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एक्सल बार डेडलिफ्ट्स से आपकी पकड़ हो सकती है मजबूत, जानें इसे करने का तरीका

Category Archives: जीवन शैली

एक्सल बार डेडलिफ्ट्स से आपकी पकड़ हो सकती है मजबूत, जानें इसे करने का तरीका

एक्सल बार डेडलिफ्ट्स एक खास एक्सरसाइज है, जो आपकी पकड़ को मजबूत बना सकती है। इस एक्सरसाइज में मोटे बार का उपयोग होता है, जिससे उंगलियों और हाथों की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है।यह एक्सरसाइज न केवल हाथों की पकड़ को मजबूत बनाती है, बल्कि शरीर के अन्य हिस्सों को भी ताकतवर बनाती है।आइए आज के इस लेख में एक्सल बार डेडलिफ्ट्स एक्सरसाइज से जुड़ी अहम बातें जानते हैं।

इस तरह की जाती है यह एक्सरसाइज
एक्सल बार डेडलिफ्ट करने के लिए सबसे पहले सही वजन चुनें, जो आपके लिए उपयुक्त हो। अपने पैरों को कंधे की चौड़ाई पर रखें और घुटनों को थोड़ा मोड़ें।अब अपने हाथों से एक्सल बार को पकड़ें और धीरे-धीरे खड़े होते हुए इसे ऊपर उठाएं। ध्यान रखें कि आपकी पीठ सीधी रहे और सिर आगे की ओर झुका न हो।जब आप पूरी तरह खड़े हो जाएं, तो कुछ सेकंड रुककर फिर धीरे-धीरे वापस नीचे आएं।

जानिए एक्सल बार डेडलिफ्ट करने के फायदे
एक्सल बार डेडलिफ्ट करने से कई फायदे होते हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे आपकी ग्रिप स्ट्रेंथ यानी पकडऩे की ताकत बढ़ती है, जो रोजमर्रा के कामों में सहायक होती है।इसके अलावा, यह एक्सरसाइज आपके कंधे, पीठ और पैरों की मांसपेशियों को भी मजबूत बना सकती है।नियमित रूप से इस एक्सरसाइज का अभ्यास करने से आपका शरीर संतुलित रह सकता है और चोट लगने का खतरा कम हो सकता है।

इस एक्सरसाइज के दौरान रखें इन बातों का ध्यान
इस एक्सरसाइज के दौरान कुछ सावधानियां बरतना जरूरी होता है, ताकि चोट लगने का खतरा न रहे। सबसे पहले, सही वजन चुनें, जो आपके शरीर के लिए उपयुक्त हो। बहुत ज्यादा या बहुत कम वजन उठाने से बचें।अपनी पीठ को सीधा रखें, ताकि रीढ़ पर अनावश्यक दबाव न पड़े और संतुलन बना रहे। अगर किसी भी प्रकार का दर्द महसूस हो, तो तुरंत रुक जाएं और डॉक्टर की सलाह लें।

इसके साथ करें ये अन्य एक्सरसाइज
अगर आप एक्सरसाइज में बदलाव चाहते हैं तो सिंगल आर्म डेडलिफ्ट या स्नैच ग्रिप डेडलिफ्ट्स जैसी विविधताएं आजमाएं। ये एक्सरसाइज अलग-अलग मांसपेशियों पर काम करती हैं और नई चुनौती देती हैं।इसके अलावा, आप इन्हें स्क्वाट या बेंट ओवर रो जैसी अन्य एक्सरसाइज के साथ जोड़ सकते हैं, ताकि पूरे शरीर का विकास हो सके और कसरत में विविधता आ सके।इन बदलावों से आपकी पकड़ की ताकत भी बढ़ेगी और एक्सरसाइज का मजा भी दोगुना होगा।

(आर एन एस )


सुबह-सुबह सूर्य नमस्कार करना सेहत के लिए होता है फायदेमंद, ऐसे डालें इसकी आदत

सुबह के समय सूर्य नमस्कार करना स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है। यह न केवल शरीर को ताजगी देता है, बल्कि मानसिक शांति भी प्रदान करता है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि कैसे आप सुबह के समय सूर्य नमस्कार करने की आदत डाल सकते हैं और इसके क्या-क्या फायदे होते हैं। यह लेख सभी उम्र के लोगों के लिए उपयोगी होगा, खासकर उन लोगों के लिए, जो अपनी दिनचर्या में थोड़ा बदलाव लाना चाहते हैं।

सही तरीके से शुरुआत करें
सूर्य नमस्कार की शुरुआत करने से पहले अपने शरीर को हल्का गर्म कर लें। इससे मांसपेशियों में खिंचाव नहीं होगा और चोट लगने का खतरा कम रहेगा।शुरुआत में धीरे-धीरे यह एक्सरसाइज करें और हर आसन पर ध्यान दें। अगर आप पहली बार कर रहे हैं, तो किसी विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होगा, ताकि आप सही तरीके से इसे सीख सकें। इससे आपको सही तकनीक का ज्ञान होगा, जिससे अभ्यास अधिक प्रभावी होगा और शरीर का लचीलापन बढ़ेगी।

नियमितता बनाए रखें
सूर्य नमस्कार का फायदा तभी मिलता है, जब इसे नियमित रूप से किया जाए। इसे रोजाना एक ही समय पर करने की कोशिश करें, ताकि यह आपकी दिनचर्या का हिस्सा बन सके।इससे आपके शरीर को इसकी आदत हो जाएगी और आप ज्यादा ऊर्जावान महसूस करेंगे। नियमित अभ्यास से न केवल आपका शरीर लचीला बनेगा, बल्कि मानसिक शांति भी मिलेगी।यह आदत आपको दिनभर तरोताजा और सक्रिय बनाए रखेगी, जिससे आपके काम करने की क्षमता भी बढ़ेगी।

सांसों पर ध्यान दें
सूर्य नमस्कार करते समय सांसों पर ध्यान देना बेहद जरूरी होता है। हर आसन के साथ धीरे-धीरे और सही तरीके से सांस लें और छोड़ें।इससे आपकी श्वसन प्रणाली मजबूत होगी और मानसिक शांति मिलेगी। गहरी सांस लेने से तनाव कम होता है और मन शांत रहता है, जिससे आप बेहतर तरीके से ध्यान केंद्रित कर पाते हैं।यह प्रक्रिया शरीर को ऊर्जा देती है और आपको दिनभर तरोताजा महसूस करवाती है।

धीरे-धीरे अभ्यास का समय बढ़ाएं
शुरुआत में 5-10 मिनट तक सूर्य नमस्कार करें, ताकि आपका शरीर इस अभ्यास का आदी हो सके। धीरे-धीरे इसका समय बढ़ाएं और ध्यान दें कि आपका शरीर कैसे प्रतिक्रिया करता है।जैसे-जैसे आप इसे नियमित रूप से करते रहेंगे, आपकी मांसपेशियां मजबूत होंगी। इससे आपको बेहतर संतुलन और शारीरिक शक्ति मिलेगी।अधिक समय तक अभ्यास करने से आप मानसिक रूप से भी शांत महसूस करेंगे और दिनभर ऊर्जावान रहेंगे। यह प्रक्रिया आपके स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगी।

खुद को प्रेरित रखें
खुद को प्रेरित रखने के लिए अपने अनुभवों को लिखें और दोस्तों के साथ साझा करें, जो इस प्रक्रिया में आपकी मदद कर सकते हैं।इससे आपको नई दृष्टि मिलेगी और आप अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित कर पाएंगे। सकारात्मक सोच बनाए रखें और अपनी प्रगति को मापने के लिए छोटे-छोटे लक्ष्यों का निर्धारण करें।यह आदत आपको लंबे समय तक प्रेरित रखेगी और सूर्य नमस्कार का अभ्यास जारी रखने में मदद करेगी।

(आर एन एस )


चाय पीने के शौकीन हो जाएं सावधान, ज्यादा पीने से शरीर को होते हैं ये नुकसान

सर्दियों में चाय की चुस्की लेना भला किसे पसंद नहीं होता है। गर्मियों में जो लोग चाय अवॉइड करते हैं, वे लोग भी सर्दियों में चाय पीना खूब पसंद करते हैं। भारत में अधिकांश लोगों को दूध वाली मीठी चाय पीना पसंद होता है. कई लोग तो पूरे दिन भर में 5-10 चाय तक पी जाते हैं। अगर आप भी इतनी चाय पीने के शौकीन हैं तो जरा सावधान हो जाइए। क्योंकि ज्यादा चाय पीने से कई तरह की स्वास्थ परेशानियां हो सकती हैं. खासतौर से गर्भवती महिलाओं को चाय पीने से बचना चाहिए, क्योंकि इसमें कैफीन होता है।आइए जानते हैं इसके बारे में।

बढ़ सकती है दिल की धडक़न
जो लोग ज्यादा चाय पीते हैं उनकी दिल की धडक़न बढ़ सकती है। चाय में कैफीन मौजूद होता है, जो सीमित मात्रा में एनर्जी और मेडिटेशन करने में मदद करता है। लेकिन अधिक मात्रा में कैफीन का सेवन अनिद्रा, बेचैनी और दिल की धडक़न बढऩे का कारण बन सकता है।

पेट दर्द या एसिडिटी की समस्या
कभी भी खाली पेट चाय नहीं पीनी  चाहिए. जो लोग खाली पेट चाय पीते हैं या बार-बार चाय पीने से पेट में एसिड बढ़ सकता है. जिससे पेट दर्द, एसिडिटी और गैस की समस्या हो सकती है। कुछ मामलों में, यह अल्सर का कारण भी बन सकता है।

हो सकती है खून की कमी
जो लोग ज्यादा चाय पीते हैं उनमें खून की कमी हो सकती है। चाय में टैनिक एसिड पाया जाता है, जो शरीर में आयरन के अवशोषण को कम कर देता है. खासकर जो लोग पहले से एनीमिया यानी खून की कमी से जूझ रहे हैं, उनके लिए ज्यादा चाय पीना खतरनाक साबित हो सकता है।

चाय पीने का सही तरीका
विशेषज्ञों का मानना है कि दिन में 2-3 कप चाय पीना उचित है। इसके अलावा, चाय पीने का समय भी मायने रखता है। खाली पेट चाय पीने से बचें और खाने के तुरंत बाद चाय न पिएं।

(आर एन एस )


क्या सभी ‘सलाद ड्रेसिंग’ होती है सेहतमंद, जानिए इस मिथक की सच्चाई

सलाद खाना सेहत के लिए अच्छा होता है, क्योंकि इसमें कई पौष्टिक सब्जियां शामिल होती हैं। लोगों का मानना है कि इसमें इस्तेमाल होने वाली ड्रेसिंग भी सेहतमंद होती हैं। हालांकि, बाजार में मिलने वाली कई ड्रेसिंग में अधिक मात्रा में शक्कर, सोडियम और अप्राकृतिक तत्व होते हैं, जो आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं।आइए इस लेख के माध्यम से जानते हैं कि सभी सलाद ड्रेसिंग सेहतमंद होती हैं या नहीं।

घर पर बनी ड्रेसिंग हैं बेहतर विकल्प
घर पर बनी सलाद ड्रेसिंग अक्सर बाजार में मिलने वाली सलाद ड्रेसिंग की तुलना में ज्यादा सेहतमंद होती है। इसमें आप जैतून का तेल, नींबू का रस, नमक और काली मिर्च जैसी ताजी और प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा, आप इसमें अपनी पसंद के अनुसार जड़ी बूटियां और मसाले भी डाल सकते हैं। इससे न केवल सलाद का स्वाद बढ़ता है, बल्कि यह आपके स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होती है।

चीनी और सोडियम की मात्रा पर ध्यान दें
बाजार में मिलने वाली सलाद ड्रेसिंग में अधिक मात्रा में शक्कर और सोडियम होता है। अगर आप इन्हें नियमित रूप से खाते हैं तो ये तत्व आपकी सेहत के लिए हानिकारक हो सकते हैं। इसलिए हमेशा लेबल पढ़ें और कम शक्कर व सोडियम वाली ड्रेसिंग चुनें। इसके अलावा, कोशिश करें कि ड्रेसिंग में प्राकृतिक सामग्री हो और अप्राकृतिक तत्व न हों।इस तरह आप अपनी सेहत का ध्यान रख सकते हैं और सलाद को सचमुच सेहतमंद बना सकते हैं।

अप्राकृतिक तत्वों से बचें
कई सलाद ड्रेसिंग में अप्राकृतिक तत्व होते हैं, जो शरीर के लिए अच्छे नहीं होते। इनमें प्रिजर्वेटिव्स, आर्टिफिशियल फ्लेवर्स और रंग शामिल हो सकते हैं, जो सेहत के लिए हानिकारक हो सकते हैं।इनसे बचने के लिए हमेशा प्राकृतिक सामग्री वाली या घर पर बनाई गई ड्रेसिंग का उपयोग करें। घर पर बनी ड्रेसिंग में आप ताजी सामग्री का उपयोग कर सकते हैं, जिससे न केवल स्वाद बढ़ता है, बल्कि स्वास्थ्य का भी समर्थन होता है।

कैलोरी की मात्रा को नजरअंदाज न करें
सलाद को सेहतमंद मानते हुए हम अक्सर उसकी ड्रेसिंग की कैलोरी को नजरअंदाज कर देते हैं। कुछ तैयार सलाद ड्रेसिंग बहुत ज्यादा कैलोरी युक्त होती हैं, जो आपके वजन बढऩे का कारण बन सकती हैं। इसलिए हमेशा कम कैलोरी वाली ड्रेसिंग चुनें या फिर घर पर ही हल्की-फुल्की सामग्री से अपनी खुद की ड्रेसिंग बनाएं।सभी सलाद ड्रेसिंग सेहतमंद नहीं होती हैं। सही जानकारी और समझदारी के साथ इनका चुनाव करना जरूरी है, ताकि आप स्वस्थ बने रहें।

(आर एन एस )


क्या केवल नारियल पानी पीने से ठीक हो जाता है हैंगओवर? आइए जानें इसकी सच्चाई

नारियल पानी को अक्सर हैंगओवर का इलाज बताया जाता है। लोग मानते हैं कि यह शरीर को हाइड्रेट करता है और हैंगओवर के लक्षणों को कम करता है। नारियल पानी में पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं, जो शरीर को ऊर्जा देने में मदद करते हैं। हालांकि, यह जानना जरूरी है कि केवल नारियल पानी पीने से इस समस्या का समाधान होता है या नहीं। आइए इस लेख के जरिए इस मिथक की सच्चाई जानते हैं।

क्या नारियल पानी है हैंगओवर का इलाज?
नारियल पानी में इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं, जो शरीर को हाइड्रेट करने में मदद करते हैं। यह शरीर में तरल पदार्थ की कमी को पूरा करता है, जिससे आप ताजगी महसूस कर सकते हैं। हालांकि, सिर्फ हाइड्रेशन ही हैंगओवर का इलाज नहीं कर सकता। शराब पीने से सिरदर्द, मतली और कमजोरी जैसी समस्याएं होती हैं। इसलिए, केवल नारियल पानी पीने से सभी समस्याओं का समाधान नहीं होता और आपको अन्य उपाय भी अपनाने चाहिए।

पोषक तत्वों की कमी
शराब पीने के बाद शरीर में कई पोषक तत्वों की कमी हो जाती है, जिससे कमजोरी और थकान महसूस होती है। नारियल पानी में कुछ विटामिन और मिनरल होते हैं, जो शरीर को थोड़ी राहत दे सकते हैं। हालांकि, यह सभी जरूरी पोषक तत्वों की पूर्ति नहीं कर सकता। इसलिए, संतुलित डाइट लेना भी जरूरी होता है, ताकि शरीर को सभी आवश्यक पोषक तत्व मिल सकें और आप जल्दी ठीक हो सकें।

हैंगओवर के इलाज के वैज्ञानिकों द्वारा बताए गए तरीके
वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि नारियल पानी से हैंगओवर के दौरान थोड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन इसे एकमात्र उपाय मानना गलत होगा।बेहतर होगा कि आप पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, पौष्टिक खाना खाएं और आराम करें, ताकि आपका शरीर जल्दी ठीक हो सके।इसके अलावा, विटामिन और मिनरल से भरपूर फलों का सेवन भी फायदेमंद होता है। हैंगओवर से बचने के लिए अच्छी नींद लेना भी जरूरी है।

हैंगओवर मिटाने के अन्य उपाय
हैंगओवर से बचने के लिए केवल नारियल पानी पर निर्भर न रहें। इसके साथ पर्याप्त नींद लें, एक्सरसाइज करें और ताजगी देने वाले फलों का सेवन करें।ये सब मिलकर आपके स्वास्थ्य को बेहतर बनाएंगे और आपको जल्दी ठीक होने में मदद करेंगे। नारियल पानी अकेले ही हैंगओवर का पूरा समाधान नहीं हो सकता। इसे एक सहायक उपाय के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, पर अन्य स्वस्थ आदतें अपनाना भी उतना ही जरूरी है।

(आर एन एस)


फलों का स्वाद नमकीन क्यों नहीं होता? जानिए खट्टे-मीठे फलों पर नमक डालकर खाना सही या गलत

फल हर कोई खाता है. किसी को खट्टे-मीठे यूं ही खाना पसंद होता है तो कोई उनके ऊपर स्वाद बढ़ाने के लिए नमक या मसाला डालकर खाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि फलो का स्वाद मीठा या खट्टा तो होता है लेकिन कभी नमकीन क्यों नहीं होता? या आप जो फलों पर नमक या मसाला डालकर खाते हैं तो इससे आपकी सेहत को कोई नुकसान तो नहीं होता, अगर नहीं तो ये खबर आपके लिए है। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।

फल नमकीन क्यों नहीं होते?
आमतौर पर कोई भी फल नमकीन नहीं होता है. इसमें नमक की मात्रा पैदा करने वाले नेचुरल सिस्टम की कमी होती है। पौधे शुगर और एसिड को नेचर के जरिए अपने सिस्टम से प्रोसेस कर सकते हैं लेकिन नमक यानि सोडियम क्लोराइड नहीं. आमतौर पर मिट्टी से पौधों में कुछ नमक जरूर आता है लेकिन बहुत सीमित मात्रा में. अगर ये ज्यादा हो जाए तो पौधे की ग्रोथ और बीज से पौधा बनने की प्रक्रिया पर असर डाल सकते हैं।

दुनिया का एकमात्र नमकीन फल
अपवाद के तौर पर कुछ फलों में नमक की थोड़ी मात्रा हो सकती है, लेकिन इसके बाद भी उनमें नमकीन स्वाद नहीं होता. कई फल ऐसे होते हैं जिसमें बहुत कम मात्रा में सोडियम होता है. हालांकि दुनिया का एक फल ऐसा है जो नमकीन होता है, इसे पिगफेस फ्रूट कहते हैं. ये दुर्लभ माना जाता है। ये आस्ट्रेलिया में पाया जाता है।

फल कम या ज्यादा मीठा क्यों होता है?
आपने महसूस किया होगा कि कुछ फल ज्यादा मीठे या खट्टे होते हैं जबकि कुछ कम. ऐसा फलों में मौजूद फ्रक्टोज़, सेल्यूलोज, विटामिन, स्टार्च, एसिड और प्रोटीन के कारण उनमें मिठास और खट्टेपन की मात्रा अलग अलग होती है। जिन फलों में शर्करा ज्यादा होती है, उनका स्वाद मीठा होता है, जिनमें अम्लों की मात्रा ज़्यादा होती है, उनका स्वाद खट्टा होता है. तो कुल मिलाकर  पौधों में मुख्य रूप से प्राकृतिक शर्करा (जैसे फ्रक्टोज़) और अम्ल (जैसे साइट्रिक एसिड) मौजूद होते हैं. ये उसके स्वाद को निर्धारित करते हैं।

फलों में नमक डालकर खाना चाहिए या नहीं?
विज्ञान के अनुसार नमक के साथ फल खाने से स्वास्थ्य पर पॉजिटिव और निगेटिव दोनों तरह के कई प्रभाव पड़ सकते हैं. नमक डालने से कुछ फलों के स्वाद चटपटे हो जाते हैं, जिससे उन्हें खाने में ज्यादा स्वाद आता है। ये खट्टे या कच्चे फलों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है. साइंस कहती है कि नियमित रूप से नमक के साथ फल खाने से अत्यधिक सोडियम का सेवन हो सकता है। उससे हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और स्ट्रोक का रिस्क हो सकता है. फिर फलों पर नमक छिडक़ने से उनमें पानी निकल सकता है, जिससे कुछ पोषक तत्व खराब हो सकते हैं. यानि किसी फल से जितना लाभ मिल सकता है, वो नहीं मिलेगा।

(आर एन एस )


सर्दियों में आइसक्रीम खाना सही है या नहीं? जानिए डाइटिशियन की राय

सर्दियों में आईसक्रीम खाना ट्रेंड बनता जा रहा है. अक्सर लोग बाहर घूमने जाते हैं तो आइसक्रीम खाना तो बनता है. सर्दियो में लोगों को आइसक्रिम खाने में मजा भी आ रहा है.  कुछ लोग इस समय पहाड़ों की बर्फबारी का मजा लेना पसंद करते हैं, तो कुछ समुद्र किनारे छुट्टियां बिताते हैं. क्या आप जानते हैं कि सर्दियों में आइसक्रीम खाना कितना सही है? जहां एक तरफ आइसक्रीम का मजा हर उम्र के लोगों को आता है, वहीं दूसरी तरफ सर्दियों में इसका ज्यादा सेवन करना नुकसानदायक हो सकता है. इस पर विशेषज्ञों की राय जानना बेहद जरूरी है।

क्या सर्दियों में आइसक्रीम खाना सेफ है?
डाइटिशियन के मुताबिक, किसी भी मौसम में आइसक्रीम का ज्यादा सेवन हेल्द के लिए सही नहीं है.आइसक्रीम में शुगर और कैलोरी की मात्रा अधिक होती है, जो वजन बढ़ाने के साथ-साथ कई स्वास्थ्य समस्याएं भी पैदा कर सकती है. खासकर सर्दियों में इसे खाने से बचना चाहिए।

सर्दियों में ठंड के कारण शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, जिससे शरीर का इम्यून सिस्टम कमजोर हो सकता है. इस दौरान आइसक्रीम खाने से सर्दी-जुकाम, खांसी और अन्य इंफेक्शन्स का खतरा बढ़ जाता है।

अगर आइसक्रीम खाने का मन करे तो क्या करें?
डाइटिशियन का कहना है कि अगर आपको आइसक्रीम खाने का बहुत मन कर रहा हो, तो इसे दिन के समय (दोपहर या शाम) में कम मात्रा में खा सकते हैं। लेकिन रात में आइसक्रीम खाने से बचना चाहिए, क्योंकि ठंड के कारण सर्दी-जुकाम का खतरा और बढ़ सकता है।

(आर एन एस )


क्यों आती है पढ़ाई करते समय नींद ? आलस नहीं झपकी लगने के हैं और भी कारण

बच्चे हो या फिर युवा अक्सर ऐसा सभी के साथ होता है कि किताब खोलते ही नींद आने लगती है। क्या आपको पता है इसके पीछे आलस नहीं कई और भी कारण होते हैं। यहां जानिए कारण।

पढ़ते समय नींद की झपकी आना सामान्य बात है। कई बार कोई भी बुक या मैग्जीन पढ़ते हुए ऐसा लगता है कि आंखें अपने आप बंद हो जाएंगी। आइए जानते हैं पढ़ते समय नींद आने के कारण।

मानसिक मेहनत
पढ़ाई करते समय हमारी मानसिक मेहनत होती है. ये थका देने वाली प्रक्रिया होती है. जब भी हम पढ़ते हैं तो उस दौरान हमारा दिमाग लगातार नई जानकारी को हासिल करने और उसे प्रोसेस करने की कोशिश करता है। यह मानसिक मेहनत हमारे शरीर को थका देती है और नींद आने लगती है।

स्लीप साइकिल गड़बड़ होना
जिन लोगों की स्लीप साइकल गड़बड़ होती है उन्हें भी पढ़ते समय झपकी आती है. अगर आप रात को पूरी नींद नहीं लेते हैं, तो दिन में आपको नींद आना स्वाभाविक है. अनियमित स्लीप साइकिल आपके शरीर की नेचुरल स्लीप-वेक साइकिल को बाधित करता है और आपको दिन में थका हुआ महसूस कराता है।

एक ही पोजीशन में पढऩा
एक ही पोजीशन में पढऩे की वजह से भी आपको नींद आ सकती है. अगर आप एक ही पोजीशन में लंबे समय तक बैठकर पढ़ते हैं या अकेले कमरे में पढ़ते हैं, तो आपका शरीर और दिमाग जल्दी थक सकता है, जिसके कारण नींद आने लगती है।

स्वास्थ्य समस्याएं भी हैं कारण
अगर आपको किसी भी तरह की कोई स्वास्थ्य समस्या है तो भी आपको नींद आ सकती है. कुछ स्वास्थ्य समस्याएं जैसे कि एनीमिया, थायरॉइड समस्याएं और डिप्रेशन भी पढ़ते समय नींद आने का कारण बन सकती हैं।

(आर एन एस )


हिचकी से राहत पाने के लिए इन चार तरीकों से इस्तेमाल करें ‘डिल सीड ऑयल’

हिचकी आना एक आम समस्या है, जो कभी भी और कहीं भी हो सकती है। इससे निपटने के कई तरीके हैं, लेकिन क्या आपने कभी डिल सीड ऑयल का इस्तेमाल करने के बारे में सोचा है? यह एसेंशियल ऑयल प्राकृतिक रूप से हिचकी को रोकने में मदद कर सकता है। डिल सीड ऑयल का इस्तेमाल करके आप हिचकी से राहत पा सकते हैं।आइए इसके कुछ खास इस्तेमाल और तरीके जानते हैं, जिनसे आप इसे आजमा सकते हैं।

डिल सीड ऑयल की मालिश करें
हिचकी आने पर पेट पर हल्की मालिश करना बहुत फायदेमंद हो सकता है।इसके लिए आप डिल सीड तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस तेल को हल्का गर्म करके पेट पर गोलाकार गति में मालिश करें। इससे मांसपेशियों को आराम मिलेगा और हिचकी कम होगी।यह उपाय न केवल हिचकी को रोकने में मदद करता है, बल्कि पेट की अन्य समस्याओं से भी राहत दिला सकता है।

पानी में मिलाकर पिएं
डिल सीड ऑयल को पानी में मिलाकर पीना भी एक अच्छा उपाय है।इसके लिए एक गिलास गुनगुने पानी में 2-3 बूंदें डिल सीड ऑयल की डालें और धीरे-धीरे पिएं।यह उपाय आपके पाचन तंत्र को शांत करेगा और हिचकी से राहत दिलाएगा। इससे आपके पेट की मांसपेशियों को भी आराम मिलेगा, जिससे हिचकी जल्दी ठीक हो सकती है। इस विधि का उपयोग करने से आपको तुरंत राहत मिल सकती है और यह पूरी तरह से प्राकृतिक तरीका है।

भाप लें
भाप लेना भी हिचकी रोकने का एक असरदार तरीका हो सकता है।इसके लिए एक बर्तन में गर्म पानी लें और उसमें 2-3 बूंदें डिल सीड तेल डालें। अब इस पानी से निकलने वाली भाप को अपने मुंह और नाक से अंदर लें। इससे आपकी सांस लेने की प्रक्रिया सुधरेगी और हिचकी कम होगी। यह उपाय आपके श्वसन तंत्र को भी आराम देगा और आपको तुरंत राहत मिलेगी।

चाय बनाएं
आप चाहें तो डिल सीड तेल की चाय भी बना सकते हैं।लाभ के लिए एक कप गर्म पानी में 2-3 बूंदें तेल की डालकर इसे अच्छे से मिलाएं और धीरे-धीरे पिएं। यह चाय आपके शरीर को आराम देगी और हिचकी दूर करेगी। इस चाय का सेवन करने से न केवल हिचकी में राहत मिलेगी, बल्कि यह आपके पाचन तंत्र को भी बेहतर बनाएगी और आपको ताजगी का अनुभव होगा।

(आर एन एस )


क्या आप जानते हैं सर्दियों में कितने गिलास पानी पीना चाहिए? कहीं लापरवाही न पड़ जाए भारी

हमारे शरीर का 50 से 70 फीसदी हिस्सा पानी से बना होता है। हालांकि, यह फीसदी व्यक्ति की एज, जेंडर, वेट, और बॉडी टाइप के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। आमतौर पर सर्दियों के मौसम में लोग कम पानी पीते हैं। ठंडी हवाओं के कारण प्यास नहीं लगती है. आमतौर पर लोगों को लगता है शरीर में पानी की कमी की समस्या सिर्फ गर्मियों के मौसम में होती है, हालांकि, यह बात एकदम गलत है। मौसम चाहे गर्मी का हो या सर्दी का, सभी लोगों के लिए प्रतिदिन जरूरी मात्रा में पानी या तरल पदार्थों का सेवन बेहद जरूरी होता है। क्योंकि शरीर में पानी की कमी किसी भी मौसम में हो सकती है। इसके कारण कई बार शरीर में कुछ गंभीर समस्याओं व अवस्थाओं का कारण भी बन सकती है।

जानकारों और चिकित्सकों सभी का कहना है तथा कई शोधों में भी इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि शरीर में पानी की कमी होना या डिहाइड्रेशन होना ना सिर्फ कुछ रोगों के होने की आशंका को बढ़ा सकता है बल्कि यह कई बार आम और गंभीर, दोनों प्रकार के रोगों के रिस्क को भी बढ़ा सकता है. इसलिए, हमें ठंड के मौसम खाना खाने से ज्यादा पानी की मात्रा पर ध्यान देना जरूरी होता है।

सर्दियों में एक व्यक्ति को कितने गिलास पानी पीना चाहिए?
सर्दियों में सुबह से लेकर रात तक पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की आदत बनाएं। सर्दियों के दौरान प्यास न होने पर भी दिन में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी पिएं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जो पुरुष शारीरिक रूप से एक्टिव होते हैं उन्हें दिन में 10 से 14 गिलास पानी पीना चाहिए। वहीं, महिलाओं को 8 से 12 गिलास तक पानी पीना चाहिए। इसके अलावा आप पानी की जगह जूस, दूध, चाय और नारियल पानी भी पी सकते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होती है और कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं भी पैदा नहीं होती हैं।

मोटापा एक समस्या है
कम पानी पीने से मोटापे का खतरा बढ़ जाता है। हम एक दिन में कितना खाना खाते हैं इसके आधार पर हमें उतना ही पानी पीना चाहिए जितना हमारे शरीर को चाहिए. अन्यथा खाया हुआ भोजन पच नहीं पाता है. इससे मोटापा बढ़ता है।

बदबू
कम पानी पीने से गला और मुंह सूखने की समस्याएं हो सकती है. इस कारण मुंह में बैक्टीरिया भी जमा हो जाते हैं और मुंह से दुर्गंध भी आती है. इसके अलावा, जब शरीर निर्जलित होता है, तो पसीना आना और पेशाब आना कम हो जाता है. इससे शरीर से विषैले पदार्थ बाहर नहीं निकल पाते और इससे अधिक स्वास्थ्य समस्याएं पैदा होती हैं।

सिरदर्द
कम पानी पीने से सिरदर्द की समस्या बढ़ जाती है. दरअसल, यह समस्या पानी की कमी के कारण मस्तिष्क कोशिकाओं के अस्थायी रूप से सिकुडऩे के कारण होती है। शरीर में पानी की कमी के कारण पेट में एसिड का निर्माण बढ़ जाता है। इससे पेट में गैस बनने लगती है और कब्ज सहित सीने में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

थकान, शुष्क त्वचा
शरीर को एक्टिव रूप से कार्य करने के लिए पानी आवश्यक होती है। अगर शरीर में पानी की कमी हो तो थोड़ा सा भी काम करने पर आपको थकान महसूस हो सकती है. शरीर में पानी की कमी से त्वचा में रूखापन, काले घेरे, खुजली और झुर्रियां जैसी समस्याएं होने लगती हैं।

डिहाइड्रेशन के लक्षण
डॉक्टरों का कहना है कि वैसे तो हर उम्र में शरीर में पानी की कमी के लक्षण लगभग एक जैसे ही ही हैं लेकिन उम्र के अनुसार कभी-कभी कुछ लक्षण अलग भी हो सकते हैं। विशेषतौर पर छोटे बच्चों में पानी की कमी होने पर मुंह और जीभ पर खुश्की, रोने पर आंसुओं में कमी तथा कम पेशाब आने जैसे लक्षण भी नजर आ सकते हैं।

(आर एन एस )


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