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बांग्लादेशी नागरिक का फर्जी पासपोर्ट बनवाने वाले रैकेट का मुख्य आरोपी पटना से गिरफ्तार

बांग्लादेशी नागरिक का फर्जी पासपोर्ट बनवाने वाले रैकेट का मुख्य आरोपी पटना से गिरफ्तार

बांग्लादेशी नागरिक का फर्जी पासपोर्ट बनवाने वाले रैकेट का मुख्य आरोपी पटना से गिरफ्तार

मुजफ्फरपुर। फर्जी दस्तावेजों के जरिए बांग्लादेशी नागरिक का भारतीय आधार कार्ड और उसके आधार पर बिहार के पते से पासपोर्ट तैयार कराने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने रैकेट के मुख्य आरोपित एजाज कमर को पटना से गिरफ्तार किया है। इस मामले में अब तक चार आरोपितों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

सिटी एसपी मो. मोहिबुल्लाह अंसारी ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एजाज कमर की गिरफ्तारी की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एजाज की पत्नी और परिवार के कई सदस्य लंदन में रहते हैं। ऐसे में पुलिस उसके संभावित अंतरराष्ट्रीय संपर्कों और नेटवर्क की भी जांच कर रही है।

पुलिस के अनुसार, मामले का खुलासा होने के बाद नगर थाना पुलिस ने मोतीझील स्थित कन्हाई कम्युनिकेशन में छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान लैपटॉप समेत कई इलेक्ट्रॉनिक सामान जब्त किए गए थे। मौके से साहिल कुमार को गिरफ्तार किया गया था। उससे पूछताछ के बाद सारण जिले के शिव कुमार पंडित को पकड़ा गया। इसके बाद शनिवार को सुजीत नामक एक अन्य आरोपित की गिरफ्तारी हुई।

नगर थानेदार जेपी सिंह ने बताया कि मामले में गिरफ्तार किए गए चारों आरोपितों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।

पुलिस पूछताछ में एजाज कमर ने बताया कि वह आधार से संबंधित कार्यों के लिए वेंडर के तौर पर काम करता था। उसने MTech की पढ़ाई की है और नौकरी छोड़ने के बाद आधार संबंधी काम से जुड़ गया। पुलिस के मुताबिक, इसी काम की आड़ में वह फर्जीवाड़े के नेटवर्क को संचालित कर रहा था। एजाज मूल रूप से आरा का रहने वाला बताया जा रहा है।

जांच में पुलिस को जानकारी मिली है कि एजाज चंडीगढ़ से अपने नेटवर्क को संचालित करता था और उसका संपर्क कई राज्यों में था। पुलिस उसके पुराने रिकॉर्ड और नेटवर्क से जुड़े लोगों की जानकारी जुटा रही है। इसके लिए दूसरे राज्यों की पुलिस से भी संपर्क किया गया है।

पूछताछ में यह भी सामने आया कि एजाज आधार अपडेट करने का ठेका लेता था। इसके लिए वह इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और ऑपरेटर उपलब्ध कराता था। बताया गया है कि ऑपरेटरों से हर महीने करीब 30 हजार रुपये लिए जाते थे। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।


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