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क्या आप जानते हैं बालों में तेल लगाना क्यों है जरुरी, अगर नही, तो जान लीजिए इसके फायदे 

Category Archives: जीवन शैली

क्या आप जानते हैं बालों में तेल लगाना क्यों है जरुरी, अगर नही, तो जान लीजिए इसके फायदे 

सर्दी के मौसम में यदि बालों का ध्यान सही से न रखा जाए तो बाल काफी परेशान करते हैं। इस मौसम में बालों का झड़ना, बालों में रूखापन और दोमुंहे बालों का होना जैसी समस्याएं सामने आती हैं। ऐसे में बड़े-बुजुर्ग लगातार बालों में तेल लगाने की सलाह देते हैं। बहुत से लोगों को ऐसा लगता है कि तेल लगाने से बाल काफी कमजोर हो जाते हैं, जबकि ऐसा नहीं हैं। यहां हम आपको बालों में तेल लगाने के फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं, ताकि आप नियमित रूप से बालों में तेल लगाएं। इसकी वजह से आपको काफी फायदा मिलेगा।

बालों को मिलता है पोषण

यदि आप नियमित रूप से बालों में तेल लगाएंगे तो बालों की जड़ों को गहराई से पोषण मिलेगा। इसकी वजह से बाल काफी ज्यादा मजबूत बनते हैं। ऐसे में आप हफ्ते में दो से तीन बार बालों में तेल लगा सकते हैं।

हेयर फॉल में होगी गिरावट

सही तेल लगाने से जड़ों की मजबूती बढ़ती है, जिससे बालों का झड़ना कम होता है। विशेष रूप से नारियल तेल, बादाम तेल और आंवला तेल इस समस्या में फायदेमंद होते हैं। ऐसे में अपने हेयर टाइप से हिसाब से तेल का चयन करें, और इसका इस्तेमाल करें।

बालों की वृद्धि में मदद करता है

यदि आप बालों में नियमित रूप से तेल का इस्तेमाल करेंगे तो तेल बालों के रोम को सक्रिय करता है और रक्त प्रवाह को बेहतर करता है, जिससे बाल तेजी से बढ़ते हैं। इस्तेमाल के समय बस ध्यान रखें कि ये आपके हेयर टाइप का ही होना चाहिए।

डैंड्रफ कम करता है

अभी जब सर्दी का मौसम चल रहा है, तो इस मौसम में स्कैल्प का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है। नीम, टी ट्री, और नारियल तेल जैसे एंटी-फंगल गुणों वाले तेल स्कैल्प को साफ रखते हैं और डैंड्रफ को कम करते हैं। तेल लगाने से बालों में प्राकृतिक नमी बनी रहती है, जो सूखापन और टूटने से बचाता है।

दोमुंहे बालों को रोकता है

तेल लगाने से बालों में नमी और पोषण बना रहता है, जिससे दोमुंहे बाल कम होते हैं। ऐसे में यदि आप दोमुंहे बालों से परेशान हैं, तो नियमित रूप से तेल मालिश करें। इससे आपके फायदा अवश्य मिल जाएगा।

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क्या आपको भी अक्सर रहता है सिर में दर्द, अगर हां, तो हो जाइए सावधान, इस बीमारी का हो सकता है लक्षण

क्या आपको अक्सर सिर में दर्द होता रहता है? कुछ स्थितियों जैसे तेज शोर, तेज रोशनी, ठंड या गर्मी के कारण ये समस्या बढ़ जाती है? अगर हां तो सावधान हो जाइए, ये माइग्रेन का लक्षण हो सकता है। माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल विकार है, जो मुख्यरूप से सिर के एक हिस्से में दर्द, असहजता और उल्टी-मितली जैसी दिक्कतें पैदा करता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर आपको अक्सर माइग्रेन होता रहता है तो इसपर गंभीरता से ध्यान दें। कुछ मामलों में माइग्रेन अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्या के कारण होने वाली समस्या भी हो सकती है, इसके अलावा दीर्घकालिक रूप में माइग्रेन कई प्रकार की गंभीर समस्याओं का कारण भी बन सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, माइग्रेन क्यों होता है इसका सटीक कारण अभी तक पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है, हालांकि कुछ स्थितियां इसको बढ़ाने वाली हो सकती हैं। यदि आपके परिवार में किसी को माइग्रेन की समस्या रही है, तो अन्य लोगों में भी इसका खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा मस्तिष्क में कुछ प्रकार के रसायनिक असंतुलन के कारण भी ये समस्या हो सकती है। डॉक्टर कहते हैं, इस समस्या पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए।

पोषक तत्वों की कमी और माइग्रेन का खतरा

अध्ययनों से पता चलता है कि शरीर में कुछ प्रकार के विटामिन्स और मिनरल्स की कमी के कारण भी माइग्रेन की समस्या हो सकती है या फिर ये ट्रिगर हो सकती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि माइग्रेन से पीड़ित लोगों में मैग्नीशियम की कमी होने की आशंका दूसरों की तुलना में अधिक होती है। अध्ययनों से पता चलता है कि मैग्नीशियम का सप्लीमेंट लेने से माइग्रेन के सिरदर्द को रोकने में मदद मिल सकती है। इस विषय पर किए गए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि डॉक्टर की सलाह पर अगर एक ग्राम मैग्नीशियम सप्लीमेंट लिया जाए तो आम दवा की तुलना में ये तीव्र माइग्रेन अटैक को कम करने में प्रभावी हो सकती है। आहार में मैग्नीशियम युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करने से सिरदर्द की समस्या से बचाव करने में मदद मिल सकती है।

माइग्रेन के कारण स्ट्रोक का खतरा

माइग्रेन का आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभाव हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पाया कि माइग्रेन से पीड़ित लोगों में अवसाद, चिंता और घबराहट संबंधी विकारों जैसी मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों का खतरा अन्य लोगों की तुलना में अधिक होती है। इसके अलावा माइग्रेन से पीड़ित लोगों में नींद संबंधी विकारों का खतरा भी अधिक देखा जाता रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में इस बात को लेकर भी चिंता जताई गई है कि माइग्रेन की दीर्घकालिक स्थित आपके जीवनकाल में इस्केमिक स्ट्रोक होने के जोखिम को लगभग दोगुना कर सकती है।

माइग्रेन रोगियों को बरतनी चाहिए सावधानी

अध्ययनकर्ता कहते हैं, यह प्रमाणित नहीं होता है कि माइग्रेन की समस्या सीधे तौर पर स्ट्रोक का कारण बनती है, हालांकि अगर आपको माइग्रेन है तो आपको स्ट्रोक का खतरा थोड़ा अधिक हो सकता है। माइग्रेन से पीड़ित व्यक्ति जो धूम्रपान भी करते हैं उन्हें स्ट्रोक का जोखिम अधिक होता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ठंड के प्रति संवेदनशील लोगों को माइग्रेन होने की आशंका अधिक होती है। ऐसे में सर्दियों में सिरदर्द, खासतौर पर माइग्रेन से बचाव के लिए प्रयास करते रहना बहुत आवश्यक हो जाता है। इसके लिए जरूरी है कि आप ठंड से बचाव करें। दिनचर्या में व्यायाम को शामिल करने से आपको लाभ मिल सकता है, व्यायाम करने से सेरोटोनिन का स्तर बढ़ता है जो इसके जोखिमों को कम कर सकता है। सर्दियों में सिर को अच्छे से कवर करें, इससे भी माइग्रेन से बचाव किया जा सकता है।

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हाइड्रोजन युक्त पानी पीने के हैं कई फायदे, आइए जानते है इससे होने वाले स्वास्थ्य लाभ

अच्छी सेहत के लिए पौष्टिक आहार का सेवन जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है दिनभर में खूब पानी पीते रहना। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को दिनभर में तीन-चार लीटर तक पानी पीते रहने की सलाह देते हैं। पानी की मात्रा के साथ-साथ इसकी गुणवत्ता का ध्यान रखना भी आपके लिए बहुत आवश्यक हो जाता है। जिस तरह से जल में अशुद्धियां बढ़ती जा रही हैं, स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को ये सुनिश्चित करना चाहिए कि आप साफ और स्वच्छ जल का ही सेवन करें।

हाइड्रोजन युक्त और एल्कलाइन पानी को अपने विशेष स्वास्थ्य संबंधी फायदों के लिए दुनिया भर में पहचान मिल रही है। हाइड्रोजन युक्त पानी में फ्री हाइड्रोजन मॉलिक्यूल्स होते हैं, जिन्हें अपने शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए जाना जाता है जो हानिकारक फ्री रेडिकल्स से आपको बचाते हैं। हाइड्रोजन युक्त पानी और इससे होने वाले स्वास्थ्य लाभ का चर्चा होती रहती है, आइए इससे होने वाले स्वास्थ्य लाभ के बारे में जानते हैं।

हाइड्रोजन युक्त पानी पीने के फायदे

हाइड्रोजन (एच2) के कई फायदे हो सकते हैं। माना जाता रहा है कि है कि पानी में अतिरिक्त एच2 मिलाने से आपके स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है। कई गंभीर और क्रोनिक बीमारियों के खतरे को कम करने में भी इससे लाभ देखा गया है। लिवर कैंसर से पीड़ित 49 लोगों पर किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि रेडिएशन थेरेपी के दौरान 6 सप्ताह तक हाइड्रोजन युक्त पानी पीने से उपचार के दौरान जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है। हाइड्रोजन युक्त पानी रेडिएशन के दुष्प्रभावों को कम करने में भी आपके लिए मददगार हो सकता है।
इतना ही नहीं इसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटीएजिंग और एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण भी होते हैं जिन्हें सेहत के लिए बहुत लाभकारी माना जाता रहा है।
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एंटीऑक्सीडेंट गुण बढ़ाते हैं इम्युनिटी
हाइड्रोजन युक्त पानी में एंटीऑक्सीडेंट हो सकते हैं। एंटीऑक्सीडेंट ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को रोकने में मदद करते हैं। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कैंसर जैसी कई प्रकार की गंभीर और क्रोनिक बीमारियों को कम करने के लिए भी जाना जाता है। एंटीऑक्सीडेंट आपके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं जिससे संक्रामक बीमारियों की स्थिति में हमारा शरीर इससे अच्छे से मुकाबलाकर पाता है।

जिस तरह से दुनियाभर में कई प्रकार की संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है, ऐसे में इम्युनिटी को बढ़ाने के लिए आप पौष्टिक आहार के साथ-साथ पानी की गुणवत्ता पर ध्यान देकर भी लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

त्वचा की दिक्कतें भी होती हैं दूर
हाइड्रोजन युक्त पानी अपने एंटीऑक्सीडेंट गुणों के साथ एंटी-एजिंग गुणों के लिए भी जाना जाता है। त्वचा को स्वस्थ रखने और त्वचा में निखार लाने के लिए भी आप हाइड्रोजन युक्त पानी का सेवन कर सकते हैं। हाइड्रोजन युक्त पानी रक्त प्रवाह और ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ावा देने में मदद करती है।

एंटी-इन्फ्लेमेटरी प्रभावों के फायदे
हाइड्रोजन युक्त पानी में एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण भी होते हैं, ये लाइफस्टाइल से संबंधित कई तरह की बीमारियों जैसे डायबिटीज, मोटापा और फेफडों की समस्याओं को कम करने में भी फायदेमंद है। शरीर में इन्फ्लेमेशन बढ़ने के साथ क्रोनिक बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। कम उम्र से ही एंटी-इन्फ्लेमेटरी चीजों के सेवन और हाइड्रोजन युक्त पानी पीने की आदत बनाकर आप इन बीमारियों से बचाव कर सकते हैं।


क्या आप रोजाना अच्छी नींद ले पा रहे हैं? अगर नहीं, तो आपकी सेहत पर हो सकता है इसका दुष्प्रभाव 

अच्छी सेहत के लिए पौष्टिक आहार और नियमित व्यायाम जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है रोज रात में अच्छी और गहरी नींद लेना। तमाम अध्ययनों से पता चलता है कि वयस्कों को रोजाना रात में कम से कम 6-9 घंटे की गहरी नींद जरूर लेनी चाहिए। एक रात भी अगर आपकी नींद पूरी नहीं होती है तो अगले दिन सेहत पर इसका दुष्प्रभाव हो सकता है। क्या आप अच्छी नींद ले पा रहे हैं?

ये सवाल इसलिए क्योंकि हाल के वर्षों में नींद न आने की समस्या (अनिद्रा) के मामलों में काफी वृद्धि हुई है। वयस्कों से लेकर बुजुर्ग तक सभी आयु के लोगों को इसका शिकार देखा जा रहा है। अनिद्रा क्या किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का कारण है या इसकी वजह से आपको कोई गंभीर बीमारी हो सकती है? नींद की समस्याओं से छुटकारा कैसे पाया जा सकता है, आइए इन सबके बारे में विस्तार से समझते हैं।

नींद न आने की समस्या (अनिद्रा)

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार की सेहत को ठीक बनाए रखने के लिए अच्छी नींद की जरूरत होती है। नींद के दौरान शरीर में कई प्रकार की रासायनिक क्रियाएं होती हैं, हार्मोन्स उत्पादित होते हैं जो आपको स्वस्थ रखने और तरोताजा बनाए रखने में मदद करते हैं। हालांकि आधुनिक जीवनशैली, तनाव और अन्य कई कारकों के कारण बहुत से लोग नींद न आने की समस्या से जूझ रहे हैं।

यह समस्या न केवल थकावट का कारण बनती है, बल्कि गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का रूप भी ले सकती है। दीर्घकालिक रूप में इसके कारण हापरटेंशन और अवसाद जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।

नींद की गोलियों या ‘मेलाटोनिन की गोलियों’ की न बनाएं आदत

अक्सर लोग नींद की समस्याओं को दूर करने के लिए ‘मेलाटोनिन’ टेबलेट लेना शुरू कर देते हैं। मेलाटोनिन एक हार्मोन है जो आपका मस्तिष्क अंधेरे के प्रति प्रतिक्रिया में पैदा करता है। यह आपके सर्कैडियन रिदम (आंतरिक घड़ी) और नींद में मदद करता है। बाजार में मेलाटोनिन के स्तर को कंट्रोल करने के लिए कई टेबलेट मौजूद हैं। यह सप्लीमेंट मस्तिष्क में पीनियल ग्रंथि द्वारा स्वाभाविक रूप से उत्पादित हार्मोन का एक सिंथेटिक वर्जन होते हैं जो नींद लाने में मददगार हो सकते हैं।

हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इस सप्लीमेंट पर निर्भर होने से बचना चाहिए। नई दिल्ली स्थित एक अस्पताल में स्लीप संबंधित श्वसन विकारों की डॉक्टर नीतू जैन कहती हैं, अनिद्रा की समस्या में मेलाटोनिन का सहारा नहीं लेना चाहिए। आप पहले ये समझने की कोशिश करिए कि नींद न आने की वजह क्या है और उसमें कैसे सुधार किया जा सकता है?

नींद न आने की समस्या कई तरह से नुकसानदायक

नींद विकारों की समस्या कई प्रकार से आपकी शारीरक और मानसिक सेहत को प्रभावित करने वाली हो सकती है। अनिद्रा की दिक्कत बने रहने के कारण थकान और ऊर्जा की कमी तो होती ही है साथ ही आपकी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने,मोटापा और हृदय रोग की समस्या, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज का जोखिम भी बढ़ जाता है।

मानसिक स्वास्थ्य पर भी नींद की कमी के दुष्प्रभाव हो सकते हैं। इसके कारण आपको एकाग्रता और याददाश्त कमजोर होने, अवसाद और चिड़चिड़ापन की समस्या होने, उत्पादकता में कम का जोखिम रहता है। लंबे समय तक नींद की दिक्कत बने रहने के कारण डिमेंशिया और अल्जाइमर जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।

कैसे पाएं आराम?

विशेषज्ञ कहते हैं, दवाओं पर निर्भर होने की जगह स्लीप हाइजीन में सुधार करें। इसके लिए रोज सोने का एक समय रखना, अपने दिमाग को आराम देने वाले उपाय जैसे मेडिटेशन-अच्छे संगीत सुनना, शरीरिक रूप से सक्रिय रहना और सोने से कम से कम एक घंटे पहले स्क्रीन या डिवाइस से दूर रहना शामिल है।

समय पर न सोना और जागना, काम के घंटे बदलना या रात को देर तक काम करना नींद के चक्र को प्रभावित करता है। मोबाइल-कंप्यूटर जैसे उपकरणों से निकलने वाली नीली रोशनी मेलाटोनिन हार्मोन के उत्पादन को बाधित करती है, जिससे नींद नहीं आती। इनमें सुधार जरूरी हैं।

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थायरॉइड को नजरअंदाज करना हो सकता है हानिकारक, शरीर के अंगों को करता है प्रभावित

थायरॉइड मनुष्य के शरीर में एक छोटी, लेकिन शक्तिशाली ग्रंथि है। इसको नजरअंदाज करना बहुत हानिकारक साबित हो सकता है, क्योंकि यह पूरे शरीर पर प्रभाव डालती है। यह ग्रंथि फिट रहने के रहस्यों को जानने के लिए आवश्यक है। खराब जीवनशैली बड़ी वजह है। इन्हीं सब बातों के मद्देनजर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) जनवरी माह को थायरॉइड जागरूकता माह के रूप में मनाता है।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, थायरॉइड रोग गंभीर और यहां तक कि जानलेवा भी होते हैं, लेकिन आमतौर पर इनका इलाज संभव है। इनका उपचार किया जा सकता है। इसे लक्षणों के आधार पर पहचाना जा सकता है। थायरॉइड, गर्दन के सामने स्थित एक छोटी सी तितली के आकार की ग्रंथि है। यह शरीर के हार्मोन बनाने का काम करती है। थायरॉइड हार्मोन शरीर के कई अंगों को प्रभावित करते हैं, जैसे कि दिल की धड़कन, सांस लेना, वजन, पाचन और मूड खराब होना।

2 तरह की समस्या
जब थायरॉइड जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाता है तो इसे हाइपरथायरायडिज्म कहते हैं। इससे शरीर के कई काम तेज हो जाते हैं। इसके लक्षण  हैं चिड़चिड़ापन, ज्यादा पसीना आना, घबराहट, दिल की धड़कन का बढ़ना, वजन कम होना, भूख ज्यादा लगना, मांसपेशियों में कमजोरी और दर्द होना। जब थायरॉइड जरूरत से कम हार्मोन बनाता है तो इसे हाइपोथायरायडिज्म कहते हैं। इससे शरीर के कई काम धीमे हो जाते हैं। थायरॉइड स्टॉर्म, यह हाइपरथायरायडिज्म से पीड़ित लोगों को हो सकती है। यह एक दुर्लभ और जानलेवा स्थिति है।

थायरॉइड स्टॉर्म का एक प्रमुख लक्षण जो इसे सामान्य हाइपरथायरायडिज्म से अलग करता है वह है शरीर के तापमान में उल्लेखनीय वृद्धि है जो 105-106 फारेनहाइट तक हो सकता है। थायरॉइड स्टॉर्म असामान्य है, लेकिन जब ऐसा होता है तो यह जीवन के लिए खतरा बन सकता है। इसके लक्षणों का अनुभव करने वाले लोगों को तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए।

उम्र, आयोडीन की कमी जैसे कई कारण
खराब जीवनशैली और अव्यवस्थित खानपान इसके सबसे बड़े कारण हैं। इसके अलावा लंबे समय से स्ट्रेस, ज्यादा उम्र, आयोडीन की कमी, वायरल इंफेक्शन, आनुवंशिकता के कारण भी होता है। महिलाओं में यह पुरुषों के मुकाबले ज्यादा देखने को मिलता है। महिलाओं में इसके और भी कई कारण हो सकते हैं जैसे हार्मोनल असंतुलन, गर्भावस्था के बाद शारीरिक बदलाव, अवसाद। दुनियाभर में करीब 27 करोड़ लोग और भारत में लगभग चार करोड़ लोग थायरॉइड से संबंधित समस्याओं से पीड़ित हैं।

इसके अलावा दूसरे सर्वेक्षण के अनुसार 60 वर्ष से अधिक आयु के 13 और 19 वर्ष से कम आयु के 5 फीसदी लोग थायरॉइड की समस्या से पीड़ित हैं। इसका सबसे बड़ा कारण अव्यवस्थित दिनचर्या और पूरी तरह से गतिहीन जीवनशैली है।

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क्या रोजाना एक गिलास दूध पीने से कम होता है आंतों का कैंसर, जानिए क्या कहते हैं शोधकर्ता

अच्छी सेहत के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को स्वस्थ और पौष्टिक चीजों को सेवन की सलाह देते हैं। ज्यादातर विशेषज्ञ कहते हैं कि बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी उम्र के लोगों को रोजाना एक गिलास दूध जरूर पीना चाहिए। दूध को संपूर्ण आहार माना जाता है, ये कैल्शियम के साथ-साथ कई प्रकार के विटामिन्स का भी खजाना है। हड्डियों और दांतों की मजबूती के लिए दूध या अन्य डेयरी उत्पादों को आहार का हिस्सा बनाना आपके लिए बहुत लाभकारी हो सकता है। पर क्या आप जानते हैं कि दूध से होने वाले लाभ सिर्फ हड्डियों और दांतों को सेहतमंद रखने तक ही सीमित नहीं है?

हाल ही में किए गए एक अध्ययन में विशेषज्ञों ने बताया कि दूध से होने वाले अब तक के फायदों के अलावा ये आपको कैंसर के खतरे से भी बचाने में मददगार है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, इन फायदों को देखते हुए सभी लोगों को दूध को आहार में जरूर शामिल करना चाहिए। आइए जानते हैं कि दूध को किस कैंसर से बचाव में लाभकारी पाया गया है?

दूध पीने से कम होता है आंतों के कैंसर का खतरा

नेचर कम्युनिकेशंस जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि रोजाना एक गिलास दूध पीना आपको बाउल कैंसर (आंत के कैंसर) के खतरे से बचा सकता है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने इस शोध में दूध से होने वाले इस फायदे के बारे में जानकारी दी है। शोधकर्ताओं ने इसके लिए 16 वर्षों के दौरान पांच लाख से अधिक प्रतिभागियों में 97 प्रकार के आहार-पोषक तत्वों और आंत के कैंसर के जोखिम के बीच संबंध की जांच की। इसमें पाया गया कि कैल्शियम युक्त गहरे रंग की पत्तेदार सब्जियां, दूध-डेयरी उत्पाद आपके लिए काफी लाभकारी हो सकते हैं।

आहार में बढ़ाएं कैल्शियम की मात्रा

शोधकर्ताओं ने अध्ययन में बताया कि डेयरी उत्पाद संभवत आंतों के कैंसर के जोखिम को कम करते हैं। दूध और अन्य डेयरी उत्पादों में कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है, इसे ही सबसे लाभप्रद पाया गया है। शोध से पता चलता है कि आहार में प्रतिदिन अतिरिक्त 300 मिलीग्राम कैल्शियम (दूध का एक बड़ा गिलास के बराबर) आपके जोखिम को 17% तक कम करने में सहायक हो सकता है। ऑक्सफोर्ड के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. केरेन पेपियर ने कहा, ये अध्ययन आंतों के कैंसर को रोकने में डेयरी उत्पादों के संभावित सुरक्षात्मक भूमिका को उजागर करती है, जो मुख्य रूप से कैल्शियम के कारण होता है।

कैंसर से कैसे बचाता है कैल्शियम?

कैल्शियम को हड्डियों को मजबूत बनाने और दांतों को स्वस्थ रखने के लिए एक महत्वपूर्ण खनिज के रूप में जाना जाता रहा है, अब इस बात के प्रमाण मिले हैं कि यह कुछ प्रकार के कैंसर से भी बचाता है। अध्ययन में कहा गया है कि आपकी बड़ी आंत में कैल्शियम पित्त एसिड और फ्री फैटी एसिड के साथ बाइंड हो जाता है, जिससे इनके संभावित कैंसरकारी प्रभाव कम हो जाते हैं।

डेयरी उत्पादों के अलावा साबुत अनाज, फल, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और विटामिन-सी के सेवन से भी कैंसर का खतरा कम हो सकता है, लेकिन इसका असर कम देखा गया है। दूध और कैल्शियम युक्त अन्य पदार्थ आपकी सेहत के लिए बहुत लाभकारी हो सकते हैं।

क्या कहते हैं शोधकर्ता?

अध्ययन के निष्कर्ष में वैज्ञानिकों ने बताया, शराब और रेड मीट आप में कैंसर के खतरे को 8-15 प्रतिशत तक बढ़ाने वाले पाए गए हैं। जबकि दूध-कैल्शियम युक्त पदार्थ खतरे को कम करते हैं।

शोधकर्ताओं ने कहा, यह एक अवलोकनात्मक अध्ययन है, न कि परीक्षण आधारित। इसलिए यह स्पष्ट रूप से साबित नहीं होता कि कैल्शियम या कोई अन्य खाद्य पदार्थ सभी लोगों में कैंसर के खतरे को कम करते हैं। हालांकि अध्ययन की रिपोर्ट इस दिशा में आशाजनक जरूर है। दूध में मौजूद पोषक तत्व हमारी सेहत को कई प्रकार से लाभ पहुंचाते हैं।

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क्या आप भी दिन में कई-कई बार करते हैं फेसवॉश का इस्तेमाल, स्किन को हो सकता है नुकसान 

सर्दी का मौसम चल रहा है। इस मौसम में हर किसी को अपनी त्वचा का ध्यान अलग से रखना पड़ता है। यदि त्वचा का सही से ध्यान न रखा जाए तो इसकी वजह से परेशानी बढ़ जाती है और चेहरा काफी डल दिखने लगता है। ऐसे में दिन-भर की धूल मिट्टी को चेहरे से हटाने के लिए लोग दिन में कई-कई बार फेसवॉश का इस्तेमाल करते हैं।

फेसवॉश त्वचा की सफाई के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण उत्पाद है। यह त्वचा से गंदगी, तेल, और मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद करता है, लेकिन इसका सही चयन और उपयोग आवश्यक है, खासकर सर्दियों में।

यदि सर्दी के मौसम में आप गलत तरीके से इसका इस्तेमाल करेंगे तो आपकी त्वचा खिलने की जगह डल हो जाएगी। जो देखने में भी अजीब लगेगी। यहां हम आपको सर्दी में बार-बार फेसवॉश इस्तेमाल करने से होने वाले नुकसानों के बारे में बताने जा रहे हैं।

त्वचा की नमी कम होना

ठंड के मौसम में त्वचा शुष्क हो जाती है। ऐसे में यदि आप फेसवॉश का बार-बार उपयोग करते हैं या ऐसा फेसवॉश चुनते हैं जो कठोर केमिकल्स से बना हो, तो यह त्वचा की प्राकृतिक नमी छीन लेता है, जिससे त्वचा खिंची-खिंची और असहज महसूस होती है।

हो सकती है त्वचा में जलन और खुजली

फेसवॉश में मौजूद सल्फेट्स और अल्कोहल जैसे तत्व सर्दी के मौसम में त्वचा को अधिक संवेदनशील बना सकते हैं, जिससे खुजली और जलन हो सकती है। इसलिए इस्तेमाल से पहले इसमें पाए जाने वाले तत्वों के बारे में जान लें।

ड्राई पैचेस और फ्लेकी स्किन

ठंडे मौसम में हार्श फेसवॉश का उपयोग त्वचा को अत्यधिक शुष्क बना सकता है, जिससे चेहरे पर रूखे धब्बे (ड्राई पैचेस) और फ्लेकी त्वचा हो सकती है। ऐसी त्वचा देखने में काफी अजीब लगती है।

त्वचा का अधिक संवेदनशील होना

ठंड में त्वचा पहले से ही संवेदनशील होती है। ऐसे में बार-बार फेसवॉश का उपयोग इसे और अधिक संवेदनशील बनाता है, जिससे फटी हुई त्वचा, लालिमा, और सूजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में यदि आप इसका इस्तेमाल कर रहे हैं तो दिन में एक ही बार करें।

एंटी-एक्ने फेसवॉश का प्रभाव

बढ़ती उम्र में लोग एंटी-एक्ने फेसवॉश का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें सैलिसिलिक एसिड या बेंज़ॉयल पेरॉक्साइड जैसे तत्व होते हैं। ये तत्व त्वचा को ज्यादा रूखा और असहज बना सकता है।

इस्तेमाल करते समय इसका रखें ध्यान

सर्दियों में फेसवॉश का सही तरीके से उपयोग करना बहुत जरूरी है। गलत फेसवॉश या इसके अधिक उपयोग से त्वचा को नुकसान हो सकता है। हमेशा माइल्ड और त्वचा को हाइड्रेट रखने वाले उत्पादों का चयन करें और मॉइस्चराइजर का उपयोग न भूलें। इससे आपकी त्वचा स्वस्थ और चमकदार बनी रहेगी।

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बालों में नींबू लगाने के होते है कई नुकसान, आइए जानते है इसके इस्तेमाल का सही तरीका

आजकल की बिगड़ी हुई लाइफस्टाइल और सर्दी के बीच में यदि त्वचा और बालों का ध्यान सही से न रखा जाए तो काफी परेशानी सामने आने लगती है। ऐसे में लोग अपनी त्वचा का ध्यान तो रख लेते हैं, लेकिन परेशानी तब सामने आती है, जब बारी है बालों का ध्यान रखने की। बालों की देखभाल के लिए ज्यादातर लोगों को घरेलू नुस्खे अपनाना पसंद है। इन्हीं नुस्खों में नींबू का इस्तेमाल काफी सही माना जाता है।
बालों में नींबू का उपयोग आमतौर पर बालों की देखभाल और स्कैल्प की समस्याओं को ठीक करने के लिए किया जाता है। हालांकि, इसका उपयोग सही तरीके से और सीमित मात्रा में किया जाना चाहिए। बालों में नींबू लगाने के फायदे और नुकसान दोनों हो सकते हैं। इसके फायदे तो तकरीबन हर किसी को पता होते हैं, हम यहां आपको बालों में नींबू इस्तेमाल करने के नुकसान बताएंगे।

बालों का रूखापन बढ़ेगा
नींबू के रस में अम्लीय गुण होते हैं, जो बालों के प्राकृतिक तेलों को कम कर सकते हैं, जिससे बाल रूखे और बेजान हो सकते हैं। ऐसे में यदि आपके बाल काफी ड्राई हैं तो इसके इस्तेमाल से बच के रहें।

स्कैल्प में होगी जलन
संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में नींबू का सीधा संपर्क जलन, खुजली या लालिमा पैदा कर सकता है। इसलिए यदि आपकी त्वचा काफी सेंसेटिव है तो इसके इस्तेमाल से बचें। वरना आपको ही परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

उड़ने लगेगा बालों का रंग
नींबू के रस में ब्लीचिंग गुण होते हैं, जो बालों के प्राकृतिक रंग को हल्का कर सकते हैं, विशेषकर यदि इसे धूप में लगाया जाए। इसलिए यदि नींबू का इस्तेमाल बालों में कर रहे हैं तो उसे पहले चेक कर लें कि कहीं ये आपके बालों के रंग को फीका तो नहीं कर रहा।

होगा हेयर फॉल
अत्यधिक अम्लीयता बालों की संरचना को कमजोर कर सकती है, जिससे बाल आसानी से टूट सकते हैं। इसके अलावा जब नींबू बालों को ड्राई कर देता है, तब भी बाल टूटने लगते हैं। इसलिए इसका इस्तेमाल सोच के ही करें।

स्कैल्प हो जाएगा ड्राई
नींबू का अधिक उपयोग सिर की त्वचा को सूखा बना सकता है, जिससे डैंड्रफ या अन्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे में यदि आपके साथ पहले से ही डैंड्रफ की समस्या है तो स्कैल्प पर नींबू के इस्तेमाल से बचें।

ऐसे कर सकते हैं इस्तेमाल
इन समस्याओं से बचने के लिए नींबू के रस को सीधे बालों पर लगाने के बजाय,इसे पानी या अन्य प्राकृतिक तेलों के साथ मिलाकर उपयोग करना चाहिए। साथ ही उपयोग से पहले पैच टेस्ट करना महत्वपूर्ण है।

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ठंड से अकड़ते पैरों को राहत दिलाने में इन योगासनों से मिलेगी मदद

सर्दियों में कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं की आशंका बढ़ जाती है। जुकाम-खांसी के अलावा वायरल फीवर और पेट से जुड़ी समस्याएं सर्दियों के मौसम में आम है। इसके अलावा इस मौसम में शारीरिक सक्रियता कम होने के कारण शरीर में अकड़न और दर्द भी आम समस्या है। कई लोग ऐसे भी हैं, जिन्हें ठंड के मौसम में पैरों की अकड़न का सामना करना पड़ता है। पैरों में अकड़न से रक्त संचार प्रभावित होता है।

योग न केवल शरीर को गर्माहट होता है, बल्कि मांसपेशियों को भी राहत देने में मददगार है। सर्दियों में योग के अभ्यास से रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। इससे शरीर को गर्माहट मिलती है और शारीरिक सक्रियता बढ़ती है, जिससे शरीर में लचीलापन आता है और ठंड से अकड़ते पैरों में राहत दिलाने में भी मदद मिलती है । आइए जानते हैं पैरों की अकड़न कम करने वाले योगासनों के बारे में।

मलासन
मलासन के अभ्यास से पैरों और एड़ियों की जकड़न कम हो सकती है। मलासन योग करने से कूल्हों और कमर की जकड़न से राहत मिलती है। यह योग गर्भावस्था के लिए भी फायदेमंद है। शरीर का लचीलापन बढ़ाने और पाचन को बेहतर बनाने के लिए मलासन का अभ्यास कर सकते हैं। मलासन के अभ्यास के लिए स्क्वाट की मुद्रा में बैठकर हाथों को नमस्कार स्थिति में रखें।

ताड़ासन
ताड़ासन का अभ्यास पैरों की मांसपेशियों को स्ट्रेच करता है और रक्त संचार को बढ़ाता है। ताड़ासन करने से जांघों, घुटनों और टखनों को मजबूती मिलती है। ताड़ासन करने से शरीर की हर मांसपेशी का इस्तेमाल होता है और शरीर में खिंचाव आता है, जिसे लचीलापन और लंबाई दोनों बढ़ती है। इस आसन के अभ्यास के लिए सीधे खड़े होकर हाथों को ऊपर उठाएं और एड़ियों पर खड़े हों। 10-15 सेकंड तक इसी स्थिति में रुकें।

वीरभद्रासन
इस आसन को योद्धा मुद्रा के नाम से भी जाना जाता है। यह योग मांसपेशियों को मजबूत बनाने और लचीलापन बढ़ाने में मदद करता है। कूल्हों, जांघों और कंधों की मांसपेशियों में खिंचाव  लाने और लचीलापन बढ़ाने में वीरभद्रासन असरदार योग क्रिया है। पैरों की मजबूती और ठंड से अकड़न दूर करने के लिए वीरभद्रासन का अभ्यास फायदेमंद हो सकता है। इस आसन को करने के लिए एक पैर आगे और दूसरा पीछे फैलाएं। आगे वाले घुटने को मोड़ें और हाथ ऊपर उठाएं।

(साभार)


हर बात पर हो जाता है मूड खराब, खाने में इन फूड को करें शामिल, स्ट्रेस लेवल होगा कम

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव या स्ट्रेस एक आम समस्या बन चुकी है। इसका सीधा असर हमारे मूड पर पड़ता है। मूड खराब होना, चिड़चिड़ापन महसूस करना आदि, तनाव के सामान्य लक्षण हैं। इसका कारण होता है कार्टिसोल हार्मोन का बढऩा.कई बार शरीर में मैग्नीशियम की कमी के कारण यह समस्या और बढ़ जाती है. ऐसे में मैग्नीशियम से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन आपके तनाव को कम करने और मूड को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। अगर आप भी स्ट्रेस से परेशान हैं, तो अगली बार इन हेल्दी स्नैक्स को आजमाएं। ये न केवल आपके मूड को बूस्ट करेंगे, बल्कि आपकी सेहत के लिए भी फायदेमंद होंगे।

हल्दी वाली लस्सी  
हल्दी वाले दूध के फायदे तो आपने सुने होंगे, लेकिन अब हल्दी वाली लस्सी का स्वाद और फायदा लें. हल्दी वाली लस्सी तनाव कम करने में बहुत कारगर है. इसे बनाने के लिए दही में हल्दी, शहद, पंपकिन सीड्स और बारीक कटे बादाम मिलाएं. यह जिंक और मैग्नीशियम से भरपूर होती है, जो कार्टिसोल लेवल को कम करती है और मूड को बेहतर बनाती है।

सफेद चने का सलाद
सफेद चने का सलाद न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि यह आपकी सेहत के लिए भी लाभकारी है. इसे बनाने के लिए उबले हुए सफेद चनों में खीरा, टमाटर, जीरा पाउडर, काली मिर्च, नींबू का रस और काला नमक मिलाएं। यह सलाद फाइबर, विटामिन ष्ट और मैग्नीशियम से भरपूर है, जो आपको दिनभर ऊर्जावान बनाए रखता है और तनाव को दूर करता है।

अलसी और ज्वार के लड्डू
अलसी और ज्वार से बने लड्डू न केवल टेस्टी होते हैं, बल्कि ये आपके कार्टिसोल लेवल को भी कंट्रोल करते हैं. इन्हें आप आसानी से घर पर बना सकते हैं. ये लड्डू मैग्नीशियम से भरपूर होते हैं और आपका मूड बूस्ट करने में मदद करते हैं।

हल्दी, दूध और अखरोट
रात को सोने से पहले हल्दी वाला गर्म दूध पीना शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है. इसमें अगर बारीक कटे हुए अखरोट डाल दिए जाएं, तो इसका असर और बढ़ जाता है. यह मैग्नीशियम और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जो न केवल तनाव को कम करता है, बल्कि आपको बेहतर नींद भी देता है।

घी में रोस्ट मखाने
मखाने, (जो मैग्नीशियम का एक अच्छा स्रोत हैं) को घी में भूनकर खाना न केवल टेस्टी है, बल्कि यह आपकी सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है. यह स्नैक ओमेगा-3 फैटी एसिड की कमी को पूरा करता है और स्ट्रेस लेवल को भी कम करता है।

(आर एन एस )


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