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भागीरथी के उफान से दहशत में हर्षिल

भागीरथी के उफान से दहशत में हर्षिल

भागीरथी के उफान से दहशत में हर्षिल

आयुषी

उत्तरकाशी के हर्षिल क्षेत्र में भागीरथी नदी का लगातार बढ़ता जलस्तर और तेज कटाव अब स्थानीय लोगों के लिए बड़ी चिंता का कारण बन गया है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि ग्रामीण पिछले पांच दिनों से संभावित आपदा के डर के बीच रातभर जागकर नदी की निगरानी कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षात्मक कार्य शुरू नहीं किए गए तो आगामी मानसून में हर्षिल को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।मंगलवार को हर्षिल क्षेत्र के आठ गांवों के प्रधान, पूर्व जनप्रतिनिधि और ग्रामीण जिलाधिकारी प्रशांत आर्य से मिले और क्षेत्र की मौजूदा स्थिति से अवगत कराया। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष आई आपदा के बाद हर्षिल के समीप बनी झील और भागीरथी नदी का बढ़ता जलस्तर लगातार खतरा बना हुआ है। इसके बावजूद अब तक स्थायी सुरक्षा उपाय नहीं किए गए हैं, जिससे नदी का कटाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल पूर्व प्रधान बसंती नेगी ने जिलाधिकारी से क्षेत्र में जल्द प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण लगातार भय के माहौल में जीवन बिता रहे हैं और हर रात किसी बड़ी अनहोनी की आशंका बनी रहती है।ग्रामीणों ने बताया कि बीते शुक्रवार रात भागीरथी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से जीएमवीएन गेस्ट हाउस का टिनशेड बह गया था। इसके अगले दिन शनिवार रात नदी का जलस्तर फिर बढ़ गया, जिससे कई बड़े पेड़ टूटकर नदी में गिर गए। पेड़ों के नदी में फंसने से कुछ समय के लिए नदी का प्रवाह भी बाधित हुआ, हालांकि बाद में स्थिति सामान्य हो गई। इसके बावजूद नदी का तेज बहाव लगातार आवासीय क्षेत्र की ओर कटाव कर रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अब जीएमवीएन गेस्ट हाउस, पुलिस थाना, लोक निर्माण विभाग का गेस्ट हाउस, सेब के बगीचे, होटल, होमस्टे और कई आवासीय भवन नदी के कटाव की जद में हैं। नदी का जलस्तर बढ़ते ही ग्रामीण पूरी रात निगरानी करने को मजबूर हो जाते हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में समय रहते लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके।ग्राम प्रधान सुचिता रौतेला ने बताया कि हर्षिल के समीप बनी झील हर दिन नए खतरे का संकेत दे रही है। यदि जल्द सुरक्षा कार्य नहीं किए गए तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से नदी किनारे करीब 400 मीटर लंबी वायरक्रेट सुरक्षा दीवार का निर्माण कराने की मांग की है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर आपदा प्रबंधन विभाग और सिंचाई विभाग की टीम ने हर्षिल पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण किया और नदी के कटाव का जायजा लिया। अधिकारियों ने क्षेत्र की लगातार निगरानी करने और आवश्यक सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता देने की बात कही है।ग्रामीणों का कहना है कि यदि मानसून के दौरान भागीरथी का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो हर्षिल के अस्तित्व पर भी खतरा खड़ा हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल स्थायी सुरक्षा कार्य शुरू करने और संभावित आपदा से पहले प्रभावी इंतजाम करने की मांग की है।


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