार सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।

मुख्य सचिव ने कंट्रोल रूम को मजबूत करने और सभी संबंधित विभागों के बीच नियमित समन्वय बैठकें आयोजित कर तैयारियों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने को कहा। उन्होंने कहा कि कुंभ मेला-2027 बड़े स्तर का आयोजन है, इसलिए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करें और किसी भी संभावित आपदा से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहें।

बैठक में सचिव शैलेश बगौली, नितेश कुमार झा, विनय शंकर पाण्डेय, आयुक्त गढ़वाल आनन्द स्वरूप और मेलाधिकारी सोनिका समेत संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं जिलाधिकारी मौजूद रहे।


डीडीआरसी केंद्र का सचिव समाज कल्याण ने किया निरीक्षण, दिव्यांगजनों को समयबद्ध सेवाएं देने के निर्देश

दिव्यांगजनों के पुनर्वास और सहायक उपकरणों की व्यवस्था का लिया जायजा

देहरादून। समाज कल्याण विभाग की ओर से दिव्यांगजनों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं और पुनर्वास सेवाओं की स्थिति का जायजा लेने के लिए सचिव समाज कल्याण डॉ. श्रीधर बाबू अद्वांकी ने गुरुवार को जिला दिव्यांग एवं पुनर्वास केंद्र (डीडीआरसी) का निरीक्षण किया। उन्होंने गांधी शताब्दी जिला चिकित्सालय परिसर स्थित केंद्र की व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए अधिकारियों से विभिन्न सेवाओं की जानकारी ली।

निरीक्षण के दौरान सचिव ने दिव्यांगजनों के पंजीकरण, मूल्यांकन, परामर्श, पुनर्वास और सहायक उपकरण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया की समीक्षा की। उन्होंने केंद्र में रखे अभिलेखों और संचालित विभिन्न गतिविधियों का भी निरीक्षण किया। इस दौरान संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को व्यवस्थाओं में आवश्यक सुधार के निर्देश दिए गए।

योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाने पर जोर

सचिव ने कहा कि केंद्र में आने वाले दिव्यांगजनों को सरकार की योजनाओं और पुनर्वास सेवाओं का लाभ बिना अनावश्यक देरी के मिलना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पात्र लाभार्थियों तक विभागीय योजनाओं की पहुंच बढ़ाई जाए और सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और जरूरतमंद लोगों तक सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करना जरूरी है।

केंद्र को और दिव्यांगजन हितैषी बनाने के निर्देश

सचिव ने डीडीआरसी की व्यवस्थाओं को और मजबूत करने के साथ इसे अधिक दिव्यांगजन हितैषी बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने और दिव्यांगजनों को अधिक सुविधाजनक एवं प्रभावी सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल, एसीएमओ डॉ. चौहान, जिला दिव्यांग एवं पुनर्वास केंद्र के कर्मचारी तथा गांधी शताब्दी जिला चिकित्सालय के संबंधित अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।


बलथर में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 16 लाख के गांजे के साथ तीन तस्कर गिरफ्तार

बेतिया। बलथर थाना क्षेत्र में पुलिस ने मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए नेपाल से गांजे की खेप लेकर भारत में प्रवेश करने वाले तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने दो कारों की तलाशी के दौरान कुल 1 क्विंटल 61 किलो 29 ग्राम गांजा बरामद किया। बरामद गांजे को 17 बंडलों में छिपाकर रखा गया था।

पुलिस के अनुसार, गुरुवार सुबह सिकटा-बेतिया मुख्य मार्ग पर बलथर गैस गोदाम के पास वाहनों की जांच की जा रही थी। इसी दौरान नेपाल की तरफ से आ रही दो संदिग्ध कारों को रोककर तलाशी ली गई। जांच के दौरान दोनों वाहनों की डिक्की और सीट के नीचे छिपाए गए गांजे के पैकेट बरामद हुए।

गिरफ्तार आरोपितों की पहचान मैनाटांड़ थाना क्षेत्र के पीपरपांती गांव निवासी सबजाद मियां (28), भंगहा थाना क्षेत्र के नकरदेही निवासी रफी आलम (35) और सुग्रीव प्रसाद (32) के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, एक कार सबजाद मियां चला रहा था, जबकि दूसरी कार की ड्राइविंग रफी आलम कर रहा था। सुग्रीव प्रसाद भी इनमें से एक वाहन में सवार था।

थानाध्यक्ष ओमप्रकाश गुप्ता ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि दो कारों के जरिए नेपाल से गांजे की बड़ी खेप भारत लाई जा रही है। सूचना के आधार पर गैस गोदाम के पास विशेष वाहन जांच शुरू की गई। करीब 10 बजे दोनों कारों को रोककर तलाशी ली गई, जिसमें गांजे की खेप पकड़ी गई।

बीडीओ जय प्रकाश की मौजूदगी में दोनों वाहनों की तलाशी ली गई। पुलिस के अनुसार, जब्त गांजे की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 16 लाख 12 हजार 900 रुपये है। पुलिस ने तस्करी में इस्तेमाल दोनों कारों को भी जब्त कर लिया है।

पुलिस ने तीनों आरोपितों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पूछताछ के आधार पर पुलिस अब गांजे की खेप कहां से लाई गई थी और इसे किसे पहुंचाया जाना था, इसकी जानकारी जुटा रही है। तस्करी के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

कार्रवाई में थानाध्यक्ष ओमप्रकाश गुप्ता के साथ एसआई सुनील सिंह, शमसाद अहमद, डीएपी के जवान और गृह रक्षा वाहिनी के जवान शामिल रहे।


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