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पत्ता गोभी में पाए जाने वाले छोटे-छोटे कीड़े होते हैं बेहद खतरनाक, आइए जानते हैं इसे साफ करने का सही तरीका  

Category Archives: जीवन शैली

पत्ता गोभी में पाए जाने वाले छोटे-छोटे कीड़े होते हैं बेहद खतरनाक, आइए जानते हैं इसे साफ करने का सही तरीका  

सर्दी हो या गर्मी हरी सब्जियां पूरे साल बड़े ही शौक से खाई जाती है। इसी में एक ऐसी सब्जी है, जो बच्चों से लेकर बड़े और बूढ़ों तक में लोकप्रिय है और हर सीजन में पकाई जाती है। हम बात कर रहे हैं पत्ता गोभी की। पत्तागोभी खाने के कई फायदे हैं। यह आंखों की रोशनी के लिए, अल्सर और कैंसर में असरदार माना जाता है। लेकिन इसे खाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। अगर इसे अनदेखा कर दिया जाए तो यह काफी नुकसानदायक भी साबित हो सकती है। आपने अखबारों और पत्रिकाओं में तो पढ़ा ही होगा कि पत्तागोभी में छोटे-छोटे कीड़े पाए जाते हैं। यह इतने बारीक होते हैं कि दिमाग तक को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। यह आसानी से नजर भी नहीं आते हैं। इसे अच्छे से धोने के बाद भी अगर आप इसे पकाते हैं तो भी यह कीड़े जिंदा ही रह जाते हैं। तो आइए इस खबर में हम आपको पत्ता गोभी साफ करने के सही तरीके के बारे में विस्तार से बताते हैं।

गर्म पानी से करें साफ
पत्ता गोभी काटने के बाद इसे गर्म पानी से अच्छी तरह धो लेना चाहिए। इसके लिए पत्ता गोभी के ऊपर के तीन लेयर को रिमूव कर देना चाहिए क्योंकि ऊपरी परतों पर मिट्टी जमी होती है। ऐसे में कीड़े होने का खतरा ज्यादा होता है। पत्ता गोभी को एक गर्म पानी के बाउल में डाल दें। फिर उसमें नमक मिलाकर उसे 15 से 20 मिनट के लिए छोड़ दें। इसके बाद ही पत्ता गोभी को कट कर के पकाएं। इस प्रोसेस से कीड़े मर जाते हैं और आपकी सेहत भी खराब नहीं होती है।

सिरके का कर सकते हैं इस्तेमाल
पत्ता गोभी को अच्छी तरह साफ करने के लिए आप सिरके का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। यह नैचुरल कीटनाशक होती है, जिससे सब्जी की सारी गंदगी साफ हो जाती है। इसके लिए आपको एक कंटेनर में गुनगुना पानी लेना होगा। इसके बाद उसमें तीन से चार चम्मच सिरका डालें और 15 से 20 मिनट के लिए छोड़ दें। इसके बाद कपड़े से पोछकर ही सब्जी को काटें और पकाएं।

वेजिटेबल सैनिटाइजर भी है असरदार
मार्केट में कई तरह के वेजिटेबल सैनिटाइजर उपलब्ध हैं। यह सब्जियों में मौजूद बैक्टीरिया, कीड़ों को मारने में काफी इफेक्टिव है। आप सब्जी को काटने से पहले अच्छे से इस स्प्रे कर लें और कुछ समय के लिए छोड़ दें। इसके बाद कपड़े से अच्छे से पोछकर ही इस काटे और पकाएं।

छिलकों को निकाल कर करें साफ
यह टाइम टेकिंग और सबसे असरदार उपाय है। इसमें पत्ता गोभी के सारे लेयर्स निकालकर एक कंटेनर में रख लें। इसके बाद नमक, बेकिंग सोडा या फिर सिरके वाले पानी से इसे अच्छी तरह से साफ कर लें। यह प्रोसेस काफी इफेक्टिव होता है।

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क्या आपका भी ठंड के मौसम में बढ़ जाता है ब्लड शुगर लेवल, तो कर लीजिए कंट्रोल, नहीं तो शरीर को हो सकता है नुकसान

सर्दियों का ये मौसम आपकी सेहत को कई प्रकार से प्रभावित करने वाला हो सकता है। तापमान में गिरावट के साथ आपकी स्वास्थ्य जटिलताएं बढ़नी शुरू हो जाती हैं, यही कारण है कि सभी लोगों को सर्दियों के इस मौसम में अपनी सेहत को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। यह मौसम मधुमेह और उच्च रक्त से पीड़ित लोगों के लिए भी कई प्रकार से चुनौतीपूर्ण हो सकता है, विशेषतौर पर मधुमेह रोगियों को सर्दी के मौसम में अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। ठंड का यह मौसम आपके शुगर लेवल को प्रभावित कर सकता है और इसके बढ़ने का कारण हो सकता है।

सर्दियों में ब्लड शुगर बढ़ने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे घर के अंदर रहने के कारण शारीरिक गतिविधि में कमी, खान-पान की आदतों में बदलाव, रक्त परिसंचरण में कमी आदि।

आइए जानते हैं कि जिन लोगों को डायबिटीज की समस्या है उन्हें सर्दियों में शुगर को कंट्रोल रखने के लिए क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

सर्दियों में डायबिटीज की समस्या

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, तापमान में कमी आपके शरीर पर दवाब डाल सकती है। इसके जवाब में, आपका शरीर ऊर्जा बढ़ाने के लिए कोर्टिसोल जैसे हार्मोन रिलीज करता है। ये हार्मोन इंसुलिन उत्पादन को प्रभावित करने वाले माने जाते रहे हैं। क्योंकि इंसुलिन का काम शरीर की कोशिकाओं को ब्लड शुगर को अवशोषित करने में मदद करना होता है, इसलिए इंसुलिन के उत्पादन में कमी आपके शुगर लेवल को बढ़ाने वाली हो सकती है।

अगर आपका शुगर लेवल अक्सर बढ़ा हुआ रहता है और आप इसपर ध्यान नहीं देते हैं तो इसके कारण तंत्रिकाओं, आंखों, किडनी सहित कई अंगों को नुकसान हो सकता है। आइए जानते हैं कि शुगर को कंट्रोल करने के लिए क्या उपाय करते रहना चाहिए?

शरीर को ठंड से बचाएं

सर्दियों में शरीर को गर्म रखने के लिए प्रयास करते रहना जरूरी होता है। विशेषतौर पर अगर आपको डायबिटीज या ब्लड प्रेशर जैसी समस्या है तो ये और भी आवश्यक हो जाता है। शरीर को ठंड से बचाए रखने और गर्म रखने के लिए ऊनी कपड़े पहनें। यह तापमान में गिरावट के कारण शरीर पर पड़ने वाले तनाव को कम करेगा।

शुगर की जांच करते रहें

जिन लोगों को डायबिटीज की समस्या है उन्हें शुगर को लेकर विशेष ध्यान देते रहना चाहिए। डॉक्टर द्वारा बताए गए उपाय करें और नियमित अंतराल पर घर पर ही ग्लूकोमीटर से ब्लड शुगर की जांच करते रहें। इसके अलावा अपने आहार, जीवनशैली में आवश्यक बदलाव करके भी आप शुगर को कंट्रोल में रख सकते हैं।

तनाव को कंट्रोल रखना भी जरूरी

अध्ययनों से पता चलता है कि तनाव बढ़ने के साथ आपके शुगर लेवल के बढ़ने का भी खतरा रहता है। मधुमेह को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के लिए तनाव मुक्त रहने वाले उपाय करें। अनियंत्रित तनाव की स्थिति शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकती है। ध्यान, योग और अन्य उपायों को अपनाकर आप स्ट्रेस और डायबिटीज दोनों को कंट्रोल रख सकते हैं।

व्यायाम है जरूरी

ठंड के मौसम में भी आपको शारीरिक रूप से सक्रिय रहना जरूरी है। आप व्यायाम के लिए जिम या पार्क में नहीं जा सकते हैं तो घर पर ही कुछ योग-अभ्यास करते रहें। नियमित रूप से व्यायाम करने से आपको रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। डॉक्टर बताते हैं कि सर्दियों में शुगर बढ़ने का सबसे बड़ा कारण लोगों को शारीरिक रूप से निष्क्रिय हो जाना है।

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क्या आप जानते हैं ‘ताड़ासन’ करने से मिलते हैं कई स्वास्थ्य लाभ, आइए जानते हैं इसे करने का सही तरीका 

योग मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में प्रभावी क्रिया है। नियमित अभ्यास के लिए किसी आसन को अपनी जीवनशैली में अपनाने की तलाश में हैं तो ताड़ासन का अभ्यास कर सकते हैं। नियमित अभ्यास से ताड़ासन न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक संतुलन भी प्रदान करता है। ताड़ासन योग क्रिया को पर्वत मुद्रा या Mountain Pose भी कहा जाता है। इसमें शरीर की मुद्रा पहाड़ की तरह की होती है। यह योग का एक महत्वपूर्ण आसन है, जिसे शरीर की मुद्रा सुधारने, संतुलन बढ़ाने और रीढ़ की हड्डी को सीधा रखने के लिए जाना जाता है। ताड़ासन के कई स्वास्थ्य लाभ हैं। आइए जानते हैं कि ताड़ासन का अभ्यास सही तरीके से कैसे किया जा सकता है और इस आसन के अभ्यास से क्या लाभ हो सकते हैं।

ताड़ासन का अभ्यास करने की विधि

स्टेप 1- सबसे पहले एक समतल जगह पर खड़े होकर दोनों पैरों को पास में रखें और हाथों को शरीर के पास रखें। अपनी रीढ़ को सीधा करते हुए कंधे को आराम दें।

स्टेप 2- अब दोनों पैरों पर समान रूप से वजन डालते हुए एड़ियों को स्थिर रखें और पैर के तलवों को जमीन पर मजबूती से टिकाएं।

स्टेप 3- धीरे-धीरे गहरी सांस लेते हुए अपने दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाएं। हथेलियों को एक-दूसरे के सामने जोड़ें (नमस्कार मुद्रा)।

स्टेप 4- अपने पूरे शरीर को ऊपर की ओर खींचें जैसे आप आसमान को छूना चाह रहे हों। एड़ियों को उठाएं और पंजों के बल खड़े हो जाएं। शरीर को संतुलित रखें और स्थिरता बनाए रखें।

स्टेप 5- सामान्य रूप से सांस लेते रहें और इस स्थिति में 10-30 सेकंड तक रहें। वापस नीचे आते समय सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे हाथों को नीचे लाएं और एड़ियों को जमीन पर रखें।

ताड़ासन के फायदे

शारीरिक मुद्रा में सुधार

ताड़ासन के अभ्यास से रीढ़ की हड्डी को सीधी रहती है और शरीर की मुद्रा में सुधार होता है। दिनभर गलत पोस्चर में बैठने के कारण जो शारीरिक मुद्रा बिगड़ जाती है, इस आसन के अभ्यास से उसमें सुधार हो सकता है।

संतुलन और स्थिरता बढ़ाए

इस आसन के अभ्यास से शरीर का संतुलन बेहतर बनाता है और ये योग मानसिक स्थिरता प्रदान करता है।

लंबाई बढ़ाने में सहायक

बच्चे और किशोरों के लिए ताड़ासन का अभ्यास फायदेमंद है। इस आसन के नियमित अभ्यास से लंबाई बढ़ाने में मदद मिलती है।

पाचन तंत्र में सुधार

ताड़ासन का नियमित अभ्यास पाचन में सुधार लाता है और पेट की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। पेट संबंधी समस्याओं से दूर रहने के लिए ताड़ासन का अभ्यास कर सकते हैं।

तनाव को कम करता है

ये आसन मानसिक शांति प्रदान करता है और तनाव व थकान को कम करता है। ताड़ासन के नियमित अभ्यास से बेहतर नींद आती है और मस्तिष्क को आराम मिलता है।

मांसपेशियों को मजबूत बनाना

ताड़ासन का नियमित अभ्यास मांसपेशियों को मजबूती देता है। ये योग क्रिया पैर, हाथ, और पीठ की मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करता है।

ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करता है

रक्त संचार को सुधारने में मदद मिलती है, जिससे त्वचा में निखार आता है और हृदय स्वास्थ्य बेहतर होता है।

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अगर आपका भी हार्ट रेट बढ़ा हुआ है तो हो जाए सावधान, कई तरह के होते है नुकसान

हृदय रोगों के मामले दुनियाभर में तेजी से बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं। कुछ दशकों पहले तक इसे उम्र बढ़ने के साथ होने वाली बीमारी के रूप में देखा जाता था हालांकि अब 30 से कम उम्र में ही न सिर्फ लोग हृदय रोगों का शिकार हो रहे हैं साथ ही हार्ट अटैक जैसी दिक्कतों के कारण लोगों की मौत भी हो रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, खराब होती दिनचर्या और खान-पान में गड़बड़ी ने हृदय रोगों के खतरे को काफी बढ़ा दिया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कम उम्र से ही सभी लोगों को अपने हृदय स्वास्थ्य को लेकर अलर्ट रहना चाहिए। इसके लिए नियमित रूप से ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और हार्ट रेट की जांच कराते रहें। अध्ययनों से पता चलता है कि हार्ट रेट यानी कि जिन लोगों के दिल की धड़कन में अनियमितता (कम या ज्यादा) होती है, उनमें आगे चलकर हृदय रोगों का खतरा भी अधिक हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, आराम करते वयस्कों के लिए सामान्य तौर पर हार्ट रेट 60 से 100 बीट प्रति मिनट होना चाहिए। हालांकि अगर आपका हार्ट रेट अक्सर बहुत बढ़ा हुआ रहता है तो ये संकेत हो सकता है कि आपके दिल में सबकुछ ठीक नहीं है। आपका शरीर अपने आप ही आपके दिल की धड़कनों को नियंत्रित करता है। यही कारण है कि जब आप सक्रिय, उत्साहित या डरे हुए होते हैं तो आपकी हृदय गति तेज हो जाती है। और जब आप आराम कर रहे होते हैं, शांत या सहज होते हैं तो यह कम होती है। अपनी हृदय गति को मापने के लिए अपनी नाड़ी की जांच करें। यदि आपका हार्ट रेट 100 बीट्स प्रति मिनट (बीपीएम) से अधिक हो तो सावधान हो जाना चाहिए।

हार्ट रेट अधिक बने रहने के कई तरह के होते है नुकसान 

लंबे समय तक तेज धड़कन के कारण हृदय को रक्त पंप करने में कठिनाई हो सकती है जिससे हृदय पर अतिरिक्त दबाव बढ़ता है। शरीर को ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति ठीक तरीके से न हो पाने के कारण थकान और कमजोरी जैसी दिक्कतों का खतरा हो सकता है। असामान्य और अत्यधिक तेज हार्ट रेट के कारण हार्ट अटैक का भी जोखिम हो सका है। हार्ट रेट बढ़ने की ही तरह इसका कम होना भी सेहत के लिए ठीक नहीं है। हृदय गति कम होने को ब्रैडीकार्डिया भी कहा जाता है, इसका मतलब है कि आपका दिल 60 बीट्स प्रति मिनट (बीपीएम) से कम धड़कता है। हृदय गति में कमी आने के कारण रक्त का प्रवाह बाधित हो जाता है जिसके कारण सिरदर्द, चक्कर आना या बेहोशी हो सकती है। शरीर की जरूरत के अनुसार रक्त संचार कम होने की स्थिति में आपको हृदय की गंभीर जटिलताओं का खतरा हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हार्ट रेट कम या ज्यादा होने के कई कारण हो सकते हैं। कुछ प्रकार की बीमारियों के कारण भी इस तरह की समस्या होती है। यदि आपको कोई बीमारी नहीं है तो कुछ आसान से उपायों का पालन करके इसमें सुधार किया जा सकता है।

नियमित व्यायाम करें। योग, वॉकिंग और कार्डियो व्यायाम से हार्ट रेट ठीक रहता है।
संतुलित आहार लें। फल, सब्जियां, कम वसा वाला भोजन आपके दिल की सेहत के लिए अच्छा माना जाता है।
ध्यान और मेडिटेशन करें जिससे स्ट्रेस की समस्या कम हो सके। स्ट्रेस कम होने से भी हार्ट रेट ठीक रहता है।
धूम्रपान और शराब का सेवन न करें। इसके कारण भी दिल की धड़कन प्रभावित हो सकती है।
प्रतिदिन 7-8 घंटे की नींद लें। नींद की कमी के कारण भी हृदय स्वास्थ्य की समस्याएं हो सकती हैं।
यदि आपका हार्ट रेट लगातार सामान्य से अधिक या कम रहता है, तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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क्या आप रोज रात को अपनी नींद पूरी कर पा रहे हैं? अगर नहीं, तो हो जाएँ सावधान, इन बीमारियों का बढ़ सकता है खतरा 

स्वस्थ शरीर के लिए पौष्टिक खान-पान की तरह ही अच्छी नींद भी जरूरी है। कई अध्ययनों से पता चलता है कि जिन लोगों की नींद पूरी नहीं होती है उन्हें समय के साथ कई प्रकार की गंभीर बीमारियों घेर लेती हैं। यहां तक कि एक रात भी नींद पूरी न होने के कारण आप अगले दिन थकान-कमजोरी, चिड़चिड़ापन जैसी समस्याओं का अनुभव कर सकते हैं। वयस्कों को रात में 6-8 घंटे की निर्बाध नींद लेने की सलाह दी जाती है। क्या आप रोज रात को अपनी नींद पूरी कर पा रहे हैं?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एक अध्ययन में सभी लोगों को सावधान करते हुए कहा है कि यदि आपको अच्छी नींद नहीं मिलती है, रात को बार-बार नींद टूट जाती है या फिर तमाम कोशिशों के बाद भी आप गहरी नींद नहीं ले पा रहे हैं तो आपको सावधान हो जाने की जरूरत है। ये एक स्थिति भविष्य में अल्जाइमर रोग-डिमेंशिया जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती है।

नींद की कमी से मस्तिष्क पर असर

नींद क्यों बहुत जरूरी है और इसकी कमी किस प्रकार से हमारी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकती है इसको समझने के लिए विशेषज्ञों की टीम ने एक अध्ययन किया। शोधकर्ताओं ने बताया कि अगर आपको पर्याप्त नींद नहीं मिलती है, तो भविष्य में अल्जाइमर या डिमेंशिया होने का खतरा बढ़ जाता है।

हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के शोधकर्ताओं ने 65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के 2,800 से अधिक व्यक्तियों का अध्ययन किया। विशेषज्ञों ने बताया कि जो लोग रात में पांच घंटे से कम सोते हैं, उनमें आगे चलकर डिमेंशिया होने का खतरा दोगुना अधिक हो सकता है। हर रात छह से आठ घंटे सोने वालों की तुलना में ऐसे लोगों में असमय मृत्यु का जोखिम भी अधिक देखा गया है।

अल्जाइमर-डिमेंशिया का जोखिम

नींद की कमी के कारण इस प्रकार का जोखिम क्यों अधिक होता है, इसको लेकर विशेषज्ञों ने बताया कि नींद की गुणवत्ता या इसकी अवधि में कमी मस्तिष्क में मौजूद विषाक्त प्रोटीन को साफ करने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है जिसके कारण अल्जाइमर रोग का जोखिम बढ़ जाता है। इससे बीटा-अमाइलॉइड प्रोटीन का निर्माण होने लगता है, जिसे अल्जाइमर रोग से जुड़ा हुआ पाया गया है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, नींद सिर्फ अल्जाइमर रोग का खतरा ही नहीं बढ़ाती है, शरीर को और भी कई प्रकार से प्रभावित करने वाली हो सकती है।

मस्तिष्क और संज्ञानात्मक क्षमताओं में कमी

नींद की कमी हमारी सेहत को और भी कई प्रकार से प्रभावित करने वाली हो सकती है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की एक रिपोर्ट में बताया गया कि जिन लोगों को रोज रात में अच्छी नींद नहीं मिल पाती है उनमें ध्यान केंद्रित करने, निर्णय लेने और याददाश्त से संबंधित समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है। एक अध्ययन में पाया गया कि लगातार 24 घंटे तक जागे रहने से मस्तिष्क की कार्यक्षमता नशे की स्थिति के समान हो सकती है। समय के साथ आपकी संज्ञानात्मक क्षमताओं में कमी भी आने लगती है।

मोटापा और हार्ट की समस्याओं का खतरा

अपर्याप्त नींद को उच्च रक्तचाप, दिल की धड़कन में अनियमितता और हृदय संबंधित कई अन्य समस्याओं से जोड़कर भी देखा जाता है। जर्नल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, लंबे समय तक रोज रात में छह घंटे से कम सोने वाले व्यक्तियों में हृदय रोगों का खतरा 20% अधिक होता है।

इसके अलावा नींद की कमी से इंसुलिन प्रतिरोध को बढ़ाने लगती जिससे टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ता है। यह भूख नियंत्रित करने वाले हार्मोन (लेप्टिन और घ्रेलिन) को असंतुलित करके मोटापा बढ़ा सकती है जिसे हृदय रोगों का प्रमुख कारण माना जाता है।

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क्या आप जानते हैं कि सेब खाने के साथ इसकी चाय भी पी सकते हैं, आइए जानते हैं इससे मिलने वाले स्वास्थ्य लाभ

अच्छी सेहत चाहते हैं तो खान-पान में सुधार करना सबसे जरूरी हो जाता है। आहार में मौसमी सब्जियों और फलों को जरूर शामिल करें। फलों में आपकी अच्छी सेहत के लिए आवश्यक लगभग सभी जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो आपको क्रोनिक बीमारियों से बचाने में मददगार हो सकते हैं।

सेब खाने को अध्ययनों में कई प्रकार से सेहत के लिए लाभकारी पाया गया है। इसको लेकर एक कहावत भी रही है- ‘एन एप्पल ए डे, कीप्स डॉक्टर अवे’। यानी अगर आप रोजाना सेब खाते हैं तो ये आपकी बीमारियों से मुक्त रखता है।

क्या आप जानते हैं कि सेब का फल या इसके जूस के साथ आप सेब की चाय भी पी सकते हैं, जिससे आपको कई स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं।

सेब की चाय को लेकर रही है काफी चर्चा

सेब की चाय बनाने के लिए सबसे पहले एक पैन में पानी, टी बैग, लौंग, हरी इलायची और दालचीनी डालकर उबाल लें। फिर इसमें सेब को काटकर डालें और उबालें। आप इसमें स्वादानुसार नींबू का रस और शहद भी मिला सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इस चाय का सेवन करना वेट लॉस से लेकर आपको कई प्रकार की बीमारियों से सुरक्षित रखने में भी सहायक हो सकता है।

क्या कहती हैं आहार विशेषज्ञ?

आहार विशेषज्ञ नेहा पठानिया भारद्वाज बताती हैं, सेब की चाय विटामिन, एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर होती है। इसके साथ ही इसमें मैग्नीशियम, पोटैशियम, विटामिन-सी और सोडियम भी होता है। इससे वजन घटाने के साथ-साथ कोलेस्ट्रॉल और हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। चाय में मौजूद दालचीनी शरीर को डिटॉक्स करने और सूजन कम करने में मदद करती है। यदि आपको सेब से एलर्जी है तो इस चाय के सेवन से पहले चिकित्सक से सलाह जरूर लें।

बहुत फायदेमंद मानी जाती है ये चाय

सेब की चाय में कैलोरी और वसा बहुत कम होती है, जो वजन को नियंत्रित रखती है। इस चाय में मौजूद फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स बैड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में मददगार हो सकते हैं, जिससे दिल सेहतमंद रहता है। यह चाय पाचन तंत्र को भी दुरुस्त करती है। इसमें मौजूद घुलनशील फाइबर पाचन स्वास्थ्य को बूस्ट करता है। रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करके मेटाबॉलिक बैलेंस को सुधारने के लिए भी इसका सेवन किया जा सकता है।

ब्लड प्रेशर रोगियों के लिए ये बहुत फायदेमंद

डायबिटीज के साथ हाई ब्लड प्रेशर भी मौजादा समय के लिए बड़ा खतरा रहा है। सेब का सेवन या इसकी चाय पीना इसमें आपके लिए लाभकारी है। ऑस्ट्रेलियाई अध्ययनों में पाया गया कि सेब खाने से रक्तचाप कम करने में मदद मिल सकती है। ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहने से स्ट्रोक और दिल का दौरा पड़ने का खतरा कम हो सकता है। मतलब सेब का सेवन करके आप डायबिटीज और ब्लड प्रेशर दोनों को कंट्रोल कर सकते हैं।

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क्या आप भी चेहरे की नमी दूर करने के लिए लगाते हैं तेल, तो जान लीजिए इसके नुकसान

सर्दी के मौसम में अक्सर लोगों के चेहरे की रंगत कम होने लगती है। इसके पीछे की वजह होती है, सर्दी में त्वचा में नमी की कमी होना। जिसकी वजह से चेहरा काफी डल दिखने लगता है। इस कमी को दूर करने के लिए लोग अक्सर बाजार में मिलने वाली कोल्ड क्रीम और बॉडी लोशन का इस्तेमाल करते हैं। इसके साथ-साथ बहुत से लोग चेहरे की नमी को दूर करने के लिए तेल का इस्तेमाल करते हैं। जबकि ऐसा गलती से भी नहीं करना चाहिए।

यदि आप चेहरे पर तेल लगाते हैं तो इसकी वजह से चेहरे पर कई समस्या उत्पन्न होने लगती हैं। बहुत से लोगों को इन नुकसानों के बारे में जानकारी है भी नहीं। यही वजह है कि आज हम आपको चेहरे पर तेल लगाने के नुकसान बताने जा रहे हैं, ताकि आप भी इस्तेमाल से पहले इस बारे में जान लें और फिर सोच-समझ के ही इसका इस्तेमाल करें।

त्वचा पर मुंहासे और पिंपल्स का खतरा

यदि आपकी त्वचा तैलीय (ऑयली) है और आप अतिरिक्त तेल लगाते हैं, तो इससे रोमछिद्र बंद हो सकते हैं। बंद रोमछिद्र बैक्टीरिया को पनपने का मौका देते हैं, जिससे पिंपल्स और मुंहासे हो सकते हैं। ऐसे में तैलीय त्वचा वाले लोग तो चेहरे पर तेल के इस्तेमाल से बचें।

त्वचा पर जलन और एलर्जी

सभी तेल आपकी त्वचा के अनुकूल नहीं होते। कुछ तेल, जैसे नारियल तेल या सरसों का तेल, संवेदनशील त्वचा पर एलर्जी या जलन का कारण बन सकते हैं। ऐसे में कई बार बिना जांच के तेल इस्तेमाल करने से एलर्जी का खतरा रहता है।

पिग्मेंटेशन का खतरा

गलत प्रकार का तेल लगाने से त्वचा पर काले धब्बे पड़ सकते हैं। खासकर अगर तेल को धूप में लगाए रखें, तो यह पिग्मेंटेशन का कारण बन सकता है। इसलिए कोशिश करें कि तेल चेहरे पर न ही लगाएं।

त्वचा पर चिपचिपाहट

अधिक मात्रा में तेल लगाने से त्वचा चिपचिपी और अस्वच्छ लग सकती है। यह धूल और गंदगी को आकर्षित करता है, जिससे त्वचा पर संक्रमण का खतरा बढ़ता है।

इस्तेमाल के समय इस बात का रखें ध्यान

यदि आप तेल ही इस्तेमाल करना चाहते हैं तो तैलीय त्वचा के लिए हल्के और नॉन-कॉमेडोजेनिक तेल जैसे आर्गन या जोजोबा ऑयल जैसे तेलों को चुनें। सूखी त्वचा के लिए गहराई से मॉइस्चराइज करने वाले तेल, जैसे बादाम या जैतून का तेल, बेहतर हो सकते हैं।

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क्या आप जानते हैं बालों में तेल लगाना क्यों है जरुरी, अगर नही, तो जान लीजिए इसके फायदे 

सर्दी के मौसम में यदि बालों का ध्यान सही से न रखा जाए तो बाल काफी परेशान करते हैं। इस मौसम में बालों का झड़ना, बालों में रूखापन और दोमुंहे बालों का होना जैसी समस्याएं सामने आती हैं। ऐसे में बड़े-बुजुर्ग लगातार बालों में तेल लगाने की सलाह देते हैं। बहुत से लोगों को ऐसा लगता है कि तेल लगाने से बाल काफी कमजोर हो जाते हैं, जबकि ऐसा नहीं हैं। यहां हम आपको बालों में तेल लगाने के फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं, ताकि आप नियमित रूप से बालों में तेल लगाएं। इसकी वजह से आपको काफी फायदा मिलेगा।

बालों को मिलता है पोषण

यदि आप नियमित रूप से बालों में तेल लगाएंगे तो बालों की जड़ों को गहराई से पोषण मिलेगा। इसकी वजह से बाल काफी ज्यादा मजबूत बनते हैं। ऐसे में आप हफ्ते में दो से तीन बार बालों में तेल लगा सकते हैं।

हेयर फॉल में होगी गिरावट

सही तेल लगाने से जड़ों की मजबूती बढ़ती है, जिससे बालों का झड़ना कम होता है। विशेष रूप से नारियल तेल, बादाम तेल और आंवला तेल इस समस्या में फायदेमंद होते हैं। ऐसे में अपने हेयर टाइप से हिसाब से तेल का चयन करें, और इसका इस्तेमाल करें।

बालों की वृद्धि में मदद करता है

यदि आप बालों में नियमित रूप से तेल का इस्तेमाल करेंगे तो तेल बालों के रोम को सक्रिय करता है और रक्त प्रवाह को बेहतर करता है, जिससे बाल तेजी से बढ़ते हैं। इस्तेमाल के समय बस ध्यान रखें कि ये आपके हेयर टाइप का ही होना चाहिए।

डैंड्रफ कम करता है

अभी जब सर्दी का मौसम चल रहा है, तो इस मौसम में स्कैल्प का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है। नीम, टी ट्री, और नारियल तेल जैसे एंटी-फंगल गुणों वाले तेल स्कैल्प को साफ रखते हैं और डैंड्रफ को कम करते हैं। तेल लगाने से बालों में प्राकृतिक नमी बनी रहती है, जो सूखापन और टूटने से बचाता है।

दोमुंहे बालों को रोकता है

तेल लगाने से बालों में नमी और पोषण बना रहता है, जिससे दोमुंहे बाल कम होते हैं। ऐसे में यदि आप दोमुंहे बालों से परेशान हैं, तो नियमित रूप से तेल मालिश करें। इससे आपके फायदा अवश्य मिल जाएगा।

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क्या आपको भी अक्सर रहता है सिर में दर्द, अगर हां, तो हो जाइए सावधान, इस बीमारी का हो सकता है लक्षण

क्या आपको अक्सर सिर में दर्द होता रहता है? कुछ स्थितियों जैसे तेज शोर, तेज रोशनी, ठंड या गर्मी के कारण ये समस्या बढ़ जाती है? अगर हां तो सावधान हो जाइए, ये माइग्रेन का लक्षण हो सकता है। माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल विकार है, जो मुख्यरूप से सिर के एक हिस्से में दर्द, असहजता और उल्टी-मितली जैसी दिक्कतें पैदा करता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर आपको अक्सर माइग्रेन होता रहता है तो इसपर गंभीरता से ध्यान दें। कुछ मामलों में माइग्रेन अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्या के कारण होने वाली समस्या भी हो सकती है, इसके अलावा दीर्घकालिक रूप में माइग्रेन कई प्रकार की गंभीर समस्याओं का कारण भी बन सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, माइग्रेन क्यों होता है इसका सटीक कारण अभी तक पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है, हालांकि कुछ स्थितियां इसको बढ़ाने वाली हो सकती हैं। यदि आपके परिवार में किसी को माइग्रेन की समस्या रही है, तो अन्य लोगों में भी इसका खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा मस्तिष्क में कुछ प्रकार के रसायनिक असंतुलन के कारण भी ये समस्या हो सकती है। डॉक्टर कहते हैं, इस समस्या पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए।

पोषक तत्वों की कमी और माइग्रेन का खतरा

अध्ययनों से पता चलता है कि शरीर में कुछ प्रकार के विटामिन्स और मिनरल्स की कमी के कारण भी माइग्रेन की समस्या हो सकती है या फिर ये ट्रिगर हो सकती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि माइग्रेन से पीड़ित लोगों में मैग्नीशियम की कमी होने की आशंका दूसरों की तुलना में अधिक होती है। अध्ययनों से पता चलता है कि मैग्नीशियम का सप्लीमेंट लेने से माइग्रेन के सिरदर्द को रोकने में मदद मिल सकती है। इस विषय पर किए गए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि डॉक्टर की सलाह पर अगर एक ग्राम मैग्नीशियम सप्लीमेंट लिया जाए तो आम दवा की तुलना में ये तीव्र माइग्रेन अटैक को कम करने में प्रभावी हो सकती है। आहार में मैग्नीशियम युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करने से सिरदर्द की समस्या से बचाव करने में मदद मिल सकती है।

माइग्रेन के कारण स्ट्रोक का खतरा

माइग्रेन का आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभाव हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पाया कि माइग्रेन से पीड़ित लोगों में अवसाद, चिंता और घबराहट संबंधी विकारों जैसी मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों का खतरा अन्य लोगों की तुलना में अधिक होती है। इसके अलावा माइग्रेन से पीड़ित लोगों में नींद संबंधी विकारों का खतरा भी अधिक देखा जाता रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में इस बात को लेकर भी चिंता जताई गई है कि माइग्रेन की दीर्घकालिक स्थित आपके जीवनकाल में इस्केमिक स्ट्रोक होने के जोखिम को लगभग दोगुना कर सकती है।

माइग्रेन रोगियों को बरतनी चाहिए सावधानी

अध्ययनकर्ता कहते हैं, यह प्रमाणित नहीं होता है कि माइग्रेन की समस्या सीधे तौर पर स्ट्रोक का कारण बनती है, हालांकि अगर आपको माइग्रेन है तो आपको स्ट्रोक का खतरा थोड़ा अधिक हो सकता है। माइग्रेन से पीड़ित व्यक्ति जो धूम्रपान भी करते हैं उन्हें स्ट्रोक का जोखिम अधिक होता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ठंड के प्रति संवेदनशील लोगों को माइग्रेन होने की आशंका अधिक होती है। ऐसे में सर्दियों में सिरदर्द, खासतौर पर माइग्रेन से बचाव के लिए प्रयास करते रहना बहुत आवश्यक हो जाता है। इसके लिए जरूरी है कि आप ठंड से बचाव करें। दिनचर्या में व्यायाम को शामिल करने से आपको लाभ मिल सकता है, व्यायाम करने से सेरोटोनिन का स्तर बढ़ता है जो इसके जोखिमों को कम कर सकता है। सर्दियों में सिर को अच्छे से कवर करें, इससे भी माइग्रेन से बचाव किया जा सकता है।

(साभार)


हाइड्रोजन युक्त पानी पीने के हैं कई फायदे, आइए जानते है इससे होने वाले स्वास्थ्य लाभ

अच्छी सेहत के लिए पौष्टिक आहार का सेवन जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है दिनभर में खूब पानी पीते रहना। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को दिनभर में तीन-चार लीटर तक पानी पीते रहने की सलाह देते हैं। पानी की मात्रा के साथ-साथ इसकी गुणवत्ता का ध्यान रखना भी आपके लिए बहुत आवश्यक हो जाता है। जिस तरह से जल में अशुद्धियां बढ़ती जा रही हैं, स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को ये सुनिश्चित करना चाहिए कि आप साफ और स्वच्छ जल का ही सेवन करें।

हाइड्रोजन युक्त और एल्कलाइन पानी को अपने विशेष स्वास्थ्य संबंधी फायदों के लिए दुनिया भर में पहचान मिल रही है। हाइड्रोजन युक्त पानी में फ्री हाइड्रोजन मॉलिक्यूल्स होते हैं, जिन्हें अपने शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए जाना जाता है जो हानिकारक फ्री रेडिकल्स से आपको बचाते हैं। हाइड्रोजन युक्त पानी और इससे होने वाले स्वास्थ्य लाभ का चर्चा होती रहती है, आइए इससे होने वाले स्वास्थ्य लाभ के बारे में जानते हैं।

हाइड्रोजन युक्त पानी पीने के फायदे

हाइड्रोजन (एच2) के कई फायदे हो सकते हैं। माना जाता रहा है कि है कि पानी में अतिरिक्त एच2 मिलाने से आपके स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है। कई गंभीर और क्रोनिक बीमारियों के खतरे को कम करने में भी इससे लाभ देखा गया है। लिवर कैंसर से पीड़ित 49 लोगों पर किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि रेडिएशन थेरेपी के दौरान 6 सप्ताह तक हाइड्रोजन युक्त पानी पीने से उपचार के दौरान जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है। हाइड्रोजन युक्त पानी रेडिएशन के दुष्प्रभावों को कम करने में भी आपके लिए मददगार हो सकता है।
इतना ही नहीं इसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटीएजिंग और एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण भी होते हैं जिन्हें सेहत के लिए बहुत लाभकारी माना जाता रहा है।
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एंटीऑक्सीडेंट गुण बढ़ाते हैं इम्युनिटी
हाइड्रोजन युक्त पानी में एंटीऑक्सीडेंट हो सकते हैं। एंटीऑक्सीडेंट ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को रोकने में मदद करते हैं। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कैंसर जैसी कई प्रकार की गंभीर और क्रोनिक बीमारियों को कम करने के लिए भी जाना जाता है। एंटीऑक्सीडेंट आपके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं जिससे संक्रामक बीमारियों की स्थिति में हमारा शरीर इससे अच्छे से मुकाबलाकर पाता है।

जिस तरह से दुनियाभर में कई प्रकार की संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है, ऐसे में इम्युनिटी को बढ़ाने के लिए आप पौष्टिक आहार के साथ-साथ पानी की गुणवत्ता पर ध्यान देकर भी लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

त्वचा की दिक्कतें भी होती हैं दूर
हाइड्रोजन युक्त पानी अपने एंटीऑक्सीडेंट गुणों के साथ एंटी-एजिंग गुणों के लिए भी जाना जाता है। त्वचा को स्वस्थ रखने और त्वचा में निखार लाने के लिए भी आप हाइड्रोजन युक्त पानी का सेवन कर सकते हैं। हाइड्रोजन युक्त पानी रक्त प्रवाह और ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ावा देने में मदद करती है।

एंटी-इन्फ्लेमेटरी प्रभावों के फायदे
हाइड्रोजन युक्त पानी में एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण भी होते हैं, ये लाइफस्टाइल से संबंधित कई तरह की बीमारियों जैसे डायबिटीज, मोटापा और फेफडों की समस्याओं को कम करने में भी फायदेमंद है। शरीर में इन्फ्लेमेशन बढ़ने के साथ क्रोनिक बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। कम उम्र से ही एंटी-इन्फ्लेमेटरी चीजों के सेवन और हाइड्रोजन युक्त पानी पीने की आदत बनाकर आप इन बीमारियों से बचाव कर सकते हैं।


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