Tuesday, September 8th, 2026

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शिक्षक केवल विद्यार्थी का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करता है- मुख्यमंत्री

Category Archives: उत्तराखंड

शिक्षक केवल विद्यार्थी का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करता है- मुख्यमंत्री

‘ज्ञान गंगा सम्मान समारोह एवं छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम’ में शामिल हुए मुख्यमंत्री धामी

बच्चों को अच्छी शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन और सकारात्मक मार्गदर्शन देना भी जरूरी- मुख्यमंत्री

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कुसुम कांता फाउंडेशन एवं मंथन वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा आयोजित ‘ज्ञान गंगा सम्मान समारोह एवं छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम’ में प्रतिभाग किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को सम्मानित किया तथा मेधावी छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की। उन्होंने सम्मानित शिक्षकों एवं छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्ञान गंगा सम्मान समारोह केवल सम्मान और छात्रवृत्ति वितरण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रतिभाओं को पहचान देने, शिक्षा को प्रोत्साहित करने और बच्चों के सपनों को नई उड़ान देने का सराहनीय प्रयास है। किसी बच्चे की शिक्षा में सहयोग करना केवल उसकी आर्थिक सहायता करना नहीं, बल्कि उसके सपनों को पूरा करने में सहभागी बनना है।

मुख्यमंत्री ने स्व. कुसुम कांता को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि संगीत, साहित्य और शिक्षा के प्रति उनका समर्पण प्रेरणादायी रहा है। उन्होंने कहा कि उनके जीवन-मूल्यों और सेवा भाव को आगे बढ़ाते हुए कुसुम कांता फाउंडेशन पिछले छह वर्षों से शिक्षा, महिला सशक्तीकरण, कौशल विकास, डिजिटल साक्षरता और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सराहनीय कार्य कर रहा है। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तीकरण, कौशल विकास, सामाजिक जागरूकता एवं जनकल्याण के क्षेत्र में मंथन वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा किए जा रहे कार्यों की भी सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को सदैव सर्वोच्च स्थान दिया गया है। शिक्षक केवल किताबी ज्ञान नहीं देता, बल्कि विद्यार्थी को दृष्टि, आत्मविश्वास और संस्कार देने के साथ उसकी प्रतिभा को पहचानकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। एक शिक्षक कक्षा में केवल एक विद्यार्थी का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करता है। उन्होंने शिक्षकों से बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ ऐसे संस्कार और जीवन-मूल्य देने का आह्वान किया, जो उन्हें अच्छा इंसान और जिम्मेदार नागरिक बनाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से देश की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, व्यावहारिक और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। उत्तराखंड भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने वाले देश के अग्रणी राज्यों में रहा है। राज्य सरकार प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के साथ शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी एवं निष्पक्ष बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है।

मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से बच्चों को सुविधाएं देने के साथ अपना समय, अच्छे संस्कार और अनुशासन देने तथा प्रत्येक परिस्थिति में उनका सकारात्मक मार्गदर्शन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसी बच्चे का उज्ज्वल भविष्य केवल अच्छी शिक्षा से नहीं बनता, इसके लिए विद्यालय और परिवार दोनों का साथ चलना आवश्यक है। आने वाली पीढ़ी के निर्माण में माता-पिता और शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत, अनुशासन एवं दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जीवन में आने वाली असफलताओं से सीखते हुए लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ना चाहिए। कठिन रास्ते ही अक्सर बड़ी मंजिलों तक लेकर जाते हैं। विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के लिए आवश्यक अवसर और सहयोग उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार हर कदम पर उनके साथ खड़ी है।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि वे भविष्य में शिक्षक, वैज्ञानिक, चिकित्सक, इंजीनियर, खिलाड़ी, उद्यमी, प्रशासनिक अधिकारी अथवा किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ें, सबसे पहले एक अच्छा इंसान और जिम्मेदार नागरिक बनें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश के विद्यार्थी अपने ज्ञान, प्रतिभा, मेहनत और अच्छे संस्कारों के बल पर उत्तराखंड और देश के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने अपनी धर्मपत्नी स्व. कुसुम कांता का भावपूर्ण स्मरण करते हुए कहा कि शिक्षा, साहित्य, संगीत और समाज सेवा के प्रति उनका विशेष अनुराग था। एक शिक्षिका के रूप में उन्होंने शिक्षा और संस्कारों को सदैव महत्वपूर्ण स्थान दिया। उनके जीवन-मूल्यों और सेवा भाव को आगे बढ़ाते हुए शिक्षा एवं समाज हित में किए जा रहे कार्य ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि हैं।

डॉ. निशंक ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति के संपूर्ण व्यक्तित्व और राष्ट्र के भविष्य के निर्माण का आधार है। शिक्षक विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ संस्कार, आत्मविश्वास और कर्तव्यबोध विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनसे अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग समाज एवं राष्ट्र के हित में करने का आह्वान किया। उन्होंने कुसुम कांता फाउंडेशन और मंथन वेलफेयर एसोसिएशन के प्रयासों की सराहना की।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री खजान दास, विधायक सविता कपूर, प्रो. सुधारानी पाण्डेय, कुसुम कांता फाउंडेशन की संस्थापक विदुषी निशंक, आर्यन देव उनियाल सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।


दिव्यांगजनों की प्रतिभा और उपलब्धियों को मिलेगा सम्मान

उत्कृष्ट कर्मचारी, स्व-रोजगार में रत दिव्यांग, सेवायोजक एवं खिलाड़ी राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए कर सकते हैं आवेदन

देहरादून। दिव्यांगजनों की प्रतिभा, कार्यकुशलता और उल्लेखनीय उपलब्धियों को सम्मान देने के लिए समाज कल्याण विभाग, उत्तराखंड ने राज्य स्तरीय पुरस्कारों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विभिन्न श्रेणियों में दिए जाने वाले इन पुरस्कारों के लिए पात्र व्यक्ति निर्धारित प्रारूप में आवेदन कर सकते हैं।

जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल ने बताया कि विश्व दिव्यांग दिवस के अवसर पर 3 दिसंबर 2026 को आयोजित समारोह में चयनित व्यक्तियों को राज्य स्तरीय पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा।

इन पुरस्कारों के लिए उत्कृष्ट एवं दक्ष दिव्यांग कर्मचारी, स्व-रोजगार करने वाले दिव्यांग व्यक्ति, दिव्यांगजनों के सेवायोजक/प्लेसमेंट अधिकारी और उत्कृष्ट दिव्यांग खिलाड़ी आवेदन कर सकते हैं। विभाग की ओर से संबंधित पात्र व्यक्तियों से निर्धारित प्रारूप में आवेदन मांगे गए हैं।

आवेदन के साथ ये दस्तावेज जरूरी

आवेदकों को आवेदन पत्र के साथ दिव्यांगता प्रमाण-पत्र, नवीनतम फोटो, विस्तृत बायोडाटा या जीवन परिचय, विशेष उपलब्धियों से संबंधित दस्तावेज और संस्तुति प्रस्तुत करनी होगी। इसके अलावा आवेदक को 10 रुपये के स्टाम्प पर शपथ-पत्र भी देना होगा, जिसमें यह उल्लेख हो कि उसे इससे पहले किसी राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित नहीं किया गया है।

26 सितंबर तक जमा होंगे आवेदन

पात्र आवेदकों को आवेदन और सभी जरूरी दस्तावेज तीन मूल प्रतियों में निर्धारित प्रारूप के अनुसार तैयार करने होंगे। आवेदन 26 सितंबर 2026 तक जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय, 26 ईसी रोड, सर्वे चौक के समीप, देहरादून में जमा किए जा सकते हैं।

समाज कल्याण विभाग ने पात्र दिव्यांगजनों और संबंधित व्यक्तियों से अपील की है कि वे अपनी प्रतिभा और उपलब्धियों को राज्य स्तर पर पहचान दिलाने के इस अवसर का लाभ उठाएं और निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन प्रस्तुत करें।


कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री से की शिष्टाचार भेंट

आंगनवाड़ी सेवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर हुई चर्चा

आंगनवाड़ी केंद्रों को सक्षम बनाने की पहल तेज, बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने केंद्रीय मंत्री के सामने रखा प्रस्ताव

देहरादून/नई दिल्ली। उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने नई दिल्ली में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उत्तराखंड में महिला एवं बाल विकास विभाग से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।

भेंट के दौरान प्रदेश में आंगनवाड़ी केंद्रों के सुदृढ़ीकरण एवं उन्हें सक्षम आंगनवाड़ी केंद्र के रूप में विकसित किए जाने से संबंधित विषय प्रमुखता से रखा गया।

कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि वर्तमान में जनपद उधम सिंह नगर एवं हरिद्वार में कुछ आंगनवाड़ी केंद्रों को सक्षम आंगनवाड़ी केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

कैबिनेट मंत्री ने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि प्रदेश के अन्य जनपदों में भी पर्याप्त भवन एवं स्थान उपलब्ध वाले आंगनवाड़ी केंद्रों को सक्षम आंगनवाड़ी केंद्र के रूप में विकसित किए जाने की अनुमति एवं आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाए। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने इस विषय पर सकारात्मक रुख व्यक्त करते हुए आवश्यक स्तर पर विचार किए जाने का आश्वासन दिया।

वहीं मंत्री रेखा आर्या द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के टेक होम राशन (THR) से संबंधित विषय भी रखा गया। कैबिनेट मंत्री ने बताया कि विभिन्न कारणों से भारत सरकार से टेक होम राशन की प्राप्ति में आ रही कठिनाइयों के चलते वित्तीय स्तर पर समस्या उत्पन्न हो रही है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से इस विषय का शीघ्र समाधान किए जाने का अनुरोध किया।

इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2026-27 में FRS के माध्यम से बच्चों की गणना में विभिन्न विषम परिस्थितियों के कारण अपेक्षित प्रगति नहीं हो पाने तथा गणना से छूटे हुए लगभग 60 प्रतिशत बच्चों से संबंधित विषय भी केंद्रीय मंत्री के समक्ष रखा गया। इस संबंध में आवश्यक समाधान एवं आगामी कार्यवाही का अनुरोध किया गया।

कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि प्रदेश में आंगनवाड़ी व्यवस्था को मजबूत करने, बच्चों को बेहतर पोषण एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा आंगनवाड़ी केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त करने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा दोनों विषयों पर सकारात्मक कार्यवाही करते हुए शीघ्र समाधान किया जाएगा।


बीरोंखाल में श्रमिक पंजीकरण शिविर, सैकड़ों श्रमिकों ने लिया हिस्सा

बीरोंखाल (पौड़ी गढ़वाल)। कैबिनेट मंत्री और चौबट्टाखाल विधायक सतपाल महाराज ने मंगलवार को अपने क्षेत्र भ्रमण के तीसरे दिन बीरोंखाल ब्लॉक सभागार में श्रम विभाग की ओर से आयोजित श्रमिक पंजीकरण एवं नवीनीकरण शिविर में हिस्सा लिया। शिविर में क्षेत्र के बड़ी संख्या में श्रमिक और स्थानीय लोग पहुंचे। इस दौरान श्रमिकों को पंजीकरण, नवीनीकरण और सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सतपाल महाराज ने कहा कि उत्तराखंड के विकास में श्रमिकों का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है। पहाड़ों में सड़क, भवन और अन्य निर्माण कार्य श्रमिकों की मेहनत के बिना संभव नहीं हैं। उन्होंने कहा कि श्रमिक प्रदेश और देश के विकास की आधारशिला हैं।

महाराज ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के विजन और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड में विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाना है। ब्लॉक स्तर पर लगाए जा रहे श्रमिक शिविर इसी उद्देश्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं, जहां लोगों की समस्याओं का मौके पर समाधान करने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने श्रम विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिविर में आने वाले प्रत्येक श्रमिक को पंजीकरण और नवीनीकरण की प्रक्रिया की जानकारी सरल एवं स्थानीय भाषा में उपलब्ध कराई जाए। साथ ही पात्र श्रमिकों को किसी तरह की अनावश्यक परेशानी न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाए।

महाराज ने कहा कि उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के तहत संचालित योजनाओं का लाभ सभी पात्र श्रमिकों को समयबद्ध तरीके से मिलना चाहिए। इनमें पुत्री विवाह अनुदान, बच्चों की शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति, चिकित्सा सहायता, मातृत्व लाभ, औजार सहायता और दुर्घटना की स्थिति में आर्थिक सहायता जैसी योजनाएं शामिल हैं।

उन्होंने श्रमिकों से अपील की कि वे पंजीकरण एवं नवीनीकरण शिविरों का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और अपने श्रम कार्ड का समय पर नवीनीकरण कराएं। साथ ही सरकार की ओर से संचालित योजनाओं और सुविधाओं के प्रति जागरूक रहें। महाराज ने कहा कि श्रमिकों की खुशहाली, सुरक्षा और सम्मान सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

इस अवसर पर महाराज ने लघु सिंचाई विभाग की जिला योजना के तहत चार लाख रुपये की लागत से बडियान स्थित मां भगवती मंदिर के स्थलीय विकास कार्य का शिलान्यास भी किया। इसके अलावा भाजपा संगठन को मजबूत करने के लिए पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ चर्चा की।

कार्यक्रम में एसडीएम कृष्णा त्रिपाठी, बीडीओ सुदर्शन वडोला, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सुयश रावत, मंडल अध्यक्ष ओमपाल, समाज कल्याण बोर्ड के सदस्य प्रेम सिंह नेगी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष शांति देवी, विधायक प्रतिनिधि दर्शन सिंह रिगोड़ा, पूर्व मंडल अध्यक्ष यशपाल गोरला, बीकेटीसी सदस्य नीलमपुरी, जिला उपाध्यक्ष मैत्री प्रकाश, महिला मोर्चा अध्यक्ष नीलम रावत, युवा मोर्चा अध्यक्ष नागेंद्र, अनुसूचित मोर्चा अध्यक्ष चनीलाल, पूर्व जिला पंचायत सदस्य सरिता, सूबेदार मनवर सिंह और संग्राम सिंह समेत कई प्रतिनिधि मौजूद रहे।


देहरादून-मसूरी मार्ग पर पानीवाला बैंड के पास गहरी खाई में मिला व्यक्ति का शव

सड़क किनारे मिली कार और खाई में पड़ा था शव

देहरादून। देहरादून-मसूरी मार्ग पर मंगलवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई, जब पानीवाला बैंड के पास सड़क से करीब 200 मीटर नीचे गहरी खाई में एक व्यक्ति का शव पड़ा मिला। सड़क किनारे एक कार खड़ी होने और खाई में शव दिखाई देने की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। इसके बाद एसडीआरएफ और फायर सर्विस की टीम को भी बुलाया गया।

जानकारी के मुताबिक, मंगलवार सुबह करीब 8:30 बजे पुलिस को पानीवाला बैंड के समीप सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्से के पास एक कार खड़ी होने की सूचना मिली। बताया गया कि सड़क से नीचे नदी के नजदीक गहरी खाई में एक व्यक्ति का शव दिखाई दे रहा है। सूचना पर कोल्हूखेत चौकी प्रभारी पंकज महिपाल पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे।

पुलिस ने जांच के दौरान मृतक की पहचान अजय कुमार कोहली पुत्र देवेंद्र कुमार कोहली, निवासी क्रॉस रोड, देहरादून के रूप में की। सूचना मिलने के बाद मृतक के परिजन भी मौके पर पहुंचे। परिजनों के अनुसार, अजय कुमार मंगलवार सुबह करीब सात बजे घर से मसूरी घूमने के लिए निकले थे। वह देहरादून में व्यापारी थे।

कार से शराब की आधी बोतल और मोबाइल मिला

घटनास्थल पर पुलिस को सड़क किनारे खड़ी कार मिली। तलाशी के दौरान कार से शराब की आधी बोतल, पर्स और मोबाइल फोन बरामद किया गया। वहीं, शव सड़क से काफी नीचे खाई में होने के कारण उसे बाहर निकालना पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण था।

इसके बाद एसडीआरएफ और फायर सर्विस की टीम ने मौके पर पहुंचकर संयुक्त रेस्क्यू अभियान शुरू किया। टीम के जवानों ने खाई में उतरकर काफी मशक्कत के बाद शव को बाहर निकाला। मौके पर फील्ड यूनिट और एंबुलेंस की टीम भी मौजूद रही।

एसएसआई सतेंद्र भाटी के अनुसार, शव को खाई से बाहर निकालने के बाद पंचायतनामा की कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल घटना के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।


मुख्यमंत्री धामी से मिले नन्हे पर्वतारोही रियांश पंत और प्रिशा रावत

रियांश-प्रिशा ने 5,895 मीटर ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो पर फहराया तिरंगा, सीएम धामी ने दी बधाई

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास में तंजानिया स्थित अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो का सफल आरोहण करने वाले उत्तराखंड के नन्हे पर्वतारोही मास्टर रियांश पंत और प्रिशा रावत ने भेंट की।

मुख्यमंत्री ने दोनों बच्चों को इस उपलब्धि के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि इतनी कम उम्र में माउंट किलिमंजारो जैसी चुनौतीपूर्ण चोटी का सफल आरोहण करना उनके साहस, दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास का परिचायक है। दोनों बच्चों ने अपनी इस उपलब्धि से उत्तराखंड का गौरव बढ़ाया है। उनकी सफलता प्रदेश के अन्य बच्चों और युवाओं को भी बड़े लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें हासिल करने के लिए प्रेरित करेगी।

9 वर्षीय मास्टर रियांश पंत अल्मोड़ा के चीनाखान और 10 वर्षीय प्रिशा रावत नैनीताल जनपद के बैलपड़ाव की निवासी हैं। दोनों ने 22 अगस्त 2026 को 5,895 मीटर ऊंची माउंट किलिमंजारो चोटी का सफल आरोहण कर तिरंगा फहराया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के बच्चों और युवाओं में प्रतिभा, साहस और सामर्थ्य की कोई कमी नहीं है। प्रदेश के युवा पर्वतारोहण, खेल एवं अन्य साहसिक गतिविधियों में अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर राज्य का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर रहे हैं। राज्य सरकार युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और उन्हें आगे बढ़ने के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।


स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में देहरादून की बड़ी छलांग, 37वें से 12वें स्थान पर पहुंची राजधानी

धामी सरकार के सतत प्रयासों और जनभागीदारी को मिली बड़ी सफलता

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून ने वायु गुणवत्ता सुधार के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की ओर से जारी स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में 30 से 10 लाख की आबादी वाले शहरों की श्रेणी में देहरादून ने देशभर में 12वां स्थान हासिल किया है। खास बात यह है कि शहर ने पिछले तीन वर्षों में लगातार बेहतर प्रदर्शन करते हुए 37वें स्थान से 12वें स्थान तक का सफर तय किया है।

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण की रैंकिंग में देहरादून की स्थिति में लगातार सुधार दर्ज हुआ है। वर्ष 2024 में शहर इस श्रेणी में 41वें स्थान पर था। वर्ष 2025 में सुधार के साथ यह 19वें स्थान पर पहुंचा और अब 2026 में देहरादून ने 12वां स्थान हासिल कर लिया है। लगातार सुधरती रैंकिंग को शहर में वायु प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों का परिणाम माना जा रहा है।

राज्य सरकार की ओर से वायु गुणवत्ता सुधार को लेकर धूल नियंत्रण, सड़क सफाई, वाहनों के प्रदूषण की निगरानी, स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने, जनजागरूकता और पर्यावरणीय मॉनिटरिंग पर विशेष जोर दिया गया है। इन प्रयासों को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर शहर के प्रदूषण स्तर को नियंत्रित करने की दिशा में काम किया गया।

देहरादून के संवेदनशील और अधिक भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में धूल नियंत्रण के लिए ड्रोन के माध्यम से जल छिड़काव किया गया। वहीं प्रमुख सड़कों और सड़क किनारे जमा धूल को हटाने के लिए मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनों का नियमित संचालन किया गया। सड़क की धूल से हवा में बढ़ने वाले प्रदूषक कणों को कम करना इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य रहा।

खुले में कूड़ा जलाने पर भी निगरानी

वायु प्रदूषण के प्रमुख कारणों में खुले में कूड़ा और अन्य अपशिष्ट जलाना भी शामिल है। इसे रोकने के लिए नगर क्षेत्र में जनजागरूकता अभियान चलाए गए। लोगों को खुले में कचरा जलाने से होने वाले पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी नुकसान के बारे में जानकारी दी गई। प्रशासन और नगर निकाय की ओर से नागरिकों से स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की अपील भी की गई।

वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए भी नियमित अभियान चलाए गए। प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र (पीयूसी) की जांच के जरिए मानकों से अधिक उत्सर्जन करने वाले वाहनों पर निगरानी बढ़ाई गई। साथ ही स्वच्छ परिवहन को प्रोत्साहित करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

लगातार मॉनिटरिंग से मिली मदद

वायु गुणवत्ता सुधार के लिए देहरादून में निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। अलग-अलग क्षेत्रों से प्राप्त वायु गुणवत्ता संबंधी आंकड़ों के आधार पर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। विभिन्न विभागों, नगर निकायों और आम लोगों के सामूहिक प्रयासों से प्रदूषण नियंत्रण अभियान को अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश की गई है।

देहरादून की यह उपलब्धि राज्य सरकार के स्वच्छ, स्वस्थ और सतत विकास वाले उत्तराखंड के विजन को भी मजबूती देती है। सरकार का जोर विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन कायम करने पर है। देहरादून की रैंकिंग में लगातार सुधार इस बात का संकेत है कि योजनाबद्ध प्रयासों, तकनीक और जनभागीदारी के जरिए वायु गुणवत्ता में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

इस उपलब्धि में देहरादून नगर निगम, उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, संबंधित विभागों, सफाई एवं पर्यावरण कर्मियों के साथ शहर के नागरिकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। खुले में कचरा नहीं जलाने, स्वच्छता बनाए रखने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों की जागरूकता ने सरकारी प्रयासों को मजबूती दी है।

देहरादून के अलावा उत्तराखंड के अन्य शहरों में भी वायु गुणवत्ता सुधार की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। ऋषिकेश और काशीपुर में भी पिछले वर्षों की तुलना में सुधार दर्ज किया गया है। राज्य सरकार का लक्ष्य प्रदेश के अन्य शहरों में भी स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप प्रभावी कार्ययोजनाएं लागू कर स्वच्छ वायु अभियान को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाना है।

मुख्यमंत्री ने दी बधाई

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में देहरादून की उपलब्धि पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादूनवासियों, नगर निगम, उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संबंधित विभागों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि देहरादून का 37वें से 12वें स्थान पर पहुंचना पूरे प्रदेश के लिए गौरव की बात है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि शहर की जागरूक जनता की भागीदारी, नगर निगम के प्रयासों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सतत निगरानी का परिणाम है। उन्होंने कहा कि सरकार विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दे रही है। स्वच्छ वायु केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि नागरिकों के स्वस्थ जीवन और बेहतर भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। देहरादून की उपलब्धि सरकार और जनता को स्वच्छ वायु की दिशा में और बेहतर काम करने के लिए प्रेरित करती है।


विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य प्रगति की जिलाधिकारी ने की समीक्षा, 29,929 मतदाता जांच में पाए गए अपात्र

देहरादून। जनपद में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्य की प्रगति की जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने समीक्षा की। इसको लेकर सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के जिला प्रतिनिधियों और संबंधित निर्वाचन अधिकारियों के साथ बैठक हुई। बैठक में विधानसभा क्षेत्रवार एनोमली, नो-मैपिंग, मतदाताओं को जारी नोटिस, सुनवाई तथा दावों-आपत्तियों के निस्तारण की स्थिति की समीक्षा की गई।

जिलाधिकारी ने बताया कि देहरादून जिले की 10 विधानसभा सीटों में कुल 11,90,805 मतदाता दर्ज हैं। विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान वर्ष 2003 की मतदाता सूची से संबंधित 3,95,772 एनोमली और 1,52,170 नो-मैपिंग के मामले चिन्हित किए गए हैं। इन मामलों में सुनवाई की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। जांच और सुनवाई के दौरान अब तक 29,929 मतदाता अपात्र पाए गए हैं।

डॉ. आशीष चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी मामलों में भारत निर्वाचन आयोग की निर्धारित प्रक्रिया और दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी मामले में उपलब्ध अभिलेखों और दस्तावेजों का उचित सत्यापन किए बिना निर्णय न लिया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि किसी पात्र मतदाता का नाम अनावश्यक रूप से प्रभावित न हो।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों को राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ समन्वय बनाए रखते हुए पारदर्शी तरीके से कार्रवाई करने के निर्देश दिए। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी नरेन्द्र देवली सहित भाजपा, कांग्रेस, सीपीआई (एम), बसपा और आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधि मौजूद रहे। जिले के सभी संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) ऑनलाइन माध्यम से बैठक में शामिल हुए।


मसूरी के रॉक स्टोन पर चला एमडीडीए का बुलडोजर, अपर माल रोड पर अनाधिकृत निर्माण ध्वस्त

प्राधिकरण ने कहा- नियम तोड़ने वालों को नहीं मिलेगी छूट

देहरादून।  मसूरी के अपर माल रोड स्थित रॉक स्टोन में अनाधिकृत निर्माण के खिलाफ मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए निर्माण को ध्वस्त कर दिया। प्राधिकरण के अनुसार संजय मेहरोत्रा और राजीव मेहरोत्रा द्वारा किए गए अनाधिकृत निर्माण के मामले में नियमानुसार वाद दायर किया गया था। सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित पक्ष की ओर से प्रस्तुत जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।

मसूरी के बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील अपर माल रोड क्षेत्र में हुई इस कार्रवाई को एमडीडीए की ओर से अनाधिकृत निर्माण के खिलाफ सख्त रुख के तौर पर देखा जा रहा है। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि पर्वतीय क्षेत्रों में भवन निर्माण के लिए निर्धारित नियमों, स्वीकृत मानचित्र और आवश्यक अनुमतियों का पालन अनिवार्य है। नियमों की अनदेखी कर किए गए निर्माण के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। एमडीडीए के मुताबिक रॉक स्टोन स्थल पर अनाधिकृत निर्माण पाए जाने के बाद संबंधित पक्ष के खिलाफ उत्तराखण्ड (उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम, 1973) यथासंशोधित की सुसंगत धाराओं के तहत वाद योजित किया गया। कार्रवाई से पहले विपक्षी पक्ष को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया। सुनवाई के दौरान संबंधित पक्ष की ओर से प्रस्तुत प्रतिउत्तर का प्राधिकरण ने नियमानुसार परीक्षण किया। हालांकि, जवाब से निर्माण को नियमों के अनुरूप ठहराने के लिए पर्याप्त आधार नहीं मिला। इसके बाद नियमानुसार ध्वस्तीकरण के आदेश पर कार्रवाई की गई।

संवेदनशील क्षेत्र में निर्माण पर सख्ती

प्राधिकरण का कहना है कि मसूरी की भौगोलिक और पर्यावरणीय संवेदनशीलता को देखते हुए यहां अनियोजित और अनाधिकृत निर्माण गंभीर विषय है। पर्यटन नगरी में लगातार बढ़ते निर्माण दबाव के बीच भवन निर्माण से जुड़े नियमों और स्वीकृत मानचित्रों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है। प्राधिकरण का कहना है कि बिना अनुमति निर्माण अथवा स्वीकृत मानचित्र के विपरीत किए गए निर्माण को किसी भी स्थिति में प्रोत्साहित नहीं किया जाएगा। एमडीडीए ने साफ कर दिया है कि मसूरी जैसे संवेदनशील क्षेत्र में नियमों से खिलवाड़ करने वालों को कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण की प्राथमिकता देहरादून और मसूरी क्षेत्र में नियोजित एवं नियमबद्ध विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक निर्माणकर्ता के लिए स्वीकृत मानचित्र, निर्धारित मानकों और प्रचलित नियमों का पालन करना आवश्यक है। रॉक स्टोन प्रकरण में संबंधित पक्ष को सुनवाई का पर्याप्त अवसर दिया गया और सुनवाई के बाद जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि एमडीडीए किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करता है। मसूरी की भौगोलिक एवं पर्यावरणीय संवेदनशीलता को देखते हुए अनाधिकृत निर्माण को किसी भी स्थिति में बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। जहां भी निर्माण नियमों का उल्लंघन सामने आएगा, वहां प्रचलित अधिनियम और नियमों के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

निष्पक्ष कार्रवाई रहेगी जारी

एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि रॉक स्टोन, अपर माल रोड के मामले में उत्तराखण्ड (उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम, 1973) के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई है। संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया था, लेकिन सुनवाई के दौरान संतोषजनक प्रतिउत्तर प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण का उद्देश्य कानून के प्रावधानों का निष्पक्ष रूप से पालन कराना है। विकास क्षेत्र में बिना स्वीकृति अथवा नियमों के विपरीत किए जा रहे निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। अधिकारियों ने निर्माणकर्ताओं से अपील की है कि भवन निर्माण शुरू करने से पहले सभी आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त करें और स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप ही निर्माण करें।


संसाधनों और अवसरों की कमी किसी प्रतिभाशाली युवा के सपनों की राह में नहीं बनेगी बाधा- मुख्यमंत्री

उत्तराखण्ड में ‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना’ शुरू

प्रथम चरण में 11 हजार छात्र-छात्राओं को निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग से जोड़ा जाएगा

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में ‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना’ का शुभारंभ किया।
योजना के माध्यम से प्रदेश के राजकीय एवं शासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों तथा राज्य विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत पात्र छात्र-छात्राओं को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराई जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना के प्रथम चरण में 11 हजार छात्र-छात्राओं को निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए मेहनत के साथ सही दिशा, बेहतर रणनीति, अच्छे शिक्षकों का मार्गदर्शन और नियमित अभ्यास भी आवश्यक है। विशेष रूप से पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में अनेक प्रतिभाशाली युवा आर्थिक परिस्थितियों, उचित मार्गदर्शन और संसाधनों की कमी के कारण अच्छे कोचिंग संस्थानों तक नहीं पहुंच पाते। राज्य सरकार ने तय किया है कि संसाधनों की कमी अथवा आर्थिक तंगीं किसी भी प्रतिभाशाली युवा के सपनों की राह में बाधा नहीं बनेंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा शक्ति है। राज्य का युवा मेहनती, प्रतिभाशाली और चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है। आवश्यकता उसकी प्रतिभा को सही दिशा, बेहतर मार्गदर्शन और आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराने की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए देश का सबसे कठोर नकल विरोधी कानून लागू किया है। बीते 5 वर्षों में 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां मिली हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल सरकारी नौकरियां उपलब्ध कराना नहीं है। सरकार चाहती है कि उत्तराखण्ड का युवा नौकरी मांगने वाला ही नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला भी बने। इसी दिशा में स्वरोजगार, स्टार्टअप, कौशल विकास, उद्यमिता और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में रिवर्स पलायन बढ़ा है। आज अनेक युवा गांवों की ओर लौटकर व्यवसाय, कृषि-बागवानी, होमस्टे और स्थानीय उत्पादों से जुड़े उद्यमों के माध्यम से स्वरोजगार के साथ अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को प्रदेश के भविष्य की दिशा तय करने में भी सक्रिय भागीदार बना रही है। इसी सोच के साथ प्रदेश के ढाई लाख से अधिक युवा विद्यार्थियों के साथ वैचारिक मंथन कर उनके विचार और सुझाव लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं की आशाओं, आकांक्षाओं और रोजगार से जुड़े विषयों पर विशेष रूप से कार्य करने के लिए राज्य में अलग ‘युवा आयोग’ बनाया जाएगा। सरकार चाहती है कि युवा केवल सरकारी योजनाओं के लाभार्थी न बनें, बल्कि प्रदेश की नीति और विकास की दिशा तय करने में भी सक्रिय भागीदार बनें।

मुख्यमंत्री ने युवाओं का आह्वान किया कि वे बड़े सपने देखें और उन्हें पूरा करने के लिए पूरी मेहनत और लगन से कार्य करें। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं को अवसर, संसाधन, मार्गदर्शन और पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए हर कदम पर उनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश के युवा अपनी मेहनत, प्रतिभा और संकल्प के बल पर नई ऊंचाइयां प्राप्त करेंगे तथा उत्तराखण्ड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के ‘विकल्प रहित संकल्प’ को पूर्ण करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने छात्र-छात्राओं के बीच जाकर उनसे संवाद किया। उन्होंने विद्यार्थियों से उनकी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों, भविष्य के लक्ष्यों और आकांक्षाओं के बारे में जानकारी ली तथा उन्हें पूरी मेहनत और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री ने युवाओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि राज्य सरकार उनके सपनों को साकार करने के लिए आवश्यक अवसर और संसाधन उपलब्ध कराने के लिए हर कदम पर उनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर छात्र-छात्राओं में भी विशेष उत्साह दिखाई दिया।

उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि ‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना’ प्रदेश के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। योजना के माध्यम से विशेष रूप से पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण कोचिंग और मार्गदर्शन सुलभ होगा। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अधिक से अधिक पात्र विद्यार्थियों तक योजना की जानकारी पहुंचे और वे इसका लाभ उठा सकें।

उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा में गुणवत्ता सुधार और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष से छात्रसंघ चुनाव में छात्राओं के लिए 50 प्रतिशत पद आरक्षित किए जाएंगे। प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में डिजिटल शिक्षा को भी लगातार विस्तार दिया जा रहा है और ई-ग्रंथालय के माध्यम से विद्यार्थियों को लगभग 20 लाख पुस्तकों तक डिजिटल पहुंच उपलब्ध कराई गई है।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने योजना से जुड़े कोचिंग संस्थानों से विद्यार्थियों की तैयारी पर विशेष ध्यान देने की अपेक्षा करते हुए कहा कि वे इसे केवल व्यावसायिक दायित्व न मानकर व्यक्तिगत एवं सामाजिक दायित्व के रूप में भी लें। उन्होंने कहा कि सही मार्गदर्शन, नियमित संवाद और प्रत्येक विद्यार्थी की आवश्यकता के अनुरूप सहयोग उनकी तैयारी और आत्मविश्वास को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मुख्य सचिव ने युवाओं से उपलब्ध अवसर का पूरा लाभ उठाने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए अनुशासन, निरंतर अभ्यास और दृढ़ संकल्प आवश्यक है। राज्य सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्ध कराए जा रहे संसाधनों और अवसरों का बेहतर उपयोग कर युवा अपने लक्ष्य की ओर मजबूती से आगे बढ़ें।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, उच्च शिक्षा उन्नयन समिति के उपाध्यक्ष डॉ. देवेन्द्र भसीन, डॉ. जयपाल चौहान, सचिव उच्च शिक्षा डॉ.बी.वी.आर.सी. पुरूषोत्तम, सचिव संस्कृत शिक्षा दीपक कुमार, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, अपर सचिव उच्च शिक्षा मनुज गोयल, महानिदेशक शिक्षा आकांक्षा कोण्डे, अपर सचिव मनमोहन मैनाली एवं उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।


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