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टिहरी बांध में घटा पानी, बिजली उत्पादन प्रभावित

टिहरी बांध में घटा पानी, बिजली उत्पादन प्रभावित

टिहरी बांध में घटा पानी, बिजली उत्पादन प्रभावित

आयुषी

\उत्तराखंड के टिहरी बांध पर इस बार बढ़ती गर्मी और बारिश की कमी का असर साफ दिखाई देने लगा है। देश के प्रमुख जलविद्युत प्रोजेक्ट में शामिल टिहरी बांध की झील का जलस्तर लगातार घटते हुए न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। जलस्तर में आई इस गिरावट का सीधा असर बिजली उत्पादन पर पड़ा है, वहीं दूसरी ओर कई राज्यों को सिंचाई और पेयजल उपलब्ध कराने की चुनौती भी बढ़ गई है।गर्मी बढ़ने के साथ ही बारिश की कमी ने टिहरी झील की स्थिति को प्रभावित किया है। वर्तमान में झील का जलस्तर घटकर आरएल 742.79 मीटर तक पहुंच गया है, जबकि सामान्य दिनों में झील का अधिकतम जलस्तर आरएल 830 मीटर तक रहता है।

यानी इस समय झील का जलस्तर करीब 88 मीटर तक नीचे गिर चुका है।करीब 42 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली टिहरी झील में पानी की कमी का असर अब बिजली उत्पादन पर भी दिखाई देने लगा है। पानी की उपलब्धता कम होने के कारण टिहरी बांध और कोटेश्वर परियोजना से होने वाले विद्युत उत्पादन में गिरावट आई है।सामान्य परिस्थितियों में टीएचडीसी द्वारा टिहरी और कोटेश्वर बांध से करीब 1000 से 1200 मेगावाट तक बिजली उत्पादन किया जाता है, लेकिन वर्तमान में पानी की कमी के कारण टिहरी बांध से लगभग 500 मेगावाट और कोटेश्वर बांध से करीब 200 मेगावाट ही बिजली उत्पादन हो पा रहा है।कम जलस्तर के चलते बांध प्रबंधन को टरबाइन संचालन में भी बदलाव करना पड़ा है।

जहां पहले चार टरबाइन संचालित की जाती थीं, वहीं अब पानी की उपलब्धता को देखते हुए केवल तीन टरबाइन चलाकर बिजली उत्पादन किया जा रहा है।टिहरी बांध से निकलने वाला पानी सिर्फ बिजली उत्पादन के लिए ही नहीं, बल्कि कई राज्यों की जल जरूरतों को पूरा करने के लिए भी महत्वपूर्ण है। गर्मी के मौसम में उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और चंडीगढ़ जैसे राज्यों को सिंचाई और पीने के लिए पानी उपलब्ध कराना बड़ी जिम्मेदारी बन जाती है।

फिलहाल टिहरी झील से करीब 140 क्यूमेक्स पानी सिंचाई और पेयजल जरूरतों के लिए छोड़ा जा रहा है। वहीं झील में पानी की आवक भी लगातार कम बनी हुई है। भागीरथी नदी से करीब 126 क्यूमेक्स, भिलंगना नदी से 55 क्यूमेक्स और सहायक नदियों से करीब 54.32 क्यूमेक्स पानी ही पहुंच रहा है।टीएचडीसी अधिकारियों के अनुसार गर्मियों में जलस्तर कम होना सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन इस बार कम बारिश और बढ़ते तापमान के कारण स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। मानसून आने के बाद झील का जलस्तर बढ़ने की उम्मीद है, जिससे बिजली उत्पादन भी दोबारा सामान्य स्तर पर लौट सकता है।फिलहाल टिहरी झील का गिरता जलस्तर न सिर्फ बिजली उत्पादन के लिए चिंता का विषय है, बल्कि यह बदलते मौसम और बढ़ते जल संकट की ओर भी एक बड़ा संकेत दे रहा है।


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