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अमृतसर में हथियार तस्करों का भंडाफोड़, चार आरोपी गिरफ्तार

Category Archives: क्राइम

अमृतसर में हथियार तस्करों का भंडाफोड़, चार आरोपी गिरफ्तार

पुलिस और बीएसएफ की संयुक्त कार्रवाई में आठ पिस्तौल और मैगजीन बरामद

पंजाब- पंजाब में हथियार और नशा तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत अमृतसर देहाती पुलिस और बीएसएफ ने संयुक्त ऑपरेशन में बड़ी सफलता हासिल की है। कार्रवाई के दौरान चार तस्करों को गिरफ्तार किया गया, जिनके कब्जे से आठ अवैध पिस्तौल और कई मैगजीन बरामद की गईं।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान लखविंदर सिंह और हरप्रीत सिंह (दोनों निवासी डांडे, अमृतसर) तथा आकाशदीप सिंह और गुरप्रीत सिंह (निवासी कसेल, तरनतारन) के रूप में हुई है।

डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि खुफिया सूचना मिली थी कि पाकिस्तान से सरहद पार हथियारों की खेप भेजी गई है। आरोपियों ने इन हथियारों को सीमा से रिसीव किया और इन्हें पंजाब के अलग-अलग जिलों में गैंगस्टरों तक पहुंचाने की योजना बना रहे थे।

पुलिस और बीएसएफ की सतर्कता से चारों आरोपियों को पहले ही ट्रैप लगाकर गिरफ्तार कर लिया गया।

प्राथमिक जांच में सामने आया है कि ये सभी आरोपी लंबे समय से नशा और हथियारों की तस्करी में सक्रिय हैं। फिलहाल इनके खिलाफ थाना घरिंडा में मामला दर्ज कर जांच जारी है, ताकि इनके नेटवर्क और सरगनाओं का भी खुलासा हो सके।


झुग्गी बस्ती में बच्चा चुराने आई महिला गिरफ्तार

महिला का दावा—पति पहले ही बेच चुका है एक बच्चा 10 हजार रुपये में

29 जून को लापता हुआ था 9 साल का बच्चा, इलाके में फैली थी दहशत

हरयाणा- अंबाला छावनी के सरकारी कॉलेज के पास झुग्गियों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब स्थानीय लोगों ने एक महिला को बच्चा चुराने की कोशिश करते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। भीड़ ने महिला को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया।

पूछताछ में महिला ने बताया कि वह राजस्थान की रहने वाली है और उसका पति पहले ही एक बच्चा 10 हजार रुपये में जालंधर में बेच चुका है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, 29 जून को 9 साल का एक बच्चा इलाके से गायब हो गया था। जब महिला दोबारा झुग्गियों के पास संदिग्ध हालात में घूमती नजर आई तो लोगों ने शक के आधार पर पकड़ लिया।

सदर थाना प्रभारी अजायब सिंह ने बताया कि महिला को डायल 112 की टीम ने थाने में सौंपा है और उससे गहराई से पूछताछ की जा रही है।


वेलकम में ई-रिक्शा मालिक की चाकू मारकर हत्या, तीन नाबालिग गिरफ्तार

शराब पीने से रोका तो हुआ हमला, मृतक को पहले भी मिल चुकी थीं धमकियां

दिल्ली –  वेलकम इलाके में सोमवार रात ई-रिक्शा मालिक मुस्तकीम अहमद (39) की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। वह जनता कॉलोनी में किराया लेने गए थे, जहां कुछ युवक शराब पी रहे थे। विरोध करने पर उन पर चाकुओं से ताबड़तोड़ वार किए गए। अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

घटना के तुरंत बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। देर रात तीन नाबालिगों को हत्या के आरोप में पकड़ लिया गया। उनके पास से वारदात में इस्तेमाल चाकू भी बरामद हुआ है।

परिजनों का कहना है कि मुस्तकीम को पहले से जान से मारने की धमकियां मिल रही थीं। कुछ महीने पहले उन्होंने इसकी शिकायत भी की थी। उन्हें शक है कि हत्या की वजह शराब पीने से मना करना नहीं, बल्कि कोई पुरानी रंजिश हो सकती है।

मुस्तकीम अपने परिवार के साथ न्यू जाफराबाद में रहते थे। चार दिन पहले ही उनके घर बेटे का जन्म हुआ था। पहले भी एक बेटी की दिल की बीमारी के कारण मौत हो चुकी है। अब एक और दुखद घटना ने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया है।

पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और अन्य पहलुओं पर भी गौर किया जा रहा है।


दसूहा में पुलिस टीम पर हमला, जवाबी फायरिंग में दो घायल

नशा तस्करों की सूचना पर पहुंची पुलिस टीम पर भीड़ ने किया हमला, आत्मरक्षा में चलानी पड़ी गोली

पंजाब- दसूहा के गांव बुद्धोबरकत में मंगलवार देर रात नशा तस्करी की सूचना पर कार्रवाई के लिए गई पुलिस टीम पर स्थानीय लोगों ने हमला कर दिया। हालात बेकाबू होने पर पुलिस को आत्मरक्षा में गोलियां चलानी पड़ी, जिसमें दो व्यक्ति घायल हो गए।

दसूहा के डीएसपी बलविंदर सिंह जोड़ा ने बताया कि 112 हेल्पलाइन पर सूचना मिली थी कि गांव में नशे का धंधा चल रहा है। इस पर थाने से सब-इंस्पेक्टर सरबजीत सिंह और सुखदेव सिंह को मौके पर भेजा गया। दोनों अधिकारी जब गांव पहुंचे तो वे पहले वहां के पूर्व सरपंच भूपिंदर सिंह के घर गए, जिनकी पत्नी वर्तमान में गांव की सरपंच हैं।

पुलिस ने भूपिंदर सिंह से सहयोग मांगा, लेकिन वह पुलिस टीम से उलझने लगा। तभी कुछ अन्य ग्रामीण भी वहां इकट्ठा हो गए और पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने आत्मरक्षा में फायरिंग की, जिससे दो लोग घायल हो गए।

घायल पुलिसकर्मियों को उपचार के लिए दसूहा के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के संबंध में कुल 24 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और पुलिस ने आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।


फार्मा फर्जीवाड़ा: सहसपुर में खुलासा, युवक की पहचान का दुरुपयोग कर बेची जा रही थीं नकली दवाएं

देहरादून/सहसपुर। बिहार के एक युवक को नौकरी का झांसा देकर उसके दस्तावेज के आधार पर फर्जी दवा कंपनी खोलने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सहसपुर पुलिस ने आरोपी नवीन बंसल के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपी राजस्थान के भिवाड़ी का रहने वाला है और दवाओं का अवैध कारोबार करता था।

डिलीवरी बॉय की पहचान चुराकर खोली फर्जी कंपनी
बिहार के नालंदा जिले के सहोकर गांव निवासी डब्लू कुमार ने सहसपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। वर्तमान में वह जोमैटो में डिलीवरी बॉय के तौर पर काम कर रहा है। डब्लू कुमार ने बताया कि वर्ष 2020 में वह भिवाड़ी (राजस्थान) की एक फैक्ट्री में कार्यरत था, जहां उसकी मुलाकात नवीन बंसल नामक एक व्यक्ति से हुई। बंसल ने खुद को गुड़गांव स्थित एक दवा कंपनी का मालिक बताया और अधिक वेतन पर नौकरी देने का झांसा देकर उसके दस्तावेज ले लिए।

बैंक खाता, चेकबुक, सिम और दस्तावेजों का दुरुपयोग
डब्लू कुमार के अनुसार, आरोपी ने वेतन खाता खुलवाने के नाम पर उसका आधार, पैन कार्ड और एक सिम कार्ड ले लिया। साथ ही खाली स्टाम्प पेपर और चेकबुक पर भी हस्ताक्षर करवाए। बाद में उसके नाम से ‘रीलाइन फार्माटेक’ नामक फर्जी दवा कंपनी खोली गई। इस कंपनी के माध्यम से आरोपी ने देहरादून के सहसपुर क्षेत्र में स्थित डॉक्टर मित्तल लेबोरेट्री सहित अन्य कंपनियों से दवाएं मंगवाकर हरियाणा और राजस्थान में बेचीं।

नामी कंपनियों के नकली लेबल लगाकर बेचता था दवाएं
जांच में यह भी सामने आया कि नवीन बंसल सहसपुर की फार्मा कंपनियों से थोक में दवा बनवाकर उस पर नामचीन ब्रांडों के नकली लेबल लगाकर बाजार में सप्लाई करता था। पूरा फर्जीवाड़ा डब्लू कुमार की पहचान के सहारे किया गया, जिससे कि कोई शक उस पर न आए।

पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा, जांच जारी
सहसपुर थानाध्यक्ष शंकर सिंह बिष्ट ने बताया कि एसएसपी एसटीएफ नवनीत सिंह भुल्लर के निर्देश पर आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी व आईटी अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की जांच जारी है और आरोपी की तलाश की जा रही है।


धर्मांतरण की साजिश या कुछ और? लापता आशा नेगी केस में चुप है पूरा सिस्टम

देहरादून/मेरठ। उत्तराखंड की एक बेटी आशा नेगी पिछले सात वर्षों से लापता है। परिजनों का आरोप है कि वह धर्मांतरण के मास्टरमाइंड छांगुर बाबा के करीबी गुर्गे बदर अख्तर सिद्दीकी के जाल में फंसी और फिर अचानक गायब हो गई। वर्ष 2018 से लेकर अब तक ना तो पुलिस ने एफआईआर दर्ज की और ना ही किसी स्तर पर कोई ठोस जांच शुरू की गई है।

2018 में हुई थी आखिरी बातचीत
उत्तराखंड के मूल निवासी और मेरठ में कार्यरत आशा नेगी वर्ष 2016-17 में नोएडा सेक्टर 62 की एक निजी कंपनी में एचआर पद पर कार्यरत थीं। उसी दौरान उसकी पहचान बदर अख्तर सिद्दीकी से हुई, जो उस पर प्रेम जाल बुनने और जबरन धर्मांतरण कराने का आरोपी है। अप्रैल 2018 में आशा की अपने छोटे भाई सुनील से आखिरी बार बात हुई थी। इसके बाद वह अचानक लापता हो गई।

भाई को भेजे थे सबूत, फिर भी नहीं हुई कोई कार्रवाई
आशा के भाई अनिल नेगी ने बताया कि लापता होने से ठीक पहले आशा ने बदर अख्तर के पासपोर्ट, आधार और ड्राइविंग लाइसेंस की कॉपियां उन्हें भेजी थीं। यही नहीं, उसने भाई को अपनी घायल अवस्था की तस्वीरें भी व्हाट्सएप पर भेजी थीं, जिनमें उसके साथ हुई बर्बरता स्पष्ट दिखती है।

शिकायत भी दर्ज नहीं की पुलिस ने
परिजनों ने साल 2019 में मेरठ के सिविल लाइंस थाने में एफआईआर दर्ज करवाने का प्रयास किया लेकिन पुलिस ने बहाने बनाकर उन्हें टाल दिया। परिजनों का आरोप है कि बदर अख्तर का कोई करीबी न्यायिक या प्रशासनिक सेवा में उच्च पद पर तैनात है, जिस कारण इस मामले को लगातार दबाया जाता रहा। पुलिस ने क्षेत्राधिकार का हवाला देकर शिकायत तक दर्ज नहीं की।

पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
परिवार की व्यथा सिर्फ एक लापता बेटी की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की निष्क्रियता की गवाही देती है। पुलिस, प्रशासन और न्याय व्यवस्था में बैठे कुछ तत्वों की मिलीभगत का आरोप सामने आने से यह मामला और अधिक गंभीर बन गया है।

धर्मांतरण गिरोह का गहरा जाल
बदर अख्तर सिद्दीकी वही व्यक्ति है जिसे धर्मांतरण के मास्टरमाइंड छांगुर बाबा का सबसे करीबी बताया जा रहा है। उस पर पहले भी युवतियों को प्रेम जाल में फंसाकर धर्मांतरण और शोषण के आरोप लग चुके हैं। आशा नेगी का मामला अब इस नेटवर्क के एक और भयावह पक्ष को उजागर कर रहा है।

अब भी परिवार को है न्याय की उम्मीद
सात साल बीतने के बाद भी नेगी परिवार आज भी पुलिस चौकियों और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है। आशा की मां और भाइयों की आंखों में हर दिन एक नई उम्मीद और निराशा की परत जुड़ जाती है।


घोड़ी बांधने को लेकर बवाल, भीड़ ने घर पर बोला हमला, पुलिस ने दर्ज की रिपोर्ट

फरीदपुर (बरेली)। नगर के मोहल्ला कस्सावान में रविवार देर शाम घोड़ी बांधने के मामूली विवाद ने बड़ा रूप ले लिया। विवाद के बाद एक पक्ष के लोगों ने दूसरे मोहल्ले में पहुंचकर एक घर पर पथराव और हवाई फायरिंग की। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। पुलिस ने एक नामजद आरोपी सहित 21 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

जानकारी के अनुसार, कस्सावान मोहल्ला निवासी तौफीक अहमद ने अपने घर के पास घोड़ी बांधी थी, जिसका विरोध मोहल्ला लाइनपार मठिया निवासी श्याम प्रताप उर्फ नन्हे ठाकुर ने किया। इसी को लेकर दोनों के बीच गालीगलौज और कहासुनी हो गई।

आरोप है कि नन्हे ठाकुर वापस अपने मोहल्ले गया और अपने साथियों को इकट्ठा कर हथियारों से लैस होकर लौट आया। देर शाम वह तमंचों से लैस होकर तौफीक के मोहल्ले पहुंचे और उसके घर पर ईंट-पत्थर फेंकने लगे। हालात बिगड़ते देख पीड़ित परिवार ने दरवाजे बंद कर घर में खुद को बंद कर लिया, लेकिन आरोपियों ने इसके बाद हवाई फायरिंग शुरू कर दी।

पुलिस का पक्ष:

पुलिस ने वायरल वीडियो के आधार पर एक नामजद सहित 21 लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। चौकी प्रभारी का कहना है कि हालात नियंत्रण में हैं और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित कर दी गई हैं।

कानूनी कार्रवाई:

पुलिस ने मामले में आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 336, 504, 506, और आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत किया है।


सहसपुर: कॉलेज छात्रों को स्मैक बेच रहा युवक गिरफ्तार, 6.6 ग्राम स्मैक बरामद

देहरादून (सहसपुर)। सहसपुर कोतवाली पुलिस ने रविवार रात जेबीआईटी कॉलेज के पास एक व्यक्ति को 6.6 ग्राम स्मैक के साथ गिरफ्तार किया है। पकड़ा गया आरोपी बड़ा रामपुर निवासी वहीद है, जो कॉलेज के छात्रों को स्मैक बेचने का काम कर रहा था। पुलिस ने उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।

कोतवाली प्रभारी शंकर सिंह बिष्ट ने बताया कि रविवार रात पुलिस टीम क्षेत्र में गश्त कर रही थी, तभी सूचना मिली कि एक संदिग्ध व्यक्ति कॉलेज के पास स्मैक बेच रहा है। टीम ने मौके पर पहुंचकर आरोपी को धर दबोचा। तलाशी के दौरान 6.6 ग्राम स्मैक बरामद हुई।

पूछताछ में वहीद ने स्वीकार किया कि वह कॉलेज छात्रों को नशा बेचता था। पुलिस ने सोमवार को आरोपी को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।


कालसी में अपहरण की कोशिश नाकाम, स्थानीयों ने तीन युवकों को पकड़ा

कालसी (देहरादून)। कालसी तहसील क्षेत्र के एक गांव से उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के तीन युवक एक 15 वर्षीय किशोरी को बाइक पर बहला-फुसलाकर जबरन भगाकर ले जा रहे थे। लेकिन सतर्क परिजनों और स्थानीय लोगों की तत्परता से तीनों युवकों को कालसी गेट पर पकड़ लिया गया और थाने के हवाले कर दिया गया।

घटना का विवरण

रविवार शाम को सहारनपुर के नकुड़ थाना क्षेत्र के मलकपुर निवासी दीपांशु और दीपक, तथा थाना अंबेटा के चपर पीडी गांव निवासी ऋतिक, दो बाइकों पर सवार होकर किशोरी को साथ ले जा रहे थे। एक बाइक पर किशोरी और एक युवक था, जबकि दूसरी बाइक पर बाकी दो युवक सवार थे।

किशोरी के चाचा ने जब यह देखा तो तुरंत इसकी जानकारी कुछ परिचितों को दी। सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों ने पीछा शुरू किया और कालसी गेट पर युवकों को पकड़ लिया। पकड़ने के प्रयास में बाइक असंतुलित हो गई, जिसके बाद तीनों युवक और किशोरी को स्थानीय थाने ले जाया गया।

पुलिस की कार्रवाई

थाना प्रभारी कालसी दीपक धारीवाल ने बताया कि मामला राजस्व क्षेत्र का था, लेकिन पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की। किशोरी से पूछताछ में सामने आया कि तीनों युवक उसे जबरदस्ती अपने साथ ले जा रहे थे और गलत काम करने के लिए मजबूर कर रहे थे।

परिजनों की तहरीर पर पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। उन्हें न्यायालय में पेश किया जा रहा है।


बदायूं: पीएनबी में 65 लाख रुपये के गबन का मास्टरमाइंड संजय गिरफ्तार, 14 आरोपी बनाए गए

उत्तर प्रदेश: बिसौली कस्बे में स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की शाखा में पांच साल पहले हुए 65 लाख रुपये के गबन के मामले में आखिरकार मुख्य आरोपी संजय को ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन) ने गिरफ्तार कर लिया। लखनऊ से आई टीम ने सोमवार को संजय को शहर के कचहरी तिराहे से गिरफ्तार किया और कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया।

कैसे हुआ गबन?

संजय ने यह धोखाधड़ी विद्युत निगम के चेक वाउचरों में हेराफेरी कर की। विद्युत विभाग का खाता पीएनबी बिसौली शाखा में था, जहां उपभोक्ताओं से मिलने वाली धनराशि चेक द्वारा जमा होती थी।

संजय की मां बीरवाला, इसी शाखा में सफाई कर्मचारी थी। उसकी गैरमौजूदगी में संजय को बैंक आने-जाने और कार्य में शामिल होने की अनौपचारिक अनुमति मिल गई थी। बाद में उसने इस स्थिति का दुरुपयोग करते हुए बिजली विभाग की बिलिंग से संबंधित चेकों की धनराशि को अपने परिचितों के खातों में ट्रांसफर करना शुरू कर दिया।

ऐसे हुआ घोटाले का खुलासा

वर्ष 2009 से 2017 तक यह गबन चलता रहा, लेकिन बैंक और विद्युत विभाग को कोई शक नहीं हुआ। जब बकायेदार उपभोक्ताओं के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई और कनेक्शन काटे जाने लगे, तब विद्युत निगम ने रिकॉर्ड की जांच कराई। यहीं से गबन का खुलासा हुआ।

घटना की रिपोर्ट बैंक अधिकारियों ने दर्ज कराई, जिसके बाद शासन ने जांच का जिम्मा ईओडब्ल्यू को सौंपा।

कुल 14 आरोपी, मास्टरमाइंड सहित परिवार के कई सदस्य शामिल

ईओडब्ल्यू की शुरुआती जांच में 7 आरोपियों को नामजद किया गया:

  • संजय (मुख्य आरोपी)

  • मां बीरवाला (बैंक की सफाईकर्मी)

  • पिता भोले नाथ

  • भाई संदीप कुमार

  • भाई सुजीत की पत्नी बबीता

  • अजीत कुमार

  • चंद्रपाल

बाद में 7 और नाम सामने आए, जिन्हें भी आरोपी बनाया गया। ईओडब्ल्यू ने इन सभी के खिलाफ गंभीर आर्थिक अपराधों के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।

अब तक की कार्रवाई

  • संजय को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। अन्य आरोपियों की भूमिका की भी गहन जांच जारी है। पुलिस और ईओडब्ल्यू की संयुक्त टीम आगे की कड़ियां जोड़ रही है ताकि सभी दोषियों को सजा दिलाई जा सके।


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