Saturday, July 18th, 2026

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जीएमएस रोड से कण्डोगल तक एमडीडीए का शिकंजा, दो अवैध निर्माण सील

Daily Archives: 18/07/2026

जीएमएस रोड से कण्डोगल तक एमडीडीए का शिकंजा, दो अवैध निर्माण सील

नियम तोड़ने वालों को सख्त चेतावनी

देहरादून। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने अवैध निर्माणों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो निर्माणों को सील कर दिया। प्राधिकरण की प्रवर्तन टीम ने स्वीकृत मानचित्र के विपरीत किए जा रहे बहुमंजिला निर्माण तथा बिना मानचित्र स्वीकृति के चल रहे व्यवसायिक निर्माण पर कार्रवाई की। एमडीडीए ने स्पष्ट किया है कि नियमानुसार अनुमति के बिना किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य स्वीकार नहीं किया जाएगा।

व्योमप्रस्थ कॉलोनी में बहुमंजिला निर्माण पर कार्रवाई
एमडीडीए की टीम ने जीएमएस रोड स्थित व्योमप्रस्थ कॉलोनी में संगीता गोयल और प्रवीन कुमार गर्ग द्वारा किए जा रहे बहुमंजिला निर्माण का निरीक्षण किया। जांच में पाया गया कि निर्माण कार्य स्वीकृत मानचित्र के विपरीत किया जा रहा है। नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर प्राधिकरण ने मौके पर ही निर्माण को सील कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि स्वीकृत मानचित्र से हटकर किए गए निर्माण न केवल विकास नियमों का उल्लंघन हैं, बल्कि भविष्य में क्षेत्रीय नियोजन और नागरिक सुविधाओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।

कण्डोगल में बिना स्वीकृति व्यवसायिक निर्माण सील
इसी क्रम में एमडीडीए की प्रवर्तन टीम ने धारकोट रोड, कण्डोगल थानों क्षेत्र में उमेद अली द्वारा किए जा रहे व्यवसायिक निर्माण का निरीक्षण किया। जांच में सामने आया कि निर्माण कार्य बिना किसी मानचित्र स्वीकृति के संचालित किया जा रहा था। इसके बाद प्राधिकरण ने नियमानुसार कार्रवाई करते हुए निर्माण स्थल को सील कर दिया। अधिकारियों ने संबंधित पक्ष को भविष्य में नियमों के अनुरूप ही कार्य करने के निर्देश भी दिए।

अवैध निर्माणों पर लगातार नजर
एमडीडीए का कहना है कि तेजी से हो रहे शहरी विस्तार के बीच अनधिकृत निर्माण और अवैध भूमि विकास की गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। प्राधिकरण की प्रवर्तन टीम नियमित रूप से विभिन्न क्षेत्रों का निरीक्षण कर रही है और शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार बिना स्वीकृति किए जा रहे निर्माण शहर के सुनियोजित विकास में बाधा उत्पन्न करते हैं, इसलिए ऐसे मामलों में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

निवेश से पहले वैधानिक स्थिति जांचने की अपील
प्राधिकरण ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी भूखंड की खरीद-फरोख्त या निर्माण कार्य शुरू करने से पहले उसकी वैधानिक स्थिति की जांच अवश्य कर लें। बिना स्वीकृति विकसित की जा रही कॉलोनियों या निर्माण परियोजनाओं में निवेश करने से भविष्य में आर्थिक और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

नियमों से समझौता नहीं : बंशीधर तिवारी
एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग और अनधिकृत निर्माण किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि नियोजित, सुरक्षित और टिकाऊ शहरी विकास सुनिश्चित करना एमडीडीए की प्राथमिकता है। हाल की कार्रवाई उन लोगों के लिए स्पष्ट संदेश है जो नियमों को दरकिनार कर निर्माण कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।

प्रवर्तन अभियान रहेगा जारी : मोहन सिंह बर्निया
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि प्रवर्तन टीम लगातार क्षेत्रीय निरीक्षण कर रही है। जहां भी बिना स्वीकृति निर्माण या भूमि विकास कार्य संचालित पाए जा रहे हैं, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि भवन निर्माण और भूमि विकास कार्य केवल निर्धारित मानकों और स्वीकृत नियमों के अनुरूप ही किए जाने चाहिए। प्राधिकरण का अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।


देहरादून के भविष्य की रूपरेखा तय करने में जनता की भागीदारी, दसवें दिन भी जारी रही जनसुनवाई

देहरादून। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा तैयार की जा रही देहरादून महायोजना-2041 को जनआकांक्षाओं के अनुरूप अंतिम स्वरूप देने के उद्देश्य से चलाया जा रहा जनसंवाद अभियान लगातार गति पकड़ रहा है। इसी क्रम में शनिवार को अभियान के दसवें दिन उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण (हुडा) कार्यालय, राजीव गांधी कॉम्प्लेक्स, तहसील चौक में जनसुनवाई आयोजित की गई। कार्यक्रम में संबंधित अधिकारी पूरे समय मौजूद रहे और नागरिकों द्वारा प्रस्तुत शिकायतों, सुझावों एवं आपत्तियों को विस्तार से सुना। लोगों ने भूमि उपयोग, यातायात, आधारभूत सुविधाओं, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों को अधिकारियों के समक्ष रखा।

राजधानी के भविष्य को लेकर बढ़ रही जनभागीदारी
एमडीडीए द्वारा आयोजित जनसुनवाई शिविरों में लगातार बढ़ रही नागरिक भागीदारी इस बात का संकेत है कि लोग अपने शहर के भविष्य को लेकर गंभीर हैं। दसवें दिन भी विभिन्न क्षेत्रों से आए नागरिकों, व्यापारिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और भू-स्वामियों ने महायोजना के विभिन्न पहलुओं पर अपनी राय रखी। प्रतिभागियों ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच देहरादून को सुनियोजित विकास की आवश्यकता है, ताकि आने वाले वर्षों में यातायात, आवास, जलापूर्ति और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़ी चुनौतियों का प्रभावी समाधान किया जा सके।

यातायात, पार्किंग और आधारभूत ढांचे पर विशेष जोर
जनसुनवाई के दौरान नागरिकों ने शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव और पार्किंग की समस्या को प्रमुख मुद्दे के रूप में उठाया। लोगों ने सुझाव दिया कि महायोजना में भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सड़क नेटवर्क का विस्तार, बहुस्तरीय पार्किंग, सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा वैकल्पिक यातायात मार्ग विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाए। साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई।

पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन की मांग
संवाद के दौरान पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया। नागरिकों ने हरित क्षेत्रों, जल स्रोतों, नदियों और खुले सार्वजनिक स्थलों के संरक्षण के लिए ठोस प्रावधान करने की मांग की। प्रतिभागियों का कहना था कि विकास कार्यों के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है। कई लोगों ने वर्षा जल निकासी, जलभराव की समस्या और भूजल संरक्षण से जुड़े सुझाव भी दिए।

स्थानीय जरूरतों के अनुरूप हो विकास की योजना
भू-स्वामियों और संस्थागत प्रतिनिधियों ने क्षेत्र विशेष की आवश्यकताओं के अनुरूप भूमि उपयोग प्रस्तावों और विकास नियंत्रण नियमों पर अपने विचार साझा किए। एमडीडीए की तकनीकी टीम ने सभी सुझावों एवं आपत्तियों को दर्ज करते हुए भरोसा दिलाया कि प्रत्येक बिंदु का विशेषज्ञ स्तर पर परीक्षण किया जाएगा और व्यवहारिक सुझावों को महायोजना में समुचित महत्व दिया जाएगा।

20 जुलाई को सेक्टर-11 की होगी जनसुनवाई
एमडीडीए द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार देहरादून महायोजना-2041 के अंतर्गत सेक्टर-11 की जनसुनवाई 20 जुलाई 2026 को राजकीय बालिका पॉलिटेक्निक कॉलेज, सुद्धोवाला, देहरादून (Government Girls Polytechnic College Sudhowala Dehradun)में आयोजित की जाएगी। प्राधिकरण ने संबंधित क्षेत्र के नागरिकों, संस्थाओं, भू-स्वामियों एवं हितधारकों से निर्धारित तिथि और समय पर उपस्थित होकर अपने सुझाव एवं आपत्तियां दर्ज कराने की अपील की है। अधिकारियों का मानना है कि व्यापक जनभागीदारी से तैयार होने वाली महायोजना राजधानी के संतुलित, सुव्यवस्थित और सतत विकास की मजबूत आधारशिला बनेगी।

जनभागीदारी से मजबूत होगी महायोजना : बंशीधर तिवारी
एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि देहरादून महायोजना-2041 केवल एक विकास दस्तावेज नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए राजधानी की व्यापक विकास दृष्टि है। उन्होंने कहा कि नागरिकों से प्राप्त सुझाव योजना को अधिक व्यावहारिक, प्रभावी और जनहितकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनका कहना था कि जनभागीदारी ही किसी भी शहर के सुनियोजित विकास की सबसे बड़ी ताकत होती है।

हर सुझाव का होगा तकनीकी और विधिक परीक्षण : मोहन सिंह बर्निया
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि जनसुनवाई के दौरान प्राप्त सभी सुझावों और आपत्तियों का व्यवस्थित अभिलेखीकरण किया जा रहा है। विशेषज्ञों द्वारा उनका तकनीकी एवं विधिक परीक्षण किया जाएगा, ताकि अंतिम महायोजना विकास, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक सुविधाओं के बीच संतुलन स्थापित करते हुए भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा कर सके।


अंकिता भंडारी मामले में आंदोलन तेज करने की चेतावनी, संघर्ष मंच ने सरकार और CBI पर उठाए सवाल

देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय मिलने में हो रही देरी को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों ने आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच ने शनिवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि यदि CBI जांच में तेजी नहीं लाई गई और हाई कोर्ट में दोषियों की जमानत का प्रभावी विरोध नहीं किया गया तो पूरे उत्तराखंड में व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।

मंच के प्रतिनिधियों ने राज्य सरकार से मांग की कि अदालत में पूरी मजबूती से पैरवी कर यह सुनिश्चित किया जाए कि दोषियों की सजा में किसी तरह की कमी न हो और उन्हें जमानत भी न मिले। साथ ही CBI जांच को जल्द पूरा कर मामले के हर पहलू, विशेषकर कथित VIP एंगल, की निष्पक्ष जांच करने की मांग दोहराई गई।

पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए निर्मला बिष्ट ने कहा कि 20 जुलाई को न्यायालय में मामले की सुनवाई प्रस्तावित है, जिसमें दोषियों की ओर से सजा कम करने और जमानत की मांग की जा सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस सुनवाई में प्रभावी पक्ष रखना चाहिए ताकि दोषियों को किसी प्रकार की राहत न मिले। उन्होंने रिजॉर्ट संस्कृति, नशे के बढ़ते कारोबार और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई।

सुजाता पॉल ने CBI जांच की गति पर सवाल उठाते हुए कहा कि कथित VIP एंगल से जुड़े जिन नामों की चर्चा सार्वजनिक रूप से हुई है, उनसे अब तक पूछताछ नहीं होना गंभीर विषय है। उन्होंने बुलडोजर कार्रवाई के दौरान साक्ष्य नष्ट किए जाने के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए निष्पक्ष जांच को लेकर भी सवाल उठाए और राजनीतिक जिम्मेदारी तय करने की मांग की।

मोहित डिमरी ने कहा कि CBI को जांच की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए, क्योंकि लंबे समय से मामले की प्रगति को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

उमा भट्ट ने कहा कि 18 सितंबर को अंकिता भंडारी हत्याकांड के चार वर्ष पूरे हो जाएंगे। यदि उससे पहले जांच पूरी नहीं हुई और कथित VIP एंगल सहित सभी पहलुओं पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।

हरिओम पाली ने सरकार से पारदर्शिता के साथ न्याय सुनिश्चित करने की मांग करते हुए कहा कि किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। वहीं विमला कोहली ने कहा कि अंकिता भंडारी के परिवार को न्याय दिलाना पूरे समाज की जिम्मेदारी है और सरकार को इस मामले में जवाबदेही निभानी होगी।

इस दौरान त्रिलोचन भट्ट, मनीष केड़ियाल, एन. राघवेंद्र समेत अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के कई सदस्य और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।


ऋषिकेश में हुई चोरी की घटनाओं का दून पुलिस ने किया खुलासा, दो आरोपी गिरफ्तार

अभियुक्तों के कब्जे से घटना मे चोरी की गई नगदी व अन्य सामान हुआ बरामद

देहरादून। ऋषिकेश में अलग-अलग दुकानों में हुई चोरी की दो घटनाओं का पुलिस ने खुलासा करते हुए हरियाणा के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से चोरी की गई नकदी और महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी नशे की लत के चलते वारदातों को अंजाम देते थे, जबकि मामले में शामिल उनके एक अन्य साथी की तलाश जारी है।

पुलिस के मुताबिक पहली घटना 12 अप्रैल 2026 को हरिद्वार रोड स्थित कृष्णा मिष्ठान भंडार में हुई थी, जहां दुकान का शटर तोड़कर गल्ले में रखी नकदी चोरी कर ली गई थी। इसके बाद 23 जून 2026 को देहरादून रोड स्थित न्यू कैलाश मेडिकल हॉल का ताला तोड़कर नकदी और महत्वपूर्ण दस्तावेज चोरी कर लिए गए थे। दोनों मामलों में कोतवाली ऋषिकेश में मुकदमे दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।

घटनाओं की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून के निर्देश पर विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया। टीम ने घटनास्थलों का निरीक्षण कर आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया और पूर्व में चोरी के मामलों में शामिल संदिग्धों का सत्यापन किया।

लगातार जांच के दौरान 17/18 जुलाई की रात पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर खांड गांव जाने वाले मार्ग स्थित अंडरपास के पास से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विवेक गोयल (28 वर्ष) निवासी सोनीपत, हरियाणा और विक्रम (20 वर्ष) निवासी सोनीपत, हरियाणा के रूप में हुई है।

पूछताछ में दोनों आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे नशे के आदी हैं और अपने एक अन्य साथी के साथ मिलकर दोनों चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया था। चोरी से मिली अधिकांश रकम उन्होंने नशे और अन्य व्यक्तिगत जरूरतों पर खर्च कर दी। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 2,200 रुपये नकद और चोरी किए गए महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं।

पुलिस का कहना है कि मामले में फरार तीसरे आरोपी की तलाश की जा रही है। जल्द ही उसे भी गिरफ्तार कर पूरे गिरोह का पर्दाफाश किया जाएगा।


सरकार का बड़ा फैसला- देहरादून-ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना में फिलहाल नहीं कटेंगे पेड़

पहले होगा जनसंवाद फिर आगे बढ़ेगा काम

देहरादून। देहरादून–ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना को लेकर पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों की ओर से उठाई जा रही चिंताओं के बीच राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी पक्षों के साथ सहमति और विश्वास का माहौल बनने तक परियोजना के दायरे में आने वाले पेड़ों की कटाई पर फिलहाल रोक रहेगी।

सरकार ने कहा कि यह परियोजना भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की एक महत्वपूर्ण अवसंरचना योजना है, जिस पर उच्च न्यायालय के निर्देशों और सभी आवश्यक वैधानिक एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियों के अनुरूप कार्य किया जा रहा है। परियोजना में वन्यजीव संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए करीब 3.5 किलोमीटर लंबे हाथी अंडरपास और छोटे वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए विशेष कल्वर्ट का भी प्रावधान किया गया है, ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष और सड़क दुर्घटनाओं में वन्यजीवों की मौत की घटनाओं को कम किया जा सके।

सरकार ने दोहराया कि प्रदेश के विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और जनभावनाओं का सम्मान भी उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रमुख सचिव और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, पर्यावरण विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों के साथ दोबारा व्यापक संवाद स्थापित करें और सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार करें।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि परियोजना से जुड़ी आगे की सभी कार्रवाई उच्च न्यायालय के निर्देशों और निर्णयों के अनुरूप ही की जाएगी। साथ ही, जब तक सभी पक्षों के बीच संतोषजनक सहमति नहीं बन जाती, तब तक पेड़ों की कटाई की प्रक्रिया स्थगित रहेगी।

राज्य सरकार का कहना है कि उत्तराखंड की प्राकृतिक धरोहर, जनता की भावनाएं और विकास—तीनों उसके लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। इसी सिद्धांत के तहत संवाद, सहमति और व्यापक जनहित को आधार बनाकर परियोजना पर आगे निर्णय लिया जाएगा।


रामनगर-देहरादून एक्सप्रेस रेल सेवा का शुभारंभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वर्चुअल माध्यम से किया संयुक्त फ्लैग ऑफ

मुख्यमंत्री बोले- नई रेल सेवा कुमाऊं-गढ़वाल के बीच विकास की नई जीवनरेखा बनेगी

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को वर्चुअल माध्यम से रामनगर-देहरादून एक्सप्रेस रेल सेवा का संयुक्त रूप से फ्लैग ऑफ कर नियमित संचालन का शुभारंभ किया। यह रेल सप्ताह में दो बार चलेगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नई रेल सेवा उत्तराखंड की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह केवल एक नई ट्रेन नहीं, बल्कि कुमाऊं और गढ़वाल मंडलों के बीच विकास, संपर्क और अवसरों की नई जीवनरेखा सिद्ध होगी।

मुख्यमंत्री ने इस महत्वपूर्ण सौगात के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का प्रदेशवासियों की ओर से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तराखंड में रेलवे अवसंरचना का तेजी से विस्तार हो रहा है। उन्होंने कहा कि रामनगर से देहरादून तक संचालित होने वाली यह रेल सेवा काशीपुर, रोशनपुर, पिपलसाना, मुरादाबाद, नजीबाबाद और हरिद्वार होते हुए चलेगी, जिससे कुमाऊं और गढ़वाल के साथ-साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बड़े क्षेत्र से भी प्रदेश की सीधी और सुगम रेल कनेक्टिविटी स्थापित होगी। इससे यात्रियों, विद्यार्थियों, व्यापारियों, कर्मचारियों तथा पर्यटकों को सुरक्षित, सुविधाजनक और समयबद्ध यात्रा का लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय रेलवे आधुनिकता के नए युग में प्रवेश कर चुकी है। रेलवे सुरक्षा, गति, तकनीकी उन्नयन और यात्री सुविधाओं के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन हुए हैं। वंदे भारत और नमो भारत जैसी अत्याधुनिक ‘मेड इन इंडिया’ ट्रेनों ने भारत की तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता को नई पहचान दी है। उन्होंने कहा कि रेलवे अब हरित एवं अत्याधुनिक तकनीकों की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तराखंड की महत्वाकांक्षी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का कार्य अंतिम चरण में है। यह परियोजना राज्य के सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक तथा पर्यटन विकास को नई गति प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को दो वंदे भारत ट्रेनों की सौगात मिल चुकी है तथा वर्ष 2026-27 में प्रदेश को रेलवे अवसंरचना विकास के लिए रिकॉर्ड 4,769 करोड़ रुपये का रेल बजट प्राप्त हुआ है। वर्तमान में राज्य में लगभग 39 हजार करोड़ रुपये की विभिन्न रेलवे परियोजनाओं पर कार्य प्रगति पर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से उत्तराखंड में सड़क, रेल, स्वास्थ्य, शिक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी तथा आधारभूत संरचना के क्षेत्र में तेजी से विकास कार्य हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार के प्रयासों से विकास की गति दोगुनी हुई है और राज्य सरकार उत्तराखंड को देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

केंद्रीय रेल मंत्री बोले- यात्रियों की संख्या बढ़ने पर रामनगर-देहरादून एक्सप्रेस का संचालन प्रतिदिन किया जाएगा

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय रेल देश के सर्वांगीण विकास का मजबूत आधार बन रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में रेल संपर्क को सुदृढ़ करने के लिए केंद्र सरकार निरंतर कार्य कर रही है और नई रेल सेवाएं प्रदेश के आर्थिक विकास, पर्यटन और जनसुविधाओं को नई गति प्रदान करेंगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि रामनगर-देहरादून एक्सप्रेस क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करने के साथ-साथ आम नागरिकों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी। अगर यात्रियों की संख्या बढ़ेगी तो इसे प्रतिदिन चलाया जायेगा उन्होंने कहा कि यह एक्सप्रेस गढ़वाल और कुमाऊं के लिए सेतु का कार्य करेगी।

उत्तराखण्ड में रेलवे के विस्तार के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों की सराहना करते हुए केन्द्रीय रेल मंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड से देश के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने के लिए प्रमुख नई और विस्तसारित 20 रेल सेवाएं शुरू की गई। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के 11 रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। उन्होंने राज्य में रेलवे के विस्तार के लिए पूरा सहयोग देने के लिए मुख्यमंत्री का आभार भी व्यक्त किया।

रेल मंत्रालय द्वारा वर्ष 2023 से अब तक उत्तराखंड से देश के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने के लिए शुरू की गई प्रमुख नई/विस्तारित नियमित रेल सेवाओं की सूची-

1. देहरादून – आनंद विहार टर्मिनल वंदे भारत एक्सप्रेस
2. देहरादून – लखनऊ वंदे भारत एक्सप्रेस
3. योग नगरी ऋषिकेश – प्रयागराज एक्सप्रेस
4. योग नगरी ऋषिकेश – वीरभूमि (मालदा टाउन) एक्सप्रेस
5. योग नगरी ऋषिकेश – यशवंतपुर (बेंगलुरु) एक्सप्रेस
6. देहरादून – बनारस एक्सप्रेस
7. देहरादून – सुभेदारगंज (प्रयागराज) एक्सप्रेस
8. हरिद्वार – गोरखपुर एक्सप्रेस
9. हरिद्वार – अमृतसर एक्सप्रेस (विस्तारित/नई सेवा)
10. टनकपुर – दिल्ली (पूर्णागिरि जनशताब्दी सेवा का विस्तार/सुदृढ़ीकरण)
11. लालकुआँ – राजकोट एक्सप्रेस (विस्तारित सेवा)
12. लालकुआँ – कोलकाता एक्सप्रेस
13. काठगोदाम – जैसलमेर एक्सप्रेस
14. काठगोदाम – मुंबई (बांद्रा टर्मिनस) एक्सप्रेस (विस्तारित सेवा)
15. देहरादून – कोटा एक्सप्रेस (सुधारित/विस्तारित सेवा)
16. हरिद्वार – लोकमान्य तिलक टर्मिनस विशेष सेवा (बाद में नियमित संचालन)
17. लालकुआँ – किशनगंज एक्सप्रेस (विशेष से नियमित संचालन की दिशा में सेवा)
18. उत्तराखंड से विभिन्न राज्यों के लिए नई मौसमी/विशेष सेवाओं में से एक को बाद में नियमित सेवा के रूप में शामिल किया गया।
19. टनकपुर से नांदेड़ साप्ताहिक एक्सप्रेस।
20. रामनगर- देहरादून एक्सप्रेस रेल सेवा।

इस अवसर पर वर्चुअल माध्यम से हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी, विधायक दीवान सिंह बिष्ट, अरविंद पांडे और रेलवे के अधिकारी मौजूद थे।


स्कूल पहुंचने से पहले प्रधानाचार्य पर जानलेवा हमला, इलाज के दौरान तोड़ा दम

बागेश्वर।  शनिवार सुबह एक सरकारी विद्यालय के प्रधानाचार्य की हत्या की घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी। राजकीय इंटर कॉलेज भटखोला के प्रधानाचार्य दयानंद टम्टा (56) पर स्कूल जाते समय धारदार हथियार से हमला किया गया। गंभीर रूप से घायल प्रधानाचार्य को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

जानकारी के मुताबिक, दयानंद टम्टा प्रतिदिन की तरह सुबह अपने घर से विद्यालय के लिए निकले थे। मुख्य सड़क तक वाहन से पहुंचने के बाद वह पैदल स्कूल की ओर बढ़ रहे थे। इसी दौरान रास्ते में पहले से मौजूद एक हमलावर ने अचानक उन पर धारदार हथियार से ताबड़तोड़ वार कर दिए। अचानक हुए हमले से वह गंभीर रूप से घायल होकर मौके पर ही गिर पड़े।

घटना की सूचना मिलते ही आसपास के लोग और परिजन मौके पर पहुंचे और उन्हें तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकों ने जांच के बाद बताया कि अत्यधिक रक्तस्राव और गंभीर चोटों के कारण उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहनता से जांच की जा रही है और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग टीमें गठित कर संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।

इस घटना के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों, शिक्षकों और स्थानीय लोगों में शोक और आक्रोश का माहौल है। पुलिस का दावा है कि घटना के पीछे की वजह का जल्द खुलासा करते हुए आरोपी को कानून के शिकंजे में लिया जाएगा।


सिर्फ मोटापा नहीं, कमजोर मांसपेशियां भी बढ़ाती हैं डायबिटीज का खतरा! नए अध्ययन में बड़ा खुलासा

14 साल तक 4.79 लाख लोगों पर हुई रिसर्च, शरीर में ज्यादा फैट और कमजोर मांसपेशियों वाले लोगों में टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम सबसे अधिक

क्या डायबिटीज का खतरा सिर्फ बढ़ते वजन से जुड़ा है? एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने इस धारणा को चुनौती दी है। शोध के अनुसार, केवल शरीर में अतिरिक्त चर्बी (फैट) ही नहीं, बल्कि कमजोर मांसपेशियां (Poor Muscle Health) भी टाइप-2 डायबिटीज का खतरा काफी बढ़ा सकती हैं।

अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों के शरीर में अधिक वसा (Obesity) के साथ-साथ मांसपेशियों की ताकत और कार्यक्षमता भी कम थी, उनमें स्वस्थ शरीर संरचना वाले लोगों की तुलना में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा साढ़े तीन गुना से अधिक था।

यह शोध प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल Diabetes Care में प्रकाशित हुआ है।

क्या है सार्कोपेनिक ओबेसिटी?

शोध में जिस स्थिति का सबसे ज्यादा उल्लेख किया गया, उसे सार्कोपेनिक ओबेसिटी (Sarcopenic Obesity) कहा जाता है। इसका मतलब है कि व्यक्ति के शरीर में फैट अधिक हो और साथ ही मांसपेशियों का द्रव्यमान, ताकत या कार्यक्षमता कम हो।

शोधकर्ताओं के मुताबिक—

  • सार्कोपेनिक ओबेसिटी वाले लोगों में सिर्फ मोटापे वाले लोगों की तुलना में डायबिटीज का खतरा 19% अधिक पाया गया।
  • वहीं, केवल मांसपेशियों की कमजोरी (सार्कोपेनिया) वाले लोगों की तुलना में यह जोखिम 91% अधिक था।

14 साल तक चला अध्ययन

ऑस्ट्रेलिया की कर्टिन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यूके बायोबैंक के 4,79,607 ऐसे लोगों के स्वास्थ्य डेटा का विश्लेषण किया, जिन्हें अध्ययन की शुरुआत में डायबिटीज नहीं थी।

करीब 14 वर्षों तक चले इस अध्ययन के दौरान लगभग 32,950 प्रतिभागियों को टाइप-2 डायबिटीज हो गई।

हर 100 में 15 लोग हुए डायबिटीज के शिकार

अध्ययन के अनुसार—

  • सार्कोपेनिक ओबेसिटी वाले लगभग 15% लोगों को 10 वर्षों के भीतर टाइप-2 डायबिटीज हुई।
  • केवल मोटापे वाले लोगों में यह आंकड़ा करीब 11% रहा।
  • जबकि जिन लोगों में न मोटापा था और न मांसपेशियों की कमजोरी, उनमें यह दर केवल 3% रही।

शोध में यह संबंध विशेष रूप से महिलाओं और 60 वर्ष से कम उम्र के लोगों में अधिक मजबूत पाया गया।

विशेषज्ञों ने क्या कहा?

अध्ययन के मुख्य लेखक झोंगयांग गुआन के अनुसार, यह शोध इस धारणा को बदलता है कि डायबिटीज का जोखिम केवल वजन पर निर्भर करता है। उनका कहना है कि शरीर की मांसपेशियों की सेहत भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

वहीं, अध्ययन के वरिष्ठ लेखक प्रोफेसर मारियो सिएर्वो ने कहा कि डायबिटीज से बचाव के लिए केवल वजन घटाने पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। शरीर में फैट कम करने के साथ-साथ मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखना भी जरूरी है।

डायबिटीज से बचाव के लिए क्या करें?

विशेषज्ञों के अनुसार टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को कम करने के लिए—

  • नियमित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और शारीरिक गतिविधि करें।
  • पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन युक्त संतुलित आहार लें।
  • शरीर में अतिरिक्त चर्बी नियंत्रित रखें।
  • नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं।
  • यदि परिवार में डायबिटीज का इतिहास है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच कराएं।

नोट: यह अध्ययन दो कारकों—शरीर में फैट और मांसपेशियों की सेहत—के बीच संबंध दिखाता है। यह यह साबित नहीं करता कि मांसपेशियों की कमजोरी अकेले डायबिटीज का कारण बनती है, लेकिन यह जोखिम का एक महत्वपूर्ण संकेतक हो सकती है।


प्रेग्नेंसी में दादी-नानी की हर सलाह अंधविश्वास नहीं! इन 6 पारंपरिक बातों को साइंस भी मानता है सही

घी खाना, तनाव से बचना, बच्चे से बातें करना और पर्याप्त आराम जैसी सलाह के पीछे छिपे हैं वैज्ञानिक कारण

प्रेग्नेंसी के दौरान घर के बड़े-बुजुर्ग, खासकर दादी-नानी, कई तरह की सलाह देती हैं। आधुनिक दौर में इन्हें अक्सर पुराने जमाने की बातें या अंधविश्वास समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार इनमें से कई सलाह ऐसी हैं, जिनके पीछे ठोस वैज्ञानिक आधार मौजूद है।

डॉक्टरों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान खानपान, मानसिक स्थिति और दैनिक आदतें मां और गर्भ में पल रहे शिशु, दोनों के स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं। आइए जानते हैं प्रेग्नेंसी से जुड़ी ऐसी ही कुछ पारंपरिक सलाह, जिन्हें विज्ञान भी सही मानता है।

1. सीमित मात्रा में घी खाना फायदेमंद हो सकता है

गर्भावस्था में घी खाने की सलाह वर्षों से दी जाती रही है। वैज्ञानिक दृष्टि से घी में मौजूद कुछ फैटी एसिड, जैसे ब्यूटिरिक एसिड, शरीर के लिए उपयोगी हो सकते हैं। यह पाचन तंत्र के स्वास्थ्य में मदद करता है और संतुलित आहार का हिस्सा बन सकता है।

हालांकि, विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि घी का सेवन संतुलित मात्रा में ही करें। अधिक मात्रा में घी खाने से अनावश्यक वजन बढ़ सकता है। इसलिए अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लेना बेहतर रहता है।

2. तनाव और गुस्से से बचना जरूरी

दादी-नानी अक्सर गर्भवती महिलाओं को गुस्सा न करने और खुश रहने की सलाह देती हैं। विज्ञान भी बताता है कि लंबे समय तक रहने वाला तनाव शरीर में कोर्टिसोल जैसे तनाव हार्मोन का स्तर बढ़ा सकता है, जिसका असर मां और गर्भस्थ शिशु दोनों पर पड़ सकता है।

इसलिए गर्भावस्था के दौरान मानसिक शांति, पर्याप्त नींद और सकारात्मक माहौल बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।

3. बच्चे से बातें करें, गाना गाएं और पढ़ें

गर्भावस्था के मध्य चरण में भ्रूण की सुनने की क्षमता विकसित होने लगती है। ऐसे में मां का बच्चे से बातें करना, मधुर संगीत सुनना या किताब पढ़ना भावनात्मक जुड़ाव बढ़ाने में मदद कर सकता है।

हालांकि यह कहना कि इससे बच्चे की बुद्धिमत्ता निश्चित रूप से बढ़ जाएगी, वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं है। लेकिन मां के तनाव को कम करने और सकारात्मक वातावरण बनाने में यह लाभदायक माना जाता है।

4. अकेले खाना खाने से बचें

परिवार के साथ बैठकर भोजन करना केवल एक सामाजिक परंपरा नहीं है। शोध बताते हैं कि भावनात्मक सहयोग और सकारात्मक माहौल भोजन की आदतों, मानसिक स्वास्थ्य और तनाव के स्तर पर अच्छा प्रभाव डाल सकते हैं।

गर्भवती महिला को परिवार का साथ और भावनात्मक सहयोग मिलना उसकी मानसिक सेहत के लिए भी फायदेमंद हो सकता है।

5. पर्याप्त आराम करें

गर्भावस्था के दौरान शरीर में कई शारीरिक और हार्मोनल बदलाव होते हैं। इसलिए पर्याप्त आराम और अच्छी नींद बेहद जरूरी है।

विशेषज्ञों के अनुसार आराम करने से शरीर को रिकवरी का समय मिलता है और मानसिक तनाव भी कम होता है। हालांकि पूरी तरह निष्क्रिय रहने के बजाय डॉक्टर की सलाह के अनुसार हल्की-फुल्की शारीरिक गतिविधि भी जरूरी हो सकती है।

6. हल्की तेल मालिश से मिल सकता है आराम

बालों, पैरों या शरीर की हल्की मालिश मांसपेशियों के तनाव को कम करने, आराम महसूस कराने और तनाव घटाने में मदद कर सकती है। हल्का स्पर्श शरीर की रिलैक्सेशन प्रतिक्रिया को सक्रिय कर सकता है।

यदि गर्भावस्था में कोई चिकित्सीय जटिलता हो या हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी हो, तो मालिश कराने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

क्या रखें ध्यान?

विशेषज्ञों का मानना है कि दादी-नानी की कई पारंपरिक सलाह अनुभव पर आधारित होती हैं और उनमें से कुछ का वैज्ञानिक समर्थन भी मिलता है। फिर भी हर गर्भावस्था अलग होती है। इसलिए किसी भी खानपान, दवा, सप्लीमेंट या घरेलू उपाय को अपनाने से पहले अपने स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ (गायनेकोलॉजिस्ट) से सलाह जरूर लें।


महान ऑलराउंडर सर गारफील्ड सोबर्स का हुआ निधन, 89 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

खेल जगत में शोक की लहर

नई दिल्ली। विश्व क्रिकेट के सबसे महान ऑलराउंडरों में शुमार वेस्टइंडीज के दिग्गज क्रिकेटर सर गारफील्ड (गैरी) सोबर्स का 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत में शोक की लहर है। 28 जुलाई को वह अपना 90वां जन्मदिन मनाने वाले थे, लेकिन उससे पहले ही उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। क्रिकेट वेस्टइंडीज ने भी आधिकारिक तौर पर उनके निधन की पुष्टि करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।

सर गैरी सोबर्स को क्रिकेट इतिहास का सबसे संपूर्ण ऑलराउंडर माना जाता है। उन्होंने अपने शानदार करियर में बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग—तीनों क्षेत्रों में असाधारण प्रदर्शन कर नई मिसाल कायम की। उनकी बहुमुखी प्रतिभा और मैच जिताने की क्षमता ने उन्हें क्रिकेट इतिहास के महानतम खिलाड़ियों में शामिल किया।

सोबर्स ने वेस्टइंडीज के लिए 93 टेस्ट मैचों में 8,032 रन बनाए। इस दौरान उनका बल्लेबाजी औसत 57.78 रहा। उन्होंने 26 शतक, 30 अर्धशतक, दो दोहरे शतक और एक तिहरा शतक जड़ा। उनका नाबाद 365 रन का स्कोर लंबे समय तक टेस्ट क्रिकेट का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर रहा।

बल्लेबाजी के साथ-साथ गेंदबाजी में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 235 विकेट अपने नाम किए। सर गैरी सोबर्स की सबसे बड़ी विशेषता उनकी बहुमुखी गेंदबाजी थी। वह जरूरत के अनुसार लेफ्ट आर्म फास्ट-मीडियम, लेफ्ट आर्म ऑर्थोडॉक्स स्पिन और लेफ्ट आर्म अनऑर्थोडॉक्स (चाइनामैन) स्पिन गेंदबाजी करने में सक्षम थे। यही गुण उन्हें क्रिकेट इतिहास के सबसे बेहतरीन ऑलराउंडरों में अलग पहचान दिलाता है।

सोबर्स ने अपने करियर में वेस्टइंडीज की कप्तानी भी की और कैरेबियाई क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। क्रिकेट में उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें ‘नाइटहुड’ की उपाधि से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें आईसीसी हॉल ऑफ फेम और विजडन क्रिकेटर्स ऑफ द सेंचुरी जैसी प्रतिष्ठित उपलब्धियों से भी नवाजा गया।

हालांकि उन्होंने केवल एक वनडे अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेला, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में उनका योगदान आज भी स्वर्णिम अध्याय माना जाता है। कई क्रिकेट विशेषज्ञ आज भी सर गैरी सोबर्स को दुनिया का सबसे महान ऑलराउंडर मानते हैं।

सर गारफील्ड सोबर्स के निधन के साथ क्रिकेट जगत ने एक ऐसे महान खिलाड़ी को खो दिया है, जिनकी उपलब्धियां और विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी।


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