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जेल अस्पताल के बाथरूम में 16 मुकदमों के आरोपी बंदी ने लगाया फंदा, परिजनों ने जेल डिप्टी पर जड़े गंभीर आरोप

जेल अस्पताल के बाथरूम में 16 मुकदमों के आरोपी बंदी ने लगाया फंदा, परिजनों ने जेल डिप्टी पर जड़े गंभीर आरोप

जेल अस्पताल के बाथरूम में 16 मुकदमों के आरोपी बंदी ने लगाया फंदा, परिजनों ने जेल डिप्टी पर जड़े गंभीर आरोप

फरीदाबाद: जिले की हाई-सिक्योरिटी वाली नीमका जिला जेल से एक बड़ी खबर सामने आई है। यहाँ सोमवार तड़के जेल अस्पताल के बाथरूम में एक बंदी ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान गाजीपुर निवासी 25 वर्षीय ऋतिक उर्फ रंकित भड़ाना के रूप में हुई है, जो पिछले 11 महीनों से विभिन्न आपराधिक मामलों में जेल में बंद था। इस घटना के बाद से जेल प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

जेल अस्पताल के बाथरूम में मिला शव

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, मृतक ऋतिक के खिलाफ मारपीट और हत्या के प्रयास समेत करीब 16 आपराधिक मामले दर्ज थे। पिछले कुछ दिनों से तबीयत खराब होने के कारण उसे जेल परिसर के ही अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रविवार देर रात जब ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों ने ऋतिक को उसके बिस्तर पर नहीं पाया, तो उसकी तलाश शुरू हुई। इस दौरान वह अस्पताल के बाथरूम में फंदे से लटका मिला। घटना की सूचना मिलते ही जेल डिप्टी साजिद खान मौके पर पहुंचे और शव को पोस्टमार्टम के लिए बादशाह खान सिविल अस्पताल भेजा गया।

परिजनों ने लगाया प्रताड़ना का आरोप

इस घटना के बाद मृतक के भाई राजेश ने जेल प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि ऋतिक को जेल के भीतर लगातार प्रताड़ित और मारपीट का शिकार बनाया जाता था, जिसके कारण वह गहरे मानसिक तनाव में था। हालांकि, जेल डिप्टी साजिद खान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि जेल में सभी के साथ समान व्यवहार होता है और ऋतिक अपनी बीमारी व अन्य कारणों से तनाव में था। पुलिस ने मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया है।

पहले भी विवादों में रही है नीमका जेल

नीमका जेल में सुरक्षा चूक का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले इसी साल फरवरी 2026 में हाई सिक्योरिटी वार्ड में एक आतंकी आरोपी की हत्या और मार्च में कैदियों के आपसी विवाद में खौलता तेल फेंकने जैसी वारदातें सामने आ चुकी हैं। अब इस ताजा घटना के बाद जेल की निगरानी प्रणाली और प्रशासनिक कार्यप्रणाली एक बार फिर मजिस्ट्रेट जांच के दायरे में है।


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