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उच्च शिक्षा विभाग में किताबों का संकट दूर करेगी ई-लाइब्रेरी- डाॅ. धन सिंह रावत

उच्च शिक्षा विभाग में किताबों का संकट दूर करेगी ई-लाइब्रेरी- डाॅ. धन सिंह रावत

उच्च शिक्षा विभाग में किताबों का संकट दूर करेगी ई-लाइब्रेरी- डाॅ. धन सिंह रावत

स्वामी विवेकानंद ई-पुस्तकालय योजना के तहत छात्रों को मिलेगी डिजिटल पुस्तकें

देहरादून। उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित राज्य विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों एवं अशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों में ‘स्वामी विवेकानंद उत्तराखण्ड ई-पुस्तकालय योजना’ लागू कर दी गई है। योजना के तहत शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को ऑनलाइन एकीकृत प्लेटफार्म पर सभी पाठ्यक्रमों की ई-बुक सहित अन्य डिजिटल कंटेन्ट उपलब्ध कराया जायेगा, ताकि छात्र-छात्राओं को किताबों को लेकर कोई दिक्कत न हो। योजना के ठोस क्रियान्वयन के लिये शासन स्तर से सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों एवं निदेशक उच्च शिक्षा को निर्देश जारी कर दिये गये हैं।

सूबे के उच्च शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने बताया कि नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप प्रदेश की उच्च शिक्षा में डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। जिसके तहत सभी राज्य विश्वविद्यालयों, सम्बद्ध महाविद्यालयों एवं अशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों में ‘स्वामी विवेकानंद उत्तराखंड ई-पुस्तकालय योजन’ को लागू कर दिया गया है। इस योजना के तहत अध्ययनरत छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों को एकीकृत ऑनलाइन प्लेटफार्म पर पाठ्यपुस्तकें, उत्कृष्ट लेखकों की किताबें, शोध पत्र एवं अन्य डिजिटल कंटेंट न्यूजपेपर, मैगजीन एवं रिपोर्ट्स एक क्लिक पर मिलेगी। डाॅ. रावत ने कहा कि ई-लाइब्रेरी का उद्देश्य प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तपूर्ण शिक्षा पहुंचाना है ताकि आर्थिक एवं भौगोलिक कारणों से कोई भी छात्र किताबों से वंचित न रहे।

उन्होंने कहा कि ई-लाइब्रेरी योजना का लाभ ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के विद्यार्थियों को समान रूप से मिल सकेगा और छात्र अपनी सुविधानुसार आसानी से विषयवार पुस्तकों की पढ़ाई कर सकेंगे। इसके अलावा उक्त योजना का लाभ तकनीकी शिक्षा, आयुष एवं चिकित्सा शिक्षा सहित अन्य विभाग व निजी विश्वविद्यालय व महाविद्यालय भी ले सकेंगे इसके लिये उन्हें निर्धारित शुल्क का वहन करना पड़ेगा। डाॅ. रावत ने बताया कि ई-पुस्तकालय की सुविधा के लिये प्रत्येक विश्वविद्यालय द्वारा न्यूनतम रु0 5 लाख वार्षिक शुल्क देना होगा जबकि निजी व अशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों सहित अन्य विभागों एवं शोध संस्थानों के लिये प्रति वर्ष रु0 1 लाख अथवा प्रत्येक हितधारकों को रु0 500 की दर से शुल्क देय होगा। डाॅ. रावत ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिये कि ई-लाइब्रेरी को सरल, उपयोगी एवं विद्यार्थियों के अनुकूल बनाया जाय।


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