Wednesday, September 9th, 2026

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श्रमशक्ति नहीं, बल्कि उत्तराखंड की विकासशक्ति हैं श्रमिक- महाराज

Category Archives: उत्तराखंड

श्रमशक्ति नहीं, बल्कि उत्तराखंड की विकासशक्ति हैं श्रमिक- महाराज

महाराज ने शिविर में अनुपस्थित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही के दिये निर्देश

चौबट्टाखाल विधानसभा में श्रम विभाग द्वारा आयोजित शिविर में हजारों श्रमिकों ने करवाया पंजीकरण

सतपुली (पौड़ी गढ़वाल)। श्रम विभाग द्वारा प्रदेश में चल रहा श्रमिक पंजीकरण और नवीनीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है।उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड (UKBOCW) के तहत सबसे पहले प्रदेश में विधानसभा क्षेत्र चौबट्टाखाल में यह शिविर आयोजित किया गया है। पिछले चार दिनों में सभी विकासखण्डों में अभी तक 2779 से अधिक श्रमिक कार्ड बनाये गये हैं। कैबिनेट मंत्री और क्षेत्रीय विधायक सतपाल महाराज ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जब तक सभी श्रमिकों के कार्ड नहीं बन जाते तब तक आगे भी यह प्रक्रिया जारी रखी जाये।

प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और चौबट्टाखाल विधायक सतपाल महाराज ने अपने क्षेत्र भ्रमण के चौथे दिन बुधवार को न्याय पंचायत सतपुली स्थित एक वेडिंग प्वाइंट में श्रम विभाग द्वारा आयोजित श्रमिक पंजीकरण एवं नवीनीकरण शिविर में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग करते हुए यह बात कही। उन्होंने श्रमिक पंजीकरण एवं नवीनीकरण शिविर में उपस्थित श्रमिक भाई-बहनों और स्थानीय जनता को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार जगह-जगह शिविर लगा रही है ताकि श्रमिकों को कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। इस समय मनरेगा के 9.5 लाख सक्रिय श्रमिकों को भी इसी बोर्ड में जोड़ा जा रहा है – 90 दिन काम करने वाले मनरेगा श्रमिक अब इन योजनाओं के पात्र होंगे। नियमित नवीनीकरण न कराने पर पंजीकरण निष्क्रिय हो जाता है। जिससे पात्र श्रमिक को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता। इसलिए श्रमिकों को पंजीकरण करवाना अनिवार्य है।

प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और चौबट्टाखाल विधायक सतपाल महाराज ने कहा कि सरकार श्रमिकों को केवल श्रमशक्ति नहीं, बल्कि उत्तराखंड की विकासशक्ति मानती है और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “श्रमेव जयते” मंत्र पर यह अभियान चल रह है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के निर्माण में श्रमिकों की भूमिका सर्वोपरि है। कोई भी श्रम साध्य कार्य श्रमिकों के बिना संभव नहीं है। सरकार का ध्येय केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक उन योजनाओं का लाभ पहुँचाना है। ब्लॉक स्तर पर आयोजित किये जा रहे शिविर इसी प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं जहाँ जनता की समस्याओं का मौके पर ही निस्तारण किया जा रहा है।

महाराज ने इस मौके पर मौजूद श्रम विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिविर का समय बढ़ा कर प्रत्येक श्रमिक का पंजीकरण एवं नवीनीकरण अनिवार्य है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी पात्र श्रमिक को अनावश्यक परेशानी न हो, यह सुनिश्चित किया जाए। उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के अंतर्गत संचालित कल्याणकारी योजनाओं जैसे-पुत्री विवाह अनुदान, पुत्र-पुत्री की शिक्षा हेतु छात्रवृत्ति, चिकित्सा सहायता, मातृत्व लाभ, औजार सहायता और दुर्घटना की स्थिति में सहायता राशि आदि का लाभ प्रत्येक पात्र श्रमिक को समयबद्ध रूप से मिलना चाहिए। उन्होंने सभी श्रमिकों के परिश्रम को नमन करते हुए कहा, “आपका श्रम ही हमारे प्रदेश की प्रगति की आधारशिला है। आपकी खुशहाली और समृद्धि के लिए सरकार निरंतर प्रतिबद्ध है।” इस दौरान उन्होंने भाजपा संगठन को सशक्त बनाने के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारी से विस्तृत चर्चा करते हुए सरकार की योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने का आह्वान करते हुए सम्बंधित अधिकारियों के समक्ष क्षेत्रीय जनता की समस्या के त्वरित निस्तारण के निर्देश देते हुए अनुपस्थित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही के भी आदेश दिये।

कार्यक्रम के दौरान मण्डल अध्यक्ष सरवेन्द्र, जिला मंत्री वृजमोहन रावत, विधायक प्रतिनिधि सुरेन्द्र रावत, दिगम्बर रावत, वरिष्ठ भाजपा नेता वेद प्रकाश वर्मा, मनोनीत सदस्य अंकित कुमार, गंगा खन्तवाल, पूर्व चेयरमैन अंजना वर्मा, भागवन्ती देवी, जिला महामंत्री युवा मोर्चा पंकज कुमार, जिला महामंत्री महिपाल नेगी, मंडल अध्यक्ष महिला युवा मोर्चा पुष्पा असवाल, जिला मंत्री रेणु घिल्डियाल सहित सम्बंधित अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।


12 सितंबर को लगेगी राष्ट्रीय लोक अदालत, समझौते से होगा मामलों का त्वरित निस्तारण

लंबित शमनीय आपराधिक, चेक बाउंस, बैंक ऋण, पारिवारिक एवं दीवानी मामलों की होगी सुनवाई

देहरादून। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के निर्देशों के अनुपालन में उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति द्वारा आगामी 12 सितंबर 2026 (शनिवार) को माननीय उच्च न्यायालय परिसर, नैनीताल में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। लोक अदालत का उद्देश्य लंबित वादों एवं विवादों का आपसी सहमति, समझौते और सुलह के माध्यम से त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित करना है।

राष्ट्रीय लोक अदालत में दीवानी तथा शमनीय आपराधिक मामलों सहित विभिन्न प्रकार के ऐसे प्रकरणों की सुनवाई की जाएगी, जिनका आपसी समझौते के आधार पर निस्तारण संभव है। इनमें शमनीय आपराधिक मामले, परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के अंतर्गत चेक बाउंस के मामले, बैंक ऋण एवं वित्तीय विवाद, श्रम एवं रोजगार संबंधी मामले, बिजली एवं पानी के बिलों से संबंधित विवाद, पारिवारिक एवं वैवाहिक विवाद तथा भूमि अधिग्रहण, प्रतिकर एवं अन्य दीवानी मामले प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त आपसी समझौते से निस्तारित किए जा सकने वाले अन्य दीवानी वाद भी लोक अदालत में रखे जाएंगे।

लोक अदालत के माध्यम से मामलों के निस्तारण से वादकारियों को समय एवं धन की बचत होती है तथा उन्हें लंबी न्यायिक प्रक्रिया और बार-बार होने वाली तारीखों से राहत मिलती है। दोनों पक्षों की सहमति से विवाद का समाधान होने के कारण आपसी सौहार्द भी कायम होता है। लोक अदालत में मामले के निस्तारण पर नियमानुसार जमा न्यायालय शुल्क की वापसी का भी प्रावधान है।

उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति के अनुसार, जो पक्षकार अथवा अधिवक्ता शारीरिक रूप से उपस्थित होने में असमर्थ हैं, वे उच्च न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध लिंक के माध्यम से वर्चुअल माध्यम से भी राष्ट्रीय लोक अदालत की कार्यवाही में शामिल हो सकते हैं।

उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति ने अधिवक्ताओं एवं वादकारियों से अपील की है कि जो पक्षकार अपने मामलों का निस्तारण आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत में कराना चाहते हैं, वे 11 सितंबर 2026 अथवा उससे पूर्व अपने प्रकरणों को संबंधित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करा लें, ताकि आवश्यक प्रक्रिया एवं तैयारियां समय से पूरी की जा सकें।

राष्ट्रीय लोक अदालत से संबंधित अधिक जानकारी अथवा अपने मामले की सूची के संबंध में सहायता के लिए वादकारी उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति के कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। समिति ने अधिक से अधिक वादकारियों से इस अवसर का लाभ उठाते हुए आपसी सहमति से अपने मामलों का शीघ्र निस्तारण कराने की अपील की है।


पौड़ी में पशुपालन योजनाओं से 1,726 ग्रामीणों को मिला स्वरोजगार, 8.64 करोड़ की सहायता

पौड़ी। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को स्वरोजगार का माध्यम बनाने के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं का लाभ जिले के 1,726 ग्रामीणों को मिला है। वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक पशुपालन विभाग की योजनाओं के तहत लाभार्थियों को कुल 8 करोड़ 64 लाख 90 हजार 506 रुपये की आर्थिक सहायता दी गई। विभाग का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।

मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विशाल शर्मा ने बताया कि विभाग की ओर से ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और पात्र परिवारों को पशुपालन आधारित स्वरोजगार से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। आर्थिक सहायता के अलावा लाभार्थियों को पशुपालन इकाइयों के संचालन के लिए तकनीकी मार्गदर्शन और विभागीय सहयोग भी दिया जा रहा है।

पिछले पांच वर्षों में गौपालन योजना के तहत 361 लाभार्थियों को 1.30 करोड़ रुपये की सहायता मिली। वहीं सामान्य वर्ग बकरी पालन योजना के 162 लाभार्थियों को 1.02 करोड़ रुपये और एससीपी बकरी पालन योजना के 241 लाभार्थियों को 1.52 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी गई।

इसी तरह महिला बकरी पालन योजना के तहत 82 लाभार्थियों को 28.70 लाख रुपये तथा मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन के अंतर्गत 305 लाभार्थियों को 1.92 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए।

विभाग की ओर से गौपालन, बकरी पालन, महिला बकरी पालन, मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन, गोट वैली और ब्रायलर फार्म समेत कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनके जरिए ग्रामीणों को पशुपालन इकाइयां स्थापित करने और दूध, मांस व अंडा उत्पादन जैसी गतिविधियों से आय अर्जित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। विभाग का प्रयास है कि अधिक से अधिक पात्र ग्रामीणों, महिलाओं और युवाओं को इन योजनाओं से जोड़ा जाए। इससे ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।


15 सितम्बर से 18 अक्टूबर तक आयोजित होगा ‘सेवा संकल्प अभियान’

स्वच्छता, स्वास्थ्य, नवाचार और जनभागीदारी से जुड़ी होंगी विभिन्न गतिविधियां

देहरादून। आगामी 15 सितंबर से 18 अक्टूबर, 2026 तक व्यापक स्तर पर ‘सेवा संकल्प अभियान’ का आयोजन किया जाएगा। ‘सेवा संकल्प अभियान’ का मूल उदेश्य सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों के साथ आम नागरिकों को सेवा, स्वच्छता, स्वास्थ्य, पर्यावरण और राष्ट्र निर्माण की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है।

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में बुधवार को कलक्ट्रेट सभागार में रेखीय विभागों के अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक हुई। जिसमें स्वच्छता, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, नवाचार और जनभागीदारी पर केंद्रित इस महत्वाकांक्षी अभियान की रूपरेखा तैयार कर रेखीय विभागों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए।

विभिन्न थीमों के जरिए तय होंगे जनहित के लक्ष्य
जिलाधिकारी ने बताया कि अभियान के दौरान ‘भारत 2047’, ‘सेवा और सपना’, ‘नमो 25 गाथा’, ‘आंगन का उत्सव’, ‘25 साल-25 कहानियां’ और ‘जन कल्याण संवाद’ जैसे विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके तहत शिक्षण संस्थानों में ‘विकसित भारत’ की थीम पर निबंध व चित्रकला प्रतियोगिताएं होंगी, जबकि ‘नमो 25 गाथा’ के अंतर्गत प्रेरणादायी बहुभाषी नाटकों का मंचन किया जाएगा।

सार्वजनिक स्थलों पर चलेगा स्वच्छता का विशेष अभियान
अभियान के पहले चरण में सभी सरकारी कार्यालयों, विद्यालयों, महाविद्यालयों, नगर निकायों, अस्पतालों, धार्मिक स्थलों और ग्राम पंचायतों में सघन स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण का संदेश प्रसारित करने के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन एवं कृतित्व से जुड़ी पुस्तकों का वितरण भी सुनिश्चित किया जाएगा।

युवाओं के लिए नवाचार और खेलकूद प्रतियोगिताएं
युवा वर्ग को तकनीकी और नवाचार से जोड़ने के लिए हैकाथॉन, इनोवेशन चौलेंज और शॉर्ट फिल्म निर्माण जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा 7 अक्टूबर को ‘सेवा ज्योति यात्रा दिवस’ के अवसर पर भव्य रिले मैराथन निकाली जाएगी, जिसमें आम नागरिकों की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

उत्तराखंड की विकास गाथा का होगा प्रदर्शन
रंगोली राष्ट्र (17 सितंबर)-विशाल रंगोलियों के जरिए भारत और उत्तराखंड की सांस्कृतिक व विकास यात्रा को जीवंत किया जाएगा।

प्रगति के 25 स्तंभ (7 से 17 अक्टूबर)-प्रोजेक्शन मैपिंग, लाइट शो और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से केदारनाथ-बदरीनाथ पुनर्निर्माण, मानसखंड मंदिर माला मिशन, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे, लखवाड़ और जमरानी बांध जैसी प्रमुख परियोजनाओं को प्रदर्शित किया जाएगा।

‘प्रोजेक्ट 25-25-25’ और स्वास्थ्य शिविरों पर रहेगा जोर
अभियान के तहत ‘प्रोजेक्ट 25-25-25’ के माध्यम से नागरिकों को हर दिन कम से कम 25 मिनट देश के नाम समर्पित करते हुए स्वच्छता, वृक्षारोपण और डिजिटल साक्षरता जैसी गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। इसके अतिरिक्त, बहुद्देशीय एवं चिकित्सा शिविरों में दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग वितरित किए जाएंगे, रक्तदान शिविर लगेंगे और अस्पतालों में मरीजों को फल बांटे जाएंगे।

गांधी जयंती पर स्वदेशी और ‘वोकल फॉर लोकल’ का संकल्प
दो अक्टूबर को महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर नागरिकों को स्वदेशी एवं खादी अपनाने की शपथ दिलाई जाएगी। विद्यालयों में ‘फिट इंडिया’ गतिविधियों के साथ ही ‘वोकल फॉर लोकल’ के प्रति व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्यक्रमों की समयबद्ध तैयारी करने और इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए हैं, ताकि इस आयोजन को एक सफल जन-अभियान का स्वरूप दिया जा सके।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) स्मृता परमार, जिला सूचना अधिकारी प्रियंका जोशी सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।


पौड़ी में राजस्व समीक्षा बैठक, पुराने वादों के शीघ्र निस्तारण और वसूली में तेजी के निर्देश

पौड़ी। जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया की अध्यक्षता में बुधवार को कलक्ट्रेट सभागार में राजस्व विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में राजस्व वसूली, लंबित राजस्व वाद, दैवीय आपदा प्रबंधन, भूलेख, फार्मर रजिस्ट्री, डिजिटल क्रॉप सर्वे, तहसील दिवस और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन समेत विभिन्न मामलों की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को पुराने राजस्व वादों का प्राथमिकता से निस्तारण करने और राजस्व वसूली में तेजी लाने के निर्देश दिए।

राजस्व वसूली की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने उपजिलाधिकारियों और तहसीलदारों को अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निगरानी करने तथा निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप वसूली सुनिश्चित करने को कहा। बड़े बकायेदारों से विविध देयकों की वसूली में तेजी लाने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि जिन अमीनों की वसूली 50 प्रतिशत से कम है, उनका वेतन रोका जाए।

राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने एक वर्ष और तीन वर्ष से अधिक पुराने वादों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अगले एक माह में अधिक से अधिक पुराने मामलों का निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा। धारा 166 और 167 से संबंधित मामलों को भी प्राथमिकता देने तथा उनकी अद्यतन स्थिति जिला कार्यालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।

दैवीय आपदा प्रबंधन की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि आपदा की सूचना मिलते ही संबंधित राजस्व उपनिरीक्षक उसी दिन मौके पर पहुंचकर क्षति का आकलन करें और रिपोर्ट उपलब्ध कराएं। उन्होंने ग्राम स्तर पर नुकसान का शीघ्र आकलन करने के लिए खंड विकास अधिकारियों और संबंधित विभागों के साथ साप्ताहिक बैठक करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने तहसीलों में वुडकटर समेत जरूरी उपकरण और संबंधित वाहनों में आपदा किट उपलब्ध रखने को कहा, ताकि आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके। बैठक में बताया गया कि जिले में क्षतिग्रस्त 63 पटवारी चौकियों में से अधिकांश का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि शेष पर काम जारी है।

खातेदारों के अंश निर्धारण कार्य में सत्यापन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। भूलेख एप्लिकेशन पर उत्तराधिकार और विरासत से संबंधित मामलों के निस्तारण में कम प्रगति पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई। उन्होंने लंबित भू-अनुमति पोर्टल के मामलों में भी तेजी लाने को कहा।

फार्मर रजिस्ट्री में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए। साथ ही खरीफ फसल के डिजिटल क्रॉप सर्वे का काम जल्द शुरू कराने को कहा गया।

तहसील दिवस और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से प्राप्त शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि शिकायतों का केवल औपचारिक निस्तारण न हो, बल्कि संबंधित व्यक्ति की समस्या का वास्तविक समाधान किया जाए।

सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन और अन्य देयकों की समीक्षा के दौरान उन्होंने कहा कि ऐसे मामले लंबे समय तक लंबित नहीं रहने चाहिए। सभी प्रकरणों का निर्धारित समयसीमा में निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

इसके अलावा ई-ऑफिस प्रणाली को प्रभावी बनाने, लंबित प्रकरणों का समय से निस्तारण करने और तहसीलों में डिजिटल व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने जिला पर्यटन विकास अधिकारी के साथ होटल और होमस्टे का सत्यापन कराने तथा नियमों का उल्लंघन मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई करने को भी कहा।

बैठक में अपर जिलाधिकारी एफआर चौहान, संयुक्त मजिस्ट्रेट गौरी प्रभात, उपजिलाधिकारी श्रीनगर नूपुर वर्मा, चौबट्टाखाल रेखा आर्य, लैंसडाउन शालिनी मौर्य सहित तहसीलदार और संबंधित अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।


नशे के खिलाफ सख्ती: संवेदनशील इलाकों की होगी GIS मैपिंग, पोस्त की खेती पर छापेमारी के निर्देश

नशा मुक्त समाज के लिए विभागीय समन्वय से चलाएं व्यापक जनजागरूकता अभियान- एडीएम

देहरादून। जिले में बढ़ते नशे के प्रचलन और मादक पदार्थों के अवैध कारोबार पर लगाम कसने के लिए प्रशासन ने कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए हैं। बुधवार को अपर जिलाधिकारी प्रशासन स्मृता परमार की अध्यक्षता में एनडीपीएस एक्ट, 1985 के तहत जिला स्तरीय एनकॉर्ड समिति की बैठक हुई। बैठक में नशे के खिलाफ अभियान को प्रभावी बनाने के साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी और जनजागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।

अपर जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करते हुए मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध बिक्री पर प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नशे की समस्या सिर्फ कानून-व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर समाज और खासकर युवाओं के भविष्य पर पड़ता है। ऐसे में कार्रवाई के साथ लोगों को जागरूक करना भी जरूरी है।

बैठक में शिक्षा, पुलिस, स्वास्थ्य और समाज कल्याण विभाग को मिलकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। स्कूलों और कॉलेजों में नियमित कार्यशालाएं, जागरूकता कार्यक्रम और संवाद सत्र आयोजित करने को कहा गया, ताकि छात्र-छात्राओं को नशे के दुष्परिणाम और इससे बचाव के तरीकों की जानकारी मिल सके।

पुलिस विभाग को जिले के नशा प्रभावित और संवेदनशील हॉटस्पॉट क्षेत्रों की GIS मैपिंग कराने के निर्देश दिए गए हैं। इन इलाकों की नियमित निगरानी के साथ मादक पदार्थों की खरीद-बिक्री और अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को कहा गया।

वहीं, पोस्त की खेती पर रोक लगाने के लिए आबकारी विभाग को संबंधित क्षेत्रों में नियमित छापेमारी करने के निर्देश दिए गए। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि नशे के अवैध कारोबार से जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई के साथ ही नशे की गिरफ्त में आए लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक पुनर्वास से जुड़ी आवश्यक सहायता भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

अपर जिलाधिकारी ने अधिकारियों को नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की नियमित समीक्षा करने और कार्रवाई को लगातार प्रभावी एवं परिणामोन्मुख बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी विभागों से ठोस कार्ययोजना के तहत समन्वय के साथ काम करने को कहा।

बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज कुमार शर्मा, पुलिस क्षेत्राधिकारी अंकित कंडारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल, आबकारी निरीक्षक शिव प्रसाद व्यास समेत शिक्षा, पुलिस, स्वास्थ्य, आबकारी और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।


स्वच्छ एवं कचरा-मुक्त उत्तराखंड की दिशा में मजबूत पहल, नए नियमों के क्रियान्वयन पर जोर

कचरा प्रबंधन में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर, जिलों में विशेष सेल गठित

स्रोत पर कचरा पृथक्करण से लेकर वैज्ञानिक निस्तारण तक, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को मिलेगी नई गति- डॉ. पराग मधुकर धकाते

देहरादून। उत्तराखंड में ठोस कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन और कचरा निस्तारण व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी तेज हो गई है। बुधवार को सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने बताया कि नए नियमों के तहत राज्य के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन व्यवस्था को और व्यवस्थित किया जा रहा है।

डॉ. धकाते के मुताबिक, देशभर में 1 अप्रैल 2026 से लागू हुए नए नियमों में कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के साथ सर्कुलर इकोनॉमी, स्रोत पर कचरा पृथक्करण, रिसाइक्लिंग और संसाधनों के दोबारा इस्तेमाल पर विशेष ध्यान दिया गया है।

अब चार श्रेणियों में करना होगा कचरे का पृथक्करण

नए नियमों में कचरे को अलग-अलग करने की व्यवस्था में बदलाव किया गया है। वर्ष 2016 के नियमों में जहां तीन श्रेणियां थीं, वहीं अब कचरे को गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष देखभाल वाले कचरे की चार श्रेणियों में अलग करने का प्रावधान किया गया है।

इसके अलावा 2,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले परिसर, प्रतिदिन 40 हजार लीटर से अधिक पानी की खपत करने वाले संस्थान या रोजाना 100 किलोग्राम से अधिक ठोस कचरा पैदा करने वाले प्रतिष्ठानों को बल्क वेस्ट जनरेटर की श्रेणी में रखा जाएगा। ऐसे संस्थानों के पंजीकरण के साथ उनके स्तर पर कचरे के प्रसंस्करण और रिसाइक्लिंग की जिम्मेदारी भी तय की गई है।

हर जिले में गठित की गई स्पेशल सेल

प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट के 19 फरवरी 2026 के निर्देशों के बाद प्रदेश के प्रत्येक जिले में डिस्ट्रिक्ट स्पेशल सेल गठित किए गए हैं। इन सेल के जरिए शहरी और ग्रामीण निकायों में ठोस कचरा प्रबंधन, डंपिंग साइट और पुराने यानी लीगेसी वेस्ट के निस्तारण की निगरानी की जा रही है।

सरकार ने दिसंबर 2026 तक लीगेसी वेस्ट के निस्तारण का लक्ष्य रखा है। अधिकारियों के अनुसार, प्रदेश में फिलहाल करीब 100 प्रतिशत डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण किया जा रहा है।

500 वाहनों में होंगे चार अलग-अलग कम्पार्टमेंट

चार श्रेणियों में कचरा अलग-अलग एकत्र करने के लिए करीब 500 कचरा वाहनों में चार कम्पार्टमेंट तैयार किए जा रहे हैं। इसके साथ ही कचरा संग्रहण वाहनों की निगरानी के लिए डिजिटल व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम भी लागू किया गया है। इससे वाहनों की आवाजाही पर नजर रखने के साथ कचरा संग्रहण व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ाने में मदद मिलेगी।

रोजाना 1,930 मीट्रिक टन कचरा हो रहा पैदा

अधिकारियों के मुताबिक उत्तराखंड में प्रतिदिन करीब 1,930 मीट्रिक टन ठोस कचरा उत्पन्न हो रहा है। इसमें से लगभग 1,800 मीट्रिक टन कचरे का रोजाना प्रसंस्करण किया जा रहा है। प्लास्टिक कचरे के लिए भी अलग से प्रसंस्करण व्यवस्था की गई है।

कचरा संग्रहण को मजबूत करने के लिए राज्य में 657 नए वाहन खरीदे जा रहे हैं, जिनमें करीब 480 ई-वाहन शामिल हैं। वर्तमान में प्रदेश में 22 इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट, लगभग 50 मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी और 600 से ज्यादा वेस्ट कम्पोस्टर संचालित किए जा रहे हैं।

आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी

अधिकारियों ने कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए नगरीय निकायों, ग्राम पंचायतों, जिला प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और आम जनता की सामूहिक भागीदारी जरूरी है। स्रोत पर कचरे को अलग करना और उसके सही तरीके से निस्तारण में सहयोग करना इस व्यवस्था को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सहायक निदेशक, पीआईबी देहरादून संजीव सुन्दिरयाल और निदेशक शहरी विकास प्रवीण कुमार भी मौजूद रहे।


नितिन नबीन के कुमाऊं दौरे को लेकर तैयारियां तेज, मंत्री गणेश जोशी ने अधिकारियों के साथ की बैठक

गणेश जोशी ने दिए जरूरी निर्देश

हल्द्वानी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के आगामी 10 सितंबर को प्रस्तावित कुमाऊं दौरे को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने हल्द्वानी में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक कर ‘गौरव सेनानी मिलन’ कार्यक्रम की तैयारियों और व्यवस्थाओं की समीक्षा की।

बैठक के दौरान मंत्री ने अधिकारियों को कार्यक्रम स्थल पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से स्वच्छता, पेयजल, शौचालय और अन्य मूलभूत सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा, ताकि कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

गणेश जोशी ने कार्यक्रम को लेकर आयोजित प्रेस वार्ता को भी संबोधित किया। उन्होंने पत्रकारों को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के कुमाऊं दौरे और प्रस्तावित कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी साझा की।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष का कुमाऊं दौरा पार्टी कार्यकर्ताओं और भाजपा परिवार के सदस्यों के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। उनके दौरे से कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार होगा। साथ ही, ‘गौरव सेनानी मिलन’ कार्यक्रम के माध्यम से पूर्व सैनिकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ संवाद का अवसर भी मिलेगा।

मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यक्रम से जुड़ी सभी तैयारियां निर्धारित समयसीमा में पूरी की जाएं और व्यवस्थाओं में किसी भी स्तर पर कमी न रहे।


जर्जर भवनों का होगा सर्वे, डीएम ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

सभी तकनीकी पहलुओं की जांच के बाद ही किया जाए भवन को जर्जर घोषित- जिलाधिकारी

देहरादून। जनपद में जर्जर और संभावित रूप से असुरक्षित भवनों को लेकर जिला प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने वर्चुअल बैठक कर अधिकारियों को ऐसे भवनों का प्राथमिकता के आधार पर चिन्हीकरण करने और उनकी तकनीकी जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि किसी भी भवन को जर्जर या गिरासू घोषित करने से पहले उसकी संरचनात्मक स्थिति का विशेषज्ञों से गहन परीक्षण कराया जाए। भवन की मजबूती, सुरक्षा और आसपास रहने वाले लोगों पर संभावित खतरे समेत सभी तकनीकी एवं विधिक पहलुओं का आकलन करने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाए।

उन्होंने सभी उप जिलाधिकारियों के साथ नगर निगम और नगर पालिका परिषद के अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में जर्जर भवनों का सर्वे कर सूची तैयार करने के निर्देश दिए। सूची में भवन की मौजूदा स्थिति, संरचनात्मक सुरक्षा तथा आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को भी शामिल करने को कहा गया है।

डीएम ने नगर निगम, नगर पालिका परिषदों, लोक निर्माण विभाग और मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) को संयुक्त रूप से विशेषज्ञ तकनीकी टीमें गठित करने के निर्देश दिए। इन टीमों के माध्यम से भवनों का तकनीकी सर्वेक्षण कर उनकी वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि जनसुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। संभावित रूप से खतरनाक भवनों के कारण किसी भी तरह की दुर्घटना या जनहानि न हो, इसके लिए समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाएं। विशेष रूप से अत्यधिक जर्जर और संवेदनशील भवनों के मामले में तत्काल सुरक्षात्मक उपाय किए जाएं।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि चिन्हीकरण और जांच की पूरी प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए। भवनों को गिरासू घोषित करने की कार्रवाई निर्धारित तकनीकी मानकों और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप ही की जाए। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने को कहा।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के.के. मिश्रा, अपर जिलाधिकारी प्रशासन स्मृता परमार, संयुक्त मजिस्ट्रेट राहुल आनंद, नगर आयुक्त ऋषिकेश विजयनाथ शुक्ला, उप जिलाधिकारी मुख्यालय रविंद्र ज्वान्ठा, उप जिलाधिकारी सदर अपूर्वा सिंह, उप जिलाधिकारी विकासनगर विनोद कुमार, उप जिलाधिकारी ऋषिकेश कुमकुम जोशी, उप जिलाधिकारी डोईवाला अपर्णा ढोंडियाल, उप जिलाधिकारी चकराता प्रेमलाल, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ऋषभ कुमार समेत संबंधित विभागों के अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े रहे।


पौधे नहीं, भविष्य की हरियाली तैयार कर रहा एमडीडीए

रायपुर आर्मी फायरिंग रेंज में फलदार और जड़ी-बूटी वाले पौधों का रोपण, सुरक्षा के लिए वायरिंग और दो साल के रखरखाव की व्यवस्था

पौधे लगाना पहला कदम, उन्हें पेड़ बनाना असली जिम्मेदारी – बंशीधर तिवारी

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने देहरादून की हरियाली को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। प्राधिकरण ने रायपुर स्थित आर्मी फायरिंग रेंज में विभिन्न प्रजातियों के फलदार एवं जड़ी-बूटी वाले पौधों का रोपण कर हरित क्षेत्र के विस्तार की पहल की है। खास बात यह है कि एमडीडीए ने पौधारोपण को महज एक अभियान तक सीमित नहीं रखा, बल्कि पौधों की सुरक्षा और उनके आगामी दो वर्षों तक रखरखाव की भी जिम्मेदारी तय की है। पौधों को सुरक्षित रखने के लिए रोपण क्षेत्र के चारों ओर लोहे की वायरिंग भी कराई गई है।

पौधारोपण से आगे, पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी
रायपुर आर्मी फायरिंग रेंज में एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने आर्मी अधिकारियों के साथ पौधारोपण किया। फलदार और जड़ी-बूटी वाले पौधों का चयन क्षेत्र में हरित आवरण बढ़ाने के साथ पर्यावरणीय विविधता को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है। प्राधिकरण ने इसके लिए टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से आवश्यक कार्रवाई पूरी की है। एमडीडीए की इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू पौधारोपण के बाद की व्यवस्था है। अक्सर पौधारोपण अभियान के बाद पौधों की सुरक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में पौधे नष्ट हो जाते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए प्राधिकरण ने इस बार शुरुआत से ही सुरक्षा और रखरखाव की व्यवस्था की है। पौधों को नुकसान से बचाने के लिए लोहे की वायरिंग की गई है, जबकि दो वर्ष तक उनके रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

विकास की रफ्तार के साथ हरियाली की भी चिंता
देहरादून तेजी से विस्तार कर रहा है। बढ़ती आबादी, नई आवासीय गतिविधियों और निर्माण कार्यों के बीच शहर की प्राकृतिक पहचान और हरित क्षेत्रों को सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे समय में एमडीडीए की यह पहल विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्राधिकरण का प्रयास है कि नियोजित विकास के साथ शहर के पर्यावरणीय संतुलन को भी मजबूती मिले। फलदार और जड़ी-बूटी वाले पौधों का रोपण इसी व्यापक सोच का हिस्सा है। इससे आने वाले वर्षों में क्षेत्र में हरित आवरण बढ़ने के साथ जैव विविधता को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

सेना के साथ हरित अभियान का संदेश
रायपुर आर्मी फायरिंग रेंज में सेना के अधिकारियों के साथ किया गया पौधारोपण पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास का संदेश भी देता है। सैन्य क्षेत्र जैसे स्थान पर हरित आवरण को बढ़ाने की यह पहल प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में सकारात्मक कदम है। प्राधिकरण की ओर से रोपित पौधों की नियमित देखभाल सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है, ताकि अभियान का असर लंबे समय तक दिखाई दे।

पौधे लगाना पहला कदम, उन्हें पेड़ बनाना असली जिम्मेदारी – बंशीधर तिवारी
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि देहरादून की पहचान सिर्फ एक विकसित शहर के रूप में नहीं, बल्कि उसकी प्राकृतिक सुंदरता, हरियाली और स्वच्छ वातावरण से भी है। तेजी से बढ़ते शहरी विकास के बीच पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पौधे लगाना केवल पहला चरण है, उन्हें सुरक्षित रखना और पेड़ बनने तक उनकी देखभाल करना वास्तविक जिम्मेदारी है। इसी सोच के तहत रायपुर आर्मी फायरिंग रेंज में लगाए गए पौधों की सुरक्षा के लिए वायरिंग और दो वर्ष के रखरखाव की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह सामूहिक दायित्व है। विकास योजनाओं को आगे बढ़ाते हुए प्रकृति और हरियाली को साथ लेकर चलना ही भविष्य के देहरादून की मजबूत नींव तैयार करेगा।

संरक्षण पर फोकस, तभी सफल होगा अभियान – मोहन सिंह बर्निया
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि प्राधिकरण पौधारोपण के साथ उनके संरक्षण और रखरखाव को भी प्राथमिकता दे रहा है। रायपुर आर्मी फायरिंग रेंज में लगाए गए पौधों की सुरक्षा के लिए लोहे की वायरिंग की गई है और दो वर्ष तक नियमित रखरखाव की व्यवस्था की गई है। इससे पौधों को सुरक्षित वातावरण मिलेगा और उनके बेहतर विकास में मदद होगी। देहरादून की हरियाली को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रखने की दिशा में एमडीडीए का यह प्रयास यह संदेश देता है कि शहर का विकास तभी सार्थक है, जब उसकी हरियाली भी साथ-साथ बढ़े।


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