Monday, September 7th, 2026

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‘श्रमिक अपने पसीने से प्रदेश के विकास की नई इबारत लिख रहे’- महाराज

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‘श्रमिक अपने पसीने से प्रदेश के विकास की नई इबारत लिख रहे’- महाराज

पोखड़ा (पौड़ी)। कैबिनेट मंत्री और चौबट्टाखाल विधायक सतपाल महाराज ने सोमवार को पोखड़ा विकासखंड मुख्यालय में आयोजित श्रमिक पंजीकरण एवं नवीनीकरण शिविर में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों को संबोधित करने के साथ जनसमस्याएं भी सुनीं और संबंधित विभागीय अधिकारियों को उनके जल्द निस्तारण के निर्देश दिए।

श्रमिकों को संबोधित करते हुए सतपाल महाराज ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड में लगातार विकास कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि श्रमिक प्रदेश और देश के विकास की मजबूत कड़ी हैं। सड़क, भवन और औद्योगिक क्षेत्रों समेत विभिन्न निर्माण कार्यों में श्रमिकों के योगदान के बिना विकास की कल्पना नहीं की जा सकती।

महाराज ने कहा कि श्रमिक केवल मेहनत नहीं करता, बल्कि अपने पसीने से प्रदेश के विकास की नई इबारत लिखता है। सरकार का प्रयास है कि श्रमिकों को उनके अधिकारों और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सरल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से मिले। इसी उद्देश्य से श्रमिकों के पंजीकरण और नवीनीकरण के लिए शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पंजीकृत श्रमिकों और उनके परिवारों को शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा समेत विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने में सुविधा मिलती है। उन्होंने श्रमिकों से अपील की कि वे समय पर अपना पंजीकरण कराएं और जिनका पहले से पंजीकरण है, उसका नवीनीकरण जरूर कराएं।

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि शिविरों के माध्यम से श्रमिकों को पंजीकरण और नवीनीकरण के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिल रही है। सरकार का उद्देश्य व्यवस्थाओं को केवल कार्यालयों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें जनता के द्वार तक पहुंचाना है।

उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिविर में आने वाले श्रमिकों को पंजीकरण और नवीनीकरण की प्रक्रिया की जानकारी सरल भाषा में दी जाए। साथ ही पात्र श्रमिकों को योजनाओं का लाभ समय पर मिले और उन्हें किसी तरह की अनावश्यक परेशानी न हो, यह सुनिश्चित किया जाए।

कार्यक्रम में पोखड़ा मंडल अध्यक्ष शैलेंद्र दर्शन, भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सुयश रावत, जिला महामंत्री महिपाल सिंह नेगी, ब्लॉक प्रमुख संजय गुसाईं, एसडीएम रेखा आर्य, खंड विकास अधिकारी एसपी शाह, विधायक प्रतिनिधि प्रभुशरण बुडाकोटी समेत कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। इस दौरान क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने सतपाल महाराज का पुष्पगुच्छ और शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया।


जनता मिलन में 19 शिकायतें दर्ज, अधिकांश का मौके पर निस्तारण

सड़क, पेयजल, गैस आपूर्ति और बस सेवा से जुड़ी समस्याओं पर सीडीओ ने दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश

सीएम हेल्पलाइन व लंबित शिकायतों के निस्तारण में गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने को कहा

पौड़ी- सोमवार को जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट सभागार में मुख्य विकास अधिकारी अशोक जोशी की अध्यक्षता में जनता मिलन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों से संबंधित 19 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें अधिकांश का मौके पर ही निस्तारण किया गया। शेष शिकायतों पर संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध एवं प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए गए। सड़क, राजस्व, पेयजल, खाद्य आपूर्ति, परिवहन और सार्वजनिक सुविधाओं से संबंधित मामले प्रमुख रहे।

भितांई मल्ली निवासी गिरीश चंद्र ने दाणोधार-खंडाह मोटर मार्ग का ऊपरी पुश्ता ढहने से मकान को खतरा होने तथा उज्याड़ी निवासी हरेन्द्र ने डांग-उज्याड़ी मोटर मार्ग पर पुश्ता क्षतिग्रस्त होने से आवासीय भवन को नुकसान पहुंचने की शिकायत की। सीडीओ ने लोनिवि प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता को तत्काल अवर अभियंता को मौके पर भेजकर निरीक्षण एवं आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ हु पाबौ क्षेत्र में सड़क से गौशाला एवं पैदल मार्ग क्षतिग्रस्त होने की शिकायत पर भी संबंधित विभाग को मौका निरीक्षण कर कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

गडोली-खंडाह मार्ग के सुधारीकरण की मांग पर पीएमजीएसवाई को मौके पर निरीक्षण कर सर्वे करने के निर्देश दिए गए। एकेश्वर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों द्वारा पाटीसैंण मार्ग से पोखड़ा तक पूर्व की भांति प्रातः 8 बजे बस सेवा संचालित किए जाने की मांग उठाई गई। इस पर मुख्य विकास अधिकारी ने परिवहन विभाग को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। एआरटीओ ने अवगत कराया कि बस संचालन के संबंध में जीएमओ को पत्र प्रेषित किया जाएगा।

पौड़ी के निकट दांदलधार क्षेत्र के ग्रामीणों ने गैस वितरण में कठिनाई की शिकायत करते हुए गांव तक छोटे वाहनों से गैस सिलेंडर पहुंचाने की मांग की। सीडीओ ने जिला पूर्ति अधिकारी को गैस एजेंसियों के माध्यम से माह में कम से कम दो बार गांवों तक गैस आपूर्ति सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। ग्राम प्रधान धनाऊं ने ल्वाली बाजार में नालियों के सुधारीकरण, धनाऊं मल्ला में स्वतंत्रता सेनानी स्व. उमेद सिंह रावत की स्मृति में प्रवेश द्वार निर्माण, जीआईसी कालेश्वर के खेल मैदान की क्षतिग्रस्त दीवार की मरम्मत तथा ल्वाली बाजार में सार्वजनिक शौचालय निर्माण की मांग रखी, जिस पर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

मुख्य विकास अधिकारी ने पूर्व में आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रमों में प्राप्त शिकायतों की समीक्षा करते हुए संबंधित विभागों को लंबित प्रकरणों का गुणवत्तापूर्ण एवं संतोषजनक निस्तारण कर अद्यतन आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। सीएम हेल्पलाइन की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि इसकी मुख्यमंत्री स्तर पर नियमित समीक्षा की जाती है। उन्होंने सभी विभागों को सीएम हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित, गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

विभिन्न माध्यमों से प्राप्त शिकायतों के त्वरित निस्तारण के क्रम में तहसील कोटद्वार के बल्ली गांव में पेयजल आपूर्ति बाधित होने की शिकायत का समाधान किया गया। भारी वर्षा एवं अतिवृष्टि से मुख्य स्रोत से जुड़ी पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त होने के कारण आपूर्ति प्रभावित हुई थी। विभाग द्वारा लाइन की मरम्मत कराई जा रही है तथा तब तक ग्रामीणों को टैंकरों के माध्यम से नियमित पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता त्रिलोक सिंह रावत द्वारा फल-सब्जी विक्रेताओं एवं अन्य दुकानदारों के प्रतिष्ठानों पर रेट लिस्ट चस्पा न होने की शिकायत के क्रम में नगर पालिका परिषद, पौड़ी द्वारा संबंधित दुकानों पर रेट लिस्ट चस्पा कराई गई और निर्धारित मूल्य सूची का नियमित प्रदर्शन सुनिश्चित कराया गया।

इस अवसर पर डीएफओ महातिम यादव, एडीएम एफआर चौहान, संयुक्त मजिस्ट्रेट गौरी प्रभात, पीडी डीआरडीए विवेक कुमार उपाध्याय, सीएमओ डॉ. मेघना असवाल, सीवीओ डॉ. विशाल शर्मा, डीडीओ रमेश चंद्र, डीपीआरओ राम सलोने, सीओ तपेश कुमार चंद, मुख्य कृषि अधिकारी ऋतु कुकरेती जुयाल, डीएसओ अरुण कुमार वर्मा, जिला समाज कल्याण अधिकारी रोहित दुबड़िया, एआरटीओ एनके ओझा सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।


स्वस्थ बालिकाएं ही स्वस्थ और सशक्त समाज की नींव रखती हैं- ऋतु खण्डूडी भूषण

बालिकाओं के स्वास्थ्य एवं जागरूकता को लेकर आयोजित हुआ निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर

कोटद्वार। बालिकाओं को किशोरावस्था में स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से कोटद्वार-बद्रीनाथ मार्ग स्थित पी.एम. श्री राजकीय बालिका इंटरमीडिएट कॉलेज में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया। दर्पण वेलफेयर सोसाइटी की ओर से आयोजित शिविर में विधानसभा अध्यक्ष एवं कोटद्वार विधायक ऋतु खण्डूडी भूषण ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।

शिविर के दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों ने छात्राओं को व्यक्तिगत स्वच्छता, संतुलित पोषण और दैनिक स्वास्थ्य देखभाल से जुड़ी जरूरी जानकारियां दीं। इसके साथ ही किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक बदलावों, उनसे जुड़ी सावधानियों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति सजग रहने के बारे में भी विस्तार से समझाया गया।

विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण ने कहा कि किशोरावस्था से ही बालिकाओं को अपने स्वास्थ्य को लेकर जागरूक किया जाना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि सही समय पर स्वास्थ्य संबंधी जानकारी मिलने से बालिकाएं न केवल बीमारियों से बचाव कर सकती हैं, बल्कि अपने स्वास्थ्य को लेकर सही निर्णय लेने में भी सक्षम बनती हैं।

उन्होंने दर्पण वेलफेयर सोसाइटी की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि स्वस्थ बालिकाएं ही स्वस्थ और सशक्त समाज की नींव रखती हैं। स्वास्थ्य जागरूकता से बालिकाओं का आत्मविश्वास बढ़ता है और वे बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं।

इस दौरान छात्राओं के स्वास्थ्य की जांच भी की गई। चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने उनकी समस्याएं सुनीं और आवश्यकतानुसार चिकित्सकीय परामर्श दिया। छात्राओं ने स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न सवाल भी विशेषज्ञों के सामने रखे, जिनका समाधान किया गया।

कार्यक्रम में विद्यालय की प्रधानाचार्य वनिता ध्यानी, दर्पण वेलफेयर सोसाइटी की सचिव किरण रावत, डॉ. हेमलता अग्रवाल, डॉ. नीलिमा उपाध्याय समेत शशि बुडाकोटी, नीलम नेगी, कौसर जहाँ अंसारी, सुरेखा बिष्ट, सुशीला बिष्ट, पूजा रावत और इन्दु उनियाल मौजूद रहीं।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में दर्पण वेलफेयर सोसाइटी के फाउंडर दिलीप ने सहयोग दिया। मंच संचालन परीक्षा भंडारी ने किया।


उत्तराखण्ड के विकास का रास्ता इकोलॉजी और इकोनॉमी के संतुलन से होकर निकलेगा- मुख्यमंत्री

हिमालय दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित ‘हिमालयो नाम नगाधिराजः’ कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री की घोषणा-हर वर्ष प्रदान किया जाएगा ‘हिमालय विभूति सम्मान’

हिमालय परिषद् में मूलभूत सुविधाओं और संसाधनों में वृद्धि के लिए ₹1 करोड़ की धनराशि की घोषणा

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, देहरादून में हिमालय दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित ‘हिमालयो नाम नगाधिराजः’ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर हिमालय परिषद् में मूलभूत सुविधाओं और संसाधनों में वृद्धि के लिए ₹1 करोड़ की धनराशि देने की घोषणा की। उन्होंने यह भी घोषणा की कि हिमालय के संरक्षण, संवर्धन एवं सतत विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं हिमालयी क्षेत्रों के लिए समर्पित विशिष्ट व्यक्तित्वों को ‘हिमालय विभूति सम्मान’ प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान प्रत्येक वर्ष हिमालय दिवस के अवसर पर प्रदान किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से संबंधित पांच पोस्टरों का विमोचन किया। इनमें 7वें देहरादून इंटरनेशनल साइंस एंड टेक्नोलॉजी फेस्टिवल, साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रीमियर लीग, सीमांत बाल विज्ञान कांग्रेस, ज्ञानोत्कर्ष तथा 21वीं उत्तराखण्ड राज्य साइंस कॉन्फ्रेंस के पोस्टर शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने विज्ञान के लोकप्रियकरण पर केंद्रित पत्रिका ‘विज्ञान संप्रेषण’ के पांचवें वार्षिकांक का भी विमोचन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय हमारे लिए केवल एक पर्वत श्रृंखला नहीं, बल्कि हमारी पहचान, संस्कृति और अस्तित्व का आधार है। आदि काल से हिमालय हमारे ऋषियों, मुनियों, साधकों और विचारकों की तपोभूमि रही है। गंगा और यमुना सहित अनेक जीवनदायिनी नदियों का उद्गम हिमालय से होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग आज पूरी दुनिया के सामने बड़ी चुनौती हैं और इनका प्रभाव हिमालयी क्षेत्रों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। ग्लेशियरों पर बढ़ता दबाव, पारंपरिक जल स्रोतों पर संकट तथा अतिवृष्टि, भूस्खलन, वनाग्नि और अचानक आने वाली बाढ़ जैसी घटनाएं लगातार नई चुनौतियां खड़ी कर रही हैं। हिमालय की संवेदनशीलता का सम्मान करते हुए विकास कार्यों में विज्ञान, तकनीक, सुरक्षा और प्रकृति के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन किसी राज्य या देश की सीमाओं को देखकर अपना प्रभाव नहीं डालता। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने में बहुत कम योगदान देने वाले हिमालयी क्षेत्रों को भी इसका बड़ा मूल्य चुकाना पड़ सकता है। इसलिए जलवायु परिवर्तन की जिम्मेदारी और उसके समाधान के प्रयास साझा होने चाहिए। हिमालयी राज्यों की इस चिंता और आवाज को राष्ट्रीय एवं वैश्विक मंचों तक और मजबूती से पहुंचाने की आवश्यकता है। हिमालय के ग्लेशियर और जल स्रोत प्रभावित होने का असर नदियों, कृषि, पेयजल और करोड़ों लोगों के जीवन पर पड़ता है। इसलिए हिमालय संरक्षण केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि हमारे भविष्य से जुड़ा विषय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई पीढ़ी पर्यावरण को लेकर जागरूक है। आज युवा हिमालय, नदियों, जंगलों, स्वच्छ हवा और पानी जैसे विषयों पर गंभीरता से सोच रहे हैं। आने वाली पीढ़ियां हमसे केवल बड़ी इमारतों और चौड़ी सड़कों का हिसाब नहीं मांगेंगी, बल्कि स्वच्छ हवा, स्वच्छ पानी, नदियों और जंगलों का भी हिसाब मांगेंगी। इसलिए हमें आज ही तय करना होगा कि हम आने वाली पीढ़ियों को कैसा उत्तराखण्ड सौंपकर जाना चाहते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क, बिजली, अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और रोजगार की आवश्यकता है, लेकिन उत्तराखण्ड के विकास का मॉडल राज्य की अपनी भौगोलिक परिस्थितियों और आवश्यकताओं के अनुरूप होना चाहिए। उत्तराखण्ड के विकास का रास्ता इकोलॉजी और इकोनॉमी के संतुलन से होकर ही निकलेगा। हमें ऐसा विकास चाहिए जिसमें सड़क भी बने और जंगल भी बचें, रोजगार भी बढ़े और नदियां भी निर्मल रहें, पर्यटन भी बढ़े और पहाड़ों की धारण क्षमता का भी ध्यान रखा जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया के सामने पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी मंत्र ‘मिशन लाइफ’ अर्थात ‘लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट’ दिया है। पर्यावरण की रक्षा केवल सरकारों की नीतियों से नहीं होगी, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जीवनशैली में भी बदलाव लाना होगा। पानी और बिजली की बचत, प्लास्टिक का प्रयोग कम करना, स्वच्छता रखना, स्थानीय उत्पादों को अपनाना और प्रकृति के प्रति जिम्मेदार व्यवहार जैसे छोटे-छोटे प्रयास मिलकर बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘नमामि गंगे’, ‘नेशनल मिशन फॉर सस्टेनिंग द हिमालयन इकोसिस्टम’ और ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ जैसे प्रयासों के माध्यम से हिमालयी क्षेत्रों के संरक्षण और सतत विकास को गति दी जा रही है। राज्य सरकार भी उत्तराखण्ड को हिमालय संरक्षण की दिशा में मॉडल राज्य बनाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। हमारा प्रयास है कि उत्तराखण्ड हिमालय संरक्षण के विषय में केवल अपनी चिंता व्यक्त करने वाला राज्य न रहे, बल्कि पूरे देश को दिशा और नेतृत्व देने वाला राज्य बने। इसके लिए पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान और तकनीक से जोड़कर हिमालयी क्षेत्रों की चुनौतियों के टिकाऊ समाधान तलाशने होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय संरक्षण के लिए जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से 2 सितंबर के बुग्याल दिवस से 9 सितंबर के हिमालय दिवस तक पूरे सप्ताह को ‘हिमालय दिवस सप्ताह’ के रूप में मनाने की शुरुआत की गई है। हिमालय संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रमों और सेमिनारों तक सीमित न रहकर जन-जन का आंदोलन बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि बुग्याल हमारी जैव विविधता और जल स्रोतों के महत्वपूर्ण आधार हैं, जंगल हमारी हवा, पानी और मिट्टी के रक्षक हैं तथा नदियां हमारी सभ्यता की जीवनधारा हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय संरक्षण को पहाड़ की समृद्धि से भी जोड़ना होगा। गांवों में रोजगार, स्थानीय उत्पादों को बाजार, मातृशक्ति का आर्थिक सशक्तिकरण, प्राकृतिक खेती और पर्यावरण अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देकर पलायन को कम किया जा सकता है। हिमालय का संरक्षण और पहाड़ की समृद्धि एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। हमारे जंगल, बुग्याल, जैव विविधता, नदियां, पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय उत्पाद हमारी इकोलॉजिकल वेल्थ हैं और यही भविष्य में हमारी इकोनॉमिक स्ट्रेंथ भी बन सकते हैं।

इस अवसर पर विधायक किशोर उपाध्याय, हेस्को के संस्थापक एवं पद्म भूषण से सम्मानित डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. तृप्ता ठाकुर, महानिदेशक यू-कॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत, रजिस्ट्रार वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय डॉ. राजेश उपाध्याय, संयुक्त निदेशक यू कॉस्ट डी.पी. उनियाल एवं अन्य गणमान्य उपस्थित थे।


उत्तराखंड में बढ़ा लंपी रोग का खतरा, 21 पशुओं में संक्रमण की पुष्टि, एक बछड़े की मौत

635 संदिग्ध मामले आए सामने

देहरादून। उत्तराखंड में पशुओं में फैलने वाले लंपी त्वचा रोग (Lumpy Skin Disease) के मामले सामने आने के बाद पशुपालन विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। राज्य के विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में पशुओं में बीमारी के लक्षण पाए गए हैं। जांच के लिए भेजे गए नमूनों में अब तक 21 में लंपी संक्रमण की पुष्टि हुई है। नैनीताल जिले में इस बीमारी की चपेट में आने से एक बछड़े की मौत भी हुई है।

पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. उदय शंकर के अनुसार, राज्य में अब तक 635 संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं। इनमें देहरादून, नैनीताल, पौड़ी, ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार, रुद्रप्रयाग और टिहरी जिले शामिल हैं। संदिग्ध पशुओं के 269 नमूने जांच के लिए बरेली भेजे गए थे, जिनमें से 55 नमूनों की रिपोर्ट विभाग को प्राप्त हो चुकी है।

प्राप्त जांच रिपोर्ट में 21 नमूने पॉजिटिव पाए गए हैं, जबकि अन्य नमूनों में संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। बीमारी के संभावित प्रसार को देखते हुए पशुपालन विभाग ने संबंधित जिलों को जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं और निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया है।

विभाग की ओर से लंपी रोग की रोकथाम के लिए टीकाकरण और पशुशालाओं में साफ-सफाई पर विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रतिदिन करीब 5 से 6 हजार पशुओं का टीकाकरण किया जा रहा है। साथ ही पशुपालकों को बीमार या संदिग्ध पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने की सलाह दी गई है, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।

अधिकारियों के मुताबिक सामने आए संदिग्ध मामलों में से 427 पशु उपचार के बाद स्वस्थ हो चुके हैं। विभाग का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत के अनुसार टीकाकरण समेत अन्य जरूरी कदम आगे भी उठाए जाएंगे।


‘सेवा ही संगठन’ के संकल्प के साथ भाजपा ने तैयार किया जनसेवा का रोडमैप

“”राष्ट्र निर्माण और जनसेवा का महाअभियान: अल्मोड़ा भाजपा जिला कार्यशाला में जुटे दिग्गज, कार्यकर्ताओं में भरा जोश।”

अल्मोड़ा। भारतीय जनता पार्टी की ओर से संगठन को मजबूत करने और केंद्र व राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के उद्देश्य से अल्मोड़ा स्थित भाजपा जिला कार्यालय में जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत आयोजित की गई, जिसमें पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने जनसेवा को लेकर आगामी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की।

कार्यशाला में संगठन की गतिविधियों को बूथ स्तर तक प्रभावी बनाने, सरकार की योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने और जरूरतमंद वर्गों को योजनाओं का लाभ दिलाने पर विशेष जोर दिया गया। इस दौरान पार्टी को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत बनाने के लिए विभिन्न बिंदुओं पर मंथन करते हुए आगे की कार्ययोजना तैयार की गई।

वक्ताओं ने कहा कि भाजपा का मूल उद्देश्य केवल राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘सेवा ही संगठन’ और ‘अंत्योदय’ की भावना के साथ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचना है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण और जनसेवा के इस अभियान में प्रत्येक कार्यकर्ता की भूमिका महत्वपूर्ण है।

कार्यशाला में मौजूद पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने तथा संगठन को बूथ स्तर पर और अधिक सशक्त बनाने का संकल्प लिया। साथ ही कार्यकर्ताओं से पूरी सक्रियता और समर्पण के साथ संगठनात्मक गतिविधियों में जुटने का आह्वान किया गया।

कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष महेश नयाल, प्रदेश उपाध्यक्ष एवं जिला प्रभारी राजेंद्र बिष्ट, महापौर अजय वर्मा, प्रदेश मंत्री गौरव पाण्डेय, दर्जा मंत्री गोविन्द पिल्खवाल, वरिष्ठ नेता कुंदन लटवाल, पूर्व विधायक कैलाश शर्मा, पूर्व विधायक रघुनाथ चौहान, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य रवि रौतेला और बिट्टू कर्नाटक, जिला महामंत्री प्रकाश भट्ट एवं दर्शन रावत समेत जिला पदाधिकारी, विभिन्न मोर्चों के जिलाध्यक्ष व महामंत्री, मंडल अध्यक्ष-महामंत्री और बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे।


एमडीडीए का अवैध निर्माण पर शिकंजा, तीन निर्माण स्थल सील

बिना स्वीकृत मानचित्र के चल रहे निर्माण पर बड़ी कार्रवाई, ऋषिकेश और देहरादून में भवन स्वामियों पर कसा शिकंजा

देहरादून। मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने प्राधिकरण क्षेत्र में बिना स्वीकृत मानचित्र और नियमों के विपरीत किए जा रहे निर्माण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। प्राधिकरण की टीम ने तीन अलग-अलग निर्माण स्थलों को सील कर दिया। कार्रवाई के बाद अनधिकृत निर्माण कराने वाले भवन स्वामियों में हड़कंप मचा हुआ है। एमडीडीए अधिकारियों ने साफ किया है कि नियमों की अनदेखी कर किए जा रहे निर्माण के खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।

प्राधिकरण के अनुसार ऋषिकेश में रेलवे स्टेशन के निकट, पीडब्ल्यूडी कार्यालय के पीछे, रेलवे रोड स्थित विनोद अग्रवाल के निर्माण स्थल पर व्यावसायिक दुकान के लिए छत डालने का कार्य किया जा रहा था। निर्माण कार्य के संबंध में प्राधिकरण द्वारा उत्तराखण्ड नगर एवं ग्राम नियोजन तथा विकास अधिनियम, 1973, यथा संशोधित, की सुसंगत धाराओं के तहत वाद दायर किया गया। प्रकरण में नियमानुसार कार्रवाई करते हुए निर्माण स्थल को सील कर दिया गया।

इसी तरह देहरादून के माजरा क्षेत्र में मुस्कान होटल के पीछे शाहिद के निर्माण स्थल पर बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्माण किए जाने का मामला सामने आया। प्राधिकरण द्वारा मामले में वाद दायर करते हुए नियमानुसार कार्रवाई की गई और मौके पर निर्माण स्थल को सील कर दिया गया।

वहीं, इसी क्षेत्र में शाहिद के एक अन्य निर्माण स्थल पर भी बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्माण किए जाने की शिकायत/प्रकरण सामने आया। जांच के बाद प्राधिकरण ने संबंधित प्रकरण में भी नियमानुसार कार्रवाई करते हुए स्थल को सील कर दिया।

स्वीकृत मानचित्र के बिना निर्माण पर सख्ती

एमडीडीए अधिकारियों का कहना है कि प्राधिकरण क्षेत्र में सुनियोजित विकास के लिए भवन निर्माण से पहले मानचित्र स्वीकृत कराना अनिवार्य है। स्वीकृत मानचित्र के विपरीत निर्माण या बिना मानचित्र के निर्माण किए जाने पर संबंधित भवन स्वामी के खिलाफ नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

बंशीधर तिवारी, उपाध्यक्ष एमडीडीए

एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में सुनियोजित एवं व्यवस्थित विकास के लिए भवन निर्माण से पहले स्वीकृत मानचित्र और निर्धारित नियमों का पालन करना जरूरी है। बिना स्वीकृति अथवा स्वीकृत मानचित्र के विपरीत किए जा रहे निर्माण को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण को प्राप्त शिकायतों के साथ-साथ निरीक्षण के दौरान सामने आने वाले अनधिकृत निर्माणों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित निर्माण के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

मोहन सिंह बर्निया, सचिव एमडीडीए

एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि प्राधिकरण की ओर से अवैध एवं अनधिकृत निर्माणों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्माण करने वालों को किसी भी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण की कार्रवाई का उद्देश्य शहर और प्राधिकरण क्षेत्र में नियोजित एवं नियमबद्ध विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने भवन स्वामियों से अपील की कि निर्माण शुरू करने से पहले मानचित्र स्वीकृत कराएं और निर्धारित मानकों का पालन करें। नियमों का उल्लंघन मिलने पर नोटिस, वाद दायर करने, सीलिंग सहित अन्य वैधानिक कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी।


डीएम ने ईवीएम-वीवीपैट की सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा, निर्धारित प्रोटोकॉल के पालन के निर्देश

डीएम ने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ ईवीएम वेयरहाउस का किया निरीक्षण

देहरादून। जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ ईवीएम वेयरहाउस का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित मानकों एवं दिशा-निर्देशों के अनुरूप इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) एवं वीवीपैट मशीनों के सुरक्षित रख-रखाव, सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

जिलाधिकारी ने वेयरहाउस की सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्वाचन आयोग के निर्धारित सभी मानकों एवं प्रोटोकॉल का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि ईवीएम वेयरहाउस निर्वाचन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में ईवीएम एवं वीवीपैट की सुरक्षा, सुरक्षित रख-रखाव और निगरानी में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने वेयरहाउस में रखी ईवीएम एवं वीवीपैट मशीनों की सुरक्षा व्यवस्था के साथ प्रवेश एवं निकास व्यवस्था तथा संबंधित अभिलेखों का भी अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों को वेयरहाउस की नियमित निगरानी एवं निरीक्षण की प्रक्रिया निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार निरंतर जारी रखने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वाेच्च प्राथमिकता है। इसके लिए ईवीएम एवं वीवीपैट मशीनों का सुरक्षित रख-रखाव तथा निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों का गंभीरता एवं सजगता के साथ निर्वहन करने को कहा।

निरीक्षण के दौरान उपस्थित राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी निर्वाचन आयोग के निर्धारित प्रावधानों के तहत वेयरहाउस की सुरक्षा एवं अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी दी गई। साथ ही निरीक्षण प्रक्रिया में उनकी सहभागिता सुनिश्चित की गई।

इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, ईवीएम नोडल दिनक रौतेला, तहसीलदार सदर सुरेंद्र देव, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी नरेंद्र देवली सहित आम आदमी पार्टी के कमल राणा, बीजेपी के दौलतराम मकवाना आदि मौजूद थे।


10 सितंबर को आईटीआई श्रीनगर में आयोजित होगा लघु रोजगार मेला

लगभग 2000 रिक्त पदों पर रोजगार के अवसर, 18 से 45 वर्ष आयु वर्ग के अभ्यर्थी कर सकेंगे प्रतिभाग

पौड़ी- जनपद के युवक-युवतियों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय, लैंसडाउन द्वारा 10 सितंबर 2026 को प्रातः 10 बजे से राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई), श्रीनगर में लघु रोजगार मेले का आयोजन किया जाएगा। मेले में विभिन्न निजी कंपनियों द्वारा योग्य अभ्यर्थियों का चयन किया जाएगा तथा लगभग 2000 रिक्त पदों पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

क्षेत्रीय सेवायोजन अधिकारी लैंसडाउन अजय सिंह ने बताया कि रोजगार मेले में 10 से 15 कंपनियों के प्रतिभाग करने की संभावना है। इनमें एनटीटीटी, सीआईपीईटी, कैंप-108, एसआईएस इंडिया, आरएसपीएल, क्वेस कॉर्प लिमिटेड, एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस एवं नील मेटल प्रोडक्ट सहित अन्य अधिष्ठान शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि रोजगार मेले में हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, आईटीआई, स्नातक, बी.फार्मा, डी.फार्मा, एएनएम एवं जीएनएम शैक्षिक योग्यता रखने वाले अभ्यर्थी प्रतिभाग कर सकते हैं। अभ्यर्थियों के लिए आयु सीमा 18 से 45 वर्ष निर्धारित की गयी है। साक्षात्कार में चयनित अभ्यर्थियों को पद एवं योग्यता के अनुसार लगभग 12 हजार से 40 हजार रुपये प्रतिमाह तक वेतन दिया जाएगा।

मेले में रोजगार के अवसरों के साथ अभ्यर्थियों को कौशल प्रशिक्षण, कैरियर काउंसलिंग एवं सेवायोजन विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी दी जाएगी। इससे युवाओं को रोजगार के साथ अपने कौशल विकास एवं कैरियर निर्माण के लिए आवश्यक मार्गदर्शन प्राप्त होगा।

क्षेत्रीय सेवायोजन अधिकारी ने जनपद के पात्र बेरोजगार युवक-युवतियों से शैक्षिक प्रमाण-पत्र, आधार कार्ड, बायोडाटा एवं पासपोर्ट आकार के फोटो साथ लेकर रोजगार मेले में प्रतिभाग करने की अपील की है, ताकि वे उपलब्ध रोजगार अवसरों का अधिकतम लाभ उठा सकें। उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय द्वारा रोजगार मेले की जानकारी अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंचाने के लिए दूरभाष एवं इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। साथ ही, अन्य नियोजकों से संपर्क कर रोजगार के अवसर बढ़ाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।


महानिदेशक ने स्वास्थ्य महानिदेशालय की समीक्षा बैठक में समयबद्ध कार्य-निस्तारण एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के दिए कड़े निर्देश

देहरादून। महानिदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, डॉ. सुनीता टम्टा की अध्यक्षता में आज स्वास्थ्य महानिदेशालय में कार्यरत समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में महानिदेशालय के विभिन्न अनुभागों द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई तथा कार्यप्रणाली में आवश्यक सुधार, पारदर्शिता एवं समयबद्ध कार्य-निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

महानिदेशक ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया कि कार्यालय में प्राप्त किसी भी पत्रावली अथवा प्रकरण को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए तथा प्रत्येक प्रकरण का निर्धारित समय-सीमा के भीतर अनिवार्य रूप से निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि कार्यों में अनावश्यक विलंब अथवा लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं होगी। यदि किसी प्रकरण के निस्तारण में विलंब पाया जाता है तो संबंधित अनुभाग के प्रभारी अधिकारी की जिम्मेदारी निर्धारित की जाएगी तथा विलंब के कारणों का स्पष्ट उत्तरदायित्व तय किया जाएगा।

डॉ. सुनीता टम्टा ने संयुक्त निदेशक एवं सहायक निदेशक स्तर के अधिकारियों को अपने-अपने अनुभागों में संचालित कार्यों की नियमित निगरानी करने तथा प्रत्येक लंबित प्रकरण की समीक्षा कर समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को अपने अनुभागों की कार्यप्रणाली के प्रति पूर्ण जवाबदेही के साथ कार्य करना होगा और किसी भी स्तर पर अनावश्यक लंबित प्रकरण नहीं रहना चाहिए।

बैठक में सूचना का अधिकार (RTI) अनुभाग के कार्यों की भी विशेष रूप से समीक्षा की गई। महानिदेशक ने निर्देश दिए कि RTI से संबंधित सभी प्रकरणों का निर्धारित समय-सीमा के भीतर अनिवार्य रूप से निस्तारण किया जाए, ताकि आवेदक/अपीलकर्ता को समय पर वांछित सूचना उपलब्ध हो सके।

कार्यालयीन अनुशासन एवं समयपालन सुनिश्चित करने के निर्देश

महानिदेशक ने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्धारित कार्यालय समय में अनिवार्य रूप से कार्यालय में उपस्थित रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अनधिकृत अनुपस्थिति अथवा विलंब से कार्यालय पहुंचने की स्थिति को गंभीरता से लिया जाएगा तथा आवश्यकता पड़ने पर संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि एक प्रभावी एवं उत्तरदायी कार्यालय व्यवस्था के लिए समयपालन, अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही अत्यंत आवश्यक हैं। प्रत्येक अधिकारी एवं कर्मचारी को अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा एवं गंभीरता से करना होगा।

महानिदेशक डॉ. सुनीता टम्टा ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों का आह्वान करते हुए कहा कि जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता अथवा अनावश्यक विलंब न किया जाए। विभागीय कार्यों का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निष्ठा, अनुशासन, पारदर्शिता एवं समयबद्धता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने के निर्देश दिए।

बैठक में स्वास्थ्य महानिदेशालय के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।


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