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क्या आप रोजाना अच्छी नींद ले पा रहे हैं? अगर नहीं, तो आपकी सेहत पर हो सकता है इसका दुष्प्रभाव 

Category Archives: जीवन शैली

क्या आप रोजाना अच्छी नींद ले पा रहे हैं? अगर नहीं, तो आपकी सेहत पर हो सकता है इसका दुष्प्रभाव 

अच्छी सेहत के लिए पौष्टिक आहार और नियमित व्यायाम जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है रोज रात में अच्छी और गहरी नींद लेना। तमाम अध्ययनों से पता चलता है कि वयस्कों को रोजाना रात में कम से कम 6-9 घंटे की गहरी नींद जरूर लेनी चाहिए। एक रात भी अगर आपकी नींद पूरी नहीं होती है तो अगले दिन सेहत पर इसका दुष्प्रभाव हो सकता है। क्या आप अच्छी नींद ले पा रहे हैं?

ये सवाल इसलिए क्योंकि हाल के वर्षों में नींद न आने की समस्या (अनिद्रा) के मामलों में काफी वृद्धि हुई है। वयस्कों से लेकर बुजुर्ग तक सभी आयु के लोगों को इसका शिकार देखा जा रहा है। अनिद्रा क्या किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का कारण है या इसकी वजह से आपको कोई गंभीर बीमारी हो सकती है? नींद की समस्याओं से छुटकारा कैसे पाया जा सकता है, आइए इन सबके बारे में विस्तार से समझते हैं।

नींद न आने की समस्या (अनिद्रा)

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार की सेहत को ठीक बनाए रखने के लिए अच्छी नींद की जरूरत होती है। नींद के दौरान शरीर में कई प्रकार की रासायनिक क्रियाएं होती हैं, हार्मोन्स उत्पादित होते हैं जो आपको स्वस्थ रखने और तरोताजा बनाए रखने में मदद करते हैं। हालांकि आधुनिक जीवनशैली, तनाव और अन्य कई कारकों के कारण बहुत से लोग नींद न आने की समस्या से जूझ रहे हैं।

यह समस्या न केवल थकावट का कारण बनती है, बल्कि गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का रूप भी ले सकती है। दीर्घकालिक रूप में इसके कारण हापरटेंशन और अवसाद जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।

नींद की गोलियों या ‘मेलाटोनिन की गोलियों’ की न बनाएं आदत

अक्सर लोग नींद की समस्याओं को दूर करने के लिए ‘मेलाटोनिन’ टेबलेट लेना शुरू कर देते हैं। मेलाटोनिन एक हार्मोन है जो आपका मस्तिष्क अंधेरे के प्रति प्रतिक्रिया में पैदा करता है। यह आपके सर्कैडियन रिदम (आंतरिक घड़ी) और नींद में मदद करता है। बाजार में मेलाटोनिन के स्तर को कंट्रोल करने के लिए कई टेबलेट मौजूद हैं। यह सप्लीमेंट मस्तिष्क में पीनियल ग्रंथि द्वारा स्वाभाविक रूप से उत्पादित हार्मोन का एक सिंथेटिक वर्जन होते हैं जो नींद लाने में मददगार हो सकते हैं।

हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इस सप्लीमेंट पर निर्भर होने से बचना चाहिए। नई दिल्ली स्थित एक अस्पताल में स्लीप संबंधित श्वसन विकारों की डॉक्टर नीतू जैन कहती हैं, अनिद्रा की समस्या में मेलाटोनिन का सहारा नहीं लेना चाहिए। आप पहले ये समझने की कोशिश करिए कि नींद न आने की वजह क्या है और उसमें कैसे सुधार किया जा सकता है?

नींद न आने की समस्या कई तरह से नुकसानदायक

नींद विकारों की समस्या कई प्रकार से आपकी शारीरक और मानसिक सेहत को प्रभावित करने वाली हो सकती है। अनिद्रा की दिक्कत बने रहने के कारण थकान और ऊर्जा की कमी तो होती ही है साथ ही आपकी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने,मोटापा और हृदय रोग की समस्या, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज का जोखिम भी बढ़ जाता है।

मानसिक स्वास्थ्य पर भी नींद की कमी के दुष्प्रभाव हो सकते हैं। इसके कारण आपको एकाग्रता और याददाश्त कमजोर होने, अवसाद और चिड़चिड़ापन की समस्या होने, उत्पादकता में कम का जोखिम रहता है। लंबे समय तक नींद की दिक्कत बने रहने के कारण डिमेंशिया और अल्जाइमर जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।

कैसे पाएं आराम?

विशेषज्ञ कहते हैं, दवाओं पर निर्भर होने की जगह स्लीप हाइजीन में सुधार करें। इसके लिए रोज सोने का एक समय रखना, अपने दिमाग को आराम देने वाले उपाय जैसे मेडिटेशन-अच्छे संगीत सुनना, शरीरिक रूप से सक्रिय रहना और सोने से कम से कम एक घंटे पहले स्क्रीन या डिवाइस से दूर रहना शामिल है।

समय पर न सोना और जागना, काम के घंटे बदलना या रात को देर तक काम करना नींद के चक्र को प्रभावित करता है। मोबाइल-कंप्यूटर जैसे उपकरणों से निकलने वाली नीली रोशनी मेलाटोनिन हार्मोन के उत्पादन को बाधित करती है, जिससे नींद नहीं आती। इनमें सुधार जरूरी हैं।

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थायरॉइड को नजरअंदाज करना हो सकता है हानिकारक, शरीर के अंगों को करता है प्रभावित

थायरॉइड मनुष्य के शरीर में एक छोटी, लेकिन शक्तिशाली ग्रंथि है। इसको नजरअंदाज करना बहुत हानिकारक साबित हो सकता है, क्योंकि यह पूरे शरीर पर प्रभाव डालती है। यह ग्रंथि फिट रहने के रहस्यों को जानने के लिए आवश्यक है। खराब जीवनशैली बड़ी वजह है। इन्हीं सब बातों के मद्देनजर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) जनवरी माह को थायरॉइड जागरूकता माह के रूप में मनाता है।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, थायरॉइड रोग गंभीर और यहां तक कि जानलेवा भी होते हैं, लेकिन आमतौर पर इनका इलाज संभव है। इनका उपचार किया जा सकता है। इसे लक्षणों के आधार पर पहचाना जा सकता है। थायरॉइड, गर्दन के सामने स्थित एक छोटी सी तितली के आकार की ग्रंथि है। यह शरीर के हार्मोन बनाने का काम करती है। थायरॉइड हार्मोन शरीर के कई अंगों को प्रभावित करते हैं, जैसे कि दिल की धड़कन, सांस लेना, वजन, पाचन और मूड खराब होना।

2 तरह की समस्या
जब थायरॉइड जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाता है तो इसे हाइपरथायरायडिज्म कहते हैं। इससे शरीर के कई काम तेज हो जाते हैं। इसके लक्षण  हैं चिड़चिड़ापन, ज्यादा पसीना आना, घबराहट, दिल की धड़कन का बढ़ना, वजन कम होना, भूख ज्यादा लगना, मांसपेशियों में कमजोरी और दर्द होना। जब थायरॉइड जरूरत से कम हार्मोन बनाता है तो इसे हाइपोथायरायडिज्म कहते हैं। इससे शरीर के कई काम धीमे हो जाते हैं। थायरॉइड स्टॉर्म, यह हाइपरथायरायडिज्म से पीड़ित लोगों को हो सकती है। यह एक दुर्लभ और जानलेवा स्थिति है।

थायरॉइड स्टॉर्म का एक प्रमुख लक्षण जो इसे सामान्य हाइपरथायरायडिज्म से अलग करता है वह है शरीर के तापमान में उल्लेखनीय वृद्धि है जो 105-106 फारेनहाइट तक हो सकता है। थायरॉइड स्टॉर्म असामान्य है, लेकिन जब ऐसा होता है तो यह जीवन के लिए खतरा बन सकता है। इसके लक्षणों का अनुभव करने वाले लोगों को तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए।

उम्र, आयोडीन की कमी जैसे कई कारण
खराब जीवनशैली और अव्यवस्थित खानपान इसके सबसे बड़े कारण हैं। इसके अलावा लंबे समय से स्ट्रेस, ज्यादा उम्र, आयोडीन की कमी, वायरल इंफेक्शन, आनुवंशिकता के कारण भी होता है। महिलाओं में यह पुरुषों के मुकाबले ज्यादा देखने को मिलता है। महिलाओं में इसके और भी कई कारण हो सकते हैं जैसे हार्मोनल असंतुलन, गर्भावस्था के बाद शारीरिक बदलाव, अवसाद। दुनियाभर में करीब 27 करोड़ लोग और भारत में लगभग चार करोड़ लोग थायरॉइड से संबंधित समस्याओं से पीड़ित हैं।

इसके अलावा दूसरे सर्वेक्षण के अनुसार 60 वर्ष से अधिक आयु के 13 और 19 वर्ष से कम आयु के 5 फीसदी लोग थायरॉइड की समस्या से पीड़ित हैं। इसका सबसे बड़ा कारण अव्यवस्थित दिनचर्या और पूरी तरह से गतिहीन जीवनशैली है।

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क्या रोजाना एक गिलास दूध पीने से कम होता है आंतों का कैंसर, जानिए क्या कहते हैं शोधकर्ता

अच्छी सेहत के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को स्वस्थ और पौष्टिक चीजों को सेवन की सलाह देते हैं। ज्यादातर विशेषज्ञ कहते हैं कि बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी उम्र के लोगों को रोजाना एक गिलास दूध जरूर पीना चाहिए। दूध को संपूर्ण आहार माना जाता है, ये कैल्शियम के साथ-साथ कई प्रकार के विटामिन्स का भी खजाना है। हड्डियों और दांतों की मजबूती के लिए दूध या अन्य डेयरी उत्पादों को आहार का हिस्सा बनाना आपके लिए बहुत लाभकारी हो सकता है। पर क्या आप जानते हैं कि दूध से होने वाले लाभ सिर्फ हड्डियों और दांतों को सेहतमंद रखने तक ही सीमित नहीं है?

हाल ही में किए गए एक अध्ययन में विशेषज्ञों ने बताया कि दूध से होने वाले अब तक के फायदों के अलावा ये आपको कैंसर के खतरे से भी बचाने में मददगार है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, इन फायदों को देखते हुए सभी लोगों को दूध को आहार में जरूर शामिल करना चाहिए। आइए जानते हैं कि दूध को किस कैंसर से बचाव में लाभकारी पाया गया है?

दूध पीने से कम होता है आंतों के कैंसर का खतरा

नेचर कम्युनिकेशंस जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि रोजाना एक गिलास दूध पीना आपको बाउल कैंसर (आंत के कैंसर) के खतरे से बचा सकता है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने इस शोध में दूध से होने वाले इस फायदे के बारे में जानकारी दी है। शोधकर्ताओं ने इसके लिए 16 वर्षों के दौरान पांच लाख से अधिक प्रतिभागियों में 97 प्रकार के आहार-पोषक तत्वों और आंत के कैंसर के जोखिम के बीच संबंध की जांच की। इसमें पाया गया कि कैल्शियम युक्त गहरे रंग की पत्तेदार सब्जियां, दूध-डेयरी उत्पाद आपके लिए काफी लाभकारी हो सकते हैं।

आहार में बढ़ाएं कैल्शियम की मात्रा

शोधकर्ताओं ने अध्ययन में बताया कि डेयरी उत्पाद संभवत आंतों के कैंसर के जोखिम को कम करते हैं। दूध और अन्य डेयरी उत्पादों में कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है, इसे ही सबसे लाभप्रद पाया गया है। शोध से पता चलता है कि आहार में प्रतिदिन अतिरिक्त 300 मिलीग्राम कैल्शियम (दूध का एक बड़ा गिलास के बराबर) आपके जोखिम को 17% तक कम करने में सहायक हो सकता है। ऑक्सफोर्ड के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. केरेन पेपियर ने कहा, ये अध्ययन आंतों के कैंसर को रोकने में डेयरी उत्पादों के संभावित सुरक्षात्मक भूमिका को उजागर करती है, जो मुख्य रूप से कैल्शियम के कारण होता है।

कैंसर से कैसे बचाता है कैल्शियम?

कैल्शियम को हड्डियों को मजबूत बनाने और दांतों को स्वस्थ रखने के लिए एक महत्वपूर्ण खनिज के रूप में जाना जाता रहा है, अब इस बात के प्रमाण मिले हैं कि यह कुछ प्रकार के कैंसर से भी बचाता है। अध्ययन में कहा गया है कि आपकी बड़ी आंत में कैल्शियम पित्त एसिड और फ्री फैटी एसिड के साथ बाइंड हो जाता है, जिससे इनके संभावित कैंसरकारी प्रभाव कम हो जाते हैं।

डेयरी उत्पादों के अलावा साबुत अनाज, फल, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और विटामिन-सी के सेवन से भी कैंसर का खतरा कम हो सकता है, लेकिन इसका असर कम देखा गया है। दूध और कैल्शियम युक्त अन्य पदार्थ आपकी सेहत के लिए बहुत लाभकारी हो सकते हैं।

क्या कहते हैं शोधकर्ता?

अध्ययन के निष्कर्ष में वैज्ञानिकों ने बताया, शराब और रेड मीट आप में कैंसर के खतरे को 8-15 प्रतिशत तक बढ़ाने वाले पाए गए हैं। जबकि दूध-कैल्शियम युक्त पदार्थ खतरे को कम करते हैं।

शोधकर्ताओं ने कहा, यह एक अवलोकनात्मक अध्ययन है, न कि परीक्षण आधारित। इसलिए यह स्पष्ट रूप से साबित नहीं होता कि कैल्शियम या कोई अन्य खाद्य पदार्थ सभी लोगों में कैंसर के खतरे को कम करते हैं। हालांकि अध्ययन की रिपोर्ट इस दिशा में आशाजनक जरूर है। दूध में मौजूद पोषक तत्व हमारी सेहत को कई प्रकार से लाभ पहुंचाते हैं।

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क्या आप भी दिन में कई-कई बार करते हैं फेसवॉश का इस्तेमाल, स्किन को हो सकता है नुकसान 

सर्दी का मौसम चल रहा है। इस मौसम में हर किसी को अपनी त्वचा का ध्यान अलग से रखना पड़ता है। यदि त्वचा का सही से ध्यान न रखा जाए तो इसकी वजह से परेशानी बढ़ जाती है और चेहरा काफी डल दिखने लगता है। ऐसे में दिन-भर की धूल मिट्टी को चेहरे से हटाने के लिए लोग दिन में कई-कई बार फेसवॉश का इस्तेमाल करते हैं।

फेसवॉश त्वचा की सफाई के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण उत्पाद है। यह त्वचा से गंदगी, तेल, और मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद करता है, लेकिन इसका सही चयन और उपयोग आवश्यक है, खासकर सर्दियों में।

यदि सर्दी के मौसम में आप गलत तरीके से इसका इस्तेमाल करेंगे तो आपकी त्वचा खिलने की जगह डल हो जाएगी। जो देखने में भी अजीब लगेगी। यहां हम आपको सर्दी में बार-बार फेसवॉश इस्तेमाल करने से होने वाले नुकसानों के बारे में बताने जा रहे हैं।

त्वचा की नमी कम होना

ठंड के मौसम में त्वचा शुष्क हो जाती है। ऐसे में यदि आप फेसवॉश का बार-बार उपयोग करते हैं या ऐसा फेसवॉश चुनते हैं जो कठोर केमिकल्स से बना हो, तो यह त्वचा की प्राकृतिक नमी छीन लेता है, जिससे त्वचा खिंची-खिंची और असहज महसूस होती है।

हो सकती है त्वचा में जलन और खुजली

फेसवॉश में मौजूद सल्फेट्स और अल्कोहल जैसे तत्व सर्दी के मौसम में त्वचा को अधिक संवेदनशील बना सकते हैं, जिससे खुजली और जलन हो सकती है। इसलिए इस्तेमाल से पहले इसमें पाए जाने वाले तत्वों के बारे में जान लें।

ड्राई पैचेस और फ्लेकी स्किन

ठंडे मौसम में हार्श फेसवॉश का उपयोग त्वचा को अत्यधिक शुष्क बना सकता है, जिससे चेहरे पर रूखे धब्बे (ड्राई पैचेस) और फ्लेकी त्वचा हो सकती है। ऐसी त्वचा देखने में काफी अजीब लगती है।

त्वचा का अधिक संवेदनशील होना

ठंड में त्वचा पहले से ही संवेदनशील होती है। ऐसे में बार-बार फेसवॉश का उपयोग इसे और अधिक संवेदनशील बनाता है, जिससे फटी हुई त्वचा, लालिमा, और सूजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में यदि आप इसका इस्तेमाल कर रहे हैं तो दिन में एक ही बार करें।

एंटी-एक्ने फेसवॉश का प्रभाव

बढ़ती उम्र में लोग एंटी-एक्ने फेसवॉश का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें सैलिसिलिक एसिड या बेंज़ॉयल पेरॉक्साइड जैसे तत्व होते हैं। ये तत्व त्वचा को ज्यादा रूखा और असहज बना सकता है।

इस्तेमाल करते समय इसका रखें ध्यान

सर्दियों में फेसवॉश का सही तरीके से उपयोग करना बहुत जरूरी है। गलत फेसवॉश या इसके अधिक उपयोग से त्वचा को नुकसान हो सकता है। हमेशा माइल्ड और त्वचा को हाइड्रेट रखने वाले उत्पादों का चयन करें और मॉइस्चराइजर का उपयोग न भूलें। इससे आपकी त्वचा स्वस्थ और चमकदार बनी रहेगी।

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बालों में नींबू लगाने के होते है कई नुकसान, आइए जानते है इसके इस्तेमाल का सही तरीका

आजकल की बिगड़ी हुई लाइफस्टाइल और सर्दी के बीच में यदि त्वचा और बालों का ध्यान सही से न रखा जाए तो काफी परेशानी सामने आने लगती है। ऐसे में लोग अपनी त्वचा का ध्यान तो रख लेते हैं, लेकिन परेशानी तब सामने आती है, जब बारी है बालों का ध्यान रखने की। बालों की देखभाल के लिए ज्यादातर लोगों को घरेलू नुस्खे अपनाना पसंद है। इन्हीं नुस्खों में नींबू का इस्तेमाल काफी सही माना जाता है।
बालों में नींबू का उपयोग आमतौर पर बालों की देखभाल और स्कैल्प की समस्याओं को ठीक करने के लिए किया जाता है। हालांकि, इसका उपयोग सही तरीके से और सीमित मात्रा में किया जाना चाहिए। बालों में नींबू लगाने के फायदे और नुकसान दोनों हो सकते हैं। इसके फायदे तो तकरीबन हर किसी को पता होते हैं, हम यहां आपको बालों में नींबू इस्तेमाल करने के नुकसान बताएंगे।

बालों का रूखापन बढ़ेगा
नींबू के रस में अम्लीय गुण होते हैं, जो बालों के प्राकृतिक तेलों को कम कर सकते हैं, जिससे बाल रूखे और बेजान हो सकते हैं। ऐसे में यदि आपके बाल काफी ड्राई हैं तो इसके इस्तेमाल से बच के रहें।

स्कैल्प में होगी जलन
संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में नींबू का सीधा संपर्क जलन, खुजली या लालिमा पैदा कर सकता है। इसलिए यदि आपकी त्वचा काफी सेंसेटिव है तो इसके इस्तेमाल से बचें। वरना आपको ही परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

उड़ने लगेगा बालों का रंग
नींबू के रस में ब्लीचिंग गुण होते हैं, जो बालों के प्राकृतिक रंग को हल्का कर सकते हैं, विशेषकर यदि इसे धूप में लगाया जाए। इसलिए यदि नींबू का इस्तेमाल बालों में कर रहे हैं तो उसे पहले चेक कर लें कि कहीं ये आपके बालों के रंग को फीका तो नहीं कर रहा।

होगा हेयर फॉल
अत्यधिक अम्लीयता बालों की संरचना को कमजोर कर सकती है, जिससे बाल आसानी से टूट सकते हैं। इसके अलावा जब नींबू बालों को ड्राई कर देता है, तब भी बाल टूटने लगते हैं। इसलिए इसका इस्तेमाल सोच के ही करें।

स्कैल्प हो जाएगा ड्राई
नींबू का अधिक उपयोग सिर की त्वचा को सूखा बना सकता है, जिससे डैंड्रफ या अन्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे में यदि आपके साथ पहले से ही डैंड्रफ की समस्या है तो स्कैल्प पर नींबू के इस्तेमाल से बचें।

ऐसे कर सकते हैं इस्तेमाल
इन समस्याओं से बचने के लिए नींबू के रस को सीधे बालों पर लगाने के बजाय,इसे पानी या अन्य प्राकृतिक तेलों के साथ मिलाकर उपयोग करना चाहिए। साथ ही उपयोग से पहले पैच टेस्ट करना महत्वपूर्ण है।

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ठंड से अकड़ते पैरों को राहत दिलाने में इन योगासनों से मिलेगी मदद

सर्दियों में कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं की आशंका बढ़ जाती है। जुकाम-खांसी के अलावा वायरल फीवर और पेट से जुड़ी समस्याएं सर्दियों के मौसम में आम है। इसके अलावा इस मौसम में शारीरिक सक्रियता कम होने के कारण शरीर में अकड़न और दर्द भी आम समस्या है। कई लोग ऐसे भी हैं, जिन्हें ठंड के मौसम में पैरों की अकड़न का सामना करना पड़ता है। पैरों में अकड़न से रक्त संचार प्रभावित होता है।

योग न केवल शरीर को गर्माहट होता है, बल्कि मांसपेशियों को भी राहत देने में मददगार है। सर्दियों में योग के अभ्यास से रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। इससे शरीर को गर्माहट मिलती है और शारीरिक सक्रियता बढ़ती है, जिससे शरीर में लचीलापन आता है और ठंड से अकड़ते पैरों में राहत दिलाने में भी मदद मिलती है । आइए जानते हैं पैरों की अकड़न कम करने वाले योगासनों के बारे में।

मलासन
मलासन के अभ्यास से पैरों और एड़ियों की जकड़न कम हो सकती है। मलासन योग करने से कूल्हों और कमर की जकड़न से राहत मिलती है। यह योग गर्भावस्था के लिए भी फायदेमंद है। शरीर का लचीलापन बढ़ाने और पाचन को बेहतर बनाने के लिए मलासन का अभ्यास कर सकते हैं। मलासन के अभ्यास के लिए स्क्वाट की मुद्रा में बैठकर हाथों को नमस्कार स्थिति में रखें।

ताड़ासन
ताड़ासन का अभ्यास पैरों की मांसपेशियों को स्ट्रेच करता है और रक्त संचार को बढ़ाता है। ताड़ासन करने से जांघों, घुटनों और टखनों को मजबूती मिलती है। ताड़ासन करने से शरीर की हर मांसपेशी का इस्तेमाल होता है और शरीर में खिंचाव आता है, जिसे लचीलापन और लंबाई दोनों बढ़ती है। इस आसन के अभ्यास के लिए सीधे खड़े होकर हाथों को ऊपर उठाएं और एड़ियों पर खड़े हों। 10-15 सेकंड तक इसी स्थिति में रुकें।

वीरभद्रासन
इस आसन को योद्धा मुद्रा के नाम से भी जाना जाता है। यह योग मांसपेशियों को मजबूत बनाने और लचीलापन बढ़ाने में मदद करता है। कूल्हों, जांघों और कंधों की मांसपेशियों में खिंचाव  लाने और लचीलापन बढ़ाने में वीरभद्रासन असरदार योग क्रिया है। पैरों की मजबूती और ठंड से अकड़न दूर करने के लिए वीरभद्रासन का अभ्यास फायदेमंद हो सकता है। इस आसन को करने के लिए एक पैर आगे और दूसरा पीछे फैलाएं। आगे वाले घुटने को मोड़ें और हाथ ऊपर उठाएं।

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हर बात पर हो जाता है मूड खराब, खाने में इन फूड को करें शामिल, स्ट्रेस लेवल होगा कम

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव या स्ट्रेस एक आम समस्या बन चुकी है। इसका सीधा असर हमारे मूड पर पड़ता है। मूड खराब होना, चिड़चिड़ापन महसूस करना आदि, तनाव के सामान्य लक्षण हैं। इसका कारण होता है कार्टिसोल हार्मोन का बढऩा.कई बार शरीर में मैग्नीशियम की कमी के कारण यह समस्या और बढ़ जाती है. ऐसे में मैग्नीशियम से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन आपके तनाव को कम करने और मूड को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। अगर आप भी स्ट्रेस से परेशान हैं, तो अगली बार इन हेल्दी स्नैक्स को आजमाएं। ये न केवल आपके मूड को बूस्ट करेंगे, बल्कि आपकी सेहत के लिए भी फायदेमंद होंगे।

हल्दी वाली लस्सी  
हल्दी वाले दूध के फायदे तो आपने सुने होंगे, लेकिन अब हल्दी वाली लस्सी का स्वाद और फायदा लें. हल्दी वाली लस्सी तनाव कम करने में बहुत कारगर है. इसे बनाने के लिए दही में हल्दी, शहद, पंपकिन सीड्स और बारीक कटे बादाम मिलाएं. यह जिंक और मैग्नीशियम से भरपूर होती है, जो कार्टिसोल लेवल को कम करती है और मूड को बेहतर बनाती है।

सफेद चने का सलाद
सफेद चने का सलाद न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि यह आपकी सेहत के लिए भी लाभकारी है. इसे बनाने के लिए उबले हुए सफेद चनों में खीरा, टमाटर, जीरा पाउडर, काली मिर्च, नींबू का रस और काला नमक मिलाएं। यह सलाद फाइबर, विटामिन ष्ट और मैग्नीशियम से भरपूर है, जो आपको दिनभर ऊर्जावान बनाए रखता है और तनाव को दूर करता है।

अलसी और ज्वार के लड्डू
अलसी और ज्वार से बने लड्डू न केवल टेस्टी होते हैं, बल्कि ये आपके कार्टिसोल लेवल को भी कंट्रोल करते हैं. इन्हें आप आसानी से घर पर बना सकते हैं. ये लड्डू मैग्नीशियम से भरपूर होते हैं और आपका मूड बूस्ट करने में मदद करते हैं।

हल्दी, दूध और अखरोट
रात को सोने से पहले हल्दी वाला गर्म दूध पीना शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है. इसमें अगर बारीक कटे हुए अखरोट डाल दिए जाएं, तो इसका असर और बढ़ जाता है. यह मैग्नीशियम और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जो न केवल तनाव को कम करता है, बल्कि आपको बेहतर नींद भी देता है।

घी में रोस्ट मखाने
मखाने, (जो मैग्नीशियम का एक अच्छा स्रोत हैं) को घी में भूनकर खाना न केवल टेस्टी है, बल्कि यह आपकी सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है. यह स्नैक ओमेगा-3 फैटी एसिड की कमी को पूरा करता है और स्ट्रेस लेवल को भी कम करता है।

(आर एन एस )


बाहर निकलती तोंद को स्लिम-ट्रिम बनाने के लिए खाना शुरू करें ये सफेद चीज, महीनेभर में दिखेगा असर

आजकल बड़ी संख्या में लोगों की तोंद कपड़ों के बाहर झांकती नजर आती है। मोटापा कई बीमारियों का शुरुआत संकेत माना जाता है. अगर आप भी इसी बाहर निकलती तोंद और मोटापे से परेशान हैं तो किचन में रखी एक चीज को सेवन से इसे कंट्रोल कर सकते हैं। इसे खाने से आप एकदम स्लिम-ट्रिम हो जाएंगे. इस एक चीज को आप सुबह और शाम के समय स्नैक्स के रूप में भी ले सकते हैं. यहां हम बात कर रहे हैं मखाने की। मखाने में कैल्शियम से लेकर कई पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैंमखाने अगर आप स्वाद के शौकीन हैं तो मखाने को घी-नमक या काली मिर्च के फ्लेवर के साथ रोस्ट कर खा सकते हैं. इतना ही नहीं नियमित रूप से मखाने का सेवन आपका वजन कम करने में भी काफी लाभदायक साबित हो सकता है। आइए जानते हैं कि कैसे मखाने का सेवन करें।

मखाना खाने से कैसे कम होता है वजन?
कई लोगों के मन में ये सवाल ये जरूर होता है कि आखिरकार मखाना खाने से कैसे कम होता है वजन? इसका जवाब है कि मखाने में डाइटरी फाइबर पाया जाता है। इसमें मौजूद फाइबर मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करता है. इससे फैट बर्निंग प्रोसेस तेज हो जाती है। इसके साथ ही मखाने में मौजूद कैल्शियम से लेकर आयरन और मैग्नीशियम वजन को बढऩे से रोकते हैं। यह डाइजेशन को बेहतर बनाता है. इससे व्यक्ति का फैट कम हो जाता है।

वजन कम करने के लिए खाएं मखाने का भेल
अगर आप वजन कम करना चाहते हैं तो इसके लिए मखाने की भेल बनाकर खा सकते हैं। इसके लिए एक बाउल में टमाटर, प्याज, हरी मिर्च, ककड़ी और खीरा काट लें. इसके बाद मखानों को कढ़ाई में डालकर हल्का सा फ्राई कर लें. अब टमाटर, प्याज, हरी मिर्च, ककड़ी और खीरा को मखानों के साथ मिक्स कर लें. इसमें नमक, नींबू, इमली की चटनी और काली मिर्च डाल लें. आपकी मिक्स चाट बनकर तैयार हो जाएगी।

वजन कम करने के लिए भूनकर खाएं मखाने
अगर आप वजन कम करना चाहते हैं तो मखानों को डाइट में जरूर शामिल करें. आप इसे भूनकर भी खा सकते हैं. स्वादिष्ट बनाने के लिए एक कढ़ाही में थोड़ा सा घी और नमक डालें, इसके बाद मखानों को धीमी आंच पर भून लें. सुबह नाश्ते के समय और शाम को स्नेक्स के रूप में लें। इससे आपका वजन धीरे धीरे कट जाएगा।

(आर एन एस ) 


क्या आपके गले में भी होती है खुजली? आराम पाने के लिए अपनाएं ये घरेलू नुस्खे

सर्दियों में गले में खराश होना आम बात होती है, लेकिन कई लोगों को बलगम के कारण गले में खुजली होने लगती है। इस समस्या के कारण बात करना और खाने को निगलना बेहद मुश्किल हो जाता है। आम तौर पर जुखाम, सूजन या बुखार गले में होने वाली खुजली का कारण बनते हैं। हालांकि, यह परेशानी पेट में बनने वाले एसिड के चलते भी बढ़ सकती है।आइए इस स्वास्थ्य संबंधी समस्या से निपटने के घरेलू नुस्खे जानते हैं।

गर्म पानी से गरारे करें
गले की खुजली से छुटकारा पाने का सबसे अच्छा प्राकृतिक और घरेलू उपचार होता है गर्म पानी से गरारे करना। इसके जरिए गले की सूजन कम होती है और जलन शांत होती है। एक गिलास पानी गर्म में आधा चम्मच नमक मिला दें। इस पानी की मदद से कम से कम 30 मिनट तक गरारे करें। अगर आप हफ्ते में 2 बार यह उपाय करेंगे, तो आपकी खुजली की समस्या दूर हो जाएगी और आपका गला साफ हो जाएगा।

हल्दी वाले दूध का सेवन करें
अक्सर चोट लगने पर हल्दी वाला दूध पीने की सलाह दी जाती है। हालांकि, इस पेय के सेवन से गले में होने वाली खुजली भी ठीक हो सकती है।हल्दी में करक्यूमिन होता है, जिसे एक शक्तिशाली एंटी-इंफ्लेमेटरी एजेंट माना जाता है। इससे गले की सूजन दूर हो जाती है और संक्रमण का खतरा भी कम हो जाता है।एक गिलास गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी मिलाएं और घूंट-घूंट करके पीएं।

भाप लें
जुखाम होने पर लोग भाप लेते हैं, जिसके जरिए बलगम को पिघलाया जा सकता है। इस उपचार की मदद से आप गले में होने वाली खुजली को भी शांत कर सकते हैं।भाप लेने से गला नम होता है और सूखेपन से राहत मिलती है, जिसके कारण खुजली दूर हो जाती है। भाप लेने से पहले पानी गर्म करके उसमें पुदीने वाला एसेंशियल ऑयल मिलाएं।अब कम से कम 5 से 7 मिनट तक चेहरे को ढककर भाप लें।

गुनगुने पानी में शहद मिलाकर पीएं
अगर आप रोजाना सुबह गुनगुने पानी में शहद मिलाकर पीएंगे, तो आपको गले की खुजली से छुटकारा मिल जाएगा।एशियन पैसिफिक जर्नल ऑफ ट्रॉपिकल बायोमेडिसिन में प्रकाशित शोध के अनुसार, शहद में एंटी-बैक्टीरियल गुण मौजूद होते हैं।इस खाद्य पदार्थ के जरिए गले की सूजन कम हो जाती है, दर्द से राहत मिलती है और खांसी भी ठीक हो जाती है। वहीं, गर्म पानी गले की सिकाई करते हुए आराम प्रदान करता है।

सेब का सिरका आजमाएं
सभी जानते हैं कि सेब का सिरका वजन घटाने में मदद करता है। हालांकि, काफी कम लोग इस बात से वाकिफ हैं कि इसकी मदद से गले में होने वाली खुजली भी दूर हो सकती है।इसमें एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो गले की सूजन, जलन और असुविधा को कम कर सकते हैं। एक गिलास गर्म पानी लें और उसमें आधा चम्मच सेब का सिरका मिलाएं।इस पेय को रोजाना सुबह पीएं और आराम महसूस करें।

(आर एन एस )


सर्दी में बंद नाक खोलने का सबसे सेफ तरीका, मिनटों में मिलेगा आराम

सर्दियों में अक्सर लोग बंद नाक, खांसी और गले में दर्द से परेशान रहते हैं। रेस्पिरेटरी संबंधी समस्याओं के होने की वजह से लोगों को सांस लेने तक में दिक्कत होती है। सर्दी में सुबह-सुबह नहाकर घर से बाहर निकलते ही अक्सर लोगों की नाक जाम होने लगती है। गिरते तापमान और दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण की वजह से भी कई बार लोगों की नाक बंद हो जाती है। इसके अलावा सर्दी में नाक बंद होने का कारण जुकाम, फ्लू या साइनस संक्रमण, एलर्जी हो सकती है। इसके अलावा शराब का सेवन और तनाव की वजह से भी लोगों की नाक बंद हो जाती है। आइए जानते हैं कि कौन से घरेलू नुस्खें ऐसे हैं जिनसे बंद नाक का उपचार किया जा सकता है।

गर्म पानी की भांप लें
सर्दी में बंद नाक से परेशान हैं तो आप गर्म पानी की भांप लें। भांप लेने से ना सिर्फ बंद नाक खुलेगी बल्कि सर्दी जुकाम का भी इलाज होगा. भांप लेने के लिए आप पानी में विक्स डालकर भी भांप ले सकते हैं।

तुलसी के पत्ते और काली मिर्च की चाय पीएं
बंद नाक को खोलने के लिए आप काली मिर्च और तुलसी के पत्तो की चाय का सेवन दिन में दो बार रोजाना करें। काली मिर्च और तुलसी के पत्ते इम्युनिटी स्ट्रॉन्ग करेंगे और बंद नाक उपचार भी करेंगे।

लहसुन के पानी का सेवन करें
बंद नाक को खोलने के लिए आप लहसुन की दो कलियों को एक गिलास पानी में मिला लीजिये और उस पानी को 5-6 मिनट तक पकाएं और गुनगुना ही इसका सेवन करें. दिन में दो बार इस पानी का सेवन करने से बंद नाक से निजात मिलेगी।

नारियल तेल की बूंदें नाक में डालें
बंद नाक से परेशान हैं तो नारियल तेल की कुछ बूंदें नाक में डालें आपको बेहद फर्क महसूस होगा।

मास्क लगाना न भूलें
घर से निकलते ही नाक बंद होने लगती है तो आप मुंह पर मास्क लगाएं. मास्क लगाने से आपको डस्ट से एलर्जी होने का खतरा नहीं रहेगा और नाक भी जाम नहीं होगी।

(आर एन एस )


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