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पूर्व DGP अशोक कुमार को हाईकोर्ट में देना पड़ा इस्तीफे का भरोसा, 3 हफ्ते में छोड़ेंगे VC पद

पूर्व DGP अशोक कुमार को हाईकोर्ट में देना पड़ा इस्तीफे का भरोसा, 3 हफ्ते में छोड़ेंगे VC पद

पूर्व DGP अशोक कुमार को हाईकोर्ट में देना पड़ा इस्तीफे का भरोसा, 3 हफ्ते में छोड़ेंगे VC पद

देहरादून/चंडीगढ़। उत्तराखंड के पूर्व DGP और हरियाणा स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, राई के कुलपति अशोक कुमार अब अपने पद पर आगे नहीं रहेंगे। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में उनकी नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान अशोक कुमार की ओर से अदालत को बताया गया कि वह व्यक्तिगत कारणों से कुलपति पद पर आगे सेवाएं देने की स्थिति में नहीं हैं और तीन सप्ताह के भीतर इस्तीफा सौंप देंगे।

अशोक कुमार के इस बयान के बाद न्यायमूर्ति हरप्रीत सिंह बराड़ की पीठ ने याचिका का निपटारा कर दिया। अदालत ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया कि इस्तीफा सौंपे जाने के एक सप्ताह के भीतर उसे स्वीकार किया जाए और 31 अक्टूबर 2026 तक नए कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी की जाए। स्थायी नियुक्ति होने तक विश्वविद्यालय के वरिष्ठतम डीन को कुलपति की जिम्मेदारी संभालने के निर्देश दिए गए हैं।

नियुक्ति पर उठे थे UGC नियमों के सवाल

अशोक कुमार की नियुक्ति को डॉ. देवेंद्र सिंह मोर और एक अन्य याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि उनकी नियुक्ति UGC Regulations, 2018 में निर्धारित कुलपति पद की योग्यता और अनुभव संबंधी प्रावधानों के अनुरूप नहीं थी। याचिकाकर्ताओं ने उनकी नियुक्ति के साथ-साथ वेतन निर्धारण से जुड़े आदेश को भी चुनौती दी थी।

याचिकाकर्ताओं की ओर से यह दलील दी गई थी कि कुलपति पद के लिए निर्धारित शैक्षणिक एवं अनुभव संबंधी योग्यताओं का पालन जरूरी है। इस मामले में अशोक कुमार की शैक्षणिक योग्यता और प्रोफेसर के रूप में अनुभव को लेकर सवाल उठाए गए थे।

1 मार्च 2024 को बने थे कुलपति

अशोक कुमार नवंबर 2023 में उत्तराखंड के DGP पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके करीब चार महीने बाद 1 मार्च 2024 को उन्हें हरियाणा की स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी का कुलपति नियुक्त किया गया था।

अब हाईकोर्ट के समक्ष दिए गए उनके बयान के बाद उनके कार्यकाल का अंत तय हो गया है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अशोक कुमार ने अपने पद से हटने की वजह व्यक्तिगत कारण बताई है; हाईकोर्ट के आदेश को उनकी नियुक्ति को सीधे तौर पर “अवैध घोषित करने” वाला फैसला बताना सटीक नहीं होगा।

अब नजर इस बात पर है कि हरियाणा सरकार नए कुलपति की नियुक्ति कब और किन मानदंडों के तहत करती है।

 


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