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मुख्यमंत्री धामी ने विभिन्न विधानसभाओं से संबंधित मुख्यमंत्री घोषणाओं की समीक्षा की

Category Archives: उत्तराखंड

मुख्यमंत्री धामी ने विभिन्न विधानसभाओं से संबंधित मुख्यमंत्री घोषणाओं की समीक्षा की

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को नैनीताल एवं ऊधमसिंहनगर जनपद की विभिन्न विधानसभाओं से संबंधित मुख्यमंत्री घोषणाओं की समीक्षा की।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाई गई समस्याओं को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए उनका त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विधायकगण अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को शासन तक पहुंचाते हैं, इसलिए उन पर गंभीरता से कार्यवाही करना शासन व प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने निर्देश दिए कि अल्पकालिक प्रकृति के कार्यों को शीघ्र पूर्ण किया जाए, जबकि दीर्घकालिक योजनाओं को निर्धारित समयसीमा के अंतर्गत चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। कार्यों की प्रगति में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि ऐसी योजनायें, जिनमें एक से अधिक विभागों की सहभागिता है, उनके प्रभावी क्रियान्वयन हेतु विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। उन्होंने कहा कि इन कार्यों की मुख्य सचिव स्तर पर नियमित समीक्षा की जाए, ताकि परियोजनाओं में अनावश्यक विलंब न हो और समय पर उनका क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जन समस्याओं के समाधान हेतु अधिकारी विधायकगणों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखें। इससे न केवल समस्याओं की सही जानकारी प्राप्त होगी, बल्कि उनके समाधान में भी तेजी आएगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर तालमेल से विकास कार्यों में गुणवत्ता और प्रगति दोनों सुनिश्चित हो सकेंगी। बैठक में मुख्यमंत्री ने आगामी वर्षाकाल को ध्यान में रखते हुए आवश्यक तैयारियों पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि बरसात से पूर्व सभी बरसाती नालों की सफाई, सिल्ट हटाने तथा जल निकासी से संबंधित अन्य आवश्यक कार्य समय रहते पूर्ण कर लिए जाएं, ताकि जलभराव और बाढ़ जैसी समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके। मुख्यमंत्री ने ग्रीष्मकाल में संभावित वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वनाग्नि की रोकथाम के लिए विभागों के बीच समन्वय के साथ-साथ जनजागरूकता पर भी ध्यान दिया जाए।

मुख्यमंत्री ने पेयजल एवं विद्युत आपूर्ति को लेकर भी अधिकारियों को निर्देश दिए कि गर्मी के मौसम में किसी भी प्रकार की कठिनाई न हो इसका ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में निर्बाध जल और बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

बैठक के दौरान विधायकगणों द्वारा अपने-अपने क्षेत्रों से संबंधित विभिन्न समस्याएं रखी गईं, जिनमें सड़क निर्माण एवं मरम्मत, स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ीकरण, मिनी खेल मैदानों का निर्माण, जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा, बाढ़ सुरक्षा कार्य, जलभराव की समस्या सहित अन्य स्थानीय मुद्दे शामिल थे। मुख्यमंत्री ने इन सभी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक समस्या का समयबद्ध एवं प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और सभी विभाग उत्तरदायित्व के साथ कार्य करें।

बैठक में कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा, राम सिंह कैड़ा, बंशीधर भगत, दीवान सिंह बिष्ट, त्रिलोक सिंह चीमा, शिव अरोड़ा, श्रीमती सरिता आर्य, डॉ. मोहन सिंह बिष्ट, मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिवगण, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, वर्चुअल माध्यम से कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत एवं संबंधित जिलाधिकारी उपस्थित थे।


स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने ‘आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन’ को बताया डिजिटल हेल्थ क्रांति का आधार

देहरादून। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन उत्तराखंड द्वारा आयोजित ABDM-Uttarakhand कार्यशाला में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल बतौर मुख्य अतिथि सम्मिलित हुए और कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त किए।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा “नए भारत की नई उड़ान” के तहत शुरू किया गया ‘आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन’ आज देश में डिजिटल हेल्थ क्रांति का आधार बन चुका है। यह मिशन स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

उन्होंने कहा कि देशभर में ABDM के अंतर्गत अब तक 50 करोड़ से अधिक आभा आईडी बनाई जा चुकी हैं तथा लाखों स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़े जा चुके हैं। कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे राज्य इस मिशन के सफल क्रियान्वयन में अग्रणी हैं।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में भी इस दिशा में तेजी से प्रगति हो रही है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) एवं ABDM डैशबोर्ड के अनुसार राज्य में लाखों नागरिकों की आभा आईडी बनाई जा चुकी है तथा बड़ी संख्या में सरकारी एवं निजी स्वास्थ्य संस्थान डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़े जा चुके हैं। विशेष रूप से पर्वतीय एवं दुर्गम क्षेत्रों में टेलीमेडिसिन सेवाओं के माध्यम से मरीजों को घर बैठे विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श मिल रहा है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

उन्होंने प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि वे आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन से जुड़कर अपनी आभा आईडी अवश्य बनाएं और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को अपनाएं। इसके माध्यम से नागरिक अपनी स्वास्थ्य जानकारी को सुरक्षित रूप से संग्रहीत कर सकते हैं, ऑनलाइन परामर्श प्राप्त कर सकते हैं तथा देशभर के अस्पतालों और चिकित्सकों से कहीं भी, कभी भी जुड़ सकते हैं।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि यह पहल उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध हो रही है, जहाँ अब दूरी और संसाधनों की सीमाएं स्वास्थ्य सेवाओं में बाधा नहीं बनेंगी। डिजिटल माध्यम से स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यापक पहुँच सुनिश्चित करते हुए यह मिशन एक सशक्त, समावेशी एवं आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जो “विकसित भारत” के संकल्प को नई गति प्रदान करता है।


शिक्षा सभी के लिए जरूरी है, लेकिन बेटियों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देना चाहिए- रेखा आर्या

पीएम श्री शहीद कैप्टन बहादुर कैड़ा अटल उत्कर्ष गवर्नमेंट इंटर कॉलेज में आयोजित वार्षिकोत्सव में शामिल हुईं कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या, छात्र-छात्राओं को किया प्रेरित

सलौज/अल्मोड़ा। अल्मोड़ा के सलौंज स्थित पीएम श्री शहीद कैप्टन बहादुर कैड़ा अटल उत्कर्ष गवर्नमेंट इंटर कॉलेज में आयोजित वार्षिकोत्सव एवं पुरातन छात्र सम्मेलन कार्यक्रम में प्रदेश की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिन्हें दर्शकों ने सराहा।

इस मौके पर मंत्री ने कहा कि शिक्षा सभी के लिए जरूरी है, लेकिन बेटियों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि विद्यालय से शिक्षित होकर निकलने के बाद समाज सेवा का भाव बनाए रखें।

उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में सरकार ने नारी शक्ति वंदन बिल पारित कर महत्वपूर्ण कदम उठाया है और इसे लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने विद्यालय में 10,000 लीटर क्षमता के पेयजल टैंक निर्माण के लिए ₹3 लाख और 100 कुर्सियों व अन्य फर्नीचर के लिए ₹2 लाख विधायक निधि से देने की घोषणा की।

इस अवसर पर सुंदर सिंह राणा, राजेंद्र कैड़ा, भुवन जोशी, कृष्णा भंडारी, सुनील कुमार, कृष्ण कुमार, भीमराम, उमा वर्मा, हेमा पांडे, कमल कैड़ा, अनिल राणा, विवेक, हिमांशु मैनाली, खड़क सिंह नेगी, दिलीप रौतेला, मोहन सिंह, बहादुर सिंह बिष्ट, पंकज बजेली, वंदना आर्या सहित अन्य लोग मौजूद रहे।


मुख्यमंत्री धामी ने वरिष्ठ पत्रकार भास्कर पोखरियाल के निधन पर जताया शोक

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वरिष्ठ पत्रकार भास्कर पोखरियाल के निधन पर शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्गीय पोखरियाल का सरल स्वभाव और पत्रकारिता के प्रति समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा।

मुख्यमंत्री व पूर्व सीएम निशंक ने दिवंगत आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिजनों को यह असीम दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है।

महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी ने भी वरिष्ठ पत्रकार भास्कर पोखरियाल के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त की है।


मुख्यमंत्री धामी ने किया श्रमिक सेवा मोबाइल एप का लोकार्पण

पलायन रोकने के लिए श्रमिकों को मिले कौशल प्रशिक्षण

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा विकसित श्रमिक सेवा मोबाइल एप का लोकापर्ण करने के साथ ही 8005 श्रमिकों के खाते में 17 करोड़ से अधिक राशि का डीबीटी के माध्यम से हस्तातंरण किया।

मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बोर्ड को अधिक से अधिक श्रमिकों तक पहुंचने के निर्देश दिए। उन्होने कहा कि, अनुदान वितरण में पारदर्शिता बरते जाने के क्रम में ऑफलाईन अनुदान वितरण बन्द कर ऑनलाईन निस्तारण एवं डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के खातों में धनराशि का हस्तांतरण किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के जरिए अब तक 11828 लाभार्थियों को कुल 29.89 करोड़ की धनराशि वितरित की जा चुकी है। आज 8005 लाभार्थियों को कुल 17.25 करोड़ की धनराशि वितरित की जा रही है। इस प्रकार विगत 06 माह में अब तक कुल 19833 लाभार्थियों को 47.14 करोड़ की धनराशि वितरित की जा चुकी है।

मुख्यमंत्री ने बोर्ड के अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रमिकों एवं उनके आश्रितों के कौशल प्रशिक्षण पर ध्यान दिया जाए, खासकर पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने के लिए स्थानीय श्रमिकों को पलम्बर, इलैक्ट्रिशियन, मिस्त्री, कारपेन्टर आदि क्षेत्रों में कौशल प्रदान किया जाए। इसी तरह योगा एंव वेलनेस में रोजगार की सम्भावना को देखते हुए आगामी सत्र में श्रमिकों के बच्चों को योग एवं वेलनेस में निःशुल्क प्रशिक्षण प्रदान किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बोर्ड निर्माण श्रमिकों एवं उनके आश्रितों को कौशल प्रशिक्षण उपरान्त विदेश में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए भी प्रयास करे। इसके लिए विदेश मंत्रालय भारत सरकार में पंजीकृत एजेन्सी के माध्यम कार्यवाही की जाए। साथ ही श्रमिकों को पीएम स्वनिधि योजना से जोड़ने और उनका समय- समय पर स्वास्थ्य परीक्षण पर भी ध्यान दिया जाए। इस हेतू श्रमिकों के कार्य स्थल पर ही चिकित्सा परीक्षण की व्यवस्था की जाए, ताकि उनके रोजगार में व्यवधान उपलब्ध न हो।

इस मौके पर श्रमायुक्त पीसी दुम्का ने बताया कि UKLCCMS Portal पोर्टल के माध्यम से अब तक 16000 अधिष्ठानों का पंजीकरण हो चुका है, जिसके जरिए शुल्क के रूप में 80,00000.00 (रूपये अस्सी लाख मात्र) धनराशि जमा हो चुकी है, साथ ही बोर्ड के पास अब तक कुल 324 करोड़ की धनराशि सेस के रूप में जमा हो चुकी है। जिसे श्रमिकों के कल्याण में उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि निर्माण श्रमिकों के बीच सामग्री वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था की जा रही है। जिससे लाभार्थियों का लाईव फोटो एवं जियो ट्रेकिंग द्वारा सामग्री वितरण सुनिश्चित किया जायेगा। इस मौके पर उपायुक्त विपिन कुमार सहित बोर्ड के अन्य अधिकारी उपस्थित हुए।


मुख्यमंत्री धामी ने कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग में चयनित 12 अभ्यर्थियों को सौंपे नियुक्ति पत्र

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग के अंतर्गत मानचित्रक के पद पर चयनित 12 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी चयनित अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी नियुक्ति कृषि व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सभी अभ्यर्थी अपने कार्यक्षेत्र में पूरी ईमानदारी और लगन से कार्य करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए राज्य में सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया है। इस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के बाद प्रदेश में अब तक 30 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि यह सरकार की युवाओं के प्रति प्रतिबद्धता और सुशासन का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है, साथ ही मिलेट के उत्पादन और विपणन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार तथा फसल विविधीकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त राज्य में सेब, कीवी, बागवानी एवं औषधीय पौधों की खेती को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य कृषि को लाभकारी और युवाओं के लिए आकर्षक बनाना है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस क्षेत्र से जुड़ सकें।

कार्यक्रम में कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी, सचिव कृषि एस.एन. पाण्डेय, अपर सचिव आनंद श्रीवास्तव एवं कृषि विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।


चारधाम यात्रा 2026- श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता, सीएम धामी ने दिए कड़े निर्देश

चारधाम यात्रा में AI निगरानी और स्लॉट सिस्टम से होगा भीड़ नियंत्रण

देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड की जीवनरेखा चारधाम यात्रा-2026 को लेकर सरकार ने इस बार सख्त और व्यापक तैयारी का खाका तैयार किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया कि यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित, स्वच्छ और तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के लिए हर स्तर पर जिम्मेदारी तय की जाएगी और श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।

सचिवालय स्थित वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली सभागार में चारधाम यात्रा-2026 की तैयारियों को लेकर आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि यात्रा प्रबंधन में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो। उन्होंने कहा कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा व्यक्तिगत जिम्मेदारी के रूप में सुनिश्चित की जाए।

हेली सेवाओं के संचालन में सख्ती बरतते हुए नियमित मेंटेनेंस और फिटनेस जांच अनिवार्य करने के निर्देश दिए गए। ओवरलोडिंग से बचने और संचालन को सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया। भीड़ नियंत्रण के लिए स्लॉट सिस्टम और रियल-टाइम डिजिटल मॉनिटरिंग लागू करने के साथ यात्रा मार्गों पर CCTV और AI आधारित निगरानी प्रणाली को भी मजबूत किया जाएगा।

ग्रीन- क्लीन अभियान, ओवररेटिंग पर सख्ती और अफवाह पर FIR
मुख्यमंत्री ने ‘ग्रीन एवं क्लीन चारधाम यात्रा’ अभियान को और प्रभावी बनाने के निर्देश देते हुए प्लास्टिक मुक्त यात्रा सुनिश्चित करने पर जोर दिया। यात्रा मार्गों पर कलेक्शन बॉक्स लगाए जाएंगे और प्लास्टिक के उपयोग पर सख्त नियंत्रण किया जाएगा।

यात्रा को लेकर किसी भी प्रकार की भ्रामक खबर या अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज कर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
ओवररेटिंग रोकने के लिए सभी दुकानों पर रेट लिस्ट अनिवार्य होगी। स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करते हुए मेडिकल यूनिट, अस्थायी अस्पताल, पेयजल, शौचालय और शेल्टर की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।

ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए सख्त ट्रैफिक प्लान और वैकल्पिक मार्ग तैयार किए जाएंगे। आपदा प्रबंधन के तहत SDRF और NDRF को अलर्ट मोड में रखते हुए 24×7 कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन के माध्यम से त्वरित रिस्पांस सुनिश्चित किया जाएगा।


उत्तराखण्ड के अति-दुर्गम क्षेत्रों में हेली सेवाओं से सुरक्षित मातृत्व को नई गति

फील्ड से सीधे संवाद के साथ सख्त मॉनिटरिंग, होम डिलीवरी पर पूर्ण रोक के निर्देश

“हर गर्भवती महिला तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी”—सचिन कुर्वे

देहरादून।  राज्य में मातृ एवं नवजात मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी को और सख्त करते हुए एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में देहरादून और चम्पावत जनपदों की स्वास्थ्य सेवाओं की गहन समीक्षा की गई। बैठक की विशेषता यह रही कि फील्ड स्तर की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए दोनों जनपदों की एएनएम ने सीधे जुड़कर जमीनी चुनौतियों और प्रगति से अधिकारियों को अवगत कराया। बैठक के दौरान सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने स्पष्ट कहा कि अब स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन में केवल प्रक्रिया नहीं बल्कि ठोस परिणाम दिखाई देने चाहिए। उन्होंने दोहराया कि अप्रैल माह से राज्य में किसी भी स्तर पर होम डिलीवरी स्वीकार्य नहीं होगी और प्रत्येक गर्भवती महिला तक समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना सभी स्वास्थ्य कर्मियों की जिम्मेदारी है।

EDD आधारित माइक्रो ट्रैकिंग पर जोर

समीक्षा बैठक में निर्देश दिया गया कि प्रत्येक गर्भवती महिला की अपेक्षित प्रसव तिथि (EDD) के आधार पर माइक्रो ट्रैकिंग अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने कहा कि एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं के बीच दैनिक समन्वय के माध्यम से अंतिम मील तक फॉलो-अप सुनिश्चित किया जाए ताकि किसी भी गर्भवती महिला की देखभाल में कोई कमी न रह जाए। इसके साथ ही चिन्हित होम डिलीवरी पॉकेट्स में मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को स्वयं फील्ड विजिट कर समाधान आधारित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

अतिदुर्गम क्षेत्रों में हेली सेवाओं का प्रभावी उपयोग

बैठक में पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित परिवहन की चुनौती पर विशेष चर्चा की गई। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने निर्देश दिए कि दुर्गम क्षेत्रों में समय से पूर्व योजना बनाकर गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव के लिए सुरक्षित परिवहन उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में सड़क संपर्क या समय पर परिवहन संभव नहीं है, वहां हेली सेवाओं का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए ताकि किसी भी आपात स्थिति में गर्भवती महिला को तत्काल स्वास्थ्य संस्थान तक पहुंचाया जा सके।

ANC जांच और हाई रिस्क प्रेगनेंसी की पहचान पर फोकस

बैठक के दौरान गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांच (ANC) को मातृ मृत्यु दर में कमी का सबसे महत्वपूर्ण आधार बताया गया। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने निर्देश दिए कि प्रत्येक गर्भवती महिला का प्रथम तिमाही में पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए और न्यूनतम चार ANC जांच अनिवार्य रूप से कराई जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यक लैब परीक्षण समय पर किए जाएं और उच्च जोखिम गर्भावस्था (HRP) की समय पर पहचान की जाए। कई क्षेत्रों में HRP की कम पहचान पर चिंता व्यक्त करते हुए सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने इसमें तत्काल सुधार के निर्देश दिए।

एनीमिया नियंत्रण और सामुदायिक जागरूकता

बैठक में गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की समस्या पर भी विस्तार से चर्चा हुई। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने निर्देश दिए कि प्रत्येक गर्भवती महिला की नियमित ट्रैकिंग और फॉलो-अप सुनिश्चित किया जाए। विशेष रूप से गंभीर एनीमिया के मामलों में समयबद्ध उपचार और चिकित्सकीय हस्तक्षेप को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। साथ ही सामुदायिक स्तर पर व्यवहार परिवर्तन के लिए आशा और एएनएम को “संवाद से समाधान” की रणनीति अपनाने के लिए कहा गया, ताकि परिवारों को संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित किया जा सके।

टीबी उन्मूलन अभियान को भी गति

बैठक में टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की प्रगति की भी समीक्षा की गई। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने निर्देश दिए कि 100-दिवसीय टीबी अभियान के अंतर्गत हाई रिस्क क्षेत्रों को प्राथमिकता के साथ कवर किया जाए। उन्होंने कहा कि आयुष्मान आरोग्य स्वास्थ्य शिविरों में अधिकतम टीबी स्क्रीनिंग सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही सभी चिकित्सालयों की कुल ओपीडी का न्यूनतम 10 प्रतिशत टीबी स्क्रीनिंग के लिए रेफर करने के निर्देश भी दिए गए।

PCPNDT अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई

बैठक में PCPNDT अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया गया। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने निर्देश दिए कि प्रत्येक जनपद में नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएं और सरकारी तथा निजी स्वास्थ्य संस्थानों का समयबद्ध निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए। अवैध लिंग निर्धारण गतिविधियों पर कठोर कार्रवाई करते हुए डिकॉय ऑपरेशन और जन-जागरूकता अभियानों को और अधिक मजबूत करने के निर्देश भी दिए गए।

सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता- सचिन कुर्वे

सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने कहा कि राज्य में सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गर्भवती महिला तक समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना स्वास्थ्य तंत्र की सामूहिक जिम्मेदारी है। विशेष रूप से दुर्गम क्षेत्रों में हेली सेवाओं, समयबद्ध परिवहन और मजबूत फील्ड मॉनिटरिंग के माध्यम से मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। उन्होंने सभी जिलों को निर्देश दिए कि परिणाम आधारित कार्ययोजना बनाकर उसे तत्काल प्रभाव से लागू करें और किसी भी स्तर पर लापरवाही को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बैठक में निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. रश्मि पंत, सहायक निदेशक डॉ. अमलेश, सहायक निदेशक डॉ. उमा रावत, सहायक निदेशक डॉ. अजय नागरकर, संबंधित जनपदों के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिवेश चौहान एवं डॉ. मनोज शर्मा तथा वरिष्ठ कंसल्टेंट डॉ. नितिन अरोड़ा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।


धामी सरकार की पहल, ऐतिहासिक किपलिंग ट्रैक का होगा कायाकल्प, मसूरी को मिलेगा नया शांत पर्यटन मार्ग

प्रकृति के बीच सुकून भरा सफर देगा किपलिंग ट्रैक- बंशीधर तिवारी

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में राज्य में पर्यटन अवसंरचना को सुदृढ़ बनाने की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में देहरादून से मसूरी को जोड़ने वाले ऐतिहासिक किपलिंग ट्रैक के पुनरोद्धार की महत्वाकांक्षी योजना को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा लगभग 498.14 लाख रुपये की लागत से 3.50 किलोमीटर लंबे इस ऐतिहासिक ट्रैक का व्यापक विकास किया जा रहा है।

यह ट्रैक शहनसाही आश्रम से झड़ीपानी तक फैला हुआ है और प्राकृतिक सौंदर्य, शांत वातावरण तथा पहाड़ी दृश्यों के कारण लंबे समय से पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। आधुनिक सड़क मार्गों पर बढ़ती भीड़ और वाहनों के शोर के बीच यह ट्रैक एक ऐसे वैकल्पिक पर्यटन मार्ग के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां पर्यटक प्रकृति के करीब शांत और सुकून भरा अनुभव प्राप्त कर सकेंगे।

राज्य सरकार की मंशा है कि मसूरी क्षेत्र में पर्यटन को केवल सड़क आधारित यात्रा तक सीमित न रखकर प्रकृति आधारित पर्यटन को भी बढ़ावा दिया जाए। इसी सोच के साथ किपलिंग ट्रैक के संरक्षण और विकास की योजना तैयार की गई है, ताकि आने वाले समय में यह मार्ग पर्यटकों के लिए एक अनूठा और आकर्षक अनुभव बन सके।

प्राकृतिक सौंदर्य के बीच विकसित होगा ट्रैक

एमडीडीए द्वारा इस परियोजना के अंतर्गत ट्रैक के संरक्षण, मरम्मत और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कई स्थानों पर रिटेनिंग वॉल का निर्माण किया जाएगा, जिससे ट्रैक सुरक्षित और टिकाऊ बन सके। साथ ही ट्रैक के किनारों पर मजबूत रेलिंग लगाई जाएंगी, ताकि पर्यटक सुरक्षित रूप से इस मार्ग पर भ्रमण कर सकें। इस मार्ग को पैदल यात्रियों के लिए सुविधाजनक और सुरक्षित बनाने के लिए रास्ते को समतल और व्यवस्थित भी किया जाएगा।

पर्यटकों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

किपलिंग ट्रैक के विकास में केवल संरचनात्मक कार्य ही नहीं बल्कि पर्यटकों की सुविधाओं का भी विशेष ध्यान रखा गया है। परियोजना के अंतर्गत ट्रैक के विभिन्न स्थानों पर विश्राम स्थल विकसित किए जाएंगे, जहां आकर्षक गज़ीबो (Gazebo) बनाए जाएंगे। इन स्थानों पर बैठकर पर्यटक आसपास के पर्वतीय दृश्यों, हरियाली और प्राकृतिक वातावरण का आनंद ले सकेंगे। इसके अतिरिक्त ट्रैक पर सेल्फी प्वाइंट, कैंटीन कियोस्क, स्वच्छ पेयजल व्यवस्था, शौचालय, कूड़ेदान और आधुनिक लैंप पोस्ट जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इन व्यवस्थाओं से न केवल पर्यटकों को सुविधा मिलेगी बल्कि ट्रैक को एक सुव्यवस्थित और आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में पहचान भी मिलेगी।

पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर

इस परियोजना की खास बात यह है कि इसके विकास में पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता को प्राथमिकता दी जा रही है। ट्रैक के आसपास व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण किया जाएगा, जिससे क्षेत्र की हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता और अधिक बढ़ेगी।

इसके अलावा पक्षियों के संरक्षण के लिए बर्ड हाउस भी बनाए जाएंगे, जिससे इस क्षेत्र में पक्षियों की उपस्थिति बढ़ेगी और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी।
सरकार का उद्देश्य है कि पर्यटन विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन भी कायम रहे और आने वाली पीढ़ियों के लिए यह प्राकृतिक धरोहर सुरक्षित रह सके।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल

किपलिंग ट्रैक के विकास से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलने की संभावना है। इससे स्थानीय व्यापारियों, गाइड्स, होमस्टे संचालकों और छोटे व्यवसायों को सीधा लाभ मिलेगा। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से आसपास के क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। स्थानीय युवाओं को पर्यटन से जुड़े कार्यों में रोजगार मिलने से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। राज्य सरकार की यह पहल सतत पर्यटन विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

प्रकृति के बीच नया अनुभव देगा किपलिंग ट्रैक- बंशीधर तिवारी

मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि किपलिंग ट्रैक का पुनरोद्धार राज्य के पर्यटन विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में प्रदेश में ऐसे पर्यटन स्थलों को विकसित किया जा रहा है, जो प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर पर्यटकों को अलग अनुभव प्रदान करें। उन्होंने बताया कि देहरादून से मसूरी जाने वाले पारंपरिक सड़क मार्गों पर अक्सर भीड़भाड़ रहती है, जिससे पर्यटकों को शोर और ट्रैफिक का सामना करना पड़ता है। किपलिंग ट्रैक के विकसित होने से पर्यटकों को एक वैकल्पिक और शांत मार्ग मिलेगा, जहां वे पैदल चलते हुए प्रकृति की गोद में समय बिता सकेंगे। बंशीधर तिवारी ने कहा कि इस ट्रैक पर विकसित की जा रही सुविधाएं इसे एक सुरक्षित, आकर्षक और व्यवस्थित पर्यटन मार्ग के रूप में स्थापित करेंगी। यहां आने वाले पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य, पर्वतीय दृश्यों और शांत वातावरण का आनंद लेते हुए एक अलग अनुभव प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि परियोजना पूरी होने के बाद यह ट्रैक न केवल पर्यटकों बल्कि स्थानीय लोगों के लिए भी एक बेहतर मनोरंजन और प्रकृति से जुड़ने का स्थान बन जाएगा।

प्रकृति के अनुकूल तैयार हो रही परियोजना- मोहन सिंह बर्निया

मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने बताया कि किपलिंग ट्रैक के विकास की पूरी योजना प्रकृति के अनुकूल डिजाइन की गई है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में इस बात का विशेष ध्यान रखा जा रहा है कि क्षेत्र की प्राकृतिक संरचना और जैव विविधता पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। उन्होंने बताया कि ट्रैक के आसपास वृक्षारोपण, बर्ड हाउस और स्वच्छता व्यवस्था जैसी पहलें इस परियोजना को एक पर्यावरण अनुकूल पर्यटन मॉडल बनाएंगी। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश भी मजबूत होगा।


ऋषिकेश में राफ्टिंग का नया नियम: पर्यटकों की सुरक्षा के लिए फेरों की संख्या सीमित

ऋषिकेश। देशभर में राफ्टिंग के लिए विख्यात ऋषिकेश में पर्यटन विभाग पर्यटकों की सुरक्षा के मद्देनजर राफ्टिंग संचालन में नया नियम लागू करने जा रहा है।

नई व्यवस्था के तहत अब टिहरी जिले के मरीन ड्राइव व शिवपुरी से संचालित होने वाली राफ्ट एक दिन में तीन से अधिक फेरे नहीं लगा सकेंगी।

हालांकि, छोटे रूट पर फेरे की अधिकतम संख्या चार तय की गई हैं। यह नई व्यवस्था अगले सप्ताह से लागू होगी।

ऋषिकेश में राफ्टिंग का बढ़ रहा क्रेज लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में अधिक मुनाफा कमाने की चाह में कई राफ्टिंग गाइड व कंपनियां एक राफ्ट से चार से पांच फेरे लगाने का प्रयास करते हैं।

जिससे अंतिम फेरे की राफ्टिंग शाम ढलने के दौरान भी संचालित की जाती है, जो कि पर्यटकों की सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ माना जा सकता है।

वहीं, राफ्टिंग के अंतिम फेरों में गाइड थकावट भी महसूस करते हैं। इससे रैपिड में राफ्ट पलटने या अन्य आपात स्थिति में कई बार गाइड बड़ा रेस्क्यू करने में कठिनाइयों का सामना करते हैं, जिससे राफ्टिंग दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है।

  • पिछले तीन वर्षों में ऋषिकेश में गंगा राफ्टिंग के दौरान कई दुर्घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं।

इन दुर्घटनाओं से सबक लेते हुए अब पर्यटन विभाग के अधीन राफ्टिंग एवं साहसिक खेल अधिकारी जसपाल चौहान ने अधिक लंबे रूट पर राफ्ट संचालन में फेरों की संख्या अधिकतम तीन निर्धारित करने का निर्णय लिया है।

अब इसे लागू करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। अगले सप्ताह से नई व्यवस्था को पूर्ण रूप से लागू कर दिया जाएगा।

यह होगी नई व्यवस्था

राफ्टिंग एवं साहसिक खेल अधिकारी जसपाल चौहान के अनुसार, ऋषिकेश में राफ्टिंग का सबसे लंबा रूट मरीन ड्राइव-खारास्रोत (24 किलोमीटर) है, जिसे पूरा करने में औसतन साढ़े 3 घंटे का समय लगता है।

जबकि, दूसरा लंबा रूट शिवपुरी-खारास्रोत (18 किलोमीटर) है, जिसमें करीब ढाई घंटे लगते हैं।

इन दो सर्वाधिक लंबे रूटों पर ही तीन फेरे का नियम लागू रहेगा। इनके अलावा ब्रह्मपुरी-खारास्रोत व अन्य छोटे रूटों पर अधिकतम चार फेरे लगाए जा सकेंगे।

वहीं, नई व्यवस्था के तहत राफ्टिंग एवं साहसिक खेल विभाग द्वारा मरीन ड्राइव, शिवपुरी, ब्रह्मपुरी में स्थित विभागीय राफ्टिंग केंद्र में प्रत्येक राफ्ट का रिकार्ड दर्ज किया जाएगा।

लंबे व अन्य रूटों पर अधिकतम फेरे पूरे होने के बाद राफ्ट को गंगा में प्रवेश करने नहीं दिया जाएगा।

विभाग द्वारा अगले सप्ताह से लागू हो रही यह व्यवस्था में शुरुआती समय में आफलाइन मोड पर संचालित होगी, लेकिन विभाग अब सभी केंद्रों में राफ्टों के फेरों की प्रभावी निगरानी व अनियमितताएं रोकने के लिए साफ्टवेयर प्रणाली विकसित करने में जुट गया है।


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