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सुपर एल नीनो से फैली दहशत ,150 साल पुराना मंज़र दोबारा देखने को मिल सकता है

सुपर एल नीनो से फैली दहशत ,150 साल पुराना मंज़र दोबारा देखने को मिल सकता है

सुपर एल नीनो से फैली दहशत ,150 साल पुराना मंज़र दोबारा देखने को मिल सकता है

पूजा भट्ट

150 साल पहले आए एल नीनो के लौटने की संभावना बताई जा रही है | वैज्ञानिकों ने रिसर्च मे बताया की वर्तमान समय मे जिस प्रकार के हालत बन रहे है वे 1877 मे आए सुपर अल नीनो से काफी हद तक समान है | 1877 मे आए सुपर एल नीनो के प्रभाव से करीब 5 करोड़ लोगों की मृत्यु हो गई थी और आगे भी कई सालों तक विश्व के अधिकतर हिस्सों मे अकाल की स्तिथि बनी हुई थी |दुनियाभर के वैज्ञानिक बढ़ते दिनों के साथ बढ़ते तापमान के रिकार्ड को देखकर चिंतित है | उन्हें आज के समय से 148 साल पूर्व आए सुपर अल नीनो की वापसी की चिंता सता रही है |

आजसे करीब 150 साल पहले हमारी धरती पर मौसम का एक एस विकराल रूप देखने को मिल था जिसके बारे मे बात करने से आज भी कुछ लोग सहेम जाते है |उस समय पूरा विश्व एक रेयर सुपर अल नीनो इफेक्ट का शिकार हो गई थी |धरती के तापमान मे 3 डिग्री का आधिक्य हुआ था चारों तरफ आकाल, सूखा और भुखमरी के हालात बन गए थे | हमारे अपने देश भारत मे ही 1 करोड़ से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी | वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चलता है की प्रशांत महासागर के एक प्रमुख क्षेत्र मे पानी का तापमान लगभग 2.7 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया था इस असमान वृद्धि ने वैश्विक वर्षा पैटर्न को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया |प्रीमणस्वरूप दुनिया के क्षेत्रों मे लंबे समय तक सुख पद गया था जिससे कृषि व्यवस्था संकट मे आ गई थी |अनुमानों के अनुसार ,इस जलवायु आपदा के कारण भोजन की भारी कमी और बीमारियों के प्रकोप ने पृथ्वी की लगभग 4% आबादी को खत्म कर दिया था ,यदि इसी अनुपात को आज के समय मे देखा जाए तो यह संख्या करीब 250 मिलियन लोगों के बराबर होगी,जो इस आपदा के विकराल रूप को दर्शाती है

क्या है सुपर एल नीनो ?
एल नीनो एक प्रकार्तिक जलवायु चक्र है ,जो आमतौर पर हर दो से सात साल के बीच विकसित होता है |इस चक्र के दौरान वैश्विक मौसम प्रणाली मे बड़ा बदलाव देखने को मिलता है,जिसमे एक गर्म चरण (एल नीनो) और एक ठंडा चरण (ला नीनो) शामिल होता है |ऐल नीनो की स्थिति मे प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्सों मे समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक बढ़ जाता है |यह गरम पानी धीरे धीरे फैलता है और वायुमंडल के सतह मिलकर पृथ्वी के औसत तापमान को प्रभावित करता है | प्रमाणस्वरूप ,कई महीनों तक वैश्विक तापमान मे बढ़ोतरी देखि जा सकती है| जब समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से करीब 2 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक बढ़ जाता ,तो आम बोलचाल मे इसे ‘सुपर ऐल नीनो’ कहा जाता है| वर्तमान परिस्थितियों पर नजर डालें तो ट्रापिकल पेसिफिक क्षेत्र में समुद्र का तापमान इस सदी के मुकाबले तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है |हालांकि अभी इसे पूरी तरह पुष्टि नहीं मिली है ,लेकिन संकेत साफ हैं की एक मजबूत एल नीनो प्रणाली विकसित हो सकती है|

अब एक बार फिर वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ रही है ,पूर्वानुमान संकेत दे रहे है की वर्ष के अंत तक समुद्र जल का तापमान औसत से 3 डिग्री सेल्सियस से अधीक बढ़ सकता है ,यह स्थिति एक सुपर अल नीनो का रूप ले सकता है, जो लगभग 150 वर्ष पहले आए उस विनाशकारी अल नीनो से भी ज्यादा शक्तिशाली साबित हो सकता है|विशेषज्ञों का मानना है की 1870 के दशक की तरह ही एक बार फिर कई वर्षों तक सूखा और अकाल जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती हैं | हालांकि , इस बार स्थिति और भी गंभीर हो सकती है ,क्योंकि वर्तमान मे पृथ्वी का वायुमंडल और महासागर उस समय की तुलना मे कहीं अधिक गर्म है | यही बढ़ता तापमान इस खतरे को और गहरा बना देते है |इसका सीधा अर्थ है की यदि एसा सुपर अल नीनो आता है,तो उससे जुड़े चरम प्रभाव पहले से कहीं अधिक विनाशकारी और व्यापक हो सकते है |


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