Friday, September 25th, 2026

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देवभूमि में महिलाओं की सुरक्षा से खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं- कुसुम कंडवाल

Category Archives: उत्तराखंड

देवभूमि में महिलाओं की सुरक्षा से खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं- कुसुम कंडवाल

नालापानी चौक पर महिला के अपहरण के दुस्साहसिक प्रयास का महिला आयोग ने लिया स्वतः संज्ञान; अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने पुलिस को दिए कड़ी कार्रवाई के निर्देश

देहरादून। राजधानी देहरादून के नालापानी चौक क्षेत्र में दिनदहाड़े महिला के अपहरण के प्रयास का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया। घटना से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए पुलिस अधिकारियों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।

जानकारी के मुताबिक, नालापानी चौक के पास रहने वाली एक महिला बुधवार सुबह अपनी बेटी को कॉलेज बस में बैठाने के बाद स्कूटी से घर लौट रही थी। इसी दौरान काली कार सवार नकाबपोश बदमाशों ने उसका पीछा किया और उसे जबरन कार में खींचने का प्रयास किया। महिला ने साहस और सूझबूझ दिखाते हुए बदमाशों का विरोध किया। इसी बीच मौके के पास मौजूद नगर निगम की महिला सफाई कर्मचारियों ने भी तुरंत पहुंचकर बदमाशों को ललकारा। महिलाओं के विरोध के चलते बदमाश अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हो सके और मौके से फरार हो गए।

घटना की गंभीरता को देखते हुए महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने पुलिस अधीक्षक देहात जया बलूनी और क्षेत्राधिकारी वंदना वर्मा से फोन पर बातचीत कर मामले की जानकारी ली। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि रायपुर थाने में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। आरोपियों की तलाश के लिए तीन विशेष जांच टीमों का गठन किया गया है। इसके साथ ही घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है।

कुसुम कंडवाल ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि राजधानी के व्यस्त इलाके में दिनदहाड़े हुई इस घटना को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों की जल्द पहचान कर गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान किसी भी संभावित पहलू को नजरअंदाज न किया जाए। पुरानी रंजिश, आपसी विवाद या किसी आपराधिक साजिश समेत सभी संभावित पहलुओं पर निष्पक्ष और गहन जांच की जाए।

महिला आयोग की अध्यक्ष ने घटना के दौरान साहस दिखाने वाली पीड़िता और समय पर मौके पर पहुंचकर बदमाशों का विरोध करने वाली महिला सफाई कर्मचारियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

कुसुम कंडवाल ने कहा कि महिलाओं में भय पैदा करने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। उन्होंने कहा कि राज्य महिला आयोग महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और इस मामले में पुलिस जांच की प्रगति पर भी नजर रखी जा रही है।


मुख्यमंत्री धामी ने ₹108.84 करोड़ की 15 विकास योजनाओं का किया शिलान्यास

मुख्यमंत्री ने हल्दीघेरा, खटीमा में ₹7.23 करोड़ की लागत से निर्मित गौशाला का किया लोकार्पण

प्रदेश में 16 हजार से अधिक निराश्रित गोवंश को गौ सदनों के माध्यम से दिया जा रहा सुरक्षित आश्रय – मुख्यमंत्री

हल्दीघेरा गौशाला के विस्तार की घोषणा

खटीमा – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को हल्दीघेरा, खटीमा में ₹7.23 करोड़ की लागत से नवनिर्मित गौशाला का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने ₹108.84 करोड़ की 15 विकास योजनाओं का शिलान्यास भी किया। इनमें प्रमुख रूप से ₹34.44 करोड़ की लागत से राज्य मार्ग-70 के सत्रहमील से नानकसागर प्रभाग तक 13.60 किमी मार्ग के उच्चीकरण का कार्य शामिल है।

मुख्यमंत्री ने हल्दीघेरा गौशाला के भविष्य में आवश्यकता के अनुसार विस्तार की घोषणा करते हुए कहा कि इससे अधिक से अधिक निराश्रित गोवंश को सुरक्षित एवं सम्मानजनक आश्रय उपलब्ध कराया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह गौशाला निराश्रित गोवंश के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। सड़कों पर विचरण करने वाले निराश्रित गोवंश को सुरक्षित आश्रय मिलने से जहां उनकी बेहतर देखभाल सुनिश्चित होगी, वहीं किसानों और स्थानीय लोगों को भी राहत मिलेगी। इससे सड़कों पर गोवंश के कारण होने वाली दुर्घटनाओं की आशंका भी कम होगी।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गौ माता का विशेष स्थान है। गौ माता का संरक्षण केवल हमारी परंपरा ही नहीं, बल्कि हमारा कर्तव्य, धर्म और जिम्मेदारी भी है। देवभूमि उत्तराखण्ड सदैव गौ संरक्षण और गौ सेवा की परंपरा वाली भूमि रही है। राज्य सरकार निराश्रित गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में गौ सदनों के माध्यम से 16 हजार से अधिक निराश्रित गोवंश को सुरक्षित आश्रय दिया जा रहा है। ग्राम्य गौ सेवक योजना को भी प्रदेश में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया है। शहरी विकास और पंचायती राज विभाग के सहयोग से प्रदेश में 63 स्थानों पर गौशाला निर्माण के लिए भूमि चिन्हित की गई है। उन्होंने कहा कि गौ संरक्षण के साथ-साथ गोवंश को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। बद्री गाय के शुद्ध घी और दुग्ध उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए विशेष ग्रोथ सेंटर स्थापित किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के साथ ही पशुधन के संवर्धन की दिशा में भी अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विकास और जनकल्याण के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं के संरक्षण के लिए भी प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि खटीमा सहित पूरे ऊधम सिंह नगर जनपद में सड़क, पुल, शिक्षा, बाढ़ सुरक्षा और अन्य अवस्थापना सुविधाओं को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।


क्रॉप कटिंग प्रयोग में ग्रामीणों के साथ खेत में उतरीं जिलाधिकारी

महिलाओं से संवाद कर जानी आजीविका की स्थिति, बुशकटर और पैदल मार्ग की मरम्मत को दी स्वीकृति

पौड़ी- जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने गुरुवार को तहसील पौड़ी के अंतर्गत राजस्व ग्राम मासौं तल्ला पहुंचकर क्रॉप कटिंग प्रयोग का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों के साथ खेत में पहुंचकर कृषि कार्यों को करीब से जाना और ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं से संवाद कर उनकी आजीविका, आय के साधनों तथा गांव की दैनिक आवश्यकताओं के संबंध में जानकारी ली।

राजस्व विभाग की टीम ने किसान वीरेंद्र नेगी के खेत में निर्धारित मानकों के अनुसार 30 वर्गमीटर क्षेत्रफल का प्लॉट तैयार कर सीसीई एग्री ऐप के माध्यम से क्रॉप कटिंग प्रयोग किया। प्रयोग के दौरान इस निर्धारित क्षेत्रफल से 11 किलोग्राम गेहूं की उपज प्राप्त हुई। जिलाधिकारी ने स्वयं भी खेत में गेहूं की कटाई की तथा ग्रामीण महिलाओं के साथ पारंपरिक मंडाई कार्य में हाथ बंटाकर उनका उत्साहवर्धन किया।

जिलाधिकारी ने बताया कि क्रॉप कटिंग प्रयोग के माध्यम से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग फसल की औसत उत्पादकता के आकलन में किया जाता है। निर्धारित 30 वर्गमीटर क्षेत्रफल में प्राप्त उपज के आधार पर संबंधित फसल की उत्पादकता का वैज्ञानिक तरीके से आकलन किया जाता है तथा इन आंकड़ों के आधार पर पूरे जनपद में फसल के संभावित उत्पादन का अनुमान तैयार किया जाता है। इस प्रक्रिया से जिले की कृषि उत्पादकता और उत्पादन संबंधी वास्तविक आंकड़े तैयार करने में महत्वपूर्ण मदद मिलती है।

इस दौरान जिलाधिकारी ने ग्राम प्रधान पुष्पा नेगी एवं ग्रामीणों से गांव की विभिन्न आवश्यकताओं और समस्याओं के संबंध में जानकारी ली। महिलाओं से संवाद के दौरान उन्होंने उनकी आय, आजीविका से जुड़े कार्यों और परिवार की दैनिक गतिविधियों के बारे में भी जानकारी ली। ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि गांव के बच्चों को स्कूल जाने वाले पैदल मार्ग में झाड़ियां उग आई हैं तथा मार्ग की स्थिति भी ठीक नहीं है, जिससे बच्चों को आवागमन में परेशानी होती है।

ग्रामीणों की समस्या का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने पैदल मार्ग की मरम्मत की स्वीकृति प्रदान की। साथ ही मार्ग से झाड़ियों की सफाई के लिए तहसीलदार को अगले दिन ही बुशकटर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि बच्चों के आवागमन के रास्ते को सुविधाजनक बनाया जा सके।

इस अवसर पर तहसीलदार राजेंद्र गोस्वामी, एलआरओ पूरण प्रकाश, कानूनगो जगदीश चंद्र ओलिया, राजस्व उप निरीक्षक राजेंद्र पटवाल, कुलदीप नेगी, कुलदीप शाह, इंश्योरेंस कंपनी से राकेश शर्मा, सुमित सहित विभागीय अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।


सीएम धामी बोले- उत्तराखंड की जनता चाहती है स्थायित्व और विकास

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड की जनता राज्य में स्थायित्व और विकास चाहती है। सरकार प्रदेश के समग्र विकास को प्राथमिकता देते हुए जनहित से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री ने यह बात गुरुवार को राजपुर रोड स्थित एक होटल में ‘अड्डा इनसाइडर’ समाचार पत्र की ओर से आयोजित ‘उत्तराखंड-विकास, चुनौतियां और 2027 की राह’ कार्यक्रम के दौरान कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में उनकी पार्टी का मूल सिद्धांत ‘राष्ट्र प्रथम, संगठन द्वितीय और व्यक्ति तृतीय’ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश के विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है और विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तराखंड से जुड़ाव का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद वे अब तक 28 बार राज्य का दौरा कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्रों के विकास को भी केंद्र सरकार ने प्राथमिकता दी है। माणा में प्रधानमंत्री द्वारा सीमांत गांवों को देश का ‘प्रथम गांव’ बताए जाने से इन क्षेत्रों के विकास को लेकर सोच में बदलाव आया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तराखंड कई क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है। नीति आयोग के सतत विकास लक्ष्य (SDG) इंडेक्स में राज्य ने देश में पहला स्थान हासिल किया है। पर्यटन के क्षेत्र में भी उत्तराखंड को राष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार मिले हैं। उन्होंने कहा कि राज्य फिल्म शूटिंग, एडवेंचर टूरिज्म और वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में भी अपनी पहचान बना रहा है।

युवाओं को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा है और इस दिशा में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। राज्य सरकार युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने पर काम कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें युवाओं के बीच जाकर संवाद करना पसंद है। उन्होंने कहा कि वे युवाओं से मुख्यमंत्री के तौर पर नहीं, बल्कि एक दोस्त की तरह संवाद करने का प्रयास करते हैं। उनके मुताबिक, युवाओं के विचारों और आकांक्षाओं को जानने से उन्हें भी नई ऊर्जा मिलती है।

सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। इससे योग्य और मेहनती युवाओं का भर्ती व्यवस्था पर भरोसा मजबूत हुआ है। उन्होंने बताया कि पिछले करीब पांच वर्षों में लगभग 35 हजार युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति दी गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के मूल स्वरूप को बनाए रखने और सरकारी भूमि को अवैध अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए भी कार्रवाई जारी है। अब तक राज्य में 13 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य विकास की प्रक्रिया को प्रदेश के अंतिम छोर तक पहुंचाना और युवाओं को उनकी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना है।


खिलाड़ियों की मेहनत और प्रतिभा को सम्मान देना सरकार की प्राथमिकता- रेखा आर्या

अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर पदक विजेता खिलाड़ियों को आउट ऑफ टर्न सरकारी सेवा का अवसर, विज्ञप्ति हुईं जारी, 9 अक्टूबर तक करें आवेदन

देहरादून। प्रदेश के अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर पदक प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। उत्तराखंड के पदक विजेता खिलाड़ियों को “आउट ऑफ टर्न” सरकारी नियुक्ति प्रदान करने के लिए खेल निदेशालय, द्वारा विज्ञप्ति जारी कर दी गई है। इच्छुक एवं पात्र खिलाड़ी निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपना आवेदन कर सकते हैं।इसकी अंतिम तिथि 09 अक्टूबर 2026 है।

खेल मंत्री रेखा आर्या ने प्रदेश के सभी पात्र पदक विजेता खिलाड़ियों से कहा कि वे इस अवसर का लाभ उठाते हुए 09 अक्टूबर 2026 तक अपना आवेदन अनिवार्य रूप से कर लें।

आवेदन के लिए उत्तराखंड का स्थायी निवासी होना अनिवार्य

खेल मंत्री ने कहा कि आउट ऑफ टर्न सरकारी सेवा के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थी का उत्तराखंड का स्थायी निवासी होना और अंतरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय स्तर पर पदक प्राप्त करना अनिवार्य है। पात्रता एवं अन्य जानकारी विज्ञप्ति में उपलब्ध है। साथ ही कहा कि पात्र खिलाड़ी विज्ञप्ति से संबंधित सम्पूर्ण जानकारी, शासनादेश एवं आवेदन पत्र खेल विभाग की आधिकारिक वेबसाइट sports.uk.gov.in पर प्राप्त कर सकते हैं। खिलाड़ियों से अपील की कि आवेदन करने से पूर्व विज्ञप्ति में निर्धारित पात्रता, आवश्यक दस्तावेजों एवं अन्य शर्तों को ध्यानपूर्वक पढ़ लें।

खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य, प्रतिभा के सम्मान और उन्हें सम्मानजनक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं और उनकी उपलब्धियों को उचित सम्मान एवं प्रोत्साहन देना सरकार की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि एक खिलाड़ी का पदक केवल उसकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होता, बल्कि वह प्रदेश के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता है। खिलाड़ियों की मेहनत, अनुशासन, संघर्ष और प्रतिभा से प्रदेश के युवा खेलों के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होते हैं।युवाओं को खेलों से जोड़ना और उनकी प्रतिभा को अवसर देना सरकार का संकल्प है।

खेल मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के युवाओं को खेलों के क्षेत्र में बेहतर अवसर, सुविधाएं और आगे बढ़ने के लिए उचित मंच उपलब्ध हो इसके लिए राज्य सरकार लगातार प्रयासरत है।उन्होंने खिलाड़ियों से अपील कि की वे अपनी प्रतिभा पर विश्वास रखते हुए निरंतर मेहनत करें और प्रदेश का नाम देश-दुनिया में रोशन करें।


कोटद्वार के बालागंज-लूथापुर में 2.47 किमी सड़क निर्माण का शिलान्यास

विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण ने किया विधिवत शिलान्यास

कोटद्वार। विधानसभा अध्यक्ष एवं कोटद्वार विधायक ऋतु खण्डूडी भूषण ने गुरुवार को कोटद्वार विधानसभा क्षेत्र के वार्ड संख्या 33 बालागंज-लूथापुर में 2.47 किलोमीटर लंबी सड़क निर्माण कार्य का विधिवत शिलान्यास किया। लंबे समय से क्षेत्रवासी सड़क निर्माण की मांग कर रहे थे। निर्माण कार्य शुरू होने से स्थानीय लोगों में खुशी का माहौल है।

सड़क के निर्माण से बालागंज-लूथापुर क्षेत्र में आवागमन सुगम होने के साथ ही लोगों को बेहतर और सुरक्षित सड़क सुविधा मिलने की उम्मीद है। इससे विद्यार्थियों, व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों को आवाजाही में राहत मिलेगी तथा क्षेत्र के विकास को भी गति मिलेगी।

इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण ने कहा कि कोटद्वार विधानसभा क्षेत्र का समग्र और संतुलित विकास उनकी प्राथमिकता है। क्षेत्र में सड़क, पेयजल, विद्युत, जल निकासी समेत मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बेहतर सड़क किसी भी क्षेत्र के विकास की महत्वपूर्ण आधारभूत जरूरत है और इस दिशा में आवश्यक विकास कार्यों को प्राथमिकता के साथ धरातल पर उतारा जा रहा है।

विधानसभा अध्यक्ष ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सड़क निर्माण कार्य में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए और निर्धारित मानकों के अनुरूप निर्माण कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।

कार्यक्रम में मंडल अध्यक्ष आशीष रावत, अधिशासी अभियंता निर्भय सिंह, पार्षद राजेंद्र बिष्ट, पार्षद जे.पी. बहुखंडी, पार्षद मनीष नैथानी, पार्षद प्रमोद केष्टवाल, मनीष भट्ट, पूरन खुलबे, विवेक भारती, सिमरन बिष्ट, राजीव डबराल, अर्चना गौड़, सरोज बाला और ज्योति जखमोला समेत बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी मौजूद रहे।

सड़क निर्माण की वर्षों पुरानी मांग पूरी होने पर क्षेत्रवासियों ने खुशी जताई और विधानसभा अध्यक्ष एवं कोटद्वार विधायक ऋतु खण्डूडी भूषण का आभार व्यक्त किया।


पर्वतारोहियों का साहस, अनुशासन और टीम भावना युवाओं के लिए प्रेरणादायी- मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के सफल पर्वतारोहण अभियानों का किया फ्लैग-इन

माउंट एकांकागुआ के साथ नुन-कुन पर्वत श्रृंखला की तीन चोटियों पर सफल आरोहण करने वाले दलों को दी बधाई

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM), उत्तरकाशी द्वारा संचालित चार सफल पर्वतारोहण अभियानों का फ्लैग-इन किया। इनमें जवाहर इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड विंटर स्पोर्ट्स (JIM&WS), पहलगाम के साथ संयुक्त रूप से संचालित माउंट एकांकागुआ अभियान भी शामिल था।

मुख्यमंत्री ने सभी पर्वतारोहियों को सफल अभियानों के लिए बधाई देते हुए चुनौतीपूर्ण उच्च पर्वतीय परिस्थितियों में उनके साहस, अनुशासन, तकनीकी दक्षता और टीम भावना की सराहना की। उन्होंने कहा कि पर्वतारोहियों की ये उपलब्धियां उत्तराखण्ड के साथ ही देश के युवाओं को साहसिक गतिविधियों के प्रति प्रेरित करेंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नेहरू पर्वतारोहण संस्थान ने पर्वतारोहण, साहसिक खेलों, युवा विकास और उच्च हिमालयी प्रशिक्षण के क्षेत्र में देश और प्रदेश में महत्वपूर्ण पहचान बनाई है। संस्थान द्वारा युवाओं को पर्वतारोहण एवं साहसिक गतिविधियों के लिए उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्रदान करने के साथ उनमें साहस, नेतृत्व, अनुशासन और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता भी विकसित की जा रही है।

माउंट एकांकागुआ (6,961 मीटर), अर्जेंटीना के लिए NIM और JIM&WS के संयुक्त अभियान का नेतृत्व कर्नल हेम चंद्र सिंह ने किया। छह सदस्यीय अभियान दल ने 22 फरवरी 2026 को माउंट एकांकागुआ के शिखर पर सफल आरोहण किया। इस संयुक्त अभियान को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली स्थित साउथ ब्लॉक से फ्लैग ऑफ किया था।

नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के नुन-कुन अभियान-2026 का नेतृत्व संस्थान के प्रधानाचार्य कर्नल एस.एस. राजपुरोहित ने किया। अभियान दल ने 15 अगस्त 2026 को माउंट कुन की 7,077 मीटर ऊंची चोटी पर सफल आरोहण किया। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हासिल की गई यह उपलब्धि अभियान दल के लिए विशेष रही। इसी अभियान को आगे बढ़ाते हुए दल ने 26 अगस्त 2026 को माउंट डेल्टा-41 की 5,908 मीटर ऊंची चोटी तथा 31 अगस्त 2026 को माउंट नुन की 7,135 मीटर ऊंची चोटी पर भी सफल आरोहण किया। इस प्रकार अभियान दल ने एक ही अभियान के दौरान नुन-कुन पर्वत श्रृंखला की तीन चोटियों पर सफल आरोहण की उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की।

मुख्यमंत्री ने सभी अभियान सदस्यों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उत्तराखण्ड की भौगोलिक परिस्थितियां पर्वतारोहण और साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं प्रदान करती हैं। पर्वतारोहियों की ऐसी उपलब्धियां युवाओं को साहसिक खेलों से जुड़ने के लिए प्रेरित करने के साथ ही उत्तराखण्ड की पहचान को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत करती हैं।

इस अवसर पर विशेष प्रमुख सचिव खेल एवं युवा कल्याण अमित कुमार सिन्हा, नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के प्रधानाचार्य कर्नल एस.एस. राजपुरोहित, जवाहर इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड विंटर स्पोर्ट्स, पहलगाम के प्रधानाचार्य कर्नल हेम चंद्र सिंह, कैप्टन जी. संतोष कुमार सहित नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के अधिकारी एवं विभिन्न पर्वतारोहण अभियानों के सदस्य उपस्थित थे।


टिहरी झील को ग्लोबल डेस्टिनेषन के रूप में विकसित करने को लेकर मुख्य सचिव ने ली बैठक

टिहरी लेक एरिया का मास्टर प्लान और जोनल प्लान तैयार करने के दिए निर्देश

बेतरतीब विकास रोकने के लिए पूरे क्षेत्र का किया जाए मास्टर प्लान तैयार

वर्षभर पर्यटन गतिविधियों के संचालन के लिए फेजवाइज प्लानिंग पर दिया जोर

देहरादून। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने गुरुवार को सचिवालय में पर्यटन विभाग के साथ बैठक के दौरान टिहरी झील को ‘वन स्टेट, वन ग्लोबल डेस्टिनेशन’ के रूप में विकसित करने के लिए समग्र मास्टर प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि टिहरी लेक क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने के लिए पूरे क्षेत्र की दीर्घकालिक और सुनियोजित प्लानिंग की जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि टिहरी झील के आसपास के लगभग 8 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को सम्मिलित करते हुए समग्र मास्टर एवं जोनल प्लान तैयार किया जाए। इसमें सरकारी एवं निजी दोनों प्रकार की भूमि को शामिल किया जाए। उन्होंने बेतरतीब विकास को रोकने के लिए पूरे क्षेत्र का मास्टर प्लान तैयार करने के साथ ही विभिन्न क्षेत्रों के लिए आवश्यकतानुसार जोन निर्धारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान तैयार करते समय सभी सम्बन्धित स्टेकहोल्डर्स से विचार-विमर्श किया जाए, ताकि क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों, स्थानीय आवश्यकताओं, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और पर्यटन की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक योजना तैयार की जा सके। मास्टर प्लानिंग के लिए स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए), नई दिल्ली एवं एसपीए, भोपाल से तकनीकी सहयोग लेने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि टिहरी झील क्षेत्र को ग्लोबल डेस्टिनेशन बनाने के लिए पूरे लेक एरिया में विभिन्न पर्यटन गतिविधियों को समाहित करते हुए आकर्षण के प्रमुख केंद्र (मैगनेट एरिया) विकसित किए जाएं। इसके लिए फेजवाइज योजना तैयार की जाए, ताकि प्राथमिकता के आधार पर विभिन्न परियोजनाओं को विकसित किया जा सके। उन्होंने निर्देश दिए कि टिहरी लेक में ऐसी पर्यटन गतिविधियों की विस्तृत योजना तैयार की जाए, जिससे पर्यटक क्षेत्र में कम से कम एक-दो दिन या उससे अधिक समय तक क्षेत्र में ठहर सकें। वाटर स्पोर्ट्स के साथ ही एडवेंचर, ट्रैकिंग, नेचर, कल्चर, विलेज टूरिज्म सहित विभिन्न गतिविधियों को एकीकृत रूप से विकसित किया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि अप्रैल, मई और जून में जलस्तर कम रहने के दौरान भी पर्यटकों के लिए पर्याप्त गतिविधियां उपलब्ध रहें, इसके लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जाए। वर्षभर पर्यटन गतिविधियों का संचालन सुनिश्चित करने के लिए मौसम एवं जलस्तर के अनुसार गतिविधियों का कैलेंडर तैयार किया जाए। उन्होंने टिहरी झील क्षेत्र में नए ट्रैकिंग रूट्स एवं ट्रेल्स विकसित करने तथा आसपास के गांवों को पर्यटन से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यटकों के लिए विलेज एवं कल्चरल विजिट की व्यवस्था विकसित की जा सकती है, जिससे उन्हें स्थानीय संस्कृति, परंपराओं, खान-पान और ग्रामीण जीवन से परिचित होने का अवसर मिले और स्थानीय लोगों को भी रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हों। उन्होंने कहा कि टिहरी लेक को ग्लोबल डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की समग्र कार्ययोजना और प्रस्तावित गतिविधियों पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन तैयार की जाए, जिसे प्रधानमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके। मुख्य सचिव ने अगली बैठक में टीएचडीसी के अधिकारियों को भी आमंत्रित करने के निर्देश दिए, ताकि झील क्षेत्र के विकास से सम्बन्धित विभिन्न विषयों पर समन्वित रूप से चर्चा की जा सके।

इस अवसर पर सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल, एपीसीसीएफ डॉ. विवेक पाण्डेय, सुरेन्द्र मेहरा, सीसीएफ प्रसन्ना कुमार पात्रो, अपर सचिव विनीत कुमार, हिमांशु खुराना,  अभिषेक रोहिला एवं जिलाधिकारी टिहरी श्रीमती नितिका खण्डेलवाल उपस्थित थीं।


NEET UG फर्जी दस्तावेज मामले में एक और गिरफ्तारी, एमबीबीएस दाखिले के नाम पर 5.58 लाख रुपये बरामद

देहरादून। NEET UG 2025 में कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एमबीबीएस में दाखिले के मामले की जांच कर रही एसआईटी ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने मध्य प्रदेश के भोपाल निवासी धीरज कुमार श्रीवास्तव को वाहन समेत गिरफ्तार किया है। उसके पास से 5 लाख 58 हजार 100 रुपये नकद बरामद किए गए हैं।

मामले में 13 सितंबर 2026 को थाना रायपुर और थाना क्लेमेंटाउन में अलग-अलग अभ्यर्थियों द्वारा सरकार पोर्टल पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन किए जाने और जांच में दस्तावेज फर्जी पाए जाने के बाद मुकदमे दर्ज किए गए थे। रायपुर थाने में मुकदमा संख्या 380/26 और क्लेमेंटाउन थाने में मुकदमा संख्या 86/26 दर्ज किया गया था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून ने पुलिस अधीक्षक ग्रामीण-1 जया बलोनी के नेतृत्व में एसआईटी गठित की थी। जांच के दौरान एसआईटी ने संबंधित दस्तावेजों और अभ्यर्थियों से जुड़े रिकॉर्ड कब्जे में लेकर उनकी जांच की। पुलिस के अनुसार, दस्तावेजों में दर्ज पते गलत पाए गए। संबंधित शिक्षण संस्थानों से रिकॉर्ड जुटाने के बाद अभ्यर्थियों के वास्तविक पतों की जानकारी सामने आई।

इस मामले में पुलिस ने इससे पहले 21 सितंबर को रूपेश पंडित और अरविंद कुमार को गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार, रूपेश की निशानदेही पर मेरठ स्थित उसके घर से फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कराने के एवज में लिए गए 8 लाख रुपये बरामद किए गए थे।

जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर एसआईटी ने धीरज कुमार श्रीवास्तव को भी गिरफ्तार किया। पुलिस ने उसके कब्जे से टाटा नेक्सॉन कार बरामद की, जिसकी तलाशी के दौरान 5,58,100 रुपये नकद मिले। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में धीरज ने बताया कि यह रकम उसे रूपेश पंडित ने फ्रीडम फाइटर कोटे के माध्यम से कुछ छात्रों का एमबीबीएस में दाखिला कराने के एवज में कमीशन के तौर पर दी थी।

पुलिस पूछताछ में सामने आया कि धीरज श्रीवास्तव भोपाल के इंद्रपुरी क्षेत्र में ‘MBBS WAY’ नाम से कार्यालय संचालित करता था। पुलिस के अनुसार, वह विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों में एमबीबीएस, बीटेक, बीसीए, बीबीए और बीकॉम समेत अन्य पाठ्यक्रमों में कमीशन के आधार पर दाखिला कराने का काम करता था।

पुलिस के मुताबिक, धीरज की मुलाकात करीब दो साल पहले रूपेश पंडित से उत्तरकाशी स्थित मंजरी देवी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज में हुई थी। इसके बाद दोनों लगातार संपर्क में थे।

जांच में पुलिस को जानकारी मिली कि अरविंद ने अपनी बेटी और दो परिचितों के बच्चों के एमबीबीएस दाखिले के लिए रूपेश से संपर्क किया था। इसके बाद रूपेश ने धीरज से बात की। आरोप है कि धीरज ने अपने एक अन्य संपर्क के माध्यम से कम मेरिट वाले छात्रों के दाखिले की जानकारी जुटाई। इसी दौरान उत्तराखंड में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे के तहत दाखिले की बात सामने आई।

पुलिस के अनुसार, इसके बाद धीरज ने रूपेश और अन्य साथियों के साथ मिलकर तीन अभ्यर्थियों के लिए कथित तौर पर कूटरचित दस्तावेज तैयार कराए और फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनवाए। इन प्रमाण पत्रों के आधार पर तीनों अभ्यर्थियों ने अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस में दाखिला लिया।

एसआईटी मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर मामले में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

बरामदगी:

  • धीरज श्रीवास्तव से 5,58,100 रुपये नकद
  • रूपेश पंडित की निशानदेही पर 8 लाख रुपये नकद
  • टाटा नेक्सॉन कार

कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग और M3M फाउंडेशन के बीच हुआ एमओयू

उत्तराखंड के युवाओं के कौशल विकास और रोजगार के अवसरों को मिलेगा विस्तार

देहरादून, हल्द्वानी, काशीपुर और पिथौरागढ़ में शुरू होंगे प्रशिक्षण केंद्र; ईवी, ऑटोमोबाइल, आईओटी और प्लंबिंग जैसे ट्रेडों में मिलेगा प्रशिक्षण

रोजगार क्षमता बढ़ाने के साथ प्लेसमेंट और टिकाऊ आजीविका पर रहेगा फोकस

देहरादून।उत्तराखंड के युवाओं को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित कर रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल और मार्गदर्शन में कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग तथा एम3एम फाउंडेशन के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने के साथ उन्हें आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में बेहतर प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।

देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग की ओर से निदेशक (प्रशिक्षण) संजय कुमार और एम3एम फाउंडेशन की ओर से मैनेजिंग ट्रस्टी एवं प्रेसिडेंट डॉ. ऐश्वर्य महाजन ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।

चार शहरों में प्रशिक्षण केंद्रों को प्राथमिकता

एमओयू के शुरुआती चरण में देहरादून, हल्द्वानी, काशीपुर और पिथौरागढ़ में प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जाने को प्राथमिकता दी गई है। परियोजना की जरूरत, स्थानीय परिस्थितियों और संभावित लाभार्थियों की उपलब्धता के आधार पर अल्मोड़ा और बड़कोट को भी अतिरिक्त प्रशिक्षण केंद्रों के रूप में शामिल किया जा सकता है।

प्रत्येक प्रशिक्षण केंद्र पर स्थानीय उद्योगों की मांग और रोजगार की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए कम से कम दो पाठ्यक्रम संचालित किए जाने प्रस्तावित हैं। प्रशिक्षण के साथ-साथ युवाओं को उद्योगों से जोड़ने, प्लेसमेंट सहायता उपलब्ध कराने और प्रशिक्षण के बाद टिकाऊ आजीविका के अवसर तैयार करने पर भी जोर रहेगा।

इन आधुनिक तकनीकी ट्रेडों में मिलेगा प्रशिक्षण

युवाओं को आधुनिक और रोजगारपरक तकनीकी क्षेत्रों में प्रशिक्षित करने की योजना है। प्रस्तावित पाठ्यक्रमों में जूनियर टेक्नीशियन-इलेक्ट्रिक व्हीकल, जूनियर टेक्नीशियन-ऑटो इलेक्ट्रिकल मेंटेनेंस, जूनियर टेक्नीशियन-ऑटोमोबाइल रिपेयर एंड मेंटेनेंस, जूनियर टेक्नीशियन-इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) और जूनियर टेक्नीशियन-प्लंबिंग शामिल हैं।

इन पाठ्यक्रमों का चयन स्थानीय उद्योगों की जरूरतों और उपलब्ध रोजगार अवसरों को ध्यान में रखकर किया जाएगा। इसके अलावा उद्योगों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर प्लेसमेंट के अवसर बढ़ाने और प्रशिक्षण के बाद युवाओं के रोजगार परिणामों की निगरानी पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

रोजगार के साथ टिकाऊ आजीविका पर जोर

एम3एम फाउंडेशन की चेयरपर्सन एवं ट्रस्टी डॉ. पायल कनोडिया ने कहा कि उत्तराखंड के युवाओं को उद्योग की जरूरतों के अनुसार कौशल प्रदान कर उन्हें रोजगार और आजीविका के अवसरों से जोड़ना इस साझेदारी का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि विभाग और फाउंडेशन के बीच यह सहयोग कौशल विकास को अधिक उद्योग-केंद्रित और रोजगारपरक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने कहा कि साझेदारी के माध्यम से युवाओं को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, बेहतर रोजगार अवसर और टिकाऊ आजीविका के रास्ते उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जाएंगे।

कार्यक्रम में उप निदेशक सेवायोजन चंद्रकांता, उप निदेशक (प्रशिक्षण) निरंजन खुगशाल, प्रधानाचार्य श्रेणी-1 राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान निरंजनपुर देहरादून दिनकर रौतेला, नोडल अधिकारी यूकेएसडीएम विनीता बडोनी, एम3एम प्रतिनिधि अरविंद कुमार शर्मा सहित विभाग और प्रशिक्षण संस्थानों के अधिकारी एवं प्रतिनिधि मौजूद रहे।


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