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देहरादून को मिला नया नेतृत्व, डॉ. आशीष चौहान ने संभाली जिलाधिकारी की कमान

देहरादून को मिला नया नेतृत्व, डॉ. आशीष चौहान ने संभाली जिलाधिकारी की कमान

देहरादून को मिला नया नेतृत्व, डॉ. आशीष चौहान ने संभाली जिलाधिकारी की कमान

जनसेवा और सुशासन के संकल्प के साथ जिलाधिकारी ने बताई प्राथमिकताएं

देहरादून। देहरादून जनपद में नए जिलाधिकारी के रूप में डॉ. आशीष चौहान ने कार्यभार संभाल लिया है, जबकि पूर्व जिलाधिकारी सविन बंसल का स्थानांतरण सचिवालय में किया गया है। सरकार द्वारा जारी तबादला सूची के बाद जहां सविन बंसल को अधिकारियों, कर्मचारियों एवं आमजन ने भावुक विदाई दी, वहीं अब जनपद की कमान ऐसे प्रशासनिक अधिकारी के हाथों में आई है, जिनकी पहचान भी जनकेंद्रित, संवेदनशील और नवाचार आधारित कार्यशैली के रूप में रही है।

जिलाधिकारी सविन बंसल ने सितंबर 2024 से देहरादून में अपने कार्यकाल के दौरान प्रशासन को आमजन के और करीब लाने का प्रयास किया। उनके कार्यकाल में कई ऐसी पहलें शुरू हुईं, जिन्होंने सीधे समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को राहत और नई दिशा देने का कार्य किया।

बालिकाओं की शिक्षा और भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘नंदा-सुनंदा’ पहल विशेष रूप से चर्चा में रही। इसके साथ ही भिक्षावृत्ति और कूड़ा बीनने में लगे बच्चों के पुनर्वास के लिए भी जिला प्रशासन ने अभियान चलाया, जिसके तहत ऐसे बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने, शिक्षा उपलब्ध कराने और सुरक्षित वातावरण देने की दिशा में कार्य किया गया। इसके अतिरिक्त जनसुनवाई, त्वरित शिकायत निस्तारण, जरूरतमंदों तक योजनाओं की पहुंच, संवेदनशील प्रशासनिक हस्तक्षेप और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी पहलों के कारण सविन बंसल को एक “पीपुल्स एडमिनिस्ट्रेटर” के रूप में पहचान मिली। यही कारण रहा कि उनके स्थानांतरण की खबर के बाद आमजन ने भावुकता के साथ उन्हें विदाई दी।

अब देहरादून को नए जिलाधिकारी के रूप में डॉ. आशीष चौहान का नेतृत्व मिला है, जिनकी कार्यशैली भी जनता से सीधे संवाद, तकनीक आधारित समाधान और जनहितकारी नवाचारों के लिए जानी जाती है। डॉ आशीष चौहान, भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2012 बैच के अधिकारी है।

नव नियुक्त जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सोमवार को कोषागार पहुंचकर विधिवत रूप से अपना कार्यभार ग्रहण किया। कार्यभार संभालने से पूर्व उन्होंने कोषागार का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा अधिकारियों एवं कर्मचारियों से आवश्यक जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कोषागार में सभी रिकार्डो को व्यवस्थित एवं सुरक्षित संरक्षण करने और डिजिटल माध्यम से पेंशनरों का सत्यापन कराने पर जोर दिया। जिलाधिकारी ने कहा कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ आमजन तक समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से पहुंचाना उनकी प्राथमिकता होगी। साथ ही चारधाम यात्रा प्रबंधन को सशक्त बनाना, आपदा प्रबंधन के कार्यो को समयबद्व पूर्ण करना एवं जनपद के विकास योजनाओं का त्वरित गति से पूर्ण कराना करना और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ सुगमता से जनता तक पहुंचाना उनकी प्राथमिकता में शामिल है। कार्यभार ग्रहण करने के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने नवागत जिलाधिकारी का स्वागत किया।

उल्लेखनीय है कि आईएएस डा. आशीष चौहान इससे पूर्व पिथौरागढ़, उत्तरकाशी और पौड़ी जैसे चुनौतीपूर्ण जनपदों में जिलाधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उनके कार्यकाल में तकनीक आधारित जनहितकारी पहल, स्वास्थ्य सेवाओं में नवाचार, सड़क सुरक्षा, जन संवाद और पर्यटन विकास जैसे कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य हुए, जिन्हें प्रदेश स्तर पर सराहा गया।

पौड़ी जनपद में उनके नेतृत्व में शुरू किया गया ‘सेफ सफर ऐप’ सड़क सुरक्षा की दिशा में एक अभिनव पहल के रूप में सामने आया। विवाह समारोहों में किराये पर चलने वाले वाहनों की निगरानी और पंजीकरण के लिए विकसित इस डिजिटल प्लेटफॉर्म ने ओवरलोडिंग, नशे में वाहन संचालन और दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया।

स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में डॉ. चौहान की पहल ‘काव्या ऐप’ विशेष रूप से चर्चा में रही। वर्ष 2023 में शुरू किए गए इस ऐप के माध्यम से हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान, पंजीकरण और लगातार निगरानी सुनिश्चित की गई। पहाड़ी क्षेत्रों में समय पर सुरक्षित प्रसव की चुनौती को देखते हुए यह पहल मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने की दिशा में बेहद प्रभावी साबित हुई।

पर्यटन और सांस्कृतिक विकास के क्षेत्र में भी उनके नेतृत्व में कई कार्य हुए। पौड़ी में हिमालय दर्शन स्थल के समीप विकसित हो रहा ‘त्रिशूल पार्क’ इसी सोच का परिणाम है। धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाए जा रहे इस पार्क में 56 फीट ऊंचा भव्य त्रिशूल स्थापित किया गया है, जो आने वाले समय में प्रमुख आकर्षण केंद्र बनने जा रहा है।

डॉ. आशीष चौहान की कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि उन्होंने हर योजना में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जनभागीदारी को प्राथमिकता दी। तकनीक और मानवीय संवेदनशीलता के समन्वय के लिए पहचाने जाने वाले डॉ. चौहान से अब देहरादून में भी जनहितकारी और नवाचार आधारित प्रशासनिक कार्यशैली की अपेक्षाएं बढ़ गई हैं।


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