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सफारी में लापरवाही या स्टंट? टाइगर की मांद तक पहुंचा वाहन, जांच के आदेश

सफारी में लापरवाही या स्टंट? टाइगर की मांद तक पहुंचा वाहन, जांच के आदेश

सफारी में लापरवाही या स्टंट? टाइगर की मांद तक पहुंचा वाहन, जांच के आदेश

पूजा भट्ट

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से जुड़े फाटो पर्यटन जोन में एक वायरल वीडियो ने जंगल सफारी की व्यवस्था और वन्यजीव सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। मामला तब सामने आया जब भाजपा नेता मदन जोशी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें एक जिप्सी वाहन टाइगर के बेहद करीब तक जाता दिखाई दिया।

वीडियो के साथ उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पर्यटकों को रोमांचक अनुभव देने की कोशिश में जंगल के नियमों और वन्यजीवों की सुरक्षा को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यवहार से न केवल जानवरों को खतरा हो सकता है बल्कि पर्यटकों की सुरक्षा भी दांव पर लग सकती है।

मदन जोशी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि कॉर्बेट के विभिन्न फाटो पर्यटन जोनों को विकसित करने में वर्षों का समय और प्रयास लगा है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिले हैं। लेकिन यदि कुछ चालक नियमों की अनदेखी करते हैं तो इससे पूरे इको-टूरिज्म मॉडल और संरक्षण की छवि प्रभावित हो सकती है।

वीडियो के सामने आने के बाद वन विभाग ने मामले की जांच की। जांच के आधार पर तराई पश्चिमी वन प्रभाग के डीएफओ प्रकाश चंद्र आर्य ने संबंधित जिप्सी चालक के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे क्षेत्र के सभी फाटो पर्यटन जोनों में अनिश्चितकाल के लिए प्रतिबंधित कर दिया।
वन विभाग ने साफ किया कि जंगल सफारी का उद्देश्य वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षित दूरी से देखना है, न कि उनके करीब जाकर जोखिम पैदा करना। विभाग के अनुसार किसी भी जानवर के अत्यधिक निकट जाना या उसके व्यवहार को प्रभावित करना नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।

इस कार्रवाई के बाद विभाग ने सभी जिप्सी चालकों और गाइडों को चेतावनी दी है कि तय मानकों का पालन अनिवार्य है। वहीं स्थानीय लोगों और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों ने इसे एक जरूरी संदेश बताया है—जंगल में रोमांच जरूरी है, लेकिन संरक्षण उससे भी ज्यादा।


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