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वजन को कंट्रोल में रखने के लिए अपनाएं ये उपाय, वेट लॉस करने में करेंगे मदद 

Category Archives: जीवन शैली

वजन को कंट्रोल में रखने के लिए अपनाएं ये उपाय, वेट लॉस करने में करेंगे मदद 

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर किसी के पास जिम जाने का समय नहीं होता। लेकिन अच्छी बात यह है कि बिना जिम जाए भी आप कुछ उपाय करके वजन कंट्रोल कर सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, शारीरिक रूप से सक्रिय रहना संपूर्ण फिटनेस के लिए जरूरी है। अगर आप जिम नहीं जा सकते हैं तो रोजाना कुछ समय निकालकर वॉकिंग-रनिंग जैसे हल्के स्तर के अभ्यास कर सकते हैं। इसके अलावा वजन कम करने के लिए कुछ अन्य उपायों का पालन करना आपके लिए लाभप्रद हो सकता है।

कैलोरी इंटेक कम कर दें

डॉक्टर बताते हैं, वजन कम करने का सबसे मुख्य सिद्धांत है कि आप जितनी कैलोरी इंटेक कर रहे हैं उससे ज्यादा बर्न करें। अगर आप प्रतिदिन 500 कैलोरी का इंटेक कम कर देते हैं तो आप हफ्ते में लगभग 0.5 किलो वजन घटा सकते हैं। इसके लिए छोटे प्लेट में खाना खाएं, पोर्शन कंट्रोल का पालन करें। हरी पत्तेदार सब्जियों-फलों का सेवन करके आप वेट लॉस में लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

प्रोटीन का सेवन बढ़ाएं

आहार में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाना भी आपके लिए लाभकारी हो सकता है। प्रोटीन शरीर के मेटाबॉलिज्म दर को 15-30% तक बढ़ाकर भूख को कम करता है। अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि हाई प्रोटीन वाली डाइट लेने वाले लोग बाकी लोगों की तुलना में ज्यादा वजन घटा पाते हैं। प्रोटीन वाली चीजों के लिए अंडे, पनीर और दही खाएं। दाल, सोयाबीन, चिकन ब्रेस्ट या टोफू आदि का सेवन करें।

खूब पानी पिएं 

भरपूर मात्रा में पानी पीते रहना न सिर्फ आपको डिहाइड्रेट होने से बचाता है बल्कि इससे वेट लॉस में भी आप लाभ पा सकते हैं। भोजन करने से पहले 500मिली पानी पीने से भूख कम लगती है और कैलोरी इंटेक कम किया जा सकता है। अध्ययनों से पता चलता है कि 12 हफ्तों तक रोजाना खाने से पहले पानी पीने वाले लोगों ने 2 किलो तक वजन कम किया। दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं, सबसे अच्छा तरीका है सुबह उठकर सबसे पहले गुनगुना पानी पिएं।

इन उपायों को भी बनाएं दिनचर्या का हिस्सा
ज्यादा चीनी का सेवन मोटापा और डायबिटीज जैसी बीमारियों को बढ़ाता है। रोजाना 25 ग्राम से ज्यादा चीनी नहीं खाना चाहिए।
चाय और कॉफी में चीनी की मात्रा कम करें।
इंटरमिटेंट फास्टिंग वजन घटाने के लिए सबसे लोकप्रिय और प्रभावी तरीका है।
अगर आप जिम नहीं जा सकते तो घर के कामों को ही एक्सरसाइज बनाएं। झाड़ू-पोछा जैसे काम से भी कैलोरी बर्न होती है।
वजन को बढ़ने से रोकने के लिए अच्छी नींद लेना भी आवश्यक माना जाता है।


क्या आप भी बढ़ती उम्र के साथ रहना चाहते हैं स्वस्थ और फिट, तो इन एक्सरसाइज को करें अपनी दिनचर्या में शामिल 

उम्र बढ़ने के साथ सेहत का ख्याल रखना और फिट रहना बेहद जरूरी हो जाता है। लेकिन इसके लिए भारी-भरकम वर्कआउट की जरूरत नहीं। कुछ हल्की-फुल्की एक्सरसाइज अपनाकर भी बुजुर्ग अपनी दिनचर्या में स्फूर्ति और स्वास्थ्य बनाए रख सकते हैं। तो आज की इस खबर में हम आपको कुछ ऐसे योगासन के बारे में बताने जा रहे हैं, जिससे आप बढ़ती उम्र में भी काफी एक्टिव नजर आएंगे। इस खबर में कुछ आसान और असरदार एक्सरसाइज बताएंगे, जो घर बैठे की जा सकती है। आइए जानते हैं।

1. वॉकिंग
रोजाना 15-20 मिनट घर के अंदर टहलें।
यदि संभव हो तो बालकनी या छत पर भी वॉक कर सकते हैं।
यह ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है और जोड़ों की जकड़न को कम करता है।

2. सीटेड लेग लिफ्ट्स
कुर्सी पर बैठकर धीरे-धीरे एक पैर को ऊपर उठाएं और फिर नीचे करें।
हर पैर से 10-10 बार दोहराएं।
यह पैरों की मजबूती बढ़ाने और संतुलन बनाए रखने में सहायक है।

3. हाथ और कंधे की हलचल
दोनों हाथों को धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करें।
कंधों को गोल-गोल घुमाएं।
यह हाथों की मजबूती और लचीलेपन को बनाए रखने में मदद करता है।

4. गर्दन की एक्सरसाइज
धीरे-धीरे गर्दन को दाएं-बाएं और ऊपर-नीचे घुमाएं।
इससे गर्दन के दर्द और अकड़न से राहत मिलती है।

5. श्वास व्यायाम
अनुलोम-विलोम और गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज करें।
इससे फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है और मानसिक शांति मिलती है।

6. कुर्सी से उठने-बैठने की एक्सरसाइज
बिना किसी सहारे के धीरे-धीरे कुर्सी से उठें और फिर बैठें।
इसे 5-10 बार करें, यह पैरों को मजबूत बनाने में मदद करता है।

7. एड़ी-पंजों की स्ट्रेचिंग
सीधे खड़े होकर एड़ियों को ऊपर उठाएं और फिर धीरे-धीरे नीचे करें।
यह संतुलन बनाए रखने और रक्त संचार सुधारने में मदद करता है।

सावधानियां:
व्यायाम को धीरे-धीरे और सहज रूप से करें।
जरूरत महसूस हो तो किसी सहारे का उपयोग करें।
यदि किसी प्रकार की असुविधा या दर्द महसूस हो तो तुरंत रुक जाएं।

(साभार)


क्या आपको भी होती है हाथ-पैरों में झुनझुनी, तो जान लीजिये कहीं ये किसी आवश्यक विटामिन की कमी का संकेत तो नहीं 

हमारे शरीर में कई बार ऐसे बदलाव होते हैं, जिनका सही कारण बहुत से लोगों को नहीं पता होता। झुनझुनी भी इन्हीं में से एक आम समस्या है, जिसे लगभग हर किसी ने कभी न कभी अनुभव किया होगा। यह आमतौर पर लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहने या हाथ-पैर दबे रहने की वजह से हो सकती है। हालांकि, इसकी असल वजह के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि शरीर में झुनझुनी होने के पीछे कौन-कौन सी वजहें हो सकती हैं और यह किन समस्याओं का संकेत हो सकता है।

अगर आपको बिना किसी स्पष्ट कारण के हाथों-पैरों में झुनझुनी महसूस होती है, तो यह किसी आवश्यक विटामिन की कमी का संकेत हो सकता है। विशेष रूप से, यह समस्या विटामिन बी12, विटामिन बी6 और विटामिन डी की कमी से जुड़ी हो सकती है।

किन विटामिन की कमी से होती है झुनझुनी?

1. विटामिन बी12 की कमी
यह तंत्रिका तंत्र को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है।
इसकी कमी से नसों में सूजन आ सकती है, जिससे झुनझुनी, कमजोरी और सुन्नपन महसूस हो सकता है।

स्रोत: दूध, दही, अंडे, मछली, चिकन, पनीर, फोर्टिफाइड अनाज।

2. विटामिन बी6 की कमी
यह शरीर में न्यूरोलॉजिकल कार्यों को सुचारू रूप से चलाने में सहायक होता है।
इसकी कमी से हाथ-पैरों में झुनझुनी, चिड़चिड़ापन और कमजोरी हो सकती है।

स्रोत: केले, एवोकाडो, पालक, नट्स, साबुत अनाज, मीट और मछली।

3. विटामिन डी की कमी
यह हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
इसकी कमी से नसों पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे झुनझुनी हो सकती है।

स्रोत: धूप, दूध, अंडे की जर्दी, मशरूम, फोर्टिफाइड फूड्स।

झुनझुनी दूर करने के उपाय
संतुलित आहार लें – अपने भोजन में विटामिन बी12, B6 और डी से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करें।
धूप में समय बिताएं – विटामिन डी की पूर्ति के लिए रोजाना 15-20 मिनट धूप लें।
नियमित व्यायाम करें – ब्लड सर्कुलेशन सुधारने के लिए स्ट्रेचिंग और योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं – हाइड्रेटेड रहने से रक्त प्रवाह सही तरीके से बना रहता है, जिससे झुनझुनी की संभावना कम होती है।
डॉक्टर की सलाह लें – अगर समस्या बनी रहती है, तो मल्टीविटामिन या विटामिन बी12 इंजेक्शन लेने के लिए डॉक्टर से सलाह लें।

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क्या आप भी कई घंटो तक बैठकर करते हैं ऑफिस में काम, तो हो जाएं सावधान, नहीं तो आपकी सेहत को पहुंचा सकता है नुकसान

आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में आलस की समस्या सामने आती ही रहती है। कई बार देखा गया है कि लोगों को काम करते-करते ही बहुत नींद आती है और इस समस्या से काफी परेशान भी रहते हैं। इससे काम भी काफी ज्यादा प्रभावित होता है और धीरे-धीरे प्रोडक्टिविटी भी कम हो ही जाती है। यही नहीं, लंबे समय तक ऑफिस में बैठने से शरीर पर दबाव भी पड़ता है, जिससे कई सारी परेशानियां सामने आने लगती हैं।

ऑफिस में लंबे समय तक बैठकर काम करने से रीढ़ की हड्डी, गर्दन और नर्व्स पर लगातार दबाव पड़ता है, जिससे पोश्चर संबंधी दिक्कतें और नर्व डैमेज का खतरा बढ़ सकता है। आइए जानते हैं कि यह आपकी सेहत को कैसे प्रभावित कर सकता है:

1. गलत पोश्चर से रीढ़ की हड्डी पर असर
अगर आप झुककर या गलत मुद्रा में बैठते हैं, तो रीढ़ की हड्डी का नेचुरल कर्व बिगड़ सकता है। इससे स्लिप डिस्क, सर्वाइकल पेन और लोअर बैक पेन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

2. नर्व कंप्रेशन और ब्लड सर्कुलेशन पर असर
लगातार एक ही स्थिति में बैठे रहने से नर्व्स पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे हाथों और पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन और कमजोरी महसूस हो सकती है। इससे साइटिका और कंप्यूटर नर्व सिंड्रोम जैसी समस्याएं होने का खतरा रहता है।

3. मसल्स और जॉइंट्स की जकड़न
एक ही पोजीशन में अधिक देर तक बैठने से गर्दन, कंधों और पीठ के मसल्स टाइट हो सकते हैं, जिससे स्पोंडिलोसिस और गठिया जैसी परेशानियां हो सकती हैं।

4. मोटापा और हार्ट डिजीज का खतरा
लंबे समय तक बैठे रहने से शरीर की कैलोरी बर्निंग क्षमता कम हो जाती है, जिससे वजन बढ़ सकता है। यह डायबिटीज, हाई बीपी और हार्ट डिजीज जैसी बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकता है।

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रोजाना सुबह खाली पेट पिएं टमाटर का जूस, मिलेंगे कई फायदे

टमाटर का जूस सेहत के लिए बहुत ही कारगर होता है। रोजाना सुबह खाली पेट टमाटर का जूस पीना सेहत के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है। टमाटर में कई जरूरी पोषक तत्व होते हैं, जैसे विटामिन सी, विटामिन ए, पोटेशियम, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट, जो शरीर को डिटॉक्स करने और एनर्जी देने में मदद करते हैं। तो आज की इस खबर में हम आपको बताने जा रहे हैं कि अगर आप अपनी रूटीन में रोजाना के लिए टमाटर का जूस एड कर लेंगे तो जानते  इसे पीने से क्या-क्या फायदे हो सकते हैं। आइए जानते हैं।

1. पाचन को दुरुस्त करता है
टमाटर का जूस फाइबर से भरपूर होता है, जिससे पाचन तंत्र सही तरीके से काम करता है। यह कब्ज, अपच और एसिडिटी की समस्या को दूर करने में मदद करता है।

2. वजन घटाने में सहायक
अगर आप वजन कम करना चाहते हैं, तो टमाटर का जूस बहुत फायदेमंद है। यह कम कैलोरी वाला होता है और मेटाबॉलिज्म को तेज करता है, जिससे फैट बर्न करने में मदद मिलती है। इससे तेजी से आपका वजन भी कम होता है।

3. शरीर को डिटॉक्स करता है
टमाटर का जूस शरीर से विषाक्त पदार्थों (टॉक्सिन्स) को बाहर निकालने में मदद करता है और लिवर को हेल्दी रखता है। इससे त्वचा भी साफ और चमकदार बनती है।

4. दिल को रखता है स्वस्थ
इसमें पोटेशियम और लाइकोपीन नामक एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद करते हैं और हृदय रोगों के खतरे को कम करते हैं।

5. इम्यूनिटी को मजबूत करता है
टमाटर में मौजूद विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को बढ़ाते हैं और सर्दी-खांसी जैसी बीमारियों से बचाते हैं।

6. स्किन और बालों के लिए फायदेमंद
टमाटर का जूस त्वचा को हाइड्रेट रखता है और कील-मुंहासों को दूर करता है। साथ ही, इसमें मौजूद बायोटिन और विटामिन K बालों को मजबूत और घना बनाने में मदद करते हैं।


क्या आप भी इन दिनों खांसी, जुकाम से हैं परेशान? तो इन हेल्दी ड्रिंक्स को करें अपनी दिनचर्या में शामिल, इम्युनिटी होगी मजबूत

सर्दी के मौसम में सेहत को लेकर विशेष सावधानी बरतते रहना जरूरी होता है। खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों के लिए ये मौसम कई प्रकार की चुनौतियां पैदा करने वाला हो सकता है। ठंड के दिनों में इम्यूनिटी काफी कमजोर हो जाती है, यही कारण है कि इन मौसम में सर्दी-जुकाम और बुखार जैसी दिक्कतों का खतरा काफी आम हो जाता है। क्या आप भी इन दिनों खांसी और जुकाम से परेशान हैं?

मौसम परिवर्तन के दौरान सर्दी, खांसी, जुकाम और अन्य संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को मजबूत बनाए रखना बहुत जरूरी होता है। इम्युनिटी को बूस्ट करने के लिए कुछ खास हेल्दी ड्रिंक्स को अपनी दिनचर्या में शामिल करना फायदेमंद हो सकता है।

इम्युनिटी बढ़ाने वाले हेल्दी ड्रिंक्स

हल्दी वाला दूध
हल्दी में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-वायरल गुण शरीर को संक्रमण से बचाने में मदद करते हैं। रात में सोने से पहले हल्दी दूध पीने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है।

आंवला जूस
विटामिन C से भरपूर आंवला शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। रोज सुबह एक गिलास आंवला जूस पीने से मौसमी बीमारियों से बचाव किया जा सकता है।

काढ़ा (हर्बल टी)
तुलसी, अदरक, काली मिर्च, दालचीनी और शहद से बना काढ़ा गले की खराश, सर्दी और जुकाम से राहत दिलाने में असरदार होता है।

नींबू-पानी और शहद
नींबू में मौजूद विटामिन सी शरीर को डिटॉक्स करने के साथ-साथ इम्युनिटी को भी बढ़ाता है। गुनगुने पानी में नींबू और शहद मिलाकर पीने से संक्रमण से बचाव होता है।

अदरक-शहद वाली चाय
अदरक और शहद में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो सर्दी-खांसी और वायरल इंफेक्शन से लड़ने में मदद करते हैं।

गाजर और चुकंदर का जूस
यह जूस शरीर को जरूरी एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन्स प्रदान करता है, जिससे इम्यून सिस्टम को मजबूती मिलती है। अगर आप बदलते मौसम में संक्रमण से बचना चाहते हैं, तो इन हेल्दी ड्रिंक्स को अपनी डेली डाइट में शामिल करें और अपने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्राकृतिक रूप से मजबूत बनाएं।

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क्या आप भी पेट संबंधी बीमारियों से हैं परेशान, तो इन पांच योगासनों की मदद से पा सकते हैं आराम 

खराब खान-पान का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। इसकी वजह से अक्सर लोगों का पाचन तंत्र खराब हो जाता है, जिस कारण खाना पचाने में उन्हें काफी दिक्कत होती है। यदि खाना सही से न पचे तो गैस और कब्ज जैसी परेशानियां शरीर को घेरने लगती हैं।

इन परेशानियों को दूर करने के लिए वैसे तो तमाम दवाएं बाजार में आती हैं, लेकिन आप बिना दवाइयों के सिर्फ योग करके भी गैस और कब्ज जैसी गंभीर दिक्कतों को दूर कर सकते हैं। हम यहां आपको ऐसे ही योगासनों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो पेट से संबंधी परेशानियों को दूर करने में मददगार हैं।

वज्रासन

पेट से संबंधी परेशानियों को दूर करने के लिए ये सबसे असरदार योगासन माना जाता है। इसको आप खाने के बाद भी कर सकते हैं।
खाने के बाद 5-10 मिनट इस आसन में बैठने से पाचन सुधरता है।
इस आसन में बैठने से गैस और एसिडिटी की परेशानी काफी हद तक कम हो जाती है।

पवनमुक्तासन

यदि आपके पेट में काफी ज्यादा गैस बनती है तो ये योगासन आपके काम आएगा।
इसके लिए जमीन पर सबसे पहले लेट जाएं।
जमीन पर लेटने के बाद घुटनों को छाती की ओर दबाएं और कुछ सेकंड रुकें।
इसे करने से कुछ समय बाद से आपको गैस, ब्लोटिंग और पेट दर्द से राहत मिलती है।

भुजंगासन

एसिडिटी दूृर करने के लिए भुजंगासन काफी अच्छा विकल्प माना जाता है।
इसके लिए जमीन पर लेटकर शरीर को कोबरा पोज में ऊपर उठाएं।
ये पेट की चर्बी घटाने और खाने को जल्दी पचाने में मदद करता है।
इससे पाचन तंत्र भी मजबूत बनता है।

अर्ध मत्स्येन्द्रासन

ये योगासन लिवर और किडनी को डिटॉक्स करने में काफी मदद करता है।
इसके लिए जमीन पर बैठकर शरीर को साइड में मोड़ें और गहरी सांस लें।
ये योगासन पाचन क्रिया में सुधार करता है और टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है।

मलासन

यदि पेट में कब्ज है तो इस योगासन को नियमित रूप से करना शुरू कर दें।
इसके लिए स्क्वाट पोज में बैठकर दोनों हाथों को जोड़ें।
ये योग कब्ज और पेट फूलने की समस्या दूर करता है।
इस योगासन से मेटाबॉलिज़्म भी सही होता है।

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क्या आपको भी रहती है लंबे समय तक हिचकी की समस्या, तो जान लीजिये कहीं ये किसी गंभीर बीमारी का संकेत तो नहीं

आप भी कभी न कभी हिचकियों से जरूर परेशान रहे होंगे। आमतौर पर मान लिया जाता है कि जब कोई आपको याद कर रहा होता है तो हिचकियां आती हैं, पर क्या इस मान्यता को मेडिकल साइंस भी पुष्टि देता है? या फिर हिचकी आना किसी बीमारी का संकेत है?

आम धारणाओं से इतर हिचकी आने की स्थिति को मेडिकल साइंस एक अलग तरीके से देखता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि डायाफ्राम में बार-बार होने वाली ऐंठन या अचानक होने वाली किसी समस्या के कारण आपको हिचकी आती है। डायाफ्राम वो मांसपेशी है जो आपकी छाती को पेट से अलग करती है और सांस लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आपके डायाफ्राम में ऐंठन के कारण कई बार वोकल कॉर्ड अचानक बंद हो जाते हैं, जिससे “हिच” ध्वनि उत्पन्न होती है। ये तो इसका एक कारण है ही साथ ही कई बार अधिक भोजन करने, शराब या कार्बोनेटेड पेय पीने या अचानक किसी उत्तेजना के कारण भी आपको हिचकी आ सकती है। कुछ मामलों में, हिचकी किसी अंतर्निहित चिकित्सा समस्या का संकेत हो सकती है।

क्यों आती है हिचकी?

ज्यादातर लोगों में हिचकी केवल कुछ मिनटों तक ही रहती है और खुद से ही चली जाती है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं अगर आपको लंबे समय तक हिचकी की दिक्कत बनी रहती है और ये ठीक न हो रही हो तो इस बारे में डॉक्टर से संपर्क जरूर कर लेना चाहिए।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कई बार ज्यादा मसालेदार या गर्म भोजन करने से पेट में जलन और डायाफ्राम में ऐंठन हो सकती है जिसके कारण भी आपको हिचकी आती है। इसके अलावा अचानक तापमान में परिवर्तन, तनाव या घबराहट, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं भी हिचकी का कारण बन सकती हैं।

कहीं ये किसी गंभीर बीमारी का संकेत तो नहीं?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वैसे तो हिचकी आने को कोई बीमारी नहीं माना जाता है हालांकि कुछ गंभीर स्थितियों में हिचकी को इसका एक लक्षण जरूर देखा गया है इसलिए लंबे समय तक बनी रहने वाली हिचकी को अनदेखा नहीं करना चाहिए।

लंबे समय तक हिचकी आने का एक कारण वेगस या फ्रेनिक तंत्रिकाओं में होने वाली कोई क्षति या जलन की दिक्कत हो सकती है। ये तंत्रिकाएं डायाफ्राम की मांसपेशियों को ठीक रखने के लिए जरूरी मानी जाती हैं। आपकी गर्दन में थायरॉयड ग्रंथि या किसी सिस्ट के कारण तंत्रिकाएं प्रभावित हो सकती हैं, जिसपर ध्यान देते रहना और इलाज प्राप्त करना जरूरी हो जाता है।

मेटाबॉलिज्म संबंधित समस्याएं

जब आपका मेटाबॉलि्ज्म ठीक से काम नहीं कर रहा होता है, तो इसके कारण भी लंबे समय तक हिचकी आ सकती है। मधुमेह, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन और किडनी जैसी बीमारियों के कारण भी लंबे समय तक हिचकी आने की दिक्कत महसूस होती रह सकती है। अगर आपको मेटाबॉलिज्म की समस्या है तो इसका समय रहते उपचार प्राप्त करना आवश्यक हो जाता है।

हिचकी से बचाव और रोकथाम के आसान उपाय

हिचकी रोकने का कोई निश्चित तरीका नहीं है, लेकिन अगर आपकी हिचकी कुछ मिनटों से ज्यादा समय तक बनी रहती है तो कुछ उपायों का मदद से इसमें आराम पाया जा सकता है।
बर्फ के पानी से गरारे करें, अपनी सांस रोककर रखें और ठंडा पानी पिएं इससे आपको आराम मिल सकती है। हिचकी से बचाव के लिए कुछ उपाय आपके लिए मददगार हो सकते हैं।

धीरे-धीरे और अच्छी तरह चबाकर खाएं।
अत्यधिक मसालेदार और एसिडिक खाद्य पदार्थों से बचें।
गैस बनाने वाले पेय पदार्थों (सोडा, कोल्ड ड्रिंक्स) से परहेज करें।
पानी धीरे-धीरे पिएं, विशेष रूप से हल्का गुनगुना पानी।
गहरी सांस लें और थोड़ी देर तक रोकें, फिर धीरे-धीरे छोड़ें।
अगर हिचकी लंबे समय तक बनी रहती है, तो डॉक्टर से परामर्श करें।

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क्या आप भी करते हैं खाली पेट दूध या दही का सेवन, तो जान लीजिये इसके फायदे और नुकसान 

खाली पेट दूध या दही का सेवन व्यक्ति के पाचन तंत्र और शरीर की प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है। दोनों के लाभ और हानियां अलग-अलग हो सकते हैं। खाली पेट डेयरी प्रोडक्ट्स के सेवन से पेट संबंधित कई समस्याएं आ सकती हैं। जैसे की पेट फूलना, एसिडिटी आदि। वहीं, कुछ लोगों को खाली पेट दूध पीने से गैस और एसिडिटी से राहत मिलती है। नाश्ते में दही खाना काफी अच्छा भी माना जाता है। हालांकि, दही और दूध के सेवन के लाभ और नुकसान दोनों ही है। आज की इस खबर में हम आपको बताने जा रहे हैं कि आइए जानें कि आपके लिए कौन सा बेहतर विकल्प रहेगा।

1. खाली पेट दूध पीने के फायदे और नुकसान

फायदे:
ऊर्जा बढ़ाता है – दूध में कैल्शियम, प्रोटीन और आवश्यक पोषक तत्व होते हैं, जो दिन की शुरुआत के लिए अच्छा विकल्प बन सकते हैं।
हड्डियों को मजबूत बनाता है – इसमें मौजूद कैल्शियम और विटामिन D हड्डियों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं।
गैस्ट्रिक समस्याओं में आराम – अगर आपको एसिडिटी की समस्या नहीं है, तो दूध पेट को ठंडक पहुंचाने में मदद कर सकता है।

नुकसान:
एसिडिटी बढ़ा सकता है – कुछ लोगों के लिए खाली पेट दूध पीना एसिडिटी और गैस की समस्या को बढ़ा सकता है, खासकर यदि वे लैक्टोज इन्टॉलरेंस से ग्रसित हैं।
पाचन धीमा कर सकता है – दूध में मौजूद प्रोटीन और फैट, कुछ लोगों के लिए खाली पेट लेने पर पाचन क्रिया को धीमा कर सकता है।
सर्दी-खांसी की समस्या – जिन लोगों को बलगम बनने की प्रवृत्ति होती है, उनके लिए खाली पेट दूध पीना नुकसानदायक हो सकता है।

कब पीना चाहिए?

अगर आपका पाचन तंत्र सही तरीके से काम कर रहा है, तो आप सुबह दूध पी सकते हैं, लेकिन इसे हल्के नाश्ते के बाद लेना ज्यादा फायदेमंद होगा।

2. खाली पेट दही खाने के फायदे और नुकसान

फायदे:
पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है – दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स (गुड बैक्टीरिया) पाचन को बेहतर बनाते हैं और पेट की समस्याओं को दूर करने में मदद करते हैं।
इम्यूनिटी बढ़ाता है – इसमें लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया होते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में सहायक होते हैं।
त्वचा और बालों के लिए लाभदायक – दही में विटामिन B, कैल्शियम और प्रोटीन होते हैं, जो त्वचा और बालों के लिए फायदेमंद होते हैं।

नुकसान:
एसिडिटी बढ़ा सकता है – कुछ लोगों को खाली पेट दही खाने से एसिडिटी या गैस की समस्या हो सकती है।
ठंड बढ़ा सकता है – सुबह खाली पेट दही का सेवन सर्दी-जुकाम की संभावना को बढ़ा सकता है, विशेष रूप से सर्दियों में।
खट्टी दही नुकसानदायक हो सकती है – अत्यधिक खट्टी दही खाली पेट लेने से पेट में जलन या गैस की समस्या हो सकती है।

कब खाना चाहिए?

दही को खाली पेट खाने से बचें और इसे भोजन के साथ या दोपहर में लेना बेहतर रहेगा।

दूध या दही, कौन सा बेहतर है?
अगर आपको गैस, एसिडिटी या लैक्टोज इन्टॉलरेंस की समस्या है, तो खाली पेट दूध न लें।
ठंड के मौसम में खाली पेट दही खाने से बचें, क्योंकि यह ठंड बढ़ा सकता है।
खाली पेट दूध की बजाय हल्के नाश्ते के साथ लेना बेहतर होता है।
दही को दिन के समय या भोजन के साथ खाने से अधिक लाभ मिलेगा।
अगर आपकी पाचन क्रिया सही है, तो आप दोनों में से कोई भी विकल्प चुन सकते हैं, लेकिन हल्के नाश्ते के साथ दूध या भोजन के साथ दही लेना सबसे अच्छा रहेगा।

(साभार)


क्या आपके बच्चों को भी है पैक्ड चिप्स खाने का शौक, तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकती है कई गंभीर समस्याएं

बच्चों को पैक्ड चिप्स खाने से रोकना उनकी सेहत के लिए बेहद जरूरी है। इन चिप्स में कई ऐसे तत्व होते हैं, जो बच्चों के विकास और सेहत के लिए हानिकारक हो सकते हैं। बच्चों को पैक्ड चिप्स खिलाने से मोटापा, हृदय रोग, पाचन समस्याएं और पोषण की कमी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। इसलिए बेहतर होगा कि आप हेल्दी स्नैक्स का चुनाव करें और उन्हें घर के बने पोषक आहार दें, जिससे वे स्वस्थ और मजबूत बनें। आज की इस खबर में हम आपको बताने जा रहे हैं कि बच्चों को पैक्ड चिप्स देने से कौन सी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

आइए जानते हैं कि बच्चों को पैक्ड चिप्स खिलाने के कौन से नुकसान हो सकते हैं

1. ट्रांस फैट और अधिक तेल
पैक्ड चिप्स को डीप फ्राई किया जाता है, जिससे इनमें ट्रांस फैट और सैचुरेटेड फैट की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। यह मोटापा, हृदय रोग और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है।

2. ज्यादा नमक (सोडियम) की मात्रा
चिप्स में बहुत ज्यादा नमक (सोडियम) होता है, जो बच्चों के लिए नुकसानदायक है। अधिक नमक खाने से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और किडनी पर असर पड़ सकता है।

3. हानिकारक प्रिजर्वेटिव और केमिकल्स
पैक्ड चिप्स को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए प्रिजर्वेटिव और आर्टिफिशियल फ्लेवर मिलाए जाते हैं, जो बच्चों के पाचन और मानसिक विकास पर बुरा असर डाल सकते हैं।

4. पोषण की कमी
पैक्ड चिप्स में कोई विटामिन, फाइबर या प्रोटीन नहीं होता। यह बच्चों को पेट भरने का अहसास तो कराता है, लेकिन संतुलित पोषण नहीं देता।

5. कैंसरकारी पदार्थों का खतरा
कई चिप्स में एक्रिलामाइड नामक केमिकल पाया जाता है, जो ज्यादा तापमान पर तलने से बनता है और कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है।

6. पाचन संबंधी दिक्कतें
चिप्स में फाइबर नहीं होता, जिससे बच्चों को कब्ज और पेट संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

7. लत लगने का खतरा
पैक्ड चिप्स में मौजूद अधिक नमक, मसाले और आर्टिफिशियल फ्लेवर बच्चों को इसकी आदत डाल सकते हैं, जिससे वे हेल्दी फूड से दूर हो सकते हैं।

क्या खिलाएं चिप्स की जगह?
घर पर बने बेक्ड चिप्स (शकरकंद, केला, मखाना)
भुने हुए चने, मखाने और मूंगफली
फ्रूट सलाद, नट्स और सीड्स
घर में बने कुरकुरे स्नैक्स जैसे पोहा कटलेट, वेज पकोड़े

(साभार)


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