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मलक्का की दहलीज पर भारत की बड़ी रणनीतिक चाल, सबांग पोर्ट से हिंद महासागर में बढ़ेगी ताकत

मलक्का की दहलीज पर भारत की बड़ी रणनीतिक चाल, सबांग पोर्ट से हिंद महासागर में बढ़ेगी ताकत

मलक्का की दहलीज पर भारत की बड़ी रणनीतिक चाल, सबांग पोर्ट से हिंद महासागर में बढ़ेगी ताकत

पूजा भट्ट

पश्चिम एशिया में ईरान-इजरायल तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य की रणनीतिक अहमियत एक बार फिर दुनिया के सामने आने के बाद भारत अब अपनी समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक हितों को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है। इसी रणनीति के तहत भारत और इंडोनेशिया मिलकर सबांग पोर्ट के विकास पर तेजी से काम कर रहे हैं। यह बंदरगाह मलक्का जलडमरूमध्य के प्रवेश द्वार पर स्थित है, जिसे दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है।

स्ट्रेट ऑफ मलक्का हिंद महासागर को दक्षिण चीन सागर और प्रशांत महासागर से जोड़ता है। दुनिया के बड़े हिस्से का समुद्री व्यापार, खासकर ऊर्जा आपूर्ति, इसी रास्ते से होकर गुजरता है। भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और कई अन्य एशियाई देशों के लिए यह मार्ग बेहद अहम माना जाता है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मार्ग पर किसी तरह का संकट पैदा होता है तो वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा असर पड़ सकता है।

इंडोनेशिया के आचेह प्रांत में स्थित सबांग पोर्ट मलक्का जलडमरूमध्य के बेहद करीब है। इस पोर्ट के विकास से भारत को कई रणनीतिक लाभ मिल सकते हैं।हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की मौजूदगी और मजबूत होगी।भारतीय नौसेना को लॉजिस्टिक सपोर्ट और ऑपरेशनल सुविधा मिलेगी।समुद्री व्यापार मार्गों की निगरानी आसान होगी।इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की रणनीतिक भूमिका और प्रभाव बढ़ेगा।

भारत केवल सबांग पोर्ट पर ही नहीं, बल्कि ग्रेट निकोबार पोर्ट प्रोजेक्ट पर भी तेजी से काम कर रहा है। यह परियोजना मलक्का जलडमरूमध्य के करीब भारत की समुद्री क्षमता को नई मजबूती देगी। इसके पूरा होने के बाद भारत इस क्षेत्र में व्यापार, लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा के लिहाज से और अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकेगा।

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती समुद्री सक्रियता को देखते हुए भारत अपने सहयोगी देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत कर रहा है। सबांग पोर्ट का विकास इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिससे क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि सबांग पोर्ट और ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट आने वाले वर्षों में भारत के लिए केवल सुरक्षा के लिहाज से ही नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की स्थिति और मजबूत होने की उम्मीद है।


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