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सूबे के राजकीय महाविद्यालयों में हाईटेक होंगी प्रयोगशालाएं- डाॅ. धन सिंह रावत

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सूबे के राजकीय महाविद्यालयों में हाईटेक होंगी प्रयोगशालाएं- डाॅ. धन सिंह रावत

एमबी पीजी काॅलेज व कोटद्वार महाविद्यालय में लैब अपग्रेडेशन को 4 करोड़ जारी

कहा, आई0आई0टी0 कानपुर की सहायता से उच्चीकृत की जायेंगी प्रयोगशालाएं

देहरादून। उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित एमबी पीजी काॅलेज हल्द्वानी एवं कोटद्वार महाविद्यालय में स्थापित विज्ञान प्रयोगशालाओं को हाईटेक बनाया जायेगा। दोनों महाविद्यालयों की प्रयोगशालाओं के उच्चीकरण को 4 करोड की धनराशि जारी कर दी गई है। इन दोनों महाविद्यालयों में विज्ञान प्रयोगशालाओं को आईआईटी कानपुर के सहयोग से उच्चीकृत किया जायेगा, ताकि वहां अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को आधुनिक उपकरणों के जरिये प्रयोगात्मक एवं शोधात्मक प्रशिक्षण मिल सके।

सूबे के उच्च शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने मीडिया को जारी एक बयान में बताया कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा में शैक्षिक गुणवत्ता, नवाचार, प्रयोगात्मक व शोधात्मक गतिविधियों को लगातार बढ़ावा दे रही है। इसी क्रम में प्रदेशभर के राजकीय महाविद्यालयों में स्थापित प्रयोगशालाओं को उच्चीकृत कर हाईटेक बनाया जायेगा, ताकि अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को वैश्विक स्तर के मानदण्डों के अनुरूप प्रयोगात्मक कार्यों का प्रशिक्षण मिल सके। डाॅ. रावत ने बताया कि प्रथम चरण में एम.बी. राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय हल्द्वानी तथा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कोटद्वार में स्थापित विज्ञान प्रयोगशाला के उच्चीकरण को 2-2 करोड़ की धनराशि जारी कर दी है, शीघ्र ही आईआईटी कानपुर की सहायता से दोनों महाविद्यालयों की विज्ञान प्रयोगशाला को उच्चीकृत किया जायेगा, इसके लिये विभागीय अधिकारियों को प्रयोगशालाओं के समय पर उच्चीकरण करने निर्देश दे दिये गये हैं। डाॅ. रावत ने बताया कि आईआईटी कानपुर, आई.आई.एस.सी बैंगलुरू, आइसर मोहाली जैसे देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के सहायता से राजकीय महाविद्यालयों में बेसिक साइंस लैब, टिंगरिंग लैब, अप्लीकेशन लैब आदि आधारभूत संरचनाएं विकसित किये जायेंगे। इसके साथ ही छात्रों को हैण्ड्स आॅन ट्रेनिंग और लैब वर्क के माध्यम से प्रशिक्षण भी दिया जायेगा।

डाॅ. रावत ने बताया कि महाविद्यालयों में आधारभूत संरचनाओं के विकास के साथ-साथ शिक्षकों को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि महाविद्यालयों में समग्र रूप से एक इकोसिस्टम बनाया जा सके और राज्य को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक माॅडल स्टेट के रूप में स्थापित किया जा सके।


शिवाजी महाराज का जीवन साहस, दूरदर्शिता और राष्ट्रभक्ति का प्रेरक उदाहरण- मुख्यमंत्री धामी

मुख्यमंत्री धामी ने छत्रपति शिवाजी महाराज की पुण्यतिथि पर किया नमन

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिंदवी स्वराज्य के प्रणेता छत्रपति शिवाजी महाराज की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। मुख्यमंत्री ने उनके अद्वितीय पराक्रम, उत्कृष्ट शासन-नीति और धर्मरक्षा के अडिग संकल्प को स्मरण करते हुए कहा कि शिवाजी महाराज का जीवन साहस, दूरदर्शिता और मातृभूमि के प्रति समर्पण का अनुपम उदाहरण है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी छत्रपति शिवाजी महाराज ने धर्म, स्वाभिमान और न्याय की ज्योति को प्रज्वलित रखा, जिससे राष्ट्र चेतना को नई ऊर्जा मिली। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज की गौरवगाथा आज भी समाज को कर्तव्यनिष्ठा, धर्मरक्षा और राष्ट्रहित के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।

उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि महान योद्धा के आदर्शों को अपनाकर समाज और राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।


ऋषिकेश महायोजना–2031 को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज

सचिव आवास डॉ. आर राजेश कुमार की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के तहत ऋषिकेश महायोजना–2031 को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसी क्रम में सचिव आवास डॉ. आर राजेश कुमार की अध्यक्षता में राज्य सचिवालय में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में तीन जनपदों—टिहरी, पौड़ी और देहरादून—से जुड़े अधिकारियों ने भाग लिया। सरकार का उद्देश्य इस महायोजना के माध्यम से ऋषिकेश को एक सुनियोजित, व्यवस्थित और आधुनिक शहर के रूप में विकसित करना है, जहां पर्यटन और शहरी विकास में संतुलन बना रहे।

तपोवन बना चर्चा का केंद्र, अवैध निर्माण बड़ी चुनौती
बैठक के दौरान सबसे अधिक फोकस तपोवन क्षेत्र पर रहा, जो टिहरी विकास प्राधिकरण के अधीन आता है। अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2011 की पूर्व महायोजना के बाद इस क्षेत्र में अनियोजित और अवैध निर्माण तेजी से बढ़े हैं। होटल, गेस्ट हाउस और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के अनियंत्रित विस्तार ने न केवल क्षेत्र की भौगोलिक संरचना को प्रभावित किया है, बल्कि यातायात, पार्किंग और सीवरेज जैसी मूलभूत सुविधाओं पर भी दबाव बढ़ाया है। इसके चलते स्थानीय लोगों और पर्यटकों दोनों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

महायोजना–2031 में समाधान का रोडमैप तैयार
मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक द्वारा प्रस्तुत किए गए प्लान में इन समस्याओं के समाधान के लिए कई अहम प्रावधान शामिल किए गए हैं। जिन क्षेत्रों में पहले से होटल और व्यावसायिक गतिविधियां विकसित हो चुकी हैं, उन्हें ‘पर्यटन उपयोग क्षेत्र’ के रूप में चिन्हित किया गया है। इससे न केवल मौजूदा ढांचे को वैधता और संरचना मिलेगी, बल्कि पर्यटन को भी व्यवस्थित तरीके से बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, भविष्य में अनियोजित निर्माण पर रोक लगाने के लिए सख्त नियामक प्रावधान भी जोड़े गए हैं।

जनसुनवाई के बाद संशोधन, अब अंतिम चरण में योजना
अधिकारियों ने जानकारी दी कि महायोजना को पहले संबंधित प्राधिकरण बोर्डों से अनुमोदन मिल चुका है और इसके बाद इसे जनसुनवाई एवं प्रदर्शनी की प्रक्रिया से भी गुजारा गया। जनसुझावों के आधार पर इसमें संशोधन किए गए और फिर इसे शासन स्तर पर भेजा गया। शासन द्वारा पुनर्विचार के बाद इसे एक बार फिर संबंधित बोर्डों को भेजा गया, जहां से इसे अनुमन्य कर दिया गया है। अब योजना अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।

तीन जिलों का समन्वय, 15 दिन में सुझाव होंगे एकत्र
ऋषिकेश महायोजना–2031 तीन जनपदों में फैली हुई है—टिहरी, पौड़ी और देहरादून। इनमें से दो जिलों ने योजना को स्वीकृति दे दी है, जबकि पौड़ी जनपद ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। इन्हीं सुझावों पर विचार करने के लिए सचिव स्तर पर विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि सभी जिलों से प्राप्त सुझावों को 15 दिनों के भीतर समेकित कर शासन को प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि महायोजना को जल्द अंतिम रूप दिया जा सके।

पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल
इस महायोजना के लागू होने से ऋषिकेश में पर्यटन गतिविधियों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। सुनियोजित विकास के माध्यम से जहां एक ओर पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, वहीं स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। सरकार का मानना है कि यह योजना क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। बैठक के अंत में यह विश्वास व्यक्त किया गया कि सभी संबंधित विभागों के समन्वय से ऋषिकेश महायोजना–2031 को शीघ्र लागू किया जाएगा। इसके लागू होने से न केवल शहर की आधारभूत संरचना मजबूत होगी, बल्कि ऋषिकेश को एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन शहर के रूप में विकसित करने की दिशा में भी बड़ा कदम साबित होगा।

जल्द लागू होगी महायोजना, विकास को मिलेगी नई दिशा- डॉ. आर राजेश कुमार
सचिव आवास डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा कि ऋषिकेश महायोजना–2031 राज्य के लिए एक दूरदर्शी योजना है, जो आने वाले वर्षों में विकास की दिशा तय करेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी आपत्तियों और सुझावों का शीघ्र निस्तारण करते हुए महायोजना को अंतिम रूप दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि तपोवन जैसे क्षेत्रों में जो अव्यवस्थित विकास हुआ है, उसे सुधारने के लिए इस बार ठोस प्रावधान किए गए हैं, जिससे भविष्य में संतुलित और सतत विकास सुनिश्चित किया जा सके।


चारधाम यात्रा 2026- व्यवस्थाओं को लेकर अलर्ट मोड में प्रशासन

सुरक्षित और सुगम यात्रा के लिए कंट्रोल रूम से लेकर ग्राउंड स्तर तक व्यवस्थाओं की सघन निगरानी

श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोपरि, समन्वय के साथ समयबद्ध तैयारियां सुनिश्चित करें- जिलाधिकारी

जिलाधिकारी के निर्देशन में चारधाम यात्रा हेतु कंट्रोल रूम, ट्रैफिक और स्वास्थ्य व्यवस्थाएं होंगी चाक-चौबंद; यात्रा व्यवस्थाओं में नहीं होगा कोई समझौता

पौड़ी। आगामी चारधाम यात्रा को सुव्यवस्थित, सुरक्षित और श्रद्धालु-अनुकूल बनाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने एनआईसी कक्ष में संबंधित विभागों की विस्तृत समीक्षा बैठक ली। बैठक में सभी विभागों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की समस्या न आए, इस पर व्यापक चर्चा की गयी।

जिलाधिकारी ने यात्रा कंट्रोल रूम के संचालन की प्रगति की समीक्षा करते हुए स्टाफ तैनाती एवं नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिए कि ड्यूटी रोस्टर शीघ्र जारी किया जाए तथा तीनों कंट्रोल रूम में व्यवस्थाएं पूरी तरह सुचारु रखी जाएं। साथ ही हेल्पलाइन नंबर का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने को कहा गया।

परिवहन व्यवस्थाओं की समीक्षा के दौरान संभागीय परिवहन अधिकारी ने अवगत कराया कि चारधाम यात्रा के लिए वाहनों के ग्रीन कार्ड बनाने की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। इस वर्ष जनपद में लगभग 500 बसों तथा 5000 टैक्सी/मैक्सी वाहनों की व्यवस्था की गई है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सभी वाहनों का समय पर सत्यापन सुनिश्चित किया जाए। जिलाधिकारी ने यातायात प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए ट्रैफिक प्लान को पूर्व में ही सार्वजनिक करने के निर्देश दिए, ताकि होटल व्यवसायियों एवं अन्य संबंधित पक्षों को यात्रा मार्ग की जानकारी समय से उपलब्ध हो सके। पुलिस विभाग को पर्याप्त बल की तैनाती, जाम से निपटने की पूर्व तैयारी करने को कहा गया।

स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने लक्ष्मणझूला, कलियासौड़, भट्टीसेरा एवं नीलकंठ क्षेत्रों में चिकित्सा राहत इकाइयों की स्थापना एवं संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने इन क्षेत्रों में शिफ्टवार चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती, पर्याप्त एंबुलेंस व्यवस्था तथा आपातकालीन सेवाओं को सुदृढ़ बनाए रखने पर जोर दिया, ताकि किसी भी स्थिति में श्रद्धालुओं को दिक्कत न हो।

स्थानीय स्तर पर व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए जिलाधिकारी ने सभी उपजिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में व्यापार सभा, स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं अन्य हितधारकों के साथ बैठक कर समन्वय स्थापित करें। साथ ही उन्होंने शौचालयों की स्वच्छता, नियमित सफाई अभियान, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को प्राथमिकता के साथ सुनिश्चित करने को कहा।

जिलाधिकारी ने आगामी वर्षाकाल के दृष्टिगत संवेदनशील क्षेत्रों में जेसीबी मशीनों की अग्रिम तैनाती 15 अप्रैल तक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही पार्किंग व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने हेतु अतिरिक्त स्थलों का चिन्हांकन करने तथा सड़कों पर अनावश्यक पार्किंग रोकने के लिए कड़े निर्देश दिए, ताकि वाहनों की आवाजाही सुचारु हो सके।

पेयजल, शौचालय एवं प्रकाश व्यवस्था को लेकर जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि प्रमुख स्थलों पर पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। पार्किंग स्थलों एवं भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में मोबाइल शौचालय स्थापित किए जाएं तथा स्ट्रीट लाइटों की कार्यशीलता सुनिश्चित की जाए। बैठक में सड़क एवं वैकल्पिक मार्गों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने विभिन्न वैकल्पिक मार्गों का निरीक्षण कर शीघ्र सुधार कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही यमकेश्वर मार्ग के सुधारीकरण कार्यों में तेजी लाने को कहा गया।

आवास, खाद्य एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने उपजिलाधिकारी को खाद्य एवं आपूर्ति विभाग तथा पर्यटन विभाग के साथ होटल, धर्मशाला, रैनबसेरा एवं गेस्ट हाउसों का संयुक्त निरीक्षण कर आवश्यक सुधार सुनिश्चित करने तथा ईंधन (पेट्रोल, डीजल, एलपीजी) की उपलब्धता बनाए रखने के निर्देश दिए। साथ ही विद्युत व्यवस्था को लेकर उन्होंने निर्देश दिए कि निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ब्रेकडाउन की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध रहे तथा क्षतिग्रस्त विद्युत पोलों की मरम्मत निर्धारित समय में पूर्ण की जाए। साथ ही 24 घंटे शिफ्ट में कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित करने को कहा गया।

जिलाधिकारी ने कहा कि सभी विभाग अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी जिम्मेदारी एवं समन्वय के साथ करें, ताकि चारधाम यात्रा सुरक्षित, सुचारु और सफलतापूर्वक संपन्न हो सके।

बैठक में सीओ तुषार बोरा, संभागीय परिवहन अधिकारी द्वारिका प्रसाद एवं विमल पाण्डे, अधीक्षण अभियंता जल संस्थान प्रवीण सैनी, लोनिवि विवेक कुमार सेमवाल, जिला पर्यटन विकास अधिकारी खुशाल सिंह नेगी, जिला पूर्ति अधिकारी अरुण कुमार वर्मा, परियोजना अधिकारी उरेडा चंद्रप्रकाश उपाध्याय, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका पौड़ी संजय कुमार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।


सभी परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए- मुख्य सचिव

मुख्य सचिव ने हरिद्वार में विभिन्न निर्माणाधीन एवं प्रस्तावित कार्यों का स्थलीय निरीक्षण कर प्रगति की समीक्षा की

हरिद्वार। कुम्भ मेला–2027 की तैयारियों का जायज़ा लेने के लिए प्रदेश के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने हरिद्वार में विभिन्न निर्माणाधीन एवं प्रस्तावित कार्यों का स्थलीय निरीक्षण कर प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया जाए तथा विभागीय समन्वय को सुदृढ़ बनाते हुए कार्यों में तेजी लाई जाए।

कुंभ क्षेत्र के कार्यों के विस्तृत निरीक्षण के दौरान मुख्य सचिव ने अपर गंगा नहर के बाएं तट पर स्थित शहीद भगत सिंह घाट (कामधेनु घाट) से सिंहद्वार तक निर्माणाधीन घाट एवं बैरागी कैम्प घाट का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि घाटों का निर्माण श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा एवं सुगम आवागमन को ध्यान में रखते हुए आधुनिक मानकों के अनुरूप किया जाए, ताकि कुम्भ के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।

उन्होंने बुजुर्गों एवं दिव्यांगजनों की सुविधा के लिए घाटों पर रैम्प एवं अन्य सुगम्यता संबंधी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने, साथ ही चेंजिंग रूम एवं प्रसाधन की समुचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने निर्देशित किया कि इस बार कुम्भ मेला–2027 के लिए ‘ग्रीन घाट’ विकसित किए जाएं, जिसके तहत घाटों पर हरित पट्टियां विकसित कर उन्हें फूलों एवं पौधों से सजाया-संवारा जाए।

इसके बाद उन्होंने ज्वालापुर–ईदगाह–पीएसी–शिवालिक नगर मोटर मार्ग के किलोमीटर-3 पर पथरी रौ नदी पर निर्माणाधीन 60 मीटर लंबे प्री-स्ट्रेस्ड आरसीसी सेतु के कार्य की प्रगति का निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यदायी संस्था को निर्देशित किया कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता न किया जाए तथा कार्य समयबद्ध रूप से पूर्ण किया जाए।

मुख्य सचिव ने बहादराबाद–सिडकुल मार्ग (भाईचारा ढाबा से बीएचईएल सेक्टर-6 होते हुए शिवालिक नगर चौक एवं बीएचईएल मध्य मार्ग तक) के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि यह मार्ग कुम्भ के दौरान यातायात के सुचारू संचालन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए इसे प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण किया जाए।

उन्होंने धनौरी–सिडकुल लिंक मार्ग पर पथरी रौ नदी में पुरानी गंग नहर सायफन के डाउनस्ट्रीम में बन रहे 90 मीटर स्पान के पुल के निर्माण कार्य का निरीक्षण करते हुए कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस पुल से संबंधित नदी तल के कार्य वर्षाकाल से पूर्व पूर्ण कर लिए जाएं, ताकि वर्षा ऋतु में जलस्तर बढ़ने से कार्य प्रभावित न हो।

मुख्य सचिव ने हरिद्वार बाईपास रिंग रोड परियोजना के निर्माण कार्यों का भी स्थलीय निरीक्षण कर प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने एनएचएआई के अधिकारियों को निर्देशित किया कि बाईपास निर्माण कार्य अविलंब पूर्ण किया जाए तथा सप्ताहवार लक्ष्य निर्धारित कर टाइमलाइन के अनुसार प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि यह परियोजना कुम्भ मेला प्रारंभ होने से पूर्व पूर्ण होना अत्यंत आवश्यक है।

इसके साथ ही दिल्ली राजमार्ग पर निर्माणाधीन फ्लाईओवर कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ पूर्ण करने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी हरिद्वार को इसकी प्रगति का दैनिक ब्यौरा उपलब्ध कराया जाए।

मुख्य सचिव ने बैरागी कैम्प में 1500 किलोलिटर क्षमता के ओवरहेड टैंक, एवं कार्यों की प्रगति का भी निरीक्षण किया। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी जलापूर्ति संबंधी कार्य समय से पूर्ण कर कुम्भ के दौरान निर्बाध एवं स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि कुम्भ मेला–2027 एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर का आयोजन है, जिसमें देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचेंगे। ऐसे में सभी विभागों को पूर्ण जिम्मेदारी एवं समर्पण के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने निर्माण कार्यों के साथ-साथ यातायात प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं को भी समान प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि सभी परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए तथा किसी भी समस्या का त्वरित समाधान किया जाए, ताकि तैयारियों में किसी प्रकार की कमी न रह जाए।

मुख्य सचिव ने मेला नियंत्रण भवन में संचालित कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का निरीक्षण कर सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने इस व्यवस्था में नवीनतम आईटी अनुप्रयोगों एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।


ऋषिकेश बाईपास निर्माण की स्वीकृति पर महाराज ने जताया आभार

ऋषिकेश शहर के भीतर लगने वाले जाम से यात्रियों को मिलेगी निजात

देहरादून। उत्तराखंड में ट्रैफिक जाम को कम करने और चारधाम यात्रा को सुगम बनाने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा ऋषिकेश बाईपास के 4-लेन निर्माण के लिए ₹1105.79 करोड़ की मंजूरी दिये जाने पर प्रदेश के पर्यटन धर्मस्व, संस्कृति, लोक निर्माण, सिंचाई एवं ग्रामीण निर्माण मंत्री सतपाल महाराज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा का आभार जताया है।

प्रदेश के पर्यटन धर्मस्व, संस्कृति, लोक निर्माण, सिंचाई एवं ग्रामीण निर्माण मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि 12.67 किमी लंबा यह नया एनएच-7 (NH-7) बाईपास नेपाली फार्म (तीनपानी) के पास से शुरू होकर खारास्रोत तक बनेगा, जिससे ऋषिकेश शहर के भीतर लगने वाले जाम से यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह परियोजना उत्तराखण्ड राज्य में राष्ट्रीय राजमार्ग-07 पर डिजाइन किमी 529750 से किमी 542420 तक भट्टोवाला ढालवाला होते हुए खाराश्रोत पुल तक प्रस्तावित 4 लेन ऋषिकेश बाईपास (पैकेज-01) के निर्माण से सम्बन्धित है। प्रस्तावित बाईपास की कुल लम्बाई 12.670 किमी है, जिसमें 4.876 किमी एलिवेटेड संरचना, 0.50 किमी वायाडक्ट सहित मुख्य पुल, 42 मीटर लघु पुल, 3 अंडरपास (0.364 किमी), 1 रेल ओवर ब्रिज (184 मीटर), 1 ओवरपास (120 मीटर), 1 राउंडअबाउट इंटरसेक्शन, 1 राउंडअबाउट जंक्शन सम्मिलित हैं।

महाराज ने कहा कि भारत सरकार द्वारा परियोजना के लिए ₹1109.79 करोड़ की स्वीकृति प्रदान करना एक बड़ी पहल है। ऋषिकेश चारधाम यात्रा (बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री एवं यमुनोत्री) का प्रमुख प्रवेश द्वार है, जहाँ से राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय यातायात का अत्यधिक दबाव शहर के भीतर से होकर गुजरता है। भारी यातायात, पर्यटक वाहनों तथा तीर्थयात्रियों की अधिक संख्या के कारण ऋषिकेश शहर में प्रायः यातायात जाम की स्थिति उत्पन्न होती है, जिससे आवागमन में विलम्ब तथा सड़क सुरक्षा सम्बन्धी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। विशेष रूप से चारधाम यात्रा अवधि और कांवड़ यात्रा के दौरान यातायात का दबाव और अधिक बढ़ जाता है। प्रस्तावित बाईपास के निर्माण से बाहरी यातायात को शहर में प्रवेश किये बिना सुचारु रूप से संचालित किया जा सकेगा, जिससे ऋषिकेश नगर में यातायात दबाव में उल्लेखनीय कमी आयेगी। यह परियोजना तपोवन एवं आसपास के क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को भी बेहतर बनाएगी।

उन्होंने कहा कि यह परियोजना पर्यटन एवं तीर्थाटन को प्रोत्साहित करेगी, सड़क सुरक्षा में सुधार करेगी तथा क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगी। इसके अतिरिक्त, परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे तथा राज्य की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी सुदृढ़ होगी।


कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने मसूरी-देहरादून मार्ग पर बन रहे वैली ब्रिज के निर्माण कार्य का किया निरीक्षण 

देहरादून। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने आज मसूरी-देहरादून मार्ग पर पर्यटन सीजन को ध्यान में रखते हुए निर्माणाधीन वैली ब्रिज के निर्माण कार्य का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने लोक निर्माण विभाग एवं वन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर पर्यटन सीजन के दौरान यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के उद्देश्य से स्थायी पुल के निर्माण से पहले एक ओर अस्थायी (टेंपरेरी) वैली ब्रिज बनाने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में आज उन्होंने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि पर्यटन सीजन प्रारंभ होने से पूर्व हर हाल में वैली ब्रिज का निर्माण कार्य पूर्ण किया जाए, ताकि पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

उन्होंने कहा कि इस वैली ब्रिज के निर्माण से मसूरी-देहरादून मार्ग पर यातायात व्यवस्था बेहतर होगी और लोगों को जाम की समस्या से राहत मिलेगी तथा आवागमन अधिक सुगम हो सकेगा।


सीएम धामी से केदारनाथ धाम के रावल भीमाशंकर लिंग ने की शिष्टाचार भेंट

केदारनाथ धाम के रावल ने चारधाम यात्रा का लिया फीडबैक

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से गुरुवार को श्री केदारनाथ धाम के रावल श्री श्री श्री 1008 भीमाशंकर लिंग ने शिष्टाचार भेंट की तथा उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया।
इस अवसर पर रावल ने भगवान केदारनाथ जी की कृपा एवं प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की।

मुख्यमंत्री ने रावल का स्वागत करते हुए केदारनाथ धाम में चल रहे पुनर्निर्माण एवं विकास कार्यों की जानकारी साझा की और कहा कि राज्य सरकार तीर्थयात्रियों की सुविधा, सुरक्षा तथा व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने आगामी यात्रा सीजन को सुगम एवं सुव्यवस्थित बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया।

भेंट के दौरान केदारनाथ धाम की व्यवस्थाओं, यात्रा संचालन तथा श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए आवश्यक तैयारियों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने रावल से आशीर्वाद प्राप्त कर प्रदेश की प्रगति एवं जनकल्याण के लिए उनके मार्गदर्शन की अपेक्षा व्यक्त की।


मुख्यमंत्री धामी ने समस्त प्रदेशवासियों को दी हनुमान जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं

मुख्यमंत्री ने समस्त प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की 

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समस्त प्रदेशवासियों को हनुमान जयंती के पावन अवसर पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि बजरंग बली की कृपा से सभी के जीवन में ज्ञान, भक्ति, अदम्य साहस और एकाग्रता का संचार हो। उन्होंने प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करते हुए कहा कि यह पर्व समाज में सकारात्मक ऊर्जा और धार्मिक आस्था को और सुदृढ़ करता है।


मुख्यमंत्री धामी से मिले प्रसिद्ध कथा वाचक एवं आध्यात्मिक गुरु देवकीनंदन ठाकुर

सनातन संस्कृति और नैतिक मूल्यों पर हुई महत्वपूर्ण चर्चा

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने शासकीय आवास पर प्रसिद्ध कथा वाचक एवं आध्यात्मिक गुरु देवकीनंदन ठाकुर महाराज का स्वागत एवं अभिनंदन किया।

इस दौरान दोनों के बीच सनातन संस्कृति के संरक्षण, आध्यात्मिक जागरूकता को बढ़ावा देने और समाज में नैतिक मूल्यों के प्रसार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आध्यात्मिक मार्गदर्शन से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और युवा पीढ़ी को सही दिशा मिलती है।


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