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हरिद्वार को मिलेगा आधुनिक रोपवे सिस्टम, सचिवालय में बनी आगे की रणनीति

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हरिद्वार को मिलेगा आधुनिक रोपवे सिस्टम, सचिवालय में बनी आगे की रणनीति

देहरादून ( उत्तराखंड पोस्ट)  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने बुधवार को राज्य सचिवालय में उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन द्वारा हरिद्वार शहर में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड रोपवे परियोजना की विस्तृत समीक्षा की।

बैठक में परियोजना के क्रियान्वयन, लागत, भूमि हस्तांतरण, कन्सेशन अवधि और वित्तीय व्यवहार्यता समेत कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। सचिव आवास ने अधिकारियों को परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक निर्देश भी दिए।

पीपीपी मॉडल पर बनेगा आधुनिक रोपवे
बैठक के दौरान उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक बृजेश कुमार मिश्रा ने हरिद्वार में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड रोपवे परियोजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि इस परियोजना का क्रियान्वयन और संचालन सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के अंतर्गत डीबीएफओटी आधार पर किया जाना प्रस्तावित है।

प्रस्तुतीकरण में परियोजना की संरचना, संभावित मार्ग, निर्माण कार्य और संचालन व्यवस्था की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना से हरिद्वार शहर में यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के साथ ही श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आधुनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

प्रति किलोमीटर लागत लगभग 75 करोड़
समीक्षा बैठक में सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने परियोजना की प्रति किलोमीटर लागत के संबंध में विस्तृत जानकारी ली। इस पर प्रबंध निदेशक द्वारा बताया गया कि रोपवे स्टेशन, कार्यशाला और भूमि तथा अन्य आवश्यक क्लीयरेंस को छोड़कर परियोजना की संरचना के निर्माण कार्य की अनुमानित लागत लगभग 75 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर आंकी गई है। अधिकारियों ने बताया कि यह लागत केवल निर्माण कार्य से संबंधित है, जबकि भूमि, स्टेशन निर्माण और अन्य व्यवस्थाएं अलग से शामिल होंगी। बैठक में परियोजना के तकनीकी और वित्तीय पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की भूमि का मुद्दा उठा
बैठक में रोपवे परियोजना के लिए आवश्यक भूमि के विषय पर भी विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि प्रस्तावित रोपवे स्टेशन के लिए जिस भूमि की आवश्यकता है, वह उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग के स्वामित्व में है। इस पर सचिव आवास ने निर्देश दिए कि उत्तराखंड शासन के सिंचाई विभाग के माध्यम से उत्तर प्रदेश शासन को पुनः पत्र भेजा जाए। उन्होंने कहा कि पूर्व में इस विषय में प्रस्ताव भेजा जा चुका है, इसलिए अब अनुस्मारक पत्र के माध्यम से प्रमुख सचिव सिंचाई, उत्तराखंड शासन द्वारा उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग से प्रस्तावित भूमि को 1 रुपये प्रतिवर्ष की दर से 99 वर्षों की लीज पर आवास विभाग, उत्तराखंड शासन को हस्तांतरित कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।

कन्सेशन अवधि बढ़ाने पर भी विचार
बैठक में परियोजना की कन्सेशन अवधि की भी समीक्षा की गई। वर्तमान में परियोजना के लिए 30 वर्ष की कन्सेशन अवधि प्रस्तावित है। सचिव आवास ने कहा कि परियोजना की उच्च लागत को देखते हुए निविदा प्रक्रिया में कन्सेशन अवधि बढ़ाने का विकल्प भी रखा जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि अतिरिक्त 30 वर्ष तक की अवधि बढ़ाने का प्रावधान रखा जाए, जिसे 15–15 वर्ष के दो चरणों में लागू किया जा सके। इससे परियोजना की वित्तीय व्यवस्था सुनिश्चित होगी और निविदा प्रक्रिया में अधिक प्रतिस्पर्धा भी मिल सकेगी।

डीपीआर से ईएफसी स्तर तक बढ़ेगी प्रक्रिया
समीक्षा के दौरान सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजना को डीपीआर स्तर पर अनुमोदित करते हुए इसे आगे की कार्यवाही के लिए ईएफसी स्तर पर प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने कहा कि परियोजना के सभी तकनीकी, वित्तीय और प्रशासनिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक प्रक्रियाएं समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएं।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर परियोजना को जल्द धरातल पर उतारने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।बैठक के अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ समीक्षा बैठक का समापन किया गया।

तीर्थ यात्रियों और पर्यटकों को मिलेगी आधुनिक और सुरक्षित परिवहन सुविधा- डॉ आर राजेश कुमार
सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि हरिद्वार में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड रोपवे परियोजना शहर की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के साथ ही तीर्थ यात्रियों और पर्यटकों को आधुनिक और सुरक्षित परिवहन सुविधा प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में राज्य सरकार प्रदेश में आधुनिक और टिकाऊ परिवहन व्यवस्थाओं के विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजना की डीपीआर, भूमि से जुड़ी औपचारिकताओं और वित्तीय व्यवस्थाओं को प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा किया जाए, ताकि परियोजना को जल्द से जल्द जमीन पर उतारा जा सके।


मसूरी में खुलने जा रहा हाईटेक ईको पार्क, क्या-क्या मिलेगा; पूरी डिटेल

Eco Park in Mussoorie: पहाड़ों की रानी मसूरी में जल्द ही पर्यटकों को एक नया आकर्षण मिलने जा रहा है। हुसैनगंज क्षेत्र में लगभग 15.5 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित हाईटेक ईको पार्क का निर्माण कार्य जल्द शुरू होने वाला है। मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण द्वारा इस परियोजना के टेंडर शीघ्र जारी किए जाएंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस महत्वाकांक्षी योजना को जल्द धरातल पर उतारने के निर्देश दिए हैं।

एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने बताया कि यह ईको पार्क केवल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाएगा। मसूरी लंबे समय से देश-विदेश के पर्यटकों की पसंदीदा जगह रही है, जहां हर साल बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। बढ़ते पर्यटन दबाव के कारण प्राकृतिक संतुलन बनाए रखना चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में यह परियोजना एक संतुलित और इको-फ्रेंडली टूरिज्म मॉडल के रूप में विकसित की जाएगी।

क्या-क्या होंगी सुविधाएं?

प्रस्तावित हाईटेक ईको पार्क में प्रकृति के बीच आधुनिक सुविधाओं का समावेश किया जाएगा। इसकी रूपरेखा इस तरह तैयार की जा रही है कि पहाड़ों की हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता को कोई नुकसान न पहुंचे। पार्क में कई आकर्षक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जैसे:

कृत्रिम पहाड़ी जलाशय

घने पेड़ों के बीच से गुजरने वाले नेचर ट्रेल/वन पथ

पर्यावरण और स्थानीय संस्कृति को दर्शाने वाला छोटा संग्रहालय

बैठने और विश्राम के लिए इको-फ्रेंडली ज़ोन

प्राकृतिक सौंदर्य के बीच फोटो पॉइंट्स और व्यूइंग एरिया

एमडीडीए के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने बताया कि यह पार्क पर्यटकों को एक शांत, प्राकृतिक और आधुनिक अनुभव देने के उद्देश्य से विकसित किया जाएगा।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ

इस परियोजना से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। होटल, गाइड, ट्रांसपोर्ट और अन्य सेवाओं से जुड़े लोगों को इसका सीधा फायदा मिलेगा। साथ ही, मसूरी को एक सस्टेनेबल टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में पहचान मिलने में भी मदद मिलेगी।

जल्द शुरू होगा निर्माण

सरकार की प्राथमिकता में शामिल इस परियोजना के लिए जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी और निर्माण कार्य को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि तय समय सीमा के भीतर काम पूरा हो और गुणवत्ता के साथ किसी तरह का समझौता न किया जाए।


उत्तराखंड में कई दृष्टि से ऐतिहासिक व विशेष है इस बार की जनगणना, पहली बार होंगे जातिगत आंकड़े भी

प्रदेश में जनगणना का पहला चरण गुरुवार से शुरू हो रहा है। यह भारत की 16वीं व आजाद भारत की आठवीं जनगणना है। इस जनगणना में कई बातें विशेष हैं। पहली यह कि इस बार इसमें जातिगत जनगणना भी की जाएगी।

यह प्रथम अवसर होगा जब जनगणना का शत-प्रतिशत कार्य डिजिटल माध्यम से संपादित किया जाएगा। यह पूरी तरह मोबाइल एप्लीकेशन पर आधारित होगी। साथ ही प्रगणक व पर्यवेक्षक अपने स्वयं के मोबाइल फोन के माध्यम से समस्त आंकड़ों का संकलन करेंगे।

भारत में सर्वप्रथम जनगणना वर्ष 1872 में हुई थी। आजाद भारत में पहली जनगणना वर्ष 1951 में हुई थी। इसके बाद हर दस साल में जनगणना करने का प्रविधान किया गया। इससे पहले जनगणना वर्ष 2011 में हुई।

इसके बाद कोरोना के कारण वर्ष 2021 में जनगणना नहीं हो पाई। अब यह जनगणना हो रही है। देश के विभिन्न राज्यों में एक अप्रैल, 2026 से जनगणना के प्रथम चरण में मकान सूचीकरण का कार्य शुरू किया जा चुका है।

कार्मिकों के माध्यम से मकानों की गणना का कार्यक्रम 25 अप्रैल से शुरू होकर 24 मई तक होगा। इसमें आमजन को घर की स्थिति, घर में उपयोग होने वाली वस्तुओं, मुख्य खाद्य पदार्थ आदि के संबंध में 33 प्रश्नों के भीतर जानकारी देनी होगी।

इन 16 भाषाओं में की जा सकती है स्वगणना

उन्होंने बताया कि स्वगणना में जनता की सहूलियत के लिए आनलाइन जानकारी 16 भाषाओं में दी जाएगी। इनमें असमिया, बंगाली, अंग्रेजी, हिंदी, गुजराती, कन्नड़, कोंकणी, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, नेपाली, ओडिया, पंजाबी, तमिल, तेलुगु और उर्दू शामिल है।

सीएमएमएस पोर्टल से रहेगी नजर

स्वगणना के बाद भवन स्वामी जो एसई आइडी रखेगा। उसका उपयोग प्रगणक मौके पर आकर भवन गणना के दौरान करेंगे। जैसे ही वह इस आइडी का प्रयोग कर गणना पूरी कर लेंगे तो उसकी जानकारी सीधे आनलाइन दर्ज हो जाएगी।

विभागीय अधिकारी जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली (सीएमएमएस) के माध्यम से आनलाइन यह देख सकेंगे कि प्रगणक किस क्षेत्र में हैं और उसने कितने भवनों की गणना कर ली है।

जियो टैगिंग से कर सकेंगे भवनों का चिह्नीकरण

स्वगणना में एक महत्वपूर्ण कार्य भवन की जियो टैगिंग भी होगा। इसके लिए भवन स्वामी अथवा प्रगणक स्वगणना व भवन गणना के दौरान जियो टैगिंग करेंगे। इससे भवनों की सही स्थिति की जानकारी मिल सकेगी।

हरिद्वार में तैनात हैं सबसे अधिक प्रगणक

जगनणना के लिए विभाग ने 30 हजार से अधिक प्रगणकों की तैनाती की है। इनमें सबसे अधिक 3460 प्रगणक हरिद्वार, 3046 प्रगणक यूएस नगर, 2288 प्रगणक देहरादून, 1959 प्रगणक पौड़ी और 1676 प्रगणक टिहरी में तैनात होंगे। वहीं सबसे कम 699 प्रगणक रुद्रप्रयाग जिले में तैनात होंगे।


दिल्ली से हरिद्वार-ऋषिकेश तक दौड़ेगी नमो भारत? 3 घंटे में तय होगी दूरी

Namo Bharat extension plan: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्र सरकार के सामने एक प्रस्ताव रखा है, जो दिल्ली से लेकर हरिद्वार और ऋषिकेश तक तेज रफ्तार कनेक्टिविटी का रास्ता खोल सकता है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात कर नमो भारत (RRTS) कॉरिडोर को मेरठ के मोदिपुरम से हरिद्वार तक बढ़ाने की मांग की है। इसके साथ ही देहरादून-हरिद्वार-ऋषिकेश के बीच अलग मेट्रो कॉरिडोर बनाने पर भी जोर दिया गया है।

अभी मेरठ तक, फिर बढ़कर जाएगी…

फिलहाल नमो भारत ट्रेन सराय काले खां (दिल्ली) से मेरठ के मोदिपुरम तक चल रही है। प्रस्तावित विस्तार के तहत यह कॉरिडोर मोदिपुरम से आगे बढ़ते हुए हरिद्वार और ऋषिकेश तक जाएगा, जो मुख्य रूप से नेशनल हाईवे-58 के समानांतर विकसित किया जाएगा।

इस रूट में कई अहम शहर और कस्बे शामिल होंगे। इनमें मेरठ का मोदिपुरम, दौराला-सकौती, खतौली (मुजफ्फरनगर), पुरकाजी (UP-उत्तराखंड बॉर्डर), रुड़की, ज्वालापुर (हरिद्वार) और आखिर में ऋषिकेश शामिल हैं। खास बात यह है कि आईआईटी रुडकी जैसे प्रमुख शैक्षणिक केंद्र भी इस कॉरिडोर से सीधे जुड़ जाएंगे।

दिल्ली से ऋषिकेश मात्र 3 घंटे में पहुंचेंगे

अगर यह परियोजना मंजूर होती है, तो दिल्ली से ऋषिकेश का सफर सिर्फ ढाई से तीन घंटे में पूरा हो सकेगा। इससे पर्यटन, रियल एस्टेट और औद्योगिक विकास को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हरिद्वार और ऋषिकेश में हॉलिडे होम और सर्विस अपार्टमेंट की मांग में भारी उछाल आ सकता है, जबकि मुजफ्फरनगर और आसपास के इलाकों में इंडस्ट्रियल टाउनशिप तेजी से विकसित हो सकते हैं।

नेशनल पार्क से मंजूरी मिलने में आएगी चुनौती

हालांकि, इस परियोजना के सामने कई बड़ी चुनौतियां भी हैं। रुड़की से ऋषिकेश के बीच का हिस्सा राजाजी नेशनल पार्क और अन्य पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों से होकर गुजरता है, जहां निर्माण के लिए सख्त मंजूरी लेनी होगी। इसके अलावा जमीन अधिग्रहण और पहाड़ी इलाकों में ट्रैक बिछाने की लागत भी बड़ी बाधा बन सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ एक ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक बड़ा आर्थिक कॉरिडोर साबित हो सकता है। यह दिल्ली- मेरट-हरिद्वार बेल्ट के विकास को नई दिशा देगा। अब इस प्रस्ताव पर केंद्र सरकार, संबंधित राज्य सरकारों और NCRTC द्वारा आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।


कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने सुनीं ग्रामीणों की समस्याएं

जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान सरकार की प्राथमिकता है- रेखा आर्या

सोमेश्वर/अल्मोड़ा। सोमेश्वर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आगर रोलकुडी, भूलखर्कवाल, बछुराडी, नाकोट और रसियारा गांवों में आयोजित जन मिलन कार्यक्रमों में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने प्रतिभाग कर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और कई मांगों पर मौके पर ही कार्रवाई करते हुए विकास कार्यों की घोषणाएं कीं।

कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने सड़क निर्माण, पुलिया निर्माण, खेतों की सुरक्षा के लिए तारबाड़ एवं चारदीवारी, राशन कार्ड बनवाने, सोमेश्वर सब स्टेशन में ग्रिड संख्या बढ़ाने तथा पेयजल टैंक निर्माण जैसी समस्याएं प्रमुखता से रखीं।

कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि राशन कार्ड, प्रधानमंत्री आवास और शौचालय निर्माण के लिए 18 अप्रैल को सोमेश्वर में विशेष शिविर आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्राप्त आवेदनों का शीघ्र निस्तारण किया जाएगा।

उन्होंने आगर रोलकुडी में पंचायत भवन की चारदीवारी, नदी पर पुलिया निर्माण और मंदिर तक जाने वाले मार्ग के निर्माण के लिए विधायक निधि से 2-2 लाख रुपये देने की घोषणा की। भूलखर्कवाल और बछुराडी में पेयजल टैंक निर्माण के लिए 3 लाख रुपये तथा सीसी मार्ग निर्माण के लिए 3 लाख रुपये देने की घोषणा की गई।

नाकोट गांव में श्मशान घाट पर स्नानागार निर्माण एवं अन्य कार्यों के लिए 2 लाख रुपये तथा सीसी सड़क निर्माण के लिए 2 लाख रुपये स्वीकृत किए गए, साथ ही गोलज्यू देवता मंदिर के स्थल विकास के लिए ढाई लाख रुपये देने का ऐलान किया गया।

इसके अतिरिक्त उन्होंने कहा कि सोमेश्वर सब स्टेशन में एक और ग्रिड शुरू करने के लिए संबंधित विभागीय अधिकारियों से वार्ता की जाएगी, जिससे क्षेत्र में बिजली कटौती की समस्या से राहत मिल सके।

कार्यक्रम में सुंदर राणा, राजेंद्र कैड़ा, भुवन जोशी, राजेश सिंह रावत, भूपाल मेहरा, शंकर बिष्ट, राजेंद्र खाती, राजू लोहानी, अशोक तिवारी, गीता जोशी, खड़क सिंह नेगी, सुरेश बोरा, बंशीधर जोशी, कमल गिरी, सुनील कुमार, कमल कैड़ा, भारत भाकुनी, हरीश रावल, भारत चंद्र, पवन खाती, कृष्णा भंडारी, रेखा देवी, रंजीत रावत सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे।


जिला प्रशासन सख्त- अल्ट्रासाउंड व समस्त रेडियो डायग्नोस्टिक सेंटर संचालन के कडे मानक तय

पंजीकरण और नवीनीकरण के लिए प्रशासन ने तय किए कड़े नियम

देहरादून। जिला प्रशासन ने जनपद में संचालित और प्रस्तावित अल्ट्रासाउंड व रेडियो डायग्नोस्टिक सेंटरों के पंजीकरण और नवीनीकरण को लेकर सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्धारित मानकों का पालन किए बिना किसी भी डायग्नोस्टिक सेंटर को संचालित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

प्रशासन की ओर से पिछले छह माह से लगातार कार्रवाई करते हुए नए केंद्रों का पंजीकरण और पुराने केंद्रों का नवीनीकरण केवल तय मानकों के अनुरूप ही किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और आमजन की सुरक्षा को प्राथमिकता देना है।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि सभी अस्पतालों, अल्ट्रासाउंड और रेडियो डायग्नोस्टिक सेंटरों को क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 के प्रावधानों का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा। साथ ही बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियमों के तहत कचरे के सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी होगी। अल्ट्रासाउंड सेवाएं देने वाले केंद्रों के लिए पीसीपीएनडीटी अधिनियम का पालन करना भी जरूरी किया गया है।

पंजीकरण और नवीनीकरण प्रक्रिया के दौरान स्वच्छता, भवन सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र, बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण की वैध व्यवस्था, सीवेज ट्रीटमेंट सिस्टम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी जैसे सभी मानकों की गहन जांच की जाएगी।

प्रशासन ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि केवल उन्हीं केंद्रों को अनुमति दी जाए जो सभी मानकों पर खरे उतरते हों। किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन ने दोहराया है कि जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।


पूर्व सैनिकों को मिला तोहफा, सीएम ने किया सीएसडी कैंटीन व सैनिक मिलन केन्द्र का लोकार्पण

मुख्यमंत्री का रोड शो में जनता व जनप्रतिनिधियों ने पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत किया

खटीमा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को खटीमा के खेतलसंडा स्थित सीएसडी कैंटीन में सेवा संकल्प धारिणी फाउंडेशन द्वारा स्व. सूबेदार शेर सिंह धामी की छठी पुण्यतिथि पर आयोजित गौरव सैनिक सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने 715.51 लाख रुपये की लागत से निर्मित सीएसडी कैंटीन एवं 162.26 लाख रुपये से निर्मित सैनिक मिलन केन्द्र का लोकार्पण किया।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान अपने पिता स्व. सूबेदार शेर सिंह धामी के चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए तथा शहीदों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। उन्होंने शहीदों के परिजनों एवं वीर नारियों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित भी किया। इस अवसर पर उन्होंने 60 वीर नारियों एवं 80 वीर योद्धाओं को सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह उनके लिए अत्यंत भावुक क्षण है, क्योंकि यह आयोजन उनके पिताजी की पुण्य स्मृति में आयोजित किया गया है। उन्होंने कहा कि 6 वर्ष पूर्व का यह दिन उनके जीवन का सबसे दुखद दिन था, जब उन्होंने अपने पिता को खो दिया। उन्होंने बताया कि उनके पिताजी के विचार, सिद्धांत और संघर्षपूर्ण जीवन आज भी उन्हें प्रेरित करते हैं और हर कदम पर मार्गदर्शन देते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके पिताजी अपनी वर्दी को अत्यंत सम्मान और सलीके से रखते थे। उनसे उन्हें यह सीख मिली कि एक सैनिक के लिए उसकी वर्दी ही उसका सम्मान और जिम्मेदारी होती है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पिताजी ने उन्हें सिखाया कि राजनीति पद प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि जनसेवा का मार्ग है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके पिताजी ने 28 वर्षों तक महार रेजिमेंट में सेवा देते हुए 1962 के भारत-चीन युद्ध, 1965 व 1971 के भारत-पाक युद्ध तथा ऑपरेशन ब्लूस्टार और ऑपरेशन रक्षक जैसे महत्वपूर्ण अभियानों में योगदान दिया। उन्होंने कहा कि बचपन में वे अपने पिताजी से वीर सैनिकों की कहानियां सुनते थे, जिनसे उन्हें देशभक्ति और बलिदान की प्रेरणा मिली। उन्होंने कहा कि भले ही वे स्वयं सेना में नहीं हैं, लेकिन सैनिकों को अपना आदर्श मानते हुए राष्ट्र सेवा के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के रक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। आज भारत रक्षा उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014-15 में देश का रक्षा उत्पादन लगभग 46 हजार करोड़ रुपये था, जो बढ़कर 2024-25 में 1.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वहीं रक्षा निर्यात भी बढ़कर 38 हजार करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने कहा कि आज भारत 80 से अधिक देशों को रक्षा सामग्री उपलब्ध करा रहा है, जो देश की बढ़ती सामरिक शक्ति का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सैनिकों, शहीदों और उनके परिजनों के कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। शहीदों के परिजनों को मिलने वाली अनुग्रह राशि में वृद्धि की गई है तथा आश्रितों को सरकारी नौकरी दी जा रही है। इसके साथ ही वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि परमवीर चक्र से सम्मानित सैनिकों को दी जाने वाली राशि को 50 लाख रुपये से बढ़ाकर डेढ़ करोड़ रुपये किया गया है। इसके अतिरिक्त देहरादून में भव्य सैन्य धाम का निर्माण किया जा रहा है, जिससे आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति की प्रेरणा मिलेगी। राज्य सरकार द्वारा बलिदानियों के परिवारों को सरकारी नौकरी के लिए आवेदन अवधि 2 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष कर दी गई है।

कार्यक्रम में सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने भी अपने संबोधन में कहा कि सैनिकों का सम्मान करना हम सभी के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सैनिकों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है और भविष्य में भी इस दिशा में और प्रयास किए जाएंगे।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की माताजी श्रीमती विशना देवी, एवं मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती गीता पुष्कर धामी भी मौजूद थे।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा, राम सिंह कैड़ा, अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं अधिकारी उपस्थित थे।


विवाह समारोहों में गैस सिलेंडर आपूर्ति के लिए एसओपी लागू, अधिकतम दो सिलेंडर की अनुमति

पौड़ी।  विवाह समारोहों में गैस सिलेंडरों के सुचारु, पारदर्शी एवं नियंत्रित वितरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की गयी है। इसके अंतर्गत यह निर्धारित किया गया है कि किसी भी विवाह समारोह के लिए अधिकतम 02 व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति ही अनुमन्य होगी।

जिला पूर्ति अधिकारी अरुण कुमार वर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि इच्छुक आवेदनकर्ता को संबंधित क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी/पूर्ति निरीक्षक कार्यालय, उपजिलाधिकारी कार्यालय अथवा गोदाम में आवेदन प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। आवेदन के साथ 10 रुपये के स्टाम्प पर शपथ पत्र, विवाह कार्ड एवं आधार कार्ड की प्रति संलग्न करनी होगी। शपथ पत्र उपलब्ध न होने की स्थिति में संबंधित अधिकारी द्वारा आवेदन स्वीकार कर सत्यापन किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि प्राप्त आवेदन के आधार पर क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी/पूर्ति निरीक्षक द्वारा अस्थायी कनेक्शन जारी करने हेतु संबंधित गैस एजेंसी को संस्तुति प्रेषित की जाएगी। इसके पश्चात गैस एजेंसी द्वारा आवश्यक अभिलेख प्राप्त कर आवेदनकर्ता को अस्थायी कनेक्शन उपलब्ध कराया जाएगा तथा एसओपी के अनुरूप व्यावसायिक गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएंगे। इस संबंध में संबंधित अधिकारी को अवगत कराना एवं अभिलेखों का पृथक एवं विस्तृत विवरण संधारित करना भी अनिवार्य होगा।

उन्होंने यह भी बताया कि विवाह समारोह के अगले दिन आवेदक द्वारा उपलब्ध कराए गए गैस सिलेंडरों को संबंधित गैस एजेंसी में वापस जमा कराना अनिवार्य होगा, जिसकी सूचना गैस एजेंसी द्वारा संबंधित क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी/पूर्ति निरीक्षक को उपलब्ध कराई जाएगी।

उन्होंने समस्त क्षेत्रीय खाद्य अधिकारियों, पूर्ति निरीक्षकों एवं गैस एजेंसियों के प्रबंधकों को निर्देशित किया है कि शासन द्वारा जारी एसओपी एवं कार्यालय आदेशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करें, ताकि आमजन को पारदर्शी एवं व्यवस्थित ढंग से सेवाएं उपलब्ध करायी जा सकें।


विजिलेंस की भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, दो रिश्वतखोर कर्मचारी गिरफ्तार

अल्मोड़ा/किच्छा। उत्तराखंड में सतर्कता अधिष्ठान की टीम ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दो अलग-अलग मामलों में सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। अल्मोड़ा और किच्छा में हुई इन ट्रैप कार्रवाइयों से सरकारी विभागों में हड़कंप मच गया है।

लमगड़ा ब्लॉक में लेखाकार 15 हजार रिश्वत लेते गिरफ्तार

अल्मोड़ा के विकास खंड लमगड़ा में तैनात लेखाकार हर सिंह बिष्ट उर्फ हरीश सिंह बिष्ट को सतर्कता अधिष्ठान हल्द्वानी की ट्रैप टीम ने 8 अप्रैल 2026 को रंगे हाथों गिरफ्तार किया। अभियुक्त द्वारा शिकायतकर्ता से 3 लाख रुपये के शौचालय निर्माण कार्य की एफडीआर रिलीज कराने के एवज में 15 हजार रुपये की रिश्वत मांगी जा रही थी। टीम ने ब्लॉक कार्यालय लमगड़ा में कार्रवाई करते हुए उसे रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया।

किच्छा में उद्यान निरीक्षक 12 हजार लेते दबोचा

दूसरे मामले में उद्यान विभाग के ज्येष्ठ उद्यान निरीक्षक बादल पाण्डे को 9 अप्रैल 2026 को किच्छा स्थित उद्यान सचल दल केंद्र से ट्रैप टीम ने गिरफ्तार किया।
आरोप है कि आम के 16 पेड़ों को काटने की अनुमति देने के बदले 12 हजार रुपये की रिश्वत मांगी जा रही थी। शिकायत सत्य पाए जाने पर सतर्कता टीम ने जाल बिछाकर आरोपी को रंगे हाथों पकड़ लिया।


चारधाम यात्रा से पहले आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर टेबल टॉप एक्सरसाइज आयोजित

चारधाम यात्रा केवल उत्तराखण्ड राज्य ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण आयोजन है– कृष्णा एस वत्स

देहरादून। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण तथा उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में चारधाम यात्रा के दौरान संभावित आकस्मिकताओं एवं आपदा की स्थिति में प्रभावी रूप से निपटने हेतु एक विस्तृत टेबल टाॅप एक्सरसाइज का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर एनडीएमए के सदस्य एवं विभागाध्यक्ष कृष्णा एस वत्स ने टेबल टाॅप एक्सरसाइज की अध्यक्षता करते हुए संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा केवल उत्तराखण्ड राज्य ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण आयोजन है। गृह मंत्रालय एवं भारत सरकार का विशेष फोकस इस यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं निर्विघ्न रूप से संपन्न कराना है, जिसके लिए एनडीएमए द्वारा राज्य को हर संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।

उन्होंने चारधाम यात्रा के सफल संचालन हेतु राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यात्रा मार्गों पर जोखिम आकलन को और अधिक बहुआयामी बनाया जाना चाहिए। इसके अंतर्गत रूट स्पेसिफिक रिस्क मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए तथा संभावित खतरों के दृष्टिगत एंटीसिपेटरी एक्शन (पूर्वानुमान आधारित कार्यवाही) को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि सभी धामों की कैरिंग कैपेसिटी का समुचित ध्यान रखा जाए तथा माइक्रो लेवल पर विस्तृत रिस्क असेसमेंट किया जाए। संवेदनशील एवं जोखिमयुक्त स्थानों (हॉटस्पॉट्स) की पहचान कर वहां के लिए विशेष एवं ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए। साथ ही यात्रियों तक समयबद्ध एवं प्रभावी एलर्ट पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए, ताकि वे स्वयं भी आवश्यक सुरक्षात्मक कदम उठा सकें।

वत्स ने इम्पैक्ट बेस्ड फोरकास्टिंग को अपनाने पर विशेष बल दिया तथा कहा कि इससे संभावित आपदाओं के प्रभाव का बेहतर पूर्वानुमान लगाया जा सकेगा। उन्होंने क्राउड एवं ट्रैफिक मैनेजमेंट को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए इसके लिए रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण पर बल देते हुए उन्होंने मोबाइल हेल्थ यूनिट्स की संख्या बढ़ाने को कहा। साथ ही हेली सेवाओं की सुरक्षा को लेकर विशेष सावधानी बरतने तथा सभी हेलीकॉप्टर सेवा प्रदाताओं द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, जिससे किसी भी प्रकार की हेली दुर्घटना को रोका जा सके।

इस अवसर पर सचिव, एनडीएमए एवं वरिष्ठ आईएएस अधिकारी भारत सरकार मनीष भारद्वाज ने कहा कि चारधाम यात्रा के प्रबंधन एवं संचालन में उत्तराखण्ड राज्य ने एक बैंचमार्क स्थापित किया है। उन्होंने यात्रा को लेकर राज्य सरकार द्वारा अपनाए जा रहे दृष्टिकोण की सराहना करते हुए कहा कि विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों से ही इस प्रकार की बड़ी व्यवस्थाएं सफलतापूर्वक संचालित की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा के दौरान आपदा प्रबंधन के दृष्टिकोण से शून्य मृत्यु के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सभी व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने निर्देश दिए कि यात्रियों के मोबाइल फोन में सचेत एप को अनिवार्य रूप से डाउनलोड कराया जाए, ताकि समय पर चेतावनी एवं अलर्ट संदेश प्राप्त हो सकें और किसी भी संभावित जोखिम से बचाव सुनिश्चित किया जा सके।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए राज्य सरकार तथा यूएसडीएमए द्वारा चारधाम यात्रा को लेकर की गई तैयारियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने एनडीएमए का माॅक अभ्यास कराने के लिए आभार भी जताया। इस अवसर पर एडवाइजर आपरेशन, एनडीएमए, कर्नल कीर्ति प्रताप सिंह, ज्वाइंट एडवाइजर आपरेशंस, ले. कर्नल एसके शाही, लीड कंसलटेंट मेजर जनरल सुधीर कुमार बहल, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन महावीर सिंह चैहान, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओबैदुल्लाह अंसारी, कमाण्डेंट एनडीआरएफ संतोष कुमार आदि मौजूद रहे।

आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में स्टार्टअप्स को मौका दें

कृष्णा वत्स ने छोटे शहरों एवं प्रमुख पड़ाव स्थलों पर भी इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सके। साथ ही उन्होंने आपदा प्रबंधन में आधुनिक तकनीकों, विशेषकर एआई/एमएल के अधिकाधिक उपयोग को प्रोत्साहित करने की बात कही तथा इस क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए स्टार्टअप्स को अवसर देने का सुझाव दिया। संचार व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने हेतु उन्होंने कम्युनिकेशन ऑन व्हील्स जैसी मोबाइल संचार तकनीकों के उपयोग पर विशेष जोर दिया, जिससे दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में भी निर्बाध संचार सुनिश्चित किया जा सके।

तैयारियों को परखने का माध्यम है माॅक अभ्यास

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि चारधाम यात्रा के दृष्टिगत आयोजित यह माॅक अभ्यास हमारी तैयारियों को परखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। निरंतर माॅक ड्रिल्स एवं टेबल टाॅप एक्सरसाइज के माध्यम से हम अपनी संस्थागत एवं फील्ड स्तर की क्षमताओं को सुदृढ़ कर रहे हैं। विगत वर्षों में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मार्गदर्शन में आयोजित इन अभ्यासों से हमें वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप अपनी रणनीतियों को बेहतर बनाने का अवसर मिला है। इनसे विभिन्न विभागों के बीच समन्वयए त्वरित निर्णय क्षमता एवं संसाधनों के प्रभावी उपयोग में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। हमारा प्रयास है कि चारधाम यात्रा को पूर्णतः सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं निर्विघ्न बनाया जाए। इसके लिए माइक्रो लेवल पर तैयारी, जोखिमों की पूर्व पहचान एवं समयबद्ध प्रतिक्रिया अत्यंत आवश्यक है, जिसमें ऐसे अभ्यास महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

काल्पनिक परिदृश्यों से परखी तैयारियां

टेबल टाॅप एक्सरसाइज के दौरान लीड कंसलटेंट मेजर जनरल सुधीर बहल एवं अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (क्रियान्वयन) डीआईजी राजकुमार नेगी द्वारा जनपदों की चारधाम यात्रा को लेकर तैयारियों को काल्पनिक आपदा परिदृश्यों के आधार पर परखा गया। इस दौरान यह आकलन किया गया कि सूचना प्राप्त होते ही प्रथम प्रतिक्रिया कितनी शीघ्र एवं प्रभावी ढंग से दी गई तथा उपलब्ध संसाधनों का प्रबंधन किस प्रकार किया गया। अभ्यास के दौरान विभिन्न विभागों के मध्य समन्वय, कमांड एवं कंट्रोल सिस्टम की प्रभावशीलता, संचार तंत्र की सक्रियता तथा सूचना के आदान-प्रदान की गति पर विशेष ध्यान दिया गया। यह भी परखा गया कि आपदा की स्थिति में जिला प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य, परिवहन एवं अन्य रेखीय विभाग किस प्रकार एकीकृत रूप से कार्य करते हैं और आपसी तालमेल के माध्यम से राहत एवं बचाव कार्यों को किस स्तर तक प्रभावी बनाते हैं।


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