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क्या आप भी करते हैं इंस्टेंट नूडल्स का अधिक सेवन, तो हो जाए सावधान, सेहत को पहुंचा सकता है नुकसान 

Category Archives: जीवन शैली

क्या आप भी करते हैं इंस्टेंट नूडल्स का अधिक सेवन, तो हो जाए सावधान, सेहत को पहुंचा सकता है नुकसान 

आजकल भारतीयों के खानपान में भारी बदलाव देखा जा रहा है। पहले जहां लोग पारंपरिक भारतीय भोजन को प्राथमिकता देते थे, वहीं अब चाइनीज, इटैलियन, मैक्सिकन और जापानी व्यंजन भी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। इनमें से इंस्टेंट नूडल्स (रेमन) की मांग भारतीय बाजार में सबसे अधिक बढ़ी है। बच्चे, युवा और व्यस्त जीवनशैली वाले लोग इसे आसानी से बना सकने के कारण खूब पसंद करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इंस्टेंट नूडल्स का अधिक सेवन आपकी सेहत को कितना नुकसान पहुंचा सकता है?

अध्ययन बताते हैं कि इंस्टेंट नूडल्स का अत्यधिक सेवन हृदय रोग, डायबिटीज, स्ट्रोक और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। खासतौर पर महिलाओं के लिए इसका खतरा अधिक होता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि यह स्वादिष्ट लेकिन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भोजन किस तरह हमारे शरीर को प्रभावित करता है।

बेलर यूनिवर्सिटी का अध्ययन

इंस्टेंट नूडल्स मूल रूप से जापान और दक्षिण कोरिया से आए हैं, लेकिन अब यह भारतीय बाजार में बड़े पैमाने पर उपलब्ध हैं। बच्चे और युवा इसे बड़ी मात्रा में खाते हैं, क्योंकि यह झटपट बन जाता है और स्वादिष्ट भी होता है। लेकिन इसमें मौजूद सोडियम, अनहेल्दी फैट्स और प्रिजर्वेटिव्स शरीर पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।

बेलर यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि जो लोग अक्सर इंस्टेंट नूडल्स का सेवन करते हैं, उनमें मेटाबॉलिक सिंड्रोम विकसित होने की संभावना अधिक होती है। मेटाबॉलिक सिंड्रोम ऐसी स्वास्थ्य स्थितियों का समूह है, जो आगे चलकर हृदय रोग, डायबिटीज और स्ट्रोक के खतरे को बढ़ा सकता है।

कितनी मात्रा में इंस्टेंट नूडल्स नुकसानदायक?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति सप्ताह में दो से तीन बार इंस्टेंट नूडल्स का सेवन करता है तो हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और टाइप-2 डायबिटीज जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है। बार-बार इंस्टेंट नूडल्स खाने से ये नुकसान हो सकते हैं,

पाचन तंत्र पर असर

इनमें मौजूद रिफाइंड मैदा (मैदा आधारित नूडल्स) पेट में आसानी से नहीं पचता, जिससे गैस, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

हाई ब्लड प्रेशर

इंस्टेंट नूडल्स में बहुत अधिक मात्रा में सोडियम (नमक) होता है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और हृदय रोगों का खतरा हो सकता है।

वजन बढ़ना

इसमें मौजूद अनहेल्दी फैट और ट्रांस फैट शरीर में अनावश्यक चर्बी बढ़ाते हैं, जिससे मोटापे की समस्या हो सकती है।

पोषक तत्वों की कमी

यह भोजन केवल स्वादिष्ट होता है लेकिन इसमें कोई आवश्यक विटामिन, प्रोटीन, फाइबर या मिनरल्स नहीं होते, जिससे शरीर को सही पोषण नहीं मिल पाता।

महिलाओं के लिए ज्यादा खतरनाक क्यों है इंस्टेंट नूडल्स?

अध्ययन से यह भी पता चला कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं के लिए इंस्टेंट नूडल्स ज्यादा हानिकारक हो सकते हैं। इसका कारण है कि महिलाओं में हार्मोनल संतुलन प्रभावित होता है। इंस्टेंट नूडल्स में मौजूद प्रिजर्वेटिव्स और सोडियम महिलाओं के हार्मोन संतुलन पर बुरा असर डाल सकते हैं।
पीरियड्स और पीसीओएस (PCOS) की समस्या बढ़ सकती है।
अधिक सोडियम और अनहेल्दी फैट पीरियड्स में दर्द, अनियमितता और पीसीओएस जैसी समस्याओं को बढ़ा सकता है।
गर्भवती महिलाओं को इंस्टेंट नूडल्स से बचना चाहिए, क्योंकि इसमें मौजूद केमिकल्स और प्रिजर्वेटिव्स भ्रूण के विकास को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

इंस्टेंट नूडल्स का हेल्दी विकल्प

अगर आपको इंस्टेंट नूडल्स बहुत पसंद हैं, लेकिन सेहत का ध्यान भी रखना चाहते हैं तो आप कुछ स्वस्थ विकल्प अपना सकते हैं-
घर पर हेल्दी नूडल्स बनाएं। मैदा की जगह गेहूं या बाजरे के नूडल्स का इस्तेमाल करें।
अधिक सब्जियां डालें ताकि पोषण बढ़े।
प्रोसेस्ड मसालों की बजाय घर के बने मसाले और हर्ब्स का उपयोग करें।
हेल्दी स्नैक्स का चुनाव करें। पोहा, उपमा, इडली, दलिया जैसे विकल्प इंस्टेंट नूडल्स से बेहतर हैं।
इंस्टेंट नूडल्स कम करने के लिए छोटे-छोटे बदलाव करें। हफ्ते में सिर्फ एक बार ही खाएं और बाकी समय हेल्दी फूड अपनाएं।

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इन आदतों से पड़ता है सेहत पर बुरा असर, सेहतमंद रहने के लिए अपनी दिनचर्या में करें सुधार

शरीर को स्वस्थ और फिट रखने के लिए आहार और लाइफस्टाइल को ठीक रखना बहुत आवश्यक माना जाता है। आप दिनभर में क्या करते हैं, क्या खाते हैं और कैसा दिन बिताते हैं इसका सेहत पर सीधा असर होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, विशेषरूप से आप दिन की शुरुआत कैसे करते हैं ये आपकी सेहत से सीधा जुड़ा हुआ है। यही कारण है स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को दिन की शुरुआत में या खाली पेट पौष्टिक चीजें खाने-पीने की सलाह दी जाती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आलस भगाने के लिए हम ऐसी कई आदतों को अपना लेते हैं, जिनका हमारे स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। सुबह की कुछ आदतें स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं, इससे आप बीमार हो सकते हैं।

आइए ऐसी ही कुछ आदतों के बारे में जानते हैं जिसका सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है।

अच्छी सेहत के लिए बनाइए अच्छी आदतें

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर आप सुबह उठने के बाद नाश्ता करके दोबारा सो जाते हैं तो इससे पाचन तंत्र कमजोर हो सकता है और आप पेट से जुड़ी कई समस्याओं के शिकार हो सकते हैं। अक्सर लोग सुबह उठते ही मोबाइल या टीवी देखने लगते हैं। ये आदत छोटी लगती है, लेकिन यह आपको उम्र से पहले बूढ़ा बना रही है।

बहुत अधिक मोबाइल का प्रयोग आंखों और मस्तिष्क पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। इससे नींद की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।

खाली पेट चाय या कॉफी पीने से बचिए

इसके अलावा कई लोग अपने दिन की शुरुआत चाय या कॉफी के सेवन से करते हैं। ऐसा करने से शरीर में कैफीन की मात्रा बढ़ जाती है, जो दिल और ब्लड प्रेशर पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। ये आदत सेहत के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है।

सुबह उठकर खाली पेट चाय या कॉफी पीने से सेहत को नुकसान पहुंचता है। खाली पेट चाय या कॉफी पीना आपके पाचन स्वास्थ्य के लिए भी ठीक नहीं है, इस आदत के कारण गैस कब्ज और अपच की दिक्कत हो सकती है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जुगल किशोर कहते हैं, सेहतमंद रहने के लिए अपनी दिनचर्या में सुधार करें। सुबह उठते ही फोन देखने की आदत खतरनाक है इसके बजाय अखबार या पुस्तकें पढ़ें। स्वस्थ रहना चाहते हैं तो व्यायाम जरूर करें। इससे मस्तिष्क को ऊर्जा मिलेगी और आपका दिन अच्छी तरह से शुरू होगा। कई लोग सुबह उठकर नहाने से बचते हैं और मुंह-हाथ धोकर काम पर चले जाते हैं। नियमित तौर पर इस आदत को अपनाने से त्वचा में संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है, साथ ही आप कई संक्रामक रोगों का शिकार हो सकते हैं।

अगर आप अपनी दिनचर्या और दैनिक आदतों में सुधार कर लेते हैं तो इससे सेहत को ठीक रहना आसान हो सकता है।

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क्या आप भी अक्सर दांतों में दर्द और सड़न से रहते हैं परेशान, तो इन घरेलू नुस्खों की मदद से पा सकते हैं आराम 

आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में इंसान अपना ध्यान रखना भूल जाता है। ऐसे में उसे खुद नहीं पता होता कि क्या खानपान उसके लिए बेहतर है और क्या नहीं। हालांकि, बीमारियां अपनी भूमिका निभाने से पीछे नहीं हटती हैं। आज के लोगों में अक्सर दांतों में कैविटी लगने की परेशानी सामने आती है। यह हर उम्र के इंसान को हो जाती है और इसके साथ ही ओरल हेल्थ पर भी काफी असर पड़ता है। हालांकि, दांतों में कैविटी लगने की परेशानी ज्यादातर छोटे बच्चों को प्रभावित करती है। बच्चे बड़े चाव से मीठा खाते हैं और ब्रश करने में आनाकानी करते हैं, जिसकी वजह से दांतों में तेज दर्द और सूजन हो जाती है। ऐसे में पेरेंट्स डॉक्टर को दिखाने के लिए भागते हैं। तो आज की इस खबर में हम आपको उन घरेलू नुस्खों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका इस्तेमाल करके आप इस परेशानी से निजात पा सकते हैं।

नमक पानी के साथ करें कुल्ला
दांतों में सड़न और दर्द से निजात पाने के लिए सबसे आसान घरेलू उपाय है कि आप नमक पानी का घोल लेकर रोजाना कुल्ला करें। इस प्रक्रिया से दांतों में मौजूद बैक्टीरिया मर जाते हैं और मसूड़ों की सूजन भी काफी कम हो जाती है। ऐसे में आप को कुछ दिनों में ही दांतों के दर्द से निजात मिल जाता है।

लहसुन का पेस्ट है कारगर
मुंह से बदबू और सड़न को रोकने के लिए लहसुन काफी कारगर है। इसके लिए आप लहसुन पीसकर उसका पेस्ट बना लें और इसे दर्द हो रहे दांतों पर लगा लें। इससे आपको जल्दी ही सड़न और सूजन से निजात मिल जाता है। आप लहसुन का पेस्ट बनाने की जगह इसे चबा भी सकते हैं।

लौंग का तेल
लौंग दांतों के दर्द और सड़न के लिए काफी कारगर इंग्रीडीयंट है। लौंग में एनाल्जेसिक और एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो कैविटी को कम करने में काफी मददगार होते हैं। इसके लिए आपको लौंग के तेल में कॉटन डुबोकर इसे प्रभावित दांतों के नीचे दबाना होगा।

ऑयल पुलिंग करें
मुंह की बदबू से लेकर दांतों की सड़न को कम करने के लिए आप ऑयल पुलिंग का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए आपको नारियल का तेल इस्तेमाल करने की जरूरत है। इसके लिए आप नारियल का तेल आधा चम्मच लें और इसे अपनी दांतों में रखें, जिससे यह आपके मुंह में हर जगह फैल जाए। फिर 20 मिनट के बाद कुल्ला कर लें। इससे जल्द ही कैविटी से निजात भी मिल जाएगा।

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बदलते मौसम के साथ बढ़ रही है सर्दी-जुकाम की शिकायत, तो हो सकता है फ्लू संक्रमण का संकेत

फरवरी की शुरुआत होते ही राजधानी दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर भारत के ज्यादातर राज्यों में मौसम तेजी से बदलने लगा है। दिन में तेज धूप और सुबह-शाम हल्की सर्दी वाला ये मौसम आपकी सेहत के लिए दिक्कतें बढ़ा सकता है। दिल्ली-एनसीआर के कई अस्पतालों से मिल रही जानकारियों के मुताबिक मौसम में हो रहे बदलाव के साथ सीजनल फ्लू और इससे संबंधित बीमारियों के मामले में भी वृद्धि देखी जा रही है। बड़ी संख्या में लोग सर्दी-जुकाम, बुखार और गले में खराश की शिकायत के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं।

डॉक्टर बताते हैं, मौसम बदलते ही लोगों के बीमार पड़ने का सबसे बड़ा कारण इन्फ्लूएंजा संक्रमण को माना जा रहा है। इन्फ्लूएंजा के वायरस अनुकूल मौसम में तेजी से बढ़ने शुरू हो जाते हैं जिसके कारण बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक कोई भी संक्रमित हो सकता है। इसके लक्षणों में बुखार, सिर और शरीर में दर्द, खांसी, बंद नाक या नाक बहने के साथ थकान और कमजोरी की समस्या हो सकती है।

आमतौर पर इन्फ्लूएंजा का संक्रमण कुछ दिनों में खुद से या फिर हल्के उपचार के माध्यम से ठीक हो जाता है, पर अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्या या गर्भवती महिलाओं में इसके कारण स्वास्थ्य जटिलताओं के बढ़ने का खतरा हो सकता है। फ्लू संक्रमण से बचाव को लेकर सभी लोगो को निरंतर सावधानी बरतते रहना चाहिए।

मौसमी बुखार या सीजनल फ्लू का खतरा

डॉक्टर कहते हैं, मौसमी बुखार या सीजनल फ्लू एक आम स्वास्थ्य समस्या है, जो मौसम बदलने पर अधिक देखने को मिलती है। यह एक वायरल संक्रमण है जो विशेष रूप से बारिश, सर्दी तथा वसंत ऋतु में फैलता है। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली, कुपोषण के शिकार या फिर जिन लोगों को पहले से कोई गंभीर बीमारी हो उन लोगों में इस प्रकार के संक्रमण का जोखिम अधिक होता है।

इसके अलावा संक्रमित व्यक्ति के संपर्क या छींकने और खांसने से निकलनी वाली ड्रॉपलेट्स के संपर्क में आने से भी आप इस संक्रमण के शिकार हो सकते हैं। मौसमी बुखार के लक्षण हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं। ये आपको किस तरह से बीमार कर सकता है ये व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली पर निर्भर करता है।

कैसे जाने कहीं आप भी तो नहीं हो गए हैं शिकार?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मौसम बदलने पर फ्लू के लक्षणों को लेकर सभी को गंभीरता से ध्यान देते रहने की आवश्यकता है।
बुखार की समस्या (हल्के से लेकर तेज बुखार)
सिरदर्द और बदन दर्द
गले में खराश और दर्द की दिक्कत।
नाक बंद होना या बहना (सर्दी-जुकाम)
खांसी (सूखी या बलगम वाली)
शरीर में कमजोरी और थकान
सांस लेने में कठिनाई (गंभीर मामलों में)
यदि बुखार 102°F से अधिक हो, सांस लेने में परेशानी हो या लक्षण 7-10 दिनों से अधिक बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

इन लोगों में गंभीर समस्याओं का भी हो सकता है खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वैसे तो सीजनल फ्लू आम कुछ सामान्य उपायों और दवाओं से आसानी से ठीक हो जाता है, हालांकि कुछ लोगों में ये गंभीर बीमारियों को बढ़ाने वाली समस्या भी हो सकती है। जिन लोगों को पहले से ही अस्थमा, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) या फिर श्वसन समस्या रही हो ऐसे लोगों में फ्लू का संक्रमण भी स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ाने वाला हो सकता है।
किडनी, लिवर, न्यूरोलॉजिकल विकार या फिर हृदय या रक्त वाहिकाओं की बीमारी वाले लोगों में भी फ्लू संक्रमण दिक्कतों को बढ़ाने वाला हो सकता है।
जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर है जैसे एचआईवी/एड्स, कैंसर, डायबिटीज के शिकार हैं उनमें भीगंभीर लक्षण विकसित हो सकते हैं।
सिकल सेल रोग जैसे रक्त विकार से पीड़ित लोगों में भी दिक्कतें हो सकती हैं।
5 वर्ष से कम या 65 वर्ष से अधिक उम्र के हैं।
गर्भवती या मोटापे का शिकार हैं।

फ्लू के संक्रमण से बचाव के लिए क्या उपाय करने चाहिए?

मौसमी बुखार से बचने के लिए कुछ सावधानियां बरतना और जीवनशैली में बदलाव आवश्यक है।
स्वास्थ्यवर्धक आहार और प्रतिरक्षा बढ़ाने वाले उपाय करें।
विटामिन सी और डी से भरपूर आहार (नींबू, संतरा, आंवला, मशरूम) का सेवन करें।
प्रोटीन युक्त आहार (दूध, दही, अंडा, मूंगफली, दालें) का सेवन शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है।
हर्बल टी और काढ़ा (अदरक, तुलसी, हल्दी, काली मिर्च) से फ्लू के लक्षणों से राहत मिल सकती है।
खूब पानी पिएं (8-10 गिलास प्रतिदिन)। हाइड्रेशन बनाए रखने से सेहत में सुधार होता है।
हाथों को साबुन या सैनिटाइजर से साफ करते रहें।
आंख, नाक और मुंह को बार-बार न छुएं और सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनें।
हल्के बुखार और दर्द के लिए पैरासिटामोल लें। अगर लक्षण बने रहते हैं और 3-4 दिनों में भी आराम न मिले तो डॉक्टर से संपर्क करें।

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क्या आप भी भूख लगने पर खाते हैं बेहिसाब खाना, तो जान लीजिये इससे होने वाले नुकसान 

कई लोगों को सुबह का नाश्ता और दिन का लंच करने के बाद भी तेज की भूख लगती है। वहीं, कई लोगों के साथ ऐसा भी होता है कि पेट भरने के बाद भी भूख लगती है। ऐसे में भूख को नजरअंदाज कर पाना काफी मुश्किल होता है और जो भी सामने दिखता है, उसे तुरंत खाने का मन करता है। इन सब की वजह से वजन भी तेजी से बढ़ने लगता है और पतले होने का सपना आखिर सपना बनकर ही रह जाता है। यही नहीं, ज्यादा खाना खाने की वजह से सेहत को भी नुकसान पहुंचता है और पेट में गैस जैसी समस्या भी उत्पन्न होने लगती है। तो आज की इस खबर में हम आपको बेहिसाब खाने के पीछे के कुछ ठोस कारणों के बारे में बताने जा रहे हैं और यह भी कि ज्यादा भूख लगने की वजह से आपकी हेल्थ को क्या नुकसान पहुंचता है। आइए जानते हैं।

ज्यादा खाना खाने के क्या है नुकसान?

तेजी से वजन बढ़ना- पेट भरने की बाद भी लगातार भूख लगने से हमारे शरीर में ज्यादा ऊर्जा पैदा होने लगती है, जिसकी वजह से तेजी से हमारा वजन बढ़ने लगता है। हमारे शरीर में फुर्ती नहीं रहती और बार-बार थकान महसूस होता है।

शुगर लेवल का बढ़ना- ज्यादा भूख लगने की वजह से हमारे शरीर में इंसुलिन की मात्रा बढ़ जाती है। इसके कारण हमारे शरीर का शुगर लेवल भी बढ़ जाता है। ऐसे में ज्यादा खाना खाने से आपकी सेहत पर गलत असर भी पड़ता है।

दिल की बीमारी- ज्यादा खाना खाने की वजह हमारे शरीर का कोलेस्ट्रॉल लेवल भी बढ़ जाता है। ऐसे में दिल से संबंधित बीमारी होने का खतरा भी बना रहता है।

पेट में गैस बनने की समस्या- ज्यादा खाना खाने की वजह से पेट से जुड़ी समस्याएं भी होने लगती हैं, जिसमें अपाचन संबंधित दिक्कतें शामिल हैं। हालांकि, संतुलित मात्रा में खाना खाकर आप इससे निजात पा सकते हैं।

कम खाना खाने के क्या है फायदे

हाजमे के लिए है अच्छा- अगर आप कम खाना खाते हैं तो यह हाजमे के लिए काफी अच्छा रहता है। कम खाना खाने से लिवर पर कम प्रभाव पड़ता है। ऐसे में सारा खाना आसानी से डाइजेस्ट हो जाता है।

एनर्जी रहती है अच्छी- कम खाना खाने से आपके शरीर में ताकत बनी रहती है और आप ज्यादा एनर्जेटिक महसूस करते हैं। बहुत ज्यादा खाना खाने से आपको थकान महसूस होती है। ऐसे में कम खाना खाने से आपका पेट हमेशा दुरुस्त रहता है।

महिलाओं में ज्यादा भूख लगने के क्या है कारण?
महिलाओं में अक्सर भूख के बाद अतिरिक्त खाने की आदत देखी गई है। वास्तव में पीरियड्स के बाद आखिरी दिनों में भूख तेजी से बढ़ती है। इस समय में शुगर के स्तर को बराबर करना जरुरी होता है इसलिए ज्यादा भूख लगती है।

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क्या आप भी पैरों-टखनों में अक्सर सूजन बने रहने की समस्या से हैं परेशान?तो ना करे अनदेखा, हो सकती है गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं

पैरों-टखनों में सूजन बहुत आम समस्या है, ये किसी को भी हो सकती है। आमतौर पर बहुत ज्यादा पैदल चलने, शारीरिक मेहनत, थकान के कारण आपको ये समस्या हो सकती है जिसे अक्सर चिंता का विषय नहीं माना जाता है। हालांकि अगर आपको अक्सर पैरों में ये दिक्कत बनी रहती है, भले ही आप ज्यादा चल या मेहनत न कर रहे हों तो निश्चित ही ये ऐसा संकेत हो सकता है जिसपर सभी लोगों को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।

पैरों में अक्सर बने रहने वाली सूजन की समस्या कभी-कभी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का भी संकेत हो सकती है। इसे अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कई बार संक्रामक रोगों, किडनी की बीमारी, शरीर में तरल पदार्थों की अधिकता, गर्भावस्था की जटिलताओं के कारण भी आपके पैर सूज सकते हैं। यही कारण है कि इसका समय पर सही निदान और उपचार किया जाना आवश्यक हो जाता है।

क्या आप भी पैरों-टखनों में अक्सर सूजन बने रहने की समस्या से परेशान हैं?

टखनों और पैरों में सूजन की समस्या

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, गर्भावस्था के दौरान टखनों और पैरों में कुछ सूजन आना सामान्य है, वहीं यदि आपके पैरों में चोट या मोच हो जाए तो इसके कारण भी पैरों में सूजन आ सकती है। इस तरह की समस्याएं सामान्य उपचार के माध्यम से ठीक भी हो जाती हैं। हालांकि अगर आपके पैरों में बिना इन कारणों के ही अक्सर सूजन बनी रहती है तो डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

आइए उन कारणों के बारे में जानते हैं जो पैरों में सूजन को बढ़ाने वाली हो सकती हैं।

लाइफस्टाइल की समस्याएं

पैरों में अक्सर बने रहने वाली सूजन की समस्या के लिए लाइफस्टाइल में गड़बड़ी को भी एक कारण माना जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, जिन लोगों की लाइफस्टाइल सेंडेंटरी होती है (गतिहीन जीवनशैली), अधिक वजन की दिक्कत है, गलत फिटिंग वाले जूते पहनते हैं तो इन कारणों से पैरों में सूजन की समस्या हो सकती है।

इसके अलावा जो लोग नमक का सेवन अधिक करते हैं, उनमें भी पैरों के सूजन की दिक्कत अधिक देखी जाती है।

कहीं आपको संक्रमण तो नहीं?

पैरों और टखनों में सूजन बने रहना कुछ प्रकार के संक्रमण का संकेत भी हो सकता है। विशेषतौर पर डायबिटिक न्यूरोपैथी या पैरों की तंत्रिकाओं में होने वाली समस्याओं के कारण पैरों में सूजन हो सकती है। यदि आपको मधुमेह है, तो पैरों में छाले और घावों पर गंभीरता से ध्याम देते रहना जरूरी हो जाता है, गंभीर स्थितियों में सड़न हो सकती है जिससे पैर काटने की भी नौबत आ सकती है।

यदि आप डायबिटीज के शिकार हैं और आपको अक्सर पैरों में सूजन या छाला बना रहता है तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

लिवर और किडनी की बीमारी

पैरों में अक्सर सूजन बने रहना लिवर या किडनी की बीमारी का भी संकेत हो सकता है, विशेषतौपर किडनी की बीमारी के कारण पैरों में ये दिक्कत अधिक देखी जाती है। असल में जब आपकी किडनी ठीक से काम नहीं कर रही होती है, तो शरीर में तरल पदार्थ जमा होने शुरू हो जाते हैं जिसके कारण पैरों में सूजन बढ़ सकती है।

इसी तरह लिवर रोगों के कारण एल्बुमिन नामक प्रोटीन का उत्पादन प्रभावित हो सकता है, ये रक्त वाहिकाओं से रक्त को आसपास के ऊतकों में लीक होने से रोकता है। अपर्याप्त एल्बुमिन के कारण द्रव का रिसाव हो सकता है, जो पैरों में सूजन बढ़ा सकती है।

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आइए जानते हैं कैंसर से बचे रहने के लिए किन चीजों को खाना चाहिए और किनसे करना चाहिए परहेज

कैंसर एक गंभीर बीमारी है जिसके मामले दुनियाभर में तेजी से बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं। हृदय रोगों के बाद कैंसर वैश्विक स्तर पर मृत्यु का सबसे बड़ा कारण माना जाता रहा है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के विशेषज्ञों ने भारत में कैंसर के मामलों में 12% से 18% की वृद्धि होने का आशंका जताई है। भारत में कैंसर के मामले साल 2022 में 1.46 मिलियन (14.6 लाख) से बढ़कर 2025 में 1.57 मिलियन (15.7 लाख) होने का खतरा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कम उम्र से ही सभी लोगों को कैंसर से बचाव को लेकर सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। इसके लिए दिनचर्या में सुधार, पौष्टिक आहार का सेवन करना और रसायनों के अधिक संपर्क में आने से बचना प्रमुख है। जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को ये बीमारी रही है उन्हें और भी सावधान रहने की आवश्यकता है।

कैंसर से बचाव में फायदेमंद है स्वस्थ और पौष्टिक आहार

अध्ययनों में स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि स्वस्थ, संतुलित और पौष्टिक आहार आपमें कैंसर के जोखिमों को कम कर सकते हैं। इसके लिए रोजाना हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और बीन्स खाने की आदत बनानी चाहिए। रेड और प्रोसेस्ड मीट, संतृप्त वसा और नमक-चीनी जैसी चीजों के सेवन को कम करके आप कैंसर के खतरे से बचे रह सकते हैं।

कैंसर रिसर्च यूके की एक रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने बताया कि दूध और अन्य डेयरी उत्पाद खाने और पीने से आंत के कैंसर का खतरा कम हो सकता है। कुछ शोध कहते हैं, कैंसर से बचाव या कैंसर से मुकाबले में प्लांट बेस्ड डाइट का सेवन करना आपके लिए काफी फायदेमंद हो सकता है।

कैंसर का खतरा सभी उम्र के लोगों में देखा जा रहा इसलिए कम उम्र से ही सभी लोगों को बचाव पर ध्यान देते रहना चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कैंसर हो या अन्य कोई क्रॉनिक बीमारी, इनसे बचाव के लिए प्रोटीन, स्वस्थ वसा, साबुत अनाज और विटामिन्स-खनिजों से भरपूर खाद्य पदार्थों को आहार में जरूर शामिल करना चाहिए। कैंसर से बचाव करना हो या फिर आप कैंसर का इलाज करा रहे हों, स्वस्थ और पौष्टिक चीजों का सेवन आपके लिए काफी महत्वपूर्ण हो जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कई अध्ययनों से पता चलता है कि प्लांट बेस्ड डाइट आपको न सिर्फ कैंसर से बचाने में मददगार है बल्कि जिन लोगों का इलाज चल रहा है उनकी रिकवरी में भी इससे लाभ मिल सकता है। प्लांट बेस्ड डाइट से विटामिन्स और खनिजों की भरपूर मात्रा प्राप्त की जा सकती है। प्लांट बेस्ड डाइट का मतलब है कि आहार में बहुत सारी सब्जियां, मौसमी फलों,  बीन्स, नट्स और सीड्स को शामिल करना।

हरी पत्तेदार सब्जियां (पालक, ब्रोकली, पत्तागोभी), टमाटर (लाइकोपीन से भरपूर), गाजर और शकरकंद (बीटा-कैरोटीन से भरपूर) एंटीऑक्सीडेंट्स से भी भरपूर होते हैं जिससे सेहत को कई प्रकार के लाभ हो सकते हैं।

किन चीजों से परहेज किया जाना चाहिए?

अध्ययनों में कई प्रकार की चीजों को शरीर को क्षति पहुंचाने और कैंसर के खतरे को बढ़ाने वाला बताया गया है। शोधकर्ता बताते हैं, अगर आप प्रोसेस्ड फूड्स-जंक फूड्स अधिक खाते हैं तो इसके कारण आपके शरीर में समस्याएं बढ़नी शुरू हो जाती हैं।

फास्ट फूड (पिज्जा, बर्गर, फ्रेंच फ्राइज़), पैकेज्ड स्नैक्स (चिप्स, नमकीन, कैंडी) अत्यधिक मीठा और रिफाइंड शुगर (शुगर कैंसर कोशिकाओं को बढ़ाने में मदद करते हैं) खाते हैं तो इससे आपके बीमार होने का जोखिम बढ़ जाता है। डीप फ्राई किए गए खाद्य पदार्थ भी कैंसरजन्य तत्व उत्पन्न कर सकते हैं, इनसे भी दूरी बनाकर रखना चाहिए।

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क्या आप भी हैं नींद की समस्या से परेशान, तो ये योगासन कर सकते हैं आपकी मदद 

नींद हमारे शरीर और मस्तिष्क के लिए उतनी ही जरूरी है, जितना भोजन और पानी। नींद की कमी से शरीर और मन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। पर्याप्त नींद न लेने पर कई प्रकार की शारीरिक और मानसिक समस्याएं हो सकती हैं। तनाव व चिंता, कमजोर याददाश्त नींद की कमी से होने वाली समस्याएं हैं। इसके अलावा दिल की बीमारियां, मोटापा, डायबिटीज, थकान और कमजोरी का कारण भी नींद पूरी न होना है।

हालांकि नींद की गुणवत्ता को सुधारने के लिए योग प्रभावी उपाय है। योग से मानसिक शांति मिलती है और नींद की गुणवत्ता बेहतर बनाने में भी मदद करता है। यदि आप अनिद्रा या नींद की समस्या से परेशान हैं, तो कुछ योगासन आपकी मदद कर सकते हैं।

बालासन

यह मुद्रा शरीर को आराम देती है और मस्तिष्क को शांति प्रदान करती है। इसके अभ्यास के लिए वज्रासन की स्थिति में बैठकर आगे की ओर झुकें और अपनी बाहों को सीधा रखें। माथे को जमीन पर लगाएं और गहरी सांस लें। 2-3 मिनट तक इसी स्थिति में रहें।

शवासन

शवासन का अभ्यास पूरे शरीर को गहराई से आराम देता है। इसके अभ्यास के लिए पीठ के बल लेटकर अपने हाथों और पैरों को ढीला छोड़ दें। फिर आंखें बंद करके सांस पर ध्यान केंद्रित करें। 5-10 मिनट तक शांति से रहें।

अनुलोम-विलोम

यह प्राणायाम मानसिक तनाव को कम करने और नींद को सुधारने में सहायक है। अनुलोम विलोम के अभ्यास के लिए आरामदायक स्थिति में बैठकर दाएं नथुने को बंद करें और बाएं से सांस लें। फिर बाएं नथुने को बंद करें और दाएं से सांस छोड़ें। इस प्रक्रिया को 5-10 मिनट तक करें।

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क्या ग्रीन-टी आपके हार्ट के लिए है फायदेमंद? आईए जानते है इससे होने वाले फायदे

ग्रीन-टी अपने स्वास्थ्य संबंधी लाभ के लिए काफी चर्चा में रही है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स को सेहत के लिए कई प्रकार से लाभकारी माना जाता रहा है जो इसे सेहत को लेकर जागरूक रहने वालों के बीच पसंदीदा पेय भी बनाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ग्रीन टी सिर्फ एक साधारण पेय नहीं, बल्कि एक स्वास्थ्यवर्धक औषधि है। यह हृदय, मस्तिष्क, त्वचा, वजन घटाने और कैंसर जैसी बीमारियों से बचाने में मदद करती है। यदि आप इसे अपनी आहार दिनचर्या में शामिल करते हैं, तो यह आपके संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बना सकती है।

अध्ययनों से पता चलता है कि ग्रीन-टी में कैटेचिन नामक एक प्रकार का पॉलीफेनोल होता है। कैटेचिन एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो कोशिकाओं को डैमेज होने से रोकने में मदद करते हैं और आपको गंभीर और क्रोनिक बीमारियों से बचाए रखते हैं। इसे शुगर और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखने और एंटी-कैंसर प्रभावों के कारण कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से बचाव के लिए सेवन किया जाता रहा है।

क्या ग्रीन टी से हृदय रोग और स्ट्रोक का जोखिम भी कम होता है? ये सवाल अक्सर लोगों के मन में रहता है, आइए इस बारे में जानते हैं।

ग्रीन-टी है हार्ट के लिए फायदेमंद

ग्रीन-टी से क्या हृदय रोगों के खतरे को भी कम किया जा सकता है, इसको समझने के लिए किए गए अध्ययनों की समीक्षा से पता चलता है कि नियमित रूप से अगर आप ग्रीन-टी पीते हैं तो इससे हृदय स्वास्थ्य में सुधार होता है और हृदय से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों से भी बचा जा सकता है।

शोधकर्ताओं ने पाया कि ग्रीन-टी में मौजूद तत्व रक्तचाप या लिपिड दोनों को कंट्रोल करने में सहायक हो सकते हैं जिससे हृदय रोगों का खतरा कम होता है।

कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर रहता है कंट्रोल

अन्य अध्ययनों में पाया गया कि ग्रीन-टी का सेवन कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने और रक्तचाप को संतुलित करने में भी मदद करता है। शोध बताते हैं कि यह बैड कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) को कम करके गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में भी मददगार पेय है, जिससे हृदय रोगों का खतरा कम होता है।

एक अध्ययन के अनुसार, ग्रीन-टी पीने से हृदय रोग के जोखिम को 31% तक कम किया जा सकता है। हालांकि, ग्रीन-टी से हृदय स्वास्थ्य को होने वाले फायदों को जानने के लिए अभी और नैदानिक परीक्षणों की आवश्यकता है।

स्ट्रोक से होता है बचाव

नियमित रूप से ग्रीन-टी पीने से स्ट्रोक के खतरे को भी कम किया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने जापान में 46,000 से अधिक प्रतिभागियों (40 से 79 वर्ष की आयु, 60% महिला) के डेटा का विश्लेषण किया। निष्कर्ष में पाया गया कि रोजाना जिन लोगों ने ग्रीन-टी का सेवन किया उनमें अन्य लोगों की तुलना में स्ट्रोक होने या इसके कारण मौत का खतरा 62% तक कम था।

इतना ही नहीं जिन लोगों में स्ट्रोक या दिल के दौरे की हिस्ट्री रही थी उन्हें भी ग्रीन टी पीने से लाभ मिलने के प्रमाण मिलते हैं।

इसके एंटीऑक्सीडेंट्स गुण बनाते हैं खास

ग्रीन टी में पॉलीफेनोल्स और कैटेचिन्स जैसे शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करके कोशिकाओं को डैमेज होने से बचाते हैं। एक अध्ययन के अनुसार, ग्रीन-टी में मौजूद एपिगैलोकैटेचिन गैलेट (EGCG) नामक कंपाउंड कैंसर, हृदय रोग और उम्र बढ़ने के साथ होने वाली गंभीर समस्याओं को कम करने में मदद करता है। वजन घटाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को बढ़ाने में भी ये फायदेमंद है इसलिए इसके नियमित सेवन से कई प्रकार के लाभ हो सकते हैं।

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क्या आपको भी है धूम्रपान की आदत, तो अभी छोड़ दीजिये, नहीं तो कई गंभीर बीमारियों का हो सकता है खतरा

दुनियाभर में कई प्रकार की गंभीर और क्रोनिक बीमारियों का खतरा काफी तेजी से बढ़ता जा रहा है। पिछले एक दशक के आंकड़े उठाकर देखें तो पता चलता है कि 30 से कम उम्र के लोग हाई ब्लड प्रेशर, हाई शुगर और कैंसर जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी को इन बीमारियों का प्रमुख कारण माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हमारी जिन आदतों के कारण सेहत को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंच रहा है उनमें धूम्रपान सबसे प्रमुख है। यही एक आदत करीब 30 बीमारियों का कारण बन सकती है।

डॉक्टर कहते हैं, अच्छी सेहत चाहते हैं तो धूम्रपान से दूरी बनाना सबसे जरूरी है। अगर आप धूम्रपान करते रहे हैं और इसे छोड़ देते हैं तो भी आप कई बीमारियों के खतरे को काफी कम कर सकते हैं। इतना ही नहीं धूम्रपान छोड़ने के एक दिन के भीतर ही आपके शरीर में कई प्रकार के सकारात्मक बदलाव होने शुरू हो जाते हैं।

आइए जानते हैं कि धूम्रपान क्यों इतना खतरनाक माना जाता है और इसे छोड़ने से क्या लाभ हो सकता है?

धूम्रपान के कई सारे नुकसान

अध्ययनों से पता चलता है कि धूम्रपान के कई प्रकार के दुष्प्रभाव हो सकते हैं, जिनमें कैंसर, हृदय रोग और श्वसन संबंधी समस्याएं शामिल हैं। लंग्स कैंसर के ज्यादातर मामलों के लिए धूम्रपान को प्रमुख जोखिम कारक माना जाता रहा है। धूम्रपान से हृदय रोग, स्ट्रोक और पेरिफेरल आर्टरियल डिजीज (पीएडी) का खतरा भी बढ़ सकता है। पीएडी एक ऐसी स्थिति है जिसमें आपकी धमनियों में प्लाक जमने लगता है, जिससे दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है।

इसके अलावा धूम्रपान से क्रोनिक ब्रोंकाइटिस, क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) और अस्थमा जैसी बीमारियों का जोखिम भी बढ़ जाता है। ये एक आदत आपके मौखिक स्वास्थ्य, प्रजनन क्षमता और शारीरिक फिटनेस सभी को प्रभावित करती है।

धूम्रपान छोड़ने से होने लगते हैं शरीर में सकारात्मक बदलाव

जब कोई व्यक्ति धूम्रपान करना बंद कर देता है, तो उसके शरीर में कुछ ही घंटे में सकारात्मक परिवर्तन होने शुरू हो जाते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, धूम्रपान छोड़ने से रक्तचाप कम होने लगता है और फेफड़े-हृदय रोगों का खतरा भी कम हो जाता है। इतना ही नहीं धूम्रपान छोड़ने के एक दिन के भीतर ही आपके शरीर में कई बदलाव शुरू हो जाते हैं।

धूम्रपान छोड़ने का मतलब है, इसकी लत के चक्र को तोड़ना और मस्तिष्क को निकोटीन की आदत से रोकने के लिए पुनः व्यवस्थित करना। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को इस आदत से दूरी बनाने की सलाह देते हैं।

पहले घंटे से ही दिखने लगते हैं बदलाव

अध्ययनों से पता चलता है कि धूम्रपान छोड़ने के पहले घंटे से ही आपके शरीर में बदलाव दिखने शुरू हो जाते हैं। धूम्रपान छोड़ने के 20 मिनट बाद ही हृदय गति कम हो जाती है और वह सामान्य होने लग जाती है। रक्तचाप कम होना और रक्त संचार में सुधार होना हृदय की सेहत के लिए अच्छा माना जाता है।

सिगरेट में 7,000 से ज्यादा रसायन हो सकते हैं, जिनमें से 250 हानिकारक माने जाते हैं। इनमें कार्बन मोनोऑक्साइड भी शामिल है, जो सिगरेट के धुएं में मौजूद एक गैस है। 12 घंटे तक धूम्रपान न करने से शरीर, अतिरिक्त कार्बन मोनोऑक्साइड को खुद ही साफ करने लग जाता। कार्बन मोनोऑक्साइड का स्तर सामान्य होने से शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ने लगता है।

एक दिन में ही मिलते हैं ये लाभ

धूम्रपान छोड़ने के सिर्फ एक दिन बाद ही आपमें हार्ट अटैक होने का जोखिम भी पहले की तुलना में कम होने लगता है। असल में धूम्रपान के कारण गुड कोलेस्ट्रॉल में कमी आती है, जिससे हृदय पर अतिरिक्त दबाव बढ़ने लगता है। धूम्रपान से रक्तचाप भी बढ़ता है और रक्त के थक्के बनते हैं, जिससे स्ट्रोक का जोखिम बढ़ जाता है। धूम्रपान छोड़ने के सिर्फ एक दिन बाद ही व्यक्ति का रक्तचाप कम होने लगता है, जिससे हृदय की दिक्कतें कम हो सकती हैं।

धूम्रपान की आदत उन तंत्रिकाओं के लिए भी हानिकारक मानी जाती है जो हमें गंध और स्वाद का एहसास कराती हैं। धूम्रपान छोड़ने के केवल दो दिन बाद ही आपके स्वाद और गंध की अनुभूति में सुधार होने लग जाता है।

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