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क्राइम ब्रांच के गुप्त ऑपरेशन में हनीट्रैप गिरोह का भंडाफोड़, कई आरोपी गिरफ्तार

क्राइम ब्रांच के गुप्त ऑपरेशन में हनीट्रैप गिरोह का भंडाफोड़, कई आरोपी गिरफ्तार

क्राइम ब्रांच के गुप्त ऑपरेशन में हनीट्रैप गिरोह का भंडाफोड़, कई आरोपी गिरफ्तार

निजी फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी देकर कारोबारी से मांगी मोटी रकम

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में एक बड़े शराब कारोबारी को ब्लैकमेल कर करोड़ों रुपये की उगाही करने के मामले ने सनसनी फैला दी है। क्राइम ब्रांच ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में तेजी से कार्रवाई करते हुए एक महिला समेत कई लोगों को हिरासत में लिया है। आरोप है कि कारोबारी को निजी फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर भारी रकम मांगी जा रही थी। जांच में एक पुलिसकर्मी की संदिग्ध भूमिका भी सामने आई है, जिसके बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। पुलिस अब इस गिरोह के नेटवर्क और अन्य संभावित मामलों की गहन जांच कर रही है।

पुराने परिचय से शुरू हुआ ब्लैकमेल का खेल

पुलिस अधिकारियों के अनुसार इंदौर के बाणगंगा क्षेत्र में रहने वाले शराब कारोबारी ने शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि उनकी पहचान द्वारकापुरी निवासी अलका दीक्षित से पहले से थी। अलका पर पहले भी कई आपराधिक मामले दर्ज बताए जा रहे हैं। कारोबारी का आरोप है कि इसी परिचय के जरिए उन्हें एक बड़े निवेशक बताने वाले लाखन चौधरी से मिलवाया गया, जिसने प्रॉपर्टी कारोबार में साझेदारी का प्रस्ताव रखा।

साझेदारी ठुकराने पर बढ़ा दबाव

कारोबारी के मुताबिक जब उन्होंने व्यापार में हिस्सेदारी देने से इनकार कर दिया, तो उन पर लगातार दबाव बनाया जाने लगा। आरोप है कि बाद में उन्हें निजी फोटो और वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी दी गई। शिकायत में यह भी कहा गया कि कुछ दिन पहले आरोपियों ने सुपर कॉरिडोर क्षेत्र में कारोबारी के साथ मारपीट की और बड़ी रकम की मांग करते हुए जान से मारने की धमकी दी।

क्राइम ब्रांच ने चलाया गुप्त अभियान

मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर क्राइम ब्रांच ने विशेष ऑपरेशन शुरू किया। वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में कई टीमों का गठन कर अलग-अलग स्थानों पर एक साथ दबिश दी गई। कार्रवाई के दौरान अलका दीक्षित, उसके बेटे जयदीप और लाखन चौधरी को हिरासत में लिया गया। इसके बाद मामले की कथित मुख्य सूत्रधार श्वेता विजय जैन को भी भोपाल से पकड़कर इंदौर लाया गया।

पुलिसकर्मी की भूमिका से जांच में आया नया मोड़

जांच के दौरान इंटेलिजेंस शाखा में तैनात एक हेड कॉन्स्टेबल की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई। पुलिस को तकनीकी जांच और मोबाइल चैट से ऐसे संकेत मिले हैं कि वह आरोपियों के संपर्क में था। इसके बाद पुलिस ने संबंधित पुलिसकर्मी को हिरासत में लेकर उसके मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त कर लिए हैं।

कई और लोगों के फंसने की आशंका

पुलिस को शक है कि यह गिरोह लंबे समय से प्रभावशाली और संपन्न लोगों को निशाना बनाकर ब्लैकमेलिंग का नेटवर्क चला रहा था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी के खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। फिलहाल सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह का नेटवर्क कितना बड़ा है और इसमें और कौन-कौन शामिल हो सकते हैं।


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