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उत्तराखंड में बढ़ता वाहन अग्निकांड का खतरा: चारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन के बीच बढ़ी चिंता

उत्तराखंड में बढ़ता वाहन अग्निकांड का खतरा: चारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन के बीच बढ़ी चिंता

उत्तराखंड में बढ़ता वाहन अग्निकांड का खतरा: चारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन के बीच बढ़ी चिंता

पूजा भट्ट

उत्तराखंड में इन दिनों चारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन के चलते सड़कों पर वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। राज्य के राष्ट्रीय राजमार्गों से लेकर पहाड़ी मार्गों तक हर दिन हजारों बसें, टैक्सियां, निजी वाहन और मालवाहक वाहन संचालित हो रहे हैं। इसी बीच चलती गाड़ियों में आग लगने की बढ़ती घटनाओं ने परिवहन सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

पिछले कुछ सप्ताह में हरिद्वार, देहरादून, विकासनगर समेत कई क्षेत्रों में चलती बसों, टैक्सियों, पिकअप वाहनों और निजी कारों में आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं। कई मामलों में वाहन कुछ ही मिनटों में जलकर पूरी तरह नष्ट हो गए। हालांकि अधिकतर घटनाओं में समय रहते यात्रियों को बाहर निकाल लिया गया, जिससे जनहानि टल गई। लेकिन पहाड़ी और संकरे मार्गों पर ऐसी घटनाएं बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं।

ऑटोमोबाइल विशेषज्ञ पारस मल्होत्रा के अनुसार, वाहनों में आग लगने का सबसे बड़ा कारण इलेक्ट्रिकल सिस्टम की खराबी और शॉर्ट सर्किट है। पुरानी या क्षतिग्रस्त वायरिंग, बैटरी टर्मिनल की समस्या, अतिरिक्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की अनियमित फिटिंग और गैर-मानक वायरिंग आग की वजह बन सकती है। शॉर्ट सर्किट के बाद पैदा हुई चिंगारी वाहन में मौजूद ज्वलनशील पदार्थों को तेजी से आग की चपेट में ले सकती है।

इसके अलावा ईंधन प्रणाली में रिसाव भी बड़ा खतरा बनकर सामने आया है। पेट्रोल या डीजल पाइपलाइन में मामूली लीकेज भी इंजन की गर्मी के संपर्क में आकर गंभीर हादसे का कारण बन सकता है। पुराने वाहनों में पाइपों का घिसना, ढीले क्लैंप और टैंक संबंधी खराबियां जोखिम बढ़ा देती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वाहन से ईंधन की गंध महसूस हो तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां भी इस जोखिम को बढ़ाती हैं। लगातार चढ़ाई, गर्म मौसम, लंबी दूरी और जाम की स्थिति में इंजन और ब्रेक सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। यदि कूलिंग सिस्टम सही न हो तो वाहन ओवरहीट होकर आग पकड़ सकता है।

परिवहन अधिकारी निखिल शर्मा के अनुसार, कई मामलों में नियमित सर्विसिंग और तकनीकी फिटनेस की अनदेखी सामने आती है। इसी को देखते हुए 6 और 7 जून को हरिद्वार में यात्री बसों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया गया, जिसमें 45 बसों के चालान किए गए, 6 बसें सीज की गईं और 5 वाहनों के फिटनेस प्रमाणपत्र निरस्त किए गए।

हाल के दिनों में हरिद्वार-देहरादून हाईवे पर चलती बस में आग और बहादराबाद क्षेत्र में राजस्थान जा रही बस में आग लगने की घटनाओं ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि यदि वाहन से धुआं निकले या जलने जैसी गंध आए तो तुरंत वाहन रोकें, इंजन बंद करें और यात्रियों को सुरक्षित दूरी पर ले जाएं। यदि आग शुरुआती स्तर पर हो और अग्निशामक यंत्र उपलब्ध हो तो नियंत्रण का प्रयास करें, अन्यथा तुरंत पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दें। सतर्कता और नियमित वाहन जांच ही ऐसे हादसों को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका मानी जा रही है।


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