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एक देश ,एक कानून फिर आम और खास में अंतर क्यों…?

एक देश ,एक कानून फिर आम और खास में अंतर क्यों…?

एक देश ,एक कानून फिर आम और खास में अंतर क्यों…?

क्या आजादी के 75 वर्ष बाद भी मिट पाएगा गरीब और अमीर का अंतर

मोहनी नगर खादर, वृंदावन में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्यवाही जोरो पर

सतीश मुखिया

मथुरा: नगर निगम मथुरा वृंदावन में नगर आयुक्त जग प्रवेश के दिशा निर्देशन में अतिक्रमण और अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्यवाही लगातार की जा रही है और उनके यह प्रयास सराहनीय है। इसी कड़ी में आज नगर निगम के नवागत अपर नगर आयुक्त सौरभ सिंह और अपर नगर आयुक्त सी पी पाठक के नेतृत्व में वृंदावन के परिक्रमा मार्ग स्थित, पानी गांव खादर के मोहनी नगर खादर में गाटा संख्या 487 पर परवर्तन दल और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से अवैध अतिक्रमण के अभियान चलाया गया।

इस गाटा संख्या की जमीन पशु चरागाह के रूप में राजस्व विभाग के अभिलेखों में अंकित है। नगर निगम की टीम ने अस्थाई और स्थाई ,अर्ध निर्मित और निर्मित निर्माण को गिराया गया और इस खसरे की जमीनों में अवैध रूप से हो रही चारदिवारी को जेसीबी की मदद से तोड़ा गया। इस पर आम जनता ने विरोध करने का प्रयास किया और स्थानीय नागरिकों ने अपने जमीन के कागजात अधिकारियों के सामने प्रस्तुत किये लेकिन प्रशासन ने उनको बताया कि यह जमीन सरकारी है और पशु चरागाह में निगम की रिकॉर्ड में अंकित है यह आपने गलत तरीके से खरीदी है।हम लोग आपका नुकसान नहीं चाहते लेकिन जब आप अवैध तरीके से जमीनों की खरीद फरोख्त करेंगे तब हमको मजबूरन आपके खिलाफ कार्यवाही करनी पड़ेगी। अब मूल सवाल यह उठता है जब यह जमीन सरकार के रिकॉर्ड रूप में अंकित हैं तब किस प्रकार राजस्व विभाग इन जमीनों की रजिस्ट्री और बैनामा खरीदारो के नाम कर दे रहा है, क्या इन जमीनों की खरीद बिक्री के काम में कोई भू माफिया संलग्न है और वह राजस्व विभाग में सामजस्य बिठाकर इन जमीनों को खुर्द बुर्ध कर रहा है जिससे उत्तर प्रदेश सरकार को करोड़ों रुपए की राजस्व हानि हो रही है और आम जनता अपनी गाड़ी कमाई इन लोगों के हाथ लुटाने को मजबूर है यह सब जांच का विषय है।

नजूल जमीनों की मथुरा वृंदावन में खरीद बिक्री होना आम बात है यह कारोबार यहां पर खुलेआम और धड़ल्ले से चल रहा है , कुछ दिन पहले मथुरा शहर स्थित माया टीला पर एक बड़ा हादसा हुआ जिसमें कई अनगिनत लोगों को अपने जीवन से असमय हाथ धोना पड़ा और यह हादसा अपने पीछे कई सवाल छोड़ गया। जिसकी जांच मथुरा पुलिस द्वारा अभी जारी है। ऐसा नहीं है कि सरकार और सरकार के नुमाइंदों को इन सब के बारे में मालूम नहीं है लेकिन आपसी तालमेल और भ्रष्टाचार के कॉकटेल के कारण सरकारी जमीनों का खरीद बिक्री होना आम बात है, जिम्मेदार अपने आप को बचाने हेतु एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाते रहते हैं और अपना मुंह मोड़ लेते हैं मथुरा वृंदावन के अंदर कई कालोनियां सरकारी जमीनों पर बसी हुई है और इन जमीनों को नगर निगम द्वारा पीपी एक्ट 115 के तहत खाली कराया जाना है लेकिन आम और खास में अंतर करते हुए विभाग गरीब, दलित वर्ग के लोगों से इन जमीनों को कब्जा मुक्त कर रहा है वहीं दूसरी तरफ खास पूंजी पति वर्ग के लोगों से जिलाधिकारी मथुरा द्वारा आदेश होने के बावजूद उन जमीनो पर कब्जा लेने में हिचकिचा रहा है। मथुरा शहर में नजूल की जमीनों पर खुलेआम और धड़ल्ले से निर्माण कार्य चल रहे हैं।

जब कोई जागरूक नागरिक इनकी शिकायत विभाग को करता है तब विभाग के कुछ कट्टर ईमानदार कर्मचारी उस नागरिक का फोन नंबर और पता उस निर्माण करने वाले पूंजी पति को दे देते हैं इसके बाद वह उस देश प्रेमी को विभिन्न तरीकों से प्रताड़ित करवाता है और उसका जीवन खतरों में पड़ जाता है। जब देश एक है , कानून एक है फिर नगर निगम द्वारा आम और खास पर कार्यवाही करने में भेदभाव क्यों, क्या आम व्यक्ति इस देश का निवासी नहीं है ,क्या वह उत्तर प्रदेश सरकार को आयकर, बिजली, पानी, सीवर आदि के रूप में कर जमा नहीं करता है। क्या सिर्फ खास वर्ग के लोग ही सरकार को राजस्व प्रदान करते हैं ।जब सभी इस देश के निवासी हैं और उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार को सभी लोग मत देकर चुनते हैं फिर दलित, वंचित और कमजोर वर्ग के लोगों पर कार्यवाही और सरमायदार लोगों को छोड़ना समझ नहीं आता। एक तरफ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबका साथ, सबका विकास का वादा करते हैं लेकिन जमीनी धरातल पर आम और खास में अंतर यह दिखाता है कि सरकार कोई भी हो, किसी पार्टी की हो पूंजीपति और गरीब में अंतर हमेशा बना रहेगा। क्या प्रशासन उन लोगों के ऊपर कोई कार्यवाही करने की हिम्मत जुटा पाएगा जिन लोगों ने इन लोगों को घर बनाने का सपना दिखाकर नजूल की जमीनों को दामों पर इन लोगों को बेच दिया। यह सवाल लगातार बना रहेगा। इस कार्यवाही पर अपर नगर आयुक्त सौरभ सिंह ने कहा कि हम लोगों से अपील करते हैं कि आप कोई भी जमीन खरीद फरोख्त करने से पहले उन जमीनों के कागजातो की सही तरीके से जांच करें ।जिससे कि भविष्य में आप लोगों का अहित न हो और इस तरह की कार्यवाहिया आगे भी लगातार चलती रहेगी।


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