Thursday, January 15th, 2026

Drop Us An Email Any Enquiry Drop Us An Emailshailesh.lekhwar2000@gmail.com
Call Us For Consultation Call Us For Consultation +91 9818666272

कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने किया सड़क का भूमिपूजन

Daily Archives: 15/01/2026

कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने किया सड़क का भूमिपूजन

अल्मोड़ा। सोमेश्वर विधानसभा क्षेत्र के विकासखंड ताकुला के अंतर्गत मनान से चंद्रपुर तक मोटर मार्ग के 2 किलोमीटर सड़क के नवनिर्माण कार्य का आज भूमिपूजन किया गया। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने स्वयं जेसीबी चलाकर शिलान्यास किया। इस कार्य की स्वीकृत लागत 53.04 लाख रुपये है।

इस अवसर पर क्षेत्रीय लोगों के साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार उत्तराखंड के विकास के प्रति पूर्ण प्रतिबद्ध है। सोमेश्वर क्षेत्र में इसका जीवंत प्रमाण देखने को मिल रहा है।

उन्होंने क्षेत्रवासियों से अपील की कि विकास कार्यों की कोई भी मांग हो, तो सबसे पहले उनसे संपर्क करें। ऐसी मांगों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि विपक्षी पार्टी कांग्रेस विकास कार्यों को अटकाने और भटकाने की राजनीति करती है जबकि भाजपा का एक ही लक्ष्य है तीव्र विकास। प्रदेश की भाजपा सरकार इसी लक्ष्य को लेकर चल रही है।

कार्यक्रम में मंडल अध्यक्ष सुंदर राणा, गणेश जलाल, लाल सिंह बजेठा, मनोज कुमार, दिनेश चंद्र पांडे, संजय कुमार, भूपाल मेहरा, राजेंद्र कैड़ा, राहुल खोलिया, शंकर बिष्ट, दीवान राम, पंकज बजेली, प्रकाश बिष्ट, रामचंद्र भट्ट, प्रकाश चंद्र, नवीन चंद्र भट्ट, चंद्रशेखर भट्ट, शंकर मेहरा, भरत भाकुनी, विनोद मेहरा, हिमांशु कोहली, कमल, देवेंद्र कुमार, नरेंद्र नेगी आदि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।


गणतंत्र दिवस की तैयारियों की समीक्षा बैठक, डीएम सविन बंसल ने दिए सख्त निर्देश

परेड ग्राउंड में होगा मुख्य समारोह, राज्यपाल करेंगे ध्वजारोहण

देहरादून। जिले में गणतंत्र दिवस समारोह को भव्य, गरिमामय और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिलाधिकारी ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ समयबद्ध तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने बताया कि गणतंत्र दिवस के अवसर पर जिले के सभी शासकीय कार्यालयों में प्रातः 9:30 बजे ध्वजारोहण किया जाएगा। मुख्य समारोह परेड ग्राउंड में आयोजित होगा, जहां राज्यपाल द्वारा ध्वजारोहण किया जाएगा।

विभागों को सौंपी गईं जिम्मेदारियां

बैठक में जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग को मुख्य कार्यक्रम स्थल पर मंच निर्माण, बैरिकेडिंग और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। विद्युत विभाग को कार्यक्रम के दौरान निर्बाध विद्युत आपूर्ति बनाए रखने के निर्देश दिए गए, जबकि पेयजल व्यवस्था के लिए संबंधित विभाग को पर्याप्त इंतजाम करने को कहा गया।

नगर निगम को कार्यक्रम स्थल और आसपास के क्षेत्रों में विशेष सफाई एवं स्वच्छता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। एमडीडीए को शहर के प्रमुख स्थलों और शासकीय भवनों में सौंदर्यीकरण और आकर्षक प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया। संस्कृति विभाग को शहीद स्थल पर विशेष सफाई और प्रकाश व्यवस्था के निर्देश दिए गए।

झांकियां, प्रोटोकॉल और सम्मान समारोह

जिलाधिकारी ने सूचना, वन, ग्राम्य विकास, पर्यटन, शिक्षा, ऊर्जा, उरेडा, बाल विकास, कृषि, स्वास्थ्य और संस्कृति विभाग को अपनी-अपनी विभागीय झांकियों के आयोजन के संबंध में समय से तैयारी शुरू करने के निर्देश दिए। साथ ही मुख्य कार्यक्रम स्थल पर प्रोटोकॉल के अनुरूप अतिथियों के बैठने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।

उन्होंने समस्त उप जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और उनके आश्रितों के सम्मान की व्यवस्था सुनिश्चित करें।

विशेष प्रकाश व्यवस्था और सांस्कृतिक कार्यक्रम

जिलाधिकारी ने बताया कि 25 और 26 जनवरी को जिले के सभी प्रमुख चौराहों और शासकीय भवनों पर विशेष प्रकाश व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही 25 जनवरी की शाम 6 बजे से रात 9 बजे तक तथा 26 जनवरी की सुबह 6 बजे से 11 बजे तक प्रमुख चौराहों पर देशभक्ति गीतों का प्रसारण किया जाएगा।

संस्कृति विभाग को 25 जनवरी को नगर निगम के टाउनहॉल में कवि सम्मेलन आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, पुलिस अधीक्षक नगर प्रमोद कुमार, नगर मजिस्ट्रेट प्रत्युष सिंह, संयुक्त मजिस्ट्रेट राहुल कुमार, उप जिलाधिकारी सदर हरिगिरी, उप जिलाधिकारी मुख्यालय अपूर्वा सिंह, उप जिलाधिकारी कुमकुम जोशी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और व्यापार मंडल के पदाधिकारी उपस्थित रहे।


उच्च शिक्षा विभाग में 268 असिस्टेंट प्रोफेसर के स्थायीकरण को सरकार की मंजूरी

विभागीय मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने स्थायीकरण प्रस्ताव किया अनुमोदित

देहरादून। उच्च शिक्षा विभाग के 268 असिस्टेंट प्रोफसर के स्थायीकरण को राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है। विभागीय मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने विभाग द्वारा प्रस्तुत स्थायीकरण प्रस्ताव को अपना अनुमोदन दे दिया है। प्रदेशभर के विभिन्न राजकीय महाविद्यालयों में तैनात विभिन्न विषयों के इन असिस्टेंट प्रोफेसर ने दो वर्ष की परवीक्षा अवधि संतोषजनक पूर्ण कर दी है। समयबद्ध स्थायीकरण होने पर असिस्टेंट प्रोफेसरों ने विभागीय मंत्री व राज्य सरकार का आभार जताया।

प्रदेश की उच्च शिक्षा में शैक्षिक गुणवत्ता, नवाचार, प्रयोगात्मक व शोधात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिये राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। राजकीय महाविद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती से लेकर उनके प्रशिक्षण को लेकर भी सरकार लगातार काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार ने विभिन्न राजकीय महाविद्यालयों में तैनात 268 असिस्टेंट प्रोफसर के द्वारा द्विवर्षीय परवीक्षा अवधि पूर्ण करने पर उनके स्थायीकरण को मंजूरी दे दी है। स्थायीकरण का लाभ लेने वाले असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति विभागान्तर्गत वर्ष 2020 से वर्ष 2022 में हुई है। जिन्हें सरकार द्वारा उत्तराखण्ड सरकारी सेवकों की स्थायीकरण नियमावली-2002 के तहत लाभान्वित किया गया है। 13 विभिन्न विषयों के इन असिस्टेंट प्रोफेसर में राजनीति विज्ञान के 71, शिक्षा शास्त्र 26, संस्कृत 35, हिन्दी 71, समाजशास्त्र 5, इतिहास 4, भूगोल व भौतिक विज्ञान 2-2, अर्थशास्त्र 35, गृह विज्ञान 13 तथा रसायन विज्ञान, जन्तु विज्ञान व अंग्रेजी में 1-1 असिस्टेंट प्रोफेसर शामिल है। उच्चतर शिक्षा (समूह ‘क’) सेवा नियमावली-2003 के तहत ऐसे शिक्षकों की नियुक्ति को स्थायी करने का प्रावधान है, जिनका कार्य और आचरण अच्छा हो, उनकी सत्यनिष्ठा प्रमाणित हो और नियुक्ति प्राधिकारी को यह समाधान हो कि शिक्षक को स्थायी करना उपयुक्त है।

राज्य सरकार का स्पष्ट मानना है कि शिक्षकों को सुरक्षित, स्थायी एवं सम्मानजनक सेवा वातावरण उपलब्ध कराना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बुनियाद है। प्राध्यापकों के स्थायीकरण से न केवल उनकी सेवा सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि उच्च शिक्षा संस्थानों में शैक्षणिक निरंतरता और अकादमिक गुणवत्ता भी और अधिक मजबूत होगी।

बयान
उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत अपनी परवीक्षा अवधि सफलतापूर्वक पूर्ण करने वाले 268 प्राध्यापकों के स्थायीकरण की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। यह निर्णय उच्च शिक्षा के सुदृढ़ीकरण के साथ-साथ कर्मचारियों के हितों के प्रति राज्य सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। – डाॅ. धन सिंह रावत, उच्च शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड।


गढ़ी कैंट में सेना अधिकारियों से मिले गणेश जोशी, थल सेना दिवस की दी शुभकामनाएं

भारतीय सेना देश की सुरक्षा की मजबूत ढाल- गणेश जोशी

देहरादून। सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने आज गढ़ी कैंट स्थित उत्तराखंड सब एरिया देहरादून में जीओसी मेजर जनरल एमपीएस गिल एवं डिप्टी जीओसी बिग्रेडियर आरएस थापा से भेंट कर उन्हें थल सेना दिवस की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने भारतीय सेना के शौर्य, पराक्रम और अनुशासन की सराहना करते हुए कहा कि थल सेना देश की सुरक्षा की मजबूत ढाल है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने हर परिस्थिति में देश की सीमाओं की रक्षा कर राष्ट्र को गौरवान्वित किया है। मंत्री जोशी ने यह भी कहा कि उत्तराखंड का सेना से गहरा नाता रहा है और राज्य के सैनिकों ने सदैव देश सेवा में अग्रणी भूमिका निभाई है। राज्य सरकार पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

भेंट के दौरान आपसी समन्वय, सैनिक कल्याण से जुड़े विषयों एवं प्रदेश में पूर्व सैनिकों के हितों पर भी चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त, सैन्य योजनाओं की जानकारी के लिए दो नग एलईडी स्थापना एवं विकासनगर में सामुदायिक शेड बनाये जाने की मांग भी जीओसी ने की। जिस पर सैनिक कल्याण मंत्री ने सकारात्मक कार्यवाही का आश्वासन दिया।


डॉ. धन सिंह रावत ने नाबार्ड अधिकारियों के साथ की समीक्षा बैठक

शिक्षा और कौशल विकास में नाबार्ड के सहयोग पर हुई अहम चर्चा

देहरादून। कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने अपने शासकीय आवास पर राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में सहकारिता क्षेत्र में नाबार्ड के सहयोग से संचालित विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई और आगामी कार्ययोजनाओं को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक के दौरान सहकारिता को मजबूत करने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और लाभार्थियों तक योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। इसके साथ ही भविष्य में नाबार्ड के सहयोग से नई योजनाएं शुरू करने की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।

 

डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार और गुणवत्ता सुधार के लिए संस्थागत सहयोग आवश्यक है। बैठक में विद्यालयी शिक्षा और उच्च शिक्षा में कौशल विकास, नवाचार और संस्थानों की मजबूती के लिए नाबार्ड के सहयोग की संभावनाओं पर भी सकारात्मक चर्चा हुई।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सहकारिता और शिक्षा से जुड़ी योजनाओं को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों को अधिकतम लाभ मिल सके। बैठक में नाबार्ड के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।


गलत खान-पान बढ़ा रहा कैंसर का खतरा, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दी लाइफस्टाइल सुधारने की सलाह

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों की जीवनशैली और खाने-पीने की आदतों में तेजी से बदलाव आया है। यही बदलाव अब गंभीर बीमारियों की जड़ बनता जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार डायबिटीज, हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर के साथ-साथ कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के पीछे भी असंतुलित लाइफस्टाइल और गलत खान-पान अहम कारण हैं। चिंता की बात यह है कि हाल के वर्षों में बच्चों में भी कैंसर के मामले बढ़ते जा रहे हैं, जो भविष्य के लिए खतरे की घंटी है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पूरी तरह विकसित नहीं होती, ऐसे में खराब आहार और रसायन युक्त भोजन का असर उन पर ज्यादा तेजी से पड़ता है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि कैंसर के खतरे किन वजहों से बढ़ रहे हैं और आहार में कौन-से बदलाव इसे रोकने में मददगार हो सकते हैं।

कैंसर से बचाव के लिए खान-पान में बदलाव जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल फास्ट फूड, प्रोसेस्ड और पैकेज्ड खाद्य पदार्थों का अत्यधिक सेवन कैंसर समेत कई बीमारियों का खतरा बढ़ा रहा है। इन खाद्य पदार्थों में मौजूद प्रिजर्वेटिव, ट्रांस फैट और केमिकल शरीर में हानिकारक बदलाव पैदा करते हैं। इसके साथ ही तंबाकू और शराब का सेवन भी कैंसर के प्रमुख कारणों में शामिल है।

प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड बढ़ाते हैं खतरा

चिप्स, इंस्टेंट नूडल्स, पैकेज्ड स्नैक्स और रेडी-टू-ईट फूड में आर्टिफिशियल फ्लेवर, प्रिजर्वेटिव और ट्रांस फैट की मात्रा अधिक होती है। ये तत्व शरीर में सूजन और कैंसरकारी गतिविधियों को बढ़ावा दे सकते हैं। कई अध्ययनों में यह सामने आया है कि ऐसे खाद्य पदार्थों का नियमित सेवन पेट और आंत से जुड़े कैंसर के जोखिम को बढ़ाता है।

रेड और प्रोसेस्ड मीट का सीमित सेवन करें

अगर रोजाना या अधिक मात्रा में रेड मीट और प्रोसेस्ड मीट का सेवन किया जाता है, तो यह भी कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने प्रोसेस्ड मीट को कैंसरकारक श्रेणी में रखा है। इनमें मौजूद केमिकल प्रिजर्वेटिव और अधिक वसा आंतों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार प्रोसेस्ड मीट का अधिक सेवन कोलोरेक्टल कैंसर के खतरे को बढ़ाता है, जबकि ज्यादा रेड मीट खाने से शरीर में सूजन बढ़ती है, जो कैंसर के विकास में सहायक हो सकती है।

ज्यादा मीठे पेय पदार्थ भी हैं नुकसानदेह

अत्यधिक चीनी का सेवन सीधे कैंसर का कारण भले न बने, लेकिन यह मोटापा और इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ाता है, जिन्हें कैंसर के बड़े जोखिम कारक माना जाता है। सॉफ्ट ड्रिंक्स, मीठे पेय और शुगर युक्त जूस ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक बढ़ी हुई शुगर स्तन, लिवर और अग्न्याशय के कैंसर का खतरा बढ़ा सकती है। साथ ही अधिक चीनी शरीर में क्रॉनिक सूजन को बढ़ावा देती है, जिससे कैंसर कोशिकाओं के पनपने की संभावना बढ़ जाती है।

नोट: यह लेख विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी प्रकार का आहार परिवर्तन करने से पहले चिकित्सकीय परामर्श आवश्यक है।

(साभार)


“भारत में महिला नेतृत्व लोकतंत्र की ताकत” — CSPOC में बोले प्रधानमंत्री मोदी

पीएम मोदी ने संविधान सदन में 28वीं कॉमनवेल्थ स्पीकर्स कॉन्फ्रेंस का किया उद्घाटन

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में 28वीं कॉमनवेल्थ स्पीकर्स एंड प्रेसिडिंग ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस (CSPOC) 2026 का औपचारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर लोकतंत्र, संसदीय व्यवस्था और वैश्विक सहयोग को लेकर भारत की भूमिका को रेखांकित किया गया। कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह उपस्थित रहे।

अपने उद्घाटन संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय लोकतंत्र की समावेशिता और महिला नेतृत्व की मजबूती पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की राष्ट्रपति देश की प्रथम नागरिक हैं और दिल्ली की मुख्यमंत्री भी एक महिला हैं, जो यह दर्शाता है कि भारत में महिलाएं न केवल लोकतंत्र का हिस्सा हैं, बल्कि नेतृत्व की अग्रिम पंक्ति में भी खड़ी हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि 2024 के आम चुनाव मानव इतिहास का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक अभ्यास रहे, जिसमें करीब 98 करोड़ मतदाता पंजीकृत थे और महिलाओं की भागीदारी ऐतिहासिक रही।

प्रधानमंत्री ने सेंट्रल हॉल के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यही वह स्थान है जहां स्वतंत्रता से पहले संविधान सभा की बैठकें हुईं और आजादी के बाद दशकों तक यहीं से देश के भविष्य से जुड़े अहम फैसले लिए गए। अब इस ऐतिहासिक धरोहर को संविधान सदन के रूप में लोकतंत्र को समर्पित किया गया है।

कॉमनवेल्थ देशों के साथ भारत के सहयोग पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कॉमनवेल्थ की कुल आबादी का लगभग आधा हिस्सा भारत में निवास करता है और भारत का प्रयास रहा है कि वह स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, आर्थिक विकास और नवाचार जैसे क्षेत्रों में साझा लक्ष्यों की प्राप्ति में सक्रिय योगदान दे। उन्होंने कहा कि भारत अपने अनुभवों से सीखने के साथ-साथ उन्हें अन्य साझेदार देशों के साथ साझा करने में भी विश्वास रखता है, विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण के लिए नए अवसरों के निर्माण में।

प्रधानमंत्री मोदी ने संसदीय लोकतंत्र में स्पीकर की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि स्पीकर का दायित्व केवल सदन का संचालन करना नहीं, बल्कि निष्पक्षता, धैर्य और संतुलन के साथ हर सदस्य को अपनी बात रखने का अवसर देना भी है। उन्होंने कहा कि यह चौथा अवसर है जब भारत इस प्रतिष्ठित सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है और इस बार सम्मेलन का मुख्य विषय “संसदीय लोकतंत्र की प्रभावी डिलीवरी” रखा गया है।

प्रधानमंत्री ने भारत को लोकतंत्र की जननी बताते हुए कहा कि सहमति, संवाद और विचार-विमर्श की परंपरा भारत की प्राचीन सभ्यता का हिस्सा रही है। उन्होंने कहा कि तमाम शंकाओं के बावजूद भारत ने यह सिद्ध किया है कि विविधता लोकतंत्र की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी ताकत है। लोकतांत्रिक संस्थाओं ने देश को स्थिरता, गति और विकास का मजबूत आधार दिया है।

आर्थिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। डिजिटल भुगतान प्रणाली यूपीआई, वैक्सीन उत्पादन और इस्पात निर्माण जैसे क्षेत्रों में भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है।

इस सम्मेलन की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला कर रहे हैं। इसमें 42 कॉमनवेल्थ देशों के 61 स्पीकर्स और प्रेसिडिंग ऑफिसर्स सहित अर्ध-स्वायत्त संसदों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका और मलेशिया सहित कई देशों के प्रतिनिधि सम्मेलन में शामिल हुए हैं।

सम्मेलन के दौरान संसद की बदलती भूमिका, तकनीकी नवाचार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग, सोशल मीडिया का प्रभाव, नागरिक भागीदारी बढ़ाने की रणनीतियों और सांसदों की सुरक्षा व कल्याण जैसे विषयों पर गहन चर्चा की जाएगी। 14 से 16 जनवरी तक चलने वाला यह सम्मेलन अब तक का सबसे बड़ा CSPOC माना जा रहा है, जिसकी पिछली बैठक जनवरी 2024 में युगांडा में आयोजित हुई थी।


प्रियंका चोपड़ा का सबसे खतरनाक अवतार, ‘द ब्लफ’ का ट्रेलर हुआ रिलीज

बॉलीवुड से हॉलीवुड तक अपनी अलग पहचान बना चुकीं प्रियंका चोपड़ा जोनस एक बार फिर अपने दमदार अवतार में दर्शकों के सामने आने को तैयार हैं। उनकी नई इंटरनेशनल फिल्म ‘द ब्लफ’ का ऑफिशियल ट्रेलर रिलीज कर दिया गया है, जिसमें प्रियंका का अब तक का सबसे खतरनाक और उग्र किरदार देखने को मिल रहा है। ट्रेलर सामने आते ही सोशल मीडिया पर इसे लेकर चर्चा तेज हो गई है।

ट्रेलर में प्रियंका चोपड़ा एक निर्दयी और ताकतवर महिला समुद्री डाकू के रूप में नजर आती हैं, जिसका नाम एर्सेल ‘ब्लडी मैरी’ बॉडेन है। खून से सने चेहरे, जख्मों से भरा शरीर और आंखों में बदले की आग—प्रियंका का यह अवतार पहले से कहीं ज्यादा आक्रामक दिखाई देता है। फिल्म में उनके साथ हॉलीवुड अभिनेता कार्ल अर्बन भी अहम भूमिका निभा रहे हैं, जिनके साथ प्रियंका के एक्शन सीक्वेंस खासे प्रभावशाली हैं।

‘द ब्लफ’ की कहानी सत्ता, अस्तित्व और विश्वासघात के इर्द-गिर्द घूमती है। एर्सेल अपने अतीत को पीछे छोड़कर नई जिंदगी शुरू करना चाहती है, लेकिन उसका खतरनाक अतीत फिर से उसके सामने खड़ा हो जाता है। पुराने साथी लौटते हैं और उसे वफादारी, हिंसा और जिंदा रहने की जंग में उतरना पड़ता है। कहानी में भावनात्मक टकराव के साथ-साथ जबरदस्त एक्शन और संघर्ष को प्रमुखता से दिखाया गया है।

निर्माताओं के मुताबिक यह फिल्म पारंपरिक पाइरेट फिल्मों से अलग एक गहरी, क्रूर और थ्रिल से भरपूर कहानी पेश करती है। इंस्टाग्राम पर ट्रेलर साझा करते हुए मेकर्स ने लिखा है कि इस कहानी का अंत खून से सनी रेत पर होगा। ‘द ब्लफ’ 25 फरवरी को ओटीटी प्लेटफॉर्म प्राइम वीडियो पर रिलीज की जाएगी, जहां दर्शकों को एक्शन, ड्रामा और डार्क ह्यूमर से भरपूर समुद्री डाकू थ्रिलर देखने को मिलेगी।

(साभार)


सीएम धामी ने थल सेना दिवस के अवसर पर सभी वीर जवानों को दी शुभकामनाएं

“भारतीय सेना का शौर्य देश की सबसे बड़ी ताकत” — मुख्यमंत्री धामी

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने थल सेना दिवस के अवसर पर देश की सीमाओं की रक्षा में तैनात सभी वीर जवानों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि सैन्यभूमि उत्तराखंड की ओर से यह दिवस उन जांबाज सैनिकों के शौर्य, त्याग और बलिदान को नमन करने का अवसर है, जो अहर्निश माँ भारती की रक्षा में समर्पित हैं।

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि भारतीय सेना का अदम्य साहस, कठोर अनुशासन और राष्ट्र के प्रति अटूट निष्ठा ही देश की सीमाओं की सबसे बड़ी सुरक्षा है। हिमालय की दुर्गम चोटियों से लेकर रेगिस्तान और समुद्री तटों तक, हर मोर्चे पर सेना का पराक्रम देश के आत्मसम्मान और संप्रभुता का प्रतीक है।

सीएम धामी ने कहा कि देशवासियों को अपने सैनिकों पर गर्व है। उनका शौर्य, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। मुख्यमंत्री ने सभी वीर जवानों को कोटि-कोटि नमन करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और सुरक्षित सेवा की कामना की।


बारिश-बर्फबारी न होने से प्रदेशभर में बढ़ी सूखी ठंड, लोग ठिठुरने को हुए मजबूर

16 से 19 जनवरी के बीच पर्वतीय जिलों में बारिश-बर्फबारी के आसार

देहरादून। प्रदेश में इस बार मौसम का मिजाज बदला-बदला नजर आ रहा है। बारिश और बर्फबारी न होने के चलते मैदानी इलाकों से लेकर पहाड़ों तक सूखी ठंड ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। दिन में धूप राहत दे रही है, लेकिन सुबह-शाम ठंड और कोहरे का असर लगातार बना हुआ है। इसी बीच मौसम विभाग ने पर्वतीय जिलों में मौसम में बदलाव के संकेत दिए हैं।

मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार फिलहाल प्रदेश में मौसम शुष्क बना रहेगा। हालांकि देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर के साथ नैनीताल, चंपावत और पौड़ी जिलों में घने कोहरे को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। कोहरे के चलते सुबह के समय दृश्यता प्रभावित हो सकती है, जिससे यातायात पर असर पड़ने की संभावना है।

वहीं 16 से 19 जनवरी के बीच उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बारिश होने के आसार जताए गए हैं। इसके साथ ही 3400 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की संभावना भी बनी हुई है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस दौरान प्रदेश के अधिकतम तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है।

सूखी ठंड का सबसे ज्यादा असर मैदानी इलाकों में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में रात के न्यूनतम तापमान में और गिरावट आने की आशंका है, जिससे ठंड का असर और बढ़ सकता है। मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह दी है।


Latest News in hindi

Call Us On  Whatsapp