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शिमला पुलिस का नशा तस्करों पर शिकंजा, 915 ग्राम अफीम के साथ दो आरोपी गिरफ्तार

शिमला पुलिस का नशा तस्करों पर शिकंजा, 915 ग्राम अफीम के साथ दो आरोपी गिरफ्तार

शिमला पुलिस का नशा तस्करों पर शिकंजा, 915 ग्राम अफीम के साथ दो आरोपी गिरफ्तार

शिमला (हिमाचल प्रदेश): जिला शिमला पुलिस द्वारा नशा तस्करी और ड्रग्स माफिया के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत स्पेशल सेल शिमला को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस टीम ने 10 और 11 जून की मध्यरात्रि को एक गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए दो शातिर तस्करों को 915 ग्राम अफीम के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। पुलिस ने नशीले पदार्थ को जब्त करने के साथ ही तस्करी में इस्तेमाल किए जा रहे वाहन को भी अपने कब्जे में ले लिया है।

मध्यरात्रि को नाकेबंदी के दौरान पकड़े गए तस्कर
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, स्पेशल सेल शिमला की टीम क्षेत्र में यातायात जांच और आपराधिक गतिविधियों की रोकथाम के लिए छोटा शिमला, ढली, मशोबरा, बसंतपुर, सुन्नी, कधरघाट और जलोग क्षेत्रों में मुस्तैदी से गश्त पर थी। इसी दौरान टीम को एक गुप्त इनपुट मिला कि एक वाहन में भारी मात्रा में नशा ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस ने नाकेबंदी कर संदिग्ध वाहन को रोककर उसकी गहनता से तलाशी ली।

कार के डैशबोर्ड से बरामद हुई अफीम, आरोपियों की हुई पहचान
वाहन की तलाशी लेने पर उसके डैशबोर्ड के भीतर छुपाकर रखी गई करीब 915 ग्राम अफीम बरामद हुई। पकड़े गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है:

दिनेश ठाकुर (45 वर्ष), निवासी गांव भोग (ठियोग, शिमला)

धर्मेंद्र हिमराल (33 वर्ष), निवासी गांव बनूना (सुन्नी, शिमला)

पूछताछ के दौरान आरोपी बरामद की गई अफीम के संबंध में कोई भी वैध कागजात या दस्तावेज पेश नहीं कर सके।

पुलिस की कानूनी कार्रवाई: आरोपियों के खिलाफ पुलिस थाना सुन्नी में अभियोग संख्या 23/2026 के तहत एनडीपीएस (NDPS) अधिनियम की धारा 18 और 29 के अंतर्गत मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। दोनों आरोपियों को जल्द ही कोर्ट में पेश किया जाएगा।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहनता से तफ्तीश जारी है। अब इस बात का पता लगाया जा रहा है कि अफीम की यह खेप कहाँ से लाई गई थी और इसे आगे किसे सप्लाई किया जाना था। पुलिस इस पूरे नशा तस्करी नेटवर्क (बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज) को खंगालने में जुटी है ताकि इससे जुड़े अन्य लोगों को भी सलाखों के पीछे भेजा जा सके।


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