Tuesday, January 20th, 2026

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शिक्षा विभाग में पदोन्नति के बाद अधिकारियों को मिली नई जिम्मेदारी

Monthly Archives: January 2026

शिक्षा विभाग में पदोन्नति के बाद अधिकारियों को मिली नई जिम्मेदारी

संयुक्त निदेशक पद पर 5 तो उप निदेशक पद पर 4 अधिकारी पदोन्नत

विभागीय मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने तैनाती प्रस्ताव को दी मंजूरी

देहरादून। विद्यालयी शिक्षा विभाग में उप निदेशक के पद पर कार्यरत पांच अधिकारियों को पदोन्नति के उपरांत संयुक्त निदेशक पद पर नई जिम्मेदारी दी गई है। इसी प्रकार खण्ड शिक्षा अधिकारी से पदोन्नत हुये चार अधिकारियों को उप निदेशक पद पर नई तैनाती दी गई है। जबकि विभन्न जनपदों में तैनात संयुक्त निदेशक स्तर के अधिकारियों को विभिन्न रिक्त पदों के सापेक्ष अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। इस संबंध में शासन के तैनाती प्रस्ताव पर विभागीय मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने संस्तुति दे दी है।

शिक्षा विभाग में पिछले दिनों उप निदेशक स्तर के आधा दर्जन से अधिक अधिकारियों को डीपीसी के उपंरात पदोन्नति दी गई थी। जिनमें अत्रेश सयाना, आशुतोष भण्डरी, नागेन्द्र बत्र्वाल, कमला बड़वाल, हरक राम कोहली शामिल थे। पदोन्नति के बाद शासन ने सभी को नई तैनाती दे दी है। जिसमें अत्रेय सयाना को मुख्य शिक्षा अधिकारी पौड़ी, अशुतोष भण्डारी व नागेन्द्र बत्र्वाल को संयुक्त निदेशक (प्राथमिक) शिक्षा निदेशालय, कमला बड़वाल को मुख्य शिक्षा अधिकारी टिहरी व हरक राम कोहली को मुख्य शिक्षा अधिकारी अल्मोड़ा की जिम्मेदारी दी है। जबकि प्राचार्य डायट गोपेश्वर आकाश श्रीवास्तव को मुख्य शिक्षा अधिकारी चमोली का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इसी प्रकार प्राचार्य डायट रूद्रप्रयाग सी.पी. रतू़ड़ी को सचिव उत्तराखण्ड विद्यालयी शिक्षा परिषद रामनगर, तरूण पंत जिला शिक्षा अधिकारी (प्राथमिक) पिथौरागढ़ को मुख्य शिक्षा अधिकारी पिथौरागढ़ व अमित कोठियाल जिला शिक्षा अधिकारी (प्राथमिक) उत्तरकाशी को मुख्य शिक्षा अधिकारी उत्तरकाशी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

वहीं खण्ड शिक्षा अधिकारी के पद से पदोन्नत चार अधिकारियों को उप निदेशक पद पर नई तैनाती दी गई है। जिसके तहत नरेश कुमार को जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) हरिद्वार के पद पर तैनाती के साथ ही मुख्य शिक्षा अधिकारी, हरिद्वार का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। जबकि अमित कुमार को जिला शिक्षा अधिकारी (प्राथमिक) हरिद्वार, हिमांशु नौगांई को जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) पिथौरागढ़, तथा अंशुल बिष्ट को जिला शिक्षा अधिकारी (प्राथमिक) पौड़ी का दायित्व सौंपा गया है। विभागीय मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने शासन द्वारा प्रस्तुत अधिकारियों के तैनाती प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है साथ ही उन्होंने तैनाती आदेश शीघ्र जारी कर के निर्देश भी अधिकारियों को दिए हैं।

बयान-
शिक्षा विभाग में अधिकारियों एवं शिक्षकों को ससमय पदोन्नति देने के निर्देश दिये गये हैं। जिसके तहत हाल ही में सम्पन्न डीपीसी के उपरांत आधा दर्जन से अधिक अधिकारियों को पदोन्नति के बाद नई जिम्मेदारी दी गई है। इन अधिकारियों की तैनाती से विभागीय कार्यों को गति मिलने के साथ ही शिक्षा व्यवस्था भी मजबूत होगी। – डाॅ. धन सिंह रावत, विद्यालयी शिक्षा मंत्री, उत्तराखण्ड।


ओलंपिक पदक विजेता साइना नेहवाल ने बैडमिंटन को कहा अलविदा

साइना नेहवाल ने 2023 में खेला था आखिरी मुकाबला

नई दिल्ली। भारतीय बैडमिंटन को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने वाली दिग्गज खिलाड़ी और ओलंपिक पदक विजेता साइना नेहवाल ने प्रतिस्पर्धी खेल से संन्यास की औपचारिक घोषणा कर दी है। लंबे समय से गंभीर घुटने की समस्या से जूझ रहीं साइना ने साफ किया कि अब उनका शरीर अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल की कठोर शारीरिक चुनौतियों के लिए तैयार नहीं है।

साइना ने आखिरी बार वर्ष 2023 में सिंगापुर ओपन में प्रतिस्पर्धी मुकाबला खेला था। हालांकि, उस समय उन्होंने संन्यास की घोषणा नहीं की थी। हाल ही में एक पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान उन्होंने अपने फैसले को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि वह दो साल पहले ही खेल से दूर हो चुकी थीं और उन्हें लगा कि अलग से संन्यास का ऐलान करना जरूरी नहीं है।

पूर्व विश्व नंबर एक खिलाड़ी ने बताया कि उनके घुटने की कार्टिलेज पूरी तरह घिस चुकी है और उन्हें आर्थराइटिस की समस्या हो गई है। डॉक्टरों की सलाह के बाद उन्होंने यह समझ लिया था कि अब लंबे समय तक कड़ी ट्रेनिंग और तेज मुकाबले खेल पाना संभव नहीं है। साइना के अनुसार, पहले जहां वह दिन में आठ से नौ घंटे तक अभ्यास कर लेती थीं, वहीं बाद में एक-दो घंटे की ट्रेनिंग में ही घुटनों में सूजन आ जाती थी।

साइना ने यह भी कहा कि खिलाड़ी को खुद यह समझना चाहिए कि कब रुकना है। अगर शरीर साथ न दे, तो खेल से सम्मानजनक विदाई लेना ही बेहतर होता है। उन्होंने अपने माता-पिता और कोच को भी पहले ही इस फैसले से अवगत करा दिया था।

गौरतलब है कि साइना के करियर पर रियो ओलंपिक 2016 के दौरान लगी घुटने की चोट का गहरा असर पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने जबरदस्त वापसी करते हुए 2017 विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक और 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता। हालांकि, लगातार उभरती चोटों ने उनके करियर को सीमित कर दिया। वर्ष 2024 में साइना ने सार्वजनिक रूप से घुटनों में आर्थराइटिस और कार्टिलेज खत्म होने की जानकारी साझा की थी, जिसके बाद शीर्ष स्तर पर खेलना लगभग असंभव हो गया।

भारतीय खेल जगत में साइना नेहवाल का योगदान हमेशा याद किया जाएगा और उनका नाम देश की महान खिलाड़ियों की सूची में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा।


प्रदेश के खिलाड़ियों का भविष्य उज्जवल- रेखा आर्या

मुख्यमंत्री चैंपियंस ट्रॉफी में विजेताओं को प्रदान किए मेडल

देहरादून। मंगलवार को खेल मंत्री रेखा आर्या ने युवा केंद्र आमवाला में आयोजित मुख्यमंत्री चैंपियनशिप ट्रॉफी में जूडो के विजेताओं को मेडल देकर सम्मानित किया।कार्यक्रम में खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि पहले समय में खिलाड़ियों के लिए सुविधाओं का अभाव था लेकिन अब प्रदेश में बहुत अच्छे स्तर का खेल ढांचा विकसित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि अब युवा खिलाड़ी अपनी इच्छा शक्ति को मजबूत करें तो वह वैश्विक स्तर पर बड़ी सफलताएं प्राप्त कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के जो युवा खेलों के क्षेत्र में गंभीरता से लगे हुए हैं उनका भविष्य सुरक्षित है । खेल मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि प्रदेश के खिलाड़ियों को अभी से 2030 के राष्ट्रमंडल खेल और 2036 के ओलंपिक खेलों की तैयारी में जुट जाना चाहिए। क्योंकि प्रदेश सरकार का लक्ष्य ऐसी प्रतियोगिताओं में प्रदेश के ज्यादा से ज्यादा खिलाड़ियों को शामिल करना है।

इस अवसर पर उन्होंने जूडो अंडर-19 के 55 किलोग्राम कैटेगरी में गोल्ड मेडल विजेता सार्थक ममगाई, सिल्वर विजेता मोहसिन और ब्रांज मेडल विजेता दीपक पटवाल व विवान शर्मा को सम्मानित किया।

इनके अतिरिक्त अंडर 60 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक विजेता हिमांशु, सिल्वर पदक विजेता शिवराज, कांस्य पदक विजेता आयुष भट्ट और प्रियांशु मेहता को मेडल पहनाए।

कार्यक्रम में उपनिदेशक एसके जयराज, महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज के प्राचार्य राजेश मंमगाई, शक्ति सिंह व अन्य उपस्थित रहे।


22 जनवरी को हरिद्वार दौरे पर रहेंगे गृह मंत्री अमित शाह, तीन बड़े कार्यक्रमों में लेंगे हिस्सा

हरिद्वार। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 22 जनवरी को हरिद्वार के एक दिवसीय दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह एक के बाद एक तीन महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे। गृह मंत्री के दौरे को लेकर प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर है और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं।

अपने दौरे की शुरुआत में सुबह अमित शाह पतंजलि योगपीठ परिसर पहुंचेंगे, जहां वह इमरजेंसी और क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल का विधिवत उद्घाटन करेंगे। इसके बाद वह शांतिकुंज स्थित गायत्री तीर्थ जाएंगे और वहां अखंड ज्योति के दर्शन करेंगे। इसके बाद गृह मंत्री बैरागी द्वीप में आयोजित शताब्दी वर्ष समारोह में शामिल होंगे। इस अवसर पर माता भगवती देवी शर्मा की जन्म शताब्दी और अखंड दीप शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में भव्य आयोजन किया जाएगा। गायत्री परिवार की ओर से आयोजित इस महोत्सव में देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और विशिष्ट अतिथियों के पहुंचने की संभावना है।

अमित शाह के प्रस्तावित दौरे को देखते हुए हरिद्वार में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। वीआईपी मूवमेंट के मद्देनजर ट्रैफिक प्लान में भी बदलाव किए गए हैं। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पूरे कार्यक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात रहेंगे।


मंत्री गणेश जोशी से एम.एच. हॉस्पिटल के कमाण्डेंट ब्रिगेडियर प्रफुल्ल मोहन ने की शिष्टाचार भेंट

देहरादून। प्रदेश के सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी से आज उनके देहरादून स्थित कैंप कार्यालय में मिलिट्री हॉस्पिटल (एम.एच.) देहरादून के कमाण्डेंट ब्रिगेडियर प्रफुल्ल मोहन ने शिष्टाचार भेंट की।

इस अवसर पर कमाण्डेंट ब्रिगेडियर प्रफुल्ल मोहन ने सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी का कुछ माह पूर्व सेना अस्पताल देहरादून को गोल्फ कार्ट प्रदान करने के लिए आभार जताया। साथ ही सैन्य अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं में आगे भी राज्य सरकार से सहयोग की अपेक्षा की। इस अवसर पर सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने दीपक गोस्वामी द्वारा लिखित “सुकून भरे पन्ने”पुस्तक का भी विमोचन किया।

भेंट वार्ता दौरान पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को मिलिट्री हॉस्पिटल के माध्यम से दी जाने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं और चिकित्सा सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने के संबंध में अनौपचारिक चर्चा भी हुई। सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने सैनिकों के कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए सैन्य अस्पताल द्वारा दी जा रही सेवाओं की भी सराहना की।


सिर्फ स्वाद नहीं, दवा भी है काली मिर्च, पाचन से इम्युनिटी तक असरदार

भारतीय रसोई में रोज़मर्रा इस्तेमाल होने वाले मसाले सिर्फ स्वाद ही नहीं बढ़ाते, बल्कि सेहत के लिहाज से भी बेहद उपयोगी माने जाते हैं। आयुर्वेद में ऐसे कई मसालों का उल्लेख मिलता है, जिन्हें प्राकृतिक औषधि का दर्जा दिया गया है। इन्हीं में काली मिर्च और सफेद मिर्च भी शामिल हैं, जो पाचन से लेकर इम्युनिटी तक पर सकारात्मक असर डालती हैं।

आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार काली मिर्च का उपयोग सदियों से सर्दी-खांसी, पाचन संबंधी समस्याओं और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाता रहा है। इसमें पाया जाने वाला प्रमुख तत्व पाइपरीन शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण को बेहतर बनाता है, जिससे संपूर्ण स्वास्थ्य को लाभ मिलता है।

काली मिर्च: स्वाद के साथ सेहत का साथी
विशेषज्ञों का मानना है कि काली मिर्च केवल मसाला नहीं, बल्कि एक प्रभावी घरेलू उपचार भी है। यह पाचन एंजाइम्स के स्राव को बढ़ाती है, जिससे भोजन आसानी से पचता है। गैस, अपच और पेट फूलने जैसी समस्याओं में भी यह राहत पहुंचाती है। आयुर्वेद में इसे भूख बढ़ाने और आंतों को सक्रिय रखने वाला बताया गया है। कुछ अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि काली मिर्च में मौजूद पाइपरीन शरीर में फैट सेल्स बनने की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है, जिससे वजन नियंत्रण में मदद मिलती है।

सर्दी-खांसी और इम्युनिटी में असरदार
काली मिर्च में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। शहद के साथ इसका सेवन गले की खराश, खांसी और जुकाम में राहत देता है। इसके एंटीऑक्सीडेंट तत्व शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाते हैं, जिससे इम्युनिटी मजबूत होती है।

सफेद मिर्च भी गुणों में किसी से कम नहीं
काली मिर्च की तरह सफेद मिर्च भी आयुर्वेद में उपयोगी मानी जाती है। इसमें एसेंशियल ऑयल, अल्कलॉइड, पाइपरीन और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो सूजन कम करने और कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में सहायक होते हैं। कुछ शोधों में इसके एंटी-ट्यूमर गुणों का भी उल्लेख मिलता है।

आहार विशेषज्ञों के अनुसार सफेद मिर्च का सीमित मात्रा में सेवन लाभकारी होता है। इसे शहद या दूध के साथ लिया जा सकता है। हालांकि, अधिक मात्रा में सेवन नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए संतुलन जरूरी है।

सफेद मिर्च में मौजूद फ्लेवोनोइड्स हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में सहायक माने जाते हैं। इसमें विटामिन-ए भी पाया जाता है, जो आंखों की रोशनी के लिए उपयोगी है। इसके नियमित सेवन से आर्थराइटिस, अपच, एसिडिटी और पेट फूलने जैसी समस्याओं में भी राहत मिल सकती है।

नोट: यह लेख विभिन्न मेडिकल और आयुर्वेदिक रिपोर्ट्स में उपलब्ध जानकारियों पर आधारित है। किसी भी औषधीय उपयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह आवश्यक है।

(साभार)


चमोली में बारिश-बर्फबारी का इंतजार, रबी की फसल और पर्यटन दोनों संकट में

नवंबर से सूना आसमान, खेतों में थमी फसलों की बढ़वार

बसंत पंचमी पर टिकी किसानों की उम्मीदें, नहीं बदला मौसम तो बढ़ेगा नुकसान

चमोली। चमोली जिले में इस सर्दी मौसम की बेरुखी किसानों और पर्यटन कारोबारियों दोनों के लिए चिंता का कारण बन गई है। लंबे समय से बारिश और बर्फबारी न होने के चलते जहां खेतों में रबी की फसलें मुरझाने लगी हैं, वहीं पहाड़ों की चोटियां सूनी पड़ी हैं और शीतकालीन पर्यटन भी रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है।

नवंबर के बाद से जिले में न तो पर्याप्त बारिश हुई और न ही सामान्य बर्फबारी। इसका सीधा असर गेहूं और सरसों की फसल पर पड़ा है। किसानों के अनुसार इन फसलों को अब तक 20 से 25 प्रतिशत तक नुकसान हो चुका है। खेतों में नमी की कमी के कारण गेहूं की बढ़वार रुक गई है, जबकि सरसों की फसल समय से पहले पीली पड़ने लगी है। काश्तकारों को डर है कि अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो मसूर और जौ की फसल भी प्रभावित हो सकती है और हालात सूखे जैसे बन सकते हैं।

नंदानगर के सैंती गांव के मथुरा प्रसाद त्रिपाठी, लांखी के मोहन सिंह दानू, बंगाली के दिनेश सिंह नेगी और भेंटी के सूरी कठैत का कहना है कि मौसम की मार से फसलें चौपट होने की कगार पर हैं। किसानों ने बताया कि आमतौर पर बसंत पंचमी के आसपास बारिश राहत लेकर आती है और इस बार भी सभी की निगाहें उसी पर टिकी हैं।

मुख्य कृषि अधिकारी चमोली जेपी तिवारी के अनुसार, जिले में अब तक बारिश न होने से गेहूं और सरसों की फसल को 20 से 25 प्रतिशत तक क्षति पहुंच चुकी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अगले कुछ दिनों में मौसम नहीं बदला तो जौ और मसूर की फसल पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

खेती के साथ-साथ शीतकालीन पर्यटन भी इस साल फीका पड़ा हुआ है। औली, नीती घाटी, उर्गम घाटी सहित अन्य पर्यटन स्थलों पर बर्फ न पड़ने से पर्यटकों की आवाजाही बेहद कम है। आमतौर पर सर्दियों में बर्फबारी के बाद इन क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियां तेज हो जाती हैं, लेकिन इस बार बर्फ के इंतजार में पूरा सीजन ही प्रभावित होता नजर आ रहा है। इससे स्थानीय लोगों के रोजगार पर भी संकट गहराने लगा है।


‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ बना दर्शकों की पहली पसंद , टीआरपी लिस्ट में टॉप पर पहुंचा

नए वर्ष की शुरुआत के साथ ही टीवी इंडस्ट्री में भी दर्शकों की पसंद का पैमाना सामने आ गया है। साल 2026 के पहले सप्ताह की टीआरपी रेटिंग जारी कर दी गई है, जिसमें पारिवारिक ड्रामा और फैंटेसी शोज़ का दबदबा देखने को मिला। इस बार की सूची में कुछ पुराने लोकप्रिय धारावाहिकों ने मजबूत वापसी की है, तो वहीं नए शोज़ ने भी शानदार एंट्री मारी है।

‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ बना नंबर वन
पहले सप्ताह की टीआरपी रेटिंग में ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ ने बाजी मारते हुए पहला स्थान हासिल किया है। सीरियल को 2.3 की टीआरपी मिली है। कहानी में चल रहे उतार-चढ़ाव, तुलसी (स्मृति ईरानी) और मिहिर (अमर उपाध्याय) के अलगाव और विरानी परिवार में तुलसी की वापसी ने दर्शकों को खूब बांधे रखा है।

दूसरे पायदान पर ‘नागिन 7’
एकता कपूर के प्रोडक्शन में बना फैंटेसी ड्रामा ‘नागिन 7’ दर्शकों की पसंद पर खरा उतरता नजर आ रहा है। प्रियंका चाहर चौधरी स्टारर इस सीरियल ने 2.1 की टीआरपी के साथ दूसरे नंबर पर जगह बनाई है। कम समय में ही इस शो ने टीआरपी रेस में अपनी मजबूत पहचान बना ली है।

‘अनुपमा’ को तीसरा स्थान
लगातार लंबे समय तक टीआरपी चार्ट में शीर्ष पर रहने वाला सीरियल ‘अनुपमा’ इस बार तीसरे स्थान पर खिसक गया है। शो को 2.1 की रेटिंग मिली है, लेकिन टाई होने के बावजूद यह ‘नागिन 7’ से पीछे रहा। बीते वर्ष तक यह धारावाहिक दर्शकों की पहली पसंद बना हुआ था।

टॉप-5 में रोमांटिक ड्रामा की एंट्री
टीआरपी सूची में चौथे और पांचवें स्थान पर ‘उड़ने की आशा’ और ‘तुम से तुम तक’ ने जगह बनाई है। दोनों ही रोमांटिक ड्रामा सीरियल्स को 1.9 की टीआरपी मिली है। नई कहानियों और ताजे अंदाज के चलते इन शोज़ को भी दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है।

(साभार)


किश्तवाड़ जिले में आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में उत्तराखंड का जवान शहीद, सीएम धामी ने जताया शोक

आज कपकोट पहुंचेगा शहीद जवान का पार्थिव शरीर, सैन्य सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार

देहरादून। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में आतंकवादियों के खिलाफ चलाए जा रहे सर्च ऑपरेशन के दौरान उत्तराखंड के कपकोट निवासी एक जवान ने देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। शहादत की खबर से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। शहीद जवान का पार्थिव शरीर आज उनके पैतृक क्षेत्र कपकोट लाया जाएगा।

कपकोट के बीथी गांव निवासी हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया (43) टू-पैरा कमांडो में तैनात थे। रविवार को वह किश्तवाड़ के छात्रू क्षेत्र अंतर्गत सुदूर सिंहपोरा में चल रहे संयुक्त अभियान ‘ऑपरेशन त्राशी’ का हिस्सा थे। सर्च ऑपरेशन के दौरान आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों पर ग्रेनेड से हमला कर दिया, जिसमें हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया वीरगति को प्राप्त हो गए।

शहीद जवान अपने पीछे पिता धन सिंह गढ़िया, माता चंद्रा देवी, पत्नी लीला गढ़िया, दो पुत्र राहुल और धीरज तथा छोटे भाई किशोर गढ़िया को छोड़ गए हैं। परिवार और गांव में मातम पसरा हुआ है।

परिजनों के अनुसार शहीद का पार्थिव शरीर हेलीकॉप्टर के माध्यम से मंगलवार को केदारेश्वर मैदान लाया जाएगा। इसके बाद सरयू-खीरगंगा नदी के संगम पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।

शहादत की सूचना मिलते ही पत्नी लीला गढ़िया देहरादून से गांव पहुंचीं। इस दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। उन्हें हेलीकॉप्टर से गरुड़ के मेलाडुंगरी हेलीपैड लाया गया, जहां से व्हीलचेयर की मदद से उन्हें वाहन तक पहुंचाया गया। जवान के बलिदान की खबर मिलते ही घर पर सांत्वना देने वालों का तांता लग गया।

हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया ने प्रारंभिक शिक्षा गांव के विद्यालय से प्राप्त की थी। उन्होंने राजकीय इंटर कॉलेज कपकोट से इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई पूरी की और स्नातक प्रथम वर्ष के दौरान वर्ष 2004 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। देश सेवा के प्रति उनका समर्पण और साहस हमेशा याद किया जाएगा।

सीएम धामी ने जताया शोक

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सैन्यभूमि उत्तराखंड के वीर सपूत और बागेश्वर जनपद निवासी हवलदार गजेन्द्र सिंह गढ़िया के शहीद होने पर गहरा शोक व्यक्त किया है। हवलदार गढ़िया जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के सिंहपोरा क्षेत्र में ड्यूटी के दौरान आतंकवादियों से हुई मुठभेड़ में वीरगति को प्राप्त हुए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीद हवलदार गजेन्द्र सिंह गढ़िया ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है, जिस पर पूरे प्रदेश को गर्व है। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोक संतप्त परिजनों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

सीएम धामी ने शहीद के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार इस कठिन समय में उनके साथ खड़ी है और हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।


बेटों की हिंसा से त्रस्त विधवा को मिला प्रशासन का संरक्षण, गुंडा नियंत्रण अधिनियम में हुई कार्रवाई

नशे में मारपीट और धमकियों से परेशान मां की गुहार पर जिला प्रशासन सख्त

देहरादून। बंजारावाला क्षेत्र में बेटों द्वारा प्रताड़ित एक लाचार विधवा मां के लिए जिला प्रशासन ढाल बनकर सामने आया। नशे में धुत बेटों की मारपीट, पैसों की मांग और जान से मारने की धमकियों से भयभीत विजय लक्ष्मी पंवार ने हिम्मत जुटाकर प्रशासन से शिकायत की, जिस पर त्वरित और सख्त कार्रवाई की गई।

शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने मामले की गोपनीय जांच कराई। पड़ोसियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बयानों से विधवा मां के आरोपों की पुष्टि हुई। इसके बाद प्रशासन ने गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत दोनों बेटों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की।

कानूनी कार्रवाई के बाद बेटों को पहली बार अपनी मां के प्रति जिम्मेदारी और कर्तव्यों का अहसास हुआ। न्यायालय में दोनों बेटों ने मां से माफी मांगते हुए नशा छोड़ने और किसी भी प्रकार की हिंसा न करने का शपथ पत्र प्रस्तुत किया। जिला प्रशासन की चेतावनी और कानून के डर से उनके व्यवहार में सुधार देखने को मिला, जिसके आधार पर न्यायालय ने आगे की कार्रवाई समाप्त कर दी।

इस मामले पर जिलाधिकारी सविन बंसल ने स्पष्ट कहा कि महिलाओं, विधवाओं और निर्बल वर्ग के उत्पीड़न पर जिला प्रशासन की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति है। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी किसी भी घटना की पुनरावृत्ति होने पर दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


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