Saturday, September 19th, 2026

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हरिपुर का पुनरुत्थान: आचार्य प्रवेश शर्मा की 4 साल की तपस्या लाई रंग

Category Archives: उत्तराखंड

हरिपुर का पुनरुत्थान: आचार्य प्रवेश शर्मा की 4 साल की तपस्या लाई रंग

₹7.3 करोड़ के भव्य घाटों के शिलान्यास पर सीएम धामी और स्वामी चिदानंद सरस्वती ने सराहा

​देहरादून/हरिपुर। देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत सदियों पुरानी है, लेकिन कालचक्र के प्रभाव में कई प्राचीन तीर्थ उपेक्षित रह गए। इन्हीं में से एक ऐतिहासिक तीर्थ ‘हरिपुर’ (कालसी) अब अपने खोए हुए प्राचीन वैभव को पुनः प्राप्त करने की दिशा में अग्रसर है। यमुना और अमलावा नदी के पावन संगम पर स्थित हरिपुर में ₹7.3 करोड़ की लागत से बनने वाले आधुनिक एवं सुसज्जित घाटों के शिलान्यास के साथ ही एक नया इतिहास रचा गया।

​इस ऐतिहासिक पल के केंद्र में रहे जौनसार-बावर की माटी के लाल और उत्तराखंड के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आचार्य प्रवेश शर्मा। निरंतर चार वर्षों के कठिन परिश्रम, निस्वार्थ सेवा और जन-जागरण के दम पर हरिपुर को राष्ट्रीय पटल पर पहचान दिलाने वाले आचार्य प्रवेश शर्मा के प्रयासों की राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती (मुनि जी) ने मुक्तकंठ से सराहना की।

​मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बढ़ाया उत्साह

​शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण और संवर्धन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने आचार्य प्रवेश शर्मा के समर्पण का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी बड़े बदलाव की नींव में समाज के समर्पित व्यक्तियों का संकल्प होता है।

​मुख्यमंत्री ने आचार्य प्रवेश शर्मा को मुख्य आचार्य के रूप में सम्मानित करते हुए आश्वस्त किया:

​”हरिपुर के आध्यात्मिक उत्थान और यमुना आरती को निरंतर गति देने के लिए आप जिस निष्ठा से जुटे हैं, वह वंदनीय है। आप निरंतर लगे रहिए, सरकार और पूरा प्रदेश आपके साथ मजबूती से खड़ा है।”

​मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ₹7.3 करोड़ की लागत से बनने वाले ये घाट न केवल श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्नान व पूजा-अर्चना की सुविधा देंगे, बल्कि यह क्षेत्र धार्मिक पर्यटन के रूप में विकसित होकर स्थानीय युवाओं के लिए आजीविका के नए मार्ग भी खोलेगा।

​संत समाज का मिला पूर्ण आशीर्वाद

​ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती जी ने हरिपुर घाटों के कायाकल्प को उत्तराखंड के धार्मिक इतिहास का स्वर्णिम अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि यमुना तटों की स्वच्छता और दिव्यता की पुनर्स्थापना के लिए स्थानीय नेतृत्व का आगे आना एक शुभ संकेत है।

​स्वामी जी ने आचार्य प्रवेश शर्मा के सेवा भाव को रेखांकित करते हुए कहा कि संतों का आशीर्वाद हमेशा उनके साथ है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में हरिपुर घाट पर होने वाली दैनिक यमुना महाआरती हरिद्वार की गंगा आरती की भांति देश-विदेश के श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगी।

​4 वर्षों की मौन साधना और जीएसआर फाउंडेशन की भूमिका

​हरिपुर का इतिहास महाभारत काल और सम्राट अशोक के शिलालेखों से जुड़ा हुआ है, किंतु लंबे समय से यह संगम उपेक्षित था। ऐसे समय में आचार्य प्रवेश शर्मा ने इस पावन भूमि को उसका गौरव वापस दिलाने का बीड़ा उठाया।

​विगत 4 वर्षों से आचार्य प्रवेश शर्मा ने बिना किसी सरकारी या बड़े वित्तीय सहयोग के, शून्य से शुरुआत करते हुए हरिपुर घाट पर नियमित यमुना आरती की परंपरा शुरू की। उनके नेतृत्व में गठित जीएसआर फाउंडेशन और यमुना आरती सेवा समिति ने दिन-रात एक कर इस अभियान को जन-आंदोलन का रूप दिया।

​नियमित स्वच्छता अभियान: यमुना और अमलावा संगम को प्लास्टिक और कचरे से मुक्त रखने के लिए साप्ताहिक श्रमदान।

​सांस्कृतिक पुनर्जागरण: स्थानीय युवाओं और पुरोहितों को जोड़कर वैदिक विधि-विधान से दैनिक महाआरती का संचालन।

​जन-जागरण: जौनसार-बावर से लेकर देहरादून और राष्ट्रीय स्तर तक हरिपुर के ऐतिहासिक महत्व को स्थापित करना।

​जौनसार-बावर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक बधाई का तांता
​शिलान्यास समारोह के दौरान जब मंच से हरिपुर के पुनरुद्धार की चर्चा हुई, तो उपस्थित जनसमूह के मुख पर आचार्य प्रवेश शर्मा और उनकी समिति का ही नाम था। स्थानीय नागरिकों, ग्राम प्रधानों, सामाजिक संगठनों के साथ-साथ प्रदेश स्तर के प्रबुद्ध जनों ने आचार्य प्रवेश शर्मा को शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

​क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि आचार्य प्रवेश शर्मा ने जौनसार-बावर की धरती का नाम रोशन किया है। उनका यह प्रयास साबित करता है कि यदि संकल्प दृढ़ हो, तो सदियों पुरानी उपेक्षित विरासत को भी नई संजीवनी दी जा सकती है।

​धार्मिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई उड़ान

​हरिपुर घाटों का कायाकल्प केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक ढांचे में भी बड़ा बदलाव लाएगा।

​चारधाम मार्ग पर प्रमुख पड़ाव: विकासनगर-कालसी क्षेत्र से होकर गुजरने वाले चारधाम यात्रियों और चकराता आने वाले पर्यटकों के लिए हरिपुर एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र बनेगा।

​रोजगार के अवसर: घाटों के आधुनिक निर्माण से पूजा सामग्री, होटल, होमस्टे और परिवहन से जुड़े स्थानीय व्यवसायों में तेजी आएगी।

​सांस्कृतिक संरक्षण: जौनसार-बावर की समृद्ध लोक संस्कृति और वैदिक सनातन परंपरा का अनूठा संगम यहां देखने को मिलेगा।

​हरिपुर की पावन धारा पर शुरू हुआ यह महायज्ञ अब सरकारी संकल्प और संत समाज के आशीर्वाद से पूर्णता की ओर बढ़ रहा है, जिसका श्रेय निश्चित तौर पर आचार्य प्रवेश शर्मा और उनकी टीम की निष्काम सेवा को जाता है।


कुंभ मेला 2027 की तैयारियों को लेकर हरिद्वार में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक, एडीजी ने दिए समयबद्ध तैयारी के निर्देश

हरिद्वार। कुंभ मेला-2027 की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अपर पुलिस महानिदेशक अपराध एवं कानून व्यवस्था डॉ. वी. मुरुगेशन ने हरिद्वार पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया। शुक्रवार को सीसीआर स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने अब तक की तैयारियों और आगामी कार्ययोजना की जानकारी दी।

बैठक में कुंभ मेला-2027 की सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण, आपदा एवं आपातकालीन प्रबंधन, संचार व्यवस्था, डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल और पुलिस बल की चरणबद्ध तैनाती समेत कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की समीक्षा की गई।

एडीजी डॉ. वी. मुरुगेशन ने अधिकारियों को प्रभावी और ठोस कार्ययोजना के साथ सभी तैयारियां समयबद्ध तरीके से पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कुंभ मेला विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और उन्हें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना उत्तराखंड पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

उन्होंने जोन और सेक्टर स्तर पर पुलिस व्यवस्था निर्धारित करने, पर्याप्त पुलिस बल की उपलब्धता सुनिश्चित करने और चरणबद्ध तैनाती की योजना तैयार करने के निर्देश दिए। साथ ही मेला क्षेत्र में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए संबंधित विभागों और सीमावर्ती जनपदों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया।

समीक्षा बैठक के बाद एडीजी ने अधिकारियों के साथ कुंभ मेला क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया और विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इसके बाद वे एटीसी पहुंचे, जहां कुंभ मेला ड्यूटी के लिए प्रशिक्षण ले रहे जवानों से मुलाकात की। उन्होंने प्रशिक्षण की प्रगति और जवानों की तैयारियों की जानकारी ली तथा व्यवस्थाओं को और प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

बैठक में आईजी अपराध एवं कानून व्यवस्था डॉ. नीलेश आनंद भरणे, आईजी गढ़वाल परिक्षेत्र राजीव स्वरूप, आईजी कुंभ मेला डॉ. योगेंद्र सिंह रावत, एसएसपी कुंभ मेला आयुष अग्रवाल समेत पुलिस और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे


अंकिता भंडारी को न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा: डॉ. हरक सिंह रावत

अंकिता के न्याय की लड़ाई उत्तराखंड की हर बेटी के सम्मान और सुरक्षा की लड़ाई: डॉ. हरक सिंह रावत

अंकिता भंडारी की चौथी पुण्यतिथि पर कैंडल मार्च, न्याय की मांग को लेकर उठी आवाज

देहरादून। उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी की चौथी पुण्यतिथि के अवसर पर उत्तराखंड महिला कांग्रेस द्वारा कांग्रेस भवन, देहरादून से घंटाघर तक आयोजित कैंडल मार्च में कांग्रेस चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने शामिल होकर अंकिता भंडारी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस मौके पर डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि अंकिता भंडारी और उनके माता-पिता को अभी तक पूर्ण न्याय नहीं मिल पाया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का प्रत्येक कार्यकर्ता पूरी प्रतिबद्धता के साथ तब तक संघर्ष करता रहेगा, जब तक अंकिता भंडारी को न्याय नहीं मिलता तथा हत्या के दोषियों के साथ-साथ उन VVIP लोगों की भूमिका को लेकर उठे सवालों की भी निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई नहीं होती।

उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी का मामला केवल एक बेटी के साथ हुए अन्याय का विषय नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और न्याय से जुड़ा गंभीर सवाल है। प्रदेश की अनेक बेटियां आज महिला अपराध और अत्याचार के बीच सुरक्षा और न्याय की उम्मीद लगाए बैठी हैं।

डॉ. रावत ने कहा कि अंकिता के माता-पिता की न्याय की लड़ाई को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। यह संघर्ष उत्तराखंड की हर बेटी, हर बहन और हर महिला के सम्मान, सुरक्षा और न्याय के लिए है।

उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी को न्याय मिलने तक यह संघर्ष पूरी मजबूती और प्रतिबद्धता के साथ जारी रहेगा।


निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोहली ने हरिद्वार में की आत्महत्या, चाय की दुकान में फंदे से लटका मिला शव

तीन दिन पहले खोली थी चाय की दुकान, हरिद्वार में सुरेंद्र कोहली ने उठाया आत्मघाती कदम

हरिद्वार। निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोहली ने हरिद्वार में आत्महत्या कर ली। शहर कोतवाली क्षेत्र के भूपतवाला में सुरेंद्र कोहली चाय की दुकान चला रहा था। शनिवार को उसका शव दुकान में पंखे से लटका मिला। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी।

जानकारी के मुताबिक, सुरेंद्र कोहली ने करीब तीन दिन पहले ही भूपतवाला क्षेत्र में चाय की दुकान किराए पर ली थी। पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में उसके तनाव में होने की बात सामने आई है। हालांकि, आत्महत्या के पीछे की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है।

दुकान किराए पर दिलाने वाले धर्मेंद्र ने बताया कि शुक्रवार शाम सुरेंद्र काफी परेशान और तनाव में नजर आ रहा था। धर्मेंद्र के अनुसार, परिवार में किसी बच्चे का जन्मदिन होने की बात कहते हुए सुरेंद्र ने पैसों की कमी का जिक्र किया था। इसके बाद धर्मेंद्र ने उसे 2 हजार रुपये दिए थे। धर्मेंद्र का कहना है कि उस समय सुरेंद्र काफी ज्यादा तनाव में था।

घटना के बाद पुलिस ने सुरेंद्र के परिजनों को सूचना दे दी है। मौके से फिलहाल कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है। आत्महत्या के कारणों की जांच की जा रही है और परिजनों से पूछताछ के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।


बैजरों में लापता व्यक्ति की तलाश में SDRF का सर्च अभियान जारी, नहीं मिला सुराग

पौड़ी गढ़वाल। जनपद पौड़ी गढ़वाल के थाना थलीसैंण क्षेत्र के बैजरों में लापता चल रहे व्यक्ति की तलाश में SDRF की डीप डाइविंग टीम का सर्च अभियान लगातार जारी है। शुक्रवार को टीम ने बैजरों से चौकी बीरोंखाल तक नदी क्षेत्र में संभावित स्थानों पर गहन तलाशी अभियान चलाया।

SDRF के कुशल गोताखोरों ने नदी के विभिन्न स्थानों पर डाइविंग कर लापता व्यक्ति की तलाश की। इसके अलावा रेस्क्यू कांटे और डग्गी की मदद से भी नदी क्षेत्र को खंगाला गया। टीम ने नदी में काफी दूरी तक सघन सर्चिंग की, लेकिन देर शाम तक लापता व्यक्ति का कोई सुराग नहीं मिल सका।


राजस्व अर्जन बढ़ाने वाले सभी विभाग परियोजना से जुड़कर ले सकेंगे आवश्यक तकनीकी एवं अन्य सहयोग: मुख्य सचिव

विश्व बैंक सहायतित एसपीएफएम परियोजना से उत्तराखंड में वित्तीय सुदृढ़ीकरण को मिलेगी गति

राजस्व वृद्धि के साथ डिजिटल नवाचार से जनसुविधाओं के विस्तार पर भी रहेगा फोकस

देहरादून : उत्तराखंड में राजस्व संग्रहण को बढ़ावा देने तथा वित्तीय अनुशासन को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से वित्त विभाग द्वारा विश्व बैंक सहायतित एस.पी.एफ.एम. (SPFM) परियोजना का क्रियान्वयन प्रस्तावित है। परियोजना की तैयारियों के संबंध में उत्तराखंड भ्रमण पर आए विश्व बैंक के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को डिब्रिफिंग बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन से मुलाकात कर परियोजना की प्रगति एवं भावी कार्ययोजना के संबंध में विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया।

बैठक में विश्व बैंक के प्रतिनिधियों ने बताया कि परियोजना की तैयारी के क्रम में राज्य के विभिन्न राजस्व संग्रहण करने वाले विभागों एवं संस्थानों के साथ विचार-विमर्श किया गया है। इनमें राज्य कर विभाग, स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग, ट्रेजरी निदेशालय, ऑडिट विभाग, वन विकास निगम सहित अन्य राज्य नियंत्रणाधीन संगठन शामिल हैं। इन विभागों एवं संस्थानों को परियोजना के दायरे में शामिल किया जा रहा है।

मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने कहा कि राज्य में राजस्व अर्जित करने वाले सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि राजस्व अर्जन में वृद्धि के लिए उन्हें जिस भी प्रकार की तकनीकी, संस्थागत अथवा अन्य सहायता की आवश्यकता है, वह एस.पी.एफ.एम. परियोजना के अंतर्गत प्राप्त की जाए। उन्होंने कहा कि परियोजना का उद्देश्य केवल राजस्व संग्रहण बढ़ाना ही नहीं, बल्कि राज्य की समग्र वित्तीय व्यवस्था को अधिक सक्षम, पारदर्शी और प्रभावी बनाना भी है।

मुख्य सचिव ने कहा कि परियोजना के अंतर्गत राजस्व अर्जन में वृद्धि के साथ-साथ डिजिटल नवाचार को भी प्राथमिकता दी जाए, ताकि आधुनिक तकनीक के माध्यम से सरकारी सेवाओं और प्रक्रियाओं को अधिक सरल एवं सुगम बनाया जा सके तथा इसका सीधा लाभ जनसाधारण को मिले। उन्होंने संबंधित विभागों के मध्य बेहतर समन्वय के साथ परियोजना के लक्ष्यों को समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाने के निर्देश भी दिए।

विश्व बैंक के प्रतिनिधियों ने परियोजना की तैयारियों, विभिन्न विभागों के साथ किए गए विमर्श तथा आगे की कार्ययोजना से मुख्य सचिव को अवगत कराया।

बैठक में परियोजना के माध्यम से राज्य की राजस्व क्षमता को मजबूत करने, वित्तीय प्रबंधन में सुधार तथा डिजिटल प्रणालियों के प्रभावी उपयोग से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा की गई।

बैठक में विश्व बैंक की ओर से एस. कृष्णामूर्ति, अरविंद कुमार, आनंद एवं विकास तथा परियोजना की ओर से परियोजना निदेशक नवनीत पांडेय, अपर परियोजना निदेशक पी.सी. खरे एवं परियोजना प्रबंधन से भवतोष भट्ट उपस्थित रहे।


मुख्यमंत्री धामी ने मियांवाला में ₹8.64 करोड़ की लागत से विकसित ‘जल सृष्टि पार्क’ का किया लोकार्पण

स्वच्छ, स्वस्थ और हरित देहरादून के संकल्प को मिल रही नई गति : मुख्यमंत्री धामी

देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा मुख्यमंत्री की घोषणा के अंतर्गत मियांवाला, देहरादून में लगभग ₹8 करोड़ 64 लाख की लागत से विकसित ‘जल सृष्टि पार्क’ का लोकार्पण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने क्षेत्रवासियों को नए पार्क की सौगात मिलने पर बधाई दी और इसे स्वच्छ, स्वस्थ एवं हरित देहरादून के संकल्प की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि रायपुर क्षेत्र के लोगों के बीच इस सुंदर पार्क का लोकार्पण उनके लिए प्रसन्नता का विषय है। उन्होंने कहा कि ‘जल सृष्टि पार्क’ आधुनिक सुविधाओं और प्राकृतिक सौंदर्य का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करता है। पार्क को इस प्रकार विकसित किया गया है कि यहां बच्चों से लेकर बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं तक सभी आयु वर्ग के लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

पुराने तालाब का पुनर्जीवन कर विकसित किया गया आकर्षक पार्क

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि पार्क के निर्माण के दौरान यहां पहले से मौजूद पुराने तालाब को समाप्त करने के बजाय उसका पुनर्जीवन किया गया है। उन्होंने कहा कि तालाब के संरक्षण और उसके आसपास सुविधाओं के विकास से इस स्थान को नई पहचान मिली है। तालाब के मध्य सुंदर आइलैंड विकसित किया गया है तथा लोगों के मनोरंजन के लिए पेडल बोटिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने कहा कि अब रायपुर क्षेत्र के लोगों को देहरादून में ही एक खूबसूरत प्राकृतिक स्थल के साथ ‘नैनीताल जैसी फीलिंग’ का अनुभव प्राप्त हो सकेगा।

जल और जंगल हमारी संस्कृति का हिस्सा, संरक्षण हमारी जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में जल और जंगल को केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं माना गया, बल्कि इन्हें जीवन और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा समझा गया है। ऐसे में पुराने तालाबों और जल स्रोतों का पुनर्जीवन केवल पर्यावरण संरक्षण का कार्य नहीं है, बल्कि यह हमारी विरासत को बचाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल एवं प्रकृति को सुरक्षित रखने का भी महत्वपूर्ण प्रयास है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है। विकास का अर्थ केवल बड़ी इमारतें और कंक्रीट के ढांचे तैयार करना नहीं है। वास्तविक विकास वही है, जिससे लोगों का जीवन सुगम हो, शहर सुंदर बने, पर्यावरण सुरक्षित रहे और आने वाली पीढ़ियों को बेहतर भविष्य मिल सके। उन्होंने जल सृष्टि पार्क को इसी सोच का एक सुंदर उदाहरण बताया।

रायपुर क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और पेयजल सुविधाओं को मिल रही गति

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में केंद्र और राज्य सरकार के बेहतर समन्वय से उत्तराखंड में विकास की गति को लगातार तेज किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि विकास का लाभ प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र और प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे।

उन्होंने कहा कि इसी क्रम में रायपुर क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल, पार्क, सीवर और बाढ़ सुरक्षा से जुड़े अनेक कार्य आगे बढ़ाए गए हैं। युवाओं को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों में सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है तथा क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूत किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि क्षेत्र में सड़कों के डामरीकरण, नवीनीकरण और चौड़ीकरण के साथ सीवर व्यवस्था को बेहतर बनाने का कार्य भी जारी है। पेयजल की समस्या के समाधान के लिए नए ट्यूबवेल और ओवरहेड टैंक बनाए गए हैं। पुरानी पाइपलाइनों को बदलने तथा नई पेयजल लाइनें बिछाने का कार्य भी निरंतर आगे बढ़ाया जा रहा है।

हरित क्षेत्रों के विकास से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को मिल रही बेहतर सुविधाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि डिफेंस कॉलोनी, सिंयावाला, नेहरू कॉलोनी सहित विभिन्न क्षेत्रों में पार्कों के निर्माण एवं सौंदर्यीकरण के कार्य किए गए हैं। इसका उद्देश्य लोगों को अपने आसपास ही ऐसे सुंदर और हरित स्थान उपलब्ध कराना है, जहां वे स्वस्थ वातावरण में समय बिता सकें।

उन्होंने कहा कि आईटी पार्क से पॉलीटेक्निक होते हुए मंगलूवाला की ओर सड़क व्यवस्था को बेहतर बनाने के कार्य भी आगे बढ़ाए जा रहे हैं। इससे क्षेत्र की कनेक्टिविटी बेहतर होने के साथ यातायात व्यवस्था को भी सुगम बनाने में मदद मिलेगी।

सौंग डैम से मजबूत होगी देहरादून की पेयजल व्यवस्था 

मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून लगातार विस्तार ले रहा है और बढ़ती आबादी के साथ पानी की आवश्यकता भी बढ़ रही है। ऐसे में सौंग डैम जैसी महत्वपूर्ण परियोजना पर भी कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे भविष्य में देहरादून की पेयजल व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने में सहायता मिलेगी।

उन्होंने कहा कि बरसात के दौरान बाढ़ और जलभराव की समस्या से लोगों को राहत दिलाने के लिए रायपुर क्षेत्र में नदियों और बरसाती नालों पर बाढ़ सुरक्षा तथा चैनलाइजेशन के कार्य भी किए जा रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि जहां सड़क की आवश्यकता हो वहां सड़क बने, जहां पेयजल की समस्या हो वहां पानी पहुंचे, जहां जलभराव हो वहां उसका स्थायी समाधान हो और जहां हरियाली की आवश्यकता हो वहां सुंदर पार्क विकसित किए जाएं।

विकास का उद्देश्य लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को बेहतर बनाना

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास किसी एक परियोजना का नाम नहीं है, बल्कि इसका वास्तविक उद्देश्य लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को बेहतर बनाना है। जल सृष्टि पार्क भी इसी व्यापक सोच का हिस्सा है, जहां पर्यावरण संरक्षण के साथ लोगों के लिए मनोरंजन, स्वास्थ्य और प्रकृति से जुड़ने की सुविधाएं विकसित की गई हैं।

उन्होंने इस कार्य के लिए एमडीडीए के अधिकारियों, इंजीनियरों और कर्मचारियों को बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में यह पार्क केवल रायपुर क्षेत्र ही नहीं, बल्कि पूरे देहरादून के लोगों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनेगा।

पार्क को अपना समझकर स्वच्छ एवं सुंदर बनाए रखने की अपील

मुख्यमंत्री धामी ने क्षेत्रवासियों से अपील की कि सरकार पार्क का निर्माण कर सकती है, उसे सुंदर बना सकती है और सुविधाएं उपलब्ध करा सकती है, लेकिन उसे लंबे समय तक स्वच्छ और सुंदर बनाए रखना सभी की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से पार्क को केवल सरकारी संपत्ति न मानकर अपना पार्क समझने और अपने घर की तरह इसकी स्वच्छता एवं देखभाल करने का आग्रह किया।

उन्होंने विशेष रूप से बच्चों और युवाओं से पार्क का अधिक से अधिक उपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बच्चे और युवा यहां खेलें, दौड़ें, योग करें और प्रकृति के बीच समय बिताएं, लेकिन इसके साथ पार्क और जलाशय की देखभाल की जिम्मेदारी भी समझें। सरकार और समाज के सामूहिक प्रयास से ही कोई विकास कार्य लंबे समय तक सुंदर और उपयोगी बना रह सकता है।

आधुनिक सुविधाओं के साथ देहरादून की हरियाली और प्राकृतिक पहचान को बनाए रखने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून अपनी प्राकृतिक सुंदरता और हरियाली के लिए देशभर में जाना जाता है। विकास की यात्रा में इस पहचान को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। सरकार का प्रयास है कि देहरादून में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार हो, लेकिन इसके साथ ही शहर के प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यावरण का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि यही राज्य सरकार के विकास मॉडल की मूल भावना है।

मुख्यमंत्री ने रायपुर क्षेत्र के लोगों को विश्वास दिलाया कि उनके जीवन को अधिक सुविधाजनक, सुरक्षित और बेहतर बनाने के लिए सरकार इसी प्रकार निरंतर कार्य करती रहेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार देवभूमि उत्तराखंड को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने तथा इसे देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के अपने ‘विकल्प रहित संकल्प’ को पूरा करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस संकल्प को सिद्धि तक पहुंचाने में रायपुर क्षेत्र के लोग भी इसी प्रकार अपना सहयोग और योगदान प्रदान करते रहेंगे।

जल सृष्टि पार्क में हर आयु वर्ग के लिए सुविधाएं, प्राकृतिक सौंदर्य बना विशेष आकर्षण

एमडीडीए द्वारा मियांवाला, देहरादून में ₹8.64 करोड़ की लागत से विकसित यह जल सृष्टि पार्क एक बहुआयामी हरित एवं मनोरंजन स्थल है, जिसमें पुराने तालाब का पुनर्जीवन करते हुए उसके आसपास आधुनिक सुविधाओं का विकास किया गया है। पार्क में सुबह-शाम भ्रमण एवं दौड़ने के लिए जॉगिंग ट्रैक, योग के लिए योगा डेक, बच्चों के लिए चिल्ड्रन पार्क, फूलों एवं वनस्पतियों की जानकारी देने वाला एजुकेशनल फ्लावर गार्डन, आकर्षक लैंडस्केपिंग, हरित क्षेत्र तथा बैठने की सुविधाएं विकसित की गई हैं।

तालाब के मध्य सुंदर आइलैंड बनाया गया है और लोगों के मनोरंजन के लिए पेडल बोटिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। इस प्रकार एमडीडीए ने पुराने जल स्रोत के संरक्षण को आधुनिक शहरी सुविधाओं के साथ जोड़ते हुए एक ऐसे खूबसूरत पार्क का विकास किया है, जो पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों के पुनर्जीवन, स्वास्थ्य, मनोरंजन और प्राकृतिक सौंदर्य—सभी को एक स्थान पर समाहित करता है। यह कार्य देहरादून में हरित एवं पर्यावरण अनुकूल शहरी विकास की दिशा में एमडीडीए के प्रयासों का एक उल्लेखनीय उदाहरण है।

कार्यक्रम में विधायक उमेश शर्मा काऊ, मेयर सौरभ थपलियाल, एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।


जल सृष्टि पार्क के लोकार्पण से लौटते समय सीएम धामी ने अचानक रुकवाया काफिला, बच्चों और आमजन के साथ खिंचवाईं सेल्फी

मुख्यमंत्री को देखने उमड़े लोग, सीएम धामी ने प्रोटोकॉल से इतर आमजन के बीच पहुंचकर साझा की आत्मीयता

 बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने मांगी सेल्फी, मुख्यमंत्री धामी ने रुककर हर किसी की इच्छा की पूरी

देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शुक्रवार को मियांवाला, देहरादून में जल सृष्टि पार्क के लोकार्पण कार्यक्रम से लौट रहे थे। इस दौरान मार्ग में जगह-जगह बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और बच्चे मुख्यमंत्री की एक झलक पाने के लिए उत्साहित नजर आए। लोगों का उत्साह और आत्मीयता देखकर मुख्यमंत्री श्री धामी ने अचानक अपना काफिला रुकवाया और स्वयं आमजन के बीच पहुंच गए।

मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर बच्चे और स्थानीय लोग बेहद उत्साहित नजर आए। कई लोगों ने मुख्यमंत्री से उनके साथ फोटो और सेल्फी लेने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री श्री धामी ने भी सहजता के साथ उनके आग्रह को स्वीकार करते हुए बच्चों, युवाओं, महिलाओं और अन्य लोगों के साथ तस्वीरें खिंचवाईं और सेल्फी लीं।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने बच्चों से बातचीत कर उनका हालचाल भी जाना। लोगों ने मुख्यमंत्री से बातचीत करते हुए अपनी भावनाएं साझा कीं। मुख्यमंत्री ने भी पूरी आत्मीयता के साथ आमजन से संवाद किया और उनकी बातों को सुना।

मुख्यमंत्री की इस सहजता और आत्मीय व्यवहार से मौके पर मौजूद लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। काफिला रुकने और मुख्यमंत्री के स्वयं लोगों के बीच पहुंचने का यह दृश्य लोगों के लिए यादगार बन गया। बच्चों के चेहरे पर खुशी और स्थानीय लोगों के उत्साह ने माहौल को और भी आत्मीय बना दिया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि ” जनता से मिलना और उनके बीच रहना उनके लिए हमेशा सुखद अनुभव रहा है। प्रदेश की जनता का स्नेह और आशीर्वाद ही उन्हें निरंतर जनसेवा के लिए प्रेरित करता है।”


03 कुमाऊं रेजीमेंट के रेजिंग-डे समारोह में शामिल हुए मंत्री गणेश जोशी

सैनिकों और पूर्व सैनिकों को दी शुभकामनाएं

देहरादून। गढ़ी कैंट स्थित गोर्खाली सुधार सभा में शुक्रवार को 03 कुमाऊं रेजीमेंट का रेजिंग-डे समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने रेजीमेंट के सभी सैनिकों, पूर्व सैनिकों, सैन्य अधिकारियों, वीर नारियों और उनके परिजनों को रेजिंग-डे की शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि कुमाऊं रेजीमेंट का इतिहास भारतीय सेना के शौर्य, साहस, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की गौरवशाली गाथाओं से भरा है। रेजीमेंट के वीर सैनिकों ने देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए कठिन परिस्थितियों में अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि कुमाऊं रेजीमेंट का देश की रक्षा में योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

गणेश जोशी ने कहा कि जब देशवासी चैन की नींद सोते हैं, तब हमारे सैनिक सीमाओं पर जागकर देश की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। सैनिक देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता के प्रहरी हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को देवभूमि के साथ वीरभूमि के रूप में भी जाना जाता है। प्रदेश के हजारों परिवारों की कई पीढ़ियों ने भारतीय सेना में सेवाएं दी हैं और यहां के युवाओं में राष्ट्रसेवा की भावना लंबे समय से रही है।

मंत्री ने कहा कि रेजिंग-डे का अवसर उन वीर सैनिकों और शहीदों को नमन करने का भी है, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उनका त्याग और शौर्य आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।

उन्होंने पूर्व सैनिकों और वीर नारियों को राष्ट्र की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि सैनिक के साथ उसका परिवार भी देशसेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सैनिकों और उनके परिवारों के सम्मान, कल्याण और हितों की रक्षा करना समाज और सरकार की सामूहिक जिम्मेदारी है।

गणेश जोशी ने कुमाऊं रेजीमेंट के जवानों और पूर्व सैनिकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि रेजीमेंट की गौरवशाली परंपरा इसी तरह आगे बढ़ती रहे और इसके वीर जवान देश का मान-सम्मान बढ़ाते रहें।

समारोह में गोविंद सिंह, गंगा दत्त बिनवाल, हरी सिंह, मंजू देउपा, गंगा सिंह, देवकी बिनवाल, कैलाश सिंह, दरबान सिंह, राम दत्त, नंदन सिंह सहित सैन्य अधिकारी, वीर जवान, पूर्व सैनिक, वीर नारियां और उनके परिजन मौजूद रहे।


पौड़ी में घेरबाड़ नीति के प्रभावी क्रियान्वयन पर मंथन, डीएम ने दिए निर्देश

सहभागिता और पारदर्शिता के साथ तैयार होंगे प्रस्ताव, बेहतर क्लस्टरों को उत्पादन के आधार पर मिलेगी सुविधा

पौड़ी। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के अंतर्गत फार्म फेसिंग पॉलिसी (घेरबाड़ नीति) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर आज जिला सभागार में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गयी। बैठक में योजना के तहत प्रस्ताव तैयार करने, पात्र लाभार्थियों के चयन, कार्यों की गुणवत्ता एवं अनुश्रवण तथा विभिन्न विभागों के मध्य कन्वर्जेंस को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी को निर्देश दिए कि जनपद के सभी खंड विकास अधिकारियों के साथ प्राप्त प्रस्तावों की जांच कर उनकी वास्तविक स्थिति का परीक्षण किया जाए। साथ ही संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से कन्वर्जेंस के माध्यम से कार्य कराने पर जोर दिया गया, ताकि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके। जिलाधिकारी ने कृषि भूमि संरक्षण अधिकारियों से संवाद कर क्षेत्रवार स्थिति एवं प्रस्तावित कार्यों की जानकारी भी ली।

उन्होंने जिला योजना के माध्यम से पूर्व में कराए गए घेरबाड़ एवं संबंधित कार्यों का स्थलीय निरीक्षण कर उनकी गुणवत्ता का सत्यापन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पूर्व में किए गए कार्यों की स्थिति का परीक्षण कर उनके परिणामों के आधार पर आगामी कार्यों की बेहतर योजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि प्रस्तावों के चयन में सहभागिता और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी जाए तथा ऐसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाए, जहां वर्तमान में खेती हो रही है और स्थानीय लोग सहभागिता के साथ घेरबाड़ कार्य कराने के लिए तैयार हैं।

मुख्य कृषि अधिकारी ने बताया कि शासन स्तर पर कृषि एवं उद्यान विभाग के अंतर्गत फार्म फेसिंग पॉलिसी के लिए संयुक्त मानक संचालन प्रविधि (एसओपी) जारी की गई है तथा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिलास्तरीय समिति का गठन किया गया है। बैठक में एसओपी के अनुरूप योजना के संचालन, लाभार्थियों के चयन और कार्यों के अनुश्रवण को लेकर आवश्यक बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में कृषि एवं उद्यान गतिविधियों को क्लस्टर आधारित तरीके से बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। बताया गया कि जिन क्लस्टरों में सब्जी एवं दलहन का उत्पादन अच्छा हो रहा है, वहां किसानों को बेहतर बाजार मूल्य प्राप्त हो रहा है। जिलाधिकारी ने ऐसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले क्लस्टरों को उनके उत्पादन के आधार पर वाहन सुविधा उपलब्ध कराने तथा इसके लिए जिला योजना में प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए, ताकि किसानों को उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में सुविधा मिल सके।

दुग्ध उत्पादन की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने दुग्ध उत्पादन से जुड़े लाभार्थियों की जानकारी लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही के लिए एक माह का समय दिया। मुख्य विकास अधिकारी ने जनपद में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए नए दुग्ध मार्ग विकसित करने के निर्देश दिए, ताकि दुग्ध उत्पादकों को संग्रहण एवं विपणन की बेहतर सुविधा मिल सके।

बैठक में जिलाधिकारी ने जिला उद्यान अधिकारी को एकेश्वर में प्रस्तावित कोल्ड स्टोरेज का कार्य तत्काल शुरू कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि कोल्ड स्टोरेज जैसी सुविधाओं के विकास से स्थानीय उत्पादों के सुरक्षित भंडारण और किसानों को उपज का उचित मूल्य प्राप्त करने में मदद मिलेगी। उन्होंने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप प्रस्ताव तैयार करने, लाभार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित करने तथा कार्यों में निर्धारित मानकों एवं गुणवत्ता का अनुपालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

बैठक में सीडीओ अशोक जोशी, पीडी डीआरडीए केवल कुमार उपाध्याय, मुख्य कृषि अधिकारी ऋतु कुकरेती जुयाल, सीवीओ डॉ विशाल शर्मा, जिला उद्यान अधिकारी मनोरंजन भंडारी, एआर सहकारिता सुमन कुमार, जिला मत्स्य प्रभारी अभिषेक मिश्रा सहित सभी कृषि भूमि एवं संरक्षण अधिकारी उपस्थित रहे।


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