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उत्तराखंड में बारिश का रेड अलर्ट

उत्तराखंड में बारिश का रेड अलर्ट

उत्तराखंड में बारिश का रेड अलर्ट

आयुषी

उत्तराखंड में अगले दो दिनों तक भारी से अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी के बीच प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। लगातार हो रही बारिश का असर अब सड़क संपर्क और जनजीवन पर भी साफ दिखाई देने लगा है। उत्तरकाशी जिले के मोरी विकासखंड के पांच गांवों का संपर्क संकट में आ गया है, जबकि प्रदेशभर में चार राज्य मार्गों सहित 70 सड़कें बंद होने से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), देहरादून की ओर से जारी पूर्वानुमान के अनुसार आज और कल प्रदेश के कई जिलों में भारी से अत्यंत भारी वर्षा, आकाशीय बिजली और तेज बारिश के दौर की संभावना है। इसे देखते हुए राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) ने सभी जिलाधिकारियों को आवश्यक एहतियाती कदम उठाने के निर्देश जारी किए हैं।मानसून की शुरुआत के साथ ही उत्तरकाशी जिले के मोरी विकासखंड की बड़ासु पट्टी के पवाणी, ओसला, गंगाड़, ढाटमीर और तालुका गांवों के लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सांकरी-गंगाड़-ओसला मोटर मार्ग पर हलारा और पूर्ति नालों में जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों का विकासखंड मुख्यालय से संपर्क प्रभावित होने लगा है।उफनते नालों के बीच ग्रामीण जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने को मजबूर हैं।

दोपहिया वाहनों को पार कराने के लिए पांच से दस लोगों की मदद लेनी पड़ रही है, जबकि बड़े वाहनों और पैदल यात्रियों के लिए भी रास्ता बेहद जोखिमभरा बना हुआ है।स्थानीय ग्रामीण नौनियाल राणा, जनक रावत, जयचंद राणा और वरदान सिंह ने बताया कि हर वर्ष मानसून के दौरान पूर्ति और हलारा खड्ड उफान पर आ जाते हैं, जिससे इन गांवों का संपर्क प्रभावित हो जाता है। उनका कहना है कि कई बार एक वाहन को सुरक्षित निकालने के लिए दस से अधिक लोगों की मदद लेनी पड़ती है, इसके बावजूद हादसे का खतरा बना रहता है।ग्रामीणों के अनुसार इस समय क्षेत्र में सेब, राजमा और चौलाई जैसी फसलों की निकासी का मौसम है।

यदि बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो पांचों गांवों का संपर्क पूरी तरह कट सकता है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित होगी।ग्रामीणों ने बताया कि हलारा और पूर्ति खड्ड पर पुल निर्माण तथा वैकल्पिक मार्ग की मांग कई बार प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) से की जा चुकी है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने बताया कि मामले की जानकारी मिलने के बाद पीएमजीएसवाई को सुरक्षा के साथ आवाजाही सुचारु रखने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान आवश्यकता पड़ने पर आपदा मद से वैकल्पिक व्यवस्थाएं भी की जाएंगी।राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र ने सभी जिलाधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने, राहत एवं बचाव दलों को अलर्ट मोड पर रखने, सड़क मार्गों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने तथा किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

साथ ही जिला सूचना अधिकारियों को मौसम संबंधी चेतावनियों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा गया है।सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने प्रदेशवासियों से मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने और खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश में चार राज्य मार्गों सहित कुल 70 सड़कें बंद हैं। इनमें सबसे अधिक 14-14 सड़कें देहरादून और पिथौरागढ़ जिलों में बंद हैं। देहरादून में तीन राज्य मार्ग भी प्रभावित हुए हैं।इसके अलावा चमोली में 10, पौड़ी और टिहरी में आठ-आठ, बागेश्वर में छह, रुद्रप्रयाग में चार तथा चंपावत, अल्मोड़ा और नैनीताल में दो-दो सड़कें बंद हैं।

संबंधित विभागों द्वारा मार्ग खोलने का कार्य लगातार जारी है।मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे उत्तराखंड के लिए बेहद संवेदनशील बताए हैं। प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों के किनारे जाने से बचने, अनावश्यक यात्रा न करने और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।


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