Monday, April 6th, 2026

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भाजपा का 47वां स्थापना दिवस, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने किया ध्वजारोहण

Category Archives: राजनीति

भाजपा का 47वां स्थापना दिवस, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने किया ध्वजारोहण

भाजपा अंत्योदय और राष्ट्र निर्माण की भावना से कार्य करने वाली विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है- महेंद्र भट्ट 

देहरादून। भारतीय जनता पार्टी के 47वें स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदेश कार्यालय, देहरादून में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने ध्वजारोहण कर कार्यक्रम की शुरुआत की और कार्यकर्ताओं को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भाजपा अंत्योदय और राष्ट्र निर्माण की भावना से कार्य करने वाली विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है। उन्होंने कहा कि एक विचार को जनआंदोलन में बदलने का श्रेय पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं को जाता है, जिन्होंने निरंतर परिश्रम से संगठन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि राष्ट्र सर्वोपरि के सिद्धांत पर चलने वाला एक संस्कार है, जो विकास और सुशासन के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि पार्टी के संस्थापकों, वरिष्ठ नेताओं, करोड़ों कार्यकर्ताओं और जनता के विश्वास ने भाजपा को आज इस मुकाम तक पहुंचाया है।

उन्होंने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में पार्टी निरंतर जनकल्याण के कार्यों में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है।

कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह, मंत्री खजान दास, संगठन महामंत्री अजय कुमार सहित पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।


‘मुस्लिम-विरोधी’ आरोपों पर ई. के. पलानीस्वामी का पलटवार, डीएमके की नीतियों पर उठाए सवाल

महिला योजना से लेकर पेंशन तक, ई. के. पलानीस्वामी ने गिनाईं सरकार की कमियां

वेल्लोर। तमिलनाडु की सियासत में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। ई. के. पलानीस्वामी ने एम. के. स्टालिन पर तीखा हमला बोलते हुए उनकी सरकार और नीतियों पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। खासतौर पर अल्पसंख्यकों और शासन व्यवस्था को लेकर दोनों नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

अन्नाद्रमुक के महासचिव ई. के. पलानीस्वामी ने द्रमुक प्रमुख और मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी पार्टी को भाजपा से गठबंधन के आधार पर ‘मुस्लिम-विरोधी’ बताना पूरी तरह राजनीतिक रणनीति है। उन्होंने आरोप लगाया कि द्रमुक ने अल्पसंख्यकों के भरोसे को तोड़कर सत्ता हासिल की है।

पलानीस्वामी ने तिरुनेलवेली की एक घटना का जिक्र करते हुए कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक पुलिस उप-निरीक्षक ने अपनी सुरक्षा को लेकर शिकायत की थी, लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं हुई और बाद में उसकी हत्या कर दी गई। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या यही अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मॉडल है।

अपने कार्यकाल का हवाला देते हुए ई. के. पलानीस्वामी ने कहा कि अन्नाद्रमुक सरकार ने मुसलमानों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं लागू की थीं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि द्रमुक ने भी पहले भाजपा के साथ गठबंधन किया था, ऐसे में अब उनके आरोप राजनीतिक द्वंद्व का हिस्सा हैं।

चुनावी रैली के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन के बयानों को अहंकारपूर्ण बताते हुए कहा कि द्रमुक को अपने पिछले चुनावी प्रदर्शन पर नजर डालनी चाहिए। उन्होंने 2011 से 2021 के बीच अन्नाद्रमुक की चुनावी सफलताओं का जिक्र करते हुए अपनी पार्टी की मजबूती पर जोर दिया।

इसके साथ ही पलानीस्वामी ने द्रमुक सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि किसानों, कर्मचारियों और अन्य वर्गों से किए गए कई वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं। पुरानी पेंशन योजना और अन्य घोषणाओं को लेकर भी उन्होंने सरकार को घेरा।

महिलाओं को दी जाने वाली मासिक सहायता योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि यह फैसला भी अन्नाद्रमुक के दबाव के कारण लागू किया गया। कुल मिलाकर, तमिलनाडु की राजनीति में दोनों दलों के बीच टकराव और बयानबाजी आने वाले चुनावों से पहले और तेज होने के संकेत दे रही है।


नीतीश कुमार का बड़ा फैसला, एमएलसी पद से दिया इस्तीफा

पटना। बिहार की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। नीतीश कुमार ने विधान परिषद (एमएलसी) की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद संवैधानिक प्रावधानों के तहत उन्हें 14 दिनों के भीतर एक सदन की सदस्यता छोड़ना अनिवार्य था, जिसकी समयसीमा आज समाप्त हो रही थी।

मुख्यमंत्री का इस्तीफा स्वीकार करते हुए विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने बताया कि त्यागपत्र मात्र 29 शब्दों में लिखा गया था। मंत्री विजय कुमार चौधरी और एमएलसी संजय गांधी इस्तीफा लेकर पहुंचे थे।

हालांकि, नीतीश कुमार फिलहाल बिहार के मुख्यमंत्री बने रहेंगे। उनके मुख्यमंत्री पद छोड़ने को लेकर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सियासी हलकों में अटकलें तेज हैं कि राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के बाद वे यह पद भी छोड़ सकते हैं। उनका राज्यसभा कार्यकाल 10 अप्रैल से शुरू होगा।

इस घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि बिहार में जल्द नेतृत्व परिवर्तन हो सकता है। 2005 से सत्ता में सहयोगी रही भाजपा को इस बार मुख्यमंत्री पद मिलने की संभावना जताई जा रही है।

सीएम रेस में आगे सम्राट चौधरी
डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा है। पार्टी में उनका तेजी से उभार और कुशवाहा समुदाय में उनकी मजबूत पकड़ उनके पक्ष में मानी जा रही है।

नित्यानंद राय भी दावेदार
केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय का नाम भी संभावित उम्मीदवारों में शामिल है। हालांकि उनका यादव समुदाय से होना, जो पारंपरिक रूप से राष्ट्रीय जनता दल के साथ जुड़ा रहा है, उनके लिए चुनौती बन सकता है।

फिलहाल भाजपा और जदयू की ओर से मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में हलचल और तेज होने की संभावना है।


लोगों के मतदान का अधिकार छीनने की कोशिश कर रही केंद्र सरकार- ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा और केंद्र सरकार पर बोला जोरदार हमला

कोलकाता/मयनागुड़ी। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर चुनावी अभियान की शुरुआत करते हुए मयनागुड़ी से भाजपा और केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला। अपनी पहली जनसभा में उन्होंने मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठाए।

ममता बनर्जी ने कहा कि मतदाता सूची से वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका जताई जा रही है, जो लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि संविधान के प्रावधानों का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है।

उन्होंने नागरिकता और पहचान के मुद्दे को भी उठाते हुए पूछा कि किस आधार पर किसी को वैध मतदाता माना जाएगा। टीएमसी प्रमुख ने कहा कि लोगों के वोट देने के अधिकार को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है और भविष्य में एनआरसी जैसे कदमों के जरिए नागरिकता पर भी असर पड़ सकता है।

रैली के दौरान ममता बनर्जी ने भाजपा को बंगाल विरोधी बताते हुए आरोप लगाया कि अन्य राज्यों में बंगालियों के साथ भेदभाव और हिंसा की घटनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने असम में नामांकन रद्द होने के मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि उनके प्रत्याशी नामांकन के समय कानूनी तैयारी के साथ जाएं।

उन्होंने भाजपा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पार्टी चुनाव से पहले बड़े-बड़े वादे करती है, लेकिन चुनाव के बाद जनता को निराश करती है। ममता बनर्जी ने अपने समर्थकों से सतर्क रहने और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया।


बंगाल में नहीं चलेगी विभाजन की राजनीति- ममता बनर्जी

राज्य में किसी भी नागरिक का वोट देने का अधिकार छीना नहीं जाएगा- ममता बनर्जी

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मी के बीच ईद के मौके पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता के रेड रोड पर ईद की नमाज के बाद जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार और भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राज्य में किसी भी नागरिक का वोट देने का अधिकार छीना नहीं जाएगा और इसके खिलाफ उनकी पार्टी पूरी ताकत से संघर्ष करेगी।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले मतदाता सूची में बदलाव के जरिए लोगों के अधिकारों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि लोकतंत्र में हर वोट की अहमियत है और इसे कमजोर करने वाली किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

दरअसल, तृणमूल कांग्रेस ने विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। पार्टी का आरोप है कि यह प्रक्रिया खासतौर पर कुछ क्षेत्रों को प्रभावित कर रही है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ममता बनर्जी ने चेतावनी दी कि इस तरह के कदमों का कड़ा विरोध किया जाएगा।

अपने संबोधन में उन्होंने सामाजिक एकता पर भी जोर देते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल हमेशा से भाईचारे और सौहार्द की मिसाल रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में धर्म और जाति के नाम पर विभाजन की राजनीति को सफल नहीं होने दिया जाएगा।

वहीं, तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी ईद के मौके पर लोगों को संबोधित करते हुए एकता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि समाज को बांटने की कोशिशें कामयाब नहीं होंगी और देश की असली ताकत आपसी भाईचारा है।


रसोई गैस के दाम बढाकर मोदी सरकार ने गरीब का चूल्हा बुझाने का किया है काम- ज्योति रौतेला

देहरादून। प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय देहरादून में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने कहा कि आज महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत सबसे निम्न स्तर पर थी तब भाजपा सरकार ने सस्ता पेट्रोल-डीजल करके जनता को क्यों नहीं दी?

ज्योति रौतेला ने कहा कि जब समूचा विपक्ष संसद के दोनों सदनों में पश्चिम एशिया की स्थिति और उसके भारत पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा की मांग कर रहा है। तब भी मोदी सरकार ऐसी बहस की अनुमति देने से हठपूर्वक इनकार कर रही है। सरकार साफ तौर पर भयभीत दिख रही है। उसकी विदेश नीति पहले ही बुरी तरह से एक्सपोज हो चुकी है। उन्होंने कहा कि जब अमेरिका के प्रतिनिधि ये कह रहे है कि भारत को 30 दिन की अनुमति है रूस से तेल खरीदने की तो हमारे प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ने सामने आकर इस बात का खंडन क्यों नहीं किया कि हमे किसी देश से अनुमति की जरूरत नहीं है। इसका खंडन ना करके भाजपा सरकार ने ये बता दिया कि वो ट्रम्प के अनुसार चल रहे हैं। उन्हें देश की 140 करोड़ जनता से कोई मतलब नहीं है।

प्रदेश महिला अध्यक्ष ने कहा कि आज जब देश में रसोई गैस सिलिंडर को लेकर हाहाकार मचा है, तब सरकार सूत्रों के हवाले से क्यों बयानबाजी कर रही है? प्रधानमंत्री जिन्हें बोलने का बहुत शौक है वो सामने आकर क्यों नहीं देश की जनता से संवाद कर रहे हैं? प्रधानमंत्री का सामने आकर संवाद ना करना स्पष्ट बता रहा है कि समस्या बहुत गंभीर है। समस्या इतनी गंभीर है कि दिल्ली हाईकोर्ट में किचन बंद हो गयी है। कर्नाटक में होटल एसोसिएशन ने पत्र लिखकर सिलेंडर ना होने की वजह से होटल बंद करने का ऐलान कर दिया है। इन सबके बीच प्रधानमंत्री प्रचार मंत्री बनकर केरल और तमिलनाडु में चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं। देश में लगातार बढ़ती महंगाई और रसोई गैस के दामों में हो रही भारी बढ़ोतरी ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। केंद्र की मोदी सरकार की गलत आर्थिक नीतियों का सीधा असर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर पड़ रहा है। पिछले 12 सालों से रसोई गैस जैसी आवश्यक वस्तु के दाम लगातार बढ़ने से गृहिणियों का घरेलू बजट पूरी तरह बिगड़ गया है।

ज्योति रौतेला ने यह भी कहा कि देश और प्रदेश में बेरोजगारी, महंगाई एवं भ्रष्टाचार अपने चरम पर है तथा भाजपा साम्प्रदायिक मुद्दों की ओर जनता का ध्यान भटका रही है। जहां एक ओर देश की जनता विगत कई वर्षों से लगातार महंगाई की मार झेल रही है, अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में भारी गिरावट होने के बावजूद केन्द्र की मोदी सरकार ने अपने 12 वर्ष के कार्यकाल में रसोई गैस के सिलेण्डर की कीमत 450 रू0 से बढ़ाकर 1100 रू0 तक पहुंचाकर गरीब और अल्प आय वर्ग के परिवारों के बच्चों के पेट पर चोट करने का काम किया है।

ज्योति रौतेला ने कहा कि आश्चर्यजनक बात तो यह है कि रसोई गैस, पेट्रोल, डीजल एवं आम जरूरत के सामानों के दामों में विगत वर्षों में केन्द्र सरकार द्वारा दोगुने से अधिक की वृद्धि करने पर लोग मौन हैं। मोदी सरकार द्वारा अपने मित्र औद्योगिक घरानों को निजी लाभ पहुंचाने के लिए विगत 12 वर्षों में रसोई गैस के सिलेण्डर की कीमत में लगभग 700 रू0 से अधिक की भारी वृद्धि की है जिससे कुछ निजी औद्योगिक घरानों को होने वाले लाभांश का फायदा करोड़ों नहीं बल्कि अरबों रूपये प्रतिमाह मे हो रहा है तथा देश का आम आदमी महंगाई की मार झेलने का मजबूर है। ये वही तेल कम्पनियां व औद्योगिक घराने हैं जिनके द्वारा भारतीय जनता पार्टी को चुनावी बॉड के माध्यम से कई हजार करोड़ रूपये का चंदा प्राप्त हुआ है। चुनिंदा औद्योगिक घरानों को अनधिकृत रूप से पहुंचाया गया लाभ ही चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के धन के प्रवाह का स्रोत रहा है। मोदी सरकार एक ओर महंगाई को नियंत्रित करने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन हकीकत यह है कि रोजमर्रा की जरूरत की चीजें आम आदमी की पहुंच से दूर होती जा रही हैं। रसोई गैस के बढ़ते दामों के कारण गरीब और निम्न मध्यम वर्ग के परिवारों को भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि आज जरूरत की सभी चीजें फल, सब्जी, दालें दोगुने दाम पर मिल रहे हैं। पेट्रोल, डीजल व रसोई गैस के बेतहाशा बढ़ते दाम आम आदमी का जीना दूभर कर रहे हैं। भाजपा की केन्द्र व राज्य सरकारें महंगाई पर काबू पाने में असफल साबित हुई हैं। रसोई गैस सिलेंडर के दाम इतने बढ चुके हैं कि गरीब आदमी के घर का चूल्हा बुझने की कगार पर है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित सभी भाजपा नेताओं ने अपनी सभी चुनावी जनसभाओं में महंगाई कम करने का ढिंढोरा पीटते थे परन्तु उनके 12 साल के कार्यकाल में मंहगाई अपने चरम पर पहुंच गई है तथा आम आदमी उसके बोझ को सहन करने में असमर्थ हो गया है।

ज्योति रौतेला ने कहा कि कांग्रेस पार्टी सरकार से मांग करती है कि रसोई गैस की कीमतों में तत्काल कमी की जाए और महंगाई पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि आम जनता को राहत मिल सके। यदि सरकार जल्द ही इस दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाती है, तो जनता के हितों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने को बाध्य होना पड़ेगा।

पत्रकार वार्ता में प्रदेश उपाध्यक्ष नजमा खान, महानगर अध्यक्ष उर्मिला थापा ढौंडियाल, उपाध्यक्ष चन्द्रकला नेगी, जिलाध्यक्ष पूनम सिंह, प्रदेश महासचिव अनुराधा तिवाडी आदि उपस्थित थे।


नागरिकता के नाम पर मतुआ समुदाय को अनिश्चितता और भ्रम में धकेल रही केंद्र सरकार- ममता बनर्जी

नागरिकता मुद्दे पर ममता बनर्जी ने कहा– पीढ़ियों से देश के नागरिक हैं मतुआ लोग

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को केंद्र सरकार पर मतुआ समुदाय को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नागरिकता के मुद्दे पर केंद्र की नीतियों से मतुआ समुदाय के लोगों में असमंजस और असुरक्षा की स्थिति पैदा हो रही है। मतुआ समुदाय की आध्यात्मिक नेता बिनापानी देवी ‘बरोमा’ की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि वर्षों से देश में रह रहे लोगों की नागरिकता पर सवाल खड़ा करना उचित नहीं है।

कई पीढ़ियों से देश के नागरिक हैं मतुआ समुदाय के लोग
ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि मतुआ समुदाय के लोग कई पीढ़ियों से भारत में रह रहे हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेते आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नागरिकता के नाम पर उन्हें अनिश्चितता और भ्रम की स्थिति में डालने की कोशिश की जा रही है। बनर्जी ने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाने जैसी प्रक्रियाओं के जरिए समुदाय को परेशान किया जा रहा है।

अधिकारों से समझौता नहीं करेगी राज्य सरकार
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार मतुआ समुदाय के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार से समुदाय के अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राज्य सरकार ऐसे हर कदम का विरोध करेगी जो बंगाल के लोगों के हितों के खिलाफ होगा।

बरोमा से रहा विशेष जुड़ाव
ममता बनर्जी ने कहा कि बिनापानी देवी के साथ उनका व्यक्तिगत और आध्यात्मिक संबंध रहा है और उन्हें उनका मातृस्नेह प्राप्त हुआ था। उन्होंने बरोमा के सामाजिक योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने जीवनभर समानता और भाईचारे के मूल्यों को आगे बढ़ाने का काम किया।

समुदाय के विकास के लिए कई पहल
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने मतुआ समुदाय के कल्याण के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। इनमें मतुआ विकास बोर्ड की स्थापना और उत्तर 24 परगना के ठाकुरनगर में हरिचंद-गुरुचंद विश्वविद्यालय की स्थापना जैसे कदम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सरकार आगे भी समुदाय के सामाजिक और शैक्षिक विकास के लिए काम करती रहेगी।


“परिवर्तन यात्रा” का उद्देश्य राज्य में राजनीतिक बदलाव लाना और विकास को गति देना है- अमित शाह

गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य सरकार की नीतियों पर उठाये सवाल

पश्चिम बंगाल। गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल को तेज करते हुए दक्षिण 24 परगना में आयोजित एक जनसभा में विपक्ष पर तीखा हमला बोला। अपने संबोधन में उन्होंने राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए विकास और कानून-व्यवस्था के मुद्दों को प्रमुखता से सामने रखा।

गृह मंत्री ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि इससे राज्य की प्रगति प्रभावित हुई है। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल आर्थिक दबाव में है और भारी कर्ज के बोझ से जूझ रहा है। साथ ही उन्होंने मदरसों को दी जा रही आर्थिक सहायता को लेकर भी सवाल उठाए।

सभा के दौरान अमित शाह ने अन्य राज्यों की राजनीति पर भी टिप्पणी करते हुए परिवारवाद के मुद्दे को उठाया। उन्होंने विभिन्न विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे क्षेत्रीय राजनीति को परिवार तक सीमित कर रहे हैं, जिससे लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंच रहा है।

भाजपा की रणनीति पर बोलते हुए शाह ने कहा कि पार्टी की “परिवर्तन यात्रा” का उद्देश्य राज्य में राजनीतिक बदलाव लाना और विकास को गति देना है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर राज्य में भाजपा की सरकार बनती है तो भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जाएगी और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार में पारदर्शिता की कमी है और सत्ता का केंद्रीकरण बढ़ रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की सुरक्षा और सीमाई इलाकों में घुसपैठ एक गंभीर चुनौती बनी हुई है, जिस पर सख्त कदम उठाने की जरूरत है।

अमित शाह ने आश्वासन दिया कि भाजपा सत्ता में आने पर सीमा सुरक्षा को सुदृढ़ करेगी और नागरिकों के हितों की रक्षा को प्राथमिकता देगी। इसके अलावा उन्होंने सरकारी कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग के अनुरूप वेतन व्यवस्था लागू करने का भी वादा किया।


मौलाना अरशद मदनी के बयान पर राजनीतिक घमासान, कांग्रेस–भाजपा आमने-सामने

नई दिल्ली- जमीयत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के हालिया बयान ने राष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। बयान सामने आते ही विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएँ देनी शुरू कर दीं। कांग्रेस की ओर से नेता उदित राज ने मदनी के रुख का समर्थन किया, जबकि भाजपा ने इसे आड़े हाथों लेते हुए तीखी आपत्ति जताई।

कांग्रेस नेता उदित राज ने आरोप लगाया कि देश में सिर्फ मुसलमान ही नहीं, बल्कि दलित और अन्य पिछड़ा वर्ग भी नियुक्तियों में उपेक्षा का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ की बात तो करती है, लेकिन व्यवहार में सिर्फ चुनिंदा समुदायों को प्राथमिकता दी जा रही है। उदित राज के अनुसार, केंद्र सरकार के अंतर्गत आने वाली 48 विश्वविद्यालयों में एक भी मुस्लिम, दलित या ओबीसी समुदाय का वाइस-चांसलर नहीं है और देश के 159 प्रतिष्ठित संस्थानों में भी इन वर्गों का प्रतिनिधित्व नदारद है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विभिन्न संस्थानों में वही लोग नियुक्त किए जा रहे हैं जो संघ और भाजपा की विचारधारा से मेल खाते हैं। अल फलाह यूनिवर्सिटी के संदर्भ में उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति पर आतंकवादी गतिविधियों का संदेह है, तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन पूरे विश्वविद्यालय को कठघरे में खड़ा करना उचित नहीं है। वहीं हाल ही में हुई ‘लैटरल एंट्री’ आईएएस नियुक्तियों को लेकर भी उदित राज ने कहा कि इनमें एक भी उम्मीदवार दलित, आदिवासी या पिछड़े वर्ग से नहीं था, जिससे स्पष्ट है कि सरकार इन समुदायों को मुख्यधारा से दूर रख रही है।


6 दिसंबर को रखेंगे बाबरी मस्जिद की नींव, टीएमसी विधायक के बयान से मचा सियासी बवाल

बाबरी मस्जिद की नींव रखने के दावे पर भाजपा ने लगाया तुष्टिकरण का आरोप

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। टीएमसी के एक विधायक द्वारा मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद की नींव रखने का दावा सामने आने के बाद प्रदेश में सियासी टकराव तेज हो गया है। विधायक की घोषणा के बाद भाजपा ने तीखी आपत्ति जताते हुए इसे तुष्टिकरण की राजनीति करार दिया है।

टीएमसी के भरतपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हुमायूं कबीर ने कहा है कि 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण की आधारशिला रखी जाएगी, जिसमें बड़ी संख्या में लोग और कई प्रमुख शख्सियतें शामिल होंगी। उन्होंने दावा किया कि मस्जिद का निर्माण लगभग तीन वर्षों में पूरा होगा। कबीर के इस बयान ने बंगाल की राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है।

भाजपा ने तत्काल इस ऐलान पर कड़ा विरोध जताया। भाजपा सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो ने कहा कि बाबर एक विदेशी हमलावर था और उसके नाम पर किसी भी प्रकार का निर्माण स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि मस्जिद निर्माण की कोशिश हुई तो भाजपा उस स्थान पर राम मंदिर की स्थापना की मांग करेगी।

भाजपा नेताओं ने टीएमसी पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया। पार्टी प्रवक्ता अग्निमित्रा पॉल का कहना है कि किसी भी धार्मिक स्थल के निर्माण पर उन्हें आपत्ति नहीं, लेकिन टीएमसी इसे राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है। वहीं भाजपा नेता राहुल सिन्हा ने कहा कि मस्जिद या मंदिर का निर्माण उचित स्थान पर होना चाहिए और इसका राजनीतिकरण कर समुदाय विशेष को गुमराह नहीं किया जाना चाहिए।

कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस नेता अजय कुमार लल्लू ने कहा कि उनकी पार्टी हमेशा रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और समानता के मुद्दों पर राजनीति करती है और चुनाव भी इन्हीं मुद्दों पर लड़े जाने चाहिए। कांग्रेस सांसद उदित राज ने कहा कि मंदिर की नींव रखी जा सकती है तो मस्जिद की रखे जाने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए, और इस विषय को बेवजह विवाद का रूप दिया जा रहा है।

इधर, 6 दिसंबर को टीएमसी द्वारा कोलकाता में एक बड़ी रैली आयोजित करने की तैयारी है, जिसे ‘समहति दिवस’ नाम दिया गया है। यह रैली आमतौर पर पार्टी का अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ आयोजित करता है, लेकिन इस बार इसकी जिम्मेदारी छात्र और युवा विंग को सौंपी गई है। संभावना है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी इसमें संबोधित करेंगे।

राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और इस बीच एसआईआर (Special Summary Revision) को लेकर पहले से ही तनाव बढ़ा हुआ है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण को धांधली बताया और चेतावनी दी कि वैध मतदाताओं के नाम हटे तो इसके गंभीर राजनीतिक परिणाम होंगे। ऐसे में बाबरी मस्जिद मुद्दा भी आगामी चुनावी माहौल पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।


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